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	<title>Panchak &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जानिए किन कार्यों से बचना चाहिए पंचक में : जानिए पंचक का महत्व, सालभर कब से कब तक आयेंगे पंचक </title>
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		<pubDate>Fri, 03 May 2024 12:08:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा,शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है, नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को &#8216;पंचक&#8217; कहा जाता है। हर महीने में 27 दिनों के अंतराल पर पंचक नक्षत्र का चक्र बनता रहता है। चंद्रमा 27 दिनों में सभी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा,शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है, नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को &#8216;पंचक&#8217; कहा जाता है। हर महीने में 27 दिनों के अंतराल पर पंचक नक्षत्र का चक्र बनता रहता है। चंद्रमा 27 दिनों में सभी नक्षत्रों का भोग कर लेता है, एक राशि में चंद्रमा ढाई दिन और दो राशियों में चंद्रमा पांच दिन रहता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> पंचक क्या होते हैं, ये साल में कब आते हैं और इनका क्या महत्व है। ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा,शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है, नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को &#8216;पंचक&#8217; कहा जाता है।</p>
<p>हर महीने में 27 दिनों के अंतराल पर पंचक नक्षत्र का चक्र बनता रहता है। चंद्रमा 27 दिनों में सभी नक्षत्रों का भोग कर लेता है, एक राशि में चंद्रमा ढाई दिन और दो राशियों में चंद्रमा पांच दिन रहता है। इन पांच दिनों के दौरान चंद्रमा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है और इस कारण ये पांचों दिन पंचक कहलाते हैं।</p>
<p>पंचक 5 प्रकार के होते हैं। शास्त्रों में वार के हिसाब से पंचक के नाम का निर्धारण किया जाता है। हर पंचक का अलग-अलग अर्थ और प्रभाव है।</p>
<p><strong>किस वार को लगने पर क्या नाम होता है? :- </strong></p>
<p>रविवार &#8211; रोग पंचक</p>
<p>सोमवार &#8211; राज पंचक</p>
<p>मंगलवार &#8211; अग्नि पंचक</p>
<p>शुक्रवार &#8211; चोर पंचक</p>
<p>शनिवार &#8211; मृत्यु पंचक</p>
<p><strong>आगे कब-कब लगेंगे पंचक- </strong></p>
<p>मई में पंचक लगने का समय 2 मई, गुरुवार दोपहर 02:32 है और इसका समापन 6 मई, मंगलवार रात 05:43 मिनट पर हो जाएगा।</p>
<p>जून में पंचक की शुरुआत 26 तारीख, बुधवार सुबह 01:49 मिनट से होगी और पंचक का समापन 30 जून, रविवार सुबह 07:34 पर हो जाएगा।</p>
<p>जुलाई 23 जुलाई, मंगलवार की सुबह 09:20 पर एकबार फिर पंचक लग जाएंगे।</p>
<p>जुलाई में पंचक का अंत 29 जुलाई, शनिवार दोपहर 01:00 बजे हो जाएगा।</p>
<p>अगस्त के महीने में 19 अगस्त, सोमवार शाम 7:00 बजे पंचक लग जाएंगे और 23 अगस्त, शुक्रवार शाम 07:54 मिनट पर पंचक खत्म होंगे।</p>
<p>सितंबर 16 सितंबर, मंगलावर को शाम 05:44 मिनट पर पंचक लगेंगे और 20 सितंबर, शुक्रवार सुबह 05:15 मिनट पर पंचक खत्म होगा।</p>
<p>अक्टूबर में 13 अक्टूबर, रविवार दोपहर 3:44 मिनट पर पंचक शुरू होगा और 17 अक्टूबर, गुरुवार शाम 04:20 पर पंचक खत्म हो जाएगा।</p>
<p>नवंबर महीने में पंचक 9 नवंबर, शनिवार रात 11:27 मिनट पर लग जाएगा और 14 नवंबर, गुरुवार सुबह 03:11 मिनट पर खत्म होगा।</p>
<p>दिसंबर साल के अंत में 7 दिसंबर, शनिवार सुबह 05:07 पर पंचक लगेगा और इसका अंत 11 दिसंबर, बुधवार सुबह 11:48 पर हो जाएगा।</p>
<p><strong>पंचक के पांच नक्षत्र में कार्य प्रारम्भ करने से ये हानि होना संभव है।: &#8211; </strong></p>
<p>1.धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है।</p>
<p>2. शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना रहती है।</p>
<p>3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की संभावना रहती है।</p>
<p>4. उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है।</p>
<p>5. रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना रहती है।</p>
<p>पंचक में इन कार्यों को करने से बचना चाहिए</p>
<p>1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना या पलंग बनाना फर्नीचर लगाना।</p>
<p>2. मकान पर लकड़ी लोहे की छत डलवाना</p>
<p>3. दाह संस्कार (शव जलाना) में कुछ विशेष क्रिया करके ही करना।4. चारपाई बनवाना कंड़े , काष्ट घर लाकर इकट्ठा करना।</p>
<p>5. दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना।</p>
<p>6. अन्य कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य।</p>
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		<title>चंबल संभाग में 50 स्थानों पर लगाए जाएंगे शिक्षण शिविर : शिक्षण कार्यक्रम में संस्कार शिविरों का होगा आगाज : नवनीत जैन शास्त्री </title>
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		<pubDate>Fri, 03 May 2024 12:04:07 +0000</pubDate>
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<p><strong> ग्रीष्मकालीन अवकाश में धार्मिक शिक्षण प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से संस्कार प्रदान करते हुए संस्कारित किया जायेगा। शिविरों के क्षेत्रीय प्रभारी नवनीत जैन शास्त्री मुरैना ने बताया कि इन शिविरों के माध्यम से बुजुर्ग, युवा, बच्चों को धार्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है। साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति से परिचित कराया जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> मुरैना।</strong> ग्रीष्मकालीन अवकाश में धार्मिक शिक्षण प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से संस्कार प्रदान करते हुए संस्कारित किया जायेगा। शिविरों के क्षेत्रीय प्रभारी नवनीत जैन शास्त्री मुरैना ने बताया कि इन शिविरों के माध्यम से बुजुर्ग, युवा, बच्चों को धार्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है। साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति से परिचित कराया जाता है। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर द्वारा आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का वृहत् स्तर पर आयोजन परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महाराज के जीवन्त जीवन की फलश्रुति के रूप में विद्यागुरु उपकार महोत्सव के रूप में आयोजित किए जा रहे हैं।</p>
<p>आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं निर्यापक मुनिपुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज की पावन प्रेरणा से इन शिविरों आयोजन चम्बल संभाग के आसपास के 50 स्थानों पर आयोजित किए जाने हेतु श्री पार्श्वनाथ दि.जैन मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अनिल जैन प्राचार्य एवं मंत्री विनोद कुमार जैन (तार वाले), टिकटोली क्षेत्र के अध्यक्ष राजेन्द्र भण्डारी, क्षेत्रीय प्रभारी नवनीत जैन &#8216;शास्त्री&#8217; मुख्य संयोजक वीरेन्द्र कुमार जैन (बाबा) एवं संयोजक राजकुमार जैन वरैया, अजय कुमार जैन (गोसपुर वाले), डाॅ. मनोज कुमार जैन, सुरेशचन्द्र जैन, शुभम जैन (चीन्टू), अनिल नायक (गढ़ी वाले), विमल कुमार जैन, अनिरुद्ध कुमार जैन ने शिविर संबंधी नियमावली पर चर्चा की। साथ में शिविर आयोजन हेतु तिथि के निर्धारण संबंधी जानकारियां प्रदान कीं।</p>
<p>शिक्षण शिविरों का आयोजन 19 मई से 26 मई 2024 तक चलेगा। शिविर मुरैना, भिण्ड,ग्वालियर चम्बल संभाग के आसपास के समस्त स्थानों में लगाए जायेगे। जिनमें नवाचार्य श्री समयसागर जी व निर्यापक श्रमण श्री सुधासागर का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु समस्त मुरैना कमेटी एवं शिविर के मुख्य संयोजक व संयोजक क्षेत्रीय प्रभारी ने यह निर्णय एकमत से लिया गया।</p>
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		<title>चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : बताया भक्तामर के 25वें काव्य का महत्व      </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Aug 2023 13:34:22 +0000</pubDate>
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<p><strong> उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के पच्चीसवें काव्य का महत्व समझाते हुए बताया कि इस काव्य में मुनिवर ने कहा कि हे भगवन! केवलज्ञान होने से आप ही बुद्ध हो। सुख-शांति देने वाला होने से आप ही शंकर हो। सत्य पथ देने के कारण आप ही ब्रह्म हो। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डबरा।</strong> आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा गणाचार्य 108 श्री विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से किया गया। इसके बाद मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की। गुरुदेव ने भक्तामर स्तोत्र के पच्चीसवें काव्य का महत्व समझाते हुए बताया कि इस काव्य में मुनिवर ने कहा कि हे भगवन! केवलज्ञान होने से आप ही बुद्ध हो। सुख-शांति देने वाला होने से आप ही शंकर हो। सत्य पथ देने के कारण आप ही ब्रह्म हो। निर्मोह व परम अहिंसक होने से आप ही पुरुषोत्तम हो। आगम मुनियों के द्वारा जो कहा जाए, उसे आगम कहते हैं। उग्र तप किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या करके गुरुदेव ने बताया कि कठिन साधना करना, कठिन उपवास करना, कठिन तपस्या में लीन रहना, लगातार उपवास करना, सर्दी में हिमालय पर जाकर तप करना ही उग्र तप कहलाता है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य शिविर 6 को</strong></p>
<p>मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर मुनिराज की प्रेरणा से जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा 6 अगस्त को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक संस्कार वाटिका जवाहर गंज, डबरा में निशुल्क नेत्र परीक्षण एवं ऑपरेशन शिविर एवं दंत परीक्षण शिविर एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। जिसमें खून की जांच, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम, हीमोग्लोबिन 4 में से कोई एक निशुल्क जांच की जाएगी। रविवार को एसडीओपी विवेक शर्मा ने गुरुदेव को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। आरोग्यमय वर्षा योग समिति के महामंत्री अध्यक्ष एवं समिति द्वारा उनका सम्मान किया गया।</p>
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		<title>जीवन में गहरा असर डालते हैं पंचक : पंचक क्या हैं और क्यों लगते हैं -ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Aug 2023 13:25:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन के अनुसार यू तो पंचक हर माह पांच दिनों के लिए लगते है सोमवार,बुधवार,गुरुवार को प्रारंभ होने वाले पंचक शुभ फल देने वाले होते हैं। पंचक बार और नक्षत्र के अनुसार फल तो करते ही हैं व्यापारिक वस्तुओ को भी अच्छा खासा तेजी मंदी का अनुमान पूरे माह के लिए कराते [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन के अनुसार यू तो पंचक हर माह पांच दिनों के लिए लगते है सोमवार,बुधवार,गुरुवार को प्रारंभ होने वाले पंचक शुभ फल देने वाले होते हैं। पंचक बार और नक्षत्र के अनुसार फल तो करते ही हैं व्यापारिक वस्तुओ को भी अच्छा खासा तेजी मंदी का अनुमान पूरे माह के लिए कराते हैं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए विस्तार से इस मनोज नायक की इस विशेष आलेख में&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>ग्वालियर।</strong> यूं तो पंचक हर माह पांच दिनों के लिए लगते हैं। सोमवार,बुधवार,गुरुवार को प्रारंभ होने वाले पंचक शुभ फल देने वाले होते हैं। पंचक वार और नक्षत्र के अनुसार फल तो करते ही हैं, व्यापारिक वस्तुओं को भी अच्छा खासा तेजी मंदी का अनुमान पूरे माह के लिए कराते हैं। अगस्त माह में 2 अगस्त बुधवार की रात्रि 23:25 बजे से पंचक प्रारंभ होंगे जो 7 अगस्त रात्रि 01:43 बजे तक रहेंगे।</p>
<p><strong>आइए जानते हैं पंचक क्या हैं और क्यों लगते हैं?</strong></p>
<p>ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुम चंद जैन बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। अर्थात पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को &#8216;पंचक&#8217; कहा जाता है।</p>
<p>-रविवार के दिन पंचक प्रारंभ हो तो रोग पंचक कहलाते हैं। इन पंचकों के समय में कोई शुभ मांगलिक कार्य करें तो शारीरिक, मानसिक परेशानी होती है।</p>
<p>-सोमवार के दिन पंचक प्रारंभ हो तो उन्हें राज पंचक कहते हैं। इन पंचक के समय में सरकारी कार्य, नौकरी,संपत्ति से जुड़े कार्य करना चाहिए सफलता मिलेगी।</p>
<p>-मंगलवार के दिन पंचक प्रारंभ हो तो उन्हें अग्नि पंचक कहते हैं। इन पंचकों में निर्माण कार्य, मशीनरी कार्य,करने से दुर्घटना की संभावना रहती है। कोर्ट, कचहरी, विवाद के अहम फैसले करना चाहिए।</p>
<p>-शुक्रवार के दिन पंचक प्रारंभ हो तो उन्हें चोर पंचक कहते हैं। इन पंचकों में यात्रा करने में धन चोरी, जेब कटना, व्यापार आरंभ करने, लेन-देन में धन की भूल या चोरी का अंदेशा रहता है।</p>
<p>-शनिवार के दिन पंचक प्रारंभ हो तो उन्हें मृत्यु पंचक कहते हैं। इनमें निर्माण कार्य या बड़ा लंबे समय तक चलने वाला कार्य में दुर्घटनाएं या कष्ट रहने की आशंका रहती है।</p>
<p>बुधवार,गुरुवार और सोमवार को पंचक प्रारंभ हो तो शुभ कहलाते हैं।</p>
<p>पंचक के नक्षत्रों का प्रभाव:-</p>
<p>1. धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है।</p>
<p>2. शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की आशंका रहती है।</p>
<p>3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की आशंका रहती है।</p>
<p>4. उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है।</p>
<p>5. रेवती नक्षत्र में धन हानि की आशंका रहती है।</p>
<p>पंचकों में किन कार्यों को आरंभ करने से बचना चाहिए</p>
<p>1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना।</p>
<p>2. मकान पर छत डलवाना।</p>
<p>3. शव जलाना।</p>
<p>4. पलंग या चारपाई बनवाना और दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना। ये पांच कार्य करने से बचना चाहिए अगर करना ही आवश्यक हो तो किसी विद्वान, ज्योतिष से सलाह लेकर उनके परिहार करते हुए उन्होंने संपन्न करना चाहिए।</p>
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