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	<title>Punya Sagarji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Punya Sagarji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं-आचार्य श्री वर्धमान सागरजीः गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 11:19:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार श्री वर्धमान सागरजी ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभास्थल पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजन के सातवें दिन गुरुवार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार श्री वर्धमान सागरजी ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभास्थल पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजन के सातवें दिन गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। सिद्ध परमेष्ठी भगवान के गुणों का गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> जो पूज्य की पूजा करते हैं, वे स्वयं पूज्य बन सकते और पूज्यता को प्राप्त हो सकते हैं। पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभास्थल पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजन के सातवें दिन गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि आज सिद्ध परमेष्ठी भगवान के गुणों का गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए जा रहे हैं। आप सभी पूजा को निराकुलता पूर्वक संपन्न करें। आचार्यश्री ने बताया कि सिद्ध भगवान ने भी मनुष्य भव से ही कर्मों का नाश कर अरिहंत अवस्था को प्राप्त किया था और समस्त कर्मों का नाश कर सिद्ध अवस्था को प्राप्त किया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76540" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0037-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />आचार्य शांति सागरजी का मुनि दीक्षा दिवस मनाया</strong></p>
<p>आचार्य श्री शांति सागरजी के मुनि दीक्षा दिवस पर आचार्यश्री ने कहा कि जिस प्रकार चक्रवर्ती राजा के आयुधशाला में चक्र रत्न उत्पन्न होता है, तो वह चक्रवर्ती राजा षटखंड के राज्य को जीत कर षटखंड का अधिपति राजा चक्रवर्ती राजा हो जाता है। उसी प्रकार चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागरजी अपने कर्मों पर विजय प्राप्त कर चारित्र चक्रवर्ती के पद को सार्थक किया था। आज हम सभी उन्हीं के बताए हुए धर्म मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं। आप सब भी इस मार्ग पर चलने का प्रयत्न और पुरुषार्थ करें। हम उनके बताए आदर्श और उपकारों को भूला नहीं सकते हैं। उन महामना ने हम सभी पर परम उपकार किया है। हम उनके चरणों में कृतघ्नता प्रकट करते हुए विनयांजलि और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन </strong></p>
<p>7 से 14 मार्च तक आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आराधना पूजा में शुक्रवार को प्रातः बड़ी जयमाला के साथ हवन पूर्णाहुति का आयोजन होगा। प्रतिदिन सायंकाल श्रीजी की आरती, विधान मंडल की आरती, गुरु की आरती, गुरुवंदना के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें निशांत शर्मा (दिल्ली) एंड पार्टी के कलाकारों और स्थानीय पात्रों के साथ प्रेरणास्प्रद कथानकों के साथ लघु नाटिकाओं का प्रभावी मंचन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>जिज्ञासाओं का शंका समाधान </strong></p>
<p>बुधवार रात्रि को सौधर्म इंद्र सभा दरबार लगा, जिसमें इंद्र-इंद्राणियों ने अनी जिज्ञासाओं का शंका समाधान किया। साथ ही गुरुवार को रात्रि में नेमि-राजुल नाटिका के माध्यम से राजकुमार नेमीकुमार के वैराग्य की प्रभावी नाटिका का मंचन किया गया।</p>
<p><strong>श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद लिया</strong></p>
<p>इसके पूर्व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन और बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के निर्देशन में अष्टान्हिका पर्व में श्री पुण्य सागरजी के संघस्थ परम तपस्वी मुनिराज श्री महोत्सव सागरजी महाराज और श्री उत्सव सागरजी व श्राविका श्रेष्ठ तारादेवी जैन (अहमदाबाद) वालों का आठ उपवास की साधना निरंतर चलने पर आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>शिक्षण सामग्री भेंट की व शिक्षिकाओं का सम्मान किया</strong></p>
<p>साथ ही गुरुवार को सायं इसी सभास्थल पर श्री वर्धमान जैन पाठशाला के बच्चों को पाठशाला के बैग और शिक्षण सामग्री के किट वितरित कर पाठशाला की 10 शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधान के सौधर्म इंद्र परिवार जिग्नेश जी हर्षित जी चंपावत परिवार द्वारा पाठशाला के बच्चों को प्रतिमाह स्वैच्छिक पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा।</p>
<p><strong>सामूहिक ढूंढोत्सव, बच्चों को वितरित होंगे खिलौने</strong></p>
<p>विगत एक वर्ष के दौरान जन्मे जैन समाज के नन्हे बालक-बालिकाओं का दोपहर 1.30 बजे से क्षेत्रपाल मंदिर में एकत्रिकरण होकर दर्शन आशीर्वाद के पश्चात बैंड-बाजों के जुलूस के साथ श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिरजी प्रांगण में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ससंघ और मुनिश्री पुण्य सागरजी ससंघ मंगल आशीर्वाद और प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन, बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, ब्रह्मचारी विकास भैया, पंडित विशाल जैन के निर्देशन में नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के साथ श्रीजी की पूजा परिक्रमा और आचार्यश्री द्वारा जैन संस्कार का मंत्रोच्चार पूर्वक आशीर्वाद प्रदान किया जाएगा। सायंकाल में समाज का सामूहिक स्नेहभोज आयोजन भी होगा। इससे पहले केसरियाजी दिगंबर जैन मंदिर और श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में भी ढूंढोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा।</p>
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		<title>आर्यिका श्री स्वर्णमति माताजी का समाधि मरण: जैन समाज में शोक </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Feb 2025 16:40:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धरियावद। परम पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री स्वर्णमति माताजी का आज समाधि मरण धरियावद में हुआ। पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर धरियावद। परम पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री स्वर्णमति माताजी का आज समाधि मरण धरियावद में हुआ। माताजी का परिचय आर्यिका श्री स्वर्णमति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धरियावद। परम पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री स्वर्णमति माताजी का आज समाधि मरण धरियावद में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर</span></strong></p>
<hr />
<p>धरियावद। परम पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री स्वर्णमति माताजी का आज समाधि मरण धरियावद में हुआ।</p>
<p><strong>माताजी का परिचय</strong></p>
<p>आर्यिका श्री स्वर्णमति माताजी का पूर्व नाम श्रीमती सुनीता छाबड़ा था। आप डिब्रूगढ़, असम की निवासी थीं। आपने 2 जुलाई 2023 को मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज से सिद्ध क्षेत्र सोनागिर, मध्यप्रदेश में आर्यिका दीक्षा प्राप्त की थी। आप श्रीमती रतनी देवी और श्री देवीलाल पटौदी की पुत्री थीं। आपका जन्म 10 दिसंबर संवत 2049 को हुआ था। आपके गृहस्थ जीवन में रतन लाल जी छाबड़ा से विवाह हुआ और उनके दो पुत्र व एक पुत्री हैं।</p>
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		<title>धरियावद में तीन दिवसीय रजत जयंती महोत्सव का पारणोत्सव और रथावर्तन के साथ समापनः शक्ति हमारे अंदर होती है-मुनिश्री पुण्य सागरजी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_three_day_silver_jubilee_festival_concluded_with_paranotsav_and_rathavartan_in_dhariavad/</link>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 16:50:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज के आशीर्वाद से दिगंबर जैन मंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का रजत जयंती महोत्सव, द्वय तपस्वी मुनिराजों का पारणोत्सव और महावीर वाटिका में नवनिर्मित पुण्य सागर सभागार का लोकार्पण समारोह गुरुवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन निष्क्रिडित व्रत साधना के 41 एवं 80 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज के आशीर्वाद से दिगंबर जैन मंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का रजत जयंती महोत्सव, द्वय तपस्वी मुनिराजों का पारणोत्सव और महावीर वाटिका में नवनिर्मित पुण्य सागर सभागार का लोकार्पण समारोह गुरुवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन निष्क्रिडित व्रत साधना के 41 एवं 80 दिवसीय उपवास का महापारणा कराया गया। इस मौके पर महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर के शिखर पर नवीन ध्वजारोहण भी किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज के आशीर्वाद से वात्सल्यमूर्ति 108 मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज ससंघ सान्निध्य एवं बालयोगी युवाचार्य 108 श्री श्रुतधर नंदीजी महाराज ससंघ की गरिमामयी उपस्थिति में श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का रजत जयंती महोत्सव, द्वय तपस्वी मुनिराजों का पारणोत्सव और महावीर वाटिका में नवनिर्मित पुण्य सागर सभागार का लोकार्पण समारोह गुरुवार को धूमधाम से संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन मुनि 108 श्री महोत्सव सागरजी महाराज एवं मुनि 108 श्री उदित सागरजी महाराज के क्रमशः त्रिलोकसागर व्रत और सिंह निष्क्रिडित व्रत साधना के 41 एवं 80 दिवसीय उपवास का महापारणा कराया गया। इस मौके पर महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर के शिखर पर नवीन ध्वजारोहण भी किया गया। दोपहर में महावीर वाटिका से श्रीजी की रथ यात्रा निकाली गई, जो नगर के विभिन्न मार्गों से भ्रमण करते हुए महावीर स्वामी मंदिर पहुंची। इस दौरान देश-प्रदेश से आए बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविका मौजूद रहे।</p>
<p><strong>शक्ति हमारे अंदर होती है-मुनिश्री </strong></p>
<p>मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि शक्ति हमारे अंदर होती है, हमें स्वयं को उसे उद्घाटित करने की आवश्यकता है। बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती 108 श्री शांति सागरजी महाराज ने अपनी शक्ति को जाग्रत करके पूरे जीवन कठिन तपस्या और साधना की। उन्होंने सम्यक समाधिमरण कर हमें संयम साधना के मार्ग पर अग्रसर होने का उपाय औ मार्गदर्शन प्रदान किया था। हम उन्होंने हम सभी को जीवन में संयम धारण करने का संदेश दिया।</p>
<p><strong>साधना को साकार किया </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि शांति सागरजी महाराज की इस पट्ट परंपरा में ही उन्हें ‘पड़पोते‘ धरियावद नगर गौरव मुनिश्री उदित सागरजी महाराज और थांदला नगर गौरव मुनिश्री महोत्सव सागरजी महाराज ने इस काल में ऐसी साधना करके चतुर्थ काल की साधना को साकार कर दिया।</p>
<p><strong>गुरुओं का आशीर्वाद तो तपस्या फलीभूत होती है</strong></p>
<p>बालयोगी युवाचार्य 108 श्री श्रुतधर नंदीजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जिसके हाथ नीचे होते हैं, उसकी किस्मत पीछे होती है। वहीं, जिसके हाथ ऊपर, उसकी किस्मत सुपर होती है। उन्होंने ने कहा कि गर्भ में आए तो जन्म होना चाहिए, जन्म हो जाए तो दीक्षा होनी चाहिए, दीक्षा हो जाए तो ज्ञान होना चाहिए और अगर ज्ञान हो जाए तो निर्वाण होना चाहिए। वहीं, दोनों तपस्वी मुनिराजों ने कहा कि जिन पर गुरुओं का हाथ और आशीर्वाद होता है तो तपस्या अवश्य ही फलीभूत होती है। सभी लोगों को संयम धारण करके धर्म के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए।</p>
<p><strong>योगदान हेतु उपाधियों से अलंकृत किया</strong></p>
<p>दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि पुण्य सागर महाराज ने इस पारणा महोत्सव पर महोत्सव सागरजी महाराज को ‘तपस्वी सूर्य‘ और उदित सागरजी महाराज को ‘तपो मार्तंड‘ की उपाधि से अलंकृत किया। साथ ही रजत जयंती महोत्सव के अध्यक्ष भरत कुमार रत्नावत जो तपस्वी मुनिराज 1089 श्री उदित सागरजी महाराज के गृहस्थ अवस्था के ज्येष्ठ पुत्र हैं, उन्हें इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप से सफलतम समापन कराने में अपना अमूल्य योगदान करने के लिए ‘युवा रत्न‘ की उपाधि से अलंकृत किया।</p>
<p><strong>समाज के श्रेष्ठीजनों का सम्मान</strong></p>
<p>स्थानीय समाज के सेठ दिनेश कुमार जैकणावत, रजत जयंती महोत्सव के सौधर्म इंद्र अरविंद कुमार पचौरी, धनपति कुबेर शीतल कुमार अणादवत, भंवरलाल पचोरी, प्रतापगढ़ उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा, धनपाल वक्तावत, महावीर युवा मंच के अध्यक्ष रजनीश कुमार सुंदरोत, सूर्य प्रकाश बोहरा, कुंतीलाल वणावत सहित समाज के समस्त श्रेष्ठीजन का सम्मान किया गया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73948" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0052-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />भेंट का सौभाग्य व आहारचर्या का लाभ मिला</strong></p>
<p>महावीर स्वामी जिनालय के शिखर पर नवीन ध्वजारोहण का लाभ नानालाल किकावत परिवार को मिला। वहीं, मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज को पिच्छिका भेंट का सौभाग्य इंदरमल विनोद कुमार पटवा परिवार, मुनि महोत्सव सागरजी महाराज को नवीन पिच्छिका भेंट का सौभाग्य महावीर प्रसाद सुंदरोत परिवार और मुनिश्री उदित सागरजी महाराज को नवीन पिच्छिका भेंट का सौभाग्य सन्मति कुमार धरणेंद्र जगीसोत परिवार (मुंबई) को मिला। इसी तरह द्वय तपस्वी मुनिराजों के पारणा महोत्सव में आहारचर्या का लाभ श्रीमती निर्मलादेवी, भरत कुमार, अनिल कुमार एवं समस्त रत्नावत परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>तीन दिवसीय कार्यक्रम सम्पन्न</strong></p>
<p>तीन दिवसीय संपूर्ण कार्यक्रम बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी ‘बिगुल‘, बाल ब्रह्मचारी विकास भैया, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में पंडित भागचंद जैन, पंडित विशाल जैन के कुशल संचालन और ब्रह्मचारिणी मुन्नी बाई की गौरवमयी उपस्थिति में संपन्न हुए।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का भक्तिभाव से स्वागत किया</strong></p>
<p>उक्त समारोह में असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित देश भर से मुनि पुण्य सागर भक्त मंडल के श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पारणोत्सव की अनुमोदना की। दोपहर के पश्चात रथयात्रा जुलूस नगर के महावीर वाटिका कल्याणपुरा रोड से शुरू होकर पुराना बस स्टैंड, सुभाष पार्क, हनुमान चौराहा, प्रतापगढ़ रोड होते हुए सुमतिलाल शिशुपाल अमित कुमार अदणावत परिवार के यहां पहुंचा। यहां धूमधाम से श्रीजी को अर्घ्य समर्पण, मंगल आरती, मुनिराजों का पाद प्रक्षालन और आरती प्रभावना वितरण किया गया। यहां से रथयात्रा नसियांजी, कबूतर खाना, केसरियाजी मंदिर, सदर बाजार होते हुए महावीर जिनालय पहुंची।</p>
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		<title>दिगंबर जैन मुनि पुण्य सागरजी का केशलोचः भक्तामर विधान मंडल पूजन का पांचवां दिन </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 13:31:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रज्ञा श्रमण वात्सल्य मूर्ति पुण्य सागरजी महाराज ने अपने मूलगुणों की पालना में हाथों से केशलोंच किया। इधर, मुनिश्री संघ सानिध्य में चल रहे श्री भक्तामर महामंडल विधान पूजन का आज पांचवें दिन भी भक्ति भाव से अनुष्ठान जारी रहा। पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह पूरी खबर&#8230; धरियावद। श्री महावीर स्वामी दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रज्ञा श्रमण वात्सल्य मूर्ति पुण्य सागरजी महाराज ने अपने मूलगुणों की पालना में हाथों से केशलोंच किया। इधर, मुनिश्री संघ सानिध्य में चल रहे श्री भक्तामर महामंडल विधान पूजन का आज पांचवें दिन भी भक्ति भाव से अनुष्ठान जारी रहा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>धरियावद।</strong> श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर, पुराना बस स्टैंड में प्रवासरत प्रज्ञा श्रमण वात्सल्य मूर्ति पुण्य सागरजी महाराज ने आज अपने 28 मूलगुणों की पालना में हाथों से केशलोंच किया गया। इधर, मुनि श्री संघ सान्निध्य में चल रहे श्री भक्तामर महामंडल विधान पूजन का आज पांचवें दिन भी भक्ति भाव से अनुष्ठान जारी रहा।</p>
<p><strong>मूलगुणों का कठोरता से पालन </strong></p>
<p>जन सामान्य के ध्यानार्थ बता दें कि दिगंबर जैन मुनि अट्ठाइस (28) मूलगुणों का कठोरता से नियमपूर्वक पालन करते हैं। उनमें से एक मूलगुण अपने हाथों से बालों को तृणवत (घास) उखाड़ना ‘केशलोच‘ कहलाता है। वे किसी नाई की सहायता नहीं लेते या उस्तरे का प्रयोग नहीं करते हैं। मुनिचर्या के मूलगुणों में केशलोच प्रत्येक दो, तीन, चार माह की अवधि में एक बार किया जाता है। प्रत्येक दो माह में किया जाने वाला-उत्तम, तीन माह के बाद किया जाने वाला-मध्यम और चार माह बाद किया जाने वाला जघन्य केशलोच कहलाता है। इससे मुनिश्री की चर्या शरीर से निर्माेह शरीर और आत्मा के भिन्न-भिन्न प्रकार का बोध कराती है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72147" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250107-WA0019-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />उपवास व्रत की साधना निरंतर </strong></p>
<p>संघस्थ मुनिराज महोत्सव सागरजी महाराज के (41) दिन और महातपस्वी मुनिश्री उदित सागरजी महाराज के 80 दिन के उपवास व्रत की साधना निरंतर जारी है। साथ ही श्रावक श्रेष्ठी सुरेश भाई पचौरी के 36 उपवास की साधना चल रही है। इनका मंगलवार को उपवास का 29वां दिन रहा। इनका पारणोत्सव आगामी 15 जनवरी को निज आवास पर संभावित है।</p>
<p><strong>पांचवें दिन के पुण्यार्जक </strong></p>
<p>मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य, बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी ‘बिगुल‘, बाल ब्रह्मचारी विकास भैया, ब्रह्मचारिणी मुन्नी बाईजी और पंडित गजेंद्र पटवा के निर्देशन में भक्तामर महामंडल विधान के पांचवें दिन के पुण्यार्जक- सुरेश पचौरी, अरविंद भंवरा, धनपाल वक्तावत, कुंतीलाल वणावत और चेतन वक्तावत परिवार रहे। दसा नरसिंहपुरा समाज के सेठ भंवरलाल दिनेश कुमार जेकणावत ने बताया कि पारसोला में विराजित वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ को धरियावद पधारने की विनती करने के लिए श्रीसमाज बुधवार को जाएगा।</p>
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