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	<title>Prashant Tiwari Jain Gandhi &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>दक्षिण कोरिया से लौटकर डॉ. आस्था जैन ने कहा - :  हमने उन्हें आयुर्वेद सिखाया और समय प्रबंधन उनसे सीखा </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Apr 2024 09:26:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[न जगत के वरिष्ठ समाजसेवी लेखक ,ओजस्वी वक्ता, राजेन्द्र जैन महावीर- अनुपमा जैन की सुपुत्री डॉ. आस्था जैन तीन माह के लिए दक्षिण कोरिया गई थी। डॉ. आस्था ने बताया कि भारत सरकार आयुष मंत्रालय धर्म आयुर्वेद भोपाल के अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य प्रशांत तिवारी के मार्गदर्शन में उन्होंने दक्षिण कोरिया के सुकजोंग वैलपर्क हॉस्पिटल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>न जगत के वरिष्ठ समाजसेवी लेखक ,ओजस्वी वक्ता, राजेन्द्र जैन महावीर- अनुपमा जैन की सुपुत्री डॉ. आस्था जैन तीन माह के लिए दक्षिण कोरिया गई थी। डॉ. आस्था ने बताया कि भारत सरकार आयुष मंत्रालय धर्म आयुर्वेद भोपाल के अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य प्रशांत तिवारी के मार्गदर्शन में उन्होंने दक्षिण कोरिया के सुकजोंग वैलपर्क हॉस्पिटल में उनकी मेन्टोर डॉ. मियन्ग किम के साथ कैंसर रोगियों पर आयुर्वेद के सफल प्रयोग किये, और भारतीय चिकित्सा पद्धति के महत्व को स्थापित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए आशीष चौधरी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद ।</strong> भारत विश्व गुरु था, है और रहेगा, केवल हमें जागने की आवश्यकता है। योग, प्राणायाम, आयुर्वेद भारतीय जीवन संस्कृति के अभिन्न अंग थे, जिन्हें हम भूल गए, जब &#8216;योग&#8217; विदेश पहुंचा तो &#8216;योगा’ बनकर लौटा तो हम उसे अपनाने लगे, इसी प्रकार आयुर्वेद भी भारतीय चिकित्सा विज्ञान का सब कुछ है जिसे विदेशों में स्वीकार्य किया जा रहा है, जब वह आयुर्वेदा बनकर लौटेगा, शायद तब हम आयुर्वेद का महत्व समझ पायेगे। भगवान धन्वंतरि ,महर्षि चरक,महर्षि सुश्रुत ,महर्षि वागभट्ट ने हमे सबकुछ सिखाया है।</p>
<p>भारत कोरिया नालेज एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत, दक्षिण कोरिया से लौटी अन्तर्राष्ट्रीय आयुर्वेदाचार्य डॉ. आस्था जैन ने बताया कि हमने उन्हें आयुर्वेद सिखाया और कैसे समय के हर पल का सदुपयोग किया जाता है यह उनसे सीखा। कार्य के प्रति जागरूक,समर्पण,स्वच्छता ,सुंदरता दक्षिण कोरिया की विशेषता है वहा काम ही पूजा है बाकी काम दूजा है। जैन जगत के वरिष्ठ समाजसेवी लेखक ,ओजस्वी वक्ता, राजेन्द्र जैन महावीर- अनुपमा जैन की सुपुत्री डॉ. आस्था जैन तीन माह के लिए दक्षिण कोरिया गई थी। डॉ. आस्था ने बताया कि भारत सरकार आयुष मंत्रालय धर्म आयुर्वेद भोपाल के अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य प्रशांत तिवारी के मार्गदर्शन में उन्होंने दक्षिण कोरिया के सुकजोंग वैलपर्क हॉस्पिटल में उनकी मेन्टोर डॉ. मियन्ग किम के साथ कैंसर रोगियों पर आयुर्वेद के सफल प्रयोग किये, और भारतीय चिकित्सा पद्धति के महत्व को स्थापित किया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57974" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/WhatsApp-Image-2024-04-01-at-2.51.16-PM.jpeg" alt="" width="843" height="805" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/WhatsApp-Image-2024-04-01-at-2.51.16-PM.jpeg 843w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/WhatsApp-Image-2024-04-01-at-2.51.16-PM-300x286.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/WhatsApp-Image-2024-04-01-at-2.51.16-PM-768x733.jpeg 768w" sizes="(max-width: 843px) 100vw, 843px" />भारतीय आहार शाकाहार का प्रयोग सार्थक रहा</strong></p>
<p>शाकाहार की विशेषताओ से अनभिज्ञ कोरियावासियों को जब भारतीय खिचड़ी, हल्दी दूध व भारतीय आयुर्वेद भोजन कराया तो वे अंगुलिया चाटते नजर आए, उनकी भूख बढ़ने लगी। जो चार- पाँच दिन से कुछ खा नहीं पा रहे थे वे मरीज भी भरपेट भोजन करने लगे। एक मरीज जिसका शरीर भयानक तप रहा था, उस पर पंचकर्म आदि आयुर्वेदिक प्रयोग किया गया तो उसे आधे घण्टे में फायदा हुआ। सुकजोंग वेलपार्क हास्पीटल गोचंग सिटी में डॉ. आस्था जैन ने 60 कैंसर मरीजों पर भारतीय आयुर्वेद के प्रयोग किये जो सफल व सार्थक रहे।</p>
<p><strong>जब मरीज ने खुश होकर दिये दो कट्टे चावल</strong></p>
<p>डॉ. आस्था जैन ने बताया कि आयुर्वेद, इलाज से प्रसन्न एक कोरियन कृषक मरीज ने कहा कि आप क्या खाते है, तो डॉ. आस्था ने कहा कि वे तो अपना भोजन स्वयं बनाती है यहां का बना हुआ नहीं खाती है तो कृषक मरीज ने चावल जिसे कोरियन लोग हंगुल भाषा में ‘बाप’ बोलते है लाने को कहा, तो उनके द्वारा हाँ कहने पर वे दो कट्‌टे चावल गिफ्ट कर गया। एक महिला मरीज इतनी प्रसन्न थी कि डॉ आस्था के लिए प्रतिदिन सेवफल लेकर आती रही। डॉ आस्था अपने दिन का शुभारंभ नमोकार महामंत्र से व भगवान धन्वंतरि की पूजा से करती रही, अपने सम्मान के दौरान वे भारतीय परिधान पहन कर गई जिसे सभी ने सराहा व साड़ी पहनने के तरीके भी पूछे।</p>
<p><strong>आयुर्वेद को भारतीय चिकित्सा ब्रांड बनाएंगे</strong></p>
<p>डॉ. आस्था जैन के गुरु व धर्म आयुर्वेद भोपाल के फाउण्डर व दक्षिण कोरिया सरकार में राज्य कन्वीनर अन्तरर्राष्ट्रीय आयुर्वेदाचार्य वैद्य प्रशांत तिवारी ने बताया कि डॉ. आस्था ने कोरिया में जो उपलब्धियाँ हासिल की है वे भारत के लिए गर्व का अनुभव कराती है, युवा आयुर्वेद चिकित्सकों के माध्यम से मिनी इंडिया प्रोजेक्ट पर कार्य हो रहा है, इस हेतु कोरिया का प्रतिनिधि मण्डल ने उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली विश्वविद्यालय, पं. खुशीलाल शर्मा शा. आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल, अखिल भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा अनुसंधान संस्थान दिल्ली के साथ डॉ. मियन्ग किम के साथ आए प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात कर आयुर्वेद को वैश्विक बनाने का प्रयास कर रहे है। शीघ्र ही कोरिया में हैल्थ एक्स पो भी लगाया जायेगा। वैलपर्क हॉस्पिटल के प्रमुख जनों ने डॉ. आस्था जैन को सर्टिफिकेट व गिफ्ट देकर सम्मानित किया। डॉ. किम ने डॉ. आस्था जैन द्वारा प्रस्तुत प्रोग्रेस रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि उनके कार्य व रिपोर्ट से कैंसर मरीजों के इलाज में सहयोग मिलेगा। अनेक स्नेही जनों ने डॉ. आस्था जैन व उनके परिजनों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि डॉ. आस्था ने विगत वर्ष विश्व आयुर्वेद कांग्रेस गोवा में भाग लिया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक केंद्रीय मंत्री, 50 देशों के प्रतिनिधि आदि सम्मिलित हुए थे। उनका शोध आलेख इंटरनेशनल जनरल में प्रकाशित हुआ था। वर्तमान में वे एम डी आयुर्वेद चिकित्सा में अध्ययनरत हैं।</p>
<p><strong>इंदौर एयरपोर्ट पर स्वागत</strong></p>
<p>दक्षिण कोरिया से लौटने पर एयरपोर्ट इंदौर पर डाक्टर आस्था जैन का स्वागत परिजनों व समाजजनों ने किया। वहा से सीधे महावीर दिगंबर जैन मंदिर छाबड़ा जी की नसिया गांधी नगर में भगवान के दर्शन किए। इसके उपरांत विमलचंद छाबड़ा व समाजजनों ने पगड़ी, मोती माला, श्रीफल से डाक्टर आस्था जैन का सम्मान किया। तीन माह में हुए अनुभव सुनाते हुए आस्था जैन ने कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने वहां भी अपनी संस्कृति अनुरूप कार्य किया।</p>
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