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	<title>religious &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>बच्चे सीख रहे महामंत्र णमोकार और बड़े पढ़ रहे छहढाला की ढाल : श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का भव्य आयोजन </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर एवं श्री महावीर दिगम्बर जैन नसियांजी मंदिर में ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिविरों का आयोजन चल रहा है । इन धार्मिक शिविरों में 08 जून से 15 जून तक साधर्मी बंधुओं, माता बहनों, युवाओं और बच्चों को धार्मिक, नीतिगत एवं व्यवहारिक संस्कार एवं शिक्षण प्रदान किए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर एवं श्री महावीर दिगम्बर जैन नसियांजी मंदिर में ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिविरों का आयोजन चल रहा है । इन धार्मिक शिविरों में 08 जून से 15 जून तक साधर्मी बंधुओं, माता बहनों, युवाओं और बच्चों को धार्मिक, नीतिगत एवं व्यवहारिक संस्कार एवं शिक्षण प्रदान किए जायेंगे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<p><strong><del></p>
<hr />
<p></del>मुरैना।</strong> नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर एवं श्री महावीर दिगम्बर जैन नसियांजी मंदिर में ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिविरों का आयोजन चल रहा है । इन धार्मिक शिविरों में 08 जून से 15 जून तक साधर्मी बंधुओं, माता बहनों, युवाओं और बच्चों को धार्मिक, नीतिगत एवं व्यवहारिक संस्कार एवं शिक्षण प्रदान किए जायेंगे। शिविर के मुख्य संयोजक सुरेशचंद जैन शिक्षक एवं अनिल जैन नायक गढ़ी वाले के अनुसार विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आचार्यश्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से मुनि पुंगव श्रमण मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के निर्देशन व श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर के तत्वावधान में सम्पूर्ण ग्वालियर एवं चम्बल संभाग में ग्रीष्मकालीन शिविरों का आयोजन चल रहा है। मुरैना नगर के शिविरों में सांगानेर विद्यालय से जैन विद्वत अभिषेक शास्त्री भव्य, मनन शास्त्री जबलपुर, हिमांशु शास्त्री मुरैना, गौरव शास्त्री जबलपुर सभी साधर्मी बंधुओं को शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय विद्वान पूर्व प्राचार्य महेंद्र कुमार शास्त्री, चक्रेश शास्त्री, संजय शास्त्री, मनोज जैन भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। बड़े जैन मंदिर एवं नसियां जी जैन मंदिर में प्रातः एवं रात्रि में विभिन्न कक्षाओं के माध्यम से शिक्षण प्रदान किया जा रहा है। जिसमें सैकड़ों की संख्या में बुजुर्ग। साधर्मी बंधु माता बहिन युवा एवं बच्चे अति उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। कक्षाओं में अध्यापन के बाद सभी शिवर्राथियो के स्वल्पाहार एवं मीठे शरबत की व्यवस्था समाज के द्वारा की जा रही है । रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें भाग लेने वाले सभी को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।</p>
<p><strong>बुजुर्ग और बच्चे सीख रहे हैं छहढाला</strong></p>
<p>सात दिवसीय शिक्षण शिविरों के क्षेत्रीय प्रभारी विद्वत नवनीत शास्त्री एवं मनीष शास्त्री मबई ने जानकारी देते हुए बताया कि जबलपुर से शिविर में पधारे हुए विद्वान गौरव जैन शास्त्री शिविरार्थियों को जैन ग्रन्थ छहढाला का अध्ययन करा रहे हैं। छहढाला दिगम्बर जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय ग्रंथ है ।इसकी रचना कविवर दौलतराम जी ने लगभग 1891 (विक्रम संवत) में की थी । इस ग्रंथ में 6अध्याय हैं, जिनमें जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों और मोक्ष के मार्ग का सरल शब्दों में वर्णन किया गया है । इसे संक्षेप में हिंदी का छोटा समयसार भी कहा जाता है। इस ग्रंथ के छह ढालों अध्यायों में सम्पूर्ण मानव जीवन चरित्र का वर्णन मिलता है। छहढाला की पहली ढाल में संसार के दुखों और चारों गतियों (नरक, तिर्यंच, मनुष्य, देव) के कष्टों का वर्णन, दूसरी ढाल में अज्ञान, गलत मान्यताओं (मिथ्यात्व) और कर्मों के कारण जीव के भटकने का कारण, तीसरी ढाल में मोक्ष का सच्चा मार्ग, जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र (रत्नत्रय) से मिलता है। चौथी ढाल में बारह प्रकार की भावनाओं (अनित्य, असरण, संसार आदि) का चिंतन और वैराग्य, पाँचवीं ढाल में सम्यक दृष्टि जीव के आचरण, ध्यान और चारित्र का वर्णन, छठी ढाल में मोक्ष मार्ग की पूर्णता, वीतराग दशा और अंततः मोक्ष की प्राप्ति का वर्णन मिलता है । यह ग्रंथ बहुत सरल ही और काव्यात्मक भाषा में लिखा गया है । इसलिए इसे बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी आसानी से समझ और याद कर सकते हैं।</p>
<p><strong>बच्चों को सिखाया जा रहा है महामंत्र णमोकार</strong></p>
<p>श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों में नन्हे मुन्ने बच्चों को बाल बोध के माध्यम से विद्वत हिमांशु शास्त्री मुरैना एवं मनन शास्त्री मुरैना के द्वारा महामंत्र नवकार सिखाया जा रहा है। तीर्थंकर कैसे बनते हैं, कितने होते हैं, भगवान कैसे बनते हैं, पूजन कैसे करते हैं, श्री जिनेन्द्र प्रभु के दर्शन कैसे करते हैं, मंदिर में प्रवेश कैसे करना चाहिए, संसार में सुखी जीवन कैसे जीया जा सकता है आदि आदि के माध्यम से संस्कारित किया जा रहा है।</p>
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		<title>चंबल की धरा पर गूंजेगा श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर का दिव्य घोष : 2 जून तक लगेगें ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविर </title>
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		<pubDate>Tue, 26 May 2026 12:14:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ग्रीष्मकालीन अवकाश में साधर्मी बंधुओं, माता बहनों एवं बच्चों को धार्मिक, नीतिगत संस्कार देने एवं अपनी संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से चम्बल एवं ग्वालियर संभाग में 26 मई से 2 जून तक संस्कार शिक्षण शिवरों का आयोजन किया जा रहा है। मुरैना/ग्वालियर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना/ग्वालियर। ग्रीष्मकालीन अवकाश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ग्रीष्मकालीन अवकाश में साधर्मी बंधुओं, माता बहनों एवं बच्चों को धार्मिक, नीतिगत संस्कार देने एवं अपनी संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से चम्बल एवं ग्वालियर संभाग में 26 मई से 2 जून तक संस्कार शिक्षण शिवरों का आयोजन किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">मुरैना/ग्वालियर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/ग्वालियर।</strong> ग्रीष्मकालीन अवकाश में साधर्मी बंधुओं, माता बहनों एवं बच्चों को धार्मिक, नीतिगत संस्कार देने एवं अपनी संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से चम्बल एवं ग्वालियर संभाग में 26 मई से 2 जून तक संस्कार शिक्षण शिवरों का आयोजन किया जा रहा है। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज की मंगल प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तथा भारतीय जैन मिलन शाखा क्रमांक 2 के अमूल्य सहयोग से श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ संपूर्ण ग्वालियर में हुआ है। सात दिवसीय इन शिविरों के माध्यम से संपूर्ण चम्बल एवं ग्वालियर धर्ममय एवं संस्कारमय वातावरण से अनुप्राणित होगा। शिविर के मुख्य प्रभारी विद्वत पंडित नवनीत जैन शास्त्री मुरैना एवं सह प्रभारी आशीष शास्त्री मवई के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में यह आयोजन होने जा रहा है। ‎शिविर में श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान से पधारे विद्वानों द्वारा बालक, युवा, महिला एवं पुरुष वर्ग को जैन दर्शन के अमूल्य सिद्धांतों का अध्ययन कराया जा रहा है। इसमें भाग-1, भाग-2, तत्त्वार्थ सूत्र, द्रव्य संग्रह इत्यादि महान आगम एवं दार्शनिक ग्रंथों का सरल एवं प्रेरणादायी शैली में शिक्षण प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>‎शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार एवं अध्यात्म की चेतना जागृत करते हुए नई पीढ़ी को जैन दर्शन के सिद्धांतों एवं आगम ग्रंथों के अध्ययन से जोड़ना है। यह शिक्षण शिविर केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मजागरण, संस्कार निर्माण एवं भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के संरक्षण का एक पावन अभियान बनकर उभर रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>राष्ट्रीय अधिवेशन में सोशल ग्रुप एक्सीलेंट का उत्कृष्ट प्रदर्शन: कई श्रेणियों में चांदखेड़ी में मिला ग्रुप को सम्मान  </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 07:39:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट को चांदखेड़ी में हुए फेडरेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में विभिन्न प्रतिष्ठित श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। ग्रुप के संस्थापक निलेश दीपाली कासलीवाल के अध्यक्षीय कार्यकाल वर्ष 2025 में किए गए धार्मिक, सामाजिक, मनोरंजक एवं यात्रा संबंधी आयोजनों में सभी सदस्यों के सहयोग और समर्पण के कारण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट को चांदखेड़ी में हुए फेडरेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में विभिन्न प्रतिष्ठित श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। ग्रुप के संस्थापक निलेश दीपाली कासलीवाल के अध्यक्षीय कार्यकाल वर्ष 2025 में किए गए धार्मिक, सामाजिक, मनोरंजक एवं यात्रा संबंधी आयोजनों में सभी सदस्यों के सहयोग और समर्पण के कारण यह उपलब्धि प्राप्त हुई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एक्सीलेंट को चांदखेड़ी में हुए फेडरेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में विभिन्न प्रतिष्ठित श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। ग्रुप के संस्थापक निलेश दीपाली कासलीवाल के अध्यक्षीय कार्यकाल वर्ष 2025 में किए गए धार्मिक, सामाजिक, मनोरंजक एवं यात्रा संबंधी आयोजनों में सभी सदस्यों के सहयोग और समर्पण के कारण यह उपलब्धि प्राप्त हुई। अधिवेशन में ग्रुप को श्रेष्ठ ग्रुप का सम्मान प्राप्त हुआ। इसके साथ ही सर्वश्रेष्ठ कोषाध्यक्ष के रूप में आनंद पारूल पहाड़िया को सम्मानित किया गया। ग्रुप को श्रेष्ठ धार्मिक यात्रा, श्रेष्ठ धार्मिक गतिविधि, श्रेष्ठ मनोरंजन गतिविधि, श्रेष्ठ मानव सेवा तथा पर्यावरण कार्य के लिए भी पुरस्कार प्राप्त हुए।</p>
<p>मीडिया प्रभारी रुचि चोविश्या जैन ने बताया कि प्लेटिनम ऑफ द ईयर सम्मान संरक्षक जितेंद्र मोनिका जैन एवं संजय सपना पापडीवाल को प्रदान किया गया। वहीं फेडरेशन में विशेष सहयोग के लिए पिंकेश नेहा बिलाला एवं संजय सपना पापडीवाल को सम्मानित किया गया। सचिव शरद वेद ने आभार व्यक्त किया। साथ ही नवीन सत्र में अध्यक्ष राजीव अर्चना लुहाड़िया, सचिव बाहुबली श्वेता पाटनी एवं कोषाध्यक्ष आनंद पारूल पहाड़िया के नेतृत्व में पूरी टीम ने नई ऊर्जा और उत्साह के साथ प्रभावी बैनर प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया।</p>
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		<title>अंकुर जैन बने दिगंबर उदयनगर जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष: मंडल को अधिक सक्रिय बनाने का लिया संकल्प  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/ankur_jain_becomes_president_of_the_digambar_udaynagar_jain_youth_association/</link>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 08:47:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदय नगर स्थित जैन मंदिर परिसर में दिगंबर जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष पद के लिए अंकुर जैन तथा सचिव पद के लिए सीए मयंक जैन का सर्वसम्मति से चयन किया गया। चयन प्रक्रिया सौहार्दपूर्ण हुई। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। उदय नगर स्थित जैन मंदिर परिसर में दिगंबर जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>उदय नगर स्थित जैन मंदिर परिसर में दिगंबर जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष पद के लिए अंकुर जैन तथा सचिव पद के लिए सीए मयंक जैन का सर्वसम्मति से चयन किया गया। चयन प्रक्रिया सौहार्दपूर्ण हुई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> उदय नगर स्थित जैन मंदिर परिसर में दिगंबर जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष पद के लिए अंकुर जैन तथा सचिव पद के लिए सीए मयंक जैन का सर्वसम्मति से चयन किया गया। चयन प्रक्रिया सौहार्दपूर्ण हुई। जिसमें सभी सदस्यों ने एकमत होकर नए पदाधिकारियों पर विश्वास जताया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-104754" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260414-WA0013.jpg" alt="" width="231" height="175" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260414-WA0013.jpg 231w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260414-WA0013-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260414-WA0013-111x83.jpg 111w" sizes="(max-width: 231px) 100vw, 231px" /></p>
<p>नव-निर्वाचित पदाधिकारियों ने मंडल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी कार्यों एवं गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए चर्चा की। उन्होंने मंडल को सामाजिक, धार्मिक एवं युवा हितों के कार्यों में और अधिक सक्रिय बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया। इस अवसर पर मंडल के पूर्व अध्यक्ष अजय जैन, रोहित जैन, नीरज जैन उपस्थित रहे। मंडल के मीडिया प्रभारी ’संकल्प मोदी’ ने यह जानकारी दी।</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ का जन्म एवं तब कल्याण का महोत्सव 12 मार्च को : वर्तमान परिवेश में भगवान आदिनाथ की शिक्षाओं की प्रासंगिकता  </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 09:57:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान आदिनाथ, जिन्हें श्रमण एवं जैन परंपरा में प्रथम तीर्थंकर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा के आदिप्रवर्तक माने जाते हैं। जन्मोत्सव पर पढ़िए, डॉ यतीश जैन का यह आलेख&#8230; जबलपुर। भगवान आदिनाथ, जिन्हें श्रमण एवं जैन परंपरा में प्रथम तीर्थंकर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान आदिनाथ, जिन्हें श्रमण एवं जैन परंपरा में प्रथम तीर्थंकर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा के आदिप्रवर्तक माने जाते हैं। <span style="color: #ff0000">जन्मोत्सव पर पढ़िए, डॉ यतीश जैन का यह आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर</strong>। भगवान आदिनाथ, जिन्हें श्रमण एवं जैन परंपरा में प्रथम तीर्थंकर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा के आदिप्रवर्तक माने जाते हैं। उनके जन्म तथा तप कल्याणक का वर्णन जैन आगमों, पुराणों और आचार्यों द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथों में अत्यंत श्रद्धा और दार्शनिक गाम्भीर्य के साथ किया गया है। जैन शास्त्रों के अनुसार तीर्थंकरों का जीवन केवल ऐतिहासिक घटनाओं का क्रम नहीं बल्कि आत्मा की सर्वोच्च साधना और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। भगवान आदिनाथ का जन्म और तप कल्याणक मानव जीवन के धार्मिक, दार्शनिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आयामों को स्पष्ट करने वाले महत्त्वपूर्ण प्रसंग हैं। जैन परंपरा के प्राचीन ग्रंथों में भगवान आदिनाथ के जन्म का उल्लेख विशेष रूप से मिलता है। आचार्य जिनसेन द्वारा रचित आदिपुराण तथा आचार्य हेमचंद्र द्वारा रचित त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र में उनके जन्म का विस्तृत वर्णन किया गया है। इन ग्रंथों के अनुसार भगवान आदिनाथ का जन्म अयोध्या नगरी में राजा नाभिराज और रानी मरुदेवी के यहाँ हुआ था। जैन परंपरा में तीर्थंकरों के जन्म को “कल्याणक” कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह दिव्य घटना जो समस्त जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।</p>
<p><strong>अभिषेक और उत्सव मनाया जाता है</strong></p>
<p>आदिपुराण में वर्णित है कि तीर्थंकर के जन्म के समय देवगणों द्वारा अभिषेक और उत्सव मनाया जाता है, जिसे “जन्माभिषेक” कहा जाता है। यह वर्णन प्रतीकात्मक रूप से यह बताता है कि तीर्थंकर का जन्म संसार में धर्म के प्रकाश के प्रकट होने का संकेत है।</p>
<p>जैन आगमों में यह विचार प्रमुख रूप से प्रतिपादित किया गया है कि प्रत्येक जीव में आत्मिक पूर्णता की संभावना होती है। आचारांग सूत्र में कहा गया है</p>
<p>“सव्वे पाणा न हन्तव्वा”</p>
<p>अर्थात सभी जीवों की हिंसा नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>यह वचन जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा का प्रतिपादन करता है और भगवान आदिनाथ के उपदेशों की मूल भावना को व्यक्त करता है। उनके जन्म का महत्त्व इसी तथ्य में निहित है कि उन्होंने मानव समाज को अहिंसा, संयम और करुणा का मार्ग दिखाया।</p>
<p><strong>जीवनोपयोगी कार्यों का ज्ञान दिया</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना का उदाहरण ही नहीं है बल्कि उन्होंने मानव समाज को व्यवस्थित जीवन की दिशा भी प्रदान की। जैन शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि प्रारंभिक मानव समाज में आजीविका के स्पष्ट साधन नहीं थे। आदिपुराण और त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र में वर्णित है कि भगवान आदिनाथ ने मनुष्यों को कृषि, शिल्प, वाणिज्य, लेखन और विद्या जैसे अनेक जीवनोपयोगी कार्यों का ज्ञान दिया। इसी कारण उन्हें “प्रजापति” और “आदिपुरुष” भी कहा गया है। यह तथ्य जैन धर्म के सामाजिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है कि धर्म केवल आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग ही नहीं बल्कि सामाजिक संगठन और जीवन के संतुलित विकास का आधार भी है।</p>
<p><strong>संयम ही जीवन का वास्तविक आभूषण</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ के जीवन का दूसरा महत्वपूर्ण चरण उनका तप कल्याणक है। जैन परंपरा के अनुसार जब उन्होंने संसार की अस्थिरता और भौतिक सुखों की सीमाओं को समझा तब उन्होंने राज्य, वैभव और पारिवारिक जीवन का त्याग कर दीक्षा ग्रहण की। यह घटना जैन दर्शन में वैराग्य और आत्मसंयम का आदर्श प्रस्तुत करती है। उत्तराध्ययन सूत्र में कहा गया है &#8211; “संयमो खलु जीणाणं”अर्थात संयम ही जीवन का वास्तविक आभूषण है।</p>
<p>यह वचन इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि आत्मिक उन्नति के लिए संयम और तप अत्यंत आवश्यक हैं।</p>
<p>जैन दर्शन में तप को आत्मा की शुद्धि का साधन माना गया है। तत्त्वार्थसूत्र में आचार्य उमास्वाति ने लिखा है-</p>
<p>“तपसा निर्जरा च” अर्थात तप के द्वारा कर्मों की निर्जरा (क्षय) होती है।</p>
<p>यह सूत्र जैन साधना की मूल भावना को व्यक्त करता है कि तपस्या के माध्यम से आत्मा कर्मबंधनों से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप की ओर अग्रसर होती है। भगवान आदिनाथ का तप कल्याणक इसी आध्यात्मिक प्रक्रिया का प्रतीक है।</p>
<p><strong>जीव चेतन तत्व है</strong></p>
<p>दार्शनिक दृष्टि से भगवान आदिनाथ का जीवन जैन तत्त्वमीमांसा के मूल सिद्धांतों को स्पष्ट करता है। जैन दर्शन के अनुसार संसार छह द्रव्यों जीव, अजीव, धर्म, अधर्म, आकाश और काल से मिलकर बना है। जीव चेतन तत्व है और उसका स्वभाव ज्ञान और दर्शन है। किंतु कर्मों के बंधन के कारण जीव संसार में जन्म-मरण के चक्र में बंधा रहता है। जब जीव सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को अपनाता है तब वह मोक्ष की दिशा में अग्रसर होता है। भगवान आदिनाथ का तप कल्याणक इस त्रिरत्न मार्ग की प्रारंभिक अवस्था का प्रतीक है।</p>
<p><strong>अनेकांतवाद का सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक</strong></p>
<p>जैन दर्शन का अनेकांतवाद भी भगवान आदिनाथ के उपदेशों की दार्शनिक पृष्ठभूमि को समझने में महत्वपूर्ण है। तत्त्वार्थसूत्र में कहा गया है कि सत्य को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है और किसी एक दृष्टिकोण को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। यह सिद्धांत बौद्धिक सहिष्णुता और संवाद की भावना को प्रोत्साहित करता है। आधुनिक समाज में जब विचारों के मतभेद के कारण संघर्ष उत्पन्न होते हैं तब अनेकांतवाद का यह सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक साधना का सर्वोत्तम उदाहरण</strong></p>
<p>आध्यात्मिक दृष्टि से भगवान आदिनाथ का तप कल्याणक आत्मा की अंतर्मुखी यात्रा का प्रतीक है। जैन शास्त्रों के अनुसार आत्मा का वास्तविक स्वरूप अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत सुख और अनंत शक्ति से युक्त है। किंतु राग, द्वेष और मोह के कारण आत्मा अपनी वास्तविक स्थिति को भूल जाती है। तप और संयम के माध्यम से आत्मा इन बंधनों से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त करती है। भगवान आदिनाथ का जीवन इस आध्यात्मिक साधना का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है।</p>
<p><strong>पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखा जा सकता है</strong></p>
<p>वर्तमान समय में भगवान आदिनाथ के जन्म और तप कल्याणक की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। आधुनिक समाज में भौतिक प्रगति के साथ-साथ हिंसा, उपभोक्तावाद और पर्यावरणीय संकट जैसी समस्याएँ भी बढ़ रही हैं। जैन धर्म के अहिंसा और अपरिग्रह के सिद्धांत इन समस्याओं के समाधान के लिए अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यदि मानव समाज सीमित उपभोग, करुणा और संयम के सिद्धांतों को अपनाए तो न केवल सामाजिक समरसता स्थापित हो सकती है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखा जा सकता है।</p>
<p><strong>दार्शनिक और सामाजिक संदेश का प्रतीक</strong></p>
<p>इस प्रकार भगवान आदिनाथ का जन्म और तप कल्याणक केवल धार्मिक श्रद्धा का विषय नहीं बल्कि जैन दर्शन के गहन आध्यात्मिक, दार्शनिक और सामाजिक संदेश का प्रतीक है। जैन आगमों और शास्त्रों में वर्णित उनके जीवन का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि आत्मसंयम, अहिंसा, अपरिग्रह और सम्यक ज्ञान के माध्यम से मानव जीवन को उच्चतम आध्यात्मिक अवस्था तक पहुँचाया जा सकता है। भगवान आदिनाथ की शिक्षाएँ आज भी मानवता को नैतिकता, करुणा और आत्मिक जागरण की दिशा में प्रेरित करती हैं।</p>
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		<title>दशलक्षण महापर्व पर नित्य पंचामृत अभिषेक शांतिधारा से होगी आराधना : रात में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से की जाएगी भक्ति  </title>
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		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 10:13:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सभी साधर्मी बंधुओं को विदित है कि गुरुवार से दशलक्षण महापर्व शुरू हो गए हैं। गुरूवार भादवा सुदी पंचमी को सुबह 7 बजे बोलियां लगाई गईं। सुबह 7.30 बजे पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ के सानिध्य में शुरू हुई। खैरवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230; खैरवाड़ा। सभी साधर्मी बंधुओं को विदित है कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सभी साधर्मी बंधुओं को विदित है कि गुरुवार से दशलक्षण महापर्व शुरू हो गए हैं। गुरूवार भादवा सुदी पंचमी को सुबह 7 बजे बोलियां लगाई गईं। सुबह 7.30 बजे पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ के सानिध्य में शुरू हुई। <span style="color: #ff0000">खैरवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खैरवाड़ा।</strong> सभी साधर्मी बंधुओं को विदित है कि गुरुवार से दशलक्षण महापर्व शुरू हो गए हैं। गुरूवार भादवा सुदी पंचमी को सुबह 7 बजे बोलियां लगाई गईं। सुबह 7.30 बजे पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ के सानिध्य में शुरू हुई। सुबह 8.30 बजे दशलक्षण पूजन प्रारंभ हुआ। शाम 7.30 आरती होगी। रात्रि 8.15 बजे बोलियां शुरू होगी। रात 9 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। आगामी दिनों में प्रातः 7.30 बजे पंचामृत शांतिधारा शुरू होगी।</p>
<p>पंचमी और चतुर्दशी को महासभा के नियमानुसार सभी प्रकार के व्यवसाय, मेडिकल, हॉस्पिटल बंद रहेंगे। पर्युषण महापर्व पर सभी कार्यक्रम समय पर शुरू किए जाएंगे। महासभा की ओर से अपील की गई है कि सभी साधर्मी बंधुगण समय का विशेष ध्यान रखें और पयुर्षण पर्व पर हो रही धर्म आराधना का संपूर्ण लाभ अर्जित करें।</p>
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		<title>सत्य की पहचान के लिए जिनेंद्र भगवान का आलंबन जरूरी: आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने सत्य को सर्वव्यापक बताया </title>
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		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 11:39:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए सत्य के विषय में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें सत्य को जानना चाहिए। असत्य में केवल भ्रांति ही होगी और भ्रांति से कोई उपलब्धि नहीं होगी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए सत्य के विषय में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें सत्य को जानना चाहिए। असत्य में केवल भ्रांति ही होगी और भ्रांति से कोई उपलब्धि नहीं होगी। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए सत्य के विषय में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें सत्य को जानना चाहिए। असत्य में केवल भ्रांति ही होगी और भ्रांति से कोई उपलब्धि नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हम असत्य का समर्थन सबसे ज्यादा करते हैं। सत्य की पहचान भ्रांति को तोड़ने वाली होती है। सत्य की पहचान करने के लिए लौकिक व्यक्ति नहीं आध्यात्मिक व्यक्ति होना चाहिए। सत्य की पहचान जीवन में करना है तो जिनेंद्र भगवान का आलंबन लेना होगा। उन्होंने कहा कि इस भव का श्रृंगार सजावट सत्य पर होगा। यदि सत्य का श्रद्धान हो जाए तो हम सत्य की सार्थकता को सिद्ध कर सकते हैं। हमें भ्रांतियां को मानने की आदत हो गई है।</p>
<p>शरीर शरीर है आत्मा आत्मा है, यह आस्था पूर्वक निर्णय होता है तो सत्य का समर्थन होता है। जिस व्यक्ति का सत्य पर श्रद्धान होगा। वह व्यर्थ में आंसू नहीं बहाएगा। परिवार में मृत्यु दुख आदि में, क्योंकि वह द्रव्य और पर्याय को जानता है द्रव्य नित्य है और पर्याय अनित्य है क्योंकि, आना संयोग है और जाना वियोग है तो फिर रोने की जरूरत क्या है।</p>
<p><strong>क्रिया से आज तक कोई धर्मात्मा नहीं हुआ </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा सुनने की शक्ति धर्मात्मा में होती है। यदि सुनने की शक्ति है तो वह धर्मात्मा है यदि सुनने की शक्ति नहीं है तो वह धर्मात्मा नहीं है। क्रिया में भाव होना चाहिए क्रिया कहीं जा रही है। भाव कही जा रहे हैं, हमें हमारे भाव एक जगह रखने की आदत नहीं बनी। जन्म जरा मृत्यु विनाशनाय बोलते हुए जल समर्पित कर रहे हैं। भाव को पकड़ कर श्रद्धा के साथ भाव लो फिर जल चढ़ाओ। ऐसा करते हैं तो आप सत्य पर श्रद्धान कर रहे है। मंदिर में पूजन करने आए प्रवचन सुनने आए उलझ कर रह जाते हैं। हम संतवाद पंथवाद में उलझ रहे हैं। क्रिया को भाव के साथ करना चाहिए। बिना विश्वास और भाव के बिना कोई भी काम करेंगे तो लाभकारी नहीं होगा। जिनेंद्र भगवान ने जो कहा है वह सत्य है यही सम्यक दर्शन है।</p>
<p><strong>बच्चों को भिखारी नहीं मालिक बनाओ </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि भगवान को तो मानते हैं लेकिन, उनकी कही हुई बात को मानते नहीं यदि ऐसा नहीं करते तो सम्यक दृष्टि नहीं हो। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बच्चों को भिखारी नहीं मालिक बनाओ आस्था भक्ति से उपलब्धि होगी मानने से नहीं। हमें जिस रास्ते पर चलना है हम उसे रास्ते को भूल जाते हैं आध्यात्मिक उपलब्धि क्षणिक दुख और बाद में सुख लौकिक उपलब्धि क्षणिक सुख लेकिन, बाद में दुख देती है। विश्वास जरूरी है विश्वास के बिना कोई काम नहीं हो सकते।</p>
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		<title>परिणाम निर्मल तो जीवन भी निर्मल: आचार्य श्री विनिश्चयसागर के प्रवचनों से अपार धर्म प्रभावना  </title>
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		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 11:37:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज का ससंघ वर्षायोग विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ चल रहा है। अपार धर्म प्रभावना हो रही है। प्रवचनों में नगर के गणमान्य और गुरु भक्त यहां लाभार्जन कर रहे हैं। रामगंजमंडी से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। नगर में आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज का ससंघ वर्षायोग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज का ससंघ वर्षायोग विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ चल रहा है। अपार धर्म प्रभावना हो रही है। प्रवचनों में नगर के गणमान्य और गुरु भक्त यहां लाभार्जन कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> नगर में आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज का ससंघ वर्षायोग विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ चल रहा है। अपार धर्म प्रभावना हो रही है। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि परिणाम निर्मल होंगे तो जीवन भी निर्मल होगा और जीवन से बहुत सारी चीज डिलीट होंगी। आपका तनाव एवं डिप्रेशन अलग हो जाएगा। अपने आप पर विश्वास करें। दूसरों पर विश्वास करना हमारी आदत है। आत्मविश्वास सबसे बड़ा विश्वास है, लोग सब पर विश्वास करते हैंए लेकिन स्वयं पर नहीं। आचार्य श्री ने मंत्र शक्ति के बारे में कहा कि मंत्र की शक्ति निर्मल परिणामों में प्रकट होती है। दूषित परिणामों में मंत्र की शक्ति प्रकट नहीं होती।</p>
<p>यदि मंत्र को शक्ति बनाना है तो परिणामों को निर्मल करना होगा। धर्म ध्यान में पहुंचना होगा तब जाकर मंत्र की उपलब्धि होगी। उन्होंने मंत्र के विषय में कहा कि मंत्र को जपते समय निर्मल परिणाम बना लोगे तो उपलब्धि होगी, यदि निर्मल परिणाम नहीं बनाओगे तो वह उपलब्धि नहीं होगी जो तुम चाहते हो। यदि निर्मल परिणाम नहीं बना तो मंत्र वह नहीं दे सकता, जिसकी आपको जरूरत है। उन्होंने णमोकार मंत्र के विषय में कहा कि णमोकार मंत्र को पढ़ना आसान नहीं है।</p>
<p>उसे अंतस चेतना से जाप करना कठिन काम है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम नहीं कर सकते। णमोकार मंत्र को यदि शुद्ध परिणाम से जपा जाए तो व्यंतर आदि कष्ट पीड़ा इसके अक्षर मंत्र से दूर होती है। मंत्र में बहुत ऊर्जा होती है। णमोकार मंत्र की पात्रता भी होनी चाहिएए बिना पात्रता के णमोकार मंत्र का लाभ नहीं है।</p>
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		<title>बच्चों की धार्मिक अंताक्षरी में टीम सृष्टि विजेता : शनिवारीय बालसभा में बच्चों ने लिया उत्साह से भाग  </title>
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		<pubDate>Sat, 26 Jul 2025 09:01:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[स्थानीय दिगंबर जैन पाठशाला की शनिवारीय बाल सभा में बच्चों के दो ग्रुपों में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण आधारित अंताक्षरी प्रतियोगिता रखी गई। इस प्रतियोगिता में शब्द, धुन, सिचुएशन तथा म्यूजिक राउंड में दोनों टीमों के 10-10बच्चों ने हिस्सा लिया। विजेता टीम पुरस्कृत होगी। डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230; डडूका। स्थानीय दिगंबर जैन पाठशाला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>स्थानीय दिगंबर जैन पाठशाला की शनिवारीय बाल सभा में बच्चों के दो ग्रुपों में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण आधारित अंताक्षरी प्रतियोगिता रखी गई। इस प्रतियोगिता में शब्द, धुन, सिचुएशन तथा म्यूजिक राउंड में दोनों टीमों के 10-10बच्चों ने हिस्सा लिया। विजेता टीम पुरस्कृत होगी। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> स्थानीय दिगंबर जैन पाठशाला की शनिवारीय बाल सभा में बच्चों के दो ग्रुपों में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण आधारित अंताक्षरी प्रतियोगिता रखी गई। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया के संयोजन में इस प्रतियोगिता में शब्द, धुन, सिचुएशन तथा म्यूजिक राउंड में दोनों टीमों के 10-10बच्चों ने हिस्सा लिया। सर्वाधिक 60 अंकों से टीम सृष्टि विजेता रही तथा 50 अंक लेकर टीम रीयल उप विजेता रही।</p>
<p>विजेताओं को रथोत्सव 2025 में पुरस्कृत किया जाएगा। झालावाड़ जिले के मनोहरथाना के पीपलोदी गांव के सरकारी विद्यालय में छत गिरने से कालकलवित हुए सात बच्चों को पाठशाला परिवार की ओर से दो मिनिट मौन रखकर णमोकार मयी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। घायल हुए बच्चों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई।</p>
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		<title>आचार्य भगवन विशुद्ध सागर महाराजजी के संघस्थ ब्रम्हचारी रवी भैयाजी जैन आयकॉन अवॉर्ड से सम्मानित : सेवा का पिण्ड प्रतीक बनकर जन-जन के मन का प्रेरणा स्त्रोत बने </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 07:40:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ब्रम्हचारी रवी भैयाजी को इंदौर में जैन आयकॉन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया। सोशल मीडिया पर विशुद्ध रवी चॅनल के माध्यम से धर्म प्रभावना का कार्य रवी भैया जी कर रहे है। जिनकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। पढ़िए इंदौर से अभिषेक अशोक पाटील की विशेष रिपोर्ट इंदौर। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ब्रम्हचारी रवी भैयाजी को इंदौर में जैन आयकॉन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया। सोशल मीडिया पर विशुद्ध रवी चॅनल के माध्यम से धर्म प्रभावना का कार्य रवी भैया जी कर रहे है। जिनकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से अभिषेक अशोक पाटील की विशेष रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष ने बताया की आचार्य भगवन विशुद्ध सागर महाराजजी के संघस्थ ब्रम्हचारी रवी भैयाजी को इंदौर में जैन आयकॉन अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया। सोशल मीडिया पर विशुद्ध रवी चॅनल के माध्यम से धर्म प्रभावना का कार्य रवी भैया जी कर रहे है। जिनकी लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। उन्हें यु ट्यूब की ओर से सिल्वर बटन मिला है।</p>
<p><strong>एकता ने सारे विश्व को ज्ञान रूपी आलोक से आलोकित किया </strong></p>
<p>आचार्य भगवन विशुद्ध सागर महाराजजी के संघस्थ ब्रम्हचारी रवी भैयाजी का पूरा नाम ब्र. रवी कुमार जैन है। उनका जन्म 17 मार्च 1990 को हुआ है। ब्रम्हचारी रवी भैयाजी की लौकिक शिक्षा बी.ई (सिव्हिल) तक हुई है। भारत वसुधा पर सुधारस की वर्षा करने वाले अनेक महापुरुष और संतों ने जन्म लिया है। उनकी साधना और कथनी-करनी की एकता ने सारे विश्व को ज्ञान रूपी आलोक से आलोकित किया है। इन स्थितप्रज्ञ पुरुषों ने अपनी जीवनानुभव की वाणी से त्रस्त और विघटित समाज को एक नवीन संबल प्रदान किया है। जिसने सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में क्रांतिक परिवर्तन किये हैं।</p>
<p><strong>रवी भैयाजी मित्रवत मित्रवत व्यवहार के संपोषक </strong></p>
<p>व्यवहार के संपोषक आप संसार की असारता, जीवन के रहस्य और साधना के महत्व को पह्चान गये थे। आध्यात्म सरोवर के राजहंस, चर्या शिरोमणी आचार्य भगवन श्री विशुद्ध सागर महाराजजी से 2019 में रवी भैयाजी ने ब्रम्हचर्य व्रत धारण किया है। ब्र. रवी भैयाजी स्वभाव से सरल और सब जीवों के प्रति मित्रवत व्यवहार के संपोषक हैं। इसी के कारण उनके व्यक्तित्व में विश्व-बन्धुत्व की, मानवता की सौंधी-सुगन्ध विद्यमान है। आप साधु-सत्संगति की भावना को हृदय में धारण कर आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के पास भिंड नगर में पहुँचे। वहाँ आपने ब्रह्मचारी बनकर ज्ञान, तपस्या और सेवा का पिण्ड प्रतीक बनकर जन-जन के मन का प्रेरणा स्त्रोत बने।</p>
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