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	<title>Pattacharya Vishuddha Sagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Pattacharya Vishuddha Sagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>संयम-शील के पालन से नर नारायण बन जाता है : आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने ब्रह्‌मचर्य व्रत की महिमा बताई </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 08:48:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी ने धर्मसभा में कहा कि- आत्मा में लीनता, निज में निज की लीनता ही ब्रह्‌मचर्य व्रत है। आत्म ब्रह्‌म में लीनता ही सर्व-श्रेष्ठ है। पथरिया से पढ़िए, यह खबर&#8230; पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि, पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी ने धर्मसभा में कहा कि- आत्मा में लीनता, निज में निज की लीनता ही ब्रह्‌मचर्य व्रत है। आत्म ब्रह्‌म में लीनता ही सर्व-श्रेष्ठ है। <span style="color: #ff0000">पथरिया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि, पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। वैभव बडामलहारा ने बताया की विरागोदय तीर्थ पथरिया में पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी ने धर्मसभा में कहा कि- आत्मा में लीनता, निज में निज की लीनता ही ब्रह्‌मचर्य व्रत है। आत्म ब्रह्‌म में लीनता ही सर्व-श्रेष्ठ है।आत्मान्वेषण, आत्म रुचि, शुद्धात्म-लीनता ही उत्कृष्ट ब्रह्‌मचर्य धर्म है। शीलव्रत, ब्र‌ह्मचर्य सर्व-प्रधान अंक के समान है, अन्य व्रत शून्य के समान हैं। ब्रम्हचर्य व्रतों में प्रधान है। ब्रह्मचर्य श्रेष्ठसाधना है। ब्रह्मचर्य सिद्धि का साधन है। ब्रम्हचर्य महानता का व्रत है। ब्रम्हचर्य शूरवीरों का चिह्न है। ब्रह्‌मचर्य उत्तम-साधना है। ब्रह्मचर्य व्रतों में सम्राट है। ब्रह्मचर्य मुक्ति का उपाय है। ब्रह्म-स्वरूप निजात्मा में लीन होना ही ब्रह्मचर्य धर्म है। परम पुण्यात्मा का परिचय है ब्रह्मचर्य। ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ-पुरुषों का गुण है। अब्रह्म, काम-सेवन, वासना, पशु-वृत्ति मानसिक रोग है। अब्रह्‌म अनर्थकारी है। अब्रह्म-सेवन महा-हिंसक है। अब्रम्ह भाव काम-सेवन से शक्ति क्षीण हो जाती है, बुद्धि का क्षय होता है, चेहरे की चमक चली जाती है, पुण्य क्षीण होता है, रुग्नता बढ़ती है, नेत्रों की ज्योति घटती है, बाल सफेद होते हैं, मन चंचल होता है, संताप होता है, तृष्णा जाग्रत होती है, विशुद्धि का ऱ्हास होता है। स्त्री संसर्ग, सरस आहार, शरीर श्रृंगार, गीत-नृत्य, धन संग्रह, रात्रिसंचरण ये अब्रह्‌म के कारण हैं। विषय- कषायों में दुर्भाव को छोड़कर, शीलव्रत धारण करना ब्रम्हचर्य धर्म है। स्त्रियों को पुरुषों से तथा पुरुषों को स्त्रियों के प्रति जो राग दृष्टि उससे प्रेरित होकर जो क्रिया है, यही अशांति का कारण अब्रह्‌म है। इन्द्रिय-विषयों में प्रवृत्ति करना, अब्रह्‌ममान है। संयमित जीवन जीना, पवित्र परिणाम रखना, सम्भोग से विरक्त होना ही ब्रम्हचर्य धर्म है। शीलवान् पुरुषों का सर्वस्व ही ब्रम्हचर्य धर्म है। अन्तर्मुखी दृष्टि, आत्म ब्रम्ह में झाँकना ही ब्रहमचर्य धर्म है। शरीर का प्राण वीर्य है, व्रतों का प्राण शील है। संयम-शील के पालन से नर नारायण बन जाता है। शीलवान के प्रभाव से स्वर्ग के देव भी प्रभावित हो जा जाते हैं। ब्रह्मचर्य के अभाव में सर्व साधनायें व्यर्थ है। ब्रहमचर्य व्रत चिन्तामणि रत्न के सामान महत्त्वपूर्ण है। शीलवन्त की निर्धनता भी आभूषण है। शीलवृत पालो, शिवत्व को प्राप्त करो। शिव बनो, शव मत बनो।धरती पर सबसे बडा परम वीर नहीं है, जो तरुणियों से प्रभावित नहीं होता है।</p>
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		<title>उज्जैन समारोह में 125 धर्म प्रभावकों का सम्मान: मुनिश्री प्रणुतसागर जी महाराज ने सभी को आशीर्वाद देकर उपकृत किया  </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 06:54:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज सानिध्य में रविवार दोपहर 1 बजे धर्म प्रभावक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें निःस्वार्थ धर्म की प्रभावना करने वाले 125 इनफ्लूएन्सर्स का सम्मान किया गया। धर्म प्रभावक सम्मान समारोह का यह तीसरा वर्ष है। उज्जैन से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230; उज्जैन। मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज सानिध्य में रविवार दोपहर 1 बजे धर्म प्रभावक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें निःस्वार्थ धर्म की प्रभावना करने वाले 125 इनफ्लूएन्सर्स का सम्मान किया गया। धर्म प्रभावक सम्मान समारोह का यह तीसरा वर्ष है। <span style="color: #ff0000">उज्जैन से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उज्जैन।</strong> मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज सानिध्य में रविवार दोपहर 1 बजे धर्म प्रभावक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें निःस्वार्थ धर्म की प्रभावना करने वाले 125 इनफ्लूएन्सर्स का सम्मान किया गया। धर्म प्रभावक सम्मान समारोह का यह तीसरा वर्ष है। इस विशेष अवसर पर धर्म और संस्कृति का अद्वितीय और अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बाल एवं युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। यह प्रतिभाएं सोशल मीडिया जैसे आधुनिक माध्यमों के जरिए जैन धर्म की प्रभावना में सक्रिय योगदान दे रही हैं। मुनि श्री प्रणुत सागरजी महाराज ने कहा कि इस आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्रेरणादायक क्षण में धर्म प्रभावकों का यह सम्मान उनके प्रयासों की सराहना है, बल्कि आने वाली पीढ़ी में धर्म के प्रति उत्साह, आत्मविश्वास और प्रेरणा जगाने का संकल्प भी है।</p>
<p>मुंबई, उज्जैन के सब भक्तों ने मिलकर के धर्म की ज्योति को और प्रखर कर अद्भुत और अविस्मरणीय कार्य किया है। भोपाल के श्रेष्ठ जैन विशु ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्व प्रसिद्ध साड़ी क्वीन, लिम्का बुक रिकॉर्ड धारक 325 से अधिक ड्रेपिंग शैलियों में निपुण डॉली जैन (कोलकाता)पधारी थीं। जिन्होंने देश-विदेश में भारतीय संस्कृति को साड़ी के माध्यम से नई पहचान दिलाई है। उल्लेखनीय है कि आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री प्रणुतसागर जी महाराज का चातुर्मास उज्जैन में चल रहा है। इसमें यहां बड़ी संख्या में मुनिश्री के सानिध्य में दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठीजन धर्म प्रभावना का लाभ अर्जित कर रहे हैं।</p>
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