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	<title>Munishri Praman Sagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धर्म का संबंध मात्र क्रियाओं तक ही सीमित नहीं : मुनिश्री प्रमाण सागर जी के मंगल विहार में भोपाल विदिशा एवं राहतगढ़ के भक्त शामिल थे </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 08:51:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का ग्यारसपुर नगर में आगमन हुआ। मुनिसंघ ने यहां पर विशाल जिनालय के दर्शन किए। इसके बाद यहां मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा हुई। ग्यारसपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; ग्यारसपुर। आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का ग्यारसपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का ग्यारसपुर नगर में आगमन हुआ। मुनिसंघ ने यहां पर विशाल जिनालय के दर्शन किए। इसके बाद यहां मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">ग्यारसपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्यारसपुर।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का ग्यारसपुर नगर में आगमन हुआ। मुनिसंघ ने यहां पर विशाल जिनालय के दर्शन किए। इसके बाद यहां मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा हुई। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रातः अटारी खैजड़ा से मंगलविहार ग्यारसपुर की ओर हुआ। मंगल विहार में भोपाल विदिशा एवं राहतगढ़ के भक्त शामिल थे। प्रातःकालीन बेला में अभिषेक एवं शांतिधारा मुनि श्री के मुखारबिंद से हुई। इसके बाद प्रथम सत्र का शंका समाधान कार्यक्रम एवं आहार चर्या संपन्न हुई। इसके बाद सामायिक कर मुनिसंघ का मंगल विहार बागरौद की ओर हुआ। इस. अवसर उपस्थित श्रद्धालुओं ने जीवन व्यवहार में आने वाली तथा धर्म से संबंधित शंकाओं का समाधान मुनि श्री के मुखारबिंद से प्राप्त किया। मुनि श्री ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि समाधि का जैन धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है।</p>
<p>समाधि की साधना के लिए कषायों की मंदता और तथा वृत उपवास की साधना आवश्यक है। नियमित भावना योग समताभाव की वृद्धि में बड़ा सहायक हो सकता है। इस अवसर पर ग्यारसपुर के एक श्रद्धालु परिवार ने मंदिर के पास स्थित अपना 17 वाय 70 का मकान जिसमें कुंआ भी है समर्पित किया। तीनों भाइओं ने मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि श्री ने कहा कि दान जीवन को कृतार्थ करने के लिए दिया जाता है, यदि कोई व्यक्ति दान दे रहा है तो उसकी अनुमोदना अवश्य करना चाहिए।</p>
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		<title>अर्थ को पहचानो और जीवन को सही दिशा दें : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने कहा- जो अर्थ को पहचान कर जीवन जीता है परमार्थ के सुख को प्राप्त करता है  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 14:09:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने चार शब्द अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन को व्यर्थ और अनर्थ से बचाना है तो अपने समय, शक्ति और संसाधनों का सही उपयोग करो। इनको सही दिशा दो। भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की खबर&#8230; भोपाल (अवधपुरी)। अपने जीवन में यदि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने चार शब्द अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन को व्यर्थ और अनर्थ से बचाना है तो अपने समय, शक्ति और संसाधनों का सही उपयोग करो। इनको सही दिशा दो। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)</strong>। अपने जीवन में यदि आपने पुण्य नहीं किया। यह जीवन व्यर्थ गया लेकिन, यदि उसे पाप के कार्य में रमा दिया या किसी का शोषण किया तो आपका जीवन को अनर्थ किया। वहीं आपने सही नियोजन कर अपने अर्थ को परमार्थ में लगा दिया तो वह आपका सही प्रयोजन है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने चार शब्द अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि जीवन को व्यर्थ और अनर्थ से बचाना है तो अपने समय, शक्ति और संसाधनों का सही उपयोग करो। इनको सही दिशा दो, गलत कार्यों में इनका नियोजन तो कभी करना ही नहीं चाहिए। यह अपनी आत्मा के साथ छल और अनर्थ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आपने विचार किया कभी में अनर्थ की ओर बढ़ रहा हूं या मेरे जीवन में अनर्थ घट रहा है? उन्होंने दूध का उदाहरण देते हुए कहा कि दूध के दोहने का कोई अर्थ है। वहीं दूध का फट जाना व्यर्थ है। वहीं दूध को ढोल देना अनर्थ है। वहीं दूध को जमाकर उसका घी निकाल लैना परमार्थ है। जीवन दूध की तरह है। इसका सही उपयोग करो व्यर्थ मत जाने दो।</p>
<p><strong>जीवन को सही दिशा नहीं दोगे तो विकृति आएगी </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जीवन को सही दिशा नहीं दोगे तो जीवन में विकृति आएगी और जीवन बरबाद होगा। संत कहते है जीवन को जिओ और जीवन को बर्बाद होने से बचाओ। जिससे बाद में पछताना न पड़े। उन्होंने अल्फ्रेड नोबल जो कि डायनामाइट का आविष्कारक था का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके मन में विचार आया कि लोग मेरे मरने के बाद किस रूप में याद करेंगे? उसने समाचार पत्र में एक झूठी विज्ञप्ति दे दी कि अल्फ्रेड नोबल मर गया। अखबारों ने इस खबर को फ्रंट में छापा। मौत का सौदागर सदा के लिए सो गया। अल्फ्रेड नोबल ने जब यह पढ़ा तो उसने अपने आपको धिक्कारते हुए कहा कि इस दुनिया से जाने के बाद लोग मुझे मौत के सौदागर के रूप में याद करेंगे और उसने निर्णय लिया कि मुझे मौत का सौदागर नहीं शांति का दूत बनना है और इसी भावना से उसने अपनी संपत्ति को शांति के लिए जो नोबल पुरस्कार के रूप में लगा दिया, जो आज भी नोबल पुरस्कार के रूप में दिया जाता है।</p>
<p><strong>आंखें बंद कीजिए और एक प्रयोग कीजिए</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि थोड़े से चिंतन ने अल्फ्रेड नोबल की दिशा बदल दी। आप सभी लोग आंखें बंद कीजिए और एक प्रयोग कीजिए। आप मर गए हैं। चारों ओर से लोग एकत्रित हैं। आपकी अर्थी को बांध कर शमशान ले जाया गया। वहां पर उस कफन को निकालकर अग्नि के हवाले कर दिया गया। उसी समय कुछ लोग अपने-अपने मोबाइल में लग गए तो कुछ लोग अपनी अपनी गपशप कर रहे थे तो तो कुछ लोग कपाल क्रिया होने का इंतजार कर रहे थे कि कब हो और मैं राख में परिवर्तित हो गया। शोक सभा हुई और मेरे विरोधियों ने भी मेरा गुणगान किया। कुछ दिनों घर में बैठकों का सिलसिला चला मैंने देखा कि कल तक जो कहा करते थे कि तुम्हारे बिना कैसे रहेंगे? वह सभी अपने-अपने काम में लग गए। यह कहानी मेरी नहीं सभी की है।</p>
<p><strong>सभी को तो राख होना है</strong></p>
<p>जिन्होंने अपने जीवन में कुछ अच्छे कार्य किये उनको भी लोग कुछ समय तक ही याद करते है फिर भूल जाते हैं। मुनि श्री ने कहा कि एक दिन तो सभी को तो राख होना है।’मेरा भी राख होगा तेरा भी खाक होगा। यही जीवन की सच्चाई है। इसी मोहमाया में ही पूरा जीवन व्यर्थ हो जाता है, फिर याद आता है। यदि मैंने अपनी आत्मा को पहचान कर कल्याण का मार्ग अपनाया होता तथा मोक्ष मार्ग के अनुरूप चला होता तो मैं भी परमार्थ के रास्ते पर चल अपनी इस आत्मा को भवभव के बंधन से मुक्त कर लेता।</p>
<p><strong>रविवार को होगा क्षमावाणी पर्व</strong></p>
<p>रविवार को दोपहर 1.30 बजे से वृहद क्षमावाणी पर्व मुनिसंघ के सान्निध्य में मनाया जाएगा। इसमें भोपाल तथा आसपास के जिले से भी श्रद्धालु सम्मलित होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान तथा सांसद आलोक शर्मा सहित जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।</p>
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		<title>अधीरता एक ऐसी ही दुर्बलता है जो अंदर से कमजोरी करती है : मुनिश्री प्रमाण सागरजी ने भोपाल में धर्मसभा में दिए उपदेश  </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 06:44:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने अधीरता विषय पर मार्गदर्शन देते हुए अवधपुरी के विद्यासागर इंस्टीट्यूट में उपदेश दिए। उन्होंने अधीरता के स्वरुप, कारण, परिणाम तथा समाधान इन चार बातों पर चर्चा की। भोपाल से पढ़िए अविनाश जैन और अभिषेक जैन की यह खबर&#8230; भोपाल। जीवन की स्थायी उन्नति के लिये धैर्य रखना जरुरी है। जो अधीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने अधीरता विषय पर मार्गदर्शन देते हुए अवधपुरी के विद्यासागर इंस्टीट्यूट में उपदेश दिए। उन्होंने अधीरता के स्वरुप, कारण, परिणाम तथा समाधान इन चार बातों पर चर्चा की। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए अविनाश जैन और अभिषेक जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> जीवन की स्थायी उन्नति के लिये धैर्य रखना जरुरी है। जो अधीर होता है। वह कभी भी अपने जीवन में उन्नति नहीं कर सकता। अधीरता से तो बने बनाये काम भी बिगड़ जाते हैं। यह उदगार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने अधीरता विषय पर मार्गदर्शन देते हुए अवधपुरी के विद्यासागर इंस्टीट्यूट में व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा जो अधीर है। वह धैर्य से पहले ही हार मान लेता है। आजकल प्रतीक्षा तो आदमी करना ही नहीं चाहता। समय से पहले ही रिजल्ट चाहता है। खेत में आज बीज बोया है तो अंकुर फूटने में समय तो लगेगा ही लेकिन, अधीरता से वह रोज-रोज उस बीज को देखता है और इस हड़बडी में बीज अंकुरित न होकर नष्ट ही हो जाता है। मुनि श्री ने कहा कि कोई भी कार्य हो वह अपने निर्धारित समय से ही पूर्ण होगा तुम कितने ही अधीर हो जाओ पेड़ फलेगा तो वह ऋतु चक्र के अनुरुप फलेगा तुम उसके लिये कितना भी प्रयास करो वहा कुछ होंने वाला नहीं।</p>
<p>यह बात अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। मुनि श्री ने कहा अधीरता एक ऐसी ही दुर्बलता है,जो हमें अंदर से कमजोर करती है। हमारे चित्त को उद्विग्न और बैचेन करती है, जबकि मन में जब धैर्य होता है तो वहा निश्चिन्तता होती है। उन्होंने अधीरता के स्वरुप, कारण, परिणाम तथा समाधान इन चार बातों पर चर्चा की। अधीर मन से सफलता नहीं मिलती। उसके लिए प्रतीक्षा करना पड़ती है उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति ने अपने नये व्यवसाय की शुरुआत की और उसका व्यापार अच्छा चला। उसने उसी आधार पर साल भर का बजट बना लिया लेकिन, बीच में व्यापार कमजोर हो गया तो वह अधीर हो उठा कि मेरा व्यापार नहीं चल रहा और इससे वह डिप्रेशन का शिकार हो गया।</p>
<p><strong>अविवेक पूर्ण निर्णय ने उपकारी के प्राण ले लिए</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हड़बड़ी से ही गड़बड़ी होती है अभी तुमने व्यापार की शुरुआत की है थोड़ी प्रतीक्षा तो करो, किसी भी कार्य में अपेक्षा रखो लेकिन अति अपेक्षा न रखो, अतिअपेक्षा से धैर्य टूटता है और बना बनाया कार्य भी बिगड़ जाता है। एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने बताया की एक व्यक्ति बेटी के संबंध के लिये परेशान था। हमारे पास आया तो हमने कहा कि आप अपना पुरुषार्थ तो कर रहे हो जब उसका निमित्त आएगा तो उसका संबंध भी हो जाएगा। अधीरता से तो बने बनाये काम भी बिगड़ जाते है। मुनि श्री ने कहा कोई कार्य भय या उतावले पन से काम नहीं होता उन्होंने कहा कि आप सभी लोगों ने सांप और नेवला की कहानी तो पड़ी ही होगी। जिसमें नेवला परिवार का अंग था। गृह मालकिन अपने बच्चे को उसके भरोसे छोड़कर पानी भरने जाती है इस बीच एक सांप उधर आकर बच्चे की ओर बढ़ता है तो नेवला उस सांप का काम तमाम कर देता है और वह घर की चौखट पर मालकिन इंतजार करता है। इधर गृह मालकिन आती है और नेवला के मुख पर खून लगा देख उसे कुछ शंका होती है और आव न देखा ताव वह पानी का घड़ा उस नेवला पर पटक देती है। जिससे उसके तुरंत प्राण पखेरू उड़ जाते हैं और जब वह अंदर पहुंच कर देखती है कि उसका बच्चा तो खेल रहा है और पास में एक भयानक विषधर के टुकड़े-टुकड़े होकर पड़े है तो वह स्थिति को समझ अपने आपको पश्चाताप करती है कि उसके अधीरता और अविवेक पूर्ण निर्णय ने उसके उपकारी के प्राण ले लिए।</p>
<p><strong>अधीरता से संबंधों में खटास उत्पन्न हो जाती है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों के जीवन में भी कही बार ऐसी स्थिति आती है, कोई भी कार्य हड़बड़ी में करने के पश्चात असफलता पर मन को बहुत तकलीफ होती है उन्होंने कहा कि कोई भी बात हो सोच समझकर बोलो विवेक से बोलो जो अतिरेक में अपने शब्दों का प्रयोग करते है वह अपना ही नुकसान करते है,अधीरता में लिया गया निर्णय प्रायःपश्चाताप का ही कारण बनता हैष् अधीरता से संबंध बिगड़ते है नई नई शादी हुई पति ने अधीरता दिखाई और पत्नी के सामने बहुत सी अपेक्षा रख दी और उन अपेक्षा की पूर्ति न होने पर शादी के दो माह में ही पत्नी अपने घर जाकर बैठ गई और स्थिति यह हुई कि दोनों के बीच तलाक हो गया। व्यापार व्यवसाय घर या रिश्तेदारी में अधीरता से संबंधों में खटास उत्पन्न हो जाती है, बात-बात पर अपने बच्चों को डांटिए मत धैर्य से बच्चों को समझा कर अपनी समझदारी का परिचय दीजिए। जिससे आपको पछताना न पड़े।</p>
<p><strong>सफलता में समय और उसकी प्रतीक्षा करो</strong></p>
<p>कभी-कभी आपकी अधीरता आपको तो मानसिक रुप से कष्ट देती ही है। परिवार को भी नष्ट कर देती है। उन्होंने कहा गृहस्थी हो या साधना का क्षेत्र हो धैर्य रखना बहुत जरूरी है। अधीरता में मानसिक प्रगति रुक जाती है। सदैव इस बात को अपना सूत्र बनाइये। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचनं’ मेरे हाथ में प्रयत्न है। प्रयत्न में कोई कमी नहीं करो, कार्य शिद्दत से करो,परिणाम पर बैचेनी नहीं। सफलता में समय और उसकी प्रतीक्षा करो रोटी खाने से खून बनता है लेकिन, रोटी खाते ही खून नहीं बनता। उन्होंने प्रयोग बताते हुए कहा कि जब भी मन में अधीरता हो तो गहरी सांस लो और रुकें तथा धीरे-धीरे छोड़ें। इससे आपकी अधीरता में कमी आएगी। हम चीजों के लिए थोड़ा समय दें और प्रतिक्रिया करने से बचें। धीरज तथा संयम के साथ यदि अपने से आत्म संवाद करें इससे आपका अवचेतन मन सक्रिय हो उठेगा और आपके अंदर की अधीरता नष्ट हो जाएगी।</p>
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		<title>मुनिश्री प्रमाण सागर जी से केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने लिया आशीर्वाद : पंचकल्याणक स्थल पर पहुंचे थे मंत्री </title>
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					<description><![CDATA[जिनबिम्ब पंचकल्याणक महा महोत्सव में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ के दर्शन किए। उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और उनसे साहित्य प्राप्त किया। भोपाल से पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह खबर&#8230; भोपाल। भोपाल में आयोजित जिनबिम्ब पंचकल्याणक महा महोत्सव में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने टीटी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिनबिम्ब पंचकल्याणक महा महोत्सव में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ के दर्शन किए। उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और उनसे साहित्य प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल।</strong> भोपाल में आयोजित जिनबिम्ब पंचकल्याणक महा महोत्सव में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने टीटी नगर, भोपाल विराजमान मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म चर्चा कर मुनिश्री का साहित्य प्राप्त किया।</p>
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<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75046" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250220-WA0018-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />इस अवसर पर बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रेष्ठी जन मौजूद रहे। भोपाल में मुनिश्री प्रमाणसागर जी ससंघ में जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव होने जा रहा है। यहां दूर प्रदेश और नगरों और शहरों से श्रद्धालु एकत्र हो रहे हैं।</p>
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