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	<title>Sanskar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Sanskar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गणिनी आर्यिका श्री सुभूषण मति माताजी का प्रेरक संदेश : आहार चर्या से पूर्व विद्यार्थियों को दिया संस्कार, विनय और राष्ट्रभक्ति का पाठ </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 12:26:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दरोली में गणिनी आर्यिका श्री सुभूषण मति माताजी ने आहार चर्या से पूर्व विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संस्कार, विनय, व्यसनमुक्ति, राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों का प्रेरक संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट। दरोली (बांसवाड़ा, राजस्थान)। चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की श्रमण परंपरा की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दरोली में गणिनी आर्यिका श्री सुभूषण मति माताजी ने आहार चर्या से पूर्व विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संस्कार, विनय, व्यसनमुक्ति, राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों का प्रेरक संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दरोली (बांसवाड़ा, राजस्थान)</strong>। चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की श्रमण परंपरा की गौरव, आगमिक प्रखर वक्ता एवं चर्या शिरोमणि गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभूषण मति माताजी (ससंघ) की आहार चर्या बुधवार, 15 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दरोली में श्रद्धापूर्वक संपन्न हुई। आहार चर्या से पूर्व माताजी ने विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों को जीवनोपयोगी संस्कारों से ओतप्रोत प्रेरक उद्बोधन दिया।</p>
<p><strong>अच्छा इंसान बनना ही सबसे बड़ी शिक्षा</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि सरस्वती की आराधना के बाद ही परमात्मा की आराधना का मार्ग प्रशस्त होता है। विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनने का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन सबसे पहले उन्हें एक अच्छा और संस्कारी इंसान बनने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल मनुष्य का शरीर धारण कर लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि इंसानियत ही सच्चे मनुष्य की पहचान है।</p>
<p><strong>शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक</strong></p>
<p>उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक एक शिल्पी की तरह होते हैं, जो कोरी स्लेट समान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारों का आधार भी है। आज शिक्षा का स्तर तो बढ़ा है, लेकिन संस्कारों की कमी के कारण समाज में शांति घटती जा रही है।</p>
<p><strong>व्यसन और मोबाइल से सावधान रहने की प्रेरणा</strong></p>
<p>गणिनी माताजी ने कहा कि व्यसन और दिखावे की प्रवृत्ति ने युवा पीढ़ी को भ्रमित कर दिया है। उन्होंने कहा, &#8220;आप गुटखा नहीं खा रहे, बल्कि गुटखा आपको खा रहा है।&#8221; उन्होंने मोबाइल की अति-निर्भरता से बचने और संयमित जीवन अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि व्यसनी व्यक्ति कभी भी मानवीय और धार्मिक मूल्यों को आत्मसात नहीं कर सकता।</p>
<p><strong>विनय, राष्ट्रभक्ति और मानवीय मूल्यों पर बल</strong></p>
<p>माताजी ने विद्यार्थियों को माता-पिता, गुरु और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर बनाना नहीं, बल्कि संस्कृति और चरित्र का निर्माण करना भी है। उन्होंने युवाओं से &#8220;राजनीति नहीं, देशभक्ति सीखो&#8221; का संदेश देते हुए शान से स्वयं को भारतीय कहने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>&#8216;करियर नहीं, कल्चर&#8217; का दिया संदेश</strong></p>
<p>अने उद्बोधन के अंत में माताजी ने कहा कि यदि समाज को श्रेष्ठ बनाना है तो नई पीढ़ी को केवल करियर नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा भी देनी होगी। उनके प्रेरणादायी विचारों से उपस्थित शिक्षक, विद्यार्थी एवं श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और गुरु माँ के जयघोष के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
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		<title>मुनि श्री सुधासागर महाराज का चातुर्मास: इंदौर के लिए आत्मसाधना, संगठन और समाज निर्माण का स्वर्णिम अवसर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 18:24:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रेखा संजय जैन, ग्रुप संपादक श्रीफल की कलम से  इंदौर की पुण्यभूमि को परम पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज का चातुर्मास प्राप्त होना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्मसाधना, संस्कार और संगठन का महापर्व है। यह अवसर समाज को नई दिशा देने, नई चेतना जगाने और एकजुट होकर भविष्य-निर्माण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000">रेखा संजय जैन, ग्रुप संपादक श्रीफल की कलम से </span></strong></p></blockquote>
<p>इंदौर की पुण्यभूमि को परम पूज्य मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज का चातुर्मास प्राप्त होना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्मसाधना, संस्कार और संगठन का महापर्व है। यह अवसर समाज को नई दिशा देने, नई चेतना जगाने और एकजुट होकर भविष्य-निर्माण का संकल्प लेने का है।</p>
<p>इस पुण्य अवसर के लिए सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, कार्यकारी अध्यक्ष नवीन गोधा एवं महामंत्री हर्ष जैन विशेष बधाई और धन्यवाद के पात्र हैं। उनके पुरुषार्थ, समर्पण और सतत प्रयासों ने इंदौर समाज को यह दुर्लभ सौभाग्य दिलाया। पहला कदम उन्होंने बढ़ाया, अब इस यात्रा को पूरे समाज को मिलकर आगे बढ़ाना है।</p>
<p>अब समय किसी एक ,दो,तीन व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे इंदौर समाज का है। प्रत्येक श्रावक-श्राविका यह भाव रखे कि “यह चातुर्मास मेरा है, मेरी साधना का है, मेरे परिवार के संस्कारों का है और मेरे समाज के उज्ज्वल भविष्य का है।” यही भावना मुनि श्री सुधासागर महाराज के संदेश का वास्तविक स्वरूप है।</p>
<p>यह चातुर्मास केवल प्रवचनों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक परिवार में आत्मसाधना की डुबकी, बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण, युवाओं में सेवा की प्रेरणा और समाज में संगठन की नई चेतना प्रवाहित करे। जब समाज एक सूत्र में बंधता है, तब धार्मिक विकास की गंगा स्वयं प्रवाहित होती है।</p>
<p>कहा गया है कि सच्ची भक्ति के आगे भगवान भी प्रसन्न हो जाते हैं। इंदौर समाज को यह पुण्य अवसर मिला है, इसलिए इसे केवल उत्सव बनाकर नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तन का माध्यम बनाकर सार्थक करना होगा। आज आवश्यकता है कि बैठकर ऐसी योजनाएँ बनाई जाएँ जिनसे समाज का प्रत्येक व्यक्ति — बच्चे, युवा, महिलाएँ और वरिष्ठजन — किसी न किसी रूप में इस चातुर्मास से जुड़े।</p>
<p>आनंद गोधा, नवीन गोधा और हर्ष जैन जिस प्रकार सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास करते हैं, वही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। यही समन्वय और सहभागिता इस चातुर्मास की भी सफलता का आधार बने।</p>
<p>मुनि श्री सुधासागर महाराज का एक प्रेरक संदेश सदैव स्मरणीय है — “समाज का कार्य करोगे तो लड्डू नहीं, पत्थर भी खाने पड़ सकते हैं; फिर भी समाज का मार्गदर्शन और सेवा नहीं छोड़नी चाहिए।” यह वाक्य प्रत्येक समाजसेवी के लिए प्रेरणा है कि सेवा का मार्ग त्याग, धैर्य और समर्पण से ही प्रशस्त होता है।</p>
<p>इसी भावना के साथ यह भी आवश्यक है कि इंदौर में ही नहीं, जहाँ-जहाँ चातुर्मास हो रहे हैं, वहाँ भी सहयोग और सेवा का भाव लेकर पहुँचा जाए। यदि किसी मंदिर या समिति को आवश्यकता हो तो सबसे पहले पूछा जाए — “हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं?” यही जैन संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है।</p>
<p>अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर महाराज ने भी प्रेरणा दी कि परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर महाराज का स्वागत, अभिनंदन और चरणवंदन ऐसा हो कि पूरे देश में इंदौर समाज की संगठन-शक्ति और श्रद्धा की मिसाल दी जाए। साथ ही, चातुर्मास से पूर्व आचार्य श्री 108 सुनीलसागर महाराज के नगर-प्रवेश और स्वागत को भी हम सभी मिलकर ऐतिहासिक बनाएँ।</p>
<p>आइए, हम पूरी  इंदौर समाज का चातुर्मास बनाएँ। यही समय है जब मतभेदों से ऊपर उठकर मन, वचन और कर्म से एक होकर आत्मकल्याण, समाज-निर्माण और धर्म-प्रभावना का नया इतिहास लिखा जाए।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>विवाह एक संस्कार है, जिसे अति गंभीरता से निभाया जाना चाहिए : गृहस्थ जीवन धर्म, संस्कार और जिम्मेदारी का आधार </title>
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		<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:50:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विवाह को जैन परंपरा में केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि धार्मिक संस्कार माना गया है। युवा पीढ़ी को विवाह के आध्यात्मिक महत्व और गृहस्थ धर्म की जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया गया। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट। बांसवाड़ा। जैन परंपरा में विवाह को केवल सामाजिक या पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विवाह को जैन परंपरा में केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि धार्मिक संस्कार माना गया है। युवा पीढ़ी को विवाह के आध्यात्मिक महत्व और गृहस्थ धर्म की जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> जैन परंपरा में विवाह को केवल सामाजिक या पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार माना गया है। शिक्षक एवं गुरुभक्त शशांक जैन (आरा, बिहार) द्वारा साझा विचारों में विवाह के आध्यात्मिक, सामाजिक और पारिवारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवा पीढ़ी को संस्कारयुक्त गृहस्थ जीवन अपनाने का संदेश दिया गया।</p>
<p><strong>विवाह का धार्मिक महत्व</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि विधिपूर्वक कन्या का पाणिग्रहण कर उसे अपने गृह ले जाना विवाह संस्कार कहलाता है। यह धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न होने वाला संस्कार है, जिसके माध्यम से गृहस्थ धर्म में प्रवेश होता है। विवाहिता को धर्मपत्नी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह धर्म पालन में सहभागी बनती है।</p>
<p><strong>परंपराओं का पालन आवश्यक</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि विवाह के अवसर पर जिनेंद्र भगवान का अभिषेक एवं सिद्ध भगवान की विशेष पूजा की जाती है। पाणिग्रहण संस्कार के बाद सात दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है तथा इस अवधि में तीर्थयात्रा, गुरु दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न किए जाते हैं।</p>
<p><strong>युवा पीढ़ी को दिया संदेश</strong></p>
<p>शशांक जैन ने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि जीवनभर की जिम्मेदारी और संस्कार का बंधन है। इसका प्रभाव दांपत्य जीवन के साथ-साथ आने वाली संतति के संस्कारों पर भी पड़ता है। इसलिए विवाह का निर्णय परिवार की सलाह और उचित आयु में गंभीरता के साथ लिया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>गृहस्थ धर्म का करें पालन</strong></p>
<p>उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि विवाह को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे धर्म, मर्यादा और उत्तरदायित्व से जुड़ा संस्कार समझकर जीवनभर गृहस्थ धर्म का पालन करें। यही पारिवारिक सुख, सामाजिक संतुलन और संस्कारित समाज की आधारशिला है।</p>
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		<title>जीजीआईसी में छात्राओं को मोबाइल के दुष्प्रभाव की जानकारी दी: जागरूकता कार्यक्रम अखिल भारतीय महिला परिषद ने किया  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 May 2026 10:21:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कारों के महत्व, अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230; महरौनी। स्थानीय जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कारों के महत्व, अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> स्थानीय जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कारों के महत्व, अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक जहां जीवन को सरल बना रही है, वहीं इसका अनियंत्रित उपयोग छात्रों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। छात्राओं को मोबाइल के सीमित एवं सकारात्मक उपयोग की सलाह दी गई। अखिल भारतीय महिला परिषद की पदाधिकारियों ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए संस्कार, समय प्रबंधन और आत्मअनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाएं अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और सामाजिक मूल्यों को आत्मसात करें। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य शीलम गुप्ता ने परिषद की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। कार्यक्रम में अखिल भारतीय महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया, चेयरपर्सन सपना सिंघई, शाखा अध्यक्ष ममता सराफ, सपना मलैया, लवली शास्त्री,प्रीति स्वामी सहित विद्यालय की अनेक शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।</p>
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		<title>संस्कारों की पाठशाला में गूँज रही श्रमण संस्कृति की गूंज : जबरी बाग नसिया में खेल-खेल में गढ़े जा रहे कल के &#8216;आदर्श&#8217; नागरिक </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 05:58:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8216;जबरी बाग नसिया&#8217; में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। इंदौर से हरिहरसिंह चौहान की यह खबर पढ़िए&#8230; इंदौर। गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8216;जबरी बाग नसिया&#8217; में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से हरिहरसिंह चौहान की यह खबर पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8216;जबरी बाग नसिया&#8217; में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। यहां आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर न केवल बच्चों के लिए, बल्कि युवाओं और बड़ों के लिए भी आत्मिक शांति और धर्म के वास्तविक बोध का केंद्र बन गया है। इस ग्रीष्मकालीन शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा स्वरूप है। यहां पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों को बोझिल उपदेशों के बजाय मनोरंजन और खेलकूद के माध्यम से धर्म, संस्कृति और संस्कारों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे हमारे पर्व, परंपराएं और जीवन मूल्य आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक हैं।</p>
<p><strong>सांगानेर के विद्वानों का मिला सानिध्य</strong></p>
<p>शिविर में सांगानेर से पधारे विद्वान संकेत शास्त्री और सक्षम शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी और सरल मार्गदर्शन से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। उनके सानिध्य में बच्चे न केवल धार्मिक क्रियाओं को सीख रहे हैं, बल्कि व्यक्तित्व विकास के गुर भी सीख रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य &#8216;भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन&#8217; है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी रहे।</p>
<p><strong>समाज में उत्साह की लहर</strong></p>
<p>दर्शनी जैन, सारिका जैन और सपना जैन ने बताया कि इस शिविर को लेकर समाज में भारी उत्साह है। बच्चों के साथ-साथ बड़े और युवा भी उतनी ही श्रद्धा के साथ भाग ले रहे हैं। सुबह के सत्रों में जहाँ अनुशासन और ध्यान की प्रधानता होती है, वहीं शाम तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के भीतर छुपी प्रतिभा को निखारा जा रहा है। यह शिविर मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि एक &#8216;संस्कार क्रांति&#8217; है, जो बच्चों को केवल सूचना नहीं बल्कि &#8216;दृष्टि&#8217; प्रदान कर रहा है। यहाँ से निकले बच्चे निश्चित ही समाज और राष्ट्र के लिए एक बेहतर उदाहरण पेश करेंगे।</p>
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		<title>परिवार और समाज को जीवित रखना है तो सन्तान में संस्कार डालें – आचार्य विमर्शसागर जी : मेरठ में समवसरण महामंडल विधान के दौरान दिया गहरा संदेश, माता-पिता की भूमिका पर जोर </title>
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		<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:41:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेरठ में आयोजित समवसरण महामंडल विधान में आचार्य विमर्शसागर जी ने सन्तान में संस्कार डालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कार ही परिवार व समाज को जीवित रखते हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। सोनल जैन की रिपोर्ट मेरठ । मेरठ में चल रहे “श्री 1008 समवसरण महामंडल” विधान के दौरान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेरठ में आयोजित समवसरण महामंडल विधान में आचार्य विमर्शसागर जी ने सन्तान में संस्कार डालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कार ही परिवार व समाज को जीवित रखते हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। <span style="color: #ff0000">सोनल जैन की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मेरठ ।</strong> मेरठ में चल रहे “श्री 1008 समवसरण महामंडल” विधान के दौरान भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज ने परिवार और समाज को लेकर बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर परिवार और समाज को जिंदा रखना है तो सबसे पहले सन्तान में अच्छे संस्कार डालना जरूरी है।</p>
<p><strong> जिनमंदिर से शुरुआत का संदेश</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि जब भी सन्तान पहली बार किसी सीढ़ी पर चढ़े, तो वह जिनमंदिर की सीढ़ी होनी चाहिए। यह सन्तान की नहीं बल्कि माता-पिता की जिम्मेदारी है। यदि शुरुआत धर्म से होगी, तो पूरा जीवन भी सही दिशा में जाएगा।</p>
<p><strong>माता-पिता की बड़ी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि सन्तान के जन्म के 45 दिन बाद उसे जिनमंदिर ले जाना चाहिए, जैसे कोई बड़ा धार्मिक अनुष्ठान करने जा रहे हों। इससे सन्तान के जीवन में प्रारंभ से ही संस्कारों का बीजारोपण होता है।</p>
<p><strong> बिना संस्कार के जीवन अधूरा</strong></p>
<p>आचार्य विमर्शसागर जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज सन्तान जन्म तो ले रही है, लेकिन अगर उसमें संस्कार नहीं हैं तो वह जीवन पशु के समान हो जाता है। संस्कार ही मनुष्य को मनुष्य बनाते हैं और यही उसकी पहचान हैं।</p>
<p><strong> समाज और परिवार पर चेतावनी</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि वह परिवार और समाज मृत समान है, जहां धर्म और संस्कारों की चर्चा नहीं होती। ऐसे वातावरण में न तो धर्म बढ़ता है और न ही महान व्यक्तित्व जन्म लेते हैं।</p>
<p><strong> धर्म से ही जीवंत होगा समाज</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने सभी से आग्रह किया कि अपने घर-परिवार में धर्म को स्थान दें, बच्चों को संस्कार दें और समाज को जीवंत बनाएं। यही भविष्य को उज्जवल बनाने का एकमात्र रास्ता है।</p>
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		<title>जीवन में पाप दुखदाई इनको छोडे बगैर कल्याण नहीं :  समवशरण में हुई मुनि श्री सुधासागर जी की दिव्यदेशना, प्रतिमाओं में हुए सूर्यमंत्र के संस्कार </title>
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		<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 08:57:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। जब हम बुरे निमित्त से प्रभावित होंगे, बुरा होगा, संसार बुरा नहीं है। हर व्यक्ति तुम्हारे साथ बुरा कर रहा लेकिन घबराना नहीं अगर संसार के भय से डर रहे हो तो गलत है। मुनि श्री ने स्त्रियों की वेषभूषा पर व्यंग करते हुए कहा कि वह भेष धारण मत करो। जिससे दुनिया के परिणाम बिगड़ें। मुनि श्री ने आहार दान के प्रसंग में बताया कि आज ज्ञान कल्याणक का वह दिन है मुनिराज आदि सागर जी ने मुनि दीक्षा के छह माह वाद आहारग्रहण किया। उस समय श्रावक मुनिराज की आहार विधि भी नहीं जानते थे। उन्होंने श्रावकों को प्रेरित किया कि दुर्व्यसन गुटका आदि का त्याग कर जीवन को संयमी बनाए।</p>
<p><strong>लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार ने किया</strong></p>
<p>इसके पूर्व प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक शांतिधारा के उपरान्त ज्ञान कल्याणक की पूजन हुआ। इसके उपरांत प्रतिष्ठाचार्य बालब्रहमवारी प्रदीप भैया सुयश ने मुनिराज आदिसागर की आहारचर्या की विधि कराई। मध्यान्ह में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में अयोध्यापुरी में समवशरण की रचना हुई। जिसका लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार ने किया। समवशरण में विराजित देव शास्त्र गुरु की पूजन करने वैमानिक, कल्पवासी, व्यंतर, भवनवासी देवगण पहुंचे। जिन्होंने समवशरण में अपनी मनोकामना की पूर्ति की भावना से पूजन उपस्थित इन्द्र इन्द्राणियों के साथ की।</p>
<p>इस मौके पर समोवशरण से निर्यापक श्रवण मुनि सुधासागर महाराज ने संसार को नश्वर बताते हुए कहा सारी दुनिया को समझो जीवन अर्थ के अभाव में अनर्थ हो रहा है वह भूल जाता है कि उसका प्रयोजन करने से कितना अनर्थ हो जाता है। भक्त की भक्ति भगवान बनने की रहती है लेकिन इसका दुरूपयोग करके वह सर्वनाश कर लेता है। उन्होने कहा मोक्ष मार्ग के लिए कर्मों का क्षय कर मुनिव्रत पालन करना है लेकिन अर्थ किया के अभाव में भटक जाता है और प्रयोजन का स्वरूप भूल जाता है। महाराज श्री ने कहा जैन दर्शन जीवन में जोडने की शिक्षा देता है काटने की नहीं भगवान आदिनाथ ने असि कृषि और मसी की शिक्षा देकर श्रावक के छह आवश्यक बताए और कहा पाप दुखदाई है परिग्रह युक्त हैं इनको छोड़े वगैर पुण्य नही होगा। उन्होने पंचकल्याणक से सीख लेते हुए जीवन को संस्कारित बनाने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>इच्छुरस वितरित किया गया</strong></p>
<p>सायंकाल सायंकाल जिज्ञासा समाधान के दौरान मुनि श्री ने श्रावकों द्वारा की गई जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया। आचार्य भक्ति जिज्ञासा समाधान के उपरान्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी दिल्ली के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति की गई। मुनिराज आदिकुमार के आहार के उपलक्ष्य में सानत इन्द्र आनद जैन साइकिल परिवार द्वारा इच्छुरस वितरित किया गया। आयोजन की व्यवस्थाओं को सतोदय तीर्थ सेरोन अध्यक्ष सतीश जैन बंटी, महामंत्री सिंघई मनोज जैन, कोषाध्यक्ष विजय जैन लागौन, अरविन्द जैन बरोदा, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, मुकेश जैन नेता, राजेन्द्र मिठ्या, श्रयांस जैन गदयाना, अरूण जैन, अजय जैन, अभय जैन, अमित जैन, प्रदीप जैन, अवध किशोर जैन के अतिरिक्त जैन पंचायत के अध्यक्ष डा० अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया समेत पूरी टीम द्वारा संयोजित की जा रही हैं।</p>
<p><strong>भगवान का मोक्षकल्याणक एवं गजस्थ परिक्रमा</strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में 9 मार्च नैमेत्तिक अभिषेक पूजन के बाद प्रात: 7.29 बजे भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत से मोक्ष गमन तत्पश्चात अग्निकुमार देवों का आगमन, प्रभु के नख केश का विसर्जन मुनि श्री के मांगलिक प्रवचनों के उपरान्त मोक्षकल्यणक पूजन एवं विश्वशान्ति हवन होगा। उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि दोपहर 12-30 बजे गजरथ परिक्रमा मुनि श्री के प्रवचन तदुपरान्त सायंकाल 6 बजे आचार्य भक्ति जिज्ञासा समाधान होगा।</p>
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		<title>आचार्य विद्यासागर जी को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान देने हेतु प्रधानमंत्री को लिखा आग्रह पत्र : सांसद नवीन जैन बोले—आचार्यश्री का तप, त्याग और राष्ट्र निर्माण सेवा सर्वोच्च सम्मान के योग्य </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 05:51:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्र संत आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने आचार्यश्री के तप, त्याग, संयम, साहित्य और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सर्वोच्च सम्मान का पात्र बताया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट… आगरा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्र संत आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने आचार्यश्री के तप, त्याग, संयम, साहित्य और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सर्वोच्च सम्मान का पात्र बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न सम्मान प्रदान किए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत आग्रह पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में आचार्यश्री के अद्वितीय तप, त्याग, संयम और राष्ट्र निर्माण में उनके अप्रतिम योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे महान महापुरुष को राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।</p>
<p>सांसद ने अपने पत्र में लिखा कि भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित पंचशील—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य—का पूर्ण जीवन्त स्वरूप आचार्य विद्यासागर जी महाराज में स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। उनका संपूर्ण जीवन सम्यक् ज्ञान, सम्यक् श्रद्धा और सम्यक् आचरण का प्रेरक आदर्श रहा। दिगंबर परंपरा के कठोर नियमों का पालन करते हुए उन्होंने भौतिक संसाधनों से दूरी बनाए रखी और चरम संयम का जीवन जिया। एक समय भोजन, एक समय जल सेवन, सूर्यास्त के बाद मौन और सम्पूर्ण तपमय जीवन के कारण वे आधुनिक युग के एक अद्वितीय तपस्वी माने जाते हैं।</p>
<p><strong>मानवता और राष्ट्र उत्थान के लिए समर्पित जीवन </strong></p>
<p>आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के सदलगा में हुआ था। मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने आचार्य ज्ञानसागर जी से दीक्षा लेकर स्वयं को मानवता और राष्ट्र उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कठोर तपस्वी जीवन अपनाते हुए नमक, चीनी, फल, सब्जी, दूध, दही, सूखे मेवे और अंग्रेजी दवाइयों तक का परित्याग कर दिया। बिना तकिये, बिना गद्दे और बिना चादर के तख्त पर एक करवट में शयन उनके तप का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।</p>
<p><strong>मूकमाटी’ सहित उनके 50 से अधिक ग्रंथ </strong></p>
<p>संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, मराठी और कन्नड़ के वे विद्वान थे। उनके साहित्य पर 100 से अधिक पीएचडी कार्य किए जा चुके हैं। ‘मूकमाटी’ सहित उनके 50 से अधिक ग्रंथ आज आध्यात्मिक और दार्शनिक साहित्य में मार्गदर्शक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आचार्यश्री का संपूर्ण परिवार—माता-पिता और भाई—भी संन्यास मार्ग पर चला, जो जैन परंपरा में अत्यंत विरल माना जाता है।</p>
<p>आचार्यश्री ने 500 से अधिक मुनियों और 1000 से अधिक आर्यिकाओं को दीक्षा देकर अध्यात्म और मानव सेवा का नया युग प्रारंभ किया। बुंदेलखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के अनेक संस्थान उनके प्रेरणा से स्थापित हुए, जिन्होंने हजारों लोगों के जीवन को दिशा दी।</p>
<p><strong>जैन ने पत्र में प्रधानमंत्री को स्मरण कराया</strong></p>
<p>सांसद नवीन जैन ने पत्र में प्रधानमंत्री को स्मरण कराया कि वर्ष 2023 में आपने स्वयं आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया था, और उनके देहत्याग पर आपने उन्हें देश की अपूरणीय क्षति बताया था। 18 फरवरी 2024 को तीन दिन के उपवास और मौन के उपरांत उन्होंने शांतिपूर्वक समाधि ली, जिससे सम्पूर्ण विश्व में शोक और श्रद्धा की भावनाएँ उत्पन्न हुईं। सांसद ने कहा कि यद्यपि संतों को किसी शासकीय सम्मान की आवश्यकता नहीं होती, परंतु समाज के प्रत्येक वर्ग की भावना है कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज को भारत रत्न देकर उनके अमूल्य तप और राष्ट्र सेवा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाए। हाल ही में कानपुर के व्यापारी सम्मेलन में भी यह मांग सर्वसम्मति से पारित हुई थी।</p>
<p>आचार्य विद्यासागर जी महाराज का जीवन भारत की आध्यात्मिक और तप परंपरा का स्वर्णिम अध्याय है। उन्हें भारत रत्न प्रदान करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य प्रेरणा सिद्ध होगा।</p>
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		<title>आचार्यश्री निर्भय सागर जी ने कहा दिगंबर साधुओं की साधना और तप उत्कृष्ठ: मुनि शिवदत्त सागरजी को आचार्य श्री ने किया संस्कारित </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:22:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर के मउठाना स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आचार्य पदारोहण समारोह प्रभावना पूर्वक मनाया गया। इस दौरान आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;  ललितपुर। नगर के मउठाना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ललितपुर के मउठाना स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आचार्य पदारोहण समारोह प्रभावना पूर्वक मनाया गया। इस दौरान आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong> ललितपुर।</strong> नगर के मउठाना स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आचार्य पदारोहण समारोह प्रभावना पूर्वक मनाया गया। इस दौरान आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए और आर्शीवाद प्रदान किया। शुक्रवार को प्रातःकाल पार्श्वनाथ नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज के सान्निध्य में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के सम्मुख शांतिधारा का पुण्यार्जन श्रावकों ने किया। इसके उपरांत धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख पंचायत के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। शांतिसागर जूनियर हाईस्कूल की बालिकाओं ने भक्ति नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुति दी।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93896" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017.jpg" alt="" width="1280" height="827" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-300x194.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-1024x662.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-768x496.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-990x640.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />मुनिश्री संघ ने आशीर्वाद लिया </strong></p>
<p>इस मौके पर आचार्य श्री ने दिगंबर साधुओं की चर्चा को उत्कृष्ठ बताते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्या सागरजी तप और त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने सर्वाधिक श्रावकों को धर्म से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया और उत्कृष्ठ चर्या धारण कर समाधिस्थ हुए। आचार्य श्री निर्भय सागरजी ने संघ के संचालन एवं स्वाध्याय साधना को सुनिश्चित करने के उददेश्य से अपने संघस्थ ज्येष्ठ श्रमण मुनि श्री शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए। संघस्थ मुनिश्री शिवदत्त सागर जी, मुनिश्री सुदत्त सागरजी, मुनिश्री मूदत्त सागरजी, मुनिश्री पदमदत्त सागरजी, मुनिश्री गुरुदत्त सागरजी, मुनिश्री मेघदत्त सागरजी, मुनिश्री वृषभ दत्त सागरजी, क्षुल्लक श्री चंददत्त सागरजी एवं श्रीदत्तसागर जी ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर आर्शीवाद लिया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री का संगीतमय पूजन किया </strong></p>
<p>इसके पूर्व आचार्य श्री का संगीतमय पूजन का पुण्यार्जन पूर्णमति महिला मंडल, चंद्रप्रभु महिला मंडल, सुधा सिंधू संभाग, नंदा सुनंदा महिला मंडल, साधु वैयावृत्ति महिला मंडल, विद्या आदर्श श्राविका मंडल, जिनवाणी सुरक्षा महिला मंडल ने किया। सतोदय तीर्थ अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, महामंत्री मनोज जैन बबीना ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर सेरोन जी में प्रवास के लिए निवेदन किया। संचालन प्रफुल्ल जैन दैलवारा ने किया।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, सनत खजुरिया, सौरभ सीए, संजीव जैन लकी मंदिर प्रबंधक अजय जैन गंगचारी, जिनेंद्र जैन रजपुरा, मनीष जैन, आनंद जैन भावनगर, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, अखिलेश गदयाना, सतीश नजा, मनोज जैन जडी-बूटी, विमल जैन पारौल, चंचल पहलवान, अमित सराफ के अतिरिक्त अनिता मोदी, कल्पना जैन, अमृता जैन प्रधानाचार्या आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>आगरा में हुआ जैन पाठशालाओं का भव्य सम्मेलन: मुनिश्री सौम्यसागर जी के सानिध्य में बच्चों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियाँ </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:09:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में शहर की सभी जैन पाठशालाओं का सम्मेलन पूज्य मुनिश्री सौम्यसागर जी महाराज के सानिध्य में शान्तिसागर सभागार हरीपर्वत पर संपन्न हुआ। बच्चों की धार्मिक प्रस्तुतियों और शोभायात्रा ने आयोजन को भव्यता प्रदान की। पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट… आगरा। दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आज शहर की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में शहर की सभी जैन पाठशालाओं का सम्मेलन पूज्य मुनिश्री सौम्यसागर जी महाराज के सानिध्य में शान्तिसागर सभागार हरीपर्वत पर संपन्न हुआ। बच्चों की धार्मिक प्रस्तुतियों और शोभायात्रा ने आयोजन को भव्यता प्रदान की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आज शहर की समस्त जैन पाठशालाओं का संयुक्त सम्मेलन पूज्य मुनिश्री सौम्यसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में शान्तिसागर सभागार, हरीपर्वत पर सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट से हुआ।</p>
<p>सम्मेलन में बेलनगंज, छीपिटोला, ओल्ड ईदगाह, कर्मयोगी कमलानगर, सेक्टर 7 सहित विभिन्न क्षेत्रों की पाठशालाओं के विद्यार्थियों ने मंच पर धार्मिक नृत्य, भक्ति गीत, समूहगान और प्रेरक प्रस्तुतियाँ दीं। बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।</p>
<p>मुनिश्री सौम्यसागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज के भौतिकवादी युग में बच्चों के लिए जैन संस्कृति और नैतिक शिक्षा का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाठशाला के माध्यम से प्राप्त आध्यात्मिक संस्कार ही जीवन का सच्चा आधार हैं। अभिभावकों से उन्होंने आग्रह किया कि वे बच्चों को नियमित रूप से पाठशाला भेजें ताकि उनमें धर्म और चारित्रिक संस्कार विकसित हो सकें।</p>
<p><strong>शोभायात्रा निकाली, झांकियों और भक्ति नारों से गूंजा वातावरण </strong></p>
<p>सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के पश्चात् नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें धार्मिक झांकियों और भक्ति नारों ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। शोभायात्रा में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। इस अवसर पर परिषद अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, मंत्री मनीष जैन ठेकेदार, कोषाध्यक्ष राकेश जैन पर्दे वाले, जितेंद्र जैन, विमल जैन, सतेंद्र जैन साहूला, राजेंद्र जैन एडवोकेट, मनोज जैन बल्लों, दीपक जैन, विशाल जैन, सुभाष जैन, अनुज जैन क्रांति, मनीष जैन लवली, सुबोध पाटनी, कुमार मंगलम, दीपक जैन बोतल वाले, अनिल जैन रईस, राजेश जैन, नरेश लुहारिया तथा मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।</p>
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