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	<title>Sanganer &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Sanganer &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रमण संस्कृति संस्थान बना जैन शिक्षा का सशक्त केंद्र : सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से हजारों विद्वानों ने रचा स्वर्णिम इतिहास </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:30:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सांगानेर स्थित श्रमण संस्कृति संस्थान ने तीन दशकों में जैन शिक्षा, संस्कार और धर्मप्रभावना के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। हजारों विद्वानों, साधकों और विद्यार्थियों का निर्माण कर यह संस्थान जैन संस्कृति के पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट। मुरैना/द्रोणगिरी। श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सांगानेर स्थित श्रमण संस्कृति संस्थान ने तीन दशकों में जैन शिक्षा, संस्कार और धर्मप्रभावना के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। हजारों विद्वानों, साधकों और विद्यार्थियों का निर्माण कर यह संस्थान जैन संस्कृति के पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/द्रोणगिरी।</strong> श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर आज जैन शिक्षा, संस्कार और धर्मप्रभावना का एक प्रतिष्ठित केंद्र बन चुका है। परम पूज्य निर्यापक मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद तथा डॉ. शीतलचंद्र जैन के दूरदर्शी निर्देशन में 1 सितंबर 1996 को स्थापित यह संस्थान एक छोटे से संकल्प से प्रारंभ होकर आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।</p>
<p><strong>शिक्षा और संस्कार का अनूठा संगम</strong></p>
<p>संस्थान में वर्तमान में लगभग 200 विद्यार्थी रहकर शास्त्री की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 1,000 से अधिक विद्यार्थी यहां से शास्त्री बन चुके हैं। इनमें से 600 से अधिक विद्वान विभिन्न सरकारी सेवाओं में रहकर समाज और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। संस्थान का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना है।</p>
<p><strong>साधना और वैराग्य की तपोभूमि</strong></p>
<p>संस्थान ने अनेक विद्यार्थियों को संयम और वैराग्य के मार्ग पर अग्रसर किया है। यहां से शिक्षित अनेक साधक आज दिगंबर मुनि, ऐलक एवं ब्रह्मचारी के रूप में धर्मप्रभावना में संलग्न हैं। संस्थान शिक्षा के साथ आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को भी समान महत्व देता है।</p>
<p><strong>आधुनिक तकनीक से जुड़ी धर्म शिक्षा</strong></p>
<p>द्वादशवर्षीय अध्ययन योजना के माध्यम से देशभर के 30 हजार से अधिक विद्यार्थी घर बैठे अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही हजारों पाठशालाओं का संचालन, 2,000 से अधिक मंदिरों में शिविर तथा 1,200 से अधिक मंदिरों में दशलक्षण महापर्व के दौरान विद्वानों की व्यवस्था कर संस्थान निरंतर धर्मसेवा कर रहा है।</p>
<p><strong>बालिका शिक्षा का प्रेरक केंद्र</strong></p>
<p>संस्थान द्वारा संचालित संत सुधासागर बालिका छात्रावास में लगभग 200 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। यहां शिक्षा के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। छात्रावास से निकली अनेक छात्राएं आज विदुषी, प्रभावशाली वक्ता एवं समाज की प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।</p>
<p><strong>संघर्ष से सफलता तक की यात्रा</strong></p>
<p>संस्थान ने अपने प्रारंभिक वर्षों में अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन गुरु कृपा, समर्पण और दूरदर्शी नेतृत्व के बल पर यह निरंतर प्रगति करता रहा। आज श्रमण संस्कृति संस्थान जैन समाज में अनुशासन, शिक्षा, संस्कार और धर्मसेवा का सशक्त प्रतीक बन चुका है।</p>
<p><strong>प्रेरणा का संदेश</strong></p>
<p>संस्थान की यात्रा यह सिद्ध करती है कि यदि उद्देश्य समाजहित, धर्मसेवा और संस्कार निर्माण का हो तथा गुरु का आशीर्वाद प्राप्त हो, तो एक छोटा प्रयास भी समय के साथ विशाल आंदोलन का रूप ले सकता है।</p>
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		<title>विपत्तियों के मध्य ही सफलता का असली आनंद : परिस्थितियाँ हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा लेती हैं,  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 08:44:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन में जब भी हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो वह हमें बहुत सरल और सहज प्रतीत होता है। हमें लगता है कि बस कुछ प्रयासों के बाद हम अपने लक्ष्य तक पहुँच जाएंगे। किन्तु जैसे-जैसे हम उस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, हमें वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। तब ज्ञात [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन में जब भी हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो वह हमें बहुत सरल और सहज प्रतीत होता है। हमें लगता है कि बस कुछ प्रयासों के बाद हम अपने लक्ष्य तक पहुँच जाएंगे। किन्तु जैसे-जैसे हम उस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, हमें वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। तब ज्ञात होता है कि सफलता का रास्ता उतना आसान नहीं है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, अंशुल शास्त्री का यह आलेख के रूप में मनोज जैन नायक की प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सांगानेर।</strong> जीवन में जब भी हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो वह हमें बहुत सरल और सहज प्रतीत होता है। हमें लगता है कि बस कुछ प्रयासों के बाद हम अपने लक्ष्य तक पहुँच जाएंगे। किन्तु जैसे-जैसे हम उस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, हमें वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। तब ज्ञात होता है कि सफलता का रास्ता उतना आसान नहीं है, जितना दूर से दिखाई देता था। ‎अक्सर ऐसा होता है कि जिस क्षेत्र में हम आगे बढ़ना चाहते हैं, उसी क्षेत्र के कुछ लोग हमारे उत्साह को कम करने का प्रयास करते हैं। कभी आलोचनाएँ सामने आती हैं, कभी उपेक्षा मिलती है, तो कभी अपने ही लोग निराश करने वाले शब्द बोल देते हैं। उस समय मन में अनेक प्रश्न उठते हैं कि आखिर हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। लेकिन वास्तव में यही परिस्थितियाँ हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा ले रही होती हैं।</p>
<p>‎हर महान कार्य की नींव संघर्षों और विपत्तियों पर ही रखी जाती है। यदि मार्ग में कठिनाइयाँ न आएँ, तो सफलता का मूल्य भी समझ में नहीं आता। कई बार विपत्ति किसी विरोधी के रूप में नहीं, बल्कि अपने ही किसी प्रिय व्यक्ति के रूप में सामने आ जाती है। उसके शब्द और व्यवहार हमें पीड़ा पहुँचा सकते हैं, परन्तु ऐसे समय में हमें टूटना नहीं चाहिए। विपत्ति का कार्य हमें रोकना है और हमारा कार्य उससे आगे बढ़ जाना है।</p>
<p>‎लोग क्या कहेंगे, यह चिंता भी एक बड़ी विपत्ति है। संसार का स्वभाव ही है कहना। जब आप कुछ नहीं करते, तब भी लोग कहते हैं; और जब आप कुछ बड़ा करने का प्रयास करते हैं, तब भी लोग कहते हैं। इसलिए दूसरों की बातों से प्रभावित होकर अपने कदम रोक लेना बुद्धिमानी नहीं है। हमें अपने लक्ष्य पर दृष्टि रखनी चाहिए, न कि लोगों की टिप्पणियों पर।</p>
<p>‎याद रखिए, संघर्ष के दिनों में जो आँसू बहते हैं, वे ही भविष्य में सफलता की मुस्कान बनकर लौटते हैं। आज की कठिनाइयाँ कल की उपलब्धियों की कहानी बन जाती हैं। जब मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, तब उसे रास्ते की परेशानियाँ याद नहीं रहतीं; उसे केवल अपनी सफलता और उससे मिली खुशी याद रहती है।</p>
<p>‎इसलिए विपत्तियों से घबराइए मत। उनका सामना कीजिए, उनसे सीखिए और निरंतर आगे बढ़ते रहिए। क्योंकि विपत्तियाँ सफलता की शत्रु नहीं, बल्कि सफलता तक पहुँचाने वाली सीढ़ियाँ हैं। और सच तो यह है कि विपत्तियों के बीच प्राप्त हुई सफलता का आनंद ही जीवन का सबसे बड़ा आनंद होता है।</p>
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		<title>जयपुर की शुभा जैन को मिला प्रतिष्ठित रत्नाकर पुरस्कार : धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविर में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया </title>
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		<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:08:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गायत्री नगर महारानी फार्म की शुभा जैन ने धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृत संस्थान, सांगानेर द्वारा आयोजित धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविर में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230; जयपुर। गायत्री नगर महारानी फार्म की शुभा जैन ने धार्मिक और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गायत्री नगर महारानी फार्म की शुभा जैन ने धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृत संस्थान, सांगानेर द्वारा आयोजित धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविर में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> गायत्री नगर महारानी फार्म की शुभा जैन ने धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृत संस्थान, सांगानेर द्वारा आयोजित धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविर में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। शुभा जैन ने शिविर के दौरान द्रव्य संग्रह की कक्षा में पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद सांगानेर में आयोजित मुख्य परीक्षा को भी उन्होंने सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया। इस दोहरी सफलता के लिए उन्हें प्रतिष्ठित &#8216;रत्नाकर पुरस्कार&#8217; से सम्मानित किया गया है। एडवोकेट संदीप जैन की धर्मपत्नी और अशोक-अनीता रावका की पुत्री शुभा की इस उपलब्धि से पूरे गायत्री नगर जैन समाज का गौरव बढ़ा है। इस विशेष सफलता पर गायत्री नगर जैन समाज सहित कई सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें हार्दिक बधाई देकर उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की है।</p>
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		<title>150 से अधिक शिविरार्थियों ने प्रथम, द्वितीय, तृतीय भाग और द्रव्य संग्रह की परीक्षा दी : गायत्री नगर में श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर संपन्न  </title>
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		<pubDate>Fri, 29 May 2026 04:24:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर,जयपुर और अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति ( भारत ) की ओर से श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर गायत्री नगर के श्री दिगम्बर जैन मन्दिर,महारानी फार्म में गुरुवार को संपन्न हुआ। प्रातः 8 बजे परीक्षा परिणाम घोषणा की गई सम्मान कर पुरस्कार प्रदान किए गए। शिविर संयोजिका अनिता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयपुर</strong>। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर,जयपुर और अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति ( भारत ) की ओर से श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर गायत्री नगर के श्री दिगम्बर जैन मन्दिर,महारानी फार्म में गुरुवार को संपन्न हुआ। प्रातः 8 बजे परीक्षा परिणाम घोषणा की गई सम्मान कर पुरस्कार प्रदान किए गए। शिविर संयोजिका अनिता जैन बडजात्या ने अवगत कराया कि संस्थान की शिक्षिका देशना दीदी ने प्रथम, द्वितीय, तृतीय भाग और द्रव्य संग्रह की परीक्षा में 150 से अधिक बैठे शिविरार्थियों का परिणाम घोषित किया। कार्यक्रम का संचालन संयोजिका मंजू सेवा वाली ने किया। सेवा वाली ने बताया कि कार्यक्रम का दीप प्रज्वलन मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष अरुण शाह, उपाध्यक्ष विजय सोगानी, मंत्री राजेश वोहरा, संयुक्त मंत्री संजय ठोलिया, कोषाध्यक्ष राकेश छाबडा,संयोजक पदम झांझरी, संतोष गंगवाल, गजेन्द्र छाबडा, राकेश पाटोदी आदि ने किया।</p>
<p><strong>समिति पदाधिकारी सम्मनित हुए</strong></p>
<p>मंगलाचरण मंजू सेवा वाली, अनिता बडजात्या, सुनीता काला ने किया। मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों का स्वागत महिला महासमिति और शिविर संयोजिकाओं ने किया। सभी संयोजिका का सम्मान संस्थान की ओर से किया गया। इस अवसर पर समाज के श्रेष्ठी पूर्व अध्यक्ष धूपचंद शाह, प्रकाश बडजात्या, जीतेन्द्र बाकलीवाल, अशोक रावका, अनिल पोल्याका एवं अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन आदि सम्मलित थे।</p>
<p><strong>शिविर की सराहना की</strong></p>
<p>इस अवसर पर सभी पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान किया एवं प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कार दिए गए। साथ ही अन्य को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। शिविर संयोजिका मंजू, अध्यक्ष अरुण शाह, देशना दीदी एवं पं. अजित शास्त्री ने शिविर के बारे में बताया कि गायत्री नगर का शिविर बहुत ही उत्साह पूर्वक, धर्म प्रभावना के साथ संपन्न हुआ। श्रमण संस्कृति संस्थान की समस्त व्यवस्थाओं की भूरि भूरि प्रशंसा की। शिविर संयोजिका अनिता बडजात्या ने आभार माना।</p>
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		<title>माँ जिनवाणी की शोभायात्रा के साथ शिविर का शुभारंभ : बैंडबाजों के साथ बच्चे पाठशाला से संबंधित स्लोगन की तख्तियां ,जैन धर्म के झंडे लेकर चले </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_camp_was_inaugurated_with_the_procession_of_maa_jinvani/</link>
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		<pubDate>Mon, 18 May 2026 04:04:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गायत्री नगर में रविवार को को प्रातः 8 बजे को माँ जिनवाणी की भव्य शोभायात्रा मंदिर जी से शुभारंभ हुई। शिविर संयोजिका अनिता जैन बडजात्या ने अवगत कराया कि जुलूस बैंडबाजों के साथ बच्चे पाठशाला से संबंधित स्लोगन की तख्तियां ,जैन धर्म के झंडे,महिलाएं मंगल कलश और पुरुष माँ जिनवाणी को लेकर चल रहे थे। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गायत्री नगर में रविवार को को प्रातः 8 बजे को माँ जिनवाणी की भव्य शोभायात्रा मंदिर जी से शुभारंभ हुई। शिविर संयोजिका अनिता जैन बडजात्या ने अवगत कराया कि जुलूस बैंडबाजों के साथ बच्चे पाठशाला से संबंधित स्लोगन की तख्तियां ,जैन धर्म के झंडे,महिलाएं मंगल कलश और पुरुष माँ जिनवाणी को लेकर चल रहे थे। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर,जयपुर और अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति (भारत ) द्वारा आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर का आयोजन श्री दिगम्बर जैन मंदिर,महारानी फार्म, गायत्री नगर में रविवार को</p>
<p>को प्रातः 8 बजे को माँ जिनवाणी की भव्य शोभा यात्रा मंदिर जी से शुभारंभ हुई। शिविर संयोजिका अनिता जैन बडजात्या ने अवगत कराया कि जुलूस बैंडबाजों के साथ बच्चे पाठशाला से संबंधित स्लोगन की तख्तियां ,जैन धर्म के झंडे,महिलाएं मंगल कलश और पुरुष माँ जिनवाणी को लेकर चल रहे थे। शोभायात्रा का संचालन संयोजिका मंजू सेवा वाली, सुनीता काला ने किया। जुलूस मार्ग में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए गिफ्ट वितरण अनिल रेखा झांझरी, कमला, किरण, बिल्टी वालों ने किया। जुलूस में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष अरुण शाह, मंत्री राजेश बोहरा, उपाध्यक्ष विजय सोगानी कोषाध्यक्ष, राकेश छाबड़ा, संयुक्त मंत्री संजय ठोलिया, राकेश पाटोदी, बसंत बकलीवाल, संतोष गंगवाल,एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति अनिल टोंग्या, राजेन्द्र सोगानी, आलोक शाह, पुलक मंच की राष्ट्रीय महामंत्री बीना टोंग्या, जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री</p>
<p>उदयभान जैन, संतोष काला,अशोक विधानसभा वाले, पारस जैन, संतोष बांसखो, सुनील तिज़ारा, धूप शाह, अशोक रावका, रूपचंद गोदिका, पदम पांड्या आदि महानुभाव उपस्थित थे। जुलूस मंदिर पहुंचने के पश्चात शिविर पाठशाला उद्घाटन कर्ता सुनील सोगानी परिवार द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन भक्तामर महिला ग्रुप द्वारा मंगलाचरण संस्थान की विदुषियों ने किया। मंगल कलश स्थापना सुशीला गोधा, अमिता जैन( ईटा नगर ) संगीता जैन ( डिमांपुर )सारसमल,कमला देवी झांझरी द्वारा पंडित अजित शास्त्री के विधि विधान पूर्वक मंत्रोचार से कराया गया। मंच संचालन अरुण शाह द्वारा किया गया। शिविर के संबंध में जानकारी शिविर संयोजक</p>
<p>मंजू जैन सेवावाले ने दी। अन्य शिविर संयोजिका अनिता बडजात्या एवं सुनीता काला ने आगंतुकों का स्वागत सत्कार किया गया। सभी आगंतुकों को अल्पाहार की व्यवस्था कमला दीपक बिलाला परिवार द्वारा कराया गया। आभार मंदिर समिति के मंत्री राजेश वोहरा ने माना।</p>
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		<title>धर्म भय का नाम नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है : ‎ ‎धर्म तो वह पवित्र चेतना है, जो मनुष्य को उसके भीतर के सत्य से परिचित कराती है </title>
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		<pubDate>Tue, 12 May 2026 10:09:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। ‎यह कैसे करना होगा ? इसकी क्रियाएँ क्या होंगी? कहीं कोई गलती न हो जाए? यदि त्रुटि हो गई तो उसका परिणाम क्या [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। ‎यह कैसे करना होगा ? इसकी क्रियाएँ क्या होंगी? कहीं कोई गलती न हो जाए? यदि त्रुटि हो गई तो उसका परिणाम क्या होगा? <span style="color: #ff0000">मुरैना/सांगानेर से पढ़िए, अंशुल जैन शास्त्री का यह आलेख, प्रस्तुति मनोज जैन नायक&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सांगानेर।</strong> जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। ‎यह कैसे करना होगा ? इसकी क्रियाएँ क्या होंगी? कहीं कोई गलती न हो जाए? यदि त्रुटि हो गई तो उसका परिणाम क्या होगा? ‎इन प्रश्नों की भीड़ में मनुष्य का मन अक्सर भय से भर जाता है ‎परंतु, सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि ‎क्या वास्तव में धर्म भय का नाम है? ‎क्या धर्म केवल डराने के लिए है? ‎या फिर धर्म वह प्रकाश है, जो जीवन को सही दिशा प्रदान करता है? यदि वास्तविकता में देखा जाए तो धर्म कभी भय का विषय रहा ही नहीं। ‎हमने स्वयं अपनी संकीर्ण धारणाओं और सामाजिक दबावों के कारण धर्म को भय का रूप दे दिया है। ‎हम डरते हैं कि कहीं कोई दोष न लग जाए, कोई हमें तुच्छ न समझ ले, कोई हमारी आलोचना न कर दे। ‎लेकिन धर्म का वास्तविक स्वरूप इन भय और आशंकाओं से कहीं ऊपर है। ‎धर्म तो वह पवित्र चेतना है, जो मनुष्य को उसके भीतर के सत्य से परिचित कराती है।</p>
<p>वह जीवन को संयम, विवेक और आत्मबोध की ओर ले जाती है। ‎धर्म मनुष्य को दबाता नहीं, बल्कि उसे भीतर से इतना मजबूत बनाता है कि वह स्वयं अपने जीवन का सही निर्धारण कर सके। ‎हाँ, यह सत्य है कि कभी-कभी कुछ लोग, जो स्वयं को धर्म का ज्ञाता या महान व्यक्ति मान लेते हैं, धर्म के नाम पर दूसरों को भयभीत करने का प्रयास करते हैं। ‎वे धर्म को कठोर नियमों और भय की सीमाओं में बाँध देते हैं ‎परंतु, किसी व्यक्ति का व्यवहार धर्म नहीं होता।</p>
<p><strong> वास्तव में धर्म डर का नाम नहीं है</strong></p>
<p>‎धर्म का वास्तविक स्वरूप तो करुणा, शांति और आत्मजागरण है। ‎यदि धर्म को सही अर्थों में समझा जाए, तो वही मनुष्य के जीवन को धरती से लेकर मोक्ष तक की यात्रा में सुगम बनाता है। ‎महान आचार्यों और ऋषियों ने अपने शास्त्रों में धर्म को कभी भय का साधन नहीं कहा। ‎उन्होंने धर्म को आत्मा को पहचानने का मार्ग बताया है। ‎उन्होंने शास्त्रों को जीवन का आधार इसलिए माना, क्योंकि वे मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं। ‎वास्तव में धर्म डर का नाम नहीं है।</p>
<p>‎धर्म तो प्रेरणा का नाम है। ‎वह प्रेरणा, जो मनुष्य को पतन से उठाकर उत्कर्ष की ओर ले जाए; ‎जो उसे भीतर से निर्मल बनाए ‎और जो उसके जीवन में ऐसा प्रकाश भर दे कि फिर उसे किसी भय की आवश्यकता ही न रहे। जहाँ भय समाप्त होता है, वहीं से सच्चे धर्म की शुरुआत होती है।</p>
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		<title>अतीत की जड़ों से भविष्य की उड़ान : श्री दिगंबर जैन आचार्य संस्कृत महाविद्यालय की अमर गाथा </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:25:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ ‎भारत वर्ष की सांस्कृतिक चेतना में कुछ संस्थान केवल ‎भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विराट आकाश में केवल शिक्षण-स्थल नहीं, अपितु परंपरा के सजीव तीर्थ स्वरूप होते हैं। ऐसा ही एक अनुपम, अद्वितीय एवं गौरवगाथा से मंडित संस्थान है श्री दिगंबर जैन आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, सांगानेर, जयपुर (राजस्थान) जो अनवरत प्रवाहित ज्ञान गंगा का अमिट स्रोत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> ‎भारत वर्ष की सांस्कृतिक चेतना में कुछ संस्थान केवल ‎भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विराट आकाश में केवल शिक्षण-स्थल नहीं, अपितु परंपरा के सजीव तीर्थ स्वरूप होते हैं। ऐसा ही एक अनुपम, अद्वितीय एवं गौरवगाथा से मंडित संस्थान है श्री दिगंबर जैन आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, सांगानेर, जयपुर (राजस्थान) जो अनवरत प्रवाहित ज्ञान गंगा का अमिट स्रोत है। <span style="color: #ff0000">मुरैना/सांगानेर से पढ़िए, लेखक अंशुल जैन शास्त्री की यह प्रस्तुति मनोज जैन नायक के माध्यम से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सांगानेर। ‎</strong>भारतवर्ष की सांस्कृतिक चेतना में कुछ संस्थान केवल ‎भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विराट आकाश में केवल शिक्षण-स्थल नहीं, अपितु परंपरा के सजीव तीर्थ स्वरूप होते हैं। ऐसा ही एक अनुपम, अद्वितीय एवं गौरवगाथा से मंडित संस्थान है श्री दिगंबर जैन आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, सांगानेर, जयपुर (राजस्थान) जो अनवरत प्रवाहित ज्ञान गंगा का अमिट स्रोत है।</p>
<p>वर्ष1885 का वह दासत्वग्रस्त काल, जब देश अंग्रेजी शासन की पराधीनता में जकड़ा हुआ था और भारतीय ज्ञान-परंपराएँ विशेषतः जैन दर्शन संस्कृत एवं प्राकृत का संरक्षण विलुप्ति के कगार पर था। उसी समय इस महाविद्यालय की स्थापना एक दिव्य दीप स्तंभ के रूप में हुई, जिसने अज्ञान अंधकार में ज्ञान प्रदीप प्रज्वलित किया। ‎इसी ऐतिहासिक प्रवाह के मध्य पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर पंडित श्री सदासुख दास जी की प्रेरणा तथा जैन समाज के निष्ठापूर्ण समर्पण से एक दिव्य बीज का रोपण हुआ। ज्ञान, अनुशासन एवं संस्कृति का वह बीज, जो कालांतर में एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित हुआ। ‎जयपुर के अधिपति महाराज सवाई मानसिंह बहादुर द्वितीय द्वारा प्रदत्त पुण्यभूमि पर “जैन पाठशाला” की स्थापना की गई। जिसने इस संस्थान को संगठित, सुदृढ़ एवं स्थायी स्वरूप प्रदान किया। यह केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, अपितु सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त केंद्र बनकर उदित हुई। ‎जैन समाज के उदार दान, त्याग एवं तपश्चर्या से यह महाविद्यालय निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर होता रहा। इसके प्रथम अध्यक्ष धन्नालाल फौजदार ने अपनी दूरदर्शिता से इसकी आधारशिला को दृढ़ किया। तदनंतर भोरीलाल सेठी जैसे समर्पित नेतृत्व ने इसे उत्कर्ष के शिखर तक पहुँचाया। ‎वर्तमान में इस महाविद्यालय का संचालन पूर्व आईएएस अधिकारी नरेशकुमार सेठी के कुशल नेतृत्व में हो रहा है। जिनकी प्रशासनिक दक्षता एवं दूरदृष्टि इस संस्थान को निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर कर रही है। ‎इस महाविद्यालय के प्रथम प्रधानाचार्य पंडित काशीनाथ थे, जिनकी विद्वत्ता, अनुशासनप्रियता एवं शिक्षण-निष्ठा ने इसे आदर्श शिक्षण-केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित किया। उनके पश्चात फूलचंद ने भी इस गौरवपूर्ण परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखा।</p>
<p><strong>दुर्लभ पांडुलिपियाँ भारतीय ज्ञान-परंपरा की अमूल्य निधि </strong></p>
<p>‎वर्तमान में इस महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिलकुमार जैन हैं, जिनके नेतृत्व में यह संस्थान विकास, नवोन्मेष एवं शैक्षणिक उत्कर्ष की दिशा में अग्रसर है। ‎यह संस्थान केवल ज्ञानार्जन का स्थल नहीं, अपितु संस्कार-संवर्धन का दिव्य धाम है। यहाँ पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ जीवन-मूल्यों, अनुशासन एवं आत्म-विकास का समन्वित शिक्षण प्रदान किया जाता है। यही कारण है कि यहाँ से शिक्षित सहस्राधिक विद्यार्थी सम्पूर्ण भारतवर्ष में जैन दर्शन, भारतीय संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों का आलोक प्रसारित कर रहे हैं। वर्तमान समय में यह महाविद्यालय सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी से संबद्ध है, जो इसकी शैक्षणिक गरिमा एवं राष्ट्रीय मान्यता को सुदृढ़ करता है। ‎इस महाविद्यालय की विशिष्टता बहुआयामी है। यहाँ स्थित भव्य ऑडिटोरियम विविध सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों का साक्षी है। साथ ही, समृद्ध पुस्तकालय में संरक्षित सैकड़ों दुर्लभ पांडुलिपियाँ भारतीय ज्ञान-परंपरा की अमूल्य निधि के रूप में संरक्षित हैं।</p>
<p><strong>संस्कृत महाविद्यालय जीवंत धरोहर </strong></p>
<p>वर्ष 2002 में मुनि श्री सुधासागर जी के मार्गदर्शन एवं डॉ. शीतलचंद्र जैन के निर्देशन में इस महाविद्यालय का स्थानांतरण मनिहारों के रास्ते से सांगानेर तक किया गया, जो विकास एवं विस्तार की दिशा में एक युगांतकारी कदम सिद्ध हुआ। वर्तमान में यह महाविद्यालय संस्कृत एवं जैन जगत में एक अद्वितीय स्थान रखता है, जहाँ सैकड़ों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यह केवल संख्या नहीं, अपितु उस अखंड परंपरा, तप एवं श्रद्धा का प्रतीक है, जो युगों से अविच्छिन्न रूप से प्रवाहित हो रही है। ‎यदि इस महाविद्यालय को एक जीवंत धरोहर कहा जाए, तो यह सर्वथा उपयुक्त होगा। यह वह ज्ञानदीप है, जो भारतीय संस्कृति, जैन परंपरा एवं शाश्वत मूल्यों की ज्योति को अनादि-अनंत काल तक आलोकित करता रहेगा। ‎अतः ऐसे महान संस्थान का संरक्षण, संवर्धन एवं सम्मान करना प्रत्येक समाजजन का परम कर्तव्य है क्योंकि, यही हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, परंपरा और उज्ज्वल भविष्य का आधार है।</p>
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		<title>भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर आयोजन : राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में 7 छात्रों ने लिया हिस्सा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/7_students_participated_in_the_national_essay_competition/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 12:54:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड, सांगानेर द्वारा आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) एवं चरम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में दिगंबर जैन पाठशाला, डडूका के 7 प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; डडूका। भारतवर्षीय श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड, सांगानेर द्वारा आदि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड, सांगानेर द्वारा आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) एवं चरम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में दिगंबर जैन पाठशाला, डडूका के 7 प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> भारतवर्षीय श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड, सांगानेर द्वारा आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) एवं चरम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में दिगंबर जैन पाठशाला, डडूका के 7 प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</p>
<p><strong>दो विषयों पर दी गई निबंध प्रविष्टियां</strong></p>
<p>पाठशाला प्रेरक एवं आयोजन संयोजक अजीत कोठिया ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता के अंतर्गत दो प्रमुख विषय निर्धारित किए गए थे—</p>
<p>1. भगवान आदिनाथ के षट्कर्म</p>
<p>2. भगवान महावीर की अहिंसा</p>
<p>इन विषयों पर डडूका पाठशाला से निश्चल जैन, मिष्ठी जैन, माही जैन, भाग्य एस. जैन, हर्षल जैन, सिद्धम जैन एवं दीक्षिता सेठ ने लगभग 800 शब्दों में अपने निबंध प्रस्तुत किए।</p>
<p><strong>दो वर्गों में आयोजित हुई प्रतियोगिता</strong></p>
<p>कोठिया ने बताया कि प्रतियोगिता दो वर्गों जूनियर एवं सीनियर में आयोजित की गई। जूनियर वर्ग में 12 वर्ष तक के छात्र-छात्राओं तथा सीनियर वर्ग में 12 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के विजेताओं को भारतवर्षीय श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड, सांगानेर द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।</p>
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		<title>बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक संस्कारों का विकास करना उद्देश्य : विद्वत नवनीत शास्त्री पुनः धार्मिक संस्कार शिविर के प्रभारी मनोनीत </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:29:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के विद्वान नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविरों के आयोजन के लिए चम्बल संभाग का शिविर प्रभारी पुनः मनोनीत किया गया है। ज्ञातव्य हो कि श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) द्वारा प्रतिवर्ष पूरे भारतवर्ष में ग्रीष्मकालीन धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। पढ़िए मनोज जैन नायक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के विद्वान नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविरों के आयोजन के लिए चम्बल संभाग का शिविर प्रभारी पुनः मनोनीत किया गया है। ज्ञातव्य हो कि श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) द्वारा प्रतिवर्ष पूरे भारतवर्ष में ग्रीष्मकालीन धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> नगर के विद्वान नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविरों के आयोजन के लिए चम्बल संभाग का शिविर प्रभारी पुनः मनोनीत किया गया है। ज्ञातव्य हो कि श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) द्वारा प्रतिवर्ष पूरे भारतवर्ष में ग्रीष्मकालीन धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों का उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक संस्कारों का विकास करना होता है।</p>
<p><strong>मुनि सुधासागर महाराज के सान्निध्य में हुई नियुक्ति</strong></p>
<p>शिविरों की रूपरेखा तय करने हेतु ललितपुर में आयोजित बैठक में जगतपूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में देशभर के शिविर प्रभारियों की नियुक्ति की गई। इस अवसर पर भारतवर्षीय शिविर प्रभारी उत्तमचंद पाटनी अपनी टीम एवं अन्य प्रभारियों के साथ उपस्थित रहे। मुनि श्री ने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि बच्चों के भीतर संस्कारों का बीजारोपण करने के लिए सभी जैन मंदिरों में ऐसे शिविरों का आयोजन अनिवार्य रूप से होना चाहिए। उन्होंने “मां जिनवाणी” के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया।</p>
<p><strong>चम्बल संभाग में सक्रिय भूमिका</strong></p>
<p>सांगानेर संस्थान द्वारा पुनः चम्बल संभाग का प्रभारी विद्वत नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि वे पिछले कई वर्षों से चम्बल संभाग में वृहद स्तर पर धार्मिक शिविरों का सफल संचालन कर धर्म प्रभावना कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मई-जून में होंगे शिविर आयोजित</strong></p>
<p>नवनीत जैन ‘शास्त्री’ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष भी पूज्य गुरुदेव मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से चम्बल संभाग के विभिन्न जिनालयों में मई से जून माह के दौरान धार्मिक संस्कार शिविर आयोजित किए जाएंगे। समाज के गणमान्य श्रेष्ठजनों ने शिविरों के सफल आयोजन एवं धर्म प्रभावना के लिए शिविर प्रभारी नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को मंगल शुभकामनाएं प्रदान कीं। ये शिविर सकल दिगंबर जैन समाज, विभिन्न संस्थाओं एवं दानवीरों के सहयोग से आयोजित किए जाते हैं।</p>
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		<title>चौरई में गूंजेगा संस्कारों का महाकुंभ: जैन संस्कार 360 डिग्री शिविर से युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा </title>
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		<pubDate>Thu, 19 Mar 2026 09:54:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्तमान डिजिटल युग में जहां युवा पीढ़ी तेजी से पाश्चात्य प्रभावों और कुरीतियों की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के मार्गदर्शन में छिंदवाड़ा का चौरई शहर एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी पहल का साक्षी बनने जा रहा है। छिंदवाड़ा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; छिंदवाड़ा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्तमान डिजिटल युग में जहां युवा पीढ़ी तेजी से पाश्चात्य प्रभावों और कुरीतियों की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के मार्गदर्शन में छिंदवाड़ा का चौरई शहर एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी पहल का साक्षी बनने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">छिंदवाड़ा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>छिंदवाड़ा।</strong> वर्तमान डिजिटल युग में जहां युवा पीढ़ी तेजी से पाश्चात्य प्रभावों और कुरीतियों की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के मार्गदर्शन में छिंदवाड़ा का चौरई शहर एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी पहल का साक्षी बनने जा रहा है। जैन संस्कार 360 डिग्री डिजिटल युग संस्कार शिविर 22 से 31 मार्च तक श्री शांतिनाथ भवन, जैन धर्मशाला, छोटी बाजार चौरई, छिंदवाड़ा में किया जाएगा। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों, युवाओं एवं समाज के सभी वर्गों को संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता से जोड़कर उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से इस शिविर में प्रतिदिन प्रातःकालीन योग, ध्यान, पूजा-अर्चना, बच्चों, युवाओं एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग संस्कार कक्षाएं, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, जीवनोपयोगी ज्ञान एवं प्रेरणादायी व्याख्यान होंगे। शिविर का शुभारंभ 22 मार्च को प्रातः 9 बजे अहिंसा परेड, ध्वजारोहण एवं कलश स्थापना के साथ होगा, जबकि समापन 31 मार्च को सायं 7:30 बजे पुरस्कार वितरण, सम्मान समारोह एवं प्रेरक उद्बोधन के साथ किया जाएगा।</p>
<p><strong>आधुनिक एवं रोचक गतिविधियों को शामिल किया गया</strong></p>
<p>शिविर में देश के प्रतिष्ठित विद्वान जैसे आकाश जैन शास्त्री, शिवम जैन शास्त्री, मनोज जैन शास्त्री एवं अतिशय जैन शास्त्री अपने ज्ञान से प्रतिभागियों को लाभान्वित करेंगे। विशेष बात यह है कि इस शिविर में जेन जी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं रोचक गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिससे युवा वर्ग सहज रूप से संस्कारों से जुड़ सके। आयोजक सकल दिगंबर जैन समाज, चौरई ने समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं और अपने जीवन को संस्कारों की दिशा में एक नया आयाम दें।</p>
<p>संयोजक व्याकरणाचार्य आकाश जैन जी (चिरगांव) ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह शिविर छिंदवाड़ा में संस्कारों की एक नई चेतना जागृत करेगा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा।</p>
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