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	<title>Munishri Sambhavsagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है: मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने धर्मसभा में मुनिदीक्षा की क्रियाओं को सूक्ष्मता से समझाया  </title>
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		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 05:41:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। मोक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने सर्कस का उदाहरण देते हुए कहा कि आप लोगों ने देखा होगा कि किस प्रकार से खिलाड़ी बैलेंस बनाते हुए खेल दिखाता है। जरा सी चूक उसकी जानलेवा सिद्ध हो सकती है। उसी प्रकार साधक को अपनी दैनिक क्रिया करते समय अपने 28 मूलगुणों तथा पंच महाव्रतों के पालन का पूर्ण ध्यान रखना पड़ता है। मुनि श्री ने कहा कि कल आप लोगों ने देखा होगा किस प्रकार से आचार्य श्री समयसागर महाराज ने मूल संघ के संस्थापक आचार्य कुंद-कुंद की वीतरागी निर्ग्रंथ परंपरा में आचार्य शांतिसागरजी, आचार्य वीरसागरजी, आचार्य शिवसागरजी, आचार्य ज्ञानसागरजी की परंपरा के आचार्य विद्यासागर जी की परंपरा का निर्वाहन करते हुए मुक्तागिरी में नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100350" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-300x99.jpg" alt="" width="300" height="99" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-300x99.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-1024x339.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-768x255.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-990x328.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010.jpg 1080w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>दीक्षा से पहले क्षमायाचना करते हैं</strong></p>
<p>वर्तमान के संघ नायक आचार्य श्री समयसागरजी महाराज जब 22 साधकों को निर्ग्रन्थ मुनि दीक्षा प्रदान कर रहे थे तो ऐसा लगा कि समय मानो थम सा गया है, विदिशा से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने यह दृश्य प्रत्यक्ष देखा और बड़ी संख्या में सभी लोग अपने घरों पर बड़ी टीवी पर विद्याकुल में वृद्धि के दृश्यों को देख रहे थे। मुनिश्री ने दीक्षा विधि को बताते हुए कहा कि दीक्षा देने के पूर्व सभी साधक संसार में रहते हुए राग द्वेष के निमित्त जो भी परिणाम उनके विचलित होते हैं। वह सभी सांसारिक संबंधों जैसे अपने गृहस्थ जीवन के माता-पिता, भाई बंधु एवं सभी परिवारी जन एवं इष्टमित्रों एवं समस्त जीवों से क्षमायाचना करते हैं तथा सभी को क्षमा प्रदान करते हैं। इसके पश्चात ही दीक्षा निधि को प्रारंभ होती है। इसके बाद आचार्य गुरुदेव गंधोदक, केसर और कपूर मिश्रित उबटन लगाकर जैसे भगवान की प्रतिष्ठा की जाती है कि उस अनुसार केशलोच विधि संपन्न कर मस्तक पर श्री कार तथा अंकलेखन कर वस्त्र विमोचन का आदेश देते हैं। प्रत्येक साधक को दो, तीन और चार माह में उपवास के साथ अपने हाथों से कैशलोच करना अनिवार्य होता है।</p>
<p><strong>फरवरी 1998 में 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने सकल दिगंबर जैन समाज समिति के सभी पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप लोगों न ेजो मुक्तागिरी पहुंचने की व्यवस्थित व्यवस्था की। उससे कई लोग प्रत्यक्ष दर्शन का लाभ उठा पाए। उन्होंने कहा कि गुरुवार का दिन बहुत शुभ था। फाल्गुन माह दूज तिथि थी। ऐसे शुभ संयोग के साथ मुक्तागिरी में हमारे संघ नायक आचार्य श्री समयसागरजी महाराज ने आचार्य बनने के बाद जिस प्रकार से 22 निर्ग्रंथ मुनि महाराज को दीक्षा देकर आचार्य श्री गुरुदेव विद्यासागरजी की वंश बेल को आगे बढ़ाया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। उससे आज समूचे जैन समाज गौरान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी स्थान से आचार्य गुरुदेव ने फरवरी 1998 में 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी और पुनः 28 साल बाद यह इतिहास दोहराया गया। यह पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है।</p>
<p><strong>वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा अभिभूत हो गया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि जैसे ही सभी 22 साधकों ने एक साथ अपने अपने वस्त्रों को उतारा तो ऐसा लगा कि जैसे कालचक्र रुक गया है। सभी साधक समयसार की अनुभूति करते हुए सिद्धत्व के भावों की अनूभूति कर रहे थे। उनकी खड़गासन निर्ग्रंथ वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा वह उस दृश्य को देखता ही रह गया। अपार जनसमूह के साथ गगनभेदी नारे गुंजायमान हो रहे थे। आचार्य गुरुदेव ने आगे दीक्षा विधि की क्रियाएं संपन्न कराते हुए उनको बैठने का संकेत दिया और उनके हाथों में श्रीफल देकर 28 मूलगुणों को आरोपित करते हुए उसके महत्व को समझाया तथा सभी साधकों को आगे की चर्या समझाते हुए पिच्छी एवं कमंडल मंत्रोच्चारण के साथ प्रदान किए तथा पांच महाव्रत एवं सभी समितियों के पालन करने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>बेहतर आवागमन की व्यवस्था की </strong></p>
<p>मुक्तागिरी तीर्थ पर बड़ी संख्या में चार पहिया वाहन एवं सैकड़ों बसों का प्रबंध के लिए निश्चित करके मुक्तागिरी तीर्थ क्षेत्र कमेटी धन्यवाद की पात्र है। दोनों पांडाल ठसाठस भरे हुए थे एवं हजारों की संख्या में लोग पांडाल के बाहर धूप में खड़े हुए थे। 40 से 50 हजार की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के रूप में आज भी विद्यमान हैं। लाखों की संख्या में जिनवाणी एवं पारस चैनल के माध्यम से देश तथा विदेश के विभिन्न हिस्सों से इस अदभुत दृश्य को देखकर अभिभूत हुए।</p>
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		<title>भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी घट जाती है : मुनिश्री संभवसागरजी ने विदिशा के वाशिंदों को भक्ति से जुट जाने को कहा  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 11:17:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;  विदिशा। बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से समग्र पाठशाला समिति एवं नगर के महिला मंडलों के आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज का संगीतमय पूजन के साथ धर्मसभा प्रारंभ होती है। रविवार को भक्ति की इस गंगा में गुरु नाम, आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज पर लिखा विधान, जिसे मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज ने लिखा है को 7.30 बजे से किया जा रहा है। जिसमें सभी महिला मंडलों तथा पुरुषों को शामिल होना है। मुनि श्री संभवसागरजी ने कहा कि पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आपके नगर के शीतलधाम में आपके इष्टदेव बर्राे वाले बाबा का नया मंदिर लगभग तैयार है। जैसे कुंडलपुर में जब बड़े बाबा को उच्चाशन पर विराजमान किया गया था तो कुंडलपुर महोत्सव मनाया गया था उसी तर्ज पर विदिशा वालों आप लोग भी कमर कसके तैयार हो जाओ। आप सभी को बर्राे बाले बाबा को पुराने स्थान से नए मंदिर जी में विराजमान करना है तो शीतलधाम महोत्सव मनाने के लिए विदिशा ही नहीं बल्कि समूचे भारत के श्रद्धालुओं को आमंत्रित करना होगा। जिससे हम सभी मिलकर आचार्य गुरुदेव के सानिध्य में यह महा महोत्सव मना सकें।</p>
<p><strong>आचार्यश्री समयसागर जी से निवेदन के लिए जबलपुर जाएंगे समाजजन</strong></p>
<p>आचार्य श्री समयसागर जी महाराज तिलवारा घाट जबलपुर में विराजमान हैं। उनसे निवेदन करने समाज तथा शीतलधाम के प्रतिनिधि जबलपुर जा रहे हैं। मुनि श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जैसे पूर्व में बर्रों वाले बाबा जब विदिशा आए थे तो उनकी मंगल अगवानी आचार्य श्री विद्यासागरजी ने की थी तो आपके नगर के इष्टदेव बर्राे वाले बाबा नए मंदिर जी में विराजमान हो रहे हैं। आचार्य श्री समयसागरजी महाराज उनकी अगवानी करें। ऐसा निवेदन आप लोगों को जाकर करना है। उन्होंने कहा कि अभी एक-डेढ़ माह का समय है, ऐसी भक्ति करो कि भक्ति की गर्मी से पूष की सर्दी भी घट जाए और आचार्यश्री जबलपुर से सीधे विदिशा चले आएं। मुनिश्री ने श्रमण श्रुतं ग्रंथ की वाचना प्रारंभ करते हुए कहा कि यह एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें जैन धर्म और दर्शन के सभी महत्वपूर्ण विषय सम्मिलित हैं। जिसे आचार्य विनोबा भावे ने जैन धर्म का सार मानते हुए अन्य धर्म के धार्मिक ग्रंथों के साथ सन 1974 में सम्मिलित किया था। जिसमें 756 गाथाएं हैं। जिसका पद्यानुवाद आचार्य श्री विद्यासागर जी ने जैन गीता के रूप में करके बहुत ही सरल और सुग्राह्य कर दिया है।</p>
<p><strong>प्रश्नमंच के माध्यम से सही जबाव देने वाले पुरस्कृत </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि शीतलधाम में भगवान आदिनाथ स्वामी (बर्राे बाले बाबा) की प्रतिमा, जो हजारों वर्ष पुरानी है। उन्होंने इस प्रतिमा में खुद इतनी अधिक एनर्जी महसूस की है। उन्होंने कहा कि उसमें आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है और वह आप सभी के इष्टदेव हैं। उनको जब नए मंदिर जी में विराजमान किया जाए तो पूरा विदिशा ही नहीं बल्कि समूचा बुंदेलखंड इसमें शामिल हो। ऐसी तैयारियां आप सभी लोगों को अभी से करना होगी। तभी आप इसे वृहद रूप प्रदान कर पाओगे। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने प्रश्नों के माध्यम से प्रश्नमंच कार्यक्रम को संचालित किया एवं सही उत्तर देने वालों को समाज बंधुओं ने पुरस्कृत किया। इस अवसर पर मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज भी मंचासीन थे। संचालन मुकेश जैन बड़ाघर ने किया।</p>
<p><strong>प्रतिदिन पूजन में भाग ले रहे श्रद्धालु और महिला मंडल </strong></p>
<p>प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से आचार्य श्री का संगीतमय पूजन विदिशा नगर के विभिन्न महिला मंडलों द्वारा किया जा रहा है। सकल दि. जैन समाज का आग्रह है कि सभी महानुभाव समय पर पधारें एवं भक्ति की इस गंगा में पुण्य लाभ अर्जित करें। शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज की प्रेरणा से पंचकल्याणक कमेटी राहतगढ़ के द्वारा दयोदय महासंघ, मध्यभारत गुणायतन, तथा मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी का तिलक, पगड़ी एवं अंगवस्त्र पहनाकर सम्मान किया गया।</p>
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