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	<title>Namokar Mantra &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Namokar Mantra &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि सेवा भक्त परिवार&quot; की अनूठी पहल : युवा पीढ़ी ने संभाली धर्म की पताका, हर सप्ताह जैन मंदिरों में अभिषेक कर धर्म से जुड़ने, समाज को जोड़ने का संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 05:55:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ट्रांस यमुना कॉलोनी के जैन समाज के युवाओं ने धर्म और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल शुरू की है। इन युवाओं ने अपने समूह का नाम मुनि सेवा भक्त परिवार रखा है। आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। ट्रांस यमुना कॉलोनी के जैन समाज के युवाओं ने धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ट्रांस यमुना कॉलोनी के जैन समाज के युवाओं ने धर्म और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल शुरू की है। इन युवाओं ने अपने समूह का नाम मुनि सेवा भक्त परिवार रखा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> ट्रांस यमुना कॉलोनी के जैन समाज के युवाओं ने धर्म और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल शुरू की है।इन युवाओं ने अपने समूह का नाम मुनि सेवा भक्त परिवार रखा है और संकल्प लिया है कि वे प्रत्येक सप्ताह एक दिन सामूहिक रूप से शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में जाकर भगवान का अभिषेक करेंगे। इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि युवाओं के मन में धर्म के प्रति आस्था और जुड़ाव को मजबूत करना भी है।</p>
<p><strong>दूसरों को प्रेरित कर धर्म से जोड़ना</strong></p>
<p>भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां युवा वर्ग धर्म से दूर होता जा रहा है, वहीं यह समूह उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। समूह के सदस्यों का कहना है कि इस अभियान के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं खुद धर्म से जुड़े रहना, दूसरों को प्रेरित कर धर्म से जोड़ना और उन उपेक्षित मंदिरों में भी रौनक लौटाना जहां श्रद्धालुओं की संख्या कम रहती है। प्रत्येक सप्ताह सुबह सात बजे सफेद वस्त्र धारण कर युवा श्रद्धालु शुद्ध भावनाओं के साथ मंदिर पहुंचते हैं।</p>
<p><strong>जिन शासन की ऊर्जा और आध्यात्मिक उल्लास</strong></p>
<p>णमोकार मंत्र की मधुर गूंज और केसर-जल से भगवान का अभिषेक करते हुए जब 20 से 25 युवा एक साथ भक्ति में लीन होते हैं, तो पूरा मंदिर जिन शासन की ऊर्जा और आध्यात्मिक उल्लास से भर उठता है। यह पहल समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दे रही है कि धर्म केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी की शक्ति और संस्कारों का आधार भी है।</p>
<p><strong> इन युवाओं ने बढ़ाए कदम</strong></p>
<p>यदि युवा आगे बढ़कर धर्म का दायित्व निभाएं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो सकती है। इस अनूठे धार्मिक अभियान में राजीव जैन, बिप्लव जैन (विमल परिवार), संदीप जैन, मोहित जैन, शेखर जैन, पंकज जैन, सीए प्रतीक जैन, कृष जैन, वैभव जैन, दर्पण जैन सहित कई युवा सक्रिय रूप से सहभागिता निभा रहे हैं।</p>
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		<title>महरौनी में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन : धर्म और संस्कारों से जुड़ रही नई पीढ़ी </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:39:49 +0000</pubDate>
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<p><strong>ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों, युवाओं एवं महिलाओं को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर, महरौनी में आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों, युवाओं एवं महिलाओं को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर, महरौनी में आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शिविर में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तथा बालक-बालिकाएं सहभागिता कर धार्मिक, सामाजिक एवं नैतिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से संचालित इस संस्कार शिविर का मार्गदर्शन सांगानेर के विद्वान प्रशिक्षक अतिशय जैन एवं अक्षय जैन द्वारा किया जा रहा है। उनके निर्देशन में प्रतिभागियों को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, आचार-विचार, संस्कारों, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक दायित्वों तथा आदर्श जीवनशैली के विषय में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। शिविर में प्रतिदिन प्रार्थना, नमोकार मंत्र, स्वाध्याय, धार्मिक प्रश्नोत्तरी, संस्कार गीत, जैन इतिहास, तीर्थंकरों के जीवन प्रसंग तथा व्यवहारिक जीवन में धर्म के महत्व पर आधारित विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों को खेल-खेल में नैतिक शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहज रूप से आत्मसात कर सकें। वहीं महिलाओं एवं श्राविकाओं को पारिवारिक संस्कार, सामाजिक समरसता तथा आध्यात्मिक जीवन के महत्व से अवगत कराया जा रहा है।</p>
<p><strong>महिलाओं के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक</strong></p>
<p>अखिल भारतीय जैन महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों को मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से हटाकर संस्कारों की ओर प्रेरित करना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को लेकर आयोजित यह शिक्षण शिविर बच्चों एवं महिलाओं के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों में धर्म के प्रति आस्था, अनुशासन, सेवा, सदाचार एवं आत्मविकास की भावना विकसित हो रही है। शिविर में भाग लेने वाले बच्चों और श्रावक-श्राविकाओं ने बताया कि उन्हें यहां धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हो रहा है। शिविर के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, जैन परंपरा एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में संचालित यह शिविर क्षेत्र में संस्कार निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में बच्चे, युवा और महिलाएं प्राप्त कर रहे हैं।</p>
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		<title>णमोकार मंत्र धर्म से आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है : श्रद्धा को जागृत करने का भी माध्यम है णमोकार- आचार्य श्री वर्धमान सागर जी </title>
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		<pubDate>Sat, 23 May 2026 14:15:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चंद्रपुरी बड़ के बालाजी की पाठशाला में दिया पूरा पाठ अत्यंत गूढ़ और सारभूत है। जिसमें ॐ, नमस्कार मंत्र, पंच परमेष्ठी और पंचरंगी ध्वज का अद्भुतआध्यात्मिक रहस्य समझाया है। जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चंद्रपुरी बड़ के बालाजी की पाठशाला में दिया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चंद्रपुरी बड़ के बालाजी की पाठशाला में दिया पूरा पाठ अत्यंत गूढ़ और सारभूत है। जिसमें ॐ, नमस्कार मंत्र, पंच परमेष्ठी और पंचरंगी ध्वज का अद्भुतआध्यात्मिक रहस्य समझाया है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चंद्रपुरी बड़ के बालाजी की पाठशाला में दिया पूरा पाठ अत्यंत गूढ़ और सारभूत है। जिसमें ॐ, नमस्कार मंत्र, पंच परमेष्ठी और पंचरंगी ध्वज का अद्भुतआध्यात्मिक रहस्य समझाया है।इसे सरल और व्यवस्थित रूप से ऐसे समझाया गया जैसे दूध का मंथन करने पर मक्खन निकलता है,मक्खन को तपाने पर घी प्राप्त होता है। वैसे ही द्वादशांग जिनवाणी का मंथन करने पर उसका सार नमस्कार मंत्र है और नमस्कार मंत्र का सार “ॐ” है। ॐ” की रचना कैसे हुई?पंच परमेष्ठी के प्रथम अक्षरों से “ॐ” बना है 1. अरिहंत परमेष्ठी “अ”. सिद्ध परमेष्ठी (अशरीरी) “अ”आचार्य परमेष्ठी “आ” ये तीनों स्वर मिलकर संस्कृत व्याकरण के अनुसार “आ” बनते हैं। उपाध्याय परमेष्ठी “ऊ”“आ” + “ऊ” = “ओ” साधु परमेष्ठी (मुनि) “म् इस प्रकार अ + अ + आ + ऊ + म् = ॐ पंच परमेष्ठी और पंच रंगपंच परमेष्ठियों के साथ पाँच रंगों का भी संबंध बताया गया। अरिहंत,नमो अरिहंताणं, श्वेत,सिद्ध नमो सिद्धाणं लाल आचार्य नमो आयरियाणं पीला उपाध्याय नमो उवज्झायाणं हरा साधु नमो लोएसव्वसाहूणं काला / नीला इसी आधार पर जैन पंचरंगी ध्वज बना।</p>
<p>अरिहंत का चिंतन चारों ओर श्वेत प्रकाश का भाव ,सिद्धों का चिंतन में लाल आभा का अनुभव, आचार्यों का चिंतन में पीत वर्ण का ध्यान ,उपाध्यायों का चिंतन मेंहरित रंग का भाव साधुओं के चिंतन में नीले/काले गंभीर रंग का चिंतन करें। यह केवल रंग नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भाव-जागरण की साधना है। नमस्कार मंत्र समस्त निर्वाणियों का सार इस लोक और परलोक का सुधारक है। श्रद्धा और विश्वास से जपा जाए तो अद्भुत प्रभाव देता है।* इसमें सांसारिक कामना नहीं, बल्कि आत्म कल्याण का भाव है। मुख्य संदेश नमस्कार मंत्र कोई साधारण शब्द नहीं,यह पंच परमेष्ठियों का वाचक है। समस्त आगम और जिनवाणी का सार है। श्रद्धा, भाव और ध्यान से इसका प्रभाव प्रकट होता है। “नमोकार मंत्र आत्मा को निर्मल करने वाला,श्रद्धा को जागृत करने वालाऔर मोक्षमार्ग की ओर ले जाने वाला महामंत्र है।</p>
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		<title>अपने नगरों में क्यों आवश्यक हैं धार्मिक शिक्षण शिविर : जिस समाज में संस्कार जीवित रहते हैं, ‎वहीं धर्म जीवित रहता है ‎और जहाँ धर्म जीवित रहता है  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/why_are_religious_education_camps_essential_in_our_cities/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:29:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म, ‎एक ऐसा धर्म, जो अपनी प्राचीनता, महानता और अद्वितीय सिद्धांतों के कारण सम्पूर्ण विश्व में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ‎जिसके प्रत्येक आचार्य, प्रत्येक संत और प्रत्येक शास्त्र मानव जीवन को संयम, करुणा और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करते हैं। ‎मुरैना/सांगानेर से पढ़िए, अंशुल जैन शास्त्री का आलेख&#8230;प्रस्तुति&#8230;मनोज जैन नायक की।  [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म, ‎एक ऐसा धर्म, जो अपनी प्राचीनता, महानता और अद्वितीय सिद्धांतों के कारण सम्पूर्ण विश्व में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ‎जिसके प्रत्येक आचार्य, प्रत्येक संत और प्रत्येक शास्त्र मानव जीवन को संयम, करुणा और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करते हैं। ‎<span style="color: #ff0000">मुरैना/सांगानेर से पढ़िए, अंशुल जैन शास्त्री का आलेख&#8230;प्रस्तुति&#8230;मनोज जैन नायक की। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सांगानेर।</strong> जैन धर्म, ‎एक ऐसा धर्म, जो अपनी प्राचीनता, महानता और अद्वितीय सिद्धांतों के कारण सम्पूर्ण विश्व में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ‎जिसके प्रत्येक आचार्य, प्रत्येक संत और प्रत्येक शास्त्र मानव जीवन को संयम, करुणा और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करते हैं। ‎परंतु आज का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या आने वाली नई पीढ़ी इस अमूल्य धरोहर को जान पा रही है? ‎क्या उन्हें जिनवाणी का ज्ञान है? ‎क्या वे णमोकार मंत्र का महत्व समझते हैं? ‎क्या उन्हें अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-विधि और जैन सिद्धांतों का बोध है? ‎यदि उत्तर “नहीं” है तो यह केवल एक कमी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक गंभीर संकेत है। ‎नई पीढ़ी ही किसी भी समाज, संस्कृति और धर्म का भविष्य होती है। ‎यदि वही अपने धर्म से अपरिचित रह जाए, तो धीरे-धीरे परंपराएं केवल पुस्तकों तक सीमित होकर रह जाती हैं। ‎फिर धर्म जीवन का मार्ग नहीं, केवल नाममात्र की पहचान बनकर रह जाता है। ‎आज स्थिति यह है कि अनेक लोग जैन धर्म के मूल सिद्धांतों से दूर होते जा रहे हैं। ‎रात्रि भोजन, आवश्यक मर्यादाओं की उपेक्षा और धार्मिक ज्ञान से दूरी सामान्य बात बनती जा रही है। ‎ऐसे समय में केवल चिंतन पर्याप्त नहीं, बल्कि जागरण आवश्यक है। ‎और यही जागरण “शिविर” के माध्यम से संभव हो सकता है। अपने नगर, अपने मंदिर और अपने समाज में लगने वाला एक छोटा-सा शिविर केवल कुछ दिनों का आयोजन नहीं होता, ‎बल्कि वह नई पीढ़ी के भीतर संस्कारों का बीजारोपण होता है। ‎वहीं बालक पहली बार समझता है कि उसका धर्म क्या है। ‎वहीं उसे ज्ञात होता है कि शास्त्र केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का आधार हैं। ‎वहीं उसे संयम, अनुशासन, पूजा, मंत्र और संस्कारों का वास्तविक अर्थ समझ आता है।</p>
<p><strong>‎धन समाप्त हो सकता है, ‎परंतु संस्कार नहीं </strong></p>
<p>माता-पिता अपने बच्चों के लिए धन, संपत्ति और सुख-सुविधाएँ जुटाने में जीवन लगा देते हैं। ‎परंतु सत्य यह है कि धन केवल कुछ समय तक सहारा देता है, ‎जबकि धर्म से प्राप्त संस्कार जीवनभर मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। ‎धन समाप्त हो सकता है, ‎परंतु संस्कार कभी समाप्त नहीं होते। ‎इसलिए प्रत्येक माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को केवल भौतिक सुविधाएँ ही नहीं, बल्कि धर्म का प्रकाश भी दें। ‎यदि आने वाली पीढ़ी को अपने धर्म का ज्ञान ही न हो, तो यह केवल बच्चों की कमी नहीं, बल्कि समाज की सबसे बड़ी विफलता होगी। ‎अपने नगर में शिविर लगवाना केवल एक आयोजन करवाना नहीं है, ‎बल्कि अपने धर्म, अपनी संस्कृति और अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है। ‎क्योंकि जिस समाज में संस्कार जीवित रहते हैं, ‎वहीं धर्म जीवित रहता है ‎और जहाँ धर्म जीवित रहता है ‎वहीं समाज का भविष्य उज्ज्वल बनता है। ‎इसलिए आवश्यक है कि हमारे मंदिरों में, हमारे गाँवों में और हमारे नगरों में शिविर अवश्य लगें, ‎ताकि जैन धर्म केवल सीमित समाज तक न रह जाए, ‎अपितु जन-जन तक पहुँचे, ‎और प्रत्येक व्यक्ति उसके सिद्धांतों को जानकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सके। ‎शिविर केवल शिक्षा नहीं देते, ‎वे पीढ़ियों का भविष्य गढ़ते हैं।</p>
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		<title>भारतीय जैन मिलन का 61वां स्थापना दिवस मनाया: णमोकार मंत्र और भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया  </title>
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		<pubDate>Mon, 04 May 2026 08:22:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा? वीरांगना सरिता जैन ने संस्था की सभी सदस्यों से कहा कि हमें ऐसी जगह सकोरे रखना चाहिए, जहां हम पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें। मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230; मुरैना। कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा? वीरांगना सरिता जैन ने संस्था की सभी सदस्यों से कहा कि हमें ऐसी जगह सकोरे रखना चाहिए, जहां हम पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा?</p>
<p>वीरांगना सरिता जैन ने संस्था की सभी सदस्यों से कहा कि हमें ऐसी जगह सकोरे रखना चाहिए, जहां हम पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें। सभी महिलाओं ने अपने-अपने घरों में बगीचों में पक्षियों के लिए के लिए दाना-पानी की व्यवस्था का संकल्प लिया कि हम नित्य नियम से पानी भरेंगे। शाखा की सचिव वीरांगना शीतल जैन ने घर का बना हुआ केक सजाकर भारतीय जैन मिलन के 61वें स्थापना दिवस को मनाया। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज के ‘अवतरण दिवस’ के उपलक्ष्य में भक्ति एवं आराधना कार्यक्रम के अंतर्गत णमोकार मंत्र और भक्तामर स्तोत्र का पाठ भी किया गया भक्ति भाव से सभी सदस्यों ने आरती भी की।</p>
<p><strong>शाखा के पूर्व अध्यक्षों का सम्मान</strong></p>
<p>शाखा की पूर्व अध्यक्ष वीरांगना सरिता जैन, वीरांगना बबीता जैन, जैन मिलन राजूल की पूर्व अध्यक्ष सीमा जैन का सभी सदस्यों ने मिलकर माल्यार्पण, पट्टिका पहनाकर, तिलक लगाकर गिफ्ट देकर सम्मान किया। इस अवसर पर भारतीय जैन मिलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारतीय जैन मिलन राष्ट्रीय पूर्व अध्यक्ष वीर सुमेरचंद जैन पाटनी, वीर सत्येंद्र कुमार जैन एडवोकेट, वीर सुरेशचंद जैन, वीर जयचंद जैन अध्यक्षों के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की गई।</p>
<p>कार्यक्रम में ग्रुप फाउंडर सरिता जैन तीर्थ बचाओ अभियान की चेयरपर्सन बबीता जैन, शाखा अध्यक्ष बबीता जैन, सचिव शीतल जैन, कोषाध्यक्ष श्वेता जैन, कल्पना जैन, सीमा जैन, प्रीति जैन, नीति जैन, किरण जैन सीमा जैन, श्वेता जैन सभी सदस्य उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भारतीय जैन मिलन का 61वां स्थापना दिवस मनाया: णमोकार मंत्र और भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया  </title>
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		<pubDate>Mon, 04 May 2026 07:31:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा?  वीरांगना सरिता जैन ने संस्था की सभी सदस्यों से कहा कि हमें ऐसी जगह सकोरे रखना चाहिए, जहां हम पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें। मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230; मुरैना। कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा? </strong></p>
<p><strong>वीरांगना सरिता जैन ने संस्था की सभी सदस्यों से कहा कि हमें ऐसी जगह सकोरे रखना चाहिए, जहां हम पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें। </strong><span style="color: #ff0000"><strong>मुरैना से पढ़िए, यह खबर</strong>&#8230;</span></p>
<hr />
<p>मुरैना। कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा?</p>
<p>वीरांगना सरिता जैन ने संस्था की सभी सदस्यों से कहा कि हमें ऐसी जगह सकोरे रखना चाहिए, जहां हम पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें। सभी महिलाओं ने अपने-अपने घरों में बगीचों में पक्षियों के लिए के लिए दाना-पानी की व्यवस्था का संकल्प लिया कि हम नित्य नियम से पानी भरेंगे। शाखा की सचिव वीरांगना शीतल जैन ने घर का बना हुआ केक सजाकर भारतीय जैन मिलन के 61वें स्थापना दिवस को मनाया। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज के ‘अवतरण दिवस’ के उपलक्ष्य में भक्ति एवं आराधना कार्यक्रम के अंतर्गत णमोकार मंत्र और भक्तामर स्तोत्र का पाठ भी किया गया भक्ति भाव से सभी सदस्यों ने आरती भी की।</p>
<p><strong>शाखा के पूर्व अध्यक्षों का सम्मान</strong></p>
<p>शाखा की पूर्व अध्यक्ष वीरांगना सरिता जैन, वीरांगना बबीता जैन, जैन मिलन राजूल की पूर्व अध्यक्ष सीमा जैन का सभी सदस्यों ने मिलकर माल्यार्पण, पट्टिका पहनाकर, तिलक लगाकर गिफ्ट देकर सम्मान किया। इस अवसर पर भारतीय जैन मिलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारतीय जैन मिलन राष्ट्रीय पूर्व अध्यक्ष वीर सुमेरचंद जैन पाटनी, वीर सत्येंद्र कुमार जैन एडवोकेट, वीर सुरेशचंद जैन, वीर जयचंद जैन अध्यक्षों के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की गई।</p>
<p>कार्यक्रम में ग्रुप फाउंडर सरिता जैन तीर्थ बचाओ अभियान की चेयरपर्सन बबीता जैन, शाखा अध्यक्ष बबीता जैन, सचिव शीतल जैन, कोषाध्यक्ष श्वेता जैन, कल्पना जैन, सीमा जैन, प्रीति जैन, नीति जैन, किरण जैन सीमा जैन, श्वेता जैन सभी सदस्य उपस्थित रहे।</p>
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		<title>णमोकार मंत्र एक आसन पर एकाग्रता पूर्वक करने से मिलता पुण्य : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने णमोकार मंत्र के 35 अक्षरों का बताया महत्व  </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 13:19:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर में विराजित हैं। आज की धर्मसभा में उन्होंने णमोकार मंत्र का महत्व बताया। आचार्यश्री ने कहा कि छोटा सा णमोकार मंत्र 35 अक्षरों का है। जिसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्व साधु, पंच परमेष्ठि पद है। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर में विराजित हैं। आज की धर्मसभा में उन्होंने णमोकार मंत्र का महत्व बताया। आचार्यश्री ने कहा कि छोटा सा णमोकार मंत्र 35 अक्षरों का है। जिसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्व साधु, पंच परमेष्ठि पद है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर में विराजित हैं। आज की धर्मसभा में उन्होंने णमोकार मंत्र का महत्व बताया। आचार्यश्री ने कहा कि छोटा सा णमोकार मंत्र 35 अक्षरों का है। जिसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्व साधु, पंच परमेष्ठि पद है। णमोकार मंत्र का भक्ति और श्रद्धा से मनन चिंतन करने से यह मंत्र याद होकर मन में वह स्थिर हो जाएगा। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में लौकिक, घर के जो भी कार्य करते हैं, उसका फल हम प्राप्त करते हैं किंतु, आत्मा के हित के कार्य हम भूल जाते हैं। जो हमें कष्ट देता है, उसे याद करते हैं किंतु अच्छे आत्मा हित के प्रवचन भूल जाते हैं।</p>
<p>याद नहीं रखते हैं। सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि आत्म हित के कार्य मन वचन काय शरीर की स्थिरता पूर्वक करना चाहिए। जिस प्रकार खारे समुद्र के पानी को मंथन करने से अमृत की प्राप्ति हुई थी। उसी प्रकार देव शास्त्र और गुरुओं की वाणी का चिंतन रूपी मंथन करने से पुण्य रूपी नवनीत प्राप्त होता हैं। आर्यिका श्री दिव्य यश मति जी के विगत दिन केश लोचन हुए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को प्रतिदिन जयपुर सहित अनेक नगरों के भक्त दर्शन कर अपने मंदिर कॉलोनी आने हेतु निमंत्रित कर रहे हैं।</p>
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		<title>णमोकार मंत्र में पांच परमेष्ठि को है नमन: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुआ सामूहिक जाप, श्रद्धालुओं ने किया पुण्यार्जन  </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:27:19 +0000</pubDate>
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<p><strong>महावीर जैन शिक्षा परिषद के तत्वावधान में श्री महावीर स्कूल सी स्कीम में सामूहिक णमोकार मंत्र के पाठ के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित पधारे। इस अवसर पर आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि णमोकार मंत्र में पांच परमेष्ठि को नमन किया जाता है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> महावीर जैन शिक्षा परिषद के तत्वावधान में श्री महावीर स्कूल सी स्कीम में सामूहिक णमोकार मंत्र के पाठ के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित पधारे। इस अवसर पर आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि णमोकार मंत्र में पांच परमेष्ठि को नमन किया जाता है। अरिहंत, सिद्ध ,आचार्य ,उपाध्याय और सर्व साधु इन परम पद को पाने के लिए आपको धर्म की राह पर चलकर भावना बनाकर जीवन को त्याग की ओर करने का पुरुषार्थ करना होगा। आचार्य श्री ने कहा कि विश्व के भीतर अनेक पद है, उन पदों के लिए होड़ लगती है। लौकिक शिक्षा में भी उच्च पद आर्थिक लक्ष्य को रखकर शिक्षा प्राप्त की जाती है। जीवन को संस्कारित बनाकर स्वयं के लिए, परिवार, समाज, राष्ट्र हित की भावना जागृत होना चाहिए। उमरावमल संघी, सुनील बक्शी ,महेश काला, राजेश सेठी ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने णमोकार मंत्र को अनादि निधन मंत्र बताया। जब से सूर्य ,चंद्रमा, हवा, अग्नि ,वृक्ष ,सृष्टि निर्मित है तब से यह मंत्र अनादि निधन है। स्वयं से होने के कारण यह शाश्वत और अनिष्ट है। जीवन में सभी का लक्ष्य सकारात्मक होकर जीवन का नवनीत प्राप्त करने का लक्ष्य होना चाहिए।</p>
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		<title>आचार्यश्री प्रज्ञासागर जी ने दिया वात्सल्य रात्रि भोजन त्याग का सूत्र : जिनधर्म पदयात्रा रवाना, पहला पड़ाव बड़गांव में </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 09:38:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज के सान्निध्य में कोटा से अतिशय क्षेत्र जहाजपुर के लिए जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा रविवार को शुरू हुई। जो रिद्धि-सिद्धि नगर से रवाना होकर पहले दिन बड़गांव पहुंची। 19 दिसंबर तक यह पदयात्रा जहाजपुर पहुंचेगी। कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; कोटा। तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज के सान्निध्य में कोटा से अतिशय क्षेत्र जहाजपुर के लिए जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा रविवार को शुरू हुई। जो रिद्धि-सिद्धि नगर से रवाना होकर पहले दिन बड़गांव पहुंची। 19 दिसंबर तक यह पदयात्रा जहाजपुर पहुंचेगी। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कोटा।</strong> तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज के सान्निध्य में कोटा से अतिशय क्षेत्र जहाजपुर के लिए जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा रविवार को शुरू हुई। जो रिद्धि-सिद्धि नगर से रवाना होकर पहले दिन बड़गांव पहुंची। पदयात्रा संयोजक मिथुन मित्तल ने बताया कि 19 दिसंबर तक यह पदयात्रा जहाजपुर पहुंचेगी। पदयात्रा के दौरान धर्मध्वज, रथ और वाद्य यंत्रों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। मार्ग में श्रावकों ने गुरुदेव का पाद प्रक्षालन, आरती की तथा पुष्पवर्षा कर जयकारे लगाए। पुण्यार्जक परिवार बग्घी पर सवार रहा। आचार्यश्री ने गीतात्मक शैली में कहा- &#8216;मैं जा रहा हूं जाते-जाते क्या दूं, अपने प्यार को आशीर्वाद के रूप में दूं।&#8217; उन्होंने आचार्य वीरसेन के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि का प्रमाण मृत्यु के समय णमोकार मंत्र का स्मरण है। कबीर के दोहे ‘ढाई आखर प्रेम का’ के माध्यम से उन्होंने वात्सल्य और प्रेम को धर्म का मूल बताया। समाज को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों का चयन होना चाहिए चुनाव नहीं</p>
<p><strong>हरित संदेश, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प </strong></p>
<p>चेयरमेन यतीश जैन खेड़ावाला ने बताया कि पदयात्रा के दौरान तय किया कि यात्रा मार्ग में पौधे लगाए जाएंगे। यह यात्रा हरित क्रांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। महामंत्री नवीन दोराया ने बताया कि पदयात्रा में रात्रि भोजन निषेध है।</p>
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		<title>जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा 20 दिसंबर तक :  प्रेम, तप और पर्यावरण संरक्षण का संगम बनी जिनधर्म पदयात्रा </title>
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		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 07:46:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज के पावन सानिध्य में कोटा से जहाजपुर तक आयोजित जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा ने जैन समाज को आस्था, प्रेम, संयम और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। कोटा से पढ़िए, पारस जैन, पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; कोटा। आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज के पावन सानिध्य में कोटा से जहाजपुर तक आयोजित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज के पावन सानिध्य में कोटा से जहाजपुर तक आयोजित जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा ने जैन समाज को आस्था, प्रेम, संयम और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन, पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कोटा।</strong> आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज के पावन सानिध्य में कोटा से जहाजपुर तक आयोजित जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा ने जैन समाज को आस्था, प्रेम, संयम और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। प्रवचन में गुरुदेव ने अपने प्रवचन में कहा कि चातुर्मास के बाद साधुओं का प्रस्थान विहार कहलाता है, किंतु जब श्रावक भी साधना भाव से साथ चलें तो वह पदयात्रा बन जाती है। यह पदयात्रा परमात्मा की पदयात्रा, जिनधर्म प्रभावना यात्रा है। उन्होंने गीतात्मक शैली में कहा—&#8217;मैं जा रहा हूं, जाते-जाते क्या दूं, अपने प्यार को आशीर्वाद के रूप में दूं।&#8217; उन्होंने आचार्य वीरसेन के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि का प्रमाण मृत्यु के समय नमोकार मंत्र का स्मरण है। कबीर के दोहे “ढाई आखर प्रेम का…” के माध्यम से उन्होंने वात्सल्य और प्रेम को धर्म का मूल बताया। समाज को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों का चयन होना चाहिए, चुनाव नहीं। अध्यक्ष लोकेश जैन सीसवाली ने बताया कि पदयात्रा के दौरान धर्मध्वज, रथ और वाद्य यंत्रों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मार्ग में श्रावकों ने गुरूदेव का पाद प्रक्षालन, आरती की तथा पुष्पवर्षा कर जयकारे लगाए। पुण्यर्जक परिवार बग्घी पर सवार रहा। गुरूदेव ने गुरु आस्था परिवार की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए चातुर्मास को ऐतिहासिक बताया। पदयात्रा के मुख्य संयोजक मिथुन मित्तल,सह संयोजक निलेश जैन खटकीडा,अजय जैन मेहरू बनाया थे।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण का संदेश</strong></p>
<p>चैयरमेन यतीश जैन खेडावाला ने बताया कि पदयात्रा के दौरान यात्रा मार्ग में पौधारोपण किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को जन-जन तक पहुँचाया। यह पहल आध्यात्मिक साधना के साथ प्रकृति के प्रति दायित्व बोध को भी सुदृढ़ करेगी।</p>
<p><strong>संयम का संकल्प</strong></p>
<p>महामंत्री नवीनजैन दौराया ने बताया कि गुरुदेव के साथ शामिल सभी पदयात्रियों के लिए रात्रि भोजन निषेध अनिवार्य रहेगा। यह नियम पदयात्रा को तप, संयम और आत्मशुद्धि की साधना से जोड़ता है, जिससे श्रावकों में अनुशासन और आत्मसंयम की भावना प्रबल होगी।</p>
<p><strong>स्वच्छता</strong> का संकल्प</p>
<p>मिथुन मित्तल ने बताया कि यात्रा मार्ग में स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। सुबह की आहार चर्या व श्रावको के भोजन व पदयात्रा निकलने के बाद स्थानो की सफाई व्यवस्था भी की जाएगी किसी भी स्थान को प्रदुषित करते आगे नहीं बढा जाएगा।</p>
<p><strong>यात्रा मार्ग एवं कार्यक्रम</strong></p>
<p>गुरु आस्था परिवार के महामंत्री नवीन जैन दौराया ने यात्रा मार्ग की जानकारी देते हुए बताया कि 14 दिसम्बर रिद्धि–सिद्धि नगर से बढ़गांव, 15 से 19 दिसंबर तक विभिन्न पड़ावों से होते हुए यात्रा अतिशय क्षेत्र जहाजपुर पहुँचेगी, जहां प्रवेश एवं समापन समारोह होगा। 20 दिसंबर को प्रातः 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं यात्रा समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्य संयोजक मिथुन मित्तल ने बताया कि पदयात्रा में भाग लेने वाले यात्रियों हेतु आवश्यक नियम निर्धारित किए गए हैं। 15 वर्ष से अधिक आयु के पदयात्री ही इसमें शामिल हो सकेंगे, यह पदयात्रा जिनधर्म के सिद्धांतों, आत्मसंयम, पर्यावरण संरक्षण और संस्कारों के आरोपण का अनुपम उदाहरण बनकर समाज के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।</p>
<p>कार्यक्रम में भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, डीएसपी प्रवीण जैन, सकल दि.जैन समाज संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन (नांता), अध्यक्ष प्रकाश बज, गुरू आस्था परिवार से विनय शाह, कपिल आगम, नितेश जैन, शैलेन्द्र जैन, त्रिलोक जैन, मिलाप अजमेरा, विकास मजीतिया, अर्पित सराफ, अनिल दौराया, योगेश सिंघम, सौरभ जैन, अजय मेहरू, अजय खटकिडा, लोकेश दमदमा, राजीव पाटनी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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