<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>science of living कुंडलपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/science-of-living-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 01 Mar 2023 06:56:17 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>science of living कुंडलपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>साइंस ऑफ लिविंग सत्र में प्रवचन : आदत होना सही, गलत आदत होना दुर्गति का कारण &#8211; मुनि श्री निरंजन सागर जी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/having_-a_-right_-habit_-having_wrong_-habit_-is_cause_-of_-misery/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/having_-a_-right_-habit_-having_wrong_-habit_-is_cause_-of_-misery/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Mar 2023 06:56:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[History]]></category>
		<category><![CDATA[Ideal]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Kundalpur]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Niranjan Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Religion]]></category>
		<category><![CDATA[science of living कुंडलपुर]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आदर्श]]></category>
		<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री निरंजन सागर]]></category>
		<category><![CDATA[साइंस ऑफ लिविंग]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=38984</guid>

					<description><![CDATA[साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज जीवन जीने का सबका अपना-अपना तरीका है। व्यक्ति का स्वयं के मापदंडों से जीना ठीक है लेकिन मापदंड के बारे में विचारें कि वे सही हैं या गलत। पढ़िए जय कुमार जलज/राजेश रागी की विस्तृत रिपोर्ट&#8230; कुण्डलपुर। आदत के आदि होना बुरी बात नहीं, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज जीवन जीने का सबका अपना-अपना तरीका है। व्यक्ति का स्वयं के मापदंडों से जीना ठीक है लेकिन मापदंड के बारे में विचारें कि वे सही हैं या गलत। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए जय कुमार जलज/राजेश रागी की विस्तृत रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर।</strong> आदत के आदि होना बुरी बात नहीं, परंतु गलत आदत के आदी होना सही नहीं है। जीवन जीने का सभी का अपना अपना तरीका होता है, हम किसी के तरीके को गलत नहीं ठहराना चाहते हैं क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का अपना मापदंड होता है। वह स्वयं का जीवन अपने मापदंडों के हिसाब से जीता है और उसे वह सही भी मानता है। यह बात साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने कही। उदाहरण के तौर पर आप उस शराबी आदि को देख लीजिए, सभी के अपने-अपने मापदंड हैं और इसमें भी साहित्य का योगदान और मिल जाए बस फिर वो उनका कथन उनकी क्रियाओं को सही सिद्ध करने में देर नहीं लगाते।</p>
<p>एक प्रसिद्ध कवि ने लिखा है, मंदिर मस्जिद बैर कराते मेल कराती मधुशाला। हो सकता है आपको यह कविता शब्दशः याद भी हो। पर कवि का क्या उद्देश्य था और आपने क्या समझ लिया। कवि महोदय कह रहे हैं जिस प्रकार शराबी व्यक्ति एक साथ बैठकर हिल मिलकर मदिरालय में अपना आनंद मनाते हैं, उसी प्रकार क्या आप लोग देवालय में बैठकर हिल मिलकर प्रभु की भक्ति का आनंद मनाते हैं ? यह प्रश्नवाचक काव्य शैली है। हम इसका सही अर्थ भी आपको बताएंगे।</p>
<p>तो भी आप मानोगे नहीं ,क्योंकि यह कविता आपकी बात का पोषण करती है।आज प्रायः कर यह सिद्धांत बन गया है। हम उसी बात का समर्थन करते हैं जो बात हमारी बात का समर्थन करे।</p>
<p><strong>अनादि काल से है स्थित</strong></p>
<p>बड़े से बड़ा व्यक्तित्व भी आप को समझाने में अपने आप को असमर्थ पाता है। यह स्थिति वर्तमान समय में नहीं बनी बल्कि अनादि कालीन है। जब जब कोई व्यक्ति व्यसनों में लिप्त हुआ, उसने अपना सब कुछ खो दिया पर किसी की नहीं मानी। भीम ने युधिष्ठिर को कितना मना करा, उनसे कितनी अनुनय की, पर युधिष्ठिर दांव पर दांव लगाते गए और परिणाम सभी को ज्ञात है। भरी सभा में इतना बड़ा घोर अपमान हुआ। रावण को किसने नहीं समझाया कि पर स्त्री का सेवन दुर्गति का कारण है। मंदोदरी, विभीषण, कुंभकरण यहां तक कि उसके पुत्रों ने कहा पर रावण ने किसी की नहीं मानी। रावण के साथ क्या-क्या हुआ सभी को ज्ञात है। ज्ञात हो कर भी हम क्या कर रहे हैं।</p>
<p><strong>व्यसन से आती विवेकहीनता</strong></p>
<p>व्यसन की वासना कभी समाप्त हुई है क्या? और इसी व्यसन में व्यक्ति इतना तल्लीन हो जाता है कि वह विवेकहीन हो जाता है। उस वासना का सार्थक अर्थ है (वास +ना) अर्थात यहां वास नहीं करना। इन व्यसनों में जिसने वास नहीं किया, निवास नहीं किया, उसका आवास एक मंदिर की तरह पूज्य बन गया जाता है।फिर इस शरीर रूपी देवालय में बैठा आपका आत्म तत्व रूपी देवता आपको स्पष्ट दिखाई देने लगता है।</p>
<p>आपका तन मन और आत्मा रूपी धन तीनों ही तीर्थ के समान पवित्र हो जाते हैं। इसलिए साक्षी है व्यसन में लिप्त बड़े-बड़े महारथियों की किस प्रकार दुर्दशा हुई। जिसका कदम कदभृ( कीचड़ )में फंस जाता है उसे बड़े यत्न से ही निकाला जा सकता है। वरना तो कदम निकालते-निकालते ही दम निकल जाता है। यह कदम विकार से विकास की ओर बढ़े। हमारी सही लत से ही हम स्वयं का और दूसरों का कल्याण कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/having_-a_-right_-habit_-having_wrong_-habit_-is_cause_-of_-misery/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
