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	<title>Shani Jayanti &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शनि ग्रह बना देता है रंक को राजा और राजा को रंक : शनि जयंती 16 मई शनिवार को मनाई जाएगी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 May 2026 12:00:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शनि ग्रह को न्याय का देवता माना गया है। शनि देव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुरूप परिणाम देते हैं। वे राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति रखते हैं। इस वर्ष शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। शनि ग्रह को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शनि ग्रह को न्याय का देवता माना गया है। शनि देव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुरूप परिणाम देते हैं। वे राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति रखते हैं। इस वर्ष शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शनि ग्रह को न्याय का देवता माना गया है। शनि देव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुरूप परिणाम देते हैं। वे राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति रखते हैं। इस वर्ष शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। सभी ग्रहों में शनि ग्रह के नाम से हर कोई अपने जीवन में परिचित हो जाता है। इसके नाम से ही लोग कांपने लगते हैं। कहते हैं शनि ग्रह यदि जन्म कुंडली या हस्त रेखा में अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति को रंक से राजा बना देता है और इसकी टेढ़ी चाल हो, कुंडली में खराब स्थिति में हो तो राजा से रंक भी बना देता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार इस समय शनि मीन राशि में गोचर पर होने से कुंभ राशि, मीन राशि एवं मेष राशि पर शनि की साढ़े साती चल रही है और सिंह राशि, धनु राशि वालों को शनि की ढैया लगी हुई है। शनि ग्रह की चाल अन्य सभी ग्रहों से अति धीमी रहती है। यह एक राशि में ढाई वर्ष रहता है। अगर व्यक्ति 90 वर्षों तक जीवित रहता है, तो शनि की साढ़े साती तीन बार ही आती है। शनि ग्रह व्यक्ति के कर्म फल का हिसाब किताब भी साफ करके जाता है। यदि व्यक्ति ने नेक काम किया है तो उसे सुख, शांति, समृद्धि, यश, कीर्ति सभी कुछ देता है और यदि व्यक्ति अशुभ कार्य करता है तो वह नाना प्रकार के दुःख, कष्ट, बंधन, जेल आदि कराकर व्यक्ति की बुरी हालत करता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर होने वाली शनि जयंती इस बार 16 मई को है। इस दिन शनिवार होने के कारण एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ ‘शनिश्चरी अमावस्या’ का संयोग बना रही है।</p>
<p><strong>यह दिन कर्मफल दाता शनिदेव की आराधना के लिए सर्वाेत्तम</strong></p>
<p>इस दिन जिनका शनि साढ़े साती, ढैया या महादशा अंतर्दशा चल रही है और शनि खराब फल दे रहे हैं तो शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों का तेल चढ़ाना, दान करना और पूजा करना साढ़ेसाती व ढैय्या के कष्टों को कम करता है। इस बार शनि जयंती 16 मई शनिवार अमावस्या तिथि को है। अमावस्या तिथि का आरंभ 16 मई को सुबह 5.11 बजे से है और अमावस्या तिथि का समापन 17 मई को रात्रि 1.30 बजे पर होगा। यह दिन कर्मफल दाता शनि देव की आराधना के लिए सर्वाेत्तम माना जाता है। ’शनि जयंती पर पूजा और उपाय’ सरसों का तेल, काला कपड़ा, उड़द की दाल, काले तिल, लोहे की वस्तुएं दान करें।</p>
<p>’मंत्र जाप’ ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए शनि चालीसा का पाठ करें।</p>
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		<title>शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत 6 जून को शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती आदि से परेशान हैं तो शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के दिन ये उपाय करें </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Jun 2024 08:30:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत गुरुवार 6 जून को मनाया जायेगा। महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु की कामना करेंगी। शनि की चाल में बदलाव होता है, तो कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होती है तो कुछ राशियों पर से समाप्त होती है। वहीं जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैय्या चलती [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत गुरुवार 6 जून को मनाया जायेगा। महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु की कामना करेंगी। शनि की चाल में बदलाव होता है, तो कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होती है तो कुछ राशियों पर से समाप्त होती है। वहीं जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैय्या चलती है, उन लोगों को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शनि जयंती एवम वट सावित्री व्रत गुरुवार 6 जून को मनाया जायेगा।सभी ग्रहों में शनि ग्रह का नाम कौन नहीं जानता। शनि देव को न्याय प्रदाता और कर्मफल दाता माना गया है। शनि देव व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं इनकी दृष्टि यानी कुंडली में शुभ है तो व्यक्ति को रंक से राजा बनाने में देर नहीं करते और अशुभ हो तो राजा से रंक भी बना देते है।</p>
<p>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा कि जब भी शनि की चाल में बदलाव होता है, तो कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होती है तो कुछ राशियों पर से समाप्त होती है। वहीं जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैय्या चलती है, उन लोगों को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>इस समय कर्क और वृश्चिक राशि वालो पर शनि की ढैया और मकर, कुंभ, मीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है।</p>
<p>जैन ने कहा शनि जयंती और वट सावित्री व्रत दोनो हो 06 जून गुरुवार को है।</p>
<p>अगर आप भी शनि की महादशा , अंतर्दशा, साढ़ेसाती आदि से परेशान हैं तो शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के दिन ये उपाय कर सकते हैं। जिससे आपको शनि दोष से मुक्ति मिल सकती है।</p>
<p>पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ कच्चा सूत या फिर सफेद धागा बांधती है। इस साल शनि जयंती और वट सावित्री व्रत 6 जून गुरुवार को रखा जा रहा है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 05 जून की शाम को 07 बजकर 54 मिनट से 6 जून को शाम 06 बजकर 07 मिनट तक रहेगी।</p>
<p><strong>शनि को प्रसन्न करने करे ये उपाय</strong></p>
<p>इस दिन व्रत रखें, सरसों के तेल का दीपक शनि देव के मंदिर पर और पीपल के पेड़ के नीचे रखे। काले तिल, कपड़ा, छाता, लोहा, काले उड़द, देशी चना से बनी वस्तुओं का दान करे। शनि स्त्रोत एवम शनि मंत्र का जाप करें।</p>
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