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	<title>Nirvana Laddu &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Nirvana Laddu &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रद्धा भक्ति से जनकपुरी में हुआ श्रुत स्कन्ध पूजा विधान : धर्मनाथ भगवान का निर्वाण लाड़ू भी चढ़ाया  </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 03:42:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार प्रातः श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योतिनगर, में श्रुत स्कन्ध पूजा विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जयपुर। राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार प्रातः श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योतिनगर, में श्रुत स्कन्ध पूजा विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार प्रातः श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योतिनगर, में श्रुत स्कन्ध पूजा विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः षट्खण्डागम की भव्य पालकी यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान महिलाओं ने सिर पर जिनवाणी धारण कर श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभाई। जिनवाणी के जयघोष से पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा। मंडल विधान में मूल नायक भगवान नेमिनाथ को पाण्डुशिला पर विराजमान कर सौधर्म इंद्र जे.के. जैन एवं लाड़ देवी परिवार द्वारा शांतिधारा की गई। वहीं राजेश गर्ग जैन ने भी शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p>श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माँ की सामूहिक आराधना करते हुए अष्टद्रव्य से पूजन-अर्चन कर श्रुत ज्ञान के प्रति अपनी गहन आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, आध्यात्मिकता और धर्ममय भावनाओं का अनुपम संगम देखने को मिला।</p>
<p>विशेष रूप से भगवान धर्मनाथ के निर्वाण कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण लाड़ू राजस्थान जैन साहित्य परिषद के संरक्षक शांतिलाल गंगवाल एवं महेशचंद्र चांदवाड़ ने परिषद सदस्यों एवं समाजजनों के साथ श्रद्धापूर्वक अर्पित किया।</p>
<p>इस आयोजन में राजस्थान जैन साहित्य परिषद के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला एवं मंत्री महावीर चांदवाड़ के नेतृत्व में परिषद के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई ।विधानाचार्य प० रमेश जैन गंगवाल ने आयोजन की व्यवस्थाओं का संचालन किया।</p>
<p>मंदिर समिति की ओर से मंदिर अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छाबड़ा, मंदिर मंत्री देवेन्द्र कासलीवाल तथा स्थानीय संयोजक प्रदीप जैन चांदवाड़ ने परिषद के अध्यक्ष ,मंत्री , विधानाचार्य तथा सदस्यों का स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं और जिनवाणी माँ की आराधना कर श्रुत पंचमी महोत्सव की गरिमा को बढ़ाया। परिषद का छ दशक से प्रतिष्ठा पूर्ण आयोजन जिनवाणी रथ यात्रा शुक्रवार को निकाली जाएगी।</p>
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		<title>धर्म के लिए समय निकालना पड़ता है : आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी ने बड़वानी में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:21:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी में विराजित आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब शेर जैसा जीव कालांतर में भगवान महावीर की पर्याय में आ सकता है तो हम क्यों नहीं। धामनोद से दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230; धामनोद/बड़वानी। बड़वानी में विराजित आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी में विराजित आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब शेर जैसा जीव कालांतर में भगवान महावीर की पर्याय में आ सकता है तो हम क्यों नहीं। <span style="color: #ff0000">धामनोद से दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद/बड़वानी।</strong> बड़वानी में विराजित आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब शेर जैसा जीव कालांतर में भगवान महावीर की पर्याय में आ सकता है तो हम क्यों नहीं। हमें मनुष्य जीवन मिला ही अपनी आत्मा के कल्याण के लिए। इस मनुष्य योनि में हम अपनी आत्मा का कल्याण कर सकते हैं। हम कई जन्मों से कई योनियों में भटके है और ऐसी कोई सी भी योनि नहीं है। जिसमें हमने जन्म नहीं लिया होगा। हमें जो पर्याय अभी मिली है उससे हमें सम्यक ज्ञान मिल सकता है। इस पर्याय में अपनी आत्मा का उद्धार नहीं करोगे तो कब करोगे। धर्म के लिए समय निकालना पड़ता है। अच्छे धर्म,अच्छे परिवार,अच्छी गति के लिए,अच्छे जीवन के लिए धर्म करना पड़ता है।</p>
<p><strong>गलत शिक्षा देने वाले बहुत मिल जाएंगे</strong></p>
<p>साधुओं को आहार दान देने से अच्छी गति मिलती है । आपको अच्छी शिक्षा देने वाले लोग कम मिलेंगे किन्तु गलत शिक्षा देने वाले बहुत मिल जाएंगे और उसी वजह से आपकी अगली पर्याय बिगड़ जाएगी। आज हम और साथ में आर्यिका माताजी बैठी है। जिन्होंने ऐसा कौन सा कर्म किया है जो हम यहां आर्यिका के रूप में बैठे हैं। हमने देव,शास्त्र,गुरु का श्रद्धान किया और मुनिसंघ आर्यिका संघ की सेवा की और हम शील धर्म का पालन कर रहे हैं और आपके बीच बैठे हैं। हमने पुण्य कार्य किया जिसका ये परिणाम है और मुनि आर्यिका की सेवा कर शील व्रत का पालन कर नगर-नगर डगर-डगर घूम रहे हैं और जो आहार दान दिया है। उसका फल है।</p>
<p><strong>रात्रि भोजन नहीं करना है</strong></p>
<p>आज साइंस कह रहा है कि रात्रि भोजन नहीं करना जिससे कई गंभीर बीमारियां होती है और हानि कारक है ,जो कि भगवान महावीर कई सदियों पहले रात्रि भोजन निषेध कर के गए। निर्ग्रन्थ संत 24 घंटे में एक बार आहार ,पानी लेते है और तृप्त हो जाते है और साधना में रत रहते है और अन्य लोग रात्रि में खा कर भी अतृप्त है और गंभीर बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं।</p>
<p><strong>भोजन स्वास्थ्य और परिणाम के लिए श्रेष्ठ है</strong></p>
<p>इसी पर माताजी ने एक दृष्टांत दिया एक परिवार में</p>
<p>रात्रि भोज रखा। उसको खाने से जितने भी लोगों ने भोजन किया वो सब उल्टी के शिकार हुए क्योंकि खाने में छिपकली गिर गई थी किंतु, एक परिवार ऐसा था जिसमें कि जैन धर्म की लड़की ब्याह कर आई थी। उसने रात्रि भोजन का मना किया था तो वो पूरा परिवार बच गया और उस परिवार ने जैन धर्म को अंगीकार किया और रात्रि भोजन का त्याग किया ।जैन धर्म का भोजन स्वास्थ्य और परिणाम के लिए श्रेष्ठ है और उसका पालन करना चाहिए।</p>
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		<title>श्रद्धा भक्ति से जनकपुरी में हुआ श्रुत स्कन्ध पूजा विधान : धर्मनाथ भगवान का निर्वाण लाड़ू भी चढ़ाया  </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:57:57 +0000</pubDate>
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<p><strong>राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार प्रातः श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योतिनगर, में श्रुत स्कन्ध पूजा विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। राजस्थान जैन साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार प्रातः श्री दिगंबर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योतिनगर, में श्रुत स्कन्ध पूजा विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः षट्खण्डागम की भव्य पालकी यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान महिलाओं ने सिर पर जिनवाणी धारण कर श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभाई। जिनवाणी के जयघोष से पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा। मंडल विधान में मूल नायक भगवान नेमिनाथ को पाण्डुशिला पर विराजमान कर सौधर्म इंद्र जे.के. जैन एवं लाड़ देवी परिवार द्वारा शांतिधारा की गई। वहीं राजेश गर्ग जैन ने भी शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p>श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माँ की सामूहिक आराधना करते हुए अष्टद्रव्य से पूजन-अर्चन कर श्रुत ज्ञान के प्रति अपनी गहन आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, आध्यात्मिकता और धर्ममय भावनाओं का अनुपम संगम देखने को मिला।</p>
<p>विशेष रूप से भगवान धर्मनाथ के निर्वाण कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्वाण लाड़ू राजस्थान जैन साहित्य परिषद के संरक्षक शांतिलाल गंगवाल एवं महेशचंद्र चांदवाड़ ने परिषद सदस्यों एवं समाजजनों के साथ श्रद्धापूर्वक अर्पित किया।</p>
<p>इस आयोजन में राजस्थान जैन साहित्य परिषद के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला एवं मंत्री महावीर चांदवाड़ के नेतृत्व में परिषद के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई ।विधानाचार्य प० रमेश जैन गंगवाल ने आयोजन की व्यवस्थाओं का संचालन किया।</p>
<p>मंदिर समिति की ओर से मंदिर अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छाबड़ा, मंदिर मंत्री देवेन्द्र कासलीवाल तथा स्थानीय संयोजक प्रदीप जैन चांदवाड़ ने परिषद के अध्यक्ष ,मंत्री , विधानाचार्य तथा सदस्यों का स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं और जिनवाणी माँ की आराधना कर श्रुत पंचमी महोत्सव की गरिमा को बढ़ाया। परिषद का छ दशक से प्रतिष्ठा पूर्ण आयोजन जिनवाणी रथ यात्रा शुक्रवार को निकाली जाएगी।</p>
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		<title>15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ जी का मोक्षकल्याणक 18 जून को : तिथि के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी को आता है, इंदौर सहित देशभर के मंदिरों में छाया उल्लास  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/moksha_kalyanak_of_the_15th_tirthankara_lord_dharmanath_ji_on_june_18/</link>
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		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 08:21:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर सहित देशभर में जैन समाज के लिए 18 जून का दिन बेहद पावन और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होने वाला है, क्योंकि इस दिन जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर, शांति और अहिंसा के प्रतिमूर्ति भगवान धर्मनाथ जी का मोक्ष कल्याणक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार भगवान धर्मनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर सहित देशभर में जैन समाज के लिए 18 जून का दिन बेहद पावन और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होने वाला है, क्योंकि इस दिन जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर, शांति और अहिंसा के प्रतिमूर्ति भगवान धर्मनाथ जी का मोक्ष कल्याणक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार भगवान धर्मनाथ जी का मोक्षकल्याणक ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी के दिन बड़ी श्रद्धा और भक्ति वात्सल्य के साथ मनाया जाता है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल का यह संकलित और संपादित आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर सहित देशभर में जैन समाज के लिए 18 जून का दिन बेहद पावन और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होने वाला है, क्योंकि इस दिन जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर, शांति और अहिंसा के प्रतिमूर्ति भगवान धर्मनाथ जी का मोक्ष कल्याणक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार भगवान धर्मनाथ जी का मोक्षकल्याणक ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी के दिन बड़ी श्रद्धा और भक्ति वात्सल्य के साथ मनाया जाता है। अहिल्या नगरी इंदौर, जो अपनी अनूठी जैन संस्कृति, भव्य कांच मंदिर और चैत्यालयों के लिए प्रसिद्ध है, उसके सहित संपूर्ण भारतवर्ष के दिगंबर जैन मंदिरों में इस दिन भक्ति का अनूठा सैलाब उमड़ेगा। जैन पुराणों के अनुसार भगवान धर्मनाथ जी का जन्म इक्शवाकु वंश के राजा भानु और माता सुव्रता के यहां रत्नपुरी में माघ शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था, जिनका वर्ण कंचन के समान दैदीप्यमान था और जिनका चिह्न ‘वज्रदंड’ है।</p>
<p><strong> मोक्ष का अर्थ आत्मा का समस्त कर्मों के बंधन से पूर्णतः मुक्त होना है</strong></p>
<p>गर्भकाल से ही लोक में धार्मिक प्रवृत्तियों और दया भाव में अभूतपूर्व वृद्धि करने वाले भगवान धर्मनाथ जी ने संसार के भोगों को नश्वर मानकर दिगंबर दीक्षा धारण की थी और घोर तपस्या के पश्चात केवलज्ञान प्राप्त कर समवशरण के माध्यम से भव्य जीवों को मोक्ष मार्ग का उपदेश दिया था। जैन दर्शन में मोक्ष का अर्थ आत्मा का समस्त कर्मों के बंधन से पूर्णतः मुक्त हो जाना है और भगवान धर्मनाथ जी ने अपनी आयु के अंत में सम्मेद शिखरजी के पावन पर्वत से मौन ध्यान धारण कर आत्मिक विशुद्धि प्राप्त करते हुए सिद्धपद प्राप्त किया था। जो हर श्रावक को यह याद दिलाता है कि मानव जीवन का परम लक्ष्य सांसारिक वैभव नहीं बल्कि अपनी आत्मा को शुद्ध बनाना है।</p>
<p><strong>समृद्धि की कामना के साथ महाशांतिधारा होगी</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर 18 जून को अल सुबह से ही जैन मंदिरों में पूरा वातावरण धर्ममय हो उठेगा। मंदिरों में वेदी पर विराजमान भगवान धर्मनाथ जी की प्रतिमा का जल से भव्य अभिषेक किया जाएगा तथा विश्व शांति, प्राणिमात्र के कल्याण और राष्ट्र की समृद्धि की कामना के साथ महाशांतिधारा होगी। इस दिन सामूहिक रूप से भगवान धर्मनाथ मोक्ष कल्याणक विधानश् का आयोजन होगा, जिसमें श्रावक सुरम्य भजनों और ढोल-मंजीरों की थाप पर नृत्य करते हुए अर्घ्य समर्पित करेंगे और भगवान धर्मनाथ के ‘चालीसा’ व ‘निर्वाण कांड’ का पाठ करेंगे।</p>
<p><strong>आत्मा भी सिद्धत्व की मिठास को प्राप्त करे</strong></p>
<p>इस पूरे उत्सव का सबसे मुख्य और अनूठा आकर्षण ‘निर्वाण लाडू’ चढ़ाना होता है, जिसमें शुद्ध घी, सूखे मेवों और बूंदी से निर्मित बड़े आकार के मोदक को केसर से रंजित कर, अर्घावली पढ़ते हुए भगवान के चरणों में इस भावना के साथ समर्पित किया जाता है कि जैसे बूंदी के कण मिलकर मीठा मोदक बनते हैं, वैसे ही हमारी आत्मा भी सिद्धत्व की मिठास को प्राप्त करे।</p>
<p><strong>मंदिरों में तैयारियों का दौर</strong></p>
<p>मालवा का ‘जैन गढ़’ कहे जाने वाले इंदौर शहर के रेसकोर्स रोड, क्लॉथ मार्केट, कनाड़िया, विजय नगर और प्रसिद्ध कांच मंदिर सहित सैकड़ों दिगंबर जैन मंदिरों में समाज के युवा संगठन और महिला मंडल रंगोली सजाने, महाआरती का प्रबंधन करने और लाडू वितरण की तैयारियों में जुटे हैं। कई स्थानों पर रात्रि में भक्ति संध्या और भगवान धर्मनाथ के जीवन पर आधारित नाटिकाओं का मंचन भी होगा। चारों ओर धार्मिक उल्लास का माहौल दिखाई दे रहा है।</p>
<p><strong>संयम के मार्ग को अपने जीवन में उतारने का महापर्व </strong></p>
<p>वास्तव में भगवान धर्मनाथ जी का मोक्ष कल्याणक केवल एक ऐतिहासिक घटना की स्मृति नहीं है, बल्कि आज के अशांत और भागदौड़ भरे युग में उनके द्वारा बताए गए अहिंसा, सत्य, दया और संयम के मार्ग को अपने जीवन में उतारने का महापर्व है।</p>
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		<title>सिंहोनिया में 108 कलशों से भगवान शांतिनाथ का हुआ महामस्तकाभिषेक : अंबाह में हुए धार्मिक आयोजन में उमड़े समाज जन। </title>
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		<pubDate>Fri, 15 May 2026 11:46:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंबाह। प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र सिंहोनिया में शुक्रवार को भगवान शांतिनाथ, अरहनाथ एवं कुंथुनाथ की प्राचीन प्रतिमाओं का भव्य महामस्तकाभिषेक श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में अंबाह, मुरैना, ग्वालियर, मुरार, आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अंबाह</strong>। प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र सिंहोनिया में शुक्रवार को भगवान शांतिनाथ, अरहनाथ एवं कुंथुनाथ की प्राचीन प्रतिमाओं का भव्य महामस्तकाभिषेक श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में अंबाह, मुरैना, ग्वालियर, मुरार, आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। प्रातःकाल पंडित संजय शास्त्री के निर्देशन में नित्य नियम पूजन, शांति विधान, शांतिधारा एवं यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद 108 कलशों से भगवान शांतिनाथ की 21 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक किया गया। पवित्र जल से हुए अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू अर्पित कर पुण्यार्जन किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-106801" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260515-WA0026-300x226.jpg" alt="" width="300" height="226" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260515-WA0026-300x226.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260515-WA0026-1024x771.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260515-WA0026-768x578.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260515-WA0026-1536x1156.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260515-WA0026.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>संयम और वैराग्य का संदेश देने वाला महापर्व</strong></p>
<p>कमेटी प्रमुख जिनेश जैन ने कहा कि महामस्तकाभिषेक आत्मशुद्धि, संयम और वैराग्य का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने बताया कि भगवान शांतिनाथ के जीवन से मनुष्य को अहिंसा, क्षमा और आत्मानुशासन की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धा से किया गया अभिषेक आत्मा को निर्मल बनाने का प्रतीक है। आयोजन में रविंद्र जैन टिल्लू, संजय जैन, नीलेश जैन, रवि जैन, संजू जैन, डॉबी जैन, पिंटू जैन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>शांतिनाथ भगवान का विशेष अभिषेक</strong></p>
<p>उधर, अंबाह नगर के बड़ा जैन मंदिर में भी भगवान शांतिनाथ का विशेष अभिषेक किया गया। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के सदस्यों ने सामूहिक रूप से भगवान का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात शांतिधारा की गई, जिसमें समाजजनों ने विश्वशांति और आत्मकल्याण की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।</p>
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		<title>भगवान अभिनंदननाथजी का मोक्ष कल्याणक मनाया: आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:53:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में बुधवार को वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा अभिषेक बड़े भक्ति भाव से की गई। अभिनंदन नाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में भी विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में बुधवार को वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा अभिषेक बड़े भक्ति भाव से की गई। अभिनंदन नाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में भी विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में बुधवार को वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा अभिषेक बड़े भक्ति भाव से की गई। अभिनंदन नाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में भी विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद माताजी के मुखारविंद से निर्वाण लाडू का अर्घ्य बोलकर बड़े भक्ति भाव से चढ़ाया गया। प्रथम लाडू चढ़ाने का सौभाग्य गांधी सिद्धि दिलीपकुमार एवं मंडीदीप भोपाल से पधारे हुए श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया एवं महिला मंडल द्वारा बड़े भक्ति भाव से भगवान अभिनंदन नाथ का पूजन किया गया। इसके बाद माताजी का मंगल प्रवचन हुआ।</p>
<p><strong>अपने को जानो पहचानो और उसमे लीन हो जाओ </strong></p>
<p>माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि यह जीव अपने स्वभाव को नहीं जानता पर दूसरों के स्वभाव को जानने में उसको मजा आता है। एक व्यक्ति जंगल के वृक्ष पर बैठा-बैठा विचार करता है। पूरा जंगल जल रहा है हाथी,शेर,हिरण सब जल रहें हैं पर वह मूर्ख यह विचार नहीं करता कि यह आग मुझे भी जला देगी। उसी प्रकार यह राग द्वेष परिणाम मेरे भी दुःख के कारण है, यह नहीं जानता और उसमें मस्त रहता है। भैया अपने को जानो पहचानो और उसमे लीन हो जाओ यही मुक्ति का मार्ग है एवं इस अवसर पर मंडीदीप से पधारे हुए श्रद्धालुओं का दिगंबर जैन समाज नौगामा की ओर से तिलक लगाकर उपरना उड़ाकर स्वागत अभिनंदन किया गया एवं माताजी को श्रीफल भेंटकर ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए निवेदन किया गया। शाम को आचार्य भक्ति के बाद जबलपुर से पधारे हुए प्रदीप भैया पीयूष का मंगल प्रवचन हुआ। मंदिर में बालिका मंडल द्वारा भक्तामर के 48 दीप विधान के 48 दीप प्रज्वलित किए गए।</p>
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		<title>भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक 16 अप्रैल को: सिद्धांचल पर्वत पर होगा विशेष कार्यक्रम और विधान  </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 06:25:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस को सिद्धांचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया जाएगा। समाजसेवी सौरभ जैन (वरेह वाले) अंबाह ने बताया कि भगवान नमिनाथ की विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। मुरैना/ग्वालियर से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस को सिद्धांचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया जाएगा। समाजसेवी सौरभ जैन (वरेह वाले) अंबाह ने बताया कि भगवान नमिनाथ की विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना/ग्वालियर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  मुरैना/ग्वालियर</strong>। जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस को सिद्धांचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया जाएगा। समाजसेवी सौरभ जैन (वरेह वाले) अंबाह ने बताया कि भगवान नमिनाथ की विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। उसके बाद विधान, पूजन और निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। देव शास्त्र गुरु भक्त वीरेंद्र जैन, सुनील जैन, सौरभ जैन, हिमांशु जैन, अंश जैन, चिराग जैन, बाबू जैन, नीति जैन, याना जैन, बाबा ने धूमधाम से मोक्ष कल्याणक मानने की बात कही। इस अतिशय क्षेत्र पर आए दिन अतिशय होता रहता है। नाग देवता भगवान के दर्शन और क्षेत्र की रक्षा के लिए आते रहते है। 2451 वर्ष के केवली काल के बाद, जब आयुकर्म एक माह शेष रह गया तब 21 वें तीर्थंकर श्री नमिनाथ जी पहुंच गए श्री सम्मेद शिखरजी और वैशाख कृष्ण की चतुर्दशी, जो इस वर्ष 16 अप्रैल को है, उसी दिन खड़गासन से 1000 मुनिराजों के साथ मित्रधर कूट से सिद्धालय गए। इनका तीर्थ प्रवर्तन काल 5 लाख, 1800 वर्ष का रहा। मित्रधर कूट की निर्मल भाव से वंदना करने से एक करोड़ उपवास का फल मिलता है और इसी कूट से 900 कोड़ाकोड़ी, एक अरब, 45 लाख, 7 हजार 940 मुनिराज सिद्धालय गए हैं।</p>
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		<title>सनावद में भक्ति भाव से मनाया मोक्ष कल्याणक :  निर्वाण लाडू चढ़ाकर पाठ किया  </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:45:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक सभी समाजजनों बड़े हर्षोल्लास से मनाया। सनावद से पढ़िए,सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक सभी समाजजनों बड़े हर्षोल्लास से मनाया। सन्मति जैन काका ने बताया कि आज चैत्र शुक्ल छठ के दिन जैन धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक सभी समाजजनों बड़े हर्षोल्लास से मनाया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए,सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक सभी समाजजनों बड़े हर्षोल्लास से मनाया। सन्मति जैन काका ने बताया कि आज चैत्र शुक्ल छठ के दिन जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक सभी समाजजनों ने बसे हर्षोल्लास से मनाया।</p>
<p>इस अवसर पर सभी जैन मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजन कर निर्वाण कांड का वाचन कर लाडू समर्पित किया गया। इस अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में रजत जैन, सुरेश मुंशी, पवन धनोते, रवींद्र जैन सुनील पावणा, नवनीत जैन, रदेश जैन राजकुमारी जैन, हेमा मुशी, सरला जैन, अंजू पाटनी, मधु भूच, पुष्पा जैन सुरेखा पाटनी, मोहिनी जैन उपस्थित थी।</p>
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		<title>19वें तीर्थंकर भगवान श्री मल्लिनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया : मंडल विधान और विभिन्न कार्यक्रम किए, निर्वाण लाडू चढ़ाया </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 17:38:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समर्थ सिटी का दसवें स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें मूलनायक भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी का मंडल विधान के बाद जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान श्री मल्लिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटौदी की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समर्थ सिटी का दसवें स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें मूलनायक भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी का मंडल विधान के बाद जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान श्री मल्लिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, ओम पाटौदी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समर्थ सिटी का दसवें स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें मूलनायक भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी का मंडल विधान के बाद जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान श्री मल्लिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। मंदिर प्रबंधन के प्रमुख शैलेश चंदेरिया ने बताया कि प्राचीन भरतक्षेत्र में अंगदेश की मिथिलापुर में इक्ष्वाकु वंश के राजा विजयराज एवं माता वर्मिला (वप्रा) के घर जन्मे बालक ने आगे चलकर युवावस्था में राज काज नहीं करते हुए दीक्षा लेकर केवल ज्ञान की प्राप्ति करके भव्य जीवों को धर्म का सही मार्ग बताया और अन्य समय में प्रसिद्ध जैन सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर जी के संबल कूट से फाल्गुन शुक्ल पंचमी के दिन मोक्ष की प्राप्ति की। मोक्ष कल्याणक दिवस पर निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य अलका प्राची जैन परिवार, रक्षा आरज़ू जैन परिवार एवं कीर्ति ऋषिका चहेती, धवल पाटोदी परिवार को प्राप्त हुआ। इसमें पवन मोठिया, चिराग मनोज जैन, ईसाक अभिनेष जैन, सुभाष जैन, श्रेय जैन, धीरज जैन, शुभम जैन, विकास जैन, मनोज हर्ष मोदी भी सहयोगी बने।</p>
<p><strong>इन्होंने अर्जित किया सौभाग्य </strong></p>
<p>इसी प्रकार मंडल विधान में द्रव्य दान का सौभाग्य प्राप्तकर पुण्य अर्जित किया डॉ. सतीश कुमार जैन, गोल्डी अनुप जैन, धरमचंद जैन समर्थ रेजीडेंसी, रेखा गिरनारी जैन हाईलिंक, अनीता संजय अजमेरा, सविता संजय जैन ड्रीम सिटी, आयुषी जैन, अनुज जैन, गंगवाल, शुभम् लक्षित जैन ने। इसी प्रकार मंडल विधान कार्यक्रम में मंडल पर कलश स्थापना का लाभ सविता जैन, अनिता जैन, अनुभा जैन, ऋचा जैन एवं रैना दीदी परिवार ने प्राप्त किया। मंडल पर दीप प्रज्वलित करने का सौभाग्य मन्नुलाला जी जैन परिवार को मिला।</p>
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		<title>भगवान चंद्रप्रभ जी का मोक्ष कल्याणक 23 फरवरी को: तिथि के अनुसार फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को आता है </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 09:30:51 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर श्री चंद्रप्रभु जी का मोक्ष कल्याणक 23 फरवरी को मनाया जा रहा है। तिथि के अनुसार वे फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को ललित कूट से मोक्ष को गए थे। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर श्री चंद्रप्रभु जी का मोक्ष कल्याणक 23 फरवरी को मनाया जा रहा है। तिथि के अनुसार वे फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को ललित कूट से मोक्ष को गए थे। भगवान चंद्रप्रभु जी के मोक्ष कल्याणक पर दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण कांड पाठ तथा निर्वाण लाडू चढ़ाकर आराधना भक्ति की जा रही है। जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का मोक्ष कल्याणक दिवस सोमवार को भक्तिभाव से मनाया जा रहा है। इस मौके पर शहर के दिगंबर जैन मंदिरों में मंत्रोच्चार के साथ भगवान चंद्रप्रभु की अष्टद्रव्य से विशेष पूजा-अर्चना होगी। मोक्ष कल्याणक अर्घ्य एवं निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। इससे पहले श्रीजी के अभिषेक एवं विश्व में सुख समृद्धि एवं शांति की मंगल कामना के साथ शांतिधारा की जाएगी।</p>
<p><strong>एक हजार महामुनिराजों के साथ मोक्ष </strong></p>
<p>जैन धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान चंद्रप्रभु जी एक माह के भोग निवृतिकाल से पूर्व श्री सम्मेद शिखरजी की इस पूरब में बनी ललितकूट पर पहुंचे और एक हजार महामुनिराजों के साथ फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को सिद्धालय गए। भगवान चंद्रभु जी का तीर्थ प्रवर्तन काल 90 करोड़ सागर चार पूर्वांग रहा। जानकारी के अनुसार ललित कूट को 5 वर्ष पहले तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने आकर्षक रूप दिया है। अब स्वर्ण भद्र कूट की तरह यहां की सीढ़ियां भी आरामदायक और चौड़ी हो गई हैं।</p>
<p><strong>सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ जी के बाद हुआ था जन्म </strong></p>
<p>तथ्यों के अनुसार तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी का जन्म सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ जी के नौ सौ करोड़ सागर बीत जाने के बाद चंद्रपुर नगर में महारानी लक्ष्मणादेवी के गर्भ से पौष कृष्झा एाकदशी को हुआ था। आपकी आयु 10 लाख वर्ष पूर्व थी और कद उतंग 900फीट। उल्लेखनीय यह है कि ललितकूट से 984 अरब, 72 करोड़ 80 लाख 84 हजार 595 मुनिराज मोक्ष को गए हैं।</p>
<p><strong>निर्मल भाव से वंदना का मिलता है फल </strong></p>
<p>जैन धर्म की मान्यता है कि ललितकूट की निर्मल भाव से वंदना करने से 96 लाख प्रोषध उपवास का फल मिलता है। यह कूट जिस तरह पारस प्रभु के बिल्कुल पश्चिम में दाईं ओर आती है। यह कूट पूर्व में अन्य कूटों से 2 किमी दूर है। ऐसी मान्यता है कि भगवान की पवित्र आत्मा देश के झारखंड राज्य के शाश्वत सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेद शिखर पर्वत में ललितकूट में बने चरण कमल से ऊर्ध्व में 7 राजू ऊपर सिद्ध शिला से 37लाख 87 हजार 498 धनुष एक हाथ ऊपर विराजमान है।</p>
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