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	<title>Palwal &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर पलवल में आध्यात्मिक उल्लास : तीर्थ परिसर में भक्तों का तांता लगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:41:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पलवल से पढ़िए, यह खबर&#8230; पलवल। जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">पलवल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल</strong>। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तीर्थ परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण भक्ति तथा धर्ममय भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दिया। जन्म कल्याणक के इस पावन अवसर पर तीर्थ परिसर में विराजमान भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का विधिवत मंगल अभिषेक श्रद्धालुओं द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न किया गया। शुद्ध जल और पवित्र द्रव्यों से सम्पन्न इस अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए मंगलमय प्रार्थनाएँ कीं। अभिषेक के समय मंदिर परिसर में भक्ति की अनूठी अनुभूति देखने को मिली और श्रद्धालुओं के हृदय भगवान के प्रति समर्पण और श्रद्धा से भर उठे।</p>
<p><strong>दिव्य शिक्षाएं मानव समाज को सत्य, अहिंसा, संयम की प्रेरणा </strong></p>
<p>अभिषेक के उपरांत भगवान आदिनाथ के चरणों में शांतिधारा का पावन अनुष्ठान भी अत्यंत विधिपूर्वक किया गया। शांतिधारा के माध्यम से समस्त विश्व में शांति, करुणा, सद्भाव और धर्म के प्रसार की मंगल कामना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान से प्रार्थना की कि उनकी दिव्य शिक्षाएं मानव समाज को सत्य, अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहें। जैन परंपरा के अनुसार भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) केवल जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के प्रथम प्रवर्तक भी माने जाते हैं। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि आदिनाथ भगवान ने उस समय मानव समाज को जीवन की मूलभूत व्यवस्थाएँ सिखाईं जब समाज असंगठित और अव्यवस्थित अवस्था में था। उन्होंने मानव को कृषि करना, व्यापार करना, लिपि और गणना का ज्ञान, कला और शिल्प की विधाएँ तथा सामाजिक जीवन की मर्यादाएं सिखाकर सभ्यता को संगठित रूप प्रदान किया।</p>
<p><strong>आध्यात्मिकता की नई ऊर्जा का संचार किया</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को यह भी सिखाया कि सच्चा सुख बाहरी भौतिक वैभव में नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक उन्नति में निहित है। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मकल्याण का महान संदेश देता है। यही कारण है कि जैन समाज में उनका जन्मकल्याणक अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज के इस पावन अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में सम्पन्न हुए अभिषेक और शांतिधारा कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के हृदय में धर्म, आस्था और आध्यात्मिकता की नई ऊर्जा का संचार किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में अहिंसा, सत्य, संयम तथा नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।</p>
<p><strong>संयम और करुणा के सिद्धांतों को अपनाया जाए</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ के जन्मकल्याणक का यह पावन पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि यदि मानव जीवन में धर्म, संयम और करुणा के सिद्धांतों को अपनाया जाए तो समाज में शांति, समरसता और सद्भाव की स्थापना संभव है। इसी संदेश के साथ जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम में मनाया गया यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।</p>
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		<title>बाबा क्षेत्रपाल न्याय और सत्य के देवता: जैन धर्म में उनकी भूमिका अग्रणी मानी जाती है </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 May 2025 12:57:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाबा क्षेत्रपाल जी को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है। जैन धर्म में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है, विशेषकर जब बात आती है तीर्थों की रक्षा, समाज की सुरक्षा और धर्म की मर्यादा की रक्षा करने की। बाबा क्षेत्रपाल जी के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु उनकी महिमा के अनेक चमत्कारिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बाबा क्षेत्रपाल जी को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है। जैन धर्म में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है, विशेषकर जब बात आती है तीर्थों की रक्षा, समाज की सुरक्षा और धर्म की मर्यादा की रक्षा करने की। बाबा क्षेत्रपाल जी के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु उनकी महिमा के अनेक चमत्कारिक अनुभवों को सुनाते हैं। <span style="color: #ff0000">पलवल से पढ़िए, बाबा क्षेत्रपाल जी के चमत्कारों और महिमा पर विस्तृत लेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल।</strong> बाबा क्षेत्रपाल जी को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है। जैन धर्म में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है, विशेषकर जब बात आती है तीर्थों की रक्षा, समाज की सुरक्षा और धर्म की मर्यादा की रक्षा करने की। बाबा क्षेत्रपाल जी के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु उनकी महिमा के अनेक चमत्कारिक अनुभवों को सुनाते हैं, जिनका प्रत्यक्ष प्रमाण जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल है। पलवल स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम में खनन कार्य के दौरान अनेक चमत्कारी घटनाएँ घटीं। जब इस भूमि में खुदाई की गई, तब वहाँ से केवल तीर्थंकरों और देवी पद्मावती माँ की ही नहीं, बल्कि बाबा क्षेत्रपाल जी की भी दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमाएँ प्राप्त हुईं। यह घटना स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान विशेष रूप से चमत्कारी और शक्तिशाली है।</p>
<p><strong>बाबा क्षेत्रपाल जी के चमत्कार</strong></p>
<p>1.सत्य और न्याय की रक्षा-</p>
<p>ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ बाबा क्षेत्रपाल जी की शरण में आने वालों को न्याय मिला। जिन लोगों के साथ अन्याय हुआ, जिन्होंने अपनी सच्चाई बाबा के सामने रखी, उनके मामले चमत्कारी रूप से सुलझे। जो लोग झूठ और छल करते थे, उनके झूठ खुद-ब-खुद उजागर हो गए।</p>
<p>2.भक्तों की सुरक्षा-</p>
<p>कई भक्त बताते हैं कि जब वे कठिन परिस्थितियों में फँसे, जब कोई रास्ता नज़र नहीं आया, तब बाबा की प्रार्थना करने से उन्हें आश्चर्यजनक मदद मिली। चाहे व्यापार में नुकसान हो, कानूनी विवाद हों या पारिवारिक संकट, बाबा के दरबार में आकर मार्गदर्शन माँगने पर अनेक भक्तों ने सकारात्मक परिणाम देखे हैं।</p>
<p>3.स्वप्न में दर्शन-</p>
<p>कई श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने बाबा क्षेत्रपाल जी को स्वप्न में देखा, जहाँ बाबा ने उन्हें किसी संकट का पूर्वाभास दिया या सही निर्णय लेने की प्रेरणा दी। कुछ लोगों ने स्वप्न में मिले संदेशों के आधार पर अपनी योजनाएँ बदलीं और विपत्ति से बच पाए।</p>
<p>4. तीर्थ की रक्षा-</p>
<p>पलवल स्थित तीर्थस्थल पर कई बार प्राकृतिक आपदाओं या अन्य संकटों का खतरा आया, परंतु बाबा क्षेत्रपाल जी की कृपा से तीर्थस्थल सुरक्षित रहा। स्थानीय लोगों और तीर्थ के संयोजकों का मानना है कि यह सब बाबा की दिव्य शक्ति का परिणाम है।</p>
<p><strong>बाबा के प्रति श्रद्धा-</strong></p>
<p>जैन समाज में बाबा क्षेत्रपाल जी को केवल एक रक्षक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक माना जाता है। लोग उनके दरबार में अपनी समस्याओं का समाधान खोजते हैं, और सच्चे मन से प्रार्थना करने पर उन्हें समाधान अवश्य मिलता है।</p>
<p><strong>श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल का विशेष महत्व</strong></p>
<p>संयोजक नितिन जैन के नेतृत्व में इस तीर्थस्थल का निरंतर विकास और संरक्षण किया जा रहा है। यह तीर्थ स्थल उन सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलना चाहते हैं। यहाँ नियमित पूजन, अनुष्ठान और भक्तों की सेवा के कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनमें हजारों लोग शामिल होते हैं।</p>
<p>निष्कर्ष- बाबा क्षेत्रपाल जी की महिमा अनंत है। उनकी कृपा से न केवल जैन समाज, बल्कि सभी धर्मों के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल इस चमत्कारिक शक्ति का जीवंत उदाहरण है। यह स्थान उन सभी के लिए खुला है, जो सच्चे मन से बाबा की शरण में आकर सत्य और न्याय की राह पर चलना चाहते हैं।</p>
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		<title>जैन समाज के चुनाव में विनोद जैन गुट सिरमौर: विजय जैन चुनाव जीते, समाजजनों ने दी बधाई </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vinod_jain_group_sirmour_in_jain_society_elections/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 May 2025 06:22:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज पलवल के अगले प्रधान पद के लिए चुनाव सर्वाेदय तीर्थ पलवल में संपन्न हुए। एक गुट की तरफ से पूर्व प्रधान राकेश जैन और दूसरे गुट की ओर से विजय जैन चुनाव मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी लेकिन, चुनावों में विजय जैन ने राकेश जैन को 69 वोटों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन समाज पलवल के अगले प्रधान पद के लिए चुनाव सर्वाेदय तीर्थ पलवल में संपन्न हुए। एक गुट की तरफ से पूर्व प्रधान राकेश जैन और दूसरे गुट की ओर से विजय जैन चुनाव मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी लेकिन, चुनावों में विजय जैन ने राकेश जैन को 69 वोटों से पराजित कर दिया। <span style="color: #ff0000">पलवल से पढ़िए, बलराम की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल।</strong> विनोद जैन और सालों से प्रधान रहे राकेश जैन की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके जैन समाज पलवल के अगले प्रधान पद के लिए चुनाव सर्वाेदय तीर्थ पलवल में संपन्न हुए। एक गुट की तरफ से पूर्व प्रधान राकेश जैन और दूसरे गुट की ओर से विजय जैन चुनाव मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी लेकिन, चुनावों में विजय जैन ने राकेश जैन को 69 वोटों से पराजित कर दिया। इस तरह विजय जैन अगले 2 साल के लिए जैन समाज के प्रधान चुने गए। उल्लेखनीय है कि राकेश जैन और विजय जैन पिछले दो महीने से अपने-अपने उम्मीदवारों के हक में बैठक कर रहे थे। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का भी सिलसिला चलता रहा। राकेश जैन ने पिछले 18 सालों के कार्यकाल के दौरान किए समाज भलाई के कार्यों का हवाला देते हुए समाज के लोगों से वोट मांगे लेकिन, समाज ने विजय जैन को भारी वोटों से विजय बना दिया।</p>
<p>चुनाव जीतने के बाद विनोद जैन और विजय जैन को उनके समर्थकों ने नोटों के हार पहनाकर कंधों पर उठा लिया। जीत का जश्न मनाते हुए समर्थकों ने खूब भंगड़ा नृत्य किया। इस मौके पर शीतल जैन, अन्नू जैन, विमल जैन, पदम जैन, अनुज जैन, अमित जैन, रॉबिन जैन, मोहित जैन, पारस जैन, संजय जैन, सुबोध जैन, चंद्र सैन जैन, अरुण जैन, राजेंद्र प्रसाद जैन, प्रमोद जैन, विजेंद्र जैन ने भी ढोल की थाप पर नाचते हुए जीत का जश्न मनाया। कुल 277वोटों में से 269 वोट डाले गए। नव निर्वाचित प्रधान विजय जैन को 169 और राकेश जैन को 100 वोट प्राप्त हुए। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 3 बजे तक हुई पोलिंग हुई। चुनाव अधिकारियों ने 69 वोटों से विजय जैन को विजई घोषित कर दिया।</p>
<p><strong>जीत के लिए समाज बधाई का पात्र: विनोद जैन</strong></p>
<p>व्यापारी नेता और कई सालों से समाज की सेवा करते आ रहे विनोद जैन ने कहा कि जीत के लिए पूरा जैन समाज बधाई का हकदार है। समाज ने विकास और ईमानदारी पर मोहर लगाई है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि समाज एक परिवार की तरह है। इसकी बागडोर किसी के हाथों में सौंपने के लिए चुनाव नहीं करवाए जाने चाहिए लेकिन, समाज के कुछ लोग चुनाव करवाने के पक्ष में ही थे। उन्होंने नवनियुक्त प्रधान विजय जैन को बधाई देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>पुलिस प्रशासन की भूमिका रही अहम</strong></p>
<p>जैन समाज के चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न करवाने में पुलिस प्रशासन की भूमिका भी अहम रही। पोलिंग के दौरान पुलिस ने पूरी सख्ती की हुई थी। पुलिस कर्मचारी बार-बार मौके पर आते जाते रहे। चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हुआ।</p>
<p><strong>एक और डाला जा रहा था भंगड़ा, दूसरी ओर छाई मायूसी</strong></p>
<p>चुनाव प्रक्रिया के चलते जैन मंदिर के बाहर दिनभर दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। विजय जैन के चुनाव जीतने की सूचना मिलते ही उनके समर्थकों ने बड़े जोश से ढोल की थाप पर भंगड़ा डालना शुरू कर दिया जबकि, सामने खड़े दूसरे गुट के लोगों में मायूसी छा गई।</p>
<p><strong>लोगों की उम्मीदों पर उतरूंगा खरा: विजय जैन</strong></p>
<p>जैन समाज के नवनियुक्त प्रधान विजय जैन ने कहा कि समाज के लोगों ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उस पर खरा उतरने और सब को साथ लेकर चलने का प्रयास करेंगे तथा चलती आ रही विकास की कड़ी को पूर्ववत बरकरार रखेंगे। वह जल्द ही अपनी वर्किंग कमेटी और नॉमिनेट सदस्यों की घोषणा करेंगे। समाज के एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास करेंगे।</p>
<p><strong>समाज का फैसला सर्वमान्य: राकेश जैन</strong></p>
<p>विजय जैन से 69 वोटों से पीछे रहे विनोद जैन ने कहा कि समाज का फैसला सर्वमान्य है। चुनाव के बाद उन्होंने विजय जैन और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल के संयोजक नितिन जैन ने इस जीत को पूरी जैन समाज की जीत बताया। उन्होंने पलवल के जैन समाज का आभार व्यक्त किया कि समाज ने 18 वर्षों के कुशासन का अंत कर एक नई शुरुआत की है। नितिन जैन ने समाज से आग्रह किया कि अब सभी एकजुट होकर समाज की सेवा में आगे आएं और अपने गौरव, पलवल जैन समाज की शान जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, जहां से जिनेंद्र देव और शासन रक्षक देवी-देवताओं की अनेक प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। उसके संरक्षण और विकास के लिए सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विजय जैन की जीत बाबा क्षेत्रपाल के आशीर्वाद का परिणाम है।</p>
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		<title>श्री पार्श्व पद्मावती धाम में भगवान आदिनाथ की जयंती 23 मार्च को मनाई जाएगीः प्रतिमा संकट हरण बाबा के नाम से प्रसिद्ध  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_birth_anniversary_of_lord_adinath_will_be_celebrated_on_march_23_at_shri_parsva_padmavati_dham/</link>
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		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 09:10:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम में भगवान आदिनाथ की जयंती मनाई जाएगी। जयंती के मौके पर सुबह तीर्थ क्षेत्र में प्राचीन आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक पूजन किया जाएगा। पढ़िए पलवल की यह पूरी खबर&#8230; पलवल। हरियाणा के पलवल जिले में स्थित प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम में भगवान आदिनाथ की जयंती मनाई जाएगी। जयंती के मौके पर सुबह तीर्थ क्षेत्र में प्राचीन आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक पूजन किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पलवल की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल</strong>। हरियाणा के पलवल जिले में स्थित प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम में पहले तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की जयंती 23 मार्च को मनाई जाएगी। तीर्थ के संयोजक नितिन जैन ने आज जारी विज्ञप्ति में बताया कि जयंती के मौके पर सुबह तीर्थ क्षेत्र में स्थित मूल नायक लगभग ढाई हजार वर्ष प्राचीन आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक पूजन किया जाएगा।</p>
<p><strong>संकट हरण बाबा के नाम से प्रसिद्ध </strong></p>
<p>संकट हरण बाबा के नाम से प्रसिद्ध आदिनाथ भगवान की इस प्रतिमा के समक्ष इस दिन विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले धर्मावलंबी विधान और पूजा भी करेंगे। उन्होंने बताया कि कमेटी की ओर से जयंती के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना के मद्देनजर इंतजाम भी किए गए हैं।</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया गयाः तीर्थंकरों का पुनः संसार में आगमन नहीं होता </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Jan 2025 10:40:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पुराना जी.टी.रोड स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में श्री आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। सभी तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं। इनमें अंतिम कल्याणक मोक्ष कल्याणक होता है। याद रहें कि मोक्ष कल्याणक के माध्यम से भगवान आदिनाथ ने हजारों वर्ष पूर्व आज ही के दिन मोक्ष पद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पुराना जी.टी.रोड स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में श्री आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। सभी तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं। इनमें अंतिम कल्याणक मोक्ष कल्याणक होता है। याद रहें कि मोक्ष कल्याणक के माध्यम से भगवान आदिनाथ ने हजारों वर्ष पूर्व आज ही के दिन मोक्ष पद प्राप्त किया था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पलवल से नितिन जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल (हरियाणा)</strong> पुराना जी.टी.रोड स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में श्री आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का अभिषेक, परिमार्जन करने का सौभाग्य नितिन जैन, अमन जैन व अरिहंत जैन को मिला। शांतिधारा करने का सौभाग्य गोपीचंद जैन आगरा निवासी को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं </strong></p>
<p>श्रीजी की पूजा क्षेत्र के व्यवस्थापक नितिन जैन के सानिध्य में की गई। पूजन के मध्य में निर्वाण कांड पढ़कर निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया। तीर्थ के अध्यक्ष विनोद जैन ने बताया कि आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक शाश्वत चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। सभी तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं। इनमें अंतिम कल्याणक मोक्ष कल्याणक होता है। मोक्ष कल्याणक में तीर्थंकर शरीर, कर्म आदि से मुक्त होकर सिद्ध हो जाते हैं।</p>
<p><strong>तीर्थंकरों का पुनः संसार में आगमन नहीं होता</strong></p>
<p>तीर्थंकरों का पुनः संसार में आवागमन नहीं होता है। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन के लिए संसार से मुक्ति सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि होती है। मोक्ष कल्याणक के माध्यम से भगवान आदिनाथ ने हजारों वर्ष पूर्व आज ही के दिन मोक्ष पद प्राप्त किया था। सायंकालीन सभा में भक्तिमय आरती के साथ 48 दीपकों द्वारा भक्तामर दीप अर्चना की गई। इस अवसर पर शीतल जैन, अनुज जैन, मेघा जैन आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>उत्तम त्याग धर्म की पूजा की : चिंतामणि पार्श्व नाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई  </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Sep 2024 14:02:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा की। इस अवसर पर वात्सल्य मूर्ति दिव्य तपस्वी आचार्य श्री सुंदर सागर जी के आशीर्वाद से चिंतामणि पार्श्व नाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई। पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230; पलवल। श्री दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा की। इस अवसर पर वात्सल्य मूर्ति दिव्य तपस्वी आचार्य श्री सुंदर सागर जी के आशीर्वाद से चिंतामणि पार्श्व नाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल।</strong> श्री दिगम्बर अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा की। इस अवसर पर वात्सल्य मूर्ति दिव्य तपस्वी आचार्य श्री सुंदर सागर जी के आशीर्वाद से चिंतामणि पार्श्व नाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई।</p>
<p>इस अवसर पर नितिन जैन, अनुज जैन, मेघा जैन, अमन जैन और अरिहंत जैन ने सपरिवार भक्तिपूर्वक अभिषेक व पूजन किया। शासन रक्षक देवी पद्मावती जी का शृंगार किया गया व शासन रक्षक देव श्री क्षेत्रपाल जी को चोला चढ़ाया गया। इस पावन अवसर पर क्षेत्र के व्यस्थापक नितिन जैन ने बताया कि त्याग का अर्थ केवल दान करना नहीं है। दान और त्याग में बहुत बड़ा अंतर है।</p>
<p>अवगुणों की छोड़ दें, उन्हें ग्रहण नहीं करें, यही त्याग है। त्याग की सार्थकता तभी है जब वह किसी लोभ और अहंकार के बिना किया जाए। क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन ने उत्तम त्याग धर्म की चर्चा करते हुए कहा कि त्याग जीवन को महान बनाता है। मनुष्य के अंदर क्रोध, मान, माया, लोभ, जैसे विकार को निकालना ही त्याग है।</p>
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		<title>उत्तम शौच धर्म पर किया भगवान का अभिषेक : संतोष को धारण करने वाला पाता है परम शांति </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Sep 2024 08:33:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिव्य तपस्वी राष्ट्र संत वात्सल्य सम्राट पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से पर भूगर्भ से अवतरित श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई तथा उत्तम शौच धर्म की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिव्य तपस्वी राष्ट्र संत वात्सल्य सम्राट पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से पर भूगर्भ से अवतरित श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई तथा उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल।</strong> दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिव्य तपस्वी राष्ट्र संत वात्सल्य सम्राट पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से पर भूगर्भ से अवतरित श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई तथा उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई। इस पर्व के विषय में श्री पार्श्व पद्मावती धाम के व्यस्थापक नितिन जैन ने बताया&#8230;</p>
<p><strong>उत्तम शौच लोभ परिहारी, संतोषी गुण रतन भंडारी।&#8217;</strong></p>
<p><strong>अर्थात</strong></p>
<p>जिस व्यक्ति ने अपने मन को निर्लोभी बना लिया है, संतोष धारण कर लिया है, उसका जीवन परम शांति को उपलब्ध हो जाता है</p>
<p>जो व्यक्ति उत्तम शौच धर्म को धारण करता है उसकी आत्मा लोभ ओर लालच जैसे मल का त्याग कर परम् उज्ज्वलता को प्राप्त होती है</p>
<p>उस व्यक्ति के मन में संतोष गुण तथा अनेक गुण रत्नों के भंडार प्राप्त होते है, उसका जीवन परम शांति को उपलव्ध होता है</p>
<p>आज अपने मन में संतोष गुण को धारण कर लोभ लालच का त्याग,लोभ कर के पर भी पुण्यहीन मनुष्य को धन की प्राप्तिनाही होती और लोभ नही करने पर भी पुण्यशाली को जगत की सारी संपदा प्राप्त हो जाती है अतः धन का लोभ धनलाभ में निमित्त नही है धनलाभ में पुण्य निमित्त है।</p>
<p>कौरवो ने संपूर्ण राज्य चाहा पर हैं होने से प्राप्त नही हुआ और पांडवों का पुण्य परवल होने से नही चाहते हुए भी सब कुछ प्राप्त होता रहा। राम जंगल मे भी रहे वहां भी पुन्ययोग से पुण्य के साधन मिलते रहे पर रावण को सोने की लंका में भी प्रतिकूलता बानी रही आचार्य भगवन ने कहा है कि संतोष रूपी निर्मल जल जो तीव्र लोभ रूप मलपुंज को धोता है तथा भोजन की गृद्धता से रहित है उसको विमालता रूप शौच धर्म होता है दशलक्षण पूजा में लिखा है</p>
<p>धरि ह्रदये संतोष करहु तपस्या देह सो।</p>
<p>सोच सदा निर्दोष धर्म बड़ो संसार मे</p>
<p>सम्यकदृष्टि जीव हमेशा धन नही धर्म की ओर दृष्टि रखता है संसार मे धनवान बड़ा नही धर्मवान बड़ा है और इसलिए धबान कि नही धर्मात्मा की पूजा होती है</p>
<p>पूज्यपाद स्वामी ने सर्वार्ध्सिद्दी में लिखा है</p>
<p><strong>शुचेभावः शौचं</strong></p>
<p>शुचिता का भाव ही शौच धर्म है अर्थात मन, वचन ,काय में शुद्धता आना ही शौच धर्म है।</p>
<p><strong>समयसार में कुन्दकुन्दस्वामी ने कहा</strong></p>
<p>ज्ञानी जीव मैन को अपवित्र बनाने बाले काषायिक भावो को जानते ही उसे दुःख का मूल कारण मानकर उससे निर्वृत्ति ले लेता है वह तत्क्षण अपनी आत्मा को परिमार्जन कर शौच धर्म का स्वामी बन जाता है।</p>
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		<title>हमारे जीवन में मृदुता का बहुत ही महत्व : दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन की गई उत्तम मार्दव धर्म की पूजा  </title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2024 12:33:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में आज दिव्य तपस्वी, वात्सल्य सम्राट,राष्ट्र संत,पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शंतिधारा की गई और उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; पलवल। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में आज दिव्य तपस्वी, वात्सल्य सम्राट,राष्ट्र संत,पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शंतिधारा की गई और उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>पलवल।</strong> श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में आज दिव्य तपस्वी, वात्सल्य सम्राट,राष्ट्र संत,पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शंतिधारा की गई और उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। इस अवसर पर श्री पार्श्व पद्मावती धाम के अध्यक्ष विनोद जैन ने उत्तम मार्दव धर्म के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि व्यवहार में विनम्रता लाता है उत्तम मार्दव धर्म। उत्तम क्षमा धर्म के बाद, पर्युषण के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर तीर्थ कमेटी के ट्रस्टी शीतल जैन ने कहा कि हमारे जीवन में मृदुता का बहुत ही महत्व है, पर हम सभी जाति, कुल, रूप, ज्ञान, तप, वैभव, प्रभुत्व और ऐश्वर्या आदि आठ प्रकार के मद, घमंड करके अकड़ते हैं। मैं ऊंची जाति का हूं, मैं ऊंचे कुल का हूं, मेरा रूप अति सुंदर है, मैं वैभवशाली हूं आदि सोच कर अकड़ते हैं। पर अकड़ करने वाले की गति खराब होती है। जिस प्रकार आंधी आने पर बड़े-बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं। पर बांस का पेड़ जो आंधी आने पर झुक जाता है, उस पर आंधी का कोई असर नहीं होता, फिर से खड़ा हो जाता है।</p>
<p>इसी प्रकार हम जीवन में नम्र बने, झुकना सीखेंगे, तो बड़ी से बड़ी बाधाएं कुछ नहीं बिगाड़ सकती। मार्दव धर्म हमें नम्र बनाती है। इस अवसर पर विनोद जैन, शीतल जैन, अनुज जैन, मेघा जैन, नितिन जैन, अमन जैन और अरिहंत जैन आदि उपस्थित रहे</p>
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		<title> क्रोध ना आना उत्तम क्षमा : भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया </title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2024 07:30:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महापर्व पर्युषण के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस दौरान अनुयायियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भूगर्भ से अवतरित चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया। पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230; पलवल। महापर्व पर्युषण के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस दौरान अनुयायियों ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महापर्व पर्युषण के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस दौरान अनुयायियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भूगर्भ से अवतरित चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>पलवल।</strong> महापर्व पर्युषण के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस दौरान अनुयायियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भूगर्भ से अवतरित चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया। इस अवसर पर शासन रक्षक देवी पद्मावती जी और क्षेत्रपाल बाबा का चोला भी चढ़ाया गया । श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में दिव्य तपस्वी वात्सल्य सम्राट राष्ट्र संत, पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य भगवंत श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से सभी धर्मप्रेमी बंधुओं बड़े ही धूमधाम के साथ प्रक्षाल व भक्ति के साथ पूजा आराधना की। इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र के व्यस्थापक नितिन जैन ने कहा कि प्रतिकूल निमित्त मिलने पर प्रतिकार की सामर्थ्य होते हुए भी क्रोध ना आना उत्तम क्षमा है।</p>
<p>क्षमा वीरस्य भूषणन अर्थात् क्षमा धर्म वीर पुरुष का भूषण है, जिनके पास क्षमारूपी शास्त्र है, उनका शत्रु क्या कर सकता है। इससे दुश्मन को जीतने में देर नहीं लगती और क्षमावान् हमेशा सुखी रहता है। क्षमा वाले पुरुष का संसार में कोई भी शत्रु नहीं है। क्रोधी मनुष्य पर कोई भी विश्वास नहीं करता।</p>
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