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	<title>satyendar jain news &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>satyendar jain news &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पंचकल्याणक : आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ चलेगा 17 से 23 फरवरी तक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Feb 2023 13:34:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीष एवं निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में होगा। निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिस रास्ते पर सज्जन लोग जाते हैं, वह रास्ता सज्जनों का [&#8230;]]]></description>
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<p>पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीष एवं निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में होगा। निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिस रास्ते पर सज्जन लोग जाते हैं, वह रास्ता सज्जनों का रास्ता होता है। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िये राजीव सिंघई मोनू की विशेष रिपोर्ट&#8230; </strong></span></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> टीकमगढ़ शहर में स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ दिनांक 17 फरवरी से 23 फरवरी तक होने जा रहा है। यह महोत्सव आचार्य विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीष एवं निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में होगा। कार्यक्रम के प्रतिष्ठाचार्य पंडित प्रदीप भैया जी सुयश होंगे। पंचकल्याणक महोत्सव के मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि मुनि श्री सुधासागर जी महाराज मंगलवार को प्रात: 8:00 बजे नंदीश्वर कॉलोनी में बने मंच पर विराजमान हुए। दीप प्रज्ज्वल एवं चित्र अनावरण का कार्य संपन्न हुआ। पात्र चयन कार्यक्रम का संचालन अमित शास्त्री जबलपुर वालों की ओर से किया गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38024" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0019-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिस रास्ते पर सज्जन लोग जाते हैं, वह रास्ता सज्जनों का रास्ता होता है, दुर्जनों के तो कई रास्ते होते हैं। आज पंचकल्याणक के पात्रों के चयन का अवसर है आप लोगों में से इस पंचकल्याणक के पात्रों का चयन होने वाला है। मुनि श्री ने कहा कि पाषाण को उठाकर मूर्ति बनने में पत्थर का पुण्य नहीं होता है। यह मूर्ति भक्तों के पुण्य उदय के कारण बनती है। पत्थर का पुण्य नहीं है कि वह मूर्ति बन जाए। जब तक हमारा पुण्य नहीं होगा पत्थर मूर्ति नहीं बन पाएगा, जो भगवान बने हुए हमारे पुण्य से बने आज हमारा पुण्य इतना प्रबल है कि हम पाषाण को भगवान बनाने जा रहे हैं।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि भगवान बनने का पुण्य अलग है। भगवान की प्रतिष्ठा नहीं भक्तों के पुण्य की प्रतिष्ठा होने जा रही है। यह किसी पत्थर पर नहीं लिखा होता किस पत्थर से भगवान बनेंगे, यह तो भक्तों की भक्ति का प्रतिफल है। आज पंचकल्याणक महा महोत्सव के पात्रों का चयन का दिन है। पंचकल्याणक महोत्सव में पात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सोमवार को भगवान के माता-पिता का चयन मुनि श्री के सानिध्य में हुआ। भगवान के माता-पिता बनने का परम सौभाग्य श्रीमती पुष्पा देवी, गुलाबचंद जैन बंधा जी वालों को प्राप्त हुआ। मंगलवार को पंचकल्याणक के पात्रों का चयन किया गया। सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य जिनेंद्र ककडारी वालों को प्राप्त हुआ, कुबेर विमल जैन , महा यज्ञ नायक रमेश चंद्र जैन, भरत चक्रवर्ती एवं बाहुबली बनने का सौभाग्य संजय जैन एवं राजीव जैन को प्राप्त हुआ, ईशान इंद्र बनने का सौभाग्य अशोक जैन सानत इंद्र बाल चंद जैन, माहेंद्र शील चंद जैन, राजा श्रेयांश बनने का सौभाग्य लुईस चौधरी, राजा सोम बनने का सौभाग्य विमल जैन मूलनायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का सौभाग्य राजकुमार जैन यज्ञ नायक एवं विधि नायक बनने का सौभाग्य राजीव जैन को प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>यम सल्लेखना : श्री मेरु भूषण जी महाराज की उत्कृष्ट साधना समाधि सम्मेद शिखर जी में  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Feb 2023 13:10:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पूज्य मुनिराज मेरु भूषण जी ने अन्न-जल का हमेशा के लिए त्याग कर दिया है। इसे ही यम संल्लेखना कहते हैं। पढ़िये निर्मल डोशी की विशेष रिपोर्ट &#8230;  सम्मेद शिखर। परम पूज्य क्षपक मुनि श्री मेरु भूषण जी महाराज की उत्कृष्ट साधना समाधि सम्मेद शिखर जी में चल रही है, जिसमें परम पूज्य मुनिराज मेरु [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>पूज्य मुनिराज मेरु भूषण जी ने अन्न-जल का हमेशा के लिए त्याग कर दिया है। इसे ही यम संल्लेखना कहते हैं। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िये निर्मल डोशी की विशेष रिपोर्ट &#8230; </strong></span></p>
<hr />
<p><strong>सम्मेद शिखर।</strong> परम पूज्य क्षपक मुनि श्री मेरु भूषण जी महाराज की उत्कृष्ट साधना समाधि सम्मेद शिखर जी में चल रही है, जिसमें परम पूज्य मुनिराज मेरु भूषण जी ने अन्न-जल का हमेशा के लिए त्याग कर दिया है। इसे ही यम संल्लेखना कहते हैं। जो व्यक्ति यम संल्लेखना करता है, वह व्यक्ति दो या तीन भाव में मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। यदि दो या तीन भाव में मोक्ष नहीं जाता है तो अधिक से अधिक सात या आठ भव में मोक्ष चला जाता है।</p>
<p>परम पूज्य मुनिराज मेरु भूषण जी ने अपने जीवन में तप त्याग संयम की आराधना करते हुए दिगंबर जैन मुनि पद को प्राप्त किया। आचार्य पद से सुशोभित हुए इन्होंने अपने जीवन काल में संयम की आराधना करते हुए अपने जीवन को संयमित किया। जैन धर्म में संल्लेखना जीवन का अंतिम लक्ष्य होता है, जो परम आवश्यक होता है। साधु पद का महत्व संयम से और संल्लेखना से ही होता है। संल्लेखना में मन को इंद्रियों को कषाय को कृष करना संल्लेखना कहलाती है।</p>
<p>यह संल्लेखना पांच प्रकार की होती है और 17 तरह से होती है, जिसमें उत्कृष्ट संल्लेखना पांच प्रकार की मानी गई है। परम पूज्य आचार्य भूषण जी महाराज 12 वर्ष की संल्लेखना पहले से ले ली और उसमें अब जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर यम संल्लेखना पूर्वक सभी प्रकार का रस, पानी, अन्न आदि का त्याग करके 3 दिन से सभी कुछ त्याग कर दिया है। वह आत्म ध्यान में लीन हैं, आत्म चिंतन में लीन हैं, आत्मा को निकट देख रहे हैं, जीते जागते संयम को पालन कर रहे हैं, अपने आपको मरण करते हुए देख रहे हैं, यह जैन धर्म में ही होता है। संल्लेखना बड़े पुण्य के उदय से कोई कोई व्यक्ति कर पाता है। मेरु भूषण जी महाराज जागृत अवस्था में संल्लेखना धारण करने वाले वर्तमान के प्रथम मुनिराज हैं, जिन्होंने सम्मेद शिखर की पावन धरा पर अनंतानंत परमेष्ठी जहां से मोक्ष को पधारे, उसी पावन स्थली को चुना है।</p>
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		<title>धर्म प्रभावना : परम पूज्य अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का तीर्थराज सम्मेद शिखरजी से मंगल विहार </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Feb 2023 12:54:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अन्तर्मना आचार्य 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ का महाराष्ट्र के लिए मंगल विहार करेंगे। हालांकि, इससे पहले वे निमियाघाट पहुंचेंगे। वहां आयोजित 10 दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद वहां से महाराष्ट्र के लिए पदविहार करेंगे। पढ़िये राज कुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230;  सम्मेदशिखर जी। 557 दिनों की कठिन मौन साधना के समापन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>अन्तर्मना आचार्य 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ का महाराष्ट्र के लिए मंगल विहार करेंगे। हालांकि, इससे पहले वे निमियाघाट पहुंचेंगे। वहां आयोजित 10 दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद वहां से महाराष्ट्र के लिए पदविहार करेंगे। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िये राज कुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230; </strong></span></p>
<hr />
<p><strong>सम्मेदशिखर जी।</strong> 557 दिनों की कठिन मौन साधना के समापन के बाद सोमवार को सम्मेद शिखरजी की से अन्तर्मना आचार्य 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ का महाराष्ट्र के लिए मंगल विहार करेंगे। हालांकि, इससे पहले वे निमियाघाट पहुंचेंगे। वहां आयोजित 10 दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद वहां से महाराष्ट्र के लिए पदविहार करेंगे। इसलिए कहा गया है कि रमता योगी बहता पानी, जिस प्रकार कहते हुए नदी का जल निर्मल होता है, ठीक उसी प्रकार रमते हुए योगी के भाव भी निर्मल होते हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38010" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0015.jpg" alt="" width="1066" height="652" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0015.jpg 1066w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0015-300x183.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0015-1024x626.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0015-768x470.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230214-WA0015-990x606.jpg 990w" sizes="(max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p><strong>हुए कई कार्य</strong></p>
<p>ज्ञात हो की अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का तीर्थ राज में 21 जून 2021 में भव्य मंगल प्रवेश हुआ था। तीर्थराज में दो चातुर्मास के साथ कई ऐतिहासिक काम किए जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सिंह निष्क्रिय व्रत 557 दिन की मौन एकांत उपवास साधना थी, जो तीर्थराज की सबसे ऊंची चोटी स्वर्णभद्र कूट पर रहकर की। स्वर्णभद्र टोंक को स्वर्णमयी बनाते हुए पूरे टोंक को नए रूप दिए इसके बाद पहाड़ पर विराजमान चोपड़ा कुंड (दिगंबर जैन मंदिर) जो कई वर्षों से बंद था, उसे खुलवा कर उसे भी नए रूप आचार्य श्री का मंगल आशीर्वाद से संपन्न हुआ। साथ ही मधुबन के तलहटी में आचार्य श्री के आशीर्वाद से बिषपंथी कोठी का कायाकल्प किया गया। कोठी में एक अन्तर्मना निलय बनाया गया, जिसे आधुनिक धर्मशाला का रूप दिया गया है। इसके बाद 24 समवशरण मंदिर में तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी मुनिराज का धातु के प्रतिमा विराजमान कर समाधि स्थल बनाया गया, जो अपने गुरु के प्रति समर्पित भाव दिखा। मधुबन के तीनमूर्ति मंदिर के पास एक स्वर्णमयी मंदिर नया बनाया गया, जो अपने आप मे सोने का मंदिर दिख रहा है, जिसका महापारणा और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव आचार्य श्री के सानिध्य में संपन्न हुआ।</p>
<p>इसी क्रम में सिद्धायतन में 1008 आदिनाथ भगवान की मंदिर के साथ भक्तामर के 48 कड़ा का मंदिर बनाया गया, जो शिखर जी के लिए एक नया रूप दिखा। आचार्य श्री के सानिध्य में महापारणा महोत्सव में प्रथम बार 7 दिनों तक पूरे शिखर जी मे जैन के अलावा अजैनों के लिए भी खाने की व्यवस्था की गई, जो यह समय शिखर के इतिहास में प्रथम बार हुआ। उपाध्याय मुनि श्री पीयूष सागर जी महाराज के सानिध्य में सम्मेद शिखर में कई अनूठे कार्य हुए, जो आचार्य श्री के जाने के बाद जन-जन को याद रहेंगे। मंगल विहार में जैन और अजैनों को आचार्य श्री की कमी खलेगी। अन्तर्मना ने सभी धर्मावलम्बी को अपना खूब-खूब आशीर्वाद दिया और कहा कि मेरी पहाड़ पर साधना इन कर्मचारियों और वहां के आदिवासी लोगों के सहयोग से पूरी हुई।</p>
<p><strong>दिए आशीष वचन</strong></p>
<p>मंगल विहार की बेला को आभार बनाने की तैयारी में जुटे मधुबनवासियों की उपस्थिति मैं अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने आशीष वचन सुनाया। अन्तर्मना के आशीर्वचनों को सुनकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो जगत के लिए कल्याणकारी दिव्य ध्वनि का उद्बोधन किया जा रहा हो, पूरा पंडाल आचार्य महाराज के चरणों में पड़ा। अन्तर्मना ने आगे कहा कि लोग परमात्मा पर राजनीति करना बंद करो। पारसनाथ पर्वत को परमात्मा का स्थान बताते हुए अन्तर्मना कहते हैं यह किसी की जागीर नहीं है, जो पूजे उसका है। परमात्मा हर किसी के हैं।</p>
<p>पारसनाथ को लेकर टिप्पणी करने वाले नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि परमात्मा पर राजनीति करना बंद करो। सिरफिरे लोग हैं जो धार्मिक आस्था को राजनीति का अड्डा बना रहे हैं। पारसनाथ सम्मेद शिखरजी शाश्वत है, पृथ्वी पर दो ही स्थान शाश्वत है एक अयोध्या और दूसरा शिखरजी । पारसनाथ पर्वत के 12 योजन तक निवास करने वाले सभी जीव नियम से स्वर्गवासी हैं उनका स्थान परमात्मा के चरणों में है। कोई नदी नहीं पूछती कि तुम क्या हो, वह तो सबकी प्यास बुझाती है। इसी तरह पारसनाथ के पर्वत को पूजने वाले आदिवासी समुदाय भी पर्वत को उतना ही पवित्र मानते हैं जितना जैन मानते हैं।</p>
<p>आगे अन्तर्मना ने कहा कि जो साक्षात भूमि तीर्थराज के पर्वत और कण कण को पूजता है, तीर्थराज ओर पारसनाथ उसी के हो जाते हैं। इस विहार के संघपति दिलीप जी हुम्मड के साथ सेकड़ो भक्त मधुबन से विहार कर निमियाघाट पहुंचे। आकाश जैन, कोडरमा के मनीष सेठी, संजय, टुन्नू अजमेरा, कोलकोत्ता के विवेक गंगवाल आदि साथ चल रहे थे।</p>
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		<title>महामहोत्सव : 1008 श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्चाणक महा महोत्सव 17 फरवरी से 23 फरवरी तक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Feb 2023 15:00:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री ने अपने मांगलिक प्रवचनों में कहा कि मुनिराज सूर्य की भांति होते हैं। सूर्य यह नहीं देखता की कोई उनके निकट संबंधी है, प्रशंसक है या हमारी निंदा करने वाला है। सूर्य सभी को समान रूप से अपना प्रकाश फैलाता है। इसी तरह मुनि श्री की ओर से खुले मंच उिया गया मंत्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>मुनि श्री ने अपने मांगलिक प्रवचनों में कहा कि मुनिराज सूर्य की भांति होते हैं। सूर्य यह नहीं देखता की कोई उनके निकट संबंधी है, प्रशंसक है या हमारी निंदा करने वाला है। सूर्य सभी को समान रूप से अपना प्रकाश फैलाता है। इसी तरह मुनि श्री की ओर से खुले मंच उिया गया मंत्र सर्वशक्तिमान, ताकतवर और आत्मा का कल्याण करने वाला होता है। <span style="color: #ff0000;"><strong>राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230; </strong></span></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़। </strong>शहर की हृदय स्थली नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदि नाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का 1008 श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महामहोत्सव 17 फरवरी से 23 फरवरी तक होगा। निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज एवं छुल्लक धैर्य सागर जी महाराज की रविवार को आगवानी हो चुकी है। यह अनुष्ठान प्रदीप भैया जी सुयश के की ओर से संपन्न कराया जाएगा। मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि सोमवार को सुबह 7:00 मुनि श्री ढोंगा मैदान पहुंचें एवं वहां स्थित आदिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए। सुबह 9:00 मुनि श्री नंदीश्वर कॉलोनी स्थित मंच पर पधारें। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन गुना बालों के द्वारा किया गया। आचार्य श्री विद्यासागर एवं बड़े बाबा के चित्र का अनावरण लुइस चौधरी, जिनेंद्र जैन की ओर से किया गया। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य निखिल जैन, एवं चंचल जैन, संजय मोदी को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनि श्री ने अपने मांगलिक प्रवचनों में कहा कि मुनिराज सूर्य की भांति होते हैं। सूर्य यह नहीं देखता की कोई उनके निकट संबंधी है, प्रशंसक है या हमारी निंदा करने वाला है। सूर्य सभी को समान रूप से अपना प्रकाश फैलाता है। मुनि श्री ने कहा कि मैं किसी को बंद कमरे में कोई मंत्र नहीं देता, जो भी दूंगा खुले मंच से दूंगा। मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। खुले मंच से दिया हुआ मंत्र सर्वशक्तिमान, ताकतवर और आपकी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा। मुनि श्री ने कहा कि दुनिया किसी को सुखी नहीं देख सकती, वे पापी दानव राक्षस होते हैं, जो दूसरों को दुखी देखकर खुश होते है। रामचंद्र जी महान थे, लेकिन उनके जीवन में भी उपसर्ग हुए हैं। उनको भी अपने जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ा है, लेकिन सत्य कभी हारता नहीं सत्य को भले ही सूली लग जाए पर सत्य कभी सूली पर नहीं चढ़ता। हमारे जीवन में भी उपसर्ग आते हैं, कठिन उपसर्ग आते हैं और उनका निर्माण करना भी कठिन होता है लेकिन सत्य उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। आप लोगों ने फिल्म देखी होगी, उमसें हीरो कई बार पिटाई खाता है। कई बार लगता है कि अब हीरो नहीं बचेगा, लेकिन हीरो अंत तक सुरक्षित रहता है पूरी फिल्म में खलनायक का तांडव नृत्य होता रहता है अंत में जीत सत्य की होती है उसी को सत्यमेव जयते कहा गया है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37945" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0075-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हमें अपने जीवन में कैसा परिवर्तन करना है वस्तु में आनंद नहीं वस्तु के धर्म में आनंद है। वस्तु भिन्न चीज होती है। वस्तु का धर्म भिन्न चीज है। ज्ञान भिन्न चीज है। ज्ञान का स्वरूप भिन्न चीज है। आत्मा अलग है। आत्मा का स्वरूप अलग चीज है। हमारा ज्ञान अच्छा नहीं, हमारा मन अच्छा नहीं, हमारे संस्कार अच्छे नहीं, हम अनादि काल से संसार में अच्छाइयों की तरफ कम हैं।</p>
<p>कार्यक्रम में पंडित सुनील शास्त्री दीपचंद जी सनत कुमार जी कमेटी की तरफ से बाबा नायक विमल जैन डीके जैन विमल इलेक्ट्रिकल्स राजीव जैन पार्षद, सुधीर जैन अनुज जैन आदि लोग शामिल हुए। शाम को 6:00 बजे मुनि श्री मंच पर विराजमान हुए। मुनि श्री की ओर से जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम हुआ। इस जिज्ञासा समाधान में सभी लोग धर्म के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करते हैं। मुनि श्री से प्रश्न करते हैं, मुनि श्री उत्तर के माध्यम से जिज्ञासा का समाधान करते हैं।</p>
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		<title>समारोह : ज्ञान अंधकार में भी रास्ता दिखाता है-स्वस्तिभूषण माताजी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Feb 2023 18:01:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परम पूज्य सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी व स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस एवं गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माताजी व आर्यिका अंतसमती माताजी का दीक्षा दिवस समारोह मनाया गया। पढ़िये मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;  मुरैना। इस संसार में हमें सर्वप्रथम ज्ञान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>परम पूज्य सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी व स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस एवं गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माताजी व आर्यिका अंतसमती माताजी का दीक्षा दिवस समारोह मनाया गया। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िये मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; </strong></span></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना। </strong>इस संसार में हमें सर्वप्रथम ज्ञान की आवश्यकता होती है। यदि हम ज्ञानवान होंगे तो धनोपार्जन कर सकते हैं। यदि अज्ञानी होंगे तो धनोपार्जन में भी कठिनाई होगी। ज्ञान वह धन है, जो सांसारिक दुखों को दूर करता है। धन केवल भौतिक सुख प्रदान करता है और ज्ञान आत्म सुख प्रदान करता है। हमारे पास धन हो भी, लेकिन ज्ञान नहीं हैं तो हम धन का सद्पयोग नहीं कर पाएंगे। आज सबसे अधिक ज्ञान यानी कि शिक्षा प्राप्त करने की आवश्यकता है। हमें मंदिरों के साथ साथ संस्कारित स्कूल-कॉलेज की स्थापना पर भी ध्यान देना चाहिए। स्कूलों की संरचना ऐसी होनी चाहिए कि बच्चों को लौकिक शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी मिलना चाहिए। ये विचार गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने गणिनी एवं दीक्षा दिवस समारोह में उपस्थित बन्धुओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p>परम पूज्य सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी व स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस एवं गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माताजी व आर्यिका अंतसमती माताजी का दीक्षा दिवस समारोह हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने पूज्य सराकोद्धारक श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका अंतसमती माताजी को गणिनी पद से विभूषित किया। आगमानुसार गणिनी पद के सभी संस्कार एवं क्रियाएं आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी एवं उपस्थित गणिनी आर्यिकाओं ने सम्पन्न कराईं। समारोह का संचालन युवा विद्वान पंडित श्री संजय शास्त्री सिहोनियां ने किया।</p>
<p style="padding-left: 40px;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37860" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074.jpg" alt="" width="1067" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074.jpg 1067w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074-768x1152.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074-1024x1536.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230212-WA0074-990x1485.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1067px) 100vw, 1067px" /></p>
<p><strong>नवनिर्माणाधीन स्कूल की रूपरेखा प्रस्तुत </strong></p>
<p>समारोह के शुभारम्भ में ब्रह्मचारिणी शालू दीदी ने मंगलाचरण किया। ज्ञानार्ष बालिका मंडल ने भक्ति नृत्य की प्रस्तुति दी। विद्यालय कमेटी के कार्याध्यक्ष मनोज ने नवनिर्माणाधीन स्कूल की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रारंभ में 50 कमरों के साथ एक विशाल एवं भव्य ऑटोटोरियम का निर्माण किया जाएगा। अभी हाल फिलहाल गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के आशीर्वाद से मां स्वस्ति भूषण इंटरनेशनल स्कूल प्रारम्भ किया जा रहा है।</p>
<p><strong>हुए मांगलिक कार्यक्रम</strong></p>
<p>समारोह में ध्वजारोहण सूर्यप्रकाश, राजेन्द्र जी, पवन जी जयपुर सहित वाहर से पधारे हुए अतिथियों द्वारा किया गया। चित्र अनावरण वीरेंद्र जैन डबरा, धर्मेंद्र जैन एडवोकेट एवं दीप प्रज्वलन अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन, प्रेमचंद जैन (बन्दना साड़ी), जवाहरलाल बरैया ने किया। मंचासीन सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी के पाद प्रक्षालन एवं समस्त संघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य जिनेश जैन अम्बाह को प्राप्त हुआ। समस्त आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन, शास्त्र एवं वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य नगर पालिका अम्बाह की अध्यक्षा अंजली जिनेश जैन को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के मध्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी, गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी, गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका अंतसमति माताजी ने सभी को शुभाशीष प्रदान किया।</p>
<p><strong> प्राप्त किया आशीर्वाद</strong></p>
<p>समारोह में पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह तोमर, राकेश रुस्तम सिंह ने विराजमान साधु-साध्वियों के चरणों में श्रीफ़ल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के वाद सभी के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया था।</p>
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		<title>मंगल प्रवेश : गणिनी आर्यिका एवं दीक्षा दिवस 12 फरवरी को </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Feb 2023 13:28:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[सारांश गणिनी आर्यिका पदारोहण दिवस एवं दीक्षा दिवस समारोह मुरैना नगर में 12 एवं 13 फरवरी को भव्यता के साथ मनाया जाएगा। 12 को ज्ञानतीर्थ से मुरैना के लिए विहार होगा। पढ़िये मनोज नायक की एक रिपोर्ट&#8230;  मुरैना। गणिनी आर्यिका पदारोहण दिवस एवं दीक्षा दिवस समारोह मुरैना नगर में 12 एवं 13 फरवरी को भव्यता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p style="text-align: center;"><strong>सारांश</strong></p>
<p style="text-align: left;">गणिनी आर्यिका पदारोहण दिवस एवं दीक्षा दिवस समारोह मुरैना नगर में 12 एवं 13 फरवरी को भव्यता के साथ मनाया जाएगा। 12 को ज्ञानतीर्थ से मुरैना के लिए विहार होगा। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िये मनोज नायक की एक रिपोर्ट&#8230; </strong></span></p>
<hr />
<p>मुरैना। गणिनी आर्यिका पदारोहण दिवस एवं दीक्षा दिवस समारोह मुरैना नगर में 12 एवं 13 फरवरी को भव्यता के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विराजमान</strong></p>
<p>परम पूज्य सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी, मुनिश्री ज्ञातसागर जी, गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी, श्री स्वस्तिभूषण माताजी, श्री आर्षमति माताजी, श्री अंतसमति माताजी ससंघ ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर विराजमान हैं । पूज्य गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी, स्वस्तिधाम प्रणेत्री, परम विदुषी लेखिका गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने सिंहरथ प्रवर्तक विद्याभूषण सन्मति सागर जी से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की थी। सराकोद्धारक श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने पूज्य गुरुमां को 13 फरवरी को अतिशय क्षेत्र जहाजपुर में गणिनी पद प्रदान किया था । इसी दिन अंतसमती माताजी एवं आर्षमति माताजी को आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई थी।</p>
<p><strong>मुरैना में प्रवेश करेंगे</strong></p>
<p>पूज्य आचार्य संघ एवं आर्यिका संघ रविवार 12 फरवरी को प्रातः कालीन वेला में ज्ञानतीर्थ से पद विहार कर मुरैना में प्रवेश करेंगे । गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी, गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस एवं गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी व आर्यिका अंतसमती माताजी का दीक्षा दिवस महोत्सव जैन बगीची में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समारोह पूर्वक मनाया जा रहा है । कार्यक्रम में जयपुर, आगरा, जहाजपुर, दिल्ली, धौलपुर, अम्बाह, बानमोर, सुमावली, जौरा, ग्वालियर से सैकड़ों की संख्या में गुरुमां के भक्त सम्मिलित होंगे।</p>
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		<title>राजस्थान वृद्धजन तीर्थ यात्रा योजना में सम्मेद शिखर जी को भी जोड़ा: सीनियर सिटीजन्स को मुफ्त तीर्थ यात्रा करवाने की योजना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Feb 2023 09:07:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान बजट पेश करते हुए राजस्थान के सीनियर सिटीजन्स के लिए चल रही तीर्थ यात्रा योजना में सम्मेद शिखरजी को भी जोड़ा गया है । गहलोत ने आज राजस्थान विधानसभा में इस बात का एलान किया है। राजस्थान में बजट भाषण में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीनियर सिटीजन्स के लिए तीर्थ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान बजट पेश करते हुए राजस्थान के सीनियर सिटीजन्स के लिए चल रही तीर्थ यात्रा योजना में सम्मेद शिखरजी को भी जोड़ा गया है । गहलोत ने आज राजस्थान विधानसभा में इस बात का एलान किया है।</strong></p>
<hr />
<p>राजस्थान में बजट भाषण में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीनियर सिटीजन्स के लिए तीर्थ यात्रा योजना का दायरा बढ़ाने का एलान किया है । मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा में कहा कि इस साल राजस्थान में 20 हजार सीनियर्स सिटीजन्स को निशुल्क यात्रा करवाई जाएगी ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37590" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/1512415-smmmdskhr.jpg" alt="" width="700" height="400" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/1512415-smmmdskhr.jpg 700w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/1512415-smmmdskhr-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
<p>तीर्थ स्थानों की सूची में जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख धाम सम्मेद शिखरजी का नाम भी जोड़ा गया है । राजस्थान में जैन समुदाय बहुतायत मात्रा में रहता है । जैन संस्कृति से लोगों को अवगत करवाने और जैन श्रद्धालूओं के लिए इस घोषणा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।</p>
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		<title>दुर्दशा का शिकार होता जा रहा पवित्र मधुबन: जैन संस्कृति चिंतन अनिल जैन की समाज के प्रबुद्ध लोगों के नाम खुली चिठ्ठी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Feb 2023 03:07:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[सम्मेदशिखर]]></category>
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					<description><![CDATA[सारांश मधुबन वो पावन तीर्थ हैं जहां का कण-कण जैन संस्कृति के धर्मावलंबियों के लिये पावन है।मगर आज मधुबन तीर्थ के हालात और समाज को आईना दिखाती एक चिठ्ठी हम प्रकाशित कर रहे हैं।अनिल जैन का ये मैसेज अलग-अलग रूप में वॉट्सएप पर वायरल हो रहा है।अनिल जैन को हमने मंच दिया है ताकि इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p style="text-align: center;"><strong>सारांश</strong></p>
<p>मधुबन वो पावन तीर्थ हैं जहां का कण-कण जैन संस्कृति के धर्मावलंबियों के लिये पावन है।मगर आज मधुबन तीर्थ के हालात और समाज को आईना दिखाती एक चिठ्ठी हम प्रकाशित कर रहे हैं।अनिल जैन का ये मैसेज अलग-अलग रूप में वॉट्सएप पर वायरल हो रहा है।अनिल जैन को हमने मंच दिया है ताकि इस संवाद को आगे बढ़ाया जा सके। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िए विस्तार से</strong></span></p>
<hr />
<p>मधुबन तीर्थ क्षेत्र, कभी ये जैन धर्म के तीर्थंकरों का तीर्थ क्षेत्र था। आज ये किसी मुनि श्री, किसी संस्था, किसी समाज,किसी कोठी,किसी व्यक्ति विशेष के पैसे, प्रर्दशन, शान दिखाने का क्षेत्र बन गया है ।</p>
<p>साथियों, सबसे क्षमा प्रार्थी हूं। बहुत दिनों से मन में उथल पुथल मची हुई है। लिखूं या नहीं लिखूं। बहुत सोच विचार, लोगों से चर्चा कर इस निष्कर्ष निकाला, मुझे लिखना चाहिए।</p>
<p>पहले का मधुबन , हम जब अपने परिवार के साथ जाते थे। तो हर एक मंदिर में कौन मूल नायक भगवान हैं। किस की प्रतिमा स्थापित हैं। सबकी पूरी जानकारी मिलती थी। पर्वत पर वंदना के लिए सब वस्त्र साफ़ धुले हुए होने चाहिए। इसका पूरा ख्याल रखा जाता था।</p>
<p>पूजन सामग्री साफ़ चुनी हुई होनी चाहिए। गिनती के मंदिर थे। सभी एक दूसरे यात्री का सम्मान करते थे।मधुबन तीर्थ क्षेत्र आने के बाद मन के भाव ही बदल जाते थे। दिल को सकून मिलता था।दो चार दिन रुकने की इच्छा होती थी।</p>
<p><strong>मगर आज का मधुबन</strong></p>
<p>हर साधु, हर समाज, हर संस्था, कोठी के बीच होड़ मची हुई है।</p>
<p>आज मंदिर की पहचान उसके मूल नायक तीर्थंकर से नही</p>
<p>बल्कि किस मुनि श्री ने बनवाया है?किस कोठी वालो ने बनाया है? किस समाज के नेताओं ने बनाया है? किस व्यक्ति विशेष ने बनाया है?</p>
<p>मतलब, तीर्थंकर भगवान किसी को याद नहीं है। पर किसने चंचला लक्ष्मी का उपयोग किया है। उसका नाम से वो मंदिर पहचाना जाता है । भगवान महावीर ने कभी कोई भेद भाव नहीं किया ना ही कोई ऐसी शिक्षा संस्कार दिए। हम इतने ज्यादा काबिल है कि भगवान का बंटवारा कर दिया। साधु संत जो स्व कल्याण के लिए दीक्षा लिए थे। पांच पाप त्याग कर मोक्ष मार्ग पर चलने का संकल्प लिया था। उनमें से कुछ सबसे ज्यादा परिग्रह इकट्ठा कर रहे हैं। आज शायद ही कोई होगा जो बता सके मधुबन में किस मंदिर में कौन से भगवान विराजमान हैं।</p>
<p>बस एक भेड़ चाल निकल गई है। मेरा मंदिर उसके मंदिर से ज्यादा बडा और सुंदर हैं। कोई शुद्धता, आगम, जिनशाशन से मतलब नहीं।पंचकलनायक किसी तरह कर देना है। पैसे का भोंडा प्रर्दशन करना है। किस भगवान, किस जिनवाणी में लिखा है। इतनी ज्यादा प्रर्दशन और अशुद्धता के साथ मंदिर निर्माण,पंचकल्याणक करना है?</p>
<p>अब लोग आते हैं उसी साधु संत से मिलते हैं जिसके वो भक्त है। उसी मंदिर में जाते हैं जहां उन्होंने दान, मूर्ति, निर्माण में सहयोग किया है। लोग एक दूसरे का सम्मान करना भूल गए हैं। अब तो दो चार घंटे में ही लगता है निकल चलो।कई मंदिरों में पूजा पक्षाल भी नहीं होता है। कई साधुओं को आहार, दवा की व्यवस्था नहीं मिलती है। पर मंदिर पर मंदिर बनवा रहे हैं।</p>
<p>अभी तक ये भेड़ चाल मंदिरों को लेकर ही थी। अब मैंने सपना देखा की ।</p>
<p>मधुबन पारसनाथ को धार्मिक तीर्थ स्थल के साथ शिक्षा का भी तीर्थ क्षेत्र होना चाहिए। उसमे भी कई संस्था होड़ में कूद गई है।</p>
<p>क्या हम जैनों को इतनी भी समझ नहीं हैं कि हमारी पहचान भगवान महावीर और उनके बताएं आदर्श है। जैन धर्म त्याग तपस्या का धर्म है। ये कब पैसा प्रर्दशन का धर्म बन गया?</p>
<p>साधु परमेस्थी जिनका कर्तव्य था श्रावक गण का मार्गदर्शन करना। समाज को जोड़ना। जैन धर्म का प्रचार प्रसार करना।</p>
<p>क्या ये आज हो रहा है? सभी से निवेदन है अनुरोध करता हूं। आप किसी साधु की,संस्था , कोठी,समाज से जुड़े हो। एक बार जैन बनकर विचार करें। जैन होने के नाते आपका जो कर्तव्य है उसे पूरा करें । मेरी आप सभी से यही गुजारिश है कि मंदिर बनाने में जो हुआ सो हुआ। पर शिक्षा के क्षेत्र में मुनि, कोठी, पंथ, समाज के ठेकेदार के रूप में काम ना करें।</p>
<p>जैसे नालंदा विश्वविद्यालय था। वैसा ही जैन विश्वविद्यालय मधुबन में बने।ऐसा मार्गदर्शन, आशीर्वाद चाहिए। जिनको भी इसमें जुड़ना हैं, सहयोग करना है। वे सादर आमन्त्रित है</p>
<p>मेरा मानना है कि विद्यालय की संरचना एक हो। जिसे भी निर्माण करवाना है। वे अपने नाम से उस हिस्से का निर्माण कर सकते हैं। पर पूरे परिसर का नाम एक ही रहना चाहिए।</p>
<p>जैसे कोई बड़ी धर्मशाला बनती है तो लोग अपने अपने नाम से कमरे बनवाते हैं। पर लोग उस भवन को उस धर्मशाला के नाम से ही जानते हैं।वैसे ही अखिल भारतीय पारसनाथ जैन शिक्षायतन विश्वविद्यालय के अंतर्गत जिन्हें भी, जो भी स्कूल, ट्रेनिंग सेंटर, रोजगार प्रशिक्षण केन्द्र इत्यादि खोलना है वे सादर आमन्त्रित है। मंदिर निर्माण वाली भेड़ चाल शिक्षा क्षेत्र में नही होनी चाहिए। ये आप सभी से निवेदन है अनुरोध है, विनती है।</p>
<p>भगवान महावीर की अगर सुनते हो तो उनकी कही बातों का जीवन में अनुश्रण भी करें ।जैन समाज को एकजुट होकर शिक्षा संस्कार के शिक्षायतन खोलने में मदद करनी चाहिए। मधुबन के बाद अन्य तीर्थ क्षेत्र में भी इसकी शाखा खोलने पर विचार करना चाहिए। पुन्न: सभी से क्षमा प्रार्थी हूं। कुछ गलत लिखा हो तो बताए। सुधार करूंगा।</p>
<p><strong>आपका अपना साथी,</strong></p>
<p><strong>अनिल कुमार जैन।</strong></p>
<p><strong>9931373035</strong></p>
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		<title>श्रद्धा का सैलाब : गजरथादिक एकादश रथोेत्सव की हुई अतिभव्य परिक्रमा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Feb 2023 16:18:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[hindi news]]></category>
		<category><![CDATA[indore jain samaj]]></category>
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		<category><![CDATA[muni Tarun Sagar]]></category>
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		<category><![CDATA[satyendar jain news]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[सारांश अयोध्यापुरी में शाही पंचकल्याणक महोत्सव में आदिनाथ भगवान कैलाश पर्वत से मोक्ष पधारे। इस अवसर पर विश्व शान्ति महायज्ञ भी हुआ। श्रीजी की भव्य परिक्रमा नगर में आकर्षण का केंद्र रही। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथादिक एकादश रथोत्सव विश्व शान्ति महायज्ञ रविवार को निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p style="text-align: center;"><strong>सारांश</strong></p>
<p>अयोध्यापुरी में शाही पंचकल्याणक महोत्सव में आदिनाथ भगवान कैलाश पर्वत से मोक्ष पधारे। इस अवसर पर विश्व शान्ति महायज्ञ भी हुआ। श्रीजी की भव्य परिक्रमा नगर में आकर्षण का केंद्र रही। <span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230;</strong></span></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथादिक एकादश रथोत्सव विश्व शान्ति महायज्ञ रविवार को निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में भव्यता पूर्वक संपन्न। इसमें भगवान आदिनाथ का कैलाश पर्वत से मोक्ष गमन का दृश्य हजारों लोगों ने अयोध्यापुरी में देखा और श्रीजी के रथोत्सव में श्रद्धा भक्ति पूर्वक सम्मलित होकर पुण्यार्जन किया।</p>
<p>प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक शान्तिधारा के उपरान्त नित्यमह पूजा हुई। वेदी पर ही कैलाश पर्वत की रचना की गई, जिस पर्वत पर आदिनाथ जी ने बैठ कर ध्यानरूढ़ होकर सिद्धत्व प्राप्त किया। मुनि सुधासागर महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय को ध्यान साधना कराई और क्षणभर में ही भगवान आदिनाथ को मोक्ष की प्राप्ति हो गया। इस दृश्य को देखने अपार जनसमूह आतुर था।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37212" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0038.jpg" alt="" width="1280" height="914" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0038.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0038-300x214.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0038-1024x731.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0038-768x548.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0038-990x707.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>मुनि श्री के हुए प्रवचन</strong></p>
<p>इस मौके पर मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि पुण्य के अभाव में कोई काम नहीं आता। जिनके आगे पीछे इन्द्र थे, जन्म पर रत्नवृष्टि हई। सारा वैभव था। जब पुण्य में हीनता आई तो वैराग्य हुआ और कैलाश पर्वत से मोाक्ष गए और कपूर की भाॅति शरीर विलीन हो गया। प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के निर्देशन में भगवान आदिनाथ के मोक्ष के पश्चात कैलाश पर्वत पर अग्निकुमार इन्द्रों द्वारा हवन किया गया। इसके उपरान्त विश्व शांति महायज्ञ में इन्द्र- इन्द्राणियों ने पूर्ण आहुति दी। मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव में पाषाण से परमात्मा बनाने की प्रक्रिया होती है। तीर्थंकर आदिनाथ ने कर्मों को नाश कर मोक्ष पद को प्राप्त किया और हमें परमात्मा बनने का मार्ग दिखाया। पंचकल्याण को अपने आचरण में लाने में ही कल्याण है। जिस तरह नशा करने से अघाते नहीं हैं, पाप करने से तृप्ति नहीं होती, उसी तरह धर्म जितना करोगे, उतना बढेगा।</p>
<p><strong>जैन आर्मी ने थामी ध्वज पताका</strong></p>
<p>दोपहर में गजरथ परिक्रमा का शुभारम्भ अयोध्यापुरी से हुआ, जिसमें आगे जैन आर्मी के अधिकारी ध्वज पताका लिए हुए अनुशासित ढंग से चल रहे थे। उनके पीछे कृष्णा वैंड उदयपुर की आकर्षक प्रस्तुति के साथ प्रत्येन्द्र, सत्येन्द्र इन्द्र-इन्द्राणियों का समूह ध्वज पताकाएं और कमलों को हाथ में लेकर चल रहा था। भव्य शोभायात्रा में सांगली महाराष्ट्र का दिव्य घोष, वीर व्यायामशाला, स्याद्वाद वर्धमान सेवा संघ, आदिनाथ सेवा संध, बाहुबली सेवा संघ का दिव्य घोष अपने स्वयं सेवकों के साथ प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। एकादश रथों के समूह के आगे तीन हाथियों पर पुण्यार्जक परिवार हाथों में ध्वज पताकाएं लिए हुए थे। उनके पीछे गजरथ के साथ क्रमशः अतिशय क्षेत्र पपौराजी, द्रोण गिरी जी, आहार जी, जैन समाज अशोकनगर, जैन समाज रहली, जैन समाज वाडी और ललितपुर का रजत रथ आकर्षण का केन्द्र रहे। जिनमें प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र राजेन्द्र जैन लल्लू थनवारा, सौधर्म इन्द्र सुमन-स्वतंत्र मोदी नाराहट, धनपति कुबेर अशोक जैन सुधा दैलवारा, महायज्ञ नायक रचना संजीव जैन सीए, शिरोमणि श्रावक श्रेष्ठी महेन्द्र कुमार सराफ, विधि यज्ञनायक प्रभात कुमार सराफ, भरत चक्रवर्ती रवीन्द्र अलया, बाहुबली संजीव कुमार ममता स्पोर्ट, ईशान इन्द्र विनय कुमार जैन मडावरा, सनत इन्द्र संजीव कुमार लकी, माहेन्द्र राजीव कुमार लकी, यज्ञनायक महेन्द्र कुमार सराफ, अखिलेश गदयाना, विनय जैन जडीबूटी,आलोक जैन लागौन, राजेन्द्र सराफ, संदीप सराफ लालू, वीरेन्द्र कुमार गंगचारी, महेन्द्र कुमार पालीवाले, राजकुमार खिरिया, राजा श्रेयांस राजीव अनौरा, राजा सोम डॉ. अक्षय टडैया, ब्रह्मेन्द्र राजेश सिंघई धौर्रा, लान्तव इन्द्र लोकेश सराफ, शुक्र इन्द्र शुभम सराफ, प्राणत इन्द्र अभय जैन पारौल, आणत इन्द्र शिरीष सिंघई, आरण इन्द्र अभिनंदन कुम्हैडी शतार इन्द्र पदमचंद मिठया, महामण्डलेश्वर विकास जैन सीए, अनूप जैन मामा भांजा, सुबोध जैन सुरभि, सन्मति सराफ, सतीश नजा विराजित रहे।</p>
<p>श्रीजी की रथयात्रा में ब्रह्मचारी भाई-बहनों के आगे निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर, मुनि पूज्य सागर महाराज, ऐलक धैर्यसागर, क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज उपस्थित धर्मालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर रहे थे। गजरथ की परिक्रमाएं धार्मिक रीतिरिवाज से जब सम्पन्न हो रही थीं तो उनका आंखों देखा हाल जैन पंचायत के अध्यक्ष इंजीनियर अनिल अंचल स्वयं बता रहे थे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37213" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0040.jpg" alt="" width="1280" height="914" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0040.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0040-300x214.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0040-1024x731.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0040-768x548.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230205-WA0040-990x707.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>हुआ श्रीजी का अभिषेक</strong></p>
<p>परिक्रमा के उपरान्त श्रीजी को स्वयंसेवकों के दिव्यघोषों के साथ प्रतिष्ठा मंच पर विराजित किया, जहां श्रीजी का अभिषेक मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में हुआ। गजरथ महोत्सव की व्यवस्थाओं को मंदिर प्रबंधक राजेन्द्र जैन थनवारा मोदी, पंकज जैन, धार्मिक आयोजन संयोजक मनोज जैन बबीना के साथ मेला कैप्टन मेला कैप्टन नरेन्द्र कडंकी, कैप्टन राजकुमार जैन, पार्षद महेन्द्र सिंघई, वैभव जैन टिन्ना, स्वदेश गोयल संयोजित कर रहे थे।</p>
<p><strong>एकादश रथोत्सव से ललितपुर ने बनाया रिकॉर्ड</strong></p>
<p>मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में ललितपुर दिगम्बर जैन पंचायत ने एकादश रथोत्सव का आयोजन कर जैन समाज में एक रिकॉर्ड कायम किया, जिसमें पांच हजार से अधिक इन्द्र-इन्द्राणियों ने भक्ति की। गौरतलह रहे कि मुनि श्री के सानिध्य में 1992 में नवगजरथ का आयोजन भव्यता से हुआ था। मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार मुनि श्री के वर्ष 2022 के चातुर्मास में अभिनंदनोदय तीर्थ का अतिभव्य निर्माण हुआ, जिसमें त्रिकाल चौबीसी रजतमय चौबीसी, नन्दीश्वर, सहस्त्रकूट गुफा, कल्पवृक्ष मदिर सहित ज्ञानोदय तीर्थ में मुनिसुव्रतनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ मंदिर का निर्माण हुआ, जिनके लिए 1375 प्रतिमाओं की स्थापना की गई।</p>
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		<title>कुण्डलपुर:  सार्वजनिक न्यास की वार्षिक आम सभा की बैठक संपन्न </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2023 11:10:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सारांश श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुण्डलगिरि कुण्डलपुर सार्वजनिक न्यास की वार्षिक आम सभा की शनिवार को हुई बैठक में क्षेत्र के विकास के सम्बन्ध में गहन चर्चा की गई। कुण्डलपुर( राजेश रागी बकस्वाहा)। श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुण्डलगिरि कुण्डलपुर सार्वजनिक न्यास की वार्षिक आम सभा की बैठक शनिवार विद्या भवन कुण्डलपुर में आयोजित की गई। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p style="text-align: center;"><strong>सारांश</strong></p>
<p>श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुण्डलगिरि कुण्डलपुर सार्वजनिक न्यास की वार्षिक आम सभा की शनिवार को हुई बैठक में क्षेत्र के विकास के सम्बन्ध में गहन चर्चा की गई।</p>
<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर( राजेश रागी बकस्वाहा)। </strong>श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुण्डलगिरि कुण्डलपुर सार्वजनिक न्यास की वार्षिक आम सभा की बैठक शनिवार विद्या भवन कुण्डलपुर में आयोजित की गई।</p>
<p>दिगंबर जैन पंचायत सभा सागर अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ढाना ने आम सभा की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कहा कि कुण्डलपुर बड़े बाबा का दरबार है। जिनको भी बड़े बाबा की सेवा का अवसर मिल रहा है वे बड़े पुण्यशाली हैं। इतना बड़ा तीर्थ क्षेत्र है सभी समन्वय से सेवा कार्य करें। छोटी सोच रखेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। बड़ी सोच रखें एकता में ही ताकत होती है। आगे बढ़ कर कार्य करें। बड़े बाबा का इतना बड़ा कार्य हुआ भूतो ना भविष्यति। देश की समाज की निगाहों में कुण्डलपुर कमेटी रहती है । बड़े बाबा छोटे बाबा की कृपा, आशीर्वाद आपको मिल रहा है।</p>
<p><strong>यह रहे उपस्थित</strong></p>
<p>सभा में मंगलाचरण की प्रस्तुति ब्रह्मचारिणी विभा दीदी द्वारा की गई। मुख्य अतिथि एवं मंचासीन पदाधिकारियों द्वारा पूज्य बड़े बाबा एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। मुकेश जैन ढाना का सम्मान कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ एवं महामंत्री चैधरी रूपचंद जैन द्वारा किया गया। मंच पर विराजमान कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ, पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई, जैन पंचायत दमोह अध्यक्ष सुधीर जैन, कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी उपाध्यक्ष देवेंद्र सेठ, डॉ रमेश बजाज ,अजित कण्डया, रतनचंद जैन, अशोक सराफ, महामंत्री रूपचंद जैन, कोषाध्यक्ष नेमीचंद जैन बजाज का सम्मान मंत्री ललित सराफ, नेम कुमार सराफ ,पदमचंद खली, गिरीश नायक, महेश दिगंबर, अजय निरमा आदि द्वारा किया गया। बैठक में विषय सूची अनुसार प्रत्येक बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर पारित किए गए। महामंत्री द्वारा क्षेत्र का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।</p>
<p>बड़े बाबा मंदिर निर्माण की जानकारी समिति के राजेश चैधरी ने प्रस्तुत की। अध्यक्ष की अनुमति से अनेक सदस्यों ने अपने सारगर्भित सुझाव प्रस्तुत किए। सभा का संचालन प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज हटा ने किया इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी सदस्यों के साथ सामान्य सभा के सदस्यों की अच्छी उपस्थिति रही।</p>
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