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	<title>Nirvana Utsav &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Nirvana Utsav &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रसंगवश: भगवान महावीर का निर्वाणोत्सव : जिन्होंने देह छोड़ी, पर दिशा छोड़ गए </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 09:45:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महवीर के निर्वाणोत्सव पर सकल जगत में भक्ति, श्रद्धा और उनकी दिव्यता को नमन करने की धार्मिक क्रियाएं कर उनके आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात कर जैन धर्म की धर्म ध्वजा को उठाकर उत्थान के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है। इसी क्रम में आज पढ़िए, प्रो.आरके जैन अरिजीत की कलम से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान महवीर के निर्वाणोत्सव पर सकल जगत में भक्ति, श्रद्धा और उनकी दिव्यता को नमन करने की धार्मिक क्रियाएं कर उनके आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात कर जैन धर्म की धर्म ध्वजा को उठाकर उत्थान के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है। <span style="color: #ff0000">इसी क्रम में आज पढ़िए, प्रो.आरके जैन अरिजीत की कलम से यह आलेख।</span></strong></p>
<hr />
<p>कार्तिक अमावस्या की उस गहन, रहस्यमयी रात्रि में, जब ब्रह्मांड अंधकार की गहरी चादर में लिपटा था, पावापुरी की पवित्र धरती पर एक ऐसी अलौकिक ज्योति प्रज्वलित हुई, जो युगों तक मानवता के हृदय को प्रदीप्त करेगी। यह थी भगवान महावीर की अमर आत्मा की अनुपम ज्योति, जिसने नश्वर देह का त्याग कर अनंत शांति, परम ज्ञान और मोक्ष के शिखर को स्पर्श किया। “महावीर निर्वाणोत्सव” न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि आत्म-जागरण का वह महापर्व है, जो हमें आत्मशुद्धि, आत्मविजय और करुणा के सनातन मार्ग पर प्रेरित करता है।</p>
<p>पावापुरी की पवित्र भूमि पर, जब भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया, निर्वाण के बाद उनके शिष्यों ने और देवताओं ने उनकी याद में अंधकार को चीरते हुए असंख्य दीप प्रज्वलित किए। यह अमर परंपरा आज दीपावली के रूप में चमकती है, जो न केवल बाहरी जगमगाहट का प्रतीक है, बल्कि हमारे अंतर्मन के अज्ञान, क्रोध और लोभ को भस्म कर आत्मिक ज्योति को प्रदीप्त करने का प्रेरक संदेश देती है। जैन ग्रंथों में वर्णित है कि उसी पावन रात्रि को उनके परम शिष्य गौतम स्वामी ने केवल ज्ञान की अनुपम प्राप्ति की, जो इस पर्व को गुरु-शिष्य के अटल आध्यात्मिक बंधन और ज्ञान की सर्वोच्च जयघोष का प्रतीक बनाता है। निर्वाणोत्सव हमें यह गहन सत्य सिखाता है कि मृत्यु कोई अंत नहीं, अपितु चेतना के परम शिखर का साक्षात्कार है—वह अवस्था, जहाँ आत्मा समस्त कर्मों के बंधन तोड़कर अनंत शांति और आनंद में समाहित हो जाती है।</p>
<p>भगवान महावीर का जीवन त्याग, करुणा और अटल आत्मबल की एक ऐसी अमर गाथा है, जो युगों-युगों तक प्रेरणा देती रहेगी। 599 ईसा पूर्व वैशाली के राजसी कुल में जन्मे वर्धमान ने बाल्यकाल से ही वैराग्य और करुणा के बीज अंकुरित किए। मात्र तीस वर्ष की आयु में उन्होंने राजमहलों का वैभव तजकर साधना का कठोर पथ अपनाया। बारह वर्षों की तीव्र तपस्या, मौन और अडिग आत्म-संयम के पश्चात उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई—वह ज्ञान, जिसने संसार के दुखों और कर्म बंधनों की गहनता को उजागर किया। उनका अमर उपदेश, “जो अपने मन को जीत लेता है, वही सच्चा विजेता है,” आज भी हर हृदय में आत्म-जय का संदेश गूँजता है। “जीवो जीवस्य जीवति” जैन धर्म का एक सूत्र है, जो सभी जीवों के प्रति अहिंसा और करुणा का अटूट मार्ग प्रशस्त करता है। महावीर का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण, शुद्ध आचरण और अंतर्मन की खोज में निहित है।</p>
<p>निर्वाणोत्सव केवल पूजा, दीपदान या अनुष्ठानों का उत्सव नहीं, अपितु आत्म-चिंतन का वह पवित्र क्षण है, जो हमें अपनी आत्मा की गहराइयों में झाँकने का आह्वान करता है। प्रत्येक प्रज्वलित दीपक केवल मिट्टी का दीया नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन के अंधकार—अज्ञान, क्रोध और लोभ—को भस्म करने का प्रतीक है। आज के युग में, जब भौतिकवाद, लालसा और अंतहीन प्रतिस्पर्धा ने मानव जीवन को जकड़ लिया है, यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा सुख क्षणिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और संतुलन में निहित है। महावीर का शाश्वत संदेश हमें स्मरण कराता है कि जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष है—वह अवस्था, जो सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य के पथ पर चलकर ही प्राप्त की जा सकती है। यह उत्सव हमें न केवल दीप जलाने, बल्कि अपने भीतर के प्रकाश को प्रज्वलित करने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>निर्वाणोत्सव का एक अनूठा पहलू इसका पर्यावरण के प्रति गहरा संदेश है। जैन धर्म का अहिंसा सिद्धांत केवल मानवों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति और समस्त जीवों के प्रति करुणा का जीवंत दर्शन है। आज, जब जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव-विविधता का ह्रास विश्व के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ बन चुके हैं, भगवान महावीर का संदेश पर्यावरण संरक्षण की प्रबल प्रेरणा देता है। दीपावली में पटाखों के बजाय मिट्टी के दीपकों की कोमल ज्योति, ऊर्जा संरक्षण और न्यूनतम कचरे का संकल्प इस पर्व को प्रकृति के प्रति समर्पित बनाता है। यह हमें सिखाता है कि हमारी छोटी-छोटी आदतें जैसे बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग, पुनर्चक्रण, या प्रकृति के प्रति जागरूकता न केवल हमारी जिम्मेदारी को रेखांकित करती हैं, बल्कि धरती के भविष्य को संवारने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। निर्वाणोत्सव का दिन जैन समुदाय के लिए आत्मिक उत्थान और भक्ति का पवित्र अवसर है। गौतम स्वामी के केवल्य ज्ञान की प्राप्ति की स्मृति इस पर्व को और भी गहन बनाती है, जो हमें सिखाती है कि सच्चा ज्ञान वही है, जो अहंकार और बंधनों को भस्म कर आत्मा को मुक्ति की ओर ले जाए।</p>
<p>भगवान महावीर के सिद्धांत आज के युग की जटिल समस्याओं का सशक्त समाधान प्रस्तुत करते हैं। “अहिंसा परमो धर्मः” केवल शारीरिक हिंसा से परहेज का आदेश नहीं, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवन दर्शन है, जो मानसिक और भावनात्मक हिंसा—क्रोध, घृणा और भेदभाव—से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। सत्य का सिद्धांत हमें न केवल सत्य बोलने, बल्कि सत्य को जीने की प्रेरणा देता है—एक ऐसी आवश्यकता, जो आज के दुष्प्रचार और असत्य के दौर में और भी प्रासंगिक है। अपरिग्रह का सिद्धांत हमें भौतिक लालसाओं से मुक्त कर सादगी और संतोष की ओर ले जाता है, जो आत्मिक शांति का आधार है। भूखे को अन्न देना, दुखी को सांत्वना प्रदान करना, या क्रोध को मौन में परिवर्तित करना—ये छोटे-छोटे कार्य ही वर्तमान युग का सच्चा तप हैं। यही महावीर का मार्ग है, जो न केवल व्यक्तिगत जीवन को उन्नत करता है, बल्कि समाज और विश्व को शांति, समरसता और सकारात्मकता की नई दिशा प्रदान करता है।</p>
<p>निर्वाणोत्सव का संदेश एक वैश्विक पुकार है, जो केवल जैन समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस हृदय तक पहुँचता है, जो जीवन में शांति, सार्थकता और सत्य की खोज में है। आज, जब विश्व युद्ध, हिंसा और असमानता की आग में जल रहा है, भगवान महावीर का अमर संदेश—“जियो और जीने दो”—एक समावेशी, शांतिपूर्ण और करुणामय समाज की नींव रखता है। यह हमें सिखाता है कि प्रत्येक जीव की आत्मा एक समान पवित्र है, और हर प्राणी के प्रति सम्मान, करुणा और सहानुभूति ही सच्चा मानव धर्म है। यह पर्व हमें न केवल आत्मिक जागृति की ओर प्रेरित करता है, बल्कि विश्व को एकता और शांति के सूत्र में बाँधने का सशक्त आह्वान करता है।</p>
<p>जब निर्वाणोत्सव पर हम दीप प्रज्वलित करते हैं, तो यह केवल परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन और नवीकरण का पवित्र क्षण है। प्रत्येक दीपक एक गहन संदेश देता है—“अंधकार कितना भी प्रबल हो, एक छोटी सी ज्योति उसे चीर सकती है।” आइए, इस निर्वाणोत्सव पर हम दृढ़ संकल्प लें कि हम अपने अंतर्मन में अहिंसा, सत्य और करुणा की ज्योति प्रज्वलित करेंगे। यह प्रकाश न केवल हमारे जीवन को आलोकित करेगा, बल्कि समाज को भी शांति, समरसता और सकारात्मकता की ओर ले जाएगा। भगवान महावीर का निर्वाण हमें यह सत्य सिखाता है कि विश्व को बदलने की शुरुआत स्वयं से होती है। जो अपने हृदय के अंधेरे को पहचान लेता है, वही उसमें छिपे अनंत प्रकाश को जगा सकता है। यही वह आत्मदीप है, जो आज भी मानवता को सत्य और शांति के पथ पर मार्गदर्शन दे रहा है।</p>
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		<title>आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज की स्मृति में होगा भारत सरकार द्वारा डाक टिकट विमोचन समारोह : हंबुजा जैन मठ, हुंचा में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियां होंगी उपस्थित </title>
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		<pubDate>Tue, 12 Nov 2024 09:06:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत सरकार के संचार मंत्रालय और भारतीय डाक सेवा की ओर से एक विशेष अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक डाक टिकट विमोचन समारोह हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में 13 नवंबरको आयोजित किया जाएगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; हुंचा। भारत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत सरकार के संचार मंत्रालय और भारतीय डाक सेवा की ओर से एक विशेष अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक डाक टिकट विमोचन समारोह हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में 13 नवंबरको आयोजित किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हुंचा।</strong> भारत सरकार के संचार मंत्रालय और भारतीय डाक सेवा की ओर से एक विशेष अवसर पर आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक डाक टिकट विमोचन समारोह हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में 13 नवंबरको आयोजित किया जाएगा।</p>
<p><strong>मुख्य अतिथि और सम्माननीय हस्तियां</strong></p>
<p>इस भव्य समारोह में विभिन्न प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहेंगी। समारोह के मुख्य अतिथि प्रहलाद जोशी, केंद्रीय मंत्री, नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार होंगे। इसके अतिरिक्त, समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में मदू बंगारप्पा, कर्नाटका सरकार के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री, डी. सुधाकर, कर्नाटका सरकार के योजना, कार्यक्रम समन्वय और संख्यात्मक विभाग के कैबिनेट मंत्री, बी.वाई. राघवेंद्र, और अरगा ज्ञानेंद्र, सांसद, शिवमोगा, कर्नाटक भी उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>समारोह के विशेष अतिथि के तौर पर डी. सुरेंद्र कुमार, धर्मस्थला, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जैन मिलन भी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।</p>
<p><strong>स्मारक डाक टिकट का विमोचन  </strong></p>
<p>इस आयोजन में आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के योगदान और उनकी आध्यात्मिक धरोहर को सम्मानित करते हुए भारतीय डाक सेवा द्वारा एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया जाएगा। डाक टिकट का विमोचन श्री एस. राजेंद्र कुमार, कर्नाटका सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल, द्वारा किया जाएगा।</p>
<p><strong>समारोह का समय और स्थान  </strong></p>
<p>यह विशेष कार्यक्रम 13 नवंबर 2024, बुधवार को दोपहर 2:00 बजे से हंबुजा जैन मठ, हुंचा, शिवमोगा, कर्नाटका में आयोजित होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में धार्मिक और सामाजिक कार्यकर्ता तथा स्थानीय निवासी भाग लेंगे। समारोह के दौरान, आचार्य श्री शांतिसागर मुनि महाराज के योगदान और उनकी धार्मिक शिक्षाओं पर प्रकाश डाला जाएगा।</p>
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		<title>अहंकार रहित, सादगी पसंद और विनम्र व्यक्ति : दो हजार लोगों की उपस्थिति में एम.के. जैन का अमृत महोत्सव संपन्न </title>
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		<pubDate>Sun, 10 Nov 2024 11:26:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के परम संरक्षक एम.के. जैन का 75 वर्ष की आयु पूर्णता पर परिवार द्वारा निर्वाणा रिसॉर्ट में आयोजित अमृत महोत्सव सानंद संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं, मित्रों, शुभचिंतकों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के परम संरक्षक एम.के. जैन का 75 वर्ष की आयु पूर्णता पर परिवार द्वारा निर्वाणा रिसॉर्ट में आयोजित अमृत महोत्सव सानंद संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं, मित्रों, शुभचिंतकों और समाजजनों ने जैन का माला, शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के परम संरक्षक एम.के. जैन का 75 वर्ष की आयु पूर्णता पर परिवार द्वारा निर्वाणा रिसॉर्ट में आयोजित अमृत महोत्सव सानंद संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थाओं, मित्रों, शुभचिंतकों और समाजजनों ने जैन का माला, शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र देकर सम्मान किया।</p>
<p>समारोह में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, पूर्व विधायक संजय शुक्ला सहित दिगंबर जैन समाज के भरत मोदी, सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, महामंत्री सुशील पांड्या, जैन समाज के राष्ट्रीय नेता हंसमुख गांधी, वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन, नरेंद्र जैन (पप्पाजी), राजीव जैन (बंटी भैया), पुलक चेतना मंच के वरिष्ठ प्रदीप बडजात्या, शिक्षाविद स्वप्निल कोठारी, छत्रपति नगर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, कॉलोनाइजर रमेश जैन, नवीन आनंद गोधा, धर्मेंद्र पाटनी, संजय अहिंसा, अजय मिंटा और अन्य समाज श्रेष्ठि उपस्थित थे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69543" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0007-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े</strong></p>
<p>समारोह के दौरान धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने उपस्थित समाजजनों से एम.के. जैन के व्यक्तित्व पर विचार मांगे। सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी और महामंत्री सुशील पांड्या, अंजय मिंटा और शेखर छाबड़ा ने कहा कि जैन साहब दिखने में साधारण हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व असाधारण है और धर्म समाज के प्रति उनका समर्पण अद्वितीय है। बीड़ी वाला परिवार के वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र जैन (पप्पाजी) और राजीव जैन (बंटी भैया) ने जैन को समाज हित चिंतक बताया और कहा कि इस उम्र में भी वे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, जो उनकी समाज सेवा के प्रति सक्रियता को दर्शाता है। समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि जैन लक्ष्मी पुत्र होने के बावजूद अहंकार रहित, सादगी पसंद और विनम्र व्यक्ति हैं, जिनके व्यक्तित्व में अपनों से हंसना और परायों में अपनापन बोने की विशेषता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69544" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006.jpg" alt="" width="574" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006.jpg 574w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241110-WA0006-459x1024.jpg 459w" sizes="(max-width: 574px) 100vw, 574px" />पुलक चेतना मंच के प्रमुख प्रदीप बडजात्या ने कहा कि महेंद्र भाई ने समाज की एकता के पक्षधर के रूप में अपनी विनम्रता, सरल स्वभाव और मधुर वाणी से समाज में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है। वे हम सब के लिए सम्माननीय हैं। इस कार्यक्रम का आभार श्री एम.के. जैन के पुत्र मधुर जैन ने व्यक्त किया और एम.के. जैन के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।</p>
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		<title>श्रीफल जैन न्यूज का आज का इवनिंग बुलेटिन : सर्दियों में योग और आहार के जरिए बच सकते हैं बीमारियों से </title>
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		<pubDate>Sat, 09 Nov 2024 15:18:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आज आपको बताएंगे कैसे योग के माध्यम से सर्दी में होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं और इसके साथ ही हैं कुछ और खास खबरें भी&#8230;&#8230;&#8230;&#8230; 1&#8230;&#8230;&#8230;.. लोकेशन इंदौर रिपोर्टर रेखा जैन सर्दियों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आज आपको बताएंगे कैसे योग के माध्यम से सर्दी में होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं और इसके साथ ही हैं कुछ और खास खबरें भी&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><iframe title="Evening bulletin 9।ठंडी में कैसा योगा करें। हुमचा में इन्द्र ध्वज विधान।उषा ठाकुर द्वारा इनका सम्मान" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/kFVMyIYWJWU?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>1&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर रेखा जैन</p>
<p>सर्दियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगासन और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना अत्यंत फायदेमंद होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य नमस्कार सबसे प्रभावी आसन है, जो रक्त संचार को बढ़ाता है और शरीर में गर्मी का संचार करता है। इसके साथ-साथ भस्तिका प्राणायाम इम्युनिटी को मजबूत करता है और सर्दी-खांसी से बचाव में मदद करता है। सही आहार, जैसे हरी सब्जियां और विटामिन डी से भरपूर सूर्य की किरणें भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं। कालानी नगर निवासी योग शिक्षिका रचना बागरेचा ने बताया कि इन दिनों सूर्य नमस्कार, जलनेति, ताड़ासन, भुजंगासन, उत्कटासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तान आसन और प्राणायाम करना विशेष लाभकारी है।</p>
<p>Slug &#8211; योगासन, प्राणायाम और ध्यान के साथ-साथ सही आहार और नियमित व्यायाम से हम सर्दियों में रह सकते हैं स्वस्थ</p>
<p>2&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन श्री होम्बुजा(कर्नाटक)</p>
<p>रिपोर्टर कमलेश जैन</p>
<p>श्री होम्बुजा(कर्नाटक) में 13 नवंबर से 20 नवंबर तक जगतगुरु स्वस्ति श्री डॉ. देवेंद्र कीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के नेतृत्व में श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। आप को बता दें कि श्री होम्बुजा(कर्नाटक) में यह विधान पहली बार होने जा रहा हैं। इस विधान सौधर्म इंद्र- इंद्राणी बने का लाभ गुवाहाटी निवासी चैनरूप शारदा बगड़ा परिवार को मिलेगा। 13 नवंबर को सुबह 7 बजे इंद्रप्रतिष्ठा, ध्वजारोहण, नित्याभिषेक, मंडप उद्घाटन, विधान, धर्म सभा, आरती, जाप, अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 14 से 19 नवंबर तक सुबह नित्य अभिषेक, विधान, धार्मिक सभा, आरती, जाप अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 20 नवंबर को श्री जिन अभिषेक, विधान, महायज्ञ, हवन, विसर्जन, रथ उत्सव और श्री क्षेत्र पर दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>Slug &#8211; जगतगुरु स्वस्ति श्री डॉ. देवेंद्र कीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के नेतृत्व में श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन</p>
<p>3&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर</p>
<p>इंदौर जैन समाज के तिलक नगर निवासी राजेश को विधायक उषा ठाकुर द्वारा सम्मानित किया गया। आप को बता दें कि यह सम्मान उन्हें नगर सुरक्षा समिति में अच्छा काम के लिए सम्मानित किया गया है। कोरोना के समय में भी इन्होंने सराहनीय कार्य किया था। तब भी उन्हें सम्मानित किया गया था। श्रीफल जैन न्यूज भी उन्हें बधाई देता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।</p>
<p>Slug-तिलक नगर निवासी राजेश जैन को विधायक उषा ठाकुर ने किया सम्मानित</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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		<title>श्रीफल जैन न्यूज का आज का ईवनिंग बुलेटिन : धार्मिक शिक्षा और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत </title>
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		<pubDate>Fri, 08 Nov 2024 14:11:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं एक खास सर्वे पर, जिसमें जो आंकड़े सामने आए हैं, वे धर्म, संस्कार-संस्कृति के लिहाज से चिंता जनक है और समाज संस्थाओं को उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं एक खास सर्वे पर, जिसमें जो आंकड़े सामने आए हैं, वे धर्म, संस्कार-संस्कृति के लिहाज से चिंता जनक है और समाज संस्थाओं को उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है, <span style="color: #ff0000">इसके साथ ही हैं कुछ और खास खबरें भी&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>https://youtu.be/51piBqzgeOs?feature=shared </strong></p>
<p>1&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>स्टोरी &#8211; रेखा संजय जैन संपादक</p>
<p>सुनते हैं और बार-बार दिखाया जाता है कि मंदिरों में श्रावकों की संख्या बढ़ रही है। यह कितना सच है, इस पर गहराई से अध्ययन करें तो दो चीजें सामने आती हैं एक संख्या तो बढ़ी है लेकिन आस्था-विश्वास कम हुआ है। यह बात एक सर्वे में सामने आई है। यह सर्वे अलग-अलग शहर में अलग-अलग उम्र, अलग-अलग क्षेत्र में काम करने वालों 300 व्यक्तियों पर हुआ। उनसे पूछे गए सवालों के आधार पर यह परिणाम समाने आया कि धर्म सभा, धर्म क्षेत्र में संख्या बढ़ी पर आस्था विश्वास, त्याग में कमी आई है। यह सर्वे श्रीफल पत्रिका ने 2021 में करवाया था। सर्वे में पूछा कहा था कि मंदिर क्यों जाते हो तो जो उत्तर सामने आया वह प्रतिशत में आपको बता रहे हैं&#8230;</p>
<p>* माता पिता में कहने पर 30 %</p>
<p>* ग्रह नक्षत्र की शांति के लिए 18 %</p>
<p>* साधु संतों के आकर्षण के कारण 9 %</p>
<p>* परिवार की परम्परा का निर्वाह करने किए 11%</p>
<p>* साधु संतों के नियम देने के कारण 5%</p>
<p>* प्रभु का स्मरण करने से कोई काम होगा तब 15 %</p>
<p>* मनुष्य भव का कर्तव्य है यही से सुख शांति मिलती है 10%</p>
<p>* अन्य कार्य भी बताया 2%</p>
<p>सर्वे में जो आंकड़े आए हैं वह इसलिए भी सत्य है कि आज दिखाई दे रहा है। अभिषेक, पूजन, दर्शन करने वाले कितने मिलते हैं मंदिरों में और समय-समय पर कार्यक्रम होते हैं तो संख्या एकदम से बढ़ जाती है या अपनी पसंद के साधु-संत आते हैं तो संख्या बढ़ जाती है।</p>
<p>जो मंदिर जाते हैं उनसे त्याग, नियम को लेकर पूछा और जो उत्तर सामने आए, उसे प्रतिशत में आप को बता रहे हैं&#8230;</p>
<p>* रात्रि भोजन त्याग 15 %</p>
<p>* अष्टमूलगुण का पालन 10 %</p>
<p>* व्रत नियम 5%</p>
<p>* महाराज साहब में ,रात्रि भोजन आदि का त्याग करवा दिया, कुछ समय का समय पूरा होते ही शुरू कर दूंगा 20%</p>
<p>* कुछ नियम नहीं, मात्र मंदिर जाते हैं 45%</p>
<p>* स्वाध्याय करने वालों की संख्या 5%</p>
<p>जैन धर्म के इतिहास के बारे में पूछा तो मात्र 8 % लोगों सही जवाब दिया, बाकी 98 प्रतिशत लोग जैन धर्म का इतिहास ही नहीं जानते हैं</p>
<p>इन आंकड़ों को जानने के बाद जब वर्तमान में एक नजर डाली कि कितनी संस्थाएं धर्म के अध्ययन पर उत्साह से फोकस करती हैं और आधुनिक साधनों से पढ़ाती हैं। तो मात्र एक संस्थान दक्षिण भारत महासभा इस काम में आगे है, बाकी की संस्थाएं मात्र विभाग खोल कर बैठी हैं और जैसा हो रहा, वैसा कर रही हैं।</p>
<p>भारत में लगभग 9465 जैन मंदिर हैं, उनमें मात्र 1200 के लगभग में पाठशाला शुरू हुई, बाकी मंदिरों साप्ताहिक, मासिक, अन्य समय-समय पर शिविर आदि आयोजित करते हैं।</p>
<p>इस सब आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि हम सब को भीड़ दिखाई देती है उसमें आस्था, श्रद्धा वाले कम हैं और कोई न कोई अन्य कार्य वाले अधिक हैं।</p>
<p>इन आंकड़ों को कम करने के लिए और आस्था, श्रद्धा को बढ़ाने के लिए कुछ ऐसा करने की आवश्यकता है।</p>
<p>* जैन धर्म के अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक समर्पित संस्थान की स्थापना।</p>
<p>* प्रत्येक परिवार में धार्मिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए पाठशाला का आयोजन।</p>
<p>* डिजिटल माध्यम से जैन संस्कृति और शिक्षाओं का प्रसार।</p>
<p>* जैन धर्म के मूल तत्वों का गहराई से अध्ययन।</p>
<p>* विभिन्न धार्मिक आयोजनों और कार्यक्रमों का सुनियोजित प्रारूप तैयार करना।</p>
<p><strong>यह करने से लाभ</strong></p>
<p>-जैन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना।</p>
<p>-धार्मिक शिक्षा और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना।</p>
<p>-समुदाय के सदस्यों को एकजुट करना और सहयोग को प्रोत्साहित करना</p>
<p>आज इंटरनेट पर भी आधी- अधूरी जानकारी मिल रही है, वैसे भी युवा पीढ़ी धर्म के इतिहास को सही नहीं जान पा रही है।</p>
<p>जानकारी के साथ श्राद्ध और आस्था बने, इसके लिए पुराने समय जो आश्रम विद्या की पद्धति थी, उसे समझना होगा। उसके लिए अब सोशल मीडिया के माध्यम से पाठशाला, घर-घर पाठशाला, धर्म के कॉल सेंटर तैयार करने होंगे। विज्ञान धर्म का ही हिस्सा है, यह बताना होगा।</p>
<p>Slug &#8211; मंदिर जाने वाले बढ़े लेकिन आस्था और श्रद्धा हुई कम</p>
<p>2&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन दिल्ली</p>
<p>रिपोर्टर &#8211; मनीष जैन</p>
<p>भारत में कितने नागरिक हैं, इसकी जनगणना होनी है। उनका नाम, जन्म, तारीख, शहर&#8230;ऐसी कई जानकारी के साथ एक कॉलम आएगा जाति का, वहां आप सब को जैन लिखना चाहिए। पाटनी, शाह, गांधी, सेठी, वेद आदि नहीं लिखना है। ये सब गोत्र हैं। यह इसलिए जरूरी है कि सरकारी आंकड़ों में अगर हमारी संख्या कम आती है तो उसका प्रभाव हमारे तीर्थ क्षेत्र, इतिहास आदि के साथ हमारे लिए मिलने वाली सरकारी सुविधाओं पर भी पड़ता है। इसके साथ ही राजनीति क्षेत्र में भी प्रभाव कम रहता है क्योंकि हमारी संख्या कम दिखाई देती है तो राजनेता भी हमें इग्नोर करते हैं। कई बार सुनने को मिलता है कि तुम हो गी कितने। इसलिए हर जैन को यह अभियान बनाना है कि वह अपने आस पास वालों को, परिवार, मित्र को यह सन्देश भेजे कि जनगणना के समय में जाति वाले कालम में मात्र जैन ही लिखना है। आज ही जागे तो उसका परिणाम हमें मिलेगा। नहीं तो आने वाले समय में सरकारी आंकड़ों में जैनों की संख्या कम होने के साथ हमारे इतिहास और संस्कृति का समावेश हिन्दू समाज में हो जाएगा।</p>
<p>Slug- जनगणना में लिखें केवल जैन, गोत्र नहीं</p>
<p>3&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशनः- इंदौर</p>
<p>रिपोर्टः- राजेश जैन दद्दू</p>
<p>मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में 24 मई 1986 को पिता राजेश और मां वीणा के घर जन्मे सन्मति ने साल 8 नवंबर 2011 को मंगलगिरी तीर्थ सागर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज से दीक्षित होकर अपनी साधना आरंभ की। यह दिन जैन समाज के लिए बहुत पुनीत दिन है। सन्मति जैन ने बीबीए और एमबीए में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 8 नवम्बर 2011 आचार्य श्री विशुद्ध सागर से दीक्षित होने के बाद आचार्य श्री ने सन्मति भैया का नामकरण मुनि श्री आदित्य सागर किया। सन्मति भैया ने विशुद्ध सागर में डुबकी लगाई और जब बाहर निकले तो वह सन्मति भैया नहीं बल्कि मुनि आदित्य सागर बनकर निकले। उन्होंने गुरु के सानिध्य में रहते हुए जैन समाज को सत्य पथ दिखाया। साथ ही निरंतर श्रमण संस्कृति को नित नए आयामों से गौरवान्वित किया। मुनि श्री को प्राचीन कन्नड़ पढ़ना भी आता है। इसके लिए 2018 के महामस्तकाभिषेक के बाद बैंगलोर में रहकर उन्होंने इसका अध्ययन किया था।</p>
<p>Slug &#8211; जैन समाज को दिखाया सत्य का पथ</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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		<title>श्रीफल जैन न्यूज का आज का ईवनिंग बुलेटिन : दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र बचाने के लिए जुड़ें गुल्लक योजना से </title>
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		<pubDate>Wed, 06 Nov 2024 15:05:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं आज की कुछ खास खबरों पर&#8230;.. 1 &#8230;&#8230;&#8230; लोकेशन इंदौर रिपोर्ट प्रीतम जल और रक्त का उत्पादन अब तक कोई भी विज्ञान नहीं कर पाया है। जिस तरह जल को बचाने [&#8230;]]]></description>
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<p>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं <span style="color: #ff0000">आज की कुछ खास खबरों पर&#8230;..</span></p>
<hr />
<p>1 &#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्ट प्रीतम</p>
<p>जल और रक्त का उत्पादन अब तक कोई भी विज्ञान नहीं कर पाया है। जिस तरह जल को बचाने के लिए जागरूकता की जरूरत है, ठीक वैसे ही रक्त के दान को सबसे बड़ी नेमत माना गया है। दोनों ही द्रव्य मानव को जीवन देते हैं। इंदौर देश का पहला ऐसा महानगर है, जहां पिछले 16 सालों से रक्तदान-महादान की मशाल को थामे 15 लोगों की टीम एक कॉल पर संबंधित रक्त समूह का ब्लड की उपलब्धता कुछ ही समय में करवा देती है। इंदौर के लाबरिया भैरू क्षेत्र में गंगवाल बस स्टैंड के समीप एमओजी लाइन में निःशुल्क ब्लड कॉल सेंटर स्थापित है। इस कॉल सेंटर के अध्यक्ष अशोक नायक बताते हैं कि उनके साथ इंदौर सहित आसपास के गांवों और नगरों में 4 लाख रक्तदाता मानव सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके सेंटर की टैग लाइन है- ब्लड चाहिए, हमें बताइए। यह भारत का पहला निःशुल्क ब्लड कॉल सेंटर है, जो रेडक्रॉस</p>
<p>से भी संबद्ध है। नायक ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के सहयोग से हजारों कैंप लगाकर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक किया है।</p>
<p>Slug -16 साल से रक्त दान का कार्य । संस्था की टैग लाइन &#8220;ब्लड चाहिए, हमें बताइए</p>
<p>2 &#8230;.</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर रेखा संजय जैन</p>
<p>समेदशिखर, गिरनार जीजैसे कई दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र हैं, जिनके लिए जैन समाज संघर्ष कर रहा है। आज करोड़ों रुपए कोर्ट में इसलिए बात के लिए लग रहे हैं कि हम यह सिद्ध कर पाएं कि यह तीर्थ क्षेत्र दिगम्बर जैन समाज के हैं। यहां से तीर्थंकर भगवान मोक्ष गए या यहां पर अतिशय हुए हैं। तीर्थ क्षेत्र कमेटी और महासभा की जीर्णोद्धार संस्था प्राचीन तीर्थों की सुरक्षा में लगी हुए है। यह काम मात्र इन संस्थाओं का नहीं और न ही यह संस्थाएं अकेले कुछ कर पाएंगी। समाज के हर घर को इन संस्थानों से जुड़ना होगा। इसलिए दोनों संस्थाओं ने गुल्लक योजना प्रारंभ की है, जिससे धन भी एकत्रित होगा और समाज का प्रत्येक घर इन संस्थाओं से जुड़कर संस्थाओं के हाथ मजबूत करेगा। इस योजना से समाज के हर घर को इसलिए जुड़ना जरूरी है, अगर हम आज भी इन संस्थाओं से नहीं जुड़ पाए तो दिगंबर जैन समाज का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएग। कैसे बता पाएंगे कि तीर्थंकरों को कहां से मोक्ष हुआ, कहां क्या अतिशय हुआ है। जिस समाज का कोई अस्तित्व नहीं होता, वह समाज दिशाहीन हो जाता है। तो आओ सब जुड़ें गुल्लक योजना से।</p>
<p>Slug &#8211; अस्तित्व को बचाने के लिए जुड़ें गुल्लक योजना से</p>
<p>&#8211; तीर्थ क्षेत्र गुल्लक योजना के लिए हंसमुख गांधी से संपर्क करें +91 93021 03513</p>
<p>&#8211; महासभा की गुल्लक योजना से जुड़ने के लिए टी के वेद से संपर्क करें +91 94251 54777</p>
<p>3 &#8230;&#8230;&#8230;.</p>
<p>लोकेशन श्रवणबेलगोला</p>
<p>रिपोर्टर &#8211; कमलेश जैन</p>
<p>श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोल के जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के समाधि मण्डप का लोकार्पण समारोह 6 दिसंबर 2024 को प्रात: 9 बजे श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में किया जाएगा। वर्ष 1970 से 2023 तक स्वामी श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला की भट्टारक गद्दी पर रहे। वह महावीर जयंती 19 अप्रैल 1970 को श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक पद पर विराजमान हुए और 23 मार्च 2023 को आपका समाधिमरण हो गया । आप नेतृत्व में 1981, 1993, 2006, 2018 में महामस्तकाभिषेक संपन्न हुए। समाधि मण्डप लोकार्पण समारोह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरामय्या, पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवगौड़ा सभी कई मंत्री और पूर्व मंत्री उपस्थित रहेंगे। इनके साथ ही श्री दिगम्बर जैन मठ के सभी भट्टारक स्वामी जी , आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ, श्री पेजावर मठ, श्री सिद्धगंगा मठ और धर्माधिकारी श्री क्षेत्र धर्मस्थल के डॉ डी वीरेन्द्र हेगडे जी का सानिध्य रहेगा।</p>
<p>Slug &#8211; समाधि मंडप लोकार्पण समारोह</p>
<p>&#8230;&#8230;</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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		<title>श्रीफल न्यूज का आज का ईवनिंग बुलेटिन : सच्चे श्रावक का अनुपम उदाहरण हैं नरेंद्र वेद </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Nov 2024 13:34:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं आज की कुछ खास खबरों पर&#8230;.. लोकेशन &#8211; ग्रेटर बाबा परिसर,इंदौर रिपोर्टर प्रीतम एक सच्चा श्रावक कैसा होना चाहिए, इसका उदाहरण नवग्रह अतिशय क्षेत्र ग्रेटर बाबा परिसर इंदौर में देखने को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आप देख रहे हैंं श्रीफल जैन न्यूज का ईवनिंग बुलेटिन। आप सभी का स्वागत है, मैं हूं रेखा जैन तो आइए नजर डालते हैं <span style="color: #ff0000">आज की कुछ खास खबरों पर&#8230;..</span></strong></p>
<hr />
<p>लोकेशन &#8211; ग्रेटर बाबा परिसर,इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर प्रीतम</p>
<p><iframe loading="lazy" title="5 नवम्बर 2024 इवनिंग बुलेटिन। Evening bulletin। Shreephal jain news।श्रीफल जैन न्यूज ।" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/fzw_TlvIqGU?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>एक सच्चा श्रावक कैसा होना चाहिए, इसका उदाहरण नवग्रह अतिशय क्षेत्र ग्रेटर बाबा परिसर इंदौर में देखने को मिल रहा है । वहां के अध्यक्ष नरेन्द्र अपने पूरे परिवार के साथ उनकी सेवा कर रहे हैं,जिन्होंने इंदौर शहर को बहुत कुछ दिया है। जिनके पास हजारों की भीड़ बनी रहती थी पर आज जो अपने कर्म के कारण बीमारी से लड़ रहे हैं, उनके उपचार में पूरा वेद परिवार लगा है। हम बात कर रहे पूर्व आचार्य दर्शन सागर (वर्तमान मे गृहस्थ अवस्था में ) । एक और सुनहरा अवसर यह भी है कि अभी वर्तमान में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज भी वहां विराजमान है, वह भी उनको सम्बोधित कर रहे हैं। उनके संबोधन करते एक वीडियो वायरल हो रहा है,तो आप को वह वीडियो भी दिखाते हैं&#8230;</p>
<p>&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;</p>
<p>लोकेशन इंदौर</p>
<p>रिपोर्टर प्रीतम</p>
<p>इंदौर महानगर में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में 7 नवंबर से 15 नवंबर तक होने जा रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान की तैयारी पूर्णता की ओर हैं। इसमें 110 मंडल बनाए जा रहे हैं, जिसमें 2 मुख्य बड़े मंडल होंगे और 108 मंडल छोटे मंडल होंगे, इन 110 मंडलों पर लगभग 1350 श्रावक-श्राविका सिद्धों की आराधना करेंगे। इसके अलावा अनेक श्रावक- श्राविका सिद्धों की भक्ति करेंगे। सिद्धचक्र महामंडल विधान की तैयारी 21 दिनों से चल रही है। इसके लिए शहर के विजयनगर चौराहे पर 65 हजार स्क्वेयर फीट पर विशाल पंडाल का निर्वाण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, यह पंडाल 6 नवंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा डेढ़ लाख स्क्वेयर में भोजनशाला, कार्यालय, संत निवास, प्रदर्शनी स्थल, दुकानें और द्रव्य भंडार आदि के लिए खास तौर पर पंडाल तैयार किया गया है। आयोजन समिति का कहना है कि प्रतिदिन 25 हजार व्यक्ति इस अनुष्ठान में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे । 15 नवंबर को भव्य रथावर्तन महोत्सव होगा, जिसमें 10 हजार श्रावक- श्राविका भाग लेकर धर्मलाभ लेंगे । इस महोत्सव में अनेक राज्य श्रावक- श्राविका हिस्सा लेंगे ।</p>
<p>Slug &#8211; 65 हजार स्क्वेयर फीट पर विशाल पंडाल में होगी सिद्धों की आराधना</p>
<p>&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;.</p>
<p>लोकेशन किशनगढ़</p>
<p>रिपोर्टर राजेश जैन दद्दू</p>
<p>मौका था किशनगढ़ शहर में चर्या चक्रवर्ती आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ससंघ पिच्छी परिर्वतन का, जहां दिगंबर जैन समाज के गौरव अशोक -सुशीला पाटनी, आर . के. मार्बल को आचार्य श्री पुरानी पिच्छीका प्राप्त हुई । इसलिए अवसर पर अशोक पाटनी को श्रावक चक्रवर्ती की उपाधि से सम्मानित किया गया । उपाधि से सम्मानित होने पर इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, फेडरेशन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू, हंसमुख गांधी, टीके वेद आजाद जैन एवं परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन, फेडरेशन की शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल ने बधाई दी और आचार्य श्री की पुरानी पिच्छी मिलने पर सतिशय पुण्य की अनुमोदना की।</p>
<p>Slug &#8211; आर के मार्बल के अशोक पाटनी को श्रावक चक्रवर्ती की उपाधि से सम्मानित किया गया</p>
<p>&#8230;&#8230;&#8230;..</p>
<p>लोकेशन आगरा</p>
<p>रिपोर्टर शुभम जैन</p>
<p>आगरा में कलाकुंज मंदिर मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के आशीर्वाद 8 नवंबर से 16 नवंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है । विधान की तैयारियां पूर्णता की ओर है । श्री दिगम्बर जैन महावीर मंदिर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसमें विधान की पत्रिका का विमोचन किया गया। समिति के मुकेश जैन भगत,पवन जैन ने बताया कि 8 नवंबर को सुबह 6 बजे से विधान की मांगलिक क्रिया प्रारंभ हो जाएंगी । 9 दिवसीय विधान में प्रतिदिन भगवान का अभिषेक, पूजन के साथ सिद्धों के गुणों की आराधना के साथ भगवान को अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p>Slug &#8211; 9 दिनों तक होगी सिद्धों की आराधन</p>
<p>&#8230;.</p>
<p>आज के लिए इतना ही। कल पुनः इसी समय आप से मुलाकात होगी। आप के पास भी जैन धर्म से संबंधित कोई भी खबर संबंधित हो तो हमें 9460155006 अवश्य भेजें</p>
<p>जय जिनेन्द्र</p>
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		<title>उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौग्य सागर जी महाराज ससंघ का रहा सानिध्य : सदर बाजार में संपन्न हुआ नवीन शांतिनाथ जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Nov 2024 05:29:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सदर बाजार स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय के लिए नवीन श्री शांतिनाथ जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह 4 नवंबर को मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौग्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में सानंद संपन्न हुआ। समारोह की शुरुआत में सर्वप्रथम भक्तों ने समाधिस्थ आचार्यश्री विराग सागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सदर बाजार स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय के लिए नवीन श्री शांतिनाथ जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह 4 नवंबर को मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौग्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में सानंद संपन्न हुआ। समारोह की शुरुआत में सर्वप्रथम भक्तों ने समाधिस्थ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> सदर बाजार स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय के लिए नवीन श्री शांतिनाथ जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह 4 नवंबर को मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौग्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में सानंद संपन्न हुआ। समारोह की शुरुआत में सर्वप्रथम भक्तों ने समाधिस्थ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किया। इसके बाद सदर बाजार सकल जैन समाज ने उपाध्याय संघ के समक्ष शास्त्र भेंट किए और श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस विशेष अवसर पर बाहर से पधारे सभी अतिथियों का मंदिर कमेटी ने माला, दुपट्टा पहनाकर एवं तिलक लगाकर हार्दिक स्वागत किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69324" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013.jpg" alt="" width="1368" height="912" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013.jpg 1368w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0013-1320x880.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1368px) 100vw, 1368px" />तत्पश्चात, सौभाग्यशाली भक्तों ने पंडित श्री आशुतोष जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में मंत्रोच्चारण के साथ नवीन शांतिनाथ जिनालय के लिए शिलाओं का विधिवत स्थापित किया। समारोह के दौरान भक्तों ने नवीन शांतिनाथ जिनालय के निर्माण के लिए बढ़-चढ़कर दान दिया। कार्यक्रम के समापन पर मंदिर कमेटी ने सभी भक्तों के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था की। कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया। इस आयोजन में सदर बाजार महिला मंडल का विशेष सहयोग रहा।</p>
<p><strong>ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर मनोज जैन योगी, विनय पाटनी, विजय पाटनी, रेनू जैन पाटनी, मुकेश जैन, सोनू जैन, हरेश जैन, सुरेंद्र जैन, चंद्रभान जैन, मनोज बाकलीवाल, जगदीशप्रसाद जैन, राजू गोधा, नरेश जैन, अनिल जैन सहित समस्त सदर बाजार, शहजादी मंडी एवं छीपीटोला सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने प्रदान किया आशीर्वाद : सीए विमल जैन दिल्ली को दानवीर की उपाधि से किया अलंकृत </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Nov 2024 05:25:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज दिल्ली के प्रसिद्ध जीएसटी गुरु, सीए विमल जैन मयूर विहार दिल्ली को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज के सानिध्य में इंदौर जैन समाज द्वारा &#8220;दानवीर&#8221; की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने विमल जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज दिल्ली के प्रसिद्ध जीएसटी गुरु, सीए विमल जैन मयूर विहार दिल्ली को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज के सानिध्य में इंदौर जैन समाज द्वारा &#8220;दानवीर&#8221; की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने विमल जैन को आशीर्वाद प्रदान किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समाज दिल्ली के प्रसिद्ध जीएसटी गुरु, सीए विमल जैन मयूर विहार दिल्ली को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज के सानिध्य में इंदौर जैन समाज द्वारा &#8220;दानवीर&#8221; की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने विमल जैन को आशीर्वाद प्रदान किया। विमल जैन वर्तमान में भारत सरकार के जीएसटी सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही जैसवाल जैन युवाजन, समंति फाउंडेशन, अहिंसा प्रभावना सहित अन्य कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में विमल जैन का योगदान दिल्ली जैन समाज में अग्रणी स्थान रखता है, और वे समय-समय पर समाज को अपना अमूल्य मार्गदर्शन भी प्रदान करते रहते हैं।</p>
<p><strong>इन्होंने दी शुभकामनाएं</strong></p>
<p>इस अवसर पर सुनील जैन ग्रीनपार्क ,अजय जैन बॉबी साउथ एक्स, सुरेश चंद जैन साउथ एक्स, मनोज जैन ग्रीनपार्क, अजय जैन नोएडा, नवीन कुमार जैन पिंकी राजाबाजार, सुरेश चंद जैन द्वारका, शगुन चंद जैन उत्तम नगर, रूपेश जैन उत्तम नगर, निर्मल जैन पटेल नगर ,मोहित जैन चीकू पटेल नगर, अंबरीश जैन राज शकरपुर, निखिलेश जैन शकरपुर ,अजय जैन अजिया शकरपुर ,मनोज जैन ट्विंकल शकरपुर ,सुनील जैन शकरपुर, दिनेश जैन टीटू, गिरीश चंद जैन शकरपुर, गिरीश जैन गुड़गांव ,राजू जैन गणेश नगर, वरुण जैन राजाबाजार, राजीव जैन,अंकित जैन ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।</p>
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		<title>कविता के क्षेत्र में नवाचार का देश में प्रथम प्रयोग किया कवि नरेन्द्रपाल जैन ने : मेवाड़ &#8211; वागड़ से निकला नवाचार, देशभर में हो रहा लागू </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Nov 2024 05:21:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मूक-बधिरों के समक्ष कविता एवं अन्य साहित्यिक रचनाओं की प्रस्तुति का प्रथम सफल प्रयोग देश के प्रसिद्ध कवि, गीतकार और लघुकथाकार नरेन्द्रपाल जैन द्वारा किया गया। मेवाड़ &#8211; वागड़ क्षेत्र से जुड़े जैन ने इंदौर के एक मूक-बधिर विद्यालय में किशोरों और युवाओं के समक्ष जीवन के संघर्ष, सफलता, उत्साह, पारिवारिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मूक-बधिरों के समक्ष कविता एवं अन्य साहित्यिक रचनाओं की प्रस्तुति का प्रथम सफल प्रयोग देश के प्रसिद्ध कवि, गीतकार और लघुकथाकार नरेन्द्रपाल जैन द्वारा किया गया। मेवाड़ &#8211; वागड़ क्षेत्र से जुड़े जैन ने इंदौर के एक मूक-बधिर विद्यालय में किशोरों और युवाओं के समक्ष जीवन के संघर्ष, सफलता, उत्साह, पारिवारिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण पर अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सचिन गंगावत विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव।</strong> मूक-बधिरों के समक्ष कविता एवं अन्य साहित्यिक रचनाओं की प्रस्तुति का प्रथम सफल प्रयोग देश के प्रसिद्ध कवि, गीतकार और लघुकथाकार नरेन्द्रपाल जैन द्वारा किया गया। मेवाड़ &#8211; वागड़ क्षेत्र से जुड़े जैन ने इंदौर के एक मूक-बधिर विद्यालय में किशोरों और युवाओं के समक्ष जीवन के संघर्ष, सफलता, उत्साह, पारिवारिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण पर अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। इन रचनाओं को विद्यालय के अनुदेशकों ने अपनी सांकेतिक भाषा में व्यक्त किया, जिससे यह रचनाएँ दिव्यांग बच्चों और युवाओं तक प्रभावी रूप से पहुंच सकीं। इस प्रयोग में जहां हास्य रचनाओं पर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आई, वहीं गंभीर रचनाओं ने उनके चेहरों पर गम्भीरता भी उत्पन्न की।</p>
<p>जैन का यह प्रयोग मूक-बधिरों के लिए साहित्य को और भी सुलभ बनाने की दिशा में एक अनोखा प्रयास है। इस सफल प्रयोग के बाद अब जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भी मूक-बधिरों के लिए कविता और साहित्य की रचनाओं की प्रस्तुति दी गई। यह अत्यंत खुशी की बात है कि जो लोग राग और ध्वनियों को नहीं सुन सकते, उनके लिए अब सांकेतिक भाषा के माध्यम से कविता के शब्द उनके दिलों तक पहुंचने लगे हैं। इस प्रयोग के जनक कवि नरेन्द्रपाल जैन का कहना है कि यह पहल न केवल देशभर में बल्कि पूरे विश्व में फैलनी चाहिए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि जैन ने जन्मान्ध बच्चों, अनाथों और वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों के समक्ष भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी, जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान आई और जीवन के संघर्षों के बावजूद जीने की प्रेरणा मिली। जैन की कविता &#8220;आदमी की औकात&#8221; को राष्ट्र संतों ने भी अपने उपदेशों में प्रस्तुत किया है, जो आज भी एक कालजयी रचना मानी जाती है।</p>
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