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	<title>Pollution &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जलवायु संकट में जैन दर्शन: एक आशा की किरण अध्यात्म से हरियाली तक  </title>
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		<pubDate>Mon, 28 Apr 2025 13:50:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म केवल पूजन, विधान और आध्यात्मिक चेतना तक ही सीमित नहीं है। जैन धर्म प्रकृति, संस्कृति, पंच तत्वों के संरक्षण को भी पोषित करने में मार्गदर्शक है। प्रकृति से छेड़छाड़, संस्कृति के पतन, दिशाहीन होते विश्वजनों को सही मार्ग पर लाने के लिए भी संकल्पित है। भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर के संदेशों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म केवल पूजन, विधान और आध्यात्मिक चेतना तक ही सीमित नहीं है। जैन धर्म प्रकृति, संस्कृति, पंच तत्वों के संरक्षण को भी पोषित करने में मार्गदर्शक है। प्रकृति से छेड़छाड़, संस्कृति के पतन, दिशाहीन होते विश्वजनों को सही मार्ग पर लाने के लिए भी संकल्पित है। भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर के संदेशों को गहराई से अगर समझ लिया तो संपूर्ण सार ही समझ आ जाएगा। <span style="color: #ff0000">इन्हीं बातों को लेकर पढ़िए, बड़वानी से आरके जैन अरिजीत की यह विशेष प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> जैन धर्म, एक प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, जो केवल आत्मा की शुद्धि और मोक्ष का मार्ग ही नहीं दिखाती, बल्कि प्रकृति के साथ गहन सामंजस्य का दर्शन भी प्रस्तुत करती है। इसके सिद्धांतकृअहिंसा, अपरिग्रह और सत्यकृन केवल व्यक्तिगत जीवन को संतुलित करते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। आज, जब पृथ्वी जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसे संकटों से जूझ रही है, जैन धर्म का पर्यावरणीय दर्शन एक प्रेरक प्रकाश पुंज बनकर उभरता है। यह संबंध, जो जैन धर्म और पर्यावरण के बीच है, न केवल गहरा और प्रासंगिक है, बल्कि यह हमें पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पुनर्जनन करने का अवसर भी देता है।</p>
<p><strong>अहिंसारू प्रकृति के प्रति करुणा का मार्ग</strong></p>
<p>जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है, जो हर जीव के प्रति करुणा और सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करता है। जैन दर्शन में प्रत्येक जीव, चाहे वह सूक्ष्म कीट हो या विशाल प्राणी, आत्मा का वाहक माना जाता है। इस विश्वास के आधार पर, जैन अनुयायी प्रकृति के प्रत्येक तत्व पेड़-पौधों, जल, वायु और मिट्टी के प्रति संवेदनशीलता बरतते हैं। पर्यावरण संकट के इस दौर में, जब जैव विविधता का ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों का अति-उपयोग चरम पर है, अहिंसा का यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ हमारा व्यवहार हिंसा का पर्याय नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए, जैन धर्म में शाकाहारी जीवनशैली का पालन न केवल पशु हिंसा को कम करता है, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करता है। आधुनिक अध्ययनों के अनुसार, पशुपालन उद्योग ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन का एक प्रमुख स्रोत है। इस संदर्भ में, जैन धर्म की अहिंसा पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है।</p>
<p><strong>अपरिग्रहः संयम से पर्यावरण संरक्षण</strong></p>
<p>अहिंसा के साथ-साथ, अपरिग्रह सिद्धांत पर्यावरण संरक्षण के लिए एक और महत्वपूर्ण आयाम जोड़ता है। अपरिग्रह, जिसका अर्थ है अनावश्यक संग्रहण और लालसा से मुक्ति, हमें सिखाता है कि हमें केवल उतने ही संसाधनों का उपयोग करना चाहिए, जितने हमारे लिए आवश्यक हैं। आज के उपभोक्तावादी युग में, जहां अत्यधिक उपभोग और बर्बादी ने प्राकृतिक संसाधनों को खतरे में डाल दिया है, अपरिग्रह का यह सिद्धांत एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रदान करता है। जैन अनुयायी इस सिद्धांत को अपने दैनिक जीवन में अपनाते हैं, जैसे कि सादगीपूर्ण जीवनशैली, पुनर्चक्रण और न्यूनतम अपशिष्ट उत्पादन। उदाहरण के लिए, जैन समुदाय में जल और भोजन का संयमित उपयोग एक सामान्य प्रथा है, जो पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण में योगदान देती है। यह सिद्धांत हमें यह भी सिखाता है कि व्यक्तिगत स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास, जैसे कि एकल-उपयोग प्लास्टिक से परहेज या ऊर्जा संरक्षण, सामूहिक रूप से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इस प्रकार, अपरिग्रह न केवल व्यक्तिगत संयम को प्रोत्साहित करता है, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को भी जागृत करता है।</p>
<p><strong>सत्य: पर्यावरणीय जागरूकता का आह्वान</strong></p>
<p>जैन धर्म में सत्य का सिद्धांत भी पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सत्य का पालन हमें पर्यावरणीय समस्याओं को उनकी वास्तविकता में स्वीकार करने और उनके समाधान के लिए सक्रिय कदम उठाने की प्रेरणा देता है। आज, जब जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी समस्याओं को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति आम है, जैन धर्म का सत्य सिद्धांत हमें सच्चाई का सामना करने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान करता है। जैन समुदाय अपने स्तर पर पर्यावरणीय जागरूकता के लिए कार्यशालाओं और अभियानों का आयोजन करता है, जो स्थानीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाते हैं। इसके अतिरिक्त, सत्य का यह सिद्धांत हमें अपने कार्यों के पर्यावरणीय परिणामों की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करता है, जैसे कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करने या वृक्षारोपण जैसे कार्यों में भाग लेने के लिए। इस प्रकार, सत्य का सिद्धांत हमें पर्यावरण के प्रति एक नैतिक दायित्व की अनुभूति कराता है।</p>
<p><strong>जैन धर्म: स्थिरता की आध्यात्मिक यात्रा</strong></p>
<p>जैन धर्म का पर्यावरणीय दृष्टिकोण आज के समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब विश्व पर्यावरणीय संकट के कगार पर खड़ा है। जैन धर्म के सिद्धांत हमें यह सिखाते हैं कि व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर किए गए प्रयास पृथ्वी के भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जैन समुदाय द्वारा संचालित संगठन जैसे कि जैन विश्व भारती, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जैविक खेती जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। इसके अतिरिक्त, जैन धर्म की शिक्षाएं हमें यह भी सिखाती हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल भौतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। जब हम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की भावना रखते हैं, तो हम स्वाभाविक रूप से इसके संरक्षण के लिए प्रेरित होते हैं।</p>
<p><strong>प्रकृति और मानवता: सामंजस्य का संकल्प</strong></p>
<p>जैन धर्म का यह पर्यावरणीय दर्शन हमें एक ऐसी जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है, जो न केवल हमारे लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी हो। अहिंसा, अपरिग्रह और सत्य के सिद्धांतों को आत्मसात करके हम अपने जीवन को सरल और संतुलित बना सकते हैं, साथ ही पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी पूरा कर सकते हैं। यह प्राचीन दर्शन हमें सिखाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो हमें प्रकृति और स्वयं के साथ जोड़ती है। जैसे एक वृक्ष अपनी जड़ों से पृथ्वी को थामता है, वैसे ही जैन धर्म का दर्शन हमें पर्यावरण के प्रति दृढ़ संकल्प और करुणा के साथ जीने की प्रेरणा देता है। इस यात्रा में, हम न केवल पृथ्वी को बचा सकते हैं, बल्कि एक ऐसी दुनिया का निर्माण कर सकते हैं, जहां प्रकृति और मानवता एक-दूसरे के साथ सामंजस्य में फलें-फूलें।</p>
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		<title>प्लास्टिक थैली, हमारे लिए हानिकारक : महिला जैन मिलन द्वारा संगोष्ठी आयोजित </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Jul 2023 15:04:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महिला जैन शाखा क्रमांक 10 नेहानगर द्वारा प्लास्टिक के उपयोग से होने वाली हानि विषय पर संगोष्ठी आयोजिन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता वीरांगना अनीता जैन की। पढ़िए मनीष विद्यार्थी की रिपोर्ट&#8230; सागर। महिला जैन शाखा क्रमांक 10 नेहानगर द्वारा प्लास्टिक के उपयोग से होने वाली हानि विषय पर संगोष्ठी आयोजिन किया गया। संगोष्ठी की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महिला जैन शाखा क्रमांक 10 नेहानगर द्वारा प्लास्टिक के उपयोग से होने वाली हानि विषय पर संगोष्ठी आयोजिन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता वीरांगना अनीता जैन की। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनीष विद्यार्थी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><span style="color: #000000;"><strong>सागर।</strong> </span>महिला जैन शाखा क्रमांक 10 नेहानगर द्वारा प्लास्टिक के उपयोग से होने वाली हानि विषय पर संगोष्ठी आयोजिन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता वीरांगना अनीता जैन की। मंगलाचरण नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा किया गया। प्लास्टिक हानिकारक क्यों विषय पर सभी वीरांगनाओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि प्लास्टिक का उपयोग आज के समय में हर जगह पर किया जा रहा है। हमें बाजार से सब्जी लेने जाना है या फिर घर की कोई भी</p>
<p>सामग्री लेने जाना है, जैसे किराना आदि तो हम प्लास्टिक पॉलिथीन का उपयोग करते हैं, इसके ज्यादा इस्तेमाल करने से प्रकृति को बहुत ज्यादा नुकसान होता है। हम सब जानते हैं कि प्लास्टिक कभी भी सड़ता नहीं है, बल्कि यह जमीन पर फेंक देने से यह जमीन के नीचे जाकर मिट्टी में दब जाता है, ऐसा होने से पेड़ पौधों को बहुत नुकसान पहुंचता है। प्लास्टिक की पॉलीथिन जानवरों के द्वारा खा लेने से उनकी मृत्यु तक हो जाती हैं, यदि इस प्लास्टिक को जलाया जाए तो भी यह प्रदूषण फैलाता है। इसीलिए इस से अच्छा है कि हम प्लास्टिक का इस्तेमाल करना बंद कर दें और पॉलिथीन के उपयोग पर पाबंदी लगाएं।</p>
<p>इसके लिए हमें अपने घर से शुरुआत करनी होगी। सभी वीरांगनाओं ने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि अपने साथ कपड़े का थैला लेकर चलें। उपस्थित सभी वीरांगनाओं ने अपने घर से अभियान को शुरू करने की बात कही। संगोष्ठी में उपस्थित क्षेत्रीय संयोजिका वीरांगना अनीता जैन पूर्व अध्यक्ष , वीरांगना किरण जैन कोषाध्यक्ष, वीरांगना संध्या जैन सचिव, वीरांगना हिमांशी जैन अध्यक्ष, वीरांगना ऋतु जैन, उपाध्यक्ष वीरांगना ज्योति जैन, वीरांगना शालिनी जैन, वीरांगना नीता बड़कुल , वीरांगना पीयूष जैन आदि शामिल रहे।</p>
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		<title>पर्यावरण को बचाना है तो पॉलीथिन से दूर रहना होगा: नौ साल की उम्र से दिव्या लोगों को बता रहीं पॉलीथिन के खतरों के बारे में  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jun 2023 03:58:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[9 साल की छोटी-सी उम्र में ही वह पर्यावरण के प्रति सजग हो गई थीं। 2009 में जब वह अपनी नानी के घर गईं और वहां घर के सामने बाड़े में पॉलीथिन खाने से गाय को तड़पते दम तोड़ते देखा, तभी उन्होंने ठान लिया था कि वह पॉलीथिन का उपयोग रोकने के लिए लोगों को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>9 साल की छोटी-सी उम्र में ही वह पर्यावरण के प्रति सजग हो गई थीं। 2009 में जब वह अपनी नानी के घर गईं और वहां घर के सामने बाड़े में पॉलीथिन खाने से गाय को तड़पते दम तोड़ते देखा, तभी उन्होंने ठान लिया था कि वह पॉलीथिन का उपयोग रोकने के लिए लोगों को जागरूक करेंगी। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए एक रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> 9 साल की छोटी-सी उम्र में ही वह पर्यावरण के प्रति सजग हो गई थीं। 2009 में जब वह अपनी नानी के घर गईं और वहां घर के सामने बाड़े में पॉलीथिन खाने से गाय को तड़पते दम तोड़ते देखा, तभी उन्होंने ठान लिया था कि वह पॉलीथिन का उपयोग रोकने के लिए लोगों को जागरूक करेंगी। आज कोटा की दिव्या कुमारी जैन गांव, शहर व कस्बों में लोगों को पॉलीथिन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करती हैं। उनकी कोशिश यही है कि लोग पर्यावरण के प्रति सजग हों और पॉलीथिन के उपयोग के बजाय इकोफ्रेंडली तरीके अपनाएं।</p>
<p><strong>50 हजार से ज्यादा थैले बांटे </strong></p>
<p>दिव्या ने अपने अभियान के तहत हजारों की संख्या में पुरानी साड़ियों के कपड़े से बने थैलों का अपील पत्रों व स्टिकर का निशुल्क वितरण किया,। पर्यावरण मित्र पत्रिका का प्रकाशन कर उसकी 50 हजार प्रतियो का निःशुल्क वितरण पूरे भारत भर में प्रमुख लोगो व स्थानों पर किया। ताकि प्लास्टिक की थैली का उपयोग बंद हो। लोग अपनी आने वाली पीढ़ी को प्लास्टिक फ्री और पॉलीथिन मुक्त वातावरण दें।</p>
<p><strong>कई संस्थाओं ने किया सम्मानित </strong></p>
<p>उन्हें कही संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है। 12 अगस्त 2021 को विज्ञान भवन नई दिल्ली में भारत सरकार के खेल व युवा मंत्रालय द्वारा नेशनल यूथ अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें पर्यावरण मित्र सम्मान, सजग जल प्रहरी सम्मान, स्वच्छता अग्रदूत सम्मान, राष्ट्रीय बाल गौरव सम्मान, सृजनश्री, वन विस्तारक, जल स्टार सम्मान, ग्रीन आइडल सम्मान आदि से भी सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p><strong>धीरे-धीरे लोगों में आ रही अवेयरनेस </strong></p>
<p>दिव्या मानती है कि अब एक बड़ा वर्ग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है। हमें अभी इस क्षेत्र में और भी काम करने की आवश्यकता है। दिव्या पॉलिथीन मुक्त भारत अभियान के साथ पौधारोपण, जल संरक्षण, पक्षियों के लिए परिंडे व आतिशबाजी से होने वाले नुकसान के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रही है।</p>
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		<title>विश्व पर्यावरण दिवस बड़े स्तर पर मनाया जाएगा: 350 सोशल ग्रुप लेंगे हिस्सा, करेंगे पौधरोपण </title>
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		<pubDate>Sat, 20 May 2023 12:38:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगो को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। हमारे और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। हर वर्ष 5 जून को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगो को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। हमारे और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगो को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। हमारे और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है। हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना ही होगा। विश्व में लगातार वातावरण दूषित होते जा रहा है, जिसका गहरा प्रभाव हमारे जीवन में पड़ रहा है। फैडरेशन के मीडिया प्रभारी संजीव जैन संजीवनी और राजेश जैन दद्दू ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी प्रकृति का ख्याल रखें। लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए फैडरेशन ने भी इसमें अपना योगदान देने का निर्णय लिया है। इसे हर साल राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाए और इसकी शुरुआत सन 2019 को देश भर में फैले 350 ग्रुप के सदस्यों द्वारा लगभग 5000 ज्यदा पेड़ लगाकर की गई थी।</p>
<p>फैडरेशन का मुख्य उद्देश्य देशभर में फैले 350 सोशल ग्रुप के सदस्यों द्वारा पेड़ लगा कर पर्यावरण के संरक्षण मे अपना योगदान देना है। आगामी 5 जून को फैडरेशन की संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका राष्ट्रीय महासचिव विपुल बांझल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अतुल बिलाला के मार्गदर्शन में फैडरेशन इसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाने जा रहा है। इसमें आप सभी की सहभागिता जरूरी है।</p>
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