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	<title>panchamrit abhishek &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री चंद्रप्रभ भगवान का द्रव्यों से किया पंचामृत अभिषेक : पूजन आचार्य संघ सान्निध्य में हुआ संपन्न  </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:25:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। पिछले चार माह से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य से जयपुर की धरा धन्य हो रही है। पढ़िए, जयपुर से डॉ.राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230; जयपुर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। पिछले चार माह से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य से जयपुर की धरा धन्य हो रही है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, जयपुर से डॉ.राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। पिछले चार माह से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य से जयपुर की धरा धन्य हो रही है। गुरुवर के वात्सल्य, आशीर्वाद और उपदेशों से सभी को बहुत धर्मलाभ मिला है। गुरुभक्त सुरेश सबलावत ने बताया कि 10 जून को प्रातः 8 से 10 बजे तक सभी मंदिर गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता अर्पित कर तथा विनम्र निवेदन करेंगे कि जयपुर को उनके सान्निध्य का लाभ आगे भी मिलता रहे। असम गुवाहाटी के भागचंद, सुनीता चूड़़ीवाल सहित समस्त चूड़़ीवाल परिवार ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जयपुर बड़ के बालाजी चंद्रपुरी में मंगलवार को श्री चंद्रप्रभ भगवान का पंचामृत अभिषेक और पूजन किया।</p>
<p>दोपहर को मंडल विधान का पूजन हुआ। आचार्य संघ सानिध्य में प्रातः काल भगवान श्री चंद्रप्रभ का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल पानी, शर्करा, विभिन्न फलों और सूखे मेवों के रसों, दूध, घी, दही, सर्वाेषधि, विभिन्न पुष्प केशर, सुगंधित जल, चार कलश से शांतिधारा हुई। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मतीजी चूड़ीवाल परिवार की है। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी की समाधि इसी स्थान पर हुई। भव्य मंदिर के साथ वैराग्य का दिग्दर्शन प्रतीक समाधिस्थल भी बनाया गया हैं।</p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 10 वर्षों बाद छठी बार वर्ष 2026 में, 10 मुनिराज, 20 आर्यिका, 1 ऐलक, 3 क्षुल्लक 34 साधु सहित जयपुर में मंगल प्रवेश हुआ। इसके पूर्व सन 1969 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ आपने वर्षायोग किया था। आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने आचार्य बनने के बाद सन 1999 में भट्टारक जी की नसिया में चातुर्मास किया था। उसी वर्ष में क्षुल्लिका और आर्यिका दीक्षा श्री अचल मति को और श्री नमित सागरजी को ऐलक दीक्षा दी थी तथा आर्यिकाश्री अचल मति और आर्यिका श्री सरस्वती मति जी 2 साधुओं की समाधि हुई। वर्ष 2000 में नेमीनगर कॉलोनी में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा की। उसी में मुनि श्री देवेंद्र सागर और मुनि श्री देवेश सागर जी को मुनि दीक्षा प्रदान की। वर्ष 2014 में श्यामनगर जयपुर में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हुई। वर्ष 2016 में बड़के बालाजी में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं आर्यिका श्री गुप्तिमति जी की दीक्षा और आर्यिका श्री रिद्धि मति की समाधि हुई। वर्ष 2026 मंगलम सिटी में सलूम्बर के पति पत्नी ने दीक्षा ली।</p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मालवीय नगर जयपुर के पुत्रः एवं पिता को क्रमशः मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं मुनि श्री भुवन सागर दीक्षा देकर बनाया। आचार्य श्री ने जयपुर निवासी मुनि श्री विवर्जित सागर जी एवं जयपुर निवासी मुन्नालाल टकसाली को दीक्षा देकर मुनि श्री गुणोदय सागर बनाया। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों से जयपुर के निवासियों ने दीक्षा लेकर आत्म कल्याण किया है।</p>
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		<title>वैवाहिक वर्षगांठ गुरु चरणों में मनाई : पंचामृत अभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान कर लिया आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Tue, 26 May 2026 09:15:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[21 वीं सदी की भौतिकवादी चकाचौंध में जहां करोड़पति, अरबपति अपना धन का वैभव बताते हैं। शादी, सालगिरह, जन्मदिन विदेश में मनाते हैं किंतु कुछ पुण्यशाली सक्षम ऐसे युवा भी होते हैं जो अपने द्रव्य का उपयोग अपनी विवाह की सालगिरह गुरु सानिध्य में मनाते हैं। जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जयपुर। 21 वीं सदी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>21 वीं सदी की भौतिकवादी चकाचौंध में जहां करोड़पति, अरबपति अपना धन का वैभव बताते हैं। शादी, सालगिरह, जन्मदिन विदेश में मनाते हैं किंतु कुछ पुण्यशाली सक्षम ऐसे युवा भी होते हैं जो अपने द्रव्य का उपयोग अपनी विवाह की सालगिरह गुरु सानिध्य में मनाते हैं। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> 21 वीं सदी की भौतिकवादी चकाचौंध में जहां करोड़पति, अरबपति अपना धन का वैभव बताते हैं। शादी, सालगिरह, जन्मदिन विदेश में मनाते हैं किंतु कुछ पुण्यशाली सक्षम ऐसे युवा भी होते हैं जो अपने द्रव्य का उपयोग अपनी विवाह की सालगिरह गुरु सानिध्य में मनाते हैं। भगवान का पूजन और पंचामृत अभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सान्निध्य में करते हैं। कमलेश देवी सन्मति चंवरिया निवाई ने अपने वैवाहिक वर्षगांठ के उपलक्ष्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में बड़ के बालाजी जयपुर में 24 मई को श्री चन्द्रप्रभ भगवान के अभिषेक पूजन के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन किया।</p>
<p>सन्मति कुमार कमलेश देवी जैन ने पुत्रों पुत्रवधुओं सुकमाल, महिपाल, मोहित, नीलम, शालू, आयुषी, ऋत्वी , निरुपम, जिन्नाश, धैर्यांश जैन चवरिया परिवार, परिजनों विमल जैन झीलाय, गोपाल कठमाणा, शम्भू कठमाणा ने अष्ट द्रव्यों, जल, चंदन, अक्षत विभिन्न पुष्पों ,अनेक प्रकार के नैवेद्य,दीप, धूप विभिन्न फलों ,सूखे मेवे अर्घ्य समर्पित कर अनुष्ठान किया। 36 मूलगुण धारी आचार्य और श्री जी का पूजन 36 द्रव्यों से भक्ति नृत्य पूर्वक किया। पूजन के मंत्रोच्चार आर्यिका श्री महायश मति ने किए।</p>
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		<title>शांतिनाथ भगवान के त्रय कल्याणक महोत्सव में श्रद्धा का सैलाब : पंचामृत अभिषेक और भजन संध्या में भावविभोर हुआ टोंक </title>
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		<pubDate>Thu, 14 May 2026 13:56:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। गुरुवार को हुए पंचामृत अभिषेक और भव्य भजन संध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। गुरुवार को हुए पंचामृत अभिषेक और भव्य भजन संध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। गुरुवार को हुए पंचामृत अभिषेक और भव्य भजन संध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष इन तीनों कल्याणकों की स्मृति में आयोजित इस आयोजन ने पूरे शहर को धार्मिक आभा से सराबोर कर दिया।</p>
<p><strong>पंचामृत से हुआ विशेष अभिषेक</strong></p>
<p>14 मई को सुबह भगवान शांतिनाथ का विशेष पंचामृत अभिषेक हुआ, जिसमें 25 प्रकार के पवित्र रसों से अभिषेक कर पूजा अर्चना की गई। यह दृश्य अत्यंत दिव्य और अलौकिक रहा, जब भक्ति रस में भीगे श्रद्धालु शांतिनाथ भगवान की आराधना में लीन दिखे। अभिषेक के दौरान जयकारों से मंदिर परिसर गूँज उठा।</p>
<p><strong>संध्या बनी संगीतमय</strong></p>
<p>शाम को आरती और शास्त्रसभा के बाद हुई भजन संध्या में भोपाल से पधारे केशव एंड पार्टी के कलाकारों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में डुबो दिया। भजन संध्या के दौरान वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया और श्रद्धालु देर रात तक भावविभोर होकर झूमते रहे।</p>
<p><strong>समाजजनों की सराहनीय भागीदारी</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर महिला मंडल, बालिका मंडल, धर्मसागर पाठशाला और शांतिधारा परिवार के सदस्यों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम की सफलता में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि 15 मई को श्री शांतिनाथ विधान मंडल का आयोजन बड़े मंदिर में किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों के आने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>प्रमुख समाजसेवियों की उपस्थिति</strong></p>
<p>महोत्सव में भागचंद फुलेता, धर्मचंद दाखिया, कमल सर्राफ, विकास अत्तार, सुनील सर्राफ, कमल आंडरा, सुरेश मलारना, पुनीत जागीरदार, सोनू पासरोटिया, जिवेंद्र आंडरा, प्रदीप आंडरा, अंकित आंडरा, मनीष अत्तार, आकाश बोरदा और नरेंद्र अत्तार सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>महावीर जयंती पूर्व भगवान महावीर का किया पंचामृत अभिषेक : पुण्यार्जक परिवारों ने भक्ति भाव से अभिषेक किया </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:00:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चुलगिरी में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी 35 साधुओं के सानिध्य में 21 फीट के खड्गासन वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक श्री महावीर जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में पंचामृत अभिषेक किया गया। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी परंपरा में आचार्य श्री देशभूषण जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चुलगिरी में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी 35 साधुओं के सानिध्य में 21 फीट के खड्गासन वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक श्री महावीर जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में पंचामृत अभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी परंपरा में आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज की मंगल प्रेरणा से निर्मित अतिशय क्षेत्र अनेक समाधिस्थ साधुओं की छतरी स्थली चुलगिरी में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी 35 साधुओं के सानिध्य में 21 फीट के खड्गासन वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक श्री महावीर जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में पंचामृत अभिषेक किया गया। कई पुण्यार्जक परिवारों ने भक्ति भाव से अभिषेक किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-103253" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028.jpg" alt="" width="1" height="1" /><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-103253" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-990x742.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>शनिवार को प्रातः 21 फीट के खड्गासन श्री महावीर स्वामी का जल अभिषेक,भव्य पंचामृत अभिषेक, नारियल रस, शर्करा,घी, क्षीर, दूध, सर्वोषधि चार कलश, चंदन, पुष्प, मंगल आरती, सुगंधित जल आदि से महामस्तकाभिषेक एवं शांति धारा संघ सान्निध्य में हुई। सुरेश सबलावत, राजकुमार सेठी अनुसार आचार्य श्री संघ की आहार चर्या के बाद सामयिक राणा जी की नसिया में हुई। आचार्य श्री संघ का संभावित शनिवार शाम को 2.7 किमी विहार दिगंबर मंदिर सेठी नगर से होगा। 29 मार्च को प्रातः 4 किमी पाटोदी जी के दिगंबर मंदिर मोदीखाना के लिए विहार होगा।</p>
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		<title>निर्वाण एवं पावन भूमि की वंदना से पुण्य रूपी अक्षय निधि प्राप्त होती हैं: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चाकसू में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 15:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का अतिशय क्षेत्र अक्षय निधि आदिश्वर धाम चाकसू से मंगल विहार हुआ। इसके पूर्व चाकसू के प्राचीन जैन मंदिर से आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने पुनः आदिश्वरधाम चाकसू में आकर आचार्य श्री वर्धमानसागर की आचार्य भक्ति कर चरण वंदना की। चाकसू से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; चाकसू। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का अतिशय क्षेत्र अक्षय निधि आदिश्वर धाम चाकसू से मंगल विहार हुआ। इसके पूर्व चाकसू के प्राचीन जैन मंदिर से आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने पुनः आदिश्वरधाम चाकसू में आकर आचार्य श्री वर्धमानसागर की आचार्य भक्ति कर चरण वंदना की। <span style="color: #ff0000">चाकसू से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चाकसू।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का अतिशय क्षेत्र अक्षय निधि आदिश्वर धाम चाकसू से मंगल विहार हुआ। इसके पूर्व चाकसू के प्राचीन जैन मंदिर से आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने पुनः आदिश्वरधाम चाकसू में आकर आचार्य श्री वर्धमानसागर की आचार्य भक्ति कर चरण वंदना की। दोनों आचार्य संघ सानिध्य में श्री जी का पंचामृत अभिषेक हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संक्षिप्त आशीर्वचन में बताया कि सिद्ध, अतिशय क्षेत्र , तीर्थंकरों की पंचकल्याणक भूमि पावन होती हैं। इनसे क्षेत्र के नाम अनुरूप पुण्य रूपी अक्षय निधि प्राप्त होती हैं। आदिश्वर भगवान ने भोग भूमि के बाद असि मसि कृषि, शिल्प, कला और वाणिज्य का उपदेश जनता प्रजा को बेहतर जीवन यापन के लिए दिया। पुत्रियों के माध्यम से अंक और लिपि का ज्ञान दिया इसलिए पुण्य को अक्षय रखे। प्रातः आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने संघ सहित आचार्य वर्धमान सागर जी को पदमपुरा बिहार के लिए मंगल विदाई दी। आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने चरण वंदना कर परिक्रमा लगाकर संघ को विदाई दी। प्रज्ञा सागर जी महाराज के चरण वंदना कर संघ के शेष साधुओं ने भक्ति की। ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या ,परमीत भद्रावती के अनुसार 6 फरवरी को सुबह चाकसू से आचार्य श्री संघ का मंगल विहार हुआ।</p>
<p>3.4 किमी शीतला माता मंदिर चाकसू में आहार हुआ। दोपहर को 6.3 किमी विहार कर शिवदास पूरा सड़क टोल निकट रात्रि विश्राम हुआ। 7 फरवरी को 3.3 किमी विहार कर आचार्य संघ की आहार चर्या महात्मा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज शिवदासपूरा में होगी। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 31 साधुओं सहित अतिशय क्षेत्र पदमपुरा बाडा में 8 फरवरी दोपहर को प्रवेश होगा। पूर्व से विराजित आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी एवं क्षेत्र कमेटी , पंच कल्याणक समिति आचार्य संघ की भव्य आगवानी करेंगे।</p>
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		<title>श्री शांतिनाथ महा अर्चना विधान में श्री जी का अभिषेक : पंचामृत अभिषेक कर विश्व शांति के कामनार्थ शांतिधारा की  </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:30:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन समाज के टूस्टी अश्विन बोबडा परिवार ने शुक्रवार को एक दिवसीय श्री शांतिनाथ महा अर्चना विधान किया। यह आयोजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल‘ के तत्वावधान में हुआ। सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230; सागवाड़ा। दिगम्बर जैन समाज के टूस्टी अश्विन बोबडा परिवार ने शुक्रवार को एक दिवसीय श्री शांतिनाथ महा अर्चना विधान किया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बर जैन समाज के टूस्टी अश्विन बोबडा परिवार ने शुक्रवार को एक दिवसीय श्री शांतिनाथ महा अर्चना विधान किया। यह आयोजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल‘ के तत्वावधान में हुआ। <span style="color: #ff0000">सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> दिगम्बर जैन समाज के टूस्टी अश्विन बोबडा परिवार ने शुक्रवार को एक दिवसीय श्री शांतिनाथ महा अर्चना विधान किया। यह आयोजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल‘ के तत्वावधान में हुआ। इस अवसर पर प्रातः श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन नया मंदिर मे अर्घ्य चढ़ाकर यजमान परिवार द्वारा 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा को शिरोधार्य कर बैंडबाजों के साथ कार्यक्रम स्थल पर लाया गया। जहां पर प्रतिमा जी पर श्रद्धालुओं द्वारा पंचामृत अभिषेक कर विश्व शांति के कामनार्थ शांतिधारा की गई। सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, पंच मंगल कलश स्थापना के बाद नव देवता पूजा हुई। इसके बाद शांतिनाथ महामंडल विधान के तहत विधान मंडप पर अश्विन ,लोकेश औरचिराग बोबडा द्वारा अष्ट द्रव्य श्रीफल युक्त शताधिक अर्घ्य समर्पित किए गए। कार्यक्रम में भगवान की आरती उतारी गई।</p>
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		<title>सनावद में आना तीर्थ वंदना के समान है: आचार्यश्री विभव सागर जी ने बाह्य विज्ञान एवं जैन विज्ञान का सविस्तार किया उल्लेख  </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 12:52:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अनेक त्यागियों की नगरी में इंदौर से विहार पुसेगांब महाराष्ट्र के लिए विहाररत आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ससंघ नगर में विराजमान होकर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन की यह खबर&#8230; सनावद। अनेक त्यागियों की नगरी में इंदौर से विहार पुसेगांब महाराष्ट्र के लिए विहाररत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अनेक त्यागियों की नगरी में इंदौर से विहार पुसेगांब महाराष्ट्र के लिए विहाररत आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ससंघ नगर में विराजमान होकर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> अनेक त्यागियों की नगरी में इंदौर से विहार पुसेगांब महाराष्ट्र के लिए विहाररत आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ससंघ नगर में विराजमान होकर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। सन्मति जैन काका ने बताया कि आचार्य श्री विभव सागर इंदौर से पुसेगांव महाराष्ट्र में होने वाले भव्य पंचकल्याणक के लिए विहाररत हैं। इसी कड़ी में आचार्यश्री सनावद नगरी में अल्प प्रवास कर जैन धर्म की प्रभावना में सहायक बने हैं। आचार्यश्री विभवसागर जी के सानिध्य में प्रातःकाल की बेला में सोमवार को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पंचामृत अभिषेक शांतिधारा हुई। वहीं आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना निलय में आचार्य श्री ने अमृतमयी वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि सनावद की धरती एक महान तीर्थ है। जिस धरती पर राष्ट्र गौरव आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागी जन्म लेकर दीक्षा को प्राप्त हुए हैं। यहां आना एक तीर्थ की वंदना के समान है। आचार्यश्री ने बाह्य विज्ञान एवं जैन विज्ञान का उल्लेख करते हुए बताया कि जैन विज्ञान का प्रयोग स्वयं पर होता है एवं लौकिक विज्ञान का प्रयोग पहले वैज्ञानिक अन्य जीवांे पर करते हैं लेकिन, जैन विज्ञान का प्रयोग हमारे भगवान महावीर स्वामी ने स्वयं पर किया। नगर में पूर्व से विराजमान मुनि श्री अक्षयसागर जी महाराज ने कहा कि स्व और पर पदार्थ को ज्ञान करने के लिए सम्यक ज्ञान को सूर्य की उपमा दी है और जिसके जीवन में ये प्रकाश शील हो जाता है वह व्यक्ति हर कार्य सरलता से कर देता है। इसलिए हमारा जीवन का लक्ष्य सम्यक ज्ञान होना चाहिए लेकिन, हम देखते है। समाज में स्वाध्याय की इतनी कमी है कि व्यक्ति को आत्मबोध का पता ही नहीं चलता। इस अवसर पर आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य अविनाशकुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>आचार्य विभव सागर का हुआ मंगल विहार </strong></p>
<p>जैसा कि नगर में पिछले 2 दिन से धर्म की प्रभावना कर रहे आचार्य श्री विभव सागरजी ससंघ का मंगल विहार खंडवा की ओर हुआ। आप महाराष्ट के पूसे गांव की ओर अग्रसर हैं। विदित है कि आचार्य श्री अपने विशाल संघ के साथ वर्ष 2022 में नगर में ग्रीष्मकालीन वाचना कर चुके है। इस अवसर ओर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को मुनिराजों ने प्रस्तुत की विनयांजलि: भक्ति भाव से आचार्यश्री का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया  </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 11:39:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> तप, साधना एवं त्याग के लिए जाने वाले इस नगर में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। नगर में पद विहार के पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज ससंघ एवं नगर में चातुर्मास रत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। जिसमें पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने करने का सौभाग्य श्रीकांत जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस क्रम में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज एवं युगल मुनिराज के सानिध्य में आचार्य छत्तीसी विधान रचाया गया। जिसमें उपाध्याय मुनि श्री द्वारा प्रत्येक अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया। कुल 36 अर्घ्य समर्पित किए गए। उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य खुशकवर बाई सुरेशचंद पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनि श्री निर्वेद सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विपिनकुमार संजयकुमार बदूद परिवार तथा मुनि श्री साध्य सागरजी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल वैभव सराफ परिवार को एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल कुमार बारिश कुमार बदूद परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विराजमान मुनि श्री निर्वेद सागर जी, मुनि श्री साध्य सागर जी, मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने आचार्य श्री विरागसागर जी के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p><strong>मुनिराजों ने विनयांजलि में किया गुरु का गुणानुवाद </strong></p>
<p>उपाध्याय मुनि श्री ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि में कहा कि उन्होंने सभी मुनिराजों के साथ आनंद और वात्सल्य के साथ रहना सिखाया है। इस युग प्रतिक्रमण करवाने वाले आचार्य परमेष्टी थे तो वो आचार्य विराग सागर जी महाराज थे। जिन्होंने प्राचीन परंपराओं का उद्वहन पुनः किया है जिससे संघ इकट्ठा होता था। एक बात ध्यान रखना जो काम धन भी नहीं करता वो काम आचार्य श्री ने करके दिखाया। आप ने छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दीक्षा लेने वाले उपकारियों पर उपकार किया। वास्तव में वो बुजुर्गाें के देवता कहलाते थे। आप ने कहा कि समाधि मरण कैसे किया जाता है, आचार्य पद कैसे छोड़ा जाता है, संघ व्यवस्थित कैसे किया जाता है, अगर किसी से सीखना हो तो ये आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज ने कर दिखाया। आचार्य भगवन के गुण भी अनंत है, आप के उपकार भी अनंत है। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, कमल केके ब्रह्मचारी पारस भैया, अर्पित भईया द्वारा सुमधुर भजन एवं भक्तिकर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी किए केशलोच </strong></p>
<p>दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नहीं रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केशलोच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमंे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोंच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है। जिसके प्रायश्चित स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हैं जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नहीं रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं।</p>
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		<title>आदर्श नगर में हुआ भक्तिमय मंडल विधान का पूजन: साधुओं की संयम साधना जारी </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 13:26:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>टोंक।</strong> नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। राजेश पंचोलिया, गजराज लोकेश, संजय संघी ने बताया कि सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। चढ़ाए जाने वाले अर्घ्य का मंत्रोच्चार आचार्य श्री एवं मुनि हितेंद्र सागर जी ने कर भगवान के गुणों का वर्णन किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए समाधिस्थ आचार्य श्री विद्या सागर जी के शिष्य क्षुल्लक श्री ध्यान सागर जी पधारे। श्री जी के दर्शन कर आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री शीतलमति जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम नियम संल्लेखना चल रही हैं।</p>
<p>आर्यिका श्री शीतल मति जी एकांतर आहार ले रही हैं। वहीं आर्यिका श्री वत्सल मति जी दो उपवास के बाद एक आहार की कठोर तप साधना कर रही हैं। आप मात्र जल, दूध और मनुक्का पानी बहुत ही अल्प मात्रा में ले रही हैं। सभी प्रकार के अन्न और 5 रसों का त्याग कर दिया हैं। ब्रह्मचारिणी विमला दीदी सलूंबर धरियावद आचार्य श्री धर्म सागर जी के समय से संघस्थ होकर आपने वर्ष 1997 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से भिंडर पंच कल्याणक में सीधे आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री वत्सल मति जी बनीं। 27 वर्षों में हजारों उपवास किए है। प्रातःकाल आचार्य श्री के सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया। आचार्य श्री भक्ति भाव नृत्य द्वारा भव्य पूजन किया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट का सौभाग्य का प्राप्त हुआ। श्री जी और आचार्य श्री की मंगल आरती का सौभाग्य केवल चंद, लोकेश (गजराज भैया), आशीष कुमार रक्षांश कुमार, अवि कुमार कलई वालों को प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति अंधकार करे: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मों के प्रतिफल के संबंध में विस्तार से बताया  </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 12:19:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। धर्मसभा में आचार्य श्री ने बताया कि संसारी प्राणी को दुःख और सुख मिलते हैं। तीर्थंकर भगवान ने भी सुख और दुख भोगे हैं। किए गए कार्यों के आधार पर ही सुख-दुःख और शुभ और अशुभ फल मिलते हैं। कर्म सभी के उदय में आते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चार प्रकार के ध्यान, चार प्रकार के पुरुषार्थ, दर्शन विधि पर सरल भाषा में उपदेश दिया। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया, समाज प्रवक्ता गजराज लोकेश, संजय संघी के अनुसार श्री पारसनाथ भगवान की पूर्व पर्याय मरुभूति और कमठकी पूर्व पर्याय के 10 भवों का वर्णन किया गया। कमठ ने मरुभूति पर उपसर्ग बैर कारण किया। जिसे मरुभूति के जीव ने क्षमा भाव सहित सहन किया। आर्त ध्यान कारण त्रियंच पर्याय मिलती हैं। मरूभूति हाथी के जीव ने मुनिराज के उपदेश से अणुव्रत धारण कर निर्दाेष पालन में अन्य जीवांे ने भी सहायता की। आचार्य श्री ने चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ की विवेचना में बताया कि अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति पूर्वक करना चाहिए। तभी सुख, शांति और पुण्य मिलता है। बिना धर्म पुरुषार्थ के मोक्ष प्राप्त नहीं होता हैं।</p>
<p><strong>सहस्त्रनाम विधान 28 को </strong></p>
<p>भगवान के दर्शन भक्ति उत्साह से ठीक उसी प्रकार करना चाहिए। जैसे आसमान में मेघो की गर्जना वर्षा से मयूर प्रसन्न होकर नृत्य करता है। धार्मिक कार्य भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन करने का अवसर पुण्य और सौभाग्य से मिलता है। शास्त्रों में बताया हैं कि मंदिर श्री जी के दर्शन की इच्छा होने से मंदिर में भगवान के विकल्प रहित दर्शन करने तक अनेकों उपवासों का पुण्य शुभ फल मिलता है। तप उपवासों से कर्मों की निर्जरा होती है। शाम को श्री जी और आचार्य श्री की आरती के बाद मुनि श्री हितेंद्रसागर जी द्वारा छहढाला की कक्षा ली जाती हैं। आचार्य श्री के सानिध्य मे आदर्श नगर में सहस्त्रनाम विधान 28 अक्टूबर दोपहर 1 बजे से होगा। आज सलूंबर नगर के सैकड़ों भक्तों ने आचार्य श्री के दर्शन किए।</p>
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