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	<title>Rishabhdev Bhagwan &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Rishabhdev Bhagwan &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>राजस्थान मदरसा बोर्ड की अभिनव पहल से जैन समाज में हर्ष: तीर्थंकर दिवस (ऋषभ नवमी) पर मदरसों में आयोजित होगे विभिन्न कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:35:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक के उपलक्ष्य में समस्त राज्य के मदरसों, अल्पसंख्यक छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों एवं अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शिक्षण संस्थानों में ऋषभदेव भगवान के जीवन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं कराने का निर्णय लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय को अनूठा उपहार दिया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक के उपलक्ष्य में समस्त राज्य के मदरसों, अल्पसंख्यक छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों एवं अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शिक्षण संस्थानों में ऋषभदेव भगवान के जीवन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं कराने का निर्णय लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय को अनूठा उपहार दिया है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, जिनेंद्र जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक के उपलक्ष्य में समस्त राज्य के मदरसों, अल्पसंख्यक छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों एवं अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शिक्षण संस्थानों में ऋषभदेव भगवान के जीवन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं कराने का निर्णय लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय को अनूठा उपहार दिया है। जिससे संपूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। राजस्थान मदरसा बोर्ड के सचिव चेतन चौहान ने समस्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आदेश जारी कर निदेश प्रदान किए। यह आयोजन 15 मार्च तक होगे।</p>
<p><strong>विभिन्न आयु समूह के आधार पर होगी प्रतियोगिता</strong></p>
<p>तीर्थंकर दिवस ऋषभ नवमी (चैत्र कृष्ण नवमी) के उपलक्ष्य में मदरसों, अल्पसंख्यक छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों एवं अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शिक्षण संस्थानों में भगवान ऋषभदेव के जीवन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन आयु समूह के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>पूर्व प्राथमिक स्तर (3-6 वर्ष )ः ज्ञानवर्धक खेल, ऋषभदेव के जीवन पर आधारित फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, श्रमणों के प्रवचन, कहानी सुनाना और प्रार्थना आदि।</p>
<p>प्राथमिक स्तर (6-10 वर्ष)ः प्रार्थना,रंगोली, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण, श्रमणों के प्रवचन।</p>
<p>माध्यमिक स्तर (11-18 वर्ष )ः रंगोली,चित्रकला,मरुदेव के सोलह सपने लघु फिल्म,पोस्टर निर्माण,श्रमणों के प्रवचन और डिजिटल प्रस्तुतियाँ,खेल और फिटनेस स</p>
<p>’चित्रकला और पोस्टर निर्माण के विषय: जैन धर्म के प्रवर्तक ऋषभदेव के जन्म, दीक्षा, तप, ज्ञान, उपदेश और चारित्र से संबंधित</p>
<p>राष्ट्रीय एकता 3. ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह, स्वास्तिक 4.पर्यावरण संरक्षण</p>
<p><strong>अल्पसंख्यक वर्ग का युवा वर्ग ने अनुमोदना की</strong></p>
<p>तीर्थंकर दिवस ऋषभ नवमी 12 मार्च के अवसर पर शिक्षा विभाग की ओर से मदरसों, छात्रावासों, आवासीय विद्यालय,अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में आयु समूह के आधार पर विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन करवाना मदरसा बोर्ड की अभिनव पहल है। जिसकी अल्पसंख्यक वर्ग का युवा वर्ग बहुत बहुत अनुमोदना करता है। इसके लिए राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् ने राजस्थान सरकार और अल्पसंख्यक मामलात विभाग के मुखिया के समक्ष निवेदन किया था। इन प्रतियोगिता में मदरसों, छात्रावासों, आवासीय विद्यालय, अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भाग लंेगे।</p>
<p><strong>’विद्यार्थियों को ऋषभदेव भगवान के जीवन से मिलेगी प्रेरणा’ </strong></p>
<p>इस अवसर पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के परम संरक्षक नरेंद्रकुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक तीर्थकर दिवस पर मदरसों, छात्रावासों आवासीय विद्यालयों एवं अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में आयु समूह के आधार पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करने से विद्यार्थियों को उनके जीवन और कार्योंसे प्रेरणा मिलेगी। इससे वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने को प्रेरित होंगे। बच्चों को अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय के इतिहास और संस्कृति एवं परम्पराओं का जानने का अवसर मिलेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में अहिंसा,अपरिग्रह के गुण विकसित होंगे और सत्य वचन बोलने आदत का विकास होगा। इसके अलावा उनके माध्यम से भारतीय संस्कृति में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान,स्त्री शिक्षा का सूत्रपात करने के जानकारी भी बच्चों को मिलेगी।</p>
<p><strong>जैन समुदाय एवं अल्पसंख्यक वर्ग ने जताया मुख्यमंत्री का आभार</strong></p>
<p>इस अवसर पर अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय एवं सम्पूर्ण अल्पसंख्यक वर्ग के युवा वर्ग ने मुख्यमंत्री एवं अल्पसंख्यक मामलात विभाग के कैबिनेट मंत्री भजनलाल शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्वनी भगत झांझडिया और संयुक्त शासन सचिव असलम शेर खान एवं निदेशक मातादीन मीणा तथा अतिरिक्त निदेशक अबू सूफियान चौहान अल्पसंख्यक मामलात विभाग,सचिव चेतन चौहान राजस्थान मदरसा बोर्ड, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम कुमार दक, विधायक अतुल भंसाली, अशोककुमार कोठारी, प्रतापसिंह सिंघवी, ताराचंद जैन, लादुलाल पितलिया आदि का आभार प्रकट करते हुए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।</p>
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		<title>नालंदा में पूर्ववत जैन दर्शन और प्राकृत भाषा पाठ्यक्रम आरंभ हो: विश्व जैन संगठन ने सरकार के समक्ष रखी मांग </title>
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		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 16:29:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्राचीन नालंदा का जैन ग्रंथों में उल्लेख और नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाते थे जैन ग्रंथ लेकिन अब नही। खुदाई में प्राप्त हुआ था नालदा विश्वविद्यालय के समय का 4-5वीं सदी का प्राचीन जैन मंदिर और 9-10वीं सदी की ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा और जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं। विश्व जैन संगठन ने सरकार के समक्ष मांग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्राचीन नालंदा का जैन ग्रंथों में उल्लेख और नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाते थे जैन ग्रंथ लेकिन अब नही। खुदाई में प्राप्त हुआ था नालदा विश्वविद्यालय के समय का 4-5वीं सदी का प्राचीन जैन मंदिर और 9-10वीं सदी की ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा और जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं। विश्व जैन संगठन ने सरकार के समक्ष मांग रखी। <span style="color: #ff0000">नालंदा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नालंदा।</strong> प्राचीन नालंदा का जैन ग्रंथों में उल्लेख और नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाते थे जैन ग्रंथ लेकिन अब नही। खुदाई में प्राप्त हुआ था नालदा विश्वविद्यालय के समय का 4-5वीं सदी का प्राचीन जैन मंदिर और 9-10वीं सदी की ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा और जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन एवं राजेश जैन दद्दू ने कहा कि 19 जून 2024 को भारत के प्रधानमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के उद्घाटन के अवसर पर विश्वविद्यालय में जैन दर्शन और प्राचीन प्राकृत भाषा पाठ्यक्रम शामिल न किए जाने, नालंदा और राजगीर में जैन धर्म के प्रचलन एवं प्रमाण में, भगवान महावीर द्वारा चातुर्मास किए जाने और यहां से खुदाई में प्राप्त प्राचीन जैन मंदिर और प्रतिमाओं का उलेख न करने का कारण समझ नहीं आया।</p>
<p>संजय जैन ने बताया कि लोक सभा में 26 अगस्त 2010 को नालंदा विश्वविद्यालय बिल 2010 पर चर्चा में चित्तौड़गढ़ सांसद डॉ. गिरिजा व्यास द्वारा बिहार में 2500 वर्ष पूर्व गुणशिला यूनिवर्सिटी में महिलाओं के लिए जैन दर्शन की शिक्षा और कुंडलपुर में शारीरिक प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी देते हुए जैन णमोकार महामंत्र का उल्लेख करते हुए यूनिवर्सिटी में धर्म निरपेक्षता के साथ अन्य धर्मों की शिक्षा के साथ साथ जैन दर्शन सिद्धांत पढ़ाने की अनुशंसा की थी और सांसद बाल आप्टे व अन्य सांसदों ने भी अनुमोदना की थी लेकिन, वर्तमान में यूनिवर्सिटी में मात्र वैदिक और बौद्ध धर्म की शिक्षा दिए जाना जैन दर्शन और प्राकृत के साथ भेदभाव किया जाना।</p>
<p><strong>यहां प्राचीन काल से जैन धर्म प्रचलन में होने के प्रमाण है</strong></p>
<p>विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में एवं इतिहास में नालंदा में जैन ग्रंथों व भगवान महावीर द्वारा नालंदा में 14 चातुर्मास</p>
<p>काल व्यतीत करने का उल्लेख ना करना और प्राचीन विश्वविद्यालय के समय 4-5 वीं सदी के प्राचीन जैन मंदिर व इसमें 15वीं सदी की भगवान महावीर की प्रतिमा की खोज की थी और नालंदा विहार क्रमांक 1 से ऋषभदेव भगवान की 910 वीं सदी की प्राचीन प्रतिमा और नालंदा विहार 9, 10, 11 से जैन तीर्थंकर प्रतिमा प्राप्त होना यहां प्राचीन काल से जैन धर्म प्रचलन में होने के प्रमाण है। संजय जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 30 प्रमुख यूनिवर्सिटी में जैन विद्या और भारत को प्राचीनतम प्राकृत भाषा के पाठ्यक्रम संचालित है। पुरातत्व विभाग द्वारा भी संस्कृक्ति मंत्रालय के माध्यम से यूनेस्को को नालंदा से जैन तीर्थकर प्रतिमाएं प्राप्त होने और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में जैन शास्त्र पढ़ाए जाने की लिखित जानकारी दी गई</p>
<p>है।</p>
<p><strong>संगठन और अनुभवी जैन विद्वानों द्वारा पूर्ण सहयोग का आश्वासन </strong></p>
<p>जवाहर लाल यूनिवर्सिटी द्वारा भी 9 जुलाई 2024 को जैन दर्शन के लिए सेंटर आरंभ करने के प्रस्ताव पारित किया गया है। संजय जैन ने विश्व जैन संगठन और समस्त जैन समाज की और से केंद्र सरकार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, बिहार सरकार और नालंदा विश्वविद्यालय प्रबंधन समिति से नालंदा विश्वविद्यालय में अतिशीघ्र जैन दर्शन, जैन विद्या और प्राकृत भाषा पाठ्यक्रम आरंभ करने की मांग की और इस कार्य में संगठन और अनुभवी जैन विद्वानों द्वारा पूर्ण सहयोग किए जाने का आश्वासन दिया और प्राचीन नालंदा, तक्षशिला व विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी पूर्व बिहार में भगवान महावीर के जीवनकाल में आज से 2500 वर्ष पूर्व महिलाओं के लिए जैन दर्शन शिक्षा देने हेतु संचालित गुणशिला विश्वविद्यालय और कुंडलपुर में शारीरिक प्रशिक्षण संस्थान की खोज कर पुन स्थापना की जाएं।</p>
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		<title>अग्नि से बचे अन्न को बचाएं के पुरस्कार किए वितरितः पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी और बॉटल वितरित की गई  </title>
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		<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 12:41:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं कल्याणक महोत्सव के पूर्व हुई प्रतियोगिता में जिन छात्रों ने भाग लिया था। सभी को जिला संयोजक द्वारा पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी और बॉटल वितरित की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्यक्रम भी हुआ। पढ़िए झालरापाटन की यह पूरी खबर&#8230; झालरापाटन। राजकीय बालिका उच्च [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं कल्याणक महोत्सव के पूर्व हुई प्रतियोगिता में जिन छात्रों ने भाग लिया था। सभी को जिला संयोजक द्वारा पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी और बॉटल वितरित की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्यक्रम भी हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए झालरापाटन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झालरापाटन।</strong> राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय और महात्मा गाँधी उच्च प्राथमिक विद्यालय, झालरापाटन में जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं कल्याणक महोत्सव के पूर्व हुई प्रतियोगिता में जिन छात्रों ने भाग लिया था। सभी को जिला संयोजक सुरेंद्र कुमार जैन द्वारा पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी और बॉटल वितरित की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्यक्रम भी हुआ। जिसमें आरोग्य भारती विभाग सहसंयोजक बालचंद नागर ने कहा इस वर्ष हम अग्नि से बचे अन्न को बचाएं इस ध्येय पर कार्य करेंगे। अग्नि अर्थात क्रोध, तनाव, अवसाद, तापघात से बचाना अन्न से तात्पर्य भोजन का सम्मान और प्राकृतिक संसाधनों का रक्षण करना है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-77688" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250328-WA0036-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरित किए</strong></p>
<p>महात्मा गांधी उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रथम पुरस्कार कक्षा 6 की तहसीन ने प्राप्त किया। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रथम स्थान कक्षा 9 की प्रियांशु कंवर ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य अनंत शर्मा, अध्यापक शेफ्ता नाज, हेमराज गुप्ता, माया वैष्णव, खुशबू तानीवाल आदि उपस्थित रहे। जिला संयोजक सुरेंद्र कुमार जैन ने बताया भगवान महावीर पर हुई निबंध प्रतियोगिता में भी सभी को पुरस्कार राशि प्रदान कर दी गई है और डाक खर्च भी प्रदान कर दिया गया है। फिर भी यदि किसी विद्यालय की बाकी है तो वे संपर्क कर सकते हैं।</p>
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		<title>मीडिया प्लेटफॉर्म पर करे अधिक से अधिक शेयर: मिल सके ऋषभदेव भगवान के बारे में जानकारी  </title>
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		<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 08:25:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ऋषभदेव भगवान के जन्म, दीक्षा कल्याणक महोत्सव पर विभिन्न प्रतियोगिताएं करवाना ऐतिहासिक उपलब्धि है। युवा परिषद् के संरक्षक डॉ. जस्टिस नरेंद्रकुमार जैन ने अल्पसंख्यक वर्ग के सभी समुदायों के समाज से सहयोग की अपील की है। जानकारी पर्याप्त करने के लिए मोबाइल नंबर और मेल आईडी दी गई है। जयपुर से पढ़िए यह खबर&#8230; जयपुर। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ऋषभदेव भगवान के जन्म, दीक्षा कल्याणक महोत्सव पर विभिन्न प्रतियोगिताएं करवाना ऐतिहासिक उपलब्धि है। युवा परिषद् के संरक्षक डॉ. जस्टिस नरेंद्रकुमार जैन ने अल्पसंख्यक वर्ग के सभी समुदायों के समाज से सहयोग की अपील की है। जानकारी पर्याप्त करने के लिए मोबाइल नंबर और मेल आईडी दी गई है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के दिशा-निर्देश पर शिक्षा विभाग की ओर से राज्य में प्रथम बार ऋषभदेव भगवान के जन्म, दीक्षा कल्याणक महोत्सव पर विभिन्न प्रतियोगिताएं करवाना ऐतिहासिक उपलब्धि है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं युवा परिषद् के संरक्षक डॉ. जस्टिस नरेंद्रकुमार जैन ने अल्पसंख्यक वर्ग के सभी समुदायों के समाज श्रेष्ठियों एवं राज्य के सभी समुदायों के समाज श्रेष्ठियों, अभिभावकों और जनता से अनुरोध किया कि वे अपने जिले के विद्यालयों और निजी विद्यालयों में होने वाली प्रतियोगिताओं की जानकारी लेने के लिए विद्यालयों में जाकर बच्चों का उत्साहवर्धन करें। आपकी विद्यालयों में गरिमामय उपस्थिति विद्यार्थियों में छिपी विशिष्ट प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करेगी l</p>
<p><strong>जानकारी के लिए संपर्क करें</strong></p>
<p>राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् का सभी विद्यालयों के संस्था प्रधान एवं निदेशक से आग्रह है कि आपके विद्यालय को जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव से संबंधित किसी भी प्रकार की कोई जानकारी चाहिए तो वे 7877735999, 9001940605, 7976094913 पर संपर्क कर या फिर rsjyp21@gmail.comपर मेल कर प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p><strong>योगदान से प्रतियोगिताओं को सार्थक बनाएं</strong></p>
<p>संरक्षक अशोक बांठिया एवं पूर्व तहसीलदार ज्ञानचंद जैन ने भी राजस्थान के सभी विद्यालयों के संस्था प्रधानों एवं निदेशक और अल्पसंख्यक वर्ग के सभी संगठनों तथा सभी समुदायों युवा संगठनों और अग्रिम संगठनों से सादर अनुरोध किया कि वे देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक महोत्सव के अवसर पर शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई अभिनव पहल में अपना अभूतपूर्व योगदान देकर इन प्रतियोगिताओं को सार्थक बनाएं। जिससे इन प्रतियोगिताओं का लाभ विद्यार्थियों को मिल सके। साथ ही विद्यालयों में की जा रही प्रतियोगिताओं की जानकारी प्रिंट मिडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया के साथ साझा करें। जिससे राजस्थान का आमजन को भी देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के विराट व्यक्तित्व के बारे में जानकारी मिल सके l</p>
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		<title>ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक केे अवसर पर मासिक व्याख्यानमाला आयोजितः भारतीय संस्कृति के विकास मे जैन धर्म के योगदान पर विचार रखें </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/on_the_occasion_of_nirvana_kalyanak_of_lord_rishabhdev_the_contribution_of_jainism_in_the_development_of_indian_culture_was_discussed_in_the_monthly_lecture_series/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jan 2025 09:23:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक के शुभ अवसर पर मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की पुरातात्विक विरासत और जैन धर्म पर एक अध्ययन विषय पर आयोजित की गई। ऋषभदेव 24 तीर्थंकर मे प्रथम है और उनको असि मसि कृषि आदि षट् कर्माे का प्रणेता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक के शुभ अवसर पर मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की पुरातात्विक विरासत और जैन धर्म पर एक अध्ययन विषय पर आयोजित की गई। ऋषभदेव 24 तीर्थंकर मे प्रथम है और उनको असि मसि कृषि आदि षट् कर्माे का प्रणेता माना जाता है। इसी क्रम में पहली व दूसरी सदी से पूरे देश मे जैन मूर्तियां मिलने लगती है। जिनमे कुछ को उनमे प्राप्ति स्थान के नाम पर मथुरा, देवगढ स्कूल ऑफ आर्ट के रूप से पहचाना जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शैलेंद्र कुमार जैन की ऋषभदेव से यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव।</strong> ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक 28 जनवरी केे शुभ अवसर पर (भारतीय संस्कृति के विकास मे जैन धर्म के योगदान) विषयक मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की पुरातात्विक विरासत और जैन धर्म पर एक अध्ययन विषय पर आयोजित की गई। जे ए एस के निदेशक डॉ. नरेंद्र भंडारी एवं डॉ. अर्पिता रंजन की अध्यक्षता मे मुख्य वक्ता शिवम दुबे थे तथा संयोजक शैलेंद्र कुमार जैन ने पूर्वी दवे के सहयोग से संचालन किया।</p>
<p><strong>ऋषभदेव असि मसि कृषि षट्कर्माे के प्रणेता </strong></p>
<p>शिवम दुबे ने बताया कि ऋषभदेव 24 तीर्थंकर मे प्रथम है और उनको असि मसि कृषि आदि षट् कर्माे का प्रणेता माना जाता है। सिन्धु घाटी से प्राप्त खंडित धड योग मुद्रा और कुछ शीलांे को कुछ विद्वान जैन धर्म से जोड़कर देखते है। लेकिन जब तक लिपि पढ़ी नही जाती तब तक स्पष्ट रूप से कुछ नही कहा जा सकता। लोहानीपुर पटना से प्राप्त मौर्यकालीन खंडित दो धडो को प्राचीनतम मूर्ति माना जाता है। उसके उपरांत बिहार अलुवारा, मथुरा आदि की शुंगकालीन मूर्तियां और आयाग पट्ट आते है। इसी क्रम में पहली व दूसरी सदी से पूरे देश मे जैन मूर्तियां मिलने लगती है। जिनमे कुछ को उनमे प्राप्ति स्थान के नाम पर मथुरा, देवगढ स्कूल ऑफ आर्ट के रूप से पहचाना जाता है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73460" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0016.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0016.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0016-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0016-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0016-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0016-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />शोध कार्य कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं</strong></p>
<p>अध्यक्षता कर रही डॉ. अर्पिता रंजन ने कहा कि शिवम ने जैन कला के विकास मे शैलीगत विशेषता तथा काल के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। मेरी शुभकामनाए है कि वो और शोध कार्य करें तथा पुरातत्व के विद्यार्थी के रूप मे मेरे कुछ सुझाव है। जिन पर ध्यान देकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं। डॉ. नरेंद्र भंडारी ने बताया कि शिवम ने अभी जे.ए.एस के द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट मे छत्तीसगढ़ आदि कुछ जगहो के संग्रहालय और प्रमुख क्षेेत्रांे पर प्राप्त पुरावशेषो का विवरण संकलित किया तथा व्याख्यान दिया। उनको पुस्तक रूप मंे प्रकाशित करना प्रस्तावित है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73461" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />पुरातत्व के आधार पर मूल्यांकन प्रशंसनीय </strong></p>
<p>कार्यक्रम संयोजक शैलेंद्र जैन ने कहा कि शिवम ने काफी श्रम करके जैन धर्म का पुरातत्व के आधार पर मूल्यांकन प्रस्तुत किया है जो प्रशंसनीय है। अभी हाल मे हुए नए शोध कार्याे में अनेक ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनके आधार पर विद्वानो का एक वर्ग सिन्धु घाटी के कुछ अवशेष और वैदिक साहित्य में आए ऋषभ नेमि भरत आदि नामों को तथा अर्हत केशी निग्रंथ नग्नहु व्रात्य आदि उल्लेखो को जैन धर्म से संबंधित करता है। इस विषय पर अभी और शोध होना चाहिए।</p>
<p><strong>जिज्ञासा शांत व वेबीनार सफल हुई</strong></p>
<p>डॉ एल.सी. जैन, रमेश जैन, नीरज जैन, डॉ. सुलेखचंद जैन आदि ने प्रश्न कर इस विषय पर वक्ता से अपनी जिज्ञासा शांत की और यतींद्र जैन, अनिल जैन प्रेमीजी, मनीष जैन, उदय पूर्वी आदि अनेक श्रोताओ ने इससे जुड़कर वेबीनार को सफल बनाया।</p>
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		<title>ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक केे अवसर पर मासिक व्याख्यानमाला आयोजितः भारतीय संस्कृति के विकास मे जैन धर्म के योगदान पर विचार रखें </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jan 2025 07:10:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक के शुभ अवसर पर मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की पुरातात्विक विरासत और जैन धर्म पर एक अध्ययन विषय पर आयोजित की गई। ऋषभदेव 24 तीर्थंकर मे प्रथम है और उनको असि मसि कृषि आदि षट् कर्माे का प्रणेता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक के शुभ अवसर पर मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की पुरातात्विक विरासत और जैन धर्म पर एक अध्ययन विषय पर आयोजित की गई। ऋषभदेव 24 तीर्थंकर मे प्रथम है और उनको असि मसि कृषि आदि षट् कर्माे का प्रणेता माना जाता है। इसी क्रम में पहली व दूसरी सदी से पूरे देश मे जैन मूर्तियां मिलने लगती है। जिनमे कुछ को उनमे प्राप्ति स्थान के नाम पर मथुरा, देवगढ स्कूल ऑफ आर्ट के रूप से पहचाना जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शैलेंद्र कुमार जैन की ऋषभदेव से यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव।</strong> ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक 28 जनवरी केे शुभ अवसर पर (भारतीय संस्कृति के विकास मे जैन धर्म के योगदान) विषयक मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की पुरातात्विक विरासत और जैन धर्म पर एक अध्ययन विषय पर आयोजित की गई। जे ए एस के निदेशक डॉ. नरेंद्र भंडारी एवं डॉ. अर्पिता रंजन की अध्यक्षता मे मुख्य वक्ता शिवम दुबे थे तथा संयोजक शैलेंद्र कुमार जैन ने पूर्वी दवे के सहयोग से संचालन किया।</p>
<p><strong>ऋषभदेव असि मसि कृषि षट्कर्माे के प्रणेता </strong></p>
<p>शिवम दुबे ने बताया कि ऋषभदेव 24 तीर्थंकर मे प्रथम है और उनको असि मसि कृषि आदि षट् कर्माे का प्रणेता माना जाता है। सिन्धु घाटी से प्राप्त खंडित धड योग मुद्रा और कुछ शीलांे को कुछ विद्वान जैन धर्म से जोड़कर देखते है। लेकिन जब तक लिपि पढ़ी नही जाती तब तक स्पष्ट रूप से कुछ नही कहा जा सकता। लोहानीपुर पटना से प्राप्त मौर्यकालीन खंडित दो धडो को प्राचीनतम मूर्ति माना जाता है। उसके उपरांत बिहार अलुवारा, मथुरा आदि की शुंगकालीन मूर्तियां और आयाग पट्ट आते है। इसी क्रम में पहली व दूसरी सदी से पूरे देश मे जैन मूर्तियां मिलने लगती है। जिनमे कुछ को उनमे प्राप्ति स्थान के नाम पर मथुरा, देवगढ स्कूल ऑफ आर्ट के रूप से पहचाना जाता है।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73450" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0010-990x446.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />शोध कार्य कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं</strong></p>
<p>अध्यक्षता कर रही डॉ. अर्पिता रंजन ने कहा कि शिवम ने जैन कला के विकास मे शैलीगत विशेषता तथा काल के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। मेरी शुभकामनाए है कि वो और शोध कार्य करें तथा पुरातत्व के विद्यार्थी के रूप मे मेरे कुछ सुझाव है। जिन पर ध्यान देकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं। डॉ. नरेंद्र भंडारी ने बताया कि शिवम ने अभी जे.ए.एस के द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट मे छत्तीसगढ़ आदि कुछ जगहो के संग्रहालय और प्रमुख क्षेेत्रांे पर प्राप्त पुरावशेषो का विवरण संकलित किया तथा व्याख्यान दिया। उनको पुस्तक रूप मंे प्रकाशित करना प्रस्तावित है।</p>
<p><strong>पुरातत्व के आधार पर मूल्यांकन प्रशंसनीय </strong></p>
<p>कार्यक्रम संयोजक शैलेंद्र जैन ने कहा कि शिवम ने काफी श्रम करके जैन धर्म का पुरातत्व के आधार पर मूल्यांकन प्रस्तुत किया है जो प्रशंसनीय है। अभी हाल मे हुए नए शोध कार्याे में अनेक ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनके आधार पर विद्वानो का एक वर्ग सिन्धु घाटी के कुछ अवशेष और वैदिक साहित्य में आए ऋषभ नेमि भरत आदि नामों को तथा अर्हत केशी निग्रंथ नग्नहु व्रात्य आदि उल्लेखो को जैन धर्म से संबंधित करता है। इस विषय पर अभी और शोध होना चाहिए।</p>
<p><strong>जिज्ञासा शांत व वेबीनार सफल हुई</strong></p>
<p>डॉ एल.सी. जैन, रमेश जैन, नीरज जैन, डॉ. सुलेखचंद जैन आदि ने प्रश्न कर इस विषय पर वक्ता से अपनी जिज्ञासा शांत की और यतींद्र जैन, अनिल जैन प्रेमीजी, मनीष जैन, उदय पूर्वी आदि अनेक श्रोताओ ने इससे जुड़कर वेबीनार को सफल बनाया।</p>
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