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	<title>Munishri Sudhasagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Munishri Sudhasagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>राजसी वैभव छोड वैराग्य पथ पर चले युवराज आदिकुमार : आत्मशुद्धि और संयम ही जीवन का आधार-मुनिश्री सुधासागरजी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 16:58:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तप कल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तप कल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तपकल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। मुनि श्री ने उपस्थित धर्मालुजनों को तप कल्याणक की महिमा बताते हुए कहा आत्मशुद्धि और संयम को जीवन का आधार है। जीवन में अपने भावों को निर्मल बनाते हुए अच्छे कार्यों में में की ओर बढ़ो और संकल्पित हो कि बुरे आचरणों से बचेंगे। शनिवार को प्रातःकाल पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रातःकाल प्रभु अभिषेक, शांतिधाराध के उपरान्त जन्म कल्याणक पूजन हुई। मध्यान्ह में महोत्सव स्थल अयोध्यापुरी नगरी में महाराज नाभिराय के आंगन में युवराज आदिकुमार की भव्य बारात निकाली गई। जिसमें इन्द्र इन्द्राणी और श्रद्धालु झूम उठे। सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी के भक्तिमय भजनों ने वातावरण को पूर्णतः धर्ममय बना दिया मुकुटवद्ध राजाओं द्वारा भेंट दी गई। इसी दौरान नीलांजना नृत्य के दौरान वैराग्य के भाव पूर्ण क्षण उस समय आया जब तपकल्याणक के दौरान दीक्षा विधि सम्पन्न हुई। जिसमें राजसी वैभव का त्याग कर जब वालक तीर्थंकर ने दिगम्बर दीक्षा हेतु वैराग्य पथ पर कदम बढ़ाए और अपना राजपाट सौंपते हुए दीक्षा हेतु वन को प्रस्थान कर गए। इस दौरान पूरा पाण्डाल वैराग्य की जय के उ‌द्घोष से गूंज उठा। इस दौरान प्रमुख रूप से महाराजा नाभिराय मरूदेवी मालती महेन्द्र सर्राफ, सौधर्म इन्द्र अनुपमा सतीश जैन बजाज, कुवेर सीमा सिंघई मनोज जैन, महायज्ञनायक सुमन विमल जैन, ममता अमित जैन वल्ली डोंगरा भरत चक्रवर्ती, विजय जैन लागौन वाहूवलि, नीतेश जैन विलौआ जखौरा राजा सोम, देवेन्द्र कुमार मंजू जैन राजा श्रयांस, पवन जैन बाबा मार्वल ईशान इन्द, समता जैन आनंद जैन साइकिल सानत,इन्द्र ब्राहमेन्द्र रूवी संजय मोदी, विधियज्ञनायक राजू जैन मड़वरा, महामण्डलेश्वर राजीव जैन पीहर साढी आदि प्रमुख भूमिका में रहे।</p>
<p><strong>इनका मिल रहा है सहयोग</strong></p>
<p>आयोजन की व्यवस्थाओं में दिगम्बर जैन पंचायत समिति, आचार्य विद्यासागर व्यायामशाला, वीर सेवा संघ, जैन मिलन मुख्य शाखा सुधा कलश महिला मण्डल के अतिरिका सतोदय तीर्थ अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, महामंत्री सिंघई मनोज जैन बबीना, विजय जैन लागौन, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, संजय रसिया, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, अभय जैन ग्राफिक्स, अनंत सराफ, श्रयांस जैन गदयाना, राजेन्द्र जैन मिठया, पं. जयकुमार जैन, अभय जैन, प्रदीपजैन बौदा, अवध किशोर जैन, प्रदीप जैन बरोदा, सौरभ जैन पीलू, मुकेश जैन नेता आदि का सकिय सहयोग मिल रहा है।</p>
<p><strong>ज्ञान कल्याणक 8 मार्च को</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार सत्तोदय तीर्थ सेरोन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के ज्ञान कल्याणक में आज 8 मार्चको प्रातः नित्यमह सामूहिक पूजन, शान्ति हवन, मुनिश्री की मंगल देशना के उपरान्त महामुनिराज वृषभसागर महाराज की आहारचर्या, मध्यान्ह में ज्ञानकलयाणक की आन्तरिक कियाए श्रीजी की स्थानपना, नेत्रोन्मीलन, प्राणप्रतिष्ठा सूरिमंत्र समोवशरण की रचना एवं सायंकाल सांस्कृतिक कार्यकम होगा।</p>
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		<title>आपको क्रिया में आनंद आया तब वह पुण्य में बदल जाएगा : मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में तप कल्याणक पर तीर्थाेदय में होगी जैनेश्वरी दीक्षा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 03:38:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोकनगर। क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान कहां है देवता उस मंदिर में जाते हैं जब भगवान सामने हो तो थोड़ा हंस लिया करें। अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बड़े आदमी को संभालना है। हंसने वाले को संभालना है ये नरक जाने वाले हैं। रावण के पास धन था बुद्धि थी, शरीर निरोगी मिला। धन मिले अय्याशी में लगा दिया। बुद्धि मिली उससे भगवान को कैलाश पर्वत सहित उठरकर फैंकने लगा। इन तीनों को संभालना। मैं जन्म-जन्म का बड़ा आदमी हूं। तुम्हें जो कुछ भी मिला है, अच्छे कर्म से मिला है ये तुम्हारे लिए अपने गुरु से मिलीं है। अब मेरा उपदेश नहीं मैं धनवान हूं बुद्धि मान निरोगी है तो अच्छा कर्म का परिणाम है। अब तुम्हारे लिए अपने आत्म की आवाज सुने। अब भविष्य में भी ऐसा ही चाहते हैं तो यही फार्मूला आगे लगाना है। आज अच्छा कर रहे हैं तो कल भी अच्छा होगा ये आत्मा की आवाज आएगी।</p>
<p><strong>23को जाएगा अशोक नगर जैन समाज द्रव्य भेंट करने गोलाकोट</strong></p>
<p>जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल ने बताया कि तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के श्री सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में ‘तप कल्याणक 23 जनवरी को प्रातः 7.30 बजे होगा। सुभाषगंज प्रांगण से श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी अशोकनगर के नेतृत्व में सभी संस्थाओं का प्रतिनिधि मंडल अपने अपने निजी वाहनों से ‘अष्ट मंगल द्रव्य’ लेकर जा रहा है। इस दौरान मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ को कमेटी श्रीफल करेगी। कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनोज रन्नौद, श्रेयांस घैला सहित अन्य प्रमुख जनों ने सभी से अनुरोध किया है।</p>
<p><strong>’तप कल्याणक पर होगी जैनेश्वरी दीक्षा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि इस दौरान महाराजा नाभी राय के दरबार का आयोजन होगा। आदि कुमार का राज्याभिषेक होगा। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा भेंट समर्पित की जायेगी। राज व्यवस्था अषि मषि कृषि विद्या वाणिज्य शिल्प का उपदेश दिया जाएगा। राज्य व्यवस्था के साथ कृषि क्रिया कार्य शिल्पा कला का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। इसके बाद नीलाजंना नृत्य नीलाजना का निधन और आदि कुमार का वैराग्य जैनेश्वरी दीक्षा मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज दी जायेगी।</p>
<p><strong>सब कुछ छोड़कर यदि जायेंगे तो आप भी सिद्ध बन सकते हैं’</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि सब कुछ छोड़कर यदि जायेगा तो आप भी सिद्ध शिला को प्राप्त कर सकते हैं। जैसे तारा का समूह स्वच्छ जल में स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही ज्ञानी को सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। ये मार्ग आनंद को देने वाला है। यहां मजा नहीं आया ये मजे से आगे आनंद देने वाले हैं। इन विकल्प जालों से आगे बढ़कर परम पद की आराधना करने का पुरूषार्थ करते रहना चाहिए। भेद विज्ञान से ही आराधना का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्ञान दर्शन चारित्र वीर्य चार को जान लिया शुद्ध आत्मा को जानने से हमें आगे कुछ भी नहीं बचा। जिसने अपने आत्म को जान लिया। भाग्यवानों के लिए है।</p>
<p><strong>आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे दरवाजे रोते हुए आये गरीब ना आवे रोगी ना आवे आ गया तो उनको भी ठीक कर दूंगा ये पंच कल्याणक भाग्यवानों के लिए हैं। ये मंदिर भाग्यवानांे के लिए है। भाग्यहीनो के लिए नहीं है। ये धर्म भाग् वानो के लिए है ये धर्म उनके लिए है। जिनके मन और तन सुखी है जैन कुल में उनका हुआ है, जो जन्म-जन्म के पुण्यवान हैं । इस पंचम काल का सबसे बड़ा दोष है कि यहां गरीबांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं। आज मंदिर में परेशान दःुखी और गरीब लोगांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिरों में देने वाले कम लेने ज्यादा आ रहे हो।</p>
<p><strong>जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो, उसी से अतिशय बढ़ता है</strong></p>
<p>कुछ लोग मंदिर में ख़ाली हाथ इसलिए जाते हैं कि भगवान को पता चले कि भक्त के पास कुछ नहीं है जैनी मंदिर में थाल भर-भर कर लेकर जाता है और खाली हाथ आता है। भगवान कहते हैं क्या बात है तू दूखी तो नहीं है। भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए अभी तक इतना दिया है कि तेरे लिए भी लेकर आया हूं मन्दिर कभी खाली हाथ नहीं जाना जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो। उसी से अतिशय बढ़ता है। उससे अतिशय बढ़ता चला जाता है। जितना भाग्यशाली बनकर पुण्यवान कर जिनालय की वंदना करने जाना मैं भाग्यवान हूं जो भगवान के पंच कल्याणक देखने आया हूं।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में उमडेगा श्रद्धा का सैलाब : अतिशय क्षेत्र सेरोन देवगढ जहाजपुर में पंचकल्याणक महामहोत्सव होगा </title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:33:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज का महत्वपूर्ण महा महोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ललितपुर जिले के अतिशय क्षेत्र सतोदय तीर्थ सेरोन, देवोदय तीर्थ देवगढ़ एवं शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में मुनिश्री सुधासागरजी महराज के सानिध्य में किया जाना सुनिश्चित हुआ। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। जैन समाज का महत्वपूर्ण महा महोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ललितपुर जिले [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज का महत्वपूर्ण महा महोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ललितपुर जिले के अतिशय क्षेत्र सतोदय तीर्थ सेरोन, देवोदय तीर्थ देवगढ़ एवं शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में मुनिश्री सुधासागरजी महराज के सानिध्य में किया जाना सुनिश्चित हुआ। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> जैन समाज का महत्वपूर्ण महा महोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ललितपुर जिले के अतिशय क्षेत्र सतोदय तीर्थ सेरोन, देवोदय तीर्थ देवगढ़ एवं शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में मुनिश्री सुधासागर महराज के सानिध्य में किया जाना सुनिश्चित हुआ। जिसको लेकर जैन समाज उत्साहित है और आयोजन की सफलता हेतु दिगंबर जैन समाज पंचायत समिति ललितपुर ने स्वंयसेवी संस्थाओं के साथ रणनीति बनाई।</p>
<p><strong>इन तारीखों में होगा महा महोत्सव </strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप जैन सुयश ने बताया कि ललितपुर जिले में मुनिश्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में सतोदय तीर्थसेरोन में 4 से 8 मार्च तक, देवोदय तीर्थ देवगढ़ में 28 मार्च से 2 अप्रैल एवं शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में अप्रैल माह में पंचकल्याणक महोत्सव होगा। प्रतिष्ठा महोत्सव में तीनों क्षेत्रों में मूलनायक भगवान शन्तिनाथ के अतिरिक्त अनेक प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठित की जाएगी। इस आयोजन को लेकर जैन समाज काफी समय से प्रतीक्षारत रही और निरंतर महाराज श्री से आयोजन के लिए निवेदन करती रही। ललितपुर जनपद के निकटवर्ती क्षेत्र तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के सम्मुख जैन समाज के श्रेष्ठीजनों एवं दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने निवेदन किया। जिसकी स्वीकृति मिलते ही समाज में उत्साह की लहर दौड़ गई।</p>
<p><strong>आयोजन को लेकर बैठक में विचार-विमर्श</strong></p>
<p>आयोजन को लेकर सावरकर चौक स्थित जैन अटामंदिर के सभागार में महत्वपूर्ण बैठक जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ अक्षय टड़या की अध्यक्षता एवं समाज श्रेष्ठी शीलचंद अनोरा के मुख्यातिथ्य में हुई और ललितपुर जिले में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आगमन एवं उनके सानिध्य में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें प्रमुख रूप से देवोदय तीर्थ के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल संजीव जैन सीए सतीश जैन बजाज, मनोज जैन बबीना, अरविन्द जैन आष्टीकल्स, धन्यकुमार जैन एड, भूपेंद्र जैन सिद्धि समूह, अखिलेश गदयाना, रवि जैन चुनगी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>बैठक में यह समाजजन भी रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर प्रमुख रूप से स्वतन्त्र मोदी, सुरेश बाबू जैन,विजय जैन लागोन, संजय मोदी, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, आनंद जैन एलआईसी, सनत जैन खजुरिया, सौरभ जैन सीए, प्रमात जैन लागीन, अजय जैन जखोरा, अनिल जैन डोगरा, राजेश जैन चन्द्रा सिधेश्वर जमोरिया आदि मौजूद रहे। संचालन महामंत्री आकाश जैन ने किया। मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद से उद्घारित ललितपुर जनपद के प्रमुख तीर्थक्षेत्र मूर्तिकला की धरोहर अतिशय क्षेत्र देवगढ, सतोदय तीर्थ सेरोन, शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाज में मूलनायक भगवान शांतिनाथ की प्रतिष्ठा अपने आप में जहां सातिशयकारी है। वहीं क्षेत्र के विकास की संभावनाए बलवती हो गई हैं।</p>
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		<title>नववर्ष पर 1008 दीपों से जगमगाया आदिनाथ धाम : गोलाकोट तीर्थ पहुंचकर मुनिश्री सुधासागरजी का हजारों भक्तों ने लिया आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 05:38:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नववर्ष के आगमन आदिनाथ धाम सुभाष गंज मैदान में 1008 दीपों से जगमगाए आदिनाथ धाम में भगवान की महाआरती के साथ श्री भक्तामर महा मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ किया गया। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोक नगर। नववर्ष के आगमन आदिनाथ धाम सुभाष गंज मैदान में 1008 दीपों से जगमगाए आदिनाथ धाम में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नववर्ष के आगमन आदिनाथ धाम सुभाष गंज मैदान में 1008 दीपों से जगमगाए आदिनाथ धाम में भगवान की महाआरती के साथ श्री भक्तामर महा मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ किया गया। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> नववर्ष के आगमन आदिनाथ धाम सुभाष गंज मैदान में 1008 दीपों से जगमगाए आदिनाथ धाम में भगवान की महाआरती के साथ श्री भक्तामर महा मंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ किया गया। श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान की महाआराधना कर अपने आने वाले कल और जगत की सुख शांति समृद्धि के लिए नववर्ष पर भगवान की 1008 दीपों से महाआरती की।अशोक नगर जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि प्रातः काल की बेला में भगवान श्री आदिनाथ स्वामी का महा मस्तिष्काभिषेक और कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। साथ ही अतिशय क्षेत्र दर्शनोंदय तीर्थ थूवोनजी में दर्शनोदय तीर्थ के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी का महा मस्तिष्काभिषेक एवं शांतिधारा की गई।</p>
<p><strong>इन समाजजनों ने आशीर्वाद प्राप्त किया</strong></p>
<p>जिले की सीमा पर स्थित अतिशय क्षेत्र तीर्थोदय तीर्थ गोला कोट में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने अंचल से हजारों भक्तों का समूह पहुंचा। इस दौरान अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, शालू, भारत नीरज बड़कु, सौरव बांझल, सुनील मामा, विवेक अमरोद, नीरज इंटीरियर, रिक्कू मिर्ची, मनीष महू, राहुल सिंघई सहितअन्य सैकड़ों भक्तों ने मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया</p>
<p><strong>जब मेरे दुःख के दिन आए तो तेरे चरण मेरे पास हो</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों ने आज के दिन को नया वर्ष मान लिया तो आज एक आशीर्वाद देते हैं। आपको कभी मांगना ना पड़े। भेंट को कोई इंकार नहीं कर सकता। भेंट इतनी मिल जाए कि आपकी हर ख़ुशी पूरी हो जाए। हर व्यक्ति की ख्वाहिश रहती है कि वह जीवन में आगे बढ़े और अपने जीवन का विकास करता रहे। करना भी चाहिए इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। इसके लिए सही दिशा में काम होना चाहिए जव जव भी मेरे दुःख के दिन आए तो प्रभु तेरे चरण मेरे पास होने चाहिए बस इतना ही करना मुझे तेरे चरण मिलते रहे।</p>
<p><strong>सिद्ध किसे कहें जोआत्मा की शक्ति को जागृत करे</strong></p>
<p>इस दौरान धर्मसभा में मुनि श्री ने कहा कि परम पवित्र सकल मंगल रूप चैतन्यमयी आत्मा का लक्ष्य अपने स्वरूप की प्राप्ति है। सारी सृष्टि हमारे लिए है। सिद्ध किसे कहें जो हमारे आत्मा की शक्ति को जागृत करे। हमारे अंदर स्वतः अतिशय को प्रकट करे। बिना निमित्त के स्वत: अतिशय को प्रकट करे। अनाधिकाल से हम निमित्त की ऐसी कठपुतली बन गए कि हमारे लिए विना निमित्त के कुछ हो ही नहीं रहा। वर्तमान में बहुत सारे लोग अच्छा करते हैं। अच्छा बौलते है। अच्छा सोचते हो तो अच्छा क्यों नहीं हो रहा। मन में अच्छी बात आ रही है फिर भी बुरा हो रहा है। तुम अपने मन से भटके हो।</p>
<p><strong>तुम्हारा सगा वही है जो सदा भला सोचे</strong></p>
<p>आपके मन में ऐसी ऐसी बातें आती है कि मन घबरा जाता है। दिन में तो जैसे-तैसे निकल लेते हैं। रात में सपने में बोल पड़ते हैं। आंख तो हमारे है वो ही नहीं देख रही जो‌ हम मुंह से बोलना चाहता है। वह नहीं बोल पा रहे। तुम्हारा सगा वही है जो तुम्हारे लिए सदा भला सोचता है। तुम्हारे अहित में कभी नहीं सोचेगा तुम कितनी भी गलती कर दो। फिर भी तुम्हारे लिए हितकारी हो हम कैसे भी हो फिर भी वह व्यक्ति मेरा अहित नहीं कर सकता तो भी वह हमारे संबंध में अच्छा ही सोचेगा हित ही चाहेगा।</p>
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		<title>अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में इतिहास रचने को तैयार : 23 नवंबर को मुनिश्री सुधासागरजी देंगे 14 जैनेश्वरी दीक्षाएं </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 13:24:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। दर्शनोदय तीर्थ के हजार वर्ष पुराने इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन में ससंघ क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागरजी महाराज एवं क्षुल्लक श्री विदेह सागरजी महाराज को भी जैनेश्वरी दीक्षा मिलेगी। इस ऐतिहासिक पलों को लेकर समूचे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह की लहर है। जैन समाज अशोक नगर के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि यह वह क्षण है, जब दर्शनोदय तीर्थ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज सबसे पहले क्षुल्लक वरिष्ठ सागरजी एवं क्षुल्लक विदेह सागरजी को दीक्षा देंगे। इसके साथ ही संघ के 12 बाल ब्रह्मचारी भी इस अवसर पर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक पर्व में उपस्थिति का आग्रह </strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी की समिति अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगलदीप, मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद एवं अन्य सदस्यों ने सभी से इस अद्वितीय आध्यात्मिक पर्व में उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।</p>
<p><strong>विश्वास हो तो जीवन चलता है, पर किसी पर विश्वास करना नहीं</strong></p>
<p>दर्शन-सत्संग के दौरान मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में विश्वास अनिवार्य है, पर विश्वास किसी दूसरे पर करना उचित नहीं। जहां दो विरोधी तत्व साथ विद्यमान हों, वहां अनेकांत का धर्म अपनाना आवश्यक है। जैसे आंख और कान के कार्य अलग-अलग हैं, वैसे ही ज्ञान और दर्शन भी एक-दूसरे का काम नहीं कर सकते। संसार की हर व्यवस्था परस्पर विरोधों से संचालित होती है। सुख-दुःख, लाभ-हानि, आसाता-साता। ज्ञानी पुरुष दुःख को भी दुःख नहीं मानता, क्योंकि साधु के लिए इंद्रिय भोग विष-मिश्रित पकवान के समान हैं।</p>
<p><strong>जिनकी होगी जैनेश्वरी दीक्षा-एक नजर में</strong></p>
<p>ब्र. अक्षय जैन (छोटू) दमोह (मऊ), बीए, बीएड, एमए, श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर</p>
<p>आजीवन व्रत 26 अप्रैल 2025, संघ प्रवेश, 10 मई 2025, कार्य मुरैना छात्रावास अधीक्षक,</p>
<p>ब्र. अतिशय जैन (वासु) सागर (म.प्र.), बीए संस्कृत एमए आचार्य, शिक्षक, महावीर पब्लिक स्कूल, जयपुर, आजीवन व्रत 14 जनवरी 2019, संघ प्रवेश 23 मई 2024, ब्र. विवेक जैन मानोरिया ललितपुर (उ.प्र.), बीटेक, एमबीए फाइनेंस, एमए इकोनॉमिक्स, गुड़गांव एमएनसी में 12 वर्ष सेवा, आजीवन व्रत मई 2011, संघ प्रवेश 8 जुलाई 2024, ब्र. कमलेशकुमार जैन अजमेर, एमए बीएड शिक्षक (12 वर्ष), आजीवन व्रत 2016 कुंडलपुर, संघ प्रवेश आगामी दीक्षा, ब्र. आशु जैन जबलपुर, बीए इकोनॉमिक्स, आजीवन व्रत एवं संघ प्रवेश 19 अगस्त 2024, ब्र. अंकुर जैन असम (धुबड़ी), सिविल इंजीनियर</p>
<p>रक्षा मंत्रालय लेखा विभाग (6 वर्ष), आजीवन व्रत 17 अगस्त 2024, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2024, ब्र. मोनू जैन, जबलपुर, सीए, बीएड, एमएड, आजीवन व्रत 2014, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2024, ब्र. सोनू जैन जबलपुर, शिक्षक (16 वर्ष सेवा), आजीवन व्रत 2006, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2014, ब्र. संयम जैन (ओजी) अहमदाबाद, बीटेक मैकेनिकल, टाटा मोटर्स में जूनियर इंजीनियर, आजीवन व्रत 20 सितंबर 2024, संघ प्रवेश 7 अक्टूबर 2024, ब्र. अंकित जैन, सागर, एमबीबीएस, मेडिकल ऑफिसर, आजीवन व्रत 11 अक्टूबर 2025, संघ प्रवेश 13 अक्टूबर 2025, सात प्रतिमा 1 नवंबर 2025, ब्र. राहुल जैन टोंक (राजस्थान), बीए मेडिकल व्यवसाय, आजीवन व्रत 3 अगस्त 2015, संघ प्रवेश फरवरी 2025 (कटनी), ब्र. सुयश जैन राहतगढ़ (सागर), बीएससी, पीसीएम, व्यवसाय, जैन ट्रेडर्स, आजीवन व्रत 7 दिसंबर 2020, संघ प्रवेश 14 फरवरी 2018, सात प्रतिमा 18 फरवरी 2025 को दीक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
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		<title>हमारा अस्तित्व त्रिकाली है, कोई मिटा नहीं सकताः अधर्म के साथ सोने की लंका में रहने की अपेक्षा धर्म के साथ वनवास में रहना श्रेष्ठ है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज </title>
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		<pubDate>Tue, 01 Apr 2025 17:31:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जन्म होगा और जन्म हुआ है तो मरण भी होगा। हम एक दिन भी जियेंगे तो आनंद के साथ जियेंगे। चूहे की तरह सौ दिन जीने की अपेक्षा शेर की तरह एक दिन जीना काफी है, रोते रोते जीने की अपेक्षा हंसते हंसते मरेंगे तो काफी है। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जन्म होगा और जन्म हुआ है तो मरण भी होगा। हम एक दिन भी जियेंगे तो आनंद के साथ जियेंगे। चूहे की तरह सौ दिन जीने की अपेक्षा शेर की तरह एक दिन जीना काफी है, रोते रोते जीने की अपेक्षा हंसते हंसते मरेंगे तो काफी है। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बहोरीबंद से राजीव सिंघई मोनू की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बहोरीबंद (कटनी)।</strong> व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल है कि वह अपने अस्तित्व की चिंता करता है कि मेरा अस्तित्व खत्म न हो जाए, ये जो हमारे मन में मिथ्या धारणा बनी हुई है क्योंकि कभी जीव का अस्तित्व खत्म होता ही नहीं है। जो काम होता ही नहीं है, उस काम में हम समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं, हमारा अस्तित्व त्रिकाली है, कोई मिटा नहीं सकता। दूसरे को मत मिटाओ, तुम कितना ही प्रयास करना नहीं मिटा पाओगे। अब अपना समय बर्बाद मत करो कि मेरा अस्तित्व बना रहे, समय बचाओ, वो तो बना रहेगा। कल की मौत का भय, आज के जीने के आनंद को बर्बाद कर रहा है। लिस्ट बनाओ कौन-कौन से कार्य हैं जो हम रोक नहीं सकते और हम करना चाहे तो कर नहीं सकते, उसमे समय खराब मत करना।</p>
<p><strong>भागकर मरने में बहुत बड़ा पाप है</strong></p>
<p>इस संसार की जंग से भागना नहीं, सुसाइड नहीं करना, रोना नहीं, आने दो, हम कर्माे से लड़ते-लड़ते, विपदाओं से जूझते जूझते मर जायेंगे लेकिन भागेंगे नहीं। अशुभ कर्म का उदय आ गया तो महाराज श्री ऐसा भाव आ रहा है कि मर जाऊँ, कायर कंही का, कष्ट सहन करते मर जा, लड़ते-लड़ते मरने में कोई आपत्ति नहीं, भागकर मरने में बहुत बड़ा पाप है। भील से वैद्य कहता है कि नियम तोड दे, जिंदा रह जायेगा, भील कहता है कि कभी मरूँगा तो नहीं, वैद्य कहता है कि मरेगा तो सही लेकिन कुछ दिन जिंदा रह जायेगा तो सम्यक दृष्टि कहता है कि नियम तोड़कर कुछ दिन जिंदा रहने की अपेक्षा नियम पालन करते हुए एक क्षण में मर जाना श्रेष्ठ है। हम नियत को अनियत बना दे, हमारी नियत है कि हम कल मरेंगे लेकिन हमारी ताकत है कि हम णमोकार मंत्र के लिए आज ही मरने को तैयार है, कल मरेंगे तो मरेंगे।</p>
<p><strong>क्या मौत के डर से मन्दिर जाना छोड़ दू</strong></p>
<p>जब भगवान महावीर स्वामी का समवशरण राजगृह में आया तो एक मेंढ़क ने कहा मैं भी समवशरण में जाऊँगा। लोगों ने कहा कि इतनी भीड़ है तू रस्ते में कुचल कर मर जायेगा। दुनिया का एक मात्र दर्शन जैनदर्शन है, जिसमें पशुओं के लिए भी अलग से एक सभा रखी गई। सभी बड़े सामान नहीं होते हैं, कुछ बड़े ऐसे होते हैं, जो स्वयं बड़े होते हैं, बड़ों के साथ रहते हैं। लेकिन छोटों का भी उतना ही मान रखते हैं, जितना बड़ों का रखते हैं, जैसे सारी दुनिया जिसके पैर धोती थी वह श्रीकृष्ण, सुदामा के पैर धो रहा है। मेढ़क ने कहा मैं दर्शन करने तो जाऊँगा, भली मुझे दर्शन न मिले, एक कदम बढ़ाऊँ, मंदिर को कदम बढ़ाना श्रेष्ठ है, क्या मौत के डर से मन्दिर जाना छोड़ दूँ। चुन लिया है पथ जो मैनें, मैं उसी पथ पर चलूँगा, दे दिया सर्वस्व जिसकों, अब न मैं उसकों छलूँगा, खो दिया इस पार, पर उस पार मैं पाके रहूंगा। वह मेढ़क, हाथी के पैर से दबकर मर गया लेकिन मरकर के देव बनकर उसने भगवान के दर्शन किये।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र पढ़े बिना सौ साल की जिंदगी भी बेकार </strong></p>
<p>मन्दिर भली न आ पाओ लेकिन मन्दिर की ओर कदम उठाकर चलना, कम से कम ये तो होगा कि मन्दिर भली न पहुँच पाया लेकिन मन्दिर के रास्ते मे मर गया। यदि आपकी भावना सच्ची है और आपने कदम बढ़ा दिया है, भली मंजिल पर नही पहुँच पाये तो ये कर्म तुम्हे ऐसी व्यवस्था बनाएगा कि तुमने जैसी भावना भाई थी, तुम समवशरण में मिलोगे। मुझे भली मोक्ष मिले न मिले, मैं मोक्षमार्ग पर ही मरना चाहता हूँ क्योंकि मैंनें कम से कम चलने का प्रयास तो किया। अधर्म के साथ सोने की लंका में रहने की अपेक्षा धर्म के साथ वनवास में रहना श्रेष्ठ है। णमोकार मंत्र पढ़े बिना सौ साल की जिंदगी भी बेकार है और णमोकार मंत्र पढ़ते-पढ़ते हमें मौत मिलती है तो हमें स्वीकार है।</p>
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