<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Parsola &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/parsola/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 04 Jul 2025 10:34:15 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Parsola &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>टोंक जैन समाज के चातुर्मास का इंतजार खत्म: 396 किमी यात्रा कर टोंक पहुंचेंगे आचार्यश्री 7 जुलाई को  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_wait_for_chaturmas_of_tonk_jain_communty_is_over/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_wait_for_chaturmas_of_tonk_jain_communty_is_over/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 10:34:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[396 km journey]]></category>
		<category><![CDATA[396 किमी यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[57th Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[57वां चतुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Ji Maharaj Sangh 36 Pichhi]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84332</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ 36 पिच्छियों सहित पारसोला की धरा पर 57वां चतुर्मास कर 7 जुलाई को टोंक पहुंचेंगे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 55 वर्षों बाद चातुर्मास करने के लिए टोंक में आ रहे हैं। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ 36 पिच्छियों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ 36 पिच्छियों सहित पारसोला की धरा पर 57वां चतुर्मास कर 7 जुलाई को टोंक पहुंचेंगे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 55 वर्षों बाद चातुर्मास करने के लिए टोंक में आ रहे हैं। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ 36 पिच्छियों सहित पारसोला की धरा पर 57वां चतुर्मास कर 7 जुलाई को टोंक पहुंचेंगे। समाज के पवन कंटान व विकास जागीरदार ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 55 वर्षों बाद चातुर्मास करने के लिए टोंक में आ रहे हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का यह 57वां चातुर्मास होगा।</p>
<p><strong>36 पिच्छिका का है इनके संघ में</strong></p>
<p>इनमें आचार्य श्री, 10 मुनिराज, 22 आर्यिका, 1 एलक और 2 क्षुल्लक हैं। बुधवार को आचार्य श्री ससंघ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मंगल विहार टोंक जिले में चातुर्मास के लिए चल रहा है। गुरुवार को आचार्य श्री ससंघ शारदा विद्या मंदिर बंथली से विहार कर वेयर हाउस जूनिया मोड पहुंचे जहां पर रात्रि विश्राम हुआ। 4 जुलाई को प्रातः 5.7 किलोमीटर विहार कर महात्मा गांधी पब्लिक स्कूल नयागांव पहुंचे। जहां पर आचार्य ससंघ की आहार चर्या हुई। आचार्य श्री ने बताया कि इसी कारण श्रावक को सभी वक्ता की वाणी को सुनकर अपने विवेक को जागृत कर जीवन में पालन करना चाहिए। श्रोता पर धर्म की बातें सुनने का काफी प्रभाव होता है श्रोता को देखकर, सुनकर, पढ़कर, इसका अनुकरण करना चाहिए क्योंकि सुनना भी एक कला है। श्रावक श्रोता को भक्तिवान, अहंकार रहित, श्रवण के प्रति रुचि एवं चिंतक मननशील होना चाहिए।</p>
<p><strong>यह रहे कार्यक्रम में मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर सोनू पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, किन्नी शिवाड़िया, सुनील सराफ, नीटू छामुनिया, गोलू छामुनिया, अर्पित पासरोटियां, राहुल पासरोटियां, मनीष अतार, नरेंद्र दाखिया, पारस बहड़, सुमित दाखिया, आशु दाखिया, लोकेश कल्ली, अम्मू छामुनिया, उमेश संघी, मुकेश दतवास, नवीन कुरेड़ा, वीरेंद्र संघी, अंशुल बोरदा, सुनील आंडरा, राजेश बोरदा, आकाश बोरदा, ऋषभ नमक, ओम ककोड़, कमल सर्राफ आदि मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_wait_for_chaturmas_of_tonk_jain_communty_is_over/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री वर्धमान सागर जी का हुआ मंगल विहार: अश्रुपूरित नेत्रों से दी विदाई  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_vardhaman_sagar_jis_mangal_vihar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_vardhaman_sagar_jis_mangal_vihar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Feb 2025 14:07:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shree vardhmansagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Dharm Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[MangalVihar]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[pravchan]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[updesh]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[उपदेश]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल विहार]]></category>
		<category><![CDATA[महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=74048</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ और आर्यिका संघ ने शुक्रवार को पारसोला से विहार किया। इस अवसर पर यहां के सकल जैन समाज ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। आचार्यश्री ने संबोधन कर पारसोला नगर और यहां के समाजा की सराहना की। उन्होंने यहां 248 दिन प्रवास किया और धर्म प्रभावना के लिए अपने प्रवचनों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ और आर्यिका संघ ने शुक्रवार को पारसोला से विहार किया। इस अवसर पर यहां के सकल जैन समाज ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। आचार्यश्री ने संबोधन कर पारसोला नगर और यहां के समाजा की सराहना की। उन्होंने यहां 248 दिन प्रवास किया और धर्म प्रभावना के लिए अपने प्रवचनों से जनता को लाभान्वित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> यहां से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 28 जनवरी से 7 फरवरी के दौरान 248 दिवसीय प्रवास के दौरान अनेक धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावना पूर्वक कर शुक्रवार को मंगल विहार किया। मंगल विहार के पूर्व समाज की धर्म सभा में मंगल देशना में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि हमने कर्नाटक से राजस्थान की ओर मंगल विहार किया। हमने कर्नाटक से राजस्थान आने का संकल्प किया। वह भक्तों की भक्ति और पुरुषार्थ से वह कार्य सफल हुआ। हमारा संकल्प और समाज का पुरुषार्थ भक्ति से अनेक कार्य सिद्ध हो जाते हैं। राजस्थान के अतिरिक्त अन्य नगरों के लोग पारसोला की प्रशंसा करते हैं क्योंकि, पारसोला समाज में आचार्य परंपरा के प्रति भक्ति और अटूट श्रद्धा है। यह अनुकरणीय और प्रशंसनीय है। समाज में 40 से अधिक सक्रिय बालक बालिका युवा महिलाओं सभी वर्ग के मंडल हैं। यह मंडल धरातल पर समाज के हित में कार्य करते हैं, इसलिए कहा जा सकता है कि यह मंडल है। बंडल नहीं है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74050" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1155" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-1024x462.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-1536x693.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-2048x924.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0044-1320x595.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />मुनिश्री संघ और आर्यिका संघ ने किया विहा</strong></p>
<p>पारसोला में मार्च माह में पंचकल्याणक में समाज ने अटूट श्रद्धा भक्ति से महोत्सव को सफल बनाया। समाज के उत्साह भक्ति को देखकर यह विश्वास हुआ कि पारसोला की संगठन शक्ति में बड़े से बड़े आयोजन करने की क्षमता को दृष्टिगत रख आचार्य संघ ने पारसोला चातुर्मास करने का निर्णय अनेक माह पूर्व लिया। पारसोला नगर से ब्रह्मचारी गज्जू भैया, राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के साथ मुनिश्री चिन्मयसागर जी, श्री हितेंद्रसागर जी श्री प्रशंमसागर जी, श्री प्रभवसागर जी, श्री चिंतनसागर जी, श्री दर्शित सागर जी, श्री प्रबुद्धसागर जी, मुनि श्री मुमुक्षुसागरजी, मुनि श्री प्रणितसागरजी, आर्यिका श्री शुभमति जी, श्री शीतलमति जी, आ श्री चैत्यमति जी ,आश्री वत्सलमतिजी, श्री विलोकमति जी, ,आश्री दिव्यांशु मति जी, आश्री पूर्णिमामति जी आश्री मुदितमति जी,आ श्री समर्पितमति जी, आश्री विचक्षणमति जी आश्री निर्मुक्त मति जी, आश्री विन्रममतिजी, आश्री दर्शनामति जी, आश्री देशनामतिजी, आश्री महायशमती जी, आर्यिका श्री देवर्धिमति आश्री प्रणतमति आश्री निर्माेहमति, श्री पद्मयशमति आश्री दिव्ययश मति, आर्यिका श्री प्रेक्षामति जी, आर्यिका श्री जिनेश मति, श्री क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी, श्री प्राप्ति सागरजी का पारसोला नगर से शुक्रवार को आहार के बाद दोपहर को विहार हुआ।</p>
<p><strong>आहार चर्या श्रवण नगर में होगी</strong></p>
<p>संघ का रात्रि विश्राम श्रवण नगर में हुआ। 8 फरवरी को आचार्य श्री संघ की आहार चर्या श्रवण नगर मुंगाना रोड पर होने के बाद दोपहर को विहार कर रात्रि विश्राम मुंगाना में होगा। राजस्थान के अनेक नगरों से आचार्य संघ के आगमन के लिए श्रीफल भेंटकर निवेदन प्रतिदिन किया जा रहा है। प्रतापगढ़ दिगंबर जैन समाज ने भी निवेदन किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_vardhaman_sagar_jis_mangal_vihar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>7 फरवरी को पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का होगा मंगल विहारः शिष्या आर्यिका श्री दिव्ययशमति ने किए केशलोच </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/mangal_vihar_of_the_fifth_pattadhish_acharya_shri_vardhman_sagarji_will_be_held_on_7_february/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/mangal_vihar_of_the_fifth_pattadhish_acharya_shri_vardhman_sagarji_will_be_held_on_7_february/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 14:36:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Vardhman Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryikashri]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Divyayashmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[keshloch]]></category>
		<category><![CDATA[mangal vihar]]></category>
		<category><![CDATA[Parshwnath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[Prapti Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Samavsharan Mandir]]></category>
		<category><![CDATA[Shatabdi Pratisthapana Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिकाश्री]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[केशलोंच]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्ययशमति माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[पार्श्वनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[प्राप्ति सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल विहार]]></category>
		<category><![CDATA[शताब्दी प्रतिस्थापना महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[समवशरण मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=73917</guid>

					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सॉन्ग सहित पारसोला में विराजित है। 6 फरवरी को शिष्या आर्यिकाश्री दिव्ययशमति माताजी ने आज केशलोच किए। पारसोला नगर में आयोजनों के पश्चात संघ का मंगल विहार होगा। फरवरी में समवशरण मंदिर के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के बाद पुनः जुलाई में बांसवाड़ा से आचार्य संघ का आगमन हुआ। पढ़िए पारसोला की यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सॉन्ग सहित पारसोला में विराजित है। 6 फरवरी को शिष्या आर्यिकाश्री दिव्ययशमति माताजी ने आज केशलोच किए। पारसोला नगर में आयोजनों के पश्चात संघ का मंगल विहार होगा। फरवरी में समवशरण मंदिर के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के बाद पुनः जुलाई में बांसवाड़ा से आचार्य संघ का आगमन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पारसोला की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सॉन्ग सहित पारसोला में विराजित है। 6 फरवरी को शिष्या आर्यिकाश्री दिव्ययशमति माताजी ने आज केशलोच किए है। पारसोला नगर में विभिन्न धार्मिक विश्व स्तरीय ऐतिहासिक आयोजन के पश्चात संघ का मंगल विहार होगा। फरवरी 24 में आगमन के बाद नवनिर्मित श्री पार्श्वनाथ भगवान के समवशरण मंदिर के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के बाद पुनः जुलाई में बांसवाड़ा से आचार्य संघ का आगमन हुआ।</p>
<p><strong>आचार्यश्री पारसोला में पदारूढऋ हुए</strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी, ऋषभ पचौरी ने बताया कि 75 वर्षीय सन 1969 में दीक्षित आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 1990 में आचार्य पद पर यही पदारूढ हुए। 36 वर्ष के आचार्य पद में संयमी जीवन का 56 वा वर्षायोग पारसोला में स्थापित किया। प्रथमाचार्य श्री शान्ति सागरजी का आचार्य पद का विश्वस्तरीय वर्षभर चलने वाले शताब्दी प्रतिस्थापना महोत्सव का शुभारंभ आचार्य संघ सानिध्य में पारसोला में हुआ।</p>
<p><strong>आहार के पश्चात विहार होगा</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागरजी के साथ मुनिश्री चिन्मय सागरजी, श्री हितेन्द्र सागरजी श्री प्रशंम सागरजी, श्री प्रभव सागरजी, श्री चिंतन सागरजी, श्रीदर्शित सागरजी, श्रीप्रबुद्ध सागरजी मुनिश्री मुमुक्षु सागरजी, मुनिश्री प्रणित सागरजी, आर्यिकाश्री शुभमतीजी, श्री शीतलमतिजी, श्री चैत्यमतिजी, वत्सलमतिजी, विलोकमतिजी, दिव्यांशुमतिजी, पूर्णिमामतिजी, मुदितमतिजी, समर्पितमतिजी, विचक्षणमतिजी, निर्मुक्तमतिजी, विन्रममतिजी, दर्शनामतिजी, देशनामतिजी, महायशमतीजी, देवर्धिमतिजी, प्रणतमतिजी, निर्माेहमतिजी, पद्मयशमति, दिव्ययशमति, प्रेक्षामतिजी, जिनेशमतिश्री क्षुल्लक श्री विशाल सागरजी, श्री प्राप्ति सागरजी का पारसोला नगर से 7 फरवरी को आहार के पश्चात दोपहर को विहार होगा। राजस्थान के अनेक नगरों से आचार्य संघ के आगमन हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन प्रतिदिन किया जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/mangal_vihar_of_the_fifth_pattadhish_acharya_shri_vardhman_sagarji_will_be_held_on_7_february/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>श्री शांतिसागरजी ने जिनवाणी को ताम्र-पत्र पर अंकित कराने की प्रेरणा दीः पारसोला प्रथम नगर जहां आचार्यश्री शांतिसागरजी की दो प्रतिमाएं विराजित </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shri_shantisagarji_has_done_a_great_favour_to_jainism_by_inspiring_people_to_get_jinvaani_inscribed_on_copper_plates/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/shri_shantisagarji_has_done_a_great_favour_to_jainism_by_inspiring_people_to_get_jinvaani_inscribed_on_copper_plates/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rekha Jain]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jan 2025 14:28:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Shanti Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Vardhman Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Dandatao Ka Samman]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Do Pratimae]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jinvani]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[Samavsharan]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Tamra-Patra]]></category>
		<category><![CDATA[Vatsalya Varidhi]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांति सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जिनवाणी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ताम्र-पत्र]]></category>
		<category><![CDATA[दानदाताओं का सम्मान]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दो प्रतिमाएं]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[वात्सल्य वारिधि]]></category>
		<category><![CDATA[समवशरण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=73497</guid>

					<description><![CDATA[वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 33 साधु सहित पारसोला में विराजित है। पारसोला दिगंबर जैन समाज अनन्य गुरुभक्त समाज है, जिन्होंने किए संकल्प वचन का पालनकर आचार्यश्री शांति सागरजी के आचार्य पद शताब्दी प्रतिस्थापना महोत्सव अंतर्गत शांतिसागरजी उद्यान में प्रतिमा विराजमान कर उद्यान का लोकार्पण कराया। इसके पूर्व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा पश्चात आचार्यश्री शांति सागरजी की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 33 साधु सहित पारसोला में विराजित है। पारसोला दिगंबर जैन समाज अनन्य गुरुभक्त समाज है, जिन्होंने किए संकल्प वचन का पालनकर आचार्यश्री शांति सागरजी के आचार्य पद शताब्दी प्रतिस्थापना महोत्सव अंतर्गत शांतिसागरजी उद्यान में प्रतिमा विराजमान कर उद्यान का लोकार्पण कराया। इसके पूर्व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा पश्चात आचार्यश्री शांति सागरजी की प्रतिमा समवशरण मंदिर में स्थापित की। पूरे देश में पारसोला प्रथम नगर है जहां पर आचार्यश्री शांतिसागरजी की दो प्रतिमाएं विराजित हुई है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया द्वारा पारसोला की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 33 साधु सहित पारसोला में विराजित है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा पश्चात आचार्यश्री शांति सागरजी की प्रतिमा समवशरण मंदिर में स्थापित की। पूरे देश में पारसोला प्रथम नगर है जहां पर आचार्यश्री शांतिसागरजी की दो प्रतिमाएं विराजित हुई है। यह मंगलधर्म देशना पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर महती धर्मसभा में व्यक्त की।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73501" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1155" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-1024x462.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-1536x693.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-2048x924.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0032-1320x595.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />जिनवाणी के संरक्षण हेतु प्रेरणा</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गजु भैया के अनुसार आचार्यश्री ने आगे बताया कि आचार्यश्री शांति सागरजी ने गृहस्थ अवस्था में भी पशुबलि तथा श्रमण अवस्था में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को दूर करने की प्रेरणा दी। आपने जिनवाणी के संरक्षण के लिए ताम्र पत्र पर अंकित करने की प्रेरणा दी। मुंबई, आरा और फल फ़लटन तीन स्थानों पर तांबे के पत्रों पर जिनवाणी के प्रमुख ग्रंथो को अंकित कराया है। पारसोला समाज ने उद्यान निर्माण कराया है। यद्यपि निर्माण कार्य जारी है। बड़े हाल भी बने हैं। इसमें आचार्य शांति सागरजी के जीवन को दर्शाने वाले चित्रों का चित्रांकन जरूरी है ताकि समाज चित्रों के माध्यम से आचार्यश्री शांति सागरजी के जीवन चरित्र को देखे, समझे और जीवन में उतारने का प्रयास करें, तभी यह उद्यान बनाने की सार्थकता होगी।</p>
<p><strong>कमरे बनाने की स्वीकृति दी</strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी, ऋषभ पचोरी, संपत सेठ, अमरेश सेठ ने बताया कि आज डॉ. रेखा जैन जयपुर, जयंतीलाल कोठारी, ऋषभ पचौरी वर्धमान युवा मंडल सहित अनेक लोगों ने कमरे बनाने की स्वीकृति प्रदान की। आचार्य संघ सानिध्य में नवीन धार्मिक पुस्तकों का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। इसके पूर्व प्रातः प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर आचार्य पद प्रतिस्थापना शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पारसोला में दो दिवसीय कार्यक्रम अन्तर्गत पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में 31 जनवरी को प्रातः श्रीजी के पंचामृत अभिषेक पूजन हुआ।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73500" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-scaled.jpg" alt="" width="1920" height="2560" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-scaled.jpg 1920w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-1536x2048.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-990x1320.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250131-WA0030-1320x1760.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1920px) 100vw, 1920px" />महापूजन हवन कार्यक्रम सम्पन्न</strong></p>
<p>इसके पश्चात् आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में संहितासूरी प्रतिष्ठाचार्य पण्डित हंसमुख शास्त्री, धरियावद के निर्देशन में पंडित कीर्तिश पारसोला, पण्डित विशाल के सहयोग से आचार्यश्री शांतिसागरजी की प्रतिमा का आकार, शुद्धिकरण, वास्तु पूजन आचार्यश्री शांतिसागरजी की महापूजन हवन कार्यक्रम हुआ।</p>
<p><strong>जिनवाणी भेंट का सौभाग्य प्राप्त </strong></p>
<p>बेदी शुद्धिकरण कार्य एवं कलश यात्रा पश्चात आचार्यश्री शांति सागरजी के बिंब प्रतिमा की स्थापना आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में की गई। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के प्रवचन के पूर्व आचार्यश्री के चरण प्रक्षालन और जिनवाणी भेंट का सौभाग्य सम्पत अमरेश सेठ परिवार को मिला।</p>
<p><strong>दानदाताओं को सम्मानित किया गया</strong></p>
<p>नृत्य मंगलाचरण सभा के विसर्जन के पूर्व प्रथमाचार्यश्री शांति सागर उद्यान में दो मंजिला भवन और उद्यान में विभिन्न आर्थिक दानदाताओं का श्री समाज पारसोला द्वारा सुमति लाल डागरिया, उदयपुर सुनील जवेरी, मुंबई, पूजा दीदी सहित अनेकों दाताओं का तिलक माला श्रीफल पगड़ी स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सहित देश के अनेक राज्यों से गुरु भक्त पधारे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/shri_shantisagarji_has_done_a_great_favour_to_jainism_by_inspiring_people_to_get_jinvaani_inscribed_on_copper_plates/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जैन पाठशाला की शिक्षा, संस्कार, संत समागम से जीवन में परिवर्तन संभव: आचार्यश्री शांति सागर जी ने जैन धर्म श्रमण परंपरा संस्कृति का किया संरक्षण  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/change_in_life_is_possible_through_jain_pathshalas_education_values_and_saints_gathering/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/change_in_life_is_possible_through_jain_pathshalas_education_values_and_saints_gathering/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 12:07:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shantisagar udhyan samiti]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shree shantisagarji]]></category>
		<category><![CDATA[achaya vardhmansagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[digambar jain samaj dasha humad]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[parasnath jinalaya]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[pratima virajit]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[varshayog samiti]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांति सागर उद्यान समिति]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांति सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन समाज दशा हुमड़]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिमा विराजित]]></category>
		<category><![CDATA[वर्षायोग समिति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=73411</guid>

					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज दशा हुमड़, वर्षायोग समिति, आचार्य शांति सागर उद्यान समिति द्वारा 30 से 31 जनवरी दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 30 जनवरी को पारसनाथ जिनालय से श्रीजी, आचार्य श्री शांतिसागर जी की प्रतिमा और आचार्य वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जैन समाज का जुलूस प्रारंभ हुआ। जिसमें महिलाओं ने कलश धारण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन समाज दशा हुमड़, वर्षायोग समिति, आचार्य शांति सागर उद्यान समिति द्वारा 30 से 31 जनवरी दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 30 जनवरी को पारसनाथ जिनालय से श्रीजी, आचार्य श्री शांतिसागर जी की प्रतिमा और आचार्य वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जैन समाज का जुलूस प्रारंभ हुआ। जिसमें महिलाओं ने कलश धारण किए। आचार्यश्री की प्रतिमा विराजित की गई। विभिन्न विधान हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 33 साधु सहित नगर में विराजित हैं। दशा हूमड दिगंबर जैन समाज के दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। आचार्यश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि पारसोला में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के माध्यम से समवशरण जिनालय के श्री पार्श्वनाथ भगवान का पंचकल्याणक संघ सानिध्य में हुआ। समाज ने जिनालय में आचार्यश्री शांतिसागर जी महाराज की प्रतिमा विराजित कराई। समाज की परम भक्ति से विशुद्धता प्राप्त होती है क्योंकि, समाज के भक्तों ने हृदय में भी आचार्यश्री शांति सागर जी को विराजित किया है। आचार्य शांति सागर जी यहां भी आए थे। दो दिनों का प्रवास किया था। उन्होंने अपनी आगम अनुकूल चर्या से श्रमण परंपरा को जीवंत किया। आचार्य श्री के न केवल श्रावकों पर अपितु हम साधुओं पर भी बहुत उपकार हैं। उन्होंने जैन धर्म,जिनालयों की संस्कृति, जिनवाणी की संस्कृति, धर्म की संस्कृति का अपने मनोबल से संरक्षण किया।</p>
<p><strong>प्राचीन जिनालयों तीर्थ का संरक्षण बहुत जरूरी है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने जीवन में 18 करोड़ से अधिक मंत्रों का जाप किया। 9938 उपवास किए। अनेक उपसर्ग सहन किए। प्राचीन जिनालयों तीर्थ का संरक्षण बहुत जरूरी है क्योंकि, इनसे संस्कृति का ज्ञान होता है यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने दो दिवसीय कार्यक्रम में धर्म सभा में प्रकट की। ब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने देशना में बताया कि आचार्यश्री शांतिसागर जी आचार्य पद शताब्दी महोत्सव के तहत पारसोला में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर उद्यान भवन से प्रेरणा लेकर निकटवर्ती गामड़ी गांव और अन्य नगरों में भी आचार्य शांति सागर संत भवन का लोकार्पण विगत दिनों हुआ है।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73413" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1155" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-1024x462.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-1536x693.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-2048x924.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250130-WA0030-1320x595.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />रात्रि पाठशाला जैन पाठशाला प्रारंभ हुई</strong></p>
<p>आचार्यश्री शांति सागर जी के शिष्य आचार्य श्री कुंथू सागर जी महाराज की प्रेरणा से पारसोला में भी रात्रि पाठशाला जैन पाठशाला प्रारंभ हुई। जैन पाठशाला से संस्कार प्राप्त होते हैं। पाठशाला की शिक्षा संस्कार और संत समागम से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है। जिसके हम स्वयं उदाहरण है कि हमने भी गृहस्थ अवस्था में रात्रि पाठशाला के अध्ययन और संत समागम से जीवन में परिवर्तन कर वर्तमान में इस पद पर हैं।</p>
<p><strong>श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जैन समाज का जुलूस निकला </strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी, ऋषभ पचौरी, संपत सेठ ने बताया कि दिगंबर जैन समाज दशा हुमड़, वर्षायोग समिति, आचार्य शांति सागर उद्यान समिति द्वारा 30 से 31 जनवरी दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 30 जनवरी को पारसनाथ जिनालय से श्रीजी, आचार्य श्री शांतिसागर जी की प्रतिमा और आचार्य वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जैन समाज का जुलूस प्रारंभ हुआ। जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने कलश धारण किए। नगर के 40 से अधिक धार्मिक मंडल अपने निर्धारित वेशभूषा में जुलूस में शामिल हुए। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने श्रीजी की मंगल आरती की। आचार्य श्री शांति सागर जी की प्रतिमा पर पुष्प वृष्टि की। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की आरती उतार कर पाद प्रक्षालन किया। जुलूस का समापन श्री शांति सागर उद्यान में हुआ।</p>
<p><strong>जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य सुमतिलाल डागरिया को</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्री शांति सागर सभागृह में विराजित होने के पूर्व ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, आचार्य शांति सागर जी के चित्र का अनावरण,दीप प्रज्वलन तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य सुमतिलाल डागरिया पारसोला प्रवासी उदयपुर को परिवार सहित प्राप्त हुआ। सुमतिलाल डागरिया परिवार ने आचार्य श्री शांतिसागर जी की छतरी निर्माण, प्रतिमा निर्माण स्वामी वात्सल्य भोजन तथा अन्य कार्यों में अपनी चंचला धनराशि का उपयोग किया। दोपहर को याग़ मंडल विधान की पूजन सौधर्म इंद्र सुमतिलाल डाग़रिया तथा अन्य इंद्र परिवार द्वारा प्रारंभ हुई। पूजन के पूर्व श्रीजी का पंचामृत अभिषेक एवं शांति धारा की गई। शाम को श्रीजी की आरती के बाद,शास्त्र प्रवचन एवं रात्रि में स्थानीय महिला मंडल द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/change_in_life_is_possible_through_jain_pathshalas_education_values_and_saints_gathering/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पारसोला पहुंचें आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से वर्ष 2025 का वर्षायोग किशनगढ़ में करने का निवेदनः प्रथमाचार्यश्री शांति सागर भवन का हुआ लोकार्पण </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagarji_reached_parsola_and_requested_him_to_organize_varshayoga_of_the_year_2025_in_kishangarh/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagarji_reached_parsola_and_requested_him_to_organize_varshayoga_of_the_year_2025_in_kishangarh/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jan 2025 13:29:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Shanti Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Vardhman Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Ashok Patni]]></category>
		<category><![CDATA[Bhamashah]]></category>
		<category><![CDATA[Bhavan Lokarpan]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kishangarh]]></category>
		<category><![CDATA[Madanganj]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[shilanyas]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vatsalya Varidhi]]></category>
		<category><![CDATA[अशोक पाटनी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांति सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[किशनगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[भवन लोकार्पण]]></category>
		<category><![CDATA[भामाशाह]]></category>
		<category><![CDATA[मदनगंज]]></category>
		<category><![CDATA[वात्सल्य वारिधि]]></category>
		<category><![CDATA[शिलान्यास]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=73100</guid>

					<description><![CDATA[पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की कर्म भूमि हैं। प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के आदरणीय अशोक पाटनी, मदनगंज, किशनगढ़ के नेतृत्व में लगभग 600 से अधिक भक्त आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को चातुर्मास मदनगंज, किशनगढ़ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की कर्म भूमि हैं। प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के आदरणीय अशोक पाटनी, मदनगंज, किशनगढ़ के नेतृत्व में लगभग 600 से अधिक भक्त आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को चातुर्मास मदनगंज, किशनगढ़ में करने हेतु रजत श्रीफल भेंट किया। प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी नवनिर्मित भवन का लोकार्पण एवं वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागर संत भवन का शिलान्यास प्रसिद्ध उद्योगपति अशोकजी पाटनी, किशनगढ़ द्वारा आचार्यश्री के सानिध्य में किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया द्वारा पारसोला की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आचार्यश्री ने पुनः पारसोला के लिए किया मंगल विहार </strong></p>
<p><strong>पारसोला।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों मुनिश्री हितेंद्र सागर ,श्रीदर्शितसागर, श्री प्रबुद्ध सागर, क्षुल्लकश्री विशालसागर, श्रीप्राप्ति सागरजी तथा आर्यिकाश्री शीतलमति, श्रीचैत्यमति श्रीवत्सलमति, श्रीविलोकमति, श्रीविचक्षणमति, श्रीविन्रममति, श्रीदर्शनामति, श्रीदेशनामति, श्रीनिर्माेहमती, श्रीपद्मयशमति 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की कर्म भूमि हैं।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में श्रद्धालु गामड़ी आए</strong></p>
<p>विनोद, गौरव पाटनी के अनुसार मुनि सुब्रतनाथ, दिगंबर जैन पंचायत, तथा आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायत मदनगंज किशनगढ़ सहित सभी दिगंबर मंदिरों के सानिध्य एवं प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के आदरणीय अशोक पाटनी, मदनगंज किशनगढ़ के नेतृत्व में लगभग 600 से अधिक भक्त आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को संघ सहित वर्ष 2025 का चातुर्मास मदनगंज, किशनगढ़ में करने हेतु रजत श्रीफल भेंट किया। इसके लिए 8 बड़ी बसे तथा 40 से अधिक कार से श्रद्धालु 26 जनवरी को किशनगढ़ से प्रस्थान कर 27 जनवरी को गामड़ी आए।</p>
<p><strong>किशनगढ़ पधारने का अनुरोध कर पाटनी भावुक हुवे</strong></p>
<p>इस अवसर पर अशोक पाटनी आर के मार्बल ने अपने भावुक शब्दों में बताया कि गुरुदेव आपने वर्ष 2014 में किशनगढ़ में वर्षा योग किया था। किंतु तब हम प्यासे रह गए थे, आपने आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से वर्ष 2025 की ग्रीष्मकालीन वाचना। वर्ष 2025 का चातुर्मास प्रथमाचार्यश्री शांति सागरजी महाराज का आचार्य पद प्रतिस्थापना शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम शीतकालीन प्रवास तथा आचार्य श्रीवर्धमान सागर की जन्म जयंती का हीरक महोत्सव किशनगढ़ में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से मनाने हेतु किशनगढ़ पधारने का अनुरोध किया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के सानिध्य में भवन का शिलान्यास</strong></p>
<p>दशा हूमड समाज गामड़ी के पंच सूरजमल, संदीप, ऋषभ, जयंतीलाल ने बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी नवनिर्मित भवन का लोकार्पण एवं वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागर संत भवन का शिलान्यास प्रसिद्ध उद्योगपति अशोकजी पाटनी, किशनगढ़ द्वारा आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में किया गया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का मंगल विहार हुआ </strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित पुनः पारसोला के लिए 27 जनवरी दोपहर को मंगल विहार हुआ। इसके पूर्व 25 जनवरी को आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य मुनिश्री आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज के पवित्र पावन चरणों की वंदना दर्शनार्थ पधारे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagarji_reached_parsola_and_requested_him_to_organize_varshayoga_of_the_year_2025_in_kishangarh/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ के साधुओं ने किया केश लोचन: पारसोला में दर्शन के लिए उमड़ रहे आचार्य भक्त  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sadhus_of_acharya_shri_vardhmansagar_jis_sangh_performed_kesh_lochan/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/sadhus_of_acharya_shri_vardhmansagar_jis_sangh_performed_kesh_lochan/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jan 2025 13:11:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shree vardhman sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kesh Lochan]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Hitendra Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Upvas]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[उपवास]]></category>
		<category><![CDATA[केश लोचन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री हितेंद्र सागर जी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=72802</guid>

					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज के संघ के साधुओं ने बुधवार को केश लोचन किए। पारसोला में मुनि संघ और भक्त आचार्यश्री के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पधार रहे हैं। पारसोला से पढ़िए राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पारसोला। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज यहां विराजित हैं। बुधवार को शिष्य मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज के संघ के साधुओं ने बुधवार को केश लोचन किए। पारसोला में मुनि संघ और भक्त आचार्यश्री के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पधार रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पारसोला से पढ़िए राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज यहां विराजित हैं। बुधवार को शिष्य मुनिश्री प्रशम सागर जी एवं आर्यिका श्री निर्माेह माताजी ने केशलोचन किया। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया केशलोचन तप साधना की एक प्रक्रिया है जिसमें साधु शरीर से ममत्व हटाकर बालों को घास-फूस की भांति उखाड़ते हैं। उस दिन उपवास रखते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए अनेक मुनि संघ पधार रहे हैं। अनेक नगरों से भक्त भी पधार रहे हैं।</p>
<p><strong>मुनिसंघ वंदना और दर्शन के लिए आ रहे हैं</strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी, ऋषभ पचौरी तथा वीरेंद्र सेठ ने बताया कि 25 जनवरी को पंचम पट्टाचार्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का पावन चरणों की वंदना, दर्शनार्थ आचार्य भगवन् श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रशमसागर जी, श्री प्रणुतसागर जी, श्री साध्यसागर जी एवं मुनि श्री जयन्द्र सागर जी महाराज पारसोला, राजस्थान में पधार रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि सभी समाजजन उपस्थित होकर गुरु भक्ति के पावन प्रसंग पर धर्मलाभ लें।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/sadhus_of_acharya_shri_vardhmansagar_jis_sangh_performed_kesh_lochan/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनिश्री महिमा सागर जी का धरियावद की ओर विहार: संघ सहित पहुंचेंगे इंदौर </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/munishree_mahima_sagar_ji_visit_towards_dhariavad/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/munishree_mahima_sagar_ji_visit_towards_dhariavad/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jan 2025 03:39:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[dhariyawad]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[mangal vihar]]></category>
		<category><![CDATA[munishree mahima sagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धरियावद]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल विहार]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री महिमा सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=72687</guid>

					<description><![CDATA[मुनि श्री महिमा सागर जी का पारसोला से मुंगाना होते हुए धरियावद की ओर विहार हुआ। पारसोला में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन आशीर्वाद लेकर आचार्य श्री वरदत्त सागर जी के शिष्य मुनिश्री महिमा सागर जी संघ शामिल है। इंदौर की ओर इनका विहार हो रहा है। पढ़िए इंदौर से राजेश पंचोलिया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री महिमा सागर जी का पारसोला से मुंगाना होते हुए धरियावद की ओर विहार हुआ। पारसोला में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन आशीर्वाद लेकर आचार्य श्री वरदत्त सागर जी के शिष्य मुनिश्री महिमा सागर जी संघ शामिल है। इंदौर की ओर इनका विहार हो रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री महिमा सागर जी का पारसोला से मुंगाना होते हुए धरियावद की ओर विहार हुआ।</p>
<p>पारसोला में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन आशीर्वाद लेकर आचार्य श्री वरदत्त सागर जी के शिष्य मुनिश्री महिमा सागर जी, मुनि श्री दिव्य सेन, मुनि श्री परम सागर, आर्यिका श्री सुग्रीवमती माताजी आर्यिका सुभद्रामती माताजी, क्षुल्लिका श्री सम्मेदश्री माताजी का 19 जनवरी को पारसोला से दोपहर को मुंगाना की ओर विहार हुआ है। आप संघ सहित धरियावद,बांसवाड़ा,रतलाम होते हुए इंदौर की ओर विहार कर रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/munishree_mahima_sagar_ji_visit_towards_dhariavad/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को चातुर्मास के लिए किया श्रीफल भेंट: विभिन्न शहरों, नगरों से पहुंच रहे हैं गुरु भक्त </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagar_ji_was_presented_with_a_shreefal_or_chaturmas/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagar_ji_was_presented_with_a_shreefal_or_chaturmas/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jan 2025 16:50:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shree vradhamansagarji]]></category>
		<category><![CDATA[chakwada]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[nivai]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[shreefal bhent]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Varshayog]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[चकवाड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[निवाई]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[वर्षायोग]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल भेंट]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=72683</guid>

					<description><![CDATA[पारसोला। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज विशाल संघ सहित पारसोला नगर में विराजित हैं। चातुर्मास समाप्ति के बाद प्रतिदिन राजस्थान सहित अनेक राज्यों के गुरु भक्तों ने पधारकर अपने नगर की ओर मंगल विहार करने के लिए श्रीफल भेंटकर निवेदन है। इसी कड़ी में शनिवार को निवाई टोंक जिले के सैकडों गुरु भक्तों ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पारसोला।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज विशाल संघ सहित पारसोला नगर में विराजित हैं। चातुर्मास समाप्ति के बाद प्रतिदिन राजस्थान सहित अनेक राज्यों के गुरु भक्तों ने पधारकर अपने नगर की ओर मंगल विहार करने के लिए श्रीफल भेंटकर निवेदन है। इसी कड़ी में शनिवार को निवाई टोंक जिले के सैकडों गुरु भक्तों ने आकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से संघ सहित वर्ष 2025 का वर्षायोग निवाई में करने का निवेदन किया है।</p>
<p><strong> वर्षा योग के लिए निवेदन</strong></p>
<p>इसके पूर्व किशनगढ़ के गुरु भक्त विमल महेंद्र पाटनी उरसेवा वालों ने भी गुण स्थली चकवाड़ा में चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट किया है। धरियावद, भींडर, बांसवाड़ा ,सीकर सहित अनेक नगरों ने भी वर्षायोग के लिए निवेदन किया।</p>
<p><strong>आचार्य पद शताब्दी महोत्सव के लिए निवेदन</strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी एवं ऋषभ पचोरी वर्षायोग समिति ने बताया कि इसके पूर्व सकल दिगम्बर जैन समाज पारसोला ने भी वर्ष 2025 का वर्षायोग पारसोला में पुनः करने तथा आचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव का समापन करने के लिए निवेदन किया है।</p>
<p><strong>पट्टाचार्य कार्यक्रम के लिए आग्रह</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार सुमति धाम इंदौर के मनीष सपना गोधा ने अप्रैल 2025 में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के पट्टाचार्य कार्यक्रम के लिए संघ सहित पधारने का निवेदन किया है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagar_ji_was_presented_with_a_shreefal_or_chaturmas/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागरजी की प्रेरणा से जैन धार्मिक पाठशाला पुनः प्रारंभः स्थापना 70 के दशक में कुन्थु सागरजी महाराज द्वारा की गई थी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jain_religious_school_restarted_with_the_inspiration_of_acharya_shri_vardhman_sagarji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/jain_religious_school_restarted_with_the_inspiration_of_acharya_shri_vardhman_sagarji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Jan 2025 10:09:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Kunthu Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Shanti Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Aacharyashree Vardhman Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[Pravachan]]></category>
		<category><![CDATA[Shatabdi Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य कुन्थू सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांति सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[शताब्दी महोत्सव]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=72540</guid>

					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्यश्री वर्धमान सागरजी की प्रेरणा से जैन धार्मिक पाठशाला पुन प्रारंभ की गई है। शताब्दी महोत्सव को स्थाई बनाने के लिए आचार्यश्री शांति सागरजी के शिष्य आचार्य कुन्थू सागरजी के नाम से सन 1970 से नगर में धार्मिक पाठशाला प्रारंभ की गई थी। वर्ष 2023 में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्यश्री वर्धमान सागरजी की प्रेरणा से जैन धार्मिक पाठशाला पुन प्रारंभ की गई है। शताब्दी महोत्सव को स्थाई बनाने के लिए आचार्यश्री शांति सागरजी के शिष्य आचार्य कुन्थू सागरजी के नाम से सन 1970 से नगर में धार्मिक पाठशाला प्रारंभ की गई थी। वर्ष 2023 में कोरोना महामारी के बाद से पाठशाला का संचालन स्थगित हो गया था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया द्वारा पारसोला की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 30 साधुओं सहित पारसोला नगर में विराजित है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज आचार्य पद शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत कार्यक्रम का शुभारंभ पारसोला से ही हुआ है, जो अक्टूबर 2025 तक निरंतर चलेगा। शताब्दी महोत्सव को स्थाई बनाने के लिए आचार्यश्री शांति सागरजी के शिष्य आचार्य कुन्थू सागरजी के नाम से सन 1970 से नगर में धार्मिक पाठशाला प्रारंभ की गई थी। वर्ष 2023 में कोरोना महामारी के बाद से पाठशाला का संचालन स्थगित हो गया था। विगत दिनों नगर में जैन संस्कार के लिए आध्यात्मिक शिविर का आयोजन आचार्यश्री संघ सानिध्य में किया गया। जिसमें आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने अपने प्रवचन में नगर के बच्चों को धार्मिक संस्कार हेतु पाठशाला प्रारंभ करने का उपदेश और महत्वपूर्ण प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>जैन पाठशाला को पुनः प्रारंभ हुई</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर ससंघ की प्रेरणा एवं सानिध्य में स्थानीय जैन समाज ने आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्यश्री कुन्थुसागर जैन पाठशाला को पुनः शुरू करने का मानस बनाया है। आचार्यश्री के मंगल आशीर्वाद से पंडित कीर्तिश वगेरिया व पंडित अशोक जैन के निर्देशन में पाठशाला के शिक्षकगण को मनोनीत किया गया। गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्यश्री ने बताया कि नगर में पूर्व में जैन पाठशाला चलती थी।</p>
<p><strong>बच्चों में धर्म के संस्कारों का बीजारोपण </strong></p>
<p>जैन पाठशाला से बच्चों में बचपन से धर्म के संस्कारों का बीजारोपण होता है। बचपन में सीखे धर्म के संस्कार जीवन को उन्नति के मार्ग पर ले जाते है। धर्म के संस्कार से जीवन का निर्माण ही नहीं निर्वाण को भी प्राप्त कर सकते हैं। सभी समाजजनों की जिम्मेदारी है कि वो जैन पाठशाला को नियमित रूप चलाये और समय-समय स्वयं पाठशाला का अवलोकन करते हुए बालकों में आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि करने का पुरुषार्थ करें।</p>
<p><strong>नियमित अध्ययन हेतु कृतसंकल्पित</strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष जैन समाज, ऋषभ पचौरी अध्यक्ष वर्षायोग समिति, वीरेंद्र सेठ ने बताया कि जैन पाठशाला में बाल बोध प्रथम द्वितीय, द्रव्य संग्रह, श्रावकाचार, छहढाला, तत्वार्थ सूत्र, स्वाध्याय आदि का नियमित अध्ययन वीणा घाटलिया, माला घाटलिया, ममता पचौरी, अंकिता पचौरी, सुनीता पचौरी, चेतना घाटलिया, बिंदु वगेरिया, पूजा घाटलिया, चेतना पचौरी व पुष्पा देवी द्वारा बालक-बालिका युवाओं को धर्मशिक्षा देने के लिए ससंघ के सानिध्य में पूज्य मुनिश्री हितेंद्र सागर ने संकल्प दिलाया।</p>
<p><strong>महिला मंडल का प्रयास व संचालन हेतु राशि दान की गई</strong></p>
<p>पाठशाला संचालन के लिए संघस्थ गज्जू भाई ने 11 हज़ार व तारा सेठी दादी ने पांच हजार रुपये की राशि भेंट की तथा नगर के अनेक साधर्मियों ने रूपये 500 के अनुसार दान राशि की घोषणा की। सभी शिक्षकगणों का स्थानीय जैन समाज ने सम्मान किया। पारसोला में आचार्यश्री कुन्थु सागर जैन पाठशाला की स्थापना 70 के दशक में प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी के शिष्य एनापुर वाले आचार्यश्री कुन्थु सागरजी महाराज द्वारा की गई थी। हाल ही में कोरोना काल के कारण वर्ष 2021 से पाठशाला बंद हो गई थी। जिसे महिला मंडल के द्वारा पुनः पाठशाला शुरू करने का संकल्प लिया है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/jain_religious_school_restarted_with_the_inspiration_of_acharya_shri_vardhman_sagarji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
