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	<title>Ramganjmandi &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Ramganjmandi &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य जिनमणी प्रभ सुरीश्वर का रामगंजमंडी में किया स्वागत: गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की होड सी लग गई </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 12:57:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। करीब 15 मिनट तक तो यह स्थिति हो गई कि गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की होड सी लग गई। इस दौरान हर धर्म और समाज के व्यक्ति पहुंचे। श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि आचार्य श्री का नगर प्रवेश ऐतिहासिक रहा। जिसमें सकल जैन श्वेताम्बर श्री संघ के साथ दिगंबर जैन समाज, मेड़तवाल समाज, पोरवाल समाज, गिरिराज धरण संस्था, गुजराती समाज सहित हर समाज के व्यक्ति पहुंचे। वही छत्तीसगढ़ शिरोमणी मनोहर श्रीजी की शिष्याएं साध्वी लयसमिताजी, मृगावली श्रीजी आदि ठाणा 8 भी आचार्य की अगवानी करने आई। सबसे पहले एक छोटी बालिका विशुद्धि बापना ने सिर पर कलश लेकर आचार्य की अगवानी की। फिर श्वेताम्बर समाज की महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर अगवानी की और गंवली बनाकर श्रद्धा अर्पित की। बाजार नं. 3 से मंदिर तक लगातार दिगंबर जैन समाज के छोटे-बच्चे बैंड बजाते हुए आचार्य श्री के काफिले के आगे आगे चले।</p>
<p>आचार्य के जयकारे पूरे बाजार नं. 3 को गुंजायमान करते रहे। खरतरगच्छाधिपति को पूरे नगर और अन्य संघों से आए लोग आदिनाथ भगवान के मंदिर तक लेकर आए। जहां आचार्य मणी प्रभ सुरीश्वरजी, गणिवर्य मयंक प्रभ सागर, मुनि विरक्तप्रभ सागर आठांे साध्वी मंडल ने चैत्र वंदन किया और दादावाड़ी में दादा गुरुदेव के दर्शन वंदन किया।</p>
<p><strong>बच्चों ने दी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां</strong></p>
<p>रामगंजमंडी के बाजार नं. 6 में राजकमल आइल मील के विशाल परिसर में हुआ प्रवेश महोत्सव मंदिर से सीधे आचार्य राजकमल आइल मिल पहुंचे। जहां पूरा डोम जनता से भरा हुआ था। सर्वप्रथम सामूहिक वंदन हुआ। इसके बाद खरतरगच्छ महिला परिषद की जूनियर टीम ने स्वागत गाना गाया। फिर छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। उसके बाद खरतरगच्छ महिला परिषद की सीनियर टीम ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रामगंजमंडी ट्रस्ट के विजयकुमार छाजेड़, सुभाष बाफना, राजेंद्र रांका, स्थानक संघ से रूपचंद लाडवा, संजय बीजावत, भानपुरा संघ अध्यक्ष अशोक गोखरू ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन साक्षी पारख ने किया।</p>
<p><strong>भाग्य और सौभाग्य में बड़ा अंतरः साध्वी मृगावती</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारी साध्वी मृगावती ने कहा कि भाग्य और सौभाग्य में बड़ा अंतर है। संपत्ति का मिलना भाग्य है लेकिन, मंदिर का निर्माण करना सौभाग्य है। सीए, इंजीनियर, डॉक्टर बनना भाग्य है लेकिन, जिन शासन की शान बढ़ाना सौभाग्य है। भाग्य तो सभी को मिलता है पर रामगंजमंडी में सौभाग्य राजकुमार पारख को मिला।</p>
<p><strong>मंदिर पर काला टीका लगाने की जरूरत</strong></p>
<p>खरतरगच्छाधिपति ने कहा कि हम 2 से 3 वर्षों में बने मंदिर को अच्छी टाइमिंग मानते हैं। कई-कई मंदिर तो 10 वर्षों तक पूरे नहीं होते लेकिन, रामगंजमंडी का मंदिर सिर्फ 7 महीने 7 दिन में पूर्ण होना वास्तव में किसी चमत्कार से कम नहीं। मेरी जिंदगी में यह पहला मंदिर है। जिसकी प्रतिष्ठा करवाते वक्त कोई कार्य बाकी नहीं रहा। उन्होंने इस ऐतिहासिक मंदिर निर्माण के कार्य का पूरा-पूरा श्रेय राजकुमार पारख (अध्यक्ष) और उनकी टीम को दिया। वहीं, आचार्य ने पूर्व पार्षद साक्षी पारख के कार्यों को बेहतर बताया। आचार्य ने कहा कि मंदिर इतना खूबसूरत बना है कि किसी की नजर नहीं लगे, इसलिए राजकुमार पारख को काला टीका लगाने को कहा। प्रतिष्ठा महोत्सव में 15 तारीख को भगवान आदिनाथ विराजमान होंगे। आदिनाथ भगवान के गुणों को जीवन में जीने की नसीहत देते हुए आचार्य ने कहा कि हर ग्रंथ, हर वेद पुराण में आदिनाथ भगवान का वर्णन है। आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर ही देश का नाम भारत रखा गया। आचार्य श्री ने कहा कि घर में जमाई आवे तो चांदी की थालियां निकल जाती हैं। नेता आवे तो गलियां और सड़कें साफ हो जाती हैं। प्रधानमंत्री आए तो पांव जमीन पर नहीं टिकते। फिर रामगंजमंडी की धरती पर तो स्वयं भगवान पधार रहे हैं, सोचो कितना आनंद होगा।</p>
<p><strong>प्रतिष्ठा महोत्सव में सहयोग देने वालों का किया सम्मान</strong></p>
<p>श्रीआदिनाथ ट्रस्ट ने छप्पन भोग रिसोर्ट फ्री देने पर मोहन चौधरी और बालमुकुंद गुप्ता, गोवर्धन नाथ मंदिर देने के लिए नितिन माहेश्वरी, होटल देने पर चेरी भाई सलूजा, नसियाजी देने पर दिलीप विनायका, मेघवाल धर्मशाला देने पर राजेंद्र गुप्ता, भगवान सुमतिनाथ का मुकुट, कुंडल देने पर टीकम मित्तल और भूमि पूजन एवं खनन का लाभ लेने वाले ज्ञानचंद डागी, मंदिर के मुख्य कारीगर आरिफ मकराना एवं घिसाई का कार्य करने वाले रेशमाराम पिंडवाड़ा को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान गरोठ संघ ने राजकुमार पारख को सम्मानित किया।</p>
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		<title>रामगंजमंडी में जैन श्वेतांबर मंदिर का निर्माण जारी : श्री संघ ट्रस्ट अध्यक्ष समाजसेवी राजकुमार पारख ने संभाल रखी कमान  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 09:36:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहर के बाजार नं. 3 में स्थित श्रीआदिनाथ भगवान के 90 वर्ष पुराने मंदिर को पूरा उतारकर नींव से लेकर शिखर तक मकराना मार्बल से बनाया जा रहा है। मंदिर के नव निर्माण के लिए युद्ध स्तर पर कार्य जारी है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। शहर के बाजार नं. [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शहर के बाजार नं. 3 में स्थित श्रीआदिनाथ भगवान के 90 वर्ष पुराने मंदिर को पूरा उतारकर नींव से लेकर शिखर तक मकराना मार्बल से बनाया जा रहा है। मंदिर के नव निर्माण के लिए युद्ध स्तर पर कार्य जारी है। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> शहर के बाजार नं. 3 में स्थित श्रीआदिनाथ भगवान के 90 वर्ष पुराने मंदिर को पूरा उतारकर नींव से लेकर शिखर तक मकराना मार्बल से बनाया जा रहा है। मंदिर के नव निर्माण के लिए युद्ध स्तर पर कार्य जारी है। श्रीआदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने इसकी कमान संभाल रखी है। पारख ने बताया कि पूर्व के मंदिर में खनन एवं शिलान्यास नहीं होने एवं सामरण शिखर होने, शिखर बंध नहीं होने के साथ कई दोष बताए थे। साथ ही आचार्यों एवं मंदिर बनाने वाले कई शिल्पकारों ने इस मंदिर को घर देरासर की श्रेणी में माना और मंदिर जीर्णाेद्धार करवाने की बात कही। मंदिर बनाने के प्रयास कई वर्षों से मीटिंगों एवं कागजों तक ही सीमित रहे, लेकिन कभी धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो पाया।</p>
<p><strong>देवस्थान विभाग कोटा से ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ</strong></p>
<p>रामगंजमंडी श्वेतांबर समाज के वरिष्ठ ट्रस्टी विजयकुमार छाजेड़, सुभाष बापना, राजेंद्र रांका, दिलीप तिल्लानी, सुरेंद्र बापना, कोषाध्यक्ष सुशील गोखरू, सदस्य सुधीर पारख, रवि बापना, गौरव बापना, विनोद डोसी, अक्षत डांगी, यशवंत बापना, अभय बोहरा, दिलीप लोढ़ा, प्रेमचंद छाजेड़, कमल चाहेद, अक्षत डांगी, संदीप मोरावाल, कोमलचंद बोथरा, सुशील चोपड़ा, मोहित छाजेड़ और शैलेंद्र कटारिया ने बताया कि वर्ष 2022 में अध्यक्ष बने राजकुमार पारख का कार्यकाल स्वर्णिम रहा। उनके प्रयासों से राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग कोटा से ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ। आयकर विभाग से स्थाई 12 ए मिलना, नीति आयोग भारत सरकार में रजिस्ट्रेशन होना, दादाबाड़ी का आकर्षक नवीनीकरण, साधु साध्वी के ठहरने के उपाश्रय का बेहतर नवीनीकरण, भोजनशाला में टाइल्स एवं कोटा स्टोन लगाने का कार्य और वर्षों से लंबित पड़े मंदिर के निर्माण का कार्य अध्यक्ष राजकुमार पारख की लगन और मेहनत से शुरू हुआ। साथ ही बाहर के बड़े धार्मिक धर्मादा ट्रस्टों से बड़ी सहयोग राशि लाने जैसे कार्य ने समाज को अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़े कर दिया।</p>
<p><strong>मात्र 10 महीनों में पूर्ण होगा मंदिर का निर्माण </strong></p>
<p>श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं ट्रस्टी राजेंद्र रांका ने बताया कि 5 जून 2025 को भगवान की प्रतिमाओं का उत्थापन हुआ था। वहीं 5 मार्च को पूरा मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि परमात्मा के विराजने का गर्भगृह, रंगमंडप, समवशरण, 42 फिट ऊंचा शिखर और मंदिर परिसर के अंदर की दीवारें मार्बल से बन चुकी हैं। देवी-देवताओं के विराजमान होने के गोखलों का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं, फरवरी माह में पूरे मंदिर परिसर में फर्श (गलीचे) फ्लोरिंग और सामने की दीवार पर सफेद मकराना मार्बल कार्विंग किया हुआ लगाया जाएगा। इसके बाद मकराना से बन रहा 26 फिट ऊंचा सिंह द्वार भी लगेगा।</p>
<p><strong>  प्रतिष्ठा महोत्सव 13, 14 और 15 अप्रैल को</strong></p>
<p>श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि कम समय में भव्य मंदिर का निर्माण होना भगवान की कृपा, दादा गुरुदेव के आशीर्वाद एवं अवंती तीर्थाेद्धारक, युग दिवाकर, मरुधर मणि, खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज की पावन निश्रा है। जिन्होंने अब तक लगभग 300 मंदिरों एवं दादाबाड़ियों की प्रतिष्ठा करवाई है। मणिप्रभ सूरीश्वर महाराजा की निश्रा में इस मंदिर की भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव 13, 14 और 15 अप्रैल को होगा। साथ ही यह प्रतिष्ठा महोत्सव रामगंजमंडी के सकल जैन समाज के मार्गदर्शन में होगा। श्वेतांबर सकल संघ, दिगंबर सकल संघ और रामगंजमंडी के विभिन्न समाजों के प्रतिष्ठित लोगों को साथ में लेकर यह प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>एक महीने में 750किमी का विहार करेंगे गुरुदेव </strong></p>
<p>रामगंजमंडी के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाने के लिए आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज जैसलमेर से रामगंजमंडी तक का 750 किमी का उग्र विहार एक महीने में करेंगे। रामगंजमंडी के जैन समाज पर यह उनकी विशेष कृपा दृष्टि को दर्शाता है। प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए श्रीसंघ अध्यक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक, विधायक चंद्रसिंह सिसोदिया, पूर्व कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रमोद जैन भाया को लिखित आमंत्रण दिया है।</p>
<p><strong>हाथ में फ्रैक्चर हो जाने के बाद भी हौसला कायम </strong></p>
<p>शहर के मुख्य बाजार नंबर 3 में स्थापित इस मंदिर के बन रहे स्वरूप को हर व्यक्ति रुक कर निर्माण कार्य को देख रहा है। कार्य की कमान संभाल रहे राजकुमार पारख मंदिर निर्माण के दौरान कार्य करते हुए गिर गए। जिससे से उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया, इसके बाद भी मंदिर निर्माण में उनका हौंसला कायम रहा। इतना ही नहीं कोटा के निजी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, लेकिन ऑपरेशन के बाद अगले ही दिन पारख मंदिर निर्माण के कार्य में लग गए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पारख हार्ट के मरीज हैं एवं उनकी बाईपास सर्जरी हो चुकी है।</p>
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		<title>संयम पथ के 51 वर्ष में पहली बार रामगंजमंडी आएंगे मुनिश्री योगसागर जी : जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन होगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 08:06:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। उन्हें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया जाएगा। इसको लेकर समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन किया जाएगा।</p>
<p><strong>राजस्थान में ऐतिहासिक आगमन</strong></p>
<p>1979 के बाद लगभग 47 वर्षों के अंतराल में महाराज श्री का राजस्थान में पुनः मंगल आगमन हुआ है।</p>
<p>विशेष रूप से रामगंजमंडी नगर में यह उनका प्रथम आगमन है, जिससे नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में अपूर्व धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना है।महाराज श्री के सानिध्य में 27 जनवरी की बेला में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मनाया जाएगा।</p>
<p><strong> मुनि श्री योगसागर जी : त्याग और तप की जीवंत प्रतिमा</strong></p>
<p>मुनि श्री योगसागर जी महाराज दिगंबर जैन परंपरा के एक श्रेष्ठ, तपस्वी और सिद्ध साधक हैं। उनका जीवन आडंबर से दूर, कठोर संयम, शुद्ध चर्या और आत्मशुद्धि को समर्पित है। वर्तमान समय में वे दीक्षा-काल के अनुसार सबसे वरिष्ठ मुनिपदधारी हैं और &#8216;मुनि शिरोमणि&#8217; के रूप में श्रद्धापूर्वक सम्मानित हैं।</p>
<p><strong>जन्म एवं पारिवारिक परिचय</strong></p>
<p>महाराज श्री का जन्म 13 सितंबर 1956 (गुरुवार) को हुआ। आपके पिता मलप्पा जैन एवं माता श्रीमतीबाई जैन हैं। बचपन से ही उनमें वैराग्य और धर्मभाव प्रबल रहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संयम पथ की यात्रा</p>
<p>ब्रह्मचर्य व्रत : 2 मई 1975</p>
<p>क्षुल्लक दीक्षा : 18 दिसंबर 1975</p>
<p>ऐलक दीक्षा : 19 नवंबर 1977</p>
<p>मुनि दीक्षा : 15 अप्रैल 1980</p>
<p><strong>निर्यापक पद : 8 मार्च 2019</strong></p>
<p>इन चरणों से गुजरते हुए महाराज श्री ने पूर्ण दिगंबर मुनि जीवन को अंगीकार किया। गुरु परंपरा एवं विशेषता मुनि श्री योगसागर जी महाराज आचार्य परंपरा के महान संत आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित हैं। योग सागर जी मुनिराज अपने दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर जी और वर्तमान आचार्य समय सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के सगे भाई हैं।</p>
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		<title>आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का केशवरायपाटन अतिशय क्षेत्र से मंगल विहार : जयपुर होते हुए दिल्ली की ओर कदम बढ़ाते हुए हुए संघ सहित मुनिसुव्रतनाथ प्रतिमा के दर्शन </title>
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		<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 16:55:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शनिवार की प्रातः बेला में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का मंगल विहार केशवरायपाटन अतिशय क्षेत्र से हुआ। आचार्य श्री जयपुर होते हुए दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। गुरुदेव ने संघ सहित मुनिसुव्रतनाथ प्रतिमा का दर्शन किया तथा उपस्थित अनुयायियों के साथ मंगल विहार किया। पढ़िए अभिषेक जैन, लुहाड़िया की रिपोर्ट… [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शनिवार की प्रातः बेला में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का मंगल विहार केशवरायपाटन अतिशय क्षेत्र से हुआ। आचार्य श्री जयपुर होते हुए दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। गुरुदेव ने संघ सहित मुनिसुव्रतनाथ प्रतिमा का दर्शन किया तथा उपस्थित अनुयायियों के साथ मंगल विहार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन, लुहाड़िया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का केशवरायपाटन अतिशय क्षेत्र से मंगल विहार शनिवार की प्रातः बेला में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का मंगल विहार अतिशय क्षेत्र केशवरायपाटन से हुआ। आचार्य श्री जयपुर होते हुए दिल्ली की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। आचार्य श्री ने संघ सहित मुनिसुव्रतनाथ प्रतिमा के दर्शन किए उसके उपरांत मंगल विहार किया।</p>
<p>आचार्य श्री के मंगल विहार में रामगंजमंडी के महेश, नमिता, दर्पक, हार्दिक कटारिया के साथ पीयूष लाम्बाबांस, अमिता, विवान सुरलाया, नितिन सबदरा, हर्षित जैन, विनोद, कल्पना मित्तल सम्मिलित रहे। जानकारी देते हुए महेश कटारिया ने बताया कि गुरुदेव का रात्रि विश्राम लेसरदा में हुआ एवं सुबह आहारचर्या मायजा में सम्पन्न हुई।</p>
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		<title>आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने बताया संयम और व्रत का महत्व : जन्म स्मरण करने योग्य आचार्यों और ज्ञानमती माताजी की जीवन गाथा </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 12:11:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर, सुनीलसागर, समयसागर और आर्यिका ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस पर उनके त्याग, संयम और आध्यात्मिक योगदान की महत्ता बताई। आचार्य ने व्रत और आत्मा के श्रृंगार का महत्व समझाया तथा आधुनिकता में त्याग के रास्ते अपनाने की प्रेरणा दी। पढ़िए अभिषेक जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर, सुनीलसागर, समयसागर और आर्यिका ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस पर उनके त्याग, संयम और आध्यात्मिक योगदान की महत्ता बताई। आचार्य ने व्रत और आत्मा के श्रृंगार का महत्व समझाया तथा आधुनिकता में त्याग के रास्ते अपनाने की प्रेरणा दी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर, आचार्य श्री 108 सुनीलसागर, आचार्य श्री 108 समयसागर और गणिनी आर्यिका 105 ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस के अवसर पर कहा कि कुछ व्यक्तियों का जन्म स्मरण करने योग्य होता है। इन व्यक्तियों ने भोगों, राग-द्वेष का त्याग किया और संयम के मार्ग को अपनाया। आचार्य श्री विद्यासागर का जीवन उनके गुण और कर्मों के कारण अनुकरणीय है।</p>
<p>आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने बताया कि ज्ञानमती माताजी, 95 वर्ष से अधिक उम्र में भी जैन दर्शन और जिनवाणी के प्रचार में सक्रिय हैं। उन्होंने व्रतों का महत्व समझाते हुए कहा कि व्रत आत्मा का श्रृंगार हैं। बिना नियम व्रत के जीवन जीना जीवन को दुर्गति की ओर ले जाता है। आचार्य ने आधुनिकता के संदर्भ में कहा कि वास्तविक आध्यात्मिक मार्ग त्याग और संयम से होकर गुजरता है। केवल शब्दों में लगन नहीं बल्कि व्यवहार में त्याग अपनाना आवश्यक है।इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचन से प्रेरणा प्राप्त की। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक जैन लुहाड़िया द्वारा किया गया।</p>
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		<title>आचार्य विनिश्चय सागर जी के सानिध्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ : जैन दर्शन के अनमोल रत्नों ने आगमोदय ग्रंथ पर किया विमर्श </title>
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		<pubDate>Wed, 01 Oct 2025 14:15:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी स्थित सिद्ध क्षेत्र में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए विद्वानों ने आचार्य श्री द्वारा रचित आगमोदय ग्रंथ पर अपने विचार प्रस्तुत किए और जैन दर्शन की गहराइयों पर चर्चा की। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट… रामगंजमंडी। परम पूज्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी स्थित सिद्ध क्षेत्र में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए विद्वानों ने आचार्य श्री द्वारा रचित आगमोदय ग्रंथ पर अपने विचार प्रस्तुत किए और जैन दर्शन की गहराइयों पर चर्चा की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री 108 विराग सागर महाराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर मंगलाचरण किया गया। विद्वत जनों ने श्रीफल समर्पित कर आचार्य श्री के चरणों में वंदन किया और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>समारोह में धवला षट्खंडागम ग्रंथ (रजत पत्र पर निर्मित) की स्थापना समाज अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया, कमल लुहाड़िया, मंत्री राजीव बाकलीवाल, भूपेंद्र सांवला, मनोज बड़जात्या, जम्बू मितल आदि द्वारा की गई। आचार्य श्री द्वारा रचित आगमोदय ग्रंथ पर विभिन्न विद्वानों ने आलेख प्रस्तुत किए। इसमें चारों अनुयोगों का विवरण, चक्रवर्ती का वैभव, त्याग और जीवन के वास्तविक स्वरूप का सूक्ष्म विवेचन है। विद्वानों ने कहा कि आचार्य श्री ने 100 ग्रंथों का सार एक ही ग्रंथ में समाहित किया है, जो उनकी अद्भुत प्रज्ञा का प्रमाण है।</p>
<p>आचार्य श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन दर्शन संपूर्ण सत्य पर आधारित है। सम्यक दर्शन का अर्थ है सत्य को जानना और उसे श्रद्धा से स्वीकार करना। उन्होंने कहा कि व्रत के बिना जीवन अधूरा है और व्रत पालन से अशुभ कर्म रुक जाते हैं। स्वाध्याय से आगम के रहस्य खुलते हैं, और विद्वानों का साथ संगोष्ठी को सार्थक बनाता है।</p>
<p><strong>आहार, संलेखना समाधि और जैन साधना पर भी आलेख प्रस्तुत</strong></p>
<p>गुरुदेव ने अति सुख और अति दुख को खतरनाक बताते हुए कहा कि जब यह बढ़ जाते हैं तो मर्यादा भंग होती है। धर्म करने में भाव पूजा का महत्व है, द्रव्य पूजा का नहीं। उन्होंने आगम को सर्वोच्च मानते हुए कहा कि किसी भी विषय को आगम के अनुसार ही स्वीकार करना चाहिए। विद्वत संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में मुनियों के आहार, संलेखना समाधि और जैन साधना पर भी आलेख प्रस्तुत किए गए। दोपहर के सत्र में वक्ताओं ने आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज की निर्मोहिता और उनके महान व्यक्तित्व की चर्चा की। रामगंजमंडी की इस विद्वत संगोष्ठी में जैन दर्शन के अनमोल रत्नों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना दिया।</p>
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		<title>सिद्ध चक्र महामंडल विधान का हवन पूर्णाहुति के साथ समापन : आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने हवन के महत्व, भाव-क्रिया समन्वय और धर्म के प्रति एकाग्रता पर दिया मार्गदर्शन </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 05:44:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को श्री जी के अभिषेक, शांति धारा और हवन पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ। आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने हवन का अर्थ और उद्देश्य समझाया, साथ ही पूजा और भाव के समन्वय, धर्म के लिए एकाग्रता, तथा कर्म सिद्धांत पर महत्वपूर्ण संदेश दिए। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को श्री जी के अभिषेक, शांति धारा और हवन पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ। आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने हवन का अर्थ और उद्देश्य समझाया, साथ ही पूजा और भाव के समन्वय, धर्म के लिए एकाग्रता, तथा कर्म सिद्धांत पर महत्वपूर्ण संदेश दिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>रामगंजमंडी में गत दिनों से चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान का भव्य समापन रविवार की बेला में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्री जी के अभिषेक और शांति धारा से हुई, इसके उपरांत नित्य नियम पूजन और हवन पूर्णाहुति संपन्न हुई। इस अवसर पर आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन दिए और हवन का सटीक अर्थ बताया। गुरुदेव ने हवन का उद्देश्य स्पष्ट किया और कहा कि हवन का मतलब केवल अग्नि में अरघ अर्पित करना नहीं है, बल्कि यह अपने कर्मों और साधना की समीक्षा करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि हवन का उद्देश्य शांति, व्यक्तिगत और विश्व शांति दोनों के लिए होना चाहिए।</p>
<p><strong>भाव के साथ क्रिया करने से साधना पूर्ण होती है</strong></p>
<p>उन्होंने अरघ अर्पण के महत्व पर ध्यान देते हुए कहा कि केवल क्रिया करना पर्याप्त नहीं है, इसमें भाव होना अत्यंत आवश्यक है। पूजा और धर्मध्यान में भाव और क्रिया का समन्वय होना चाहिए। भाव के बिना क्रिया औपचारिक मात्र बन जाती है, जबकि भाव के साथ क्रिया करने से साधना पूर्ण होती है। आचार्य श्री ने कहा कि धर्म करने के लिए एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है। यदि क्रिया निराकुल भाव से की जाती है, तो उसका वास्तविक फल नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ी समस्या है समय और काम का संतुलन; यदि हम एक घंटे ध्यान और पूजा में सही भाव और पुरुषार्थ के साथ लगाएं, तो लाखों ऊर्जा का फल प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p><strong>पूजा में द्रव्य और भाव के समन्वय पर भी जोर</strong></p>
<p>गुरुदेव ने पूजा में द्रव्य और भाव के समन्वय पर भी जोर दिया और कहा कि जो लोग वर्षों से पूजा कर रहे हैं, उनसे मार्गदर्शन लेना चाहिए। कोई भी कार्य सरल या कठिन नहीं होता, यह हमारी समझ और अभ्यास पर निर्भर करता है। यदि हम भगवान का नाम बड़े भाव से लेते हैं, तो हमारे कर्मों की निर्जरा होती है।</p>
<p>कर्म सिद्धांत पर चर्चा करते हुए आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि कोई किसी का कर्ता नहीं है। हमारे कर्मों का फल हमें स्वयं भुगतना पड़ता है, और जो बिगड़ा है उसे ही सुधारना होगा।</p>
<p>आचार्य श्री ने हवन को दैनिक करने की आवश्यकता बताई और कहा कि मंदिर में हवन कुंड में बुराइयों को डालकर धर्म अनुराग और शांति का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे आकुलता बढ़ी है और साधना प्रभावित हुई है।</p>
<p>इस अवसर पर उपस्थित भक्तों ने गुरुदेव के उपदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और हवन एवं साधना में भाव, एकाग्रता और पुरुषार्थ का संदेश ग्रहण किया।</p>
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		<title>मानवता की मिसाल बन युवा दल ने पोलियो ग्रस्त युवक को दी 15 हजार की मदद : रामगंजमंडी की सामाजिक संस्था फिर बनी जरूरतमंदों का सहारा </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 06:26:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी की समाजसेवी संस्था युवा दल ने नीमच जिले के तलाऊ ग्राम निवासी पोलियो ग्रस्त राजाराम बेरागी की मदद की। संस्था ने 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर मानवता और इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… रामगंजमंडी। सामाजिक संस्था युवा दल अपने स्थापना वर्ष 1990 से अब तक हजारों जरूरतमंदों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी की समाजसेवी संस्था युवा दल ने नीमच जिले के तलाऊ ग्राम निवासी पोलियो ग्रस्त राजाराम बेरागी की मदद की। संस्था ने 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर मानवता और इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> सामाजिक संस्था युवा दल अपने स्थापना वर्ष 1990 से अब तक हजारों जरूरतमंदों के लिए सहारा बन चुकी है। रविवार को संस्था ने एक और मिसाल कायम करते हुए नीमच जिले के तलाऊ ग्राम निवासी पोलियो ग्रस्त राजाराम बेरागी को 15 हजार रुपये की सहायता राशि सौंपी।</p>
<p>38 वर्षीय राजाराम ने अपनी व्यथा संस्था सचिव राजकुमार पारख को बताई। बचपन में गलत इलाज से पोलियो का शिकार हुए राजाराम के पिता का निधन कोविड काल में हो गया। अब वह अपनी वृद्ध मां के साथ कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। जानकारी मिलने पर युवा दल ने उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान किया और भोजन की व्यवस्था भी की।</p>
<p><strong>समाजसेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया</strong></p>
<p>संस्था ने हाल ही में रावतभाटा की आकांक्षा की नर्सिंग कोचिंग फीस, गिरवी रखा घर छुड़ाना, सड़क दुर्घटना में मृत युवक की पत्नी को सहायता राशि तथा कई विद्यार्थियों की फीस जमा करवा कर भी समाजसेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>मानवता की सच्ची सेवा कर रहे युवा वर्ग </strong></p>
<p>युवा दल के इस कार्य में चैरी सलूजा, अनेकांत जैन, बाबू पोरवाल, अमित उपाध्याय, रामगुप्ता, शरद जैन, शैलेन्द्र विनायका और विनोद अग्रवाल सहित कई सदस्यों का योगदान रहा। संस्था निरंतर जरूरतमंदों की मदद में जुटी हुई है और मानवता की सच्ची सेवा कर रही है।</p>
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		<title>मन और वचन में अंतर तिर्यंच गति का कारण है : मायाचारी से बचना जरूरी है – आचार्य विनिश्चय सागर महाराज </title>
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		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 12:03:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना, छलना-ठगना और कुटिलता जीव को अधोगति में ले जाती है। धर्म और स्पष्टता के साथ जीवन जीने से ही आत्म उत्थान संभव है। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना, छलना-ठगना और कुटिलता जीव को अधोगति में ले जाती है। धर्म और स्पष्टता के साथ जीवन जीने से ही आत्म उत्थान संभव है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन की ख़ास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>रामगंजमंडी में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में तिर्यंच गति और मायाचारी के विषय में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तिर्यंच गति दुखों से भरी हुई है और इससे बचने के लिए मायाचारी का त्याग करना अनिवार्य है। आचार्यश्री ने कहा कि मन में कुछ और वचन में कुछ कहना, ठगना-छलना और कुटिल भाव रखना मायाचारी है। यह मायाचारी अंततः जीव को तिर्यंच गति की ओर ले जाती है। धर्म तभी हमें मायाचारी से बचा सकता है जब वह हमारे हृदय में उतर जाए।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रावण ने सीता हरण के लिए वेष बदलकर मायाचारी की, लेकिन अंततः वह उपहास का पात्र बन गया। आचार्यश्री ने स्पष्ट कहा कि यदि हम झूठ और मायाचारी करेंगे तो हमारी संतान भी उसी आदत को अपना लेगी।</p>
<p><strong>स्पष्ट बोलने की आदत डालना जरूरी</strong></p>
<p>उन्होंने माताओं-पिताओं से आह्वान किया कि बच्चों को प्रेम के साथ संस्कारित करें। प्रेम के साथ संस्कार ही उन्हें लौकिकता और आध्यात्मिकता दोनों में आगे बढ़ाते हैं। जीवन में स्पष्ट बोलने की आदत डालना जरूरी है, क्योंकि यदि हमारे भीतर मायाचारी है तो हम स्पष्ट नहीं बोल पाएंगे। महाराजश्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन का हिसाब रखना चाहिए और आत्म-उत्थान के लिए हर क्षण प्रयत्न करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं करेंगे तो अंत में केवल पश्चाताप शेष रह जाएगा। उन्होंने अंत में कहा कि जीवन में कुछ ऐसा करो कि तिर्यंच गति का बंध न हो और आत्मा का वास्तविक कल्याण हो सके।</p>
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		<title>परम पूज्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का केशलोच : रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में हुआ अद्वितीय तप का प्रदर्शन </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Aug 2025 08:04:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केशलोच कर अद्वितीय साधना का प्रदर्शन किया। दिगंबर परंपरा के इस मूलगुण के अंतर्गत बिना किसी औजार के केश उखाड़ना कठिन तपस्या मानी जाती है। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की खास रिपोर्ट… रामगंजमंडी — 14 अगस्त की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केशलोच कर अद्वितीय साधना का प्रदर्शन किया। दिगंबर परंपरा के इस मूलगुण के अंतर्गत बिना किसी औजार के केश उखाड़ना कठिन तपस्या मानी जाती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की खास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी</strong> — 14 अगस्त की प्रातः बेला में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केश लोचन किया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए गहन प्रेरणादायी रहा।</p>
<p>केशलोच के विषय में प्रकाश डालते हुए आपको बता दें कि दिगंबर संत स्वावलंबी होते हैं। वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों न हो, वे समभाव में उसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। केशलोच एक साधना और तपस्या है। बिना किसी औजार के हाथों से केश उखाड़ना सहज नहीं होता।</p>
<p><strong>मूलगुणों में यह एक प्रमुख गुण</strong></p>
<p>जैन संतों के मूलगुणों में यह एक प्रमुख गुण है। स्वयं के हाथों, बिना किसी अस्त्र के, अपने केशों को घास-फूस की तरह निकालना अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना मानी जाती है।</p>
<p>साधना के मार्ग पर चलते हुए जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है, जो पंचम युग में एक दुर्लभ और अद्वितीय साधना का प्रमाण है।</p>
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