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	<title>Munishree Sudhasagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Munishree Sudhasagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>नवनिर्मित हो रहे जिनालय में तिलकदान के साथ प्रभु हुए विराजित : अशोक नगर जैन समाज प्रतिनिधि मंडल ने मुनिश्री ससंध को श्रीफल किए भेंट   </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:48:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं रहता। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230; मुंगावली। गृहस्थ जीवन में रहते [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं रहता। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगावली।</strong> गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं रहता। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यहां तक कि जीव आत्मा को अपने दुःख का भी भान नहीं रहता। जब कभी सौभाग्य से सदगुरु का समागम मिलता है, तब उसे समझ में आता है कि मैं कहां उलझ गया और अब उलझन सुलझने का नाम ही नहीं ले रही। मुनिश्री ने कहा कि उसी भूल को सुधारने का मौका हमें इस दुर्लभ मनुष्य जन्म में मिला है। इसे हाथ से नहीं निकलने देना। जगत की भलाई के लिए जो कुछ भी बन पड़े करते चले जाना।</p>
<p><strong>अशोक नगर समाज ने किए श्रीफल भेंट</strong></p>
<p>बुधवार को अशोक नगर जैन समाज पंचायत कमेटी के अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, पंचायत सदस्य विपिन सिंघई, नितिन बज, हेमंत टडैया, पंच कल्याणक के पात्र शैलेंद्र दददा, धर्मेंद्र रोकड़िया, सचिन कांसल, गिरीश अथाईखेडा रिंकेश कांसल, मुनेश विजयपुरा, मुन्ना बांझल, अक्षय टडैया प्रमुखजनों ने मुनि संघ को श्रीफल भेंटकर शांतिनगर गांव मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का निवेदन किया। इस दौरान जैन समाज के मंत्री धुर्रा ने कहा कि गुरुदेव शांतिनगर गांव मंदिर की प्रतिष्ठा के लिए हम सब निवेदन लेकर आए हैं।आपके चरण पड़ते ही सब कार्य पूरा हो जाएगा।</p>
<p><strong>अशोक नगर से बने आईएएस चितवन जैन का हुआ सम्मान</strong></p>
<p>अशोक नगर जिले से बने आईएएस चितवन जैन ने श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के साथ पहुंचकर परिवार सहित मुनिश्री सुधासागरजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा का मन में प्रबल भाव था। गुरुदेव यह भावना आपके आशीर्वाद से प्रल्लवित हुई। इस सेवा को और भी अच्छी तरह से करते हुए ऐसा क्या करें कि लोग याद रखें। मुनिश्री सुधासागरजी ने कहा कि सबसे पहले राष्ट्र है, राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तब आप और हम सब मिलकर धर्म संस्कृति के लिए कुछ कर सकते हैं। आज सबसे अच्छा समय है, जब आप अपनी इच्छा के अनुसार धर्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी ही भूल के कारण ये जीव आत्मा भटक रही है। हमारी ही भूल हम पर हावी हो रही है इन भूलों को सुधारने का करने उद्यम करना होगा। कर्मों के अनुसार न करके स्वयं को निरखकर, ज्ञाता, दृष्टा स्वभाव की ओर अपने चंचल चित्त को लगाए रखना होगा। इससे राग, द्वेष, मोह में कमी आएगी। जो दःुखों का मुख्य कारण है। अपने स्वभाव रूप आनंद पाने की तरफ़ कम से कम एक कदम तो उठाएं।</p>
<p><strong>णमोदय तीर्थ के नाम से जाना जाएगा नव निर्मित जिनालय</strong></p>
<p>पिछले 12 वर्षों से बन रहे नवीन जिनालय में विराजमान होने वाले भगवान श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा का तिलकदान करने का सौभाग्य उषा देवेंद्रकुमार अर्पितकुमार सिंघई ने प्राप्त किया। सर्व प्रथम तिलकदान की क्रिया को मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच किया। इसके बाद सर्व समाज और बाहर से पधारे भक्तों भी तिलकदान का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बताया गया कि यह मंदिर णमोदय तीर्थ के नाम से जाना जाएगा। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष रूपेश जैन, मंत्री शशांक सिंघई, पूर्व अध्यक्ष चंद्रकुमार मोदी, अरविंदकुमार मक्कू, मनीष मोदी, दीप टडैया काली मोदी, संजय सिंघई उपस्थित थे।</p>
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		<title>अभिनंदनोदय तीर्थ में संतशाला का शिलान्यास : विद्यालय को उच्चीकृत कर विभिन्न संकायों के लिए मुनि श्री ने दिया मार्गदर्शन  </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:19:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। जिसका पुण्यार्जन सेठ शिखरचंद सुरेन्द्र कुमार किसलवास द्वारा किया गया। मंत्रोच्चार के साथ जयकुमार शास्त्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। जिसका पुण्यार्जन सेठ शिखरचंद सुरेन्द्र कुमार किसलवास द्वारा किया गया। मंत्रोच्चार के साथ जयकुमार शास्त्री ने मुनि श्री के आशीर्वाद से पूजन के बाद शिलान्यास कराया। इसके पूर्व मुनि श्री ने प्रातःकाल चन्द्रप्रभु जिनालय डोडाघाट के दर्शन किए। इसके बाद सुधासागर कन्या इंटर कॉलेज पहुंचे। जहां विद्यालय परिवार ने मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर आर्शीवाद ग्रहण किया। विद्यालय को उच्चीकृत कर विभिन्न संकायों के लिए मुनि श्री ने मार्गदर्शन किया। मुनि संघ की अगुवाई विनम्र बाल मंच द्वारा दिव्यघोषों के साथ की गई। द्वारे-द्वारे श्रद्धालुओं ने रंगोली सजाई और पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।</p>
<p><strong>जिज्ञासा समाधान अभिनंदनोदय तीर्थ में हुआ</strong></p>
<p>नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में मुनि श्री सुधासागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का पुण्यार्जन प्रमोद कुमार, गौरव जैन पाय एवं सोमचंद,संजीव कुमार, राजीव जैन लकी परिवार द्वारा किया गया। इस दौरान भगवान बाहुबलि की वेदिका पर अभिषेक शांतिधारा की व्यवस्थाओं के लिए वीरेन्द्र जैन कड़की, प्रमोद जैन गुरसौरा, प्रकाश जैन अनमोल के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई। मुनि श्री ने जैन अटामंदिर द्वारा क्रय की गई भूमि का अवलोकन किया और जैन पंचायत की मौजूदगी में भूमि का नामकरण विद्या सुधा वाटिका सर्वसम्मति से हुआ तथा अगामी कार्ययोजना के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस द्वारा किया गया। मुनि श्री सुधासागर महाराज को भक्ति पूर्वक आहारदान का पुण्यार्जन सिंघई शीलचंद राजीव अनौरा परिवार को मिला। सायंकाल जिज्ञासा समाधान अभिनंदनोदय तीर्थ में हुआ। जहां श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान पाया। इसके बाद गुरुभक्ति हुई जिसमें श्रावकों ने सम्मलित होकर आरती की और भक्ति में झूमे।</p>
<p><strong>यह समाज जन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया, सीए सौरभ जैन प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक जैन दैलवारा, मनोज जैन बबीना, अजय जैन गंगचारी, वीरचंद सराफ, प्रमोद जैन पाय, शिक्षक प्रफुल्ल जैन, संजीव जैन लकी, अखिलेश गदयाना, धन्यकुमार जैन एड, प्रधानाचार्य कल्पना जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, सौरभ जैन पीलू, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, संजय रसिया, संजीव सौरया आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर रहेगी शराबबंदी </strong></p>
<p>दिगम्बर जैन महासमिति ललितपुर महरौनी संभाग ने बुधवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर 30 मार्च को महावीर जयंती पर अंडा, मांस, मछली, शराब की बिक्री को प्रतिबंधित किए जाने की मांग की। इस आशय का ज्ञापन देते हुए संभाग के अध्यक्ष महेन्द्र जैन मडवैया एडवोकेट ने बताया कि जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव पर ऐसी दुकानों पर विक्रय प्रतिबंधित की जाए। इस संबंध में अपर जिला मजिस्टेट ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिशासी अधिकारी नगरपालिका को निर्देशित किया है 30 मार्च को महावीर जयंती पर शराब, अंडा, मांस, मछली की बिक्री को प्रतिबंधित किए जाने के संबंध में कार्रवाई करें। ज्ञापन देने वालें में कार्य अध्यक्ष राजकुमार जैन मोदी, महामंत्री ब्रजकिशोर जैन एड, संतोष गोयल, उत्तमचंद जैन, अरूण जैन, संतोष वत्सल, कामरेड जिनेन्द्र जैन, अवनीश बुखारिया, महेश अमरा, अक्षय कुमार जैन आदि प्रमुख रहे।</p>
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		<title>सतोदय में अपार पुरातन संपदा, जिनका संरक्षण जरूरी: मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियां, स्वयंसेवी संस्थाएं जुटी </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:31:22 +0000</pubDate>
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<p><strong>सतोदय तीर्थ सेरोन में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ ने शुक्रवार को यहां की मूर्तिकला को देखा और उनके संरक्षण के लिए समाज को प्रेरित किया। मुनि श्री ने कहा कि सतोदय में पुरातन संपदा का अपार भंडार है, इसको संरक्षित किया जाना जरूरी है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। सतोदय तीर्थ सेरोन में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ ने शुक्रवार को यहां की मूर्तिकला को देखा और उनके संरक्षण के लिए समाज को प्रेरित किया। मुनि श्री ने कहा कि सतोदय में पुरातन संपदा का अपार भंडार है, इसको संरक्षित किया जाना जरूरी है। मुनि श्री ने सतोदय में विराजित प्रतिमाओं के दर्शन किए और विकास कार्यों को देखा। मुनि श्री ने प्राचीन संग्रहालय में रखी मूर्तियों को देखकर उनके संरक्षण पर बल दिया। शुक्रवार प्रातःकाल मुनि श्री के सानिध्य में प्रभु अभिषेक शांतिधारा हुई। जिसका पुण्यार्जन सुशील जैन शाह परिवार दिल्ली एवं सोमचंद संजीव जैन लकी परिवार ललितपुर ने किया। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन ज्ञानचंद रीतेश कुमार सादूमल परिवार ने किया। मुनि श्री की आहारचर्या कराने का पुण्यार्जन संगीता मनीष जैन नायक परिवार को मिला। मुनि श्री ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप जैन सुयश अशोकनगर के मार्गदर्शन में होने वाले श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए प्रमुख पात्रों के चयन के बाद आयोजन स्थल पर तैयारियां चल रही है। प्रतिष्ठा महोत्सव के इंद्र-इंद्राणियों की व्यवस्थाओं को जैन मिलन मुख्य शाखा पूर्ण कर रही है।</p>
<p><strong>यह समाजजन देख रहे हैं व्यवस्थाएं </strong></p>
<p>जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, प्रतीक इमलिया, सतोदय तीर्थ सेरोन अध्यक्ष सतीश जैन बंटी, महामंत्री सिंघई, कोषाध्यक्ष विजय जैन लागौन, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, संजय मोदी, मुकेश जैन, अरविंद जैन बरोदा, अमित जैन डोगरा, विमल जैन पीहर साडी, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, नीतेश विलौआ, नरेश जैन मुक्ता, पं. जयकुमार जैन, रविजैन चुनगी, अवध किशोर जैन आदि व्यवस्थाएं कर रहे हैं।आगामी 4 से 8 मार्च तक सतोदय तीर्थ सेरोन में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव किया जाएगा। जिसको लेकर जैन समाज में उत्साह है। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी को शाढ़ौरा समाज ने किए श्रीफल भेंट: परम संरक्षक बनकर तीर्थ क्षेत्र कमेटी को मजबूत करें  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:49:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। थूवोनजी से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने धर्मात्माओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित किया ही नहीं है। संसार ऐसा ही है जब किसी को संत बनने की प्रेरणा देते हैं तो सब असार बताते हैं। संसार में कुछ नहीं रखा सब छोड़ दें। भक्त ने वैराग्य धारण कर लिया फिर गुरु मौन हो गए। जय श्री राम हो गया। अब तो सिर्फ मौन हो गए। दुनिया में कैसे जीना है। इसकी कला सिखाई गई है। कदम चले कदम चिठ्ठे कदम भूंजे जा भांजे मैं कैसे चलू कैसे खाऊं कैसे रहूं। ये सब मैं कुछ करुंगा मुझे पाप का बंध नहीं होना चाहिए। कीचड़ में तो रहूंगा लेकिन, जंग नहीं लगना चाहिए।</p>
<p><strong>कोई भी व्यक्ति थूवोनजी का ट्रस्टी बन सकता है</strong></p>
<p>इस अवसर पर क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से इस तीर्थ को देशभर के ही नहीं दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हमारे जैन बंधु दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के ट्रस्टी बनकर कमेटी से जुड़ सकते हैं। आज भी ललितपुर जैन समाज के स्तंभ राजेंद्रकुमार लल्लू भैया परम संरक्षक बन रहे हैं। इस दौरान जैन समाज शाढ़ौरा ने मुनि श्री को श्री फल भेंट किए। इनका सम्मान दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ.जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने किया।</p>
<p><strong>दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा</strong></p>
<p>दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा। अपन कहें इतने साल धर्म करते हुए हो गए। कोई शांति नहीं मिली। वर्षाे से मंदिर जा रहे हैं। कुछ नहीं हुआ गुरुओं के पास गया कुछ भी नहीं मिला तो भी थकना नहीं है। कितना ही थक जाओ। थककर बैठना नहीं है। फिर उठो और खोज करने में लग जाओ। एक संकल्प कर लो मैं सत्य को खोजकर रहूंगा। हीरा कहां मिलता है, कोयला की खान से निकाला जाता ह।ै जहां काला ही काला कोयला भरा पड़ा ह।ै उसके बीच में एकदम चमकदार हीरा मिला। वह सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसा सब चीजों में समझना।</p>
<p><strong>&#8230;जहां भगवान बनने वाली आत्मा रहती है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि ये शरीर कैसा है इस शरीर में मल मूत्र भरा पड़ा है। कैसे गंदे स्थान पर आत्मा को रख दिया। सबसे अच्छा शरीर देवताओं का होता है और संसार में सबसे गंदा शरीर मनुष्य का होता है। लकड़ी जल कोयला भई कोयला जल भई राख। राख से जग अपनी गंदगी को दूर कर लेता है। इसमें आत्मा को रखा गया, जो भगवान बन सकती हैं। इसके लिए खोज जारी रखना पड़ेगा। हम धर्म करते हुए थक रहे हैं। दया करने में थक गए। हिंसा करने वाले भी सुबह उठते ही फिर युद्ध करने चले जाते हैं और तुम धर्म करने-करते थक गए। नहीं थकना नहीं हम एक जीव को भी नहीं बचा पाए तो भी नहीं थकंेगे। पारसनाथ स्वामी अवधि ज्ञानी थे। सब जानते थे। ये नाग नागिन इतने जल चुके थे कि ये बचेंगे नहीं फिर भी बचाने में लगे रहे। डॉक्टरों को भी यही कह गया कि अंतिम श्वास तक प्रयास करता रहता है। यदि डॉक्टर एक मिनट पहले भी मरीज़ को भगा दे तो एफआईआर हो सकती है। डॉ. अंतिम समय तक प्रयास करता रहता है, इसलिए हमें थकान नहीं है।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी ने शांतिनाथ मंदिर के जीर्णाेद्धार की शिला रखी : 23 नवंबर को मिलेगा गुरु मुख से रक्षा कवच, होगा असीम क़ालीन विधान का शुभारंभ  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 08:35:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंधई मोनू की यह खबर&#8230; थूवोनजी। जिसको देखकर ऐसा भाव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंधई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> जिसको देखकर ऐसा भाव आए कि इसकी शरण में जाकर सबकुछ समर्पित कर दूं, वहां तुम्हारा हित होगा। जिसके मन में ये भाव आ जाएं कि मैं इनकी शरण में चला जाऊं। जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।</p>
<p>तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि 23 नवंबर की तारीख इस अंचल के भक्तों के लिए एक नई सौगात लेकर आई रही है। इस दिन मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज असीम क़ालीन भक्तावर मंडल विधान के रूप में एक रक्षा कवच इस अंचल के ही नहीं देशभर से आ रहे भक्तों को देने जा रहे हैं। इस दिन प्रातः काल की बेला में दर्शनोदय के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी के दरबार में रजत मांडने पर असीम क़ालीन भक्तामर मंडल विधान के कलशों की स्थापना होगी। इस के लिए एक बार भक्त को 111 श्रीफल की राशि भेंट करनी होगी। इसके आजीवन विधान का सौभाग्य आपको प्राप्त होता रहेगा। प्रति वर्ष क्षेत्र कमेटी आपको एक चांदी की मुद्रा एवं नंद्यावर्त देती रहेगी, जो वर्ष भर बड़े बाबा के दरबार में मंत्री हो आपको अपने घर ले जाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>इन्होंने किया विधान में शामिल होने का आग्रह </strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन महामंत्री, मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ.जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद ने इसमें भाग लेने का आग्रह किया है।</p>
<p><strong> जो तुम्हारी दृष्टि में मंगल हो वह तुम्हारे जीवन का मंगल करेगा</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जो तुम्हारी दृष्टि में मंगल हो, वह तुम्हारे जीवन का मंगल करेगा। अभी तुम्हारी दृष्टि में कोई मंगल था ही नहीं लेकिन, जैसे ही तुम ने अपना भला करने वाले का ध्यान किया। तुम्हारे लिए लगने लगा कि इस दुनिया में कोई तो हमारा है, तुम मेरी नकल मत करना। तुम तो मेरी अक्ल से चलना, मेरी अक्ल अपने जीवन को अच्छा बनने के लिए ले लेना, सफलता मिल जाएगी।</p>
<p>संसार में आपकी दृष्टि में सबसे श्रेष्ठ मंगल कौन से हैं फिर आगम से तुलना कर अपने गुरु से विचार-विमर्श करना। जो मैंने उत्तम माना है वह आगम से गुरु जनों ने भी जिसे श्रेष्ठ माना है। अब उसे आगे कर देना तुम्हारा मंगल ही मंगल होगा।</p>
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		<title>चमत्कारी है शिवपुरी का गोलाकोट जैन तीर्थ : गोलाकार पर्वत श्रृंखला के बीच है यह तीर्थ </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Jun 2025 11:29:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिले के खनियांधाना में स्थित गोलाकोट जैन तीर्थ अब स्वर्ग सा नजर आता है। गोलाकार पहाड़ों के बीच 105 बीघा में बने प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थ पर व्यवस्थाएं ऐसी है कि जो देखता है दंग रह जाता है। शिवपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; शिवपुरी। जिले के खनियांधाना में स्थित गोलाकोट जैन तीर्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिले के खनियांधाना में स्थित गोलाकोट जैन तीर्थ अब स्वर्ग सा नजर आता है। गोलाकार पहाड़ों के बीच 105 बीघा में बने प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थ पर व्यवस्थाएं ऐसी है कि जो देखता है दंग रह जाता है। <span style="color: #ff0000">शिवपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>शिवपुरी।</strong> जिले के खनियांधाना में स्थित गोलाकोट जैन तीर्थ अब स्वर्ग सा नजर आता है। गोलाकार पहाड़ों के बीच 105 बीघा में बने प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थ पर व्यवस्थाएं ऐसी है कि जो देखता है दंग रह जाता है। आचार्यश्री विद्यासागरजी के आशीर्वाद एवं मुनिश्री सुधासागर जी के निर्देशन में इस तीर्थ स्थल का विकास किया जा रहा है। दिल्ली के व्यवसायी राजधानी परिवार ने यहां अपने माता-पिता के नाम से 30 कमरों का हाईटेक होटल जैसा अतिथि गृह बनाकर दिया है। इसकी खास बात यह है कि इस अतिथि गृह की पूरी आय मंदिर कमेटी को जाती है । इस तीर्थ पर भव्य धर्मशाला और भोजनशाला भी उपलब्ध है।अतिशयकारी भगवान आदिनाथ के दर्शन से हर काम सफल हो जाते हैं ।</p>
<p>– इस तीर्थ पर प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का विशाल जिनालय बनकर लगभग तैयार हो चुका है।</p>
<p>– त्रिकाल चौबीसी के लिए 24 जिनालय बनाए जाने हैं।</p>
<p>– विशाल भोजशाला तैयार है, जहां 150 लोग साथ बैठकर भोजन कर सकते हैं।</p>
<p>– हेलीकाप्टर उतरने के लिए हेलीपेड बन चुका है।</p>
<p>– शानदार तालाब का निर्माण हो चुका है।</p>
<p>– इस तालाब के किनारे 25 संत कुटियां बनाई गई हैं। संतों के लिए यह कुटियां लकड़ी से तैयार की गई हैं।</p>
<p>– संतों के प्रवचन के लिए स्टेडियम की तर्ज पर ओपन सभागार बनाया गया है।</p>
<p>– सामाजिक आयोजन के लिए अतिथि गृह में 200 सीटर एयर कंडीशन सभागार बनाया गया है।</p>
<p>– पुराने संत आवास को धर्मशाला में बदल दिया गया है।</p>
<p>– भगवान के अभिषेक के लिए लगभग 15 लाख लीटर पानी का प्राकृतिक फिल्टर प्लाट बनाया गया है।</p>
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		<title>करने का मन होता है तो अधर्म हैः मोबाइल के अंदर लगे चित्र से तुम्हारे अंदर के चरित्र पता चल रहा है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 17:02:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन दर्शन ने सूत्र दिया-तुम कौन हो? हर व्यक्ति ये जानने का प्रयास कर रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए, क्या जानना चाहिए? मुझे क्या बोलना, पढ़ना चाहिए? मैं क्या देखूँ, सुनूँ ये समझ नही आ रहा। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। पढ़िए बहोरीबंद से राजीव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन दर्शन ने सूत्र दिया-तुम कौन हो? हर व्यक्ति ये जानने का प्रयास कर रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए, क्या जानना चाहिए? मुझे क्या बोलना, पढ़ना चाहिए? मैं क्या देखूँ, सुनूँ ये समझ नही आ रहा। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बहोरीबंद से राजीव सिंघई मोनू व पृथ्वीपुर से शुभम की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बहोरीबंद (कटनी)</strong>। जब किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाओ तो एक सूत्र दे रहा हूँ-तुम कौन हो? क्या अनुभूति हो रही है, मनुष्य की, मैं भारतीय हूँ, मैं जैन हूँ, मैं पिता हूँ, मैं पति हूँ, मैं भक्त हूँ। जो वस्तु तुम्हे दिखी, उसको देखते ही अनुभूति में क्या आ रहा है? माँ को देखते ही मैं बेटा, गुरु को देखते ही मैं शिष्य हूँ, बस तुम जो हो, अब वह करना है। खाते समय तुम्हें यह नहीं देखना है कि मैं क्या खाऊं, डिप्रेशन में चले जाओगे मैं मनुष्य हूँ और मनुष्य मैं भी जैन हूँ, बस, जैन व्यक्ति को क्या खाना चाहिए अब लिस्ट जल्दी बन जाएगी। जैन में भी व्रती हूँ, व्रती में भी मुनि हूँ तो जो तुम्हारे रत्नत्रय के लिए, धर्म साधना के लिए जो तुम्हारी आचार संहिता में लिखा है, वह तुम्हे खाना है बस।</p>
<p><strong>कार्य दो प्रकार से होते है</strong></p>
<p>करने योग्य कार्य दो प्रकार से होते हैं, धर्म या करने योग्य कहो, एक ही बात है। जो-जो करने योग्य है वे-वे सब धर्म है और जो जो करने योग्य नहीं है और करने का मन होता है तो अधर्म है। अब इस दुनिया मे क्या करने योग्य है, क्या नहीं, इसकी दृष्टि कैसे बनाये तो जैन दर्शन ने सूत्र दिया-तुम कौन हो? हर व्यक्ति ये जानने का प्रयास कर रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए, क्या जानना चाहिए? मुझे क्या बोलना, पढ़ना चाहिए? मैं क्या देखूँ, सुनूँ ये समझ नही आ रहा।</p>
<p><strong>अच्छे कुल की परिभाषा जिसमें अनैतिक कार्य नहीं होते </strong></p>
<p>साधु के लिए कहा कि पहले यह मत देखना कि विधि है या नहीं, पहले ये देखना कि इसके हाथ से आहार लेने लायक है या नहीं, कौन से कुल का है। साधु तुम्हारे सामने क्या मानकर खड़ा हुआ है कि तुम बहुत अच्छे कुल के हो, पात्र हो, जैन हो। अच्छे कुल की परिभाषा क्या है जिसमें मांसाहार, शराब, अभक्ष्य सेवन, अनैतिक कार्य नहीं होते। पर इससे बड़ी शर्म क्या होगी कि साधुओ को पूछना पड़ता है कि तुम रात में तो नहीं खाते, शराब तो नहीं पीते। कई बार निकल भी आते है। आज के समय में अनजाने चौके में हम साधु नहीं जा सकते। वही साधु आहार को उठ सकता है कि जिस साधु को इतना निमित्त ज्ञान हो, जो देखते ही पता कर ले कि ये कौन है।</p>
<p><strong>मोबाइल के अंदर चित्र से तुम्हारे अंदर का चरित्र पता चल रहा </strong></p>
<p>इस घर का क्या चरित्र है, ये उस घर मे टँगे हुए चित्रों से पता चल जाता है। कोई कहे कि मैं अपने मोबाइल में माँ का फोटो लगाता हूँ नेचुरल रूप से, बस मैं आंख बंद करके कह दूँगा ये व्यक्ति कभी माँ को दुख नहीं दे सकता, चाहे कितनी भी उद्दंड पत्नी आ जाए क्योंकि ये बार-बार माँ को देखना चाह रहा है। यदि पति नेचुरल रूप से मोबाइल में अपनी पत्नी का चित्र लगाता है तो वह निश्चिंत रहे तुम्हारा पति कंही नही जाएगा क्योंकि वह दिन में दो हजार बार तुम्हारा चेहरा देख रहा है, फिर भी बोर नहीं हो रहा। यदि पिता, बेटे बिटिया का चित्र लगाए है तो वह बेटे बिटिया निश्ंिचत रहे, तुम्हारा पिता तुम्हे अनाथ नहीं होने देगा। यदि भक्त सालों से गुरु का फोटो लगाए है तो यह निश्चित है कि यह सब कुछ छोड़ सकता है लेकिन गुरु को नहीं छोड़ पायेगा। मोबाइल के अंदर चित्र से तुम्हारे अंदर का चरित्र पता चल रहा है कि तुम किसको चाहते हो।</p>
<p><strong>भगवान की छाया तुम्हारे सिर पर मिलेगी </strong></p>
<p>भगवन से कहना है कि तू सर्वज्ञ है देख ले मेरे घर में, मेरे मोबाइल में, मेरे सीने में, मेरे मन मे, मेरे वचन में, मेरी काया में, कभी भी स्वप्न में मैंने किसी का चित्र नहीं चाहा, सब जगह आपका चित्र है, 6 महीने करके देख लीजिए, शांतिनाथ भगवन आपके हो जायेगे। आप घनघोर जंगल मे भी रहेंगे और जैसे ही आप शांतिनाथ भगवान का नाम लेकर उनकी मूर्ति याद करेंगे, वही शांतिनाथ भगवान की छाया तुम्हारे सिर पर मिलेगी।</p>
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		<title>व्यक्ति अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाताः जो तुम्हारे पास नहीं है उसको कभी याद नहीं रखना और जो है उसको कभी भूलना मत-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Mar 2025 17:54:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सारे भक्तों से कहना है-माँ बाप का कहना मानना या नही मानना। लेकिन माँ बाप से झूठ मत बोलना। वो पाप मत करना जिसको छुपाने के लिए माँ-बाप से, गुरु से झूठ बोलना पड़े और हो जाये तो गुरु को अवश्य बताना। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सारे भक्तों से कहना है-माँ बाप का कहना मानना या नही मानना। लेकिन माँ बाप से झूठ मत बोलना। वो पाप मत करना जिसको छुपाने के लिए माँ-बाप से, गुरु से झूठ बोलना पड़े और हो जाये तो गुरु को अवश्य बताना। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बहोरीबंद से राजीव सिंघई मोनू व पृथ्वीपुर से शुभम की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बहोरीबंद (कटनी)।</strong> व्यक्ति के पास जब कुछ नहीं होता है तो वह कहता है कि मैं क्या कर सकता हूँ, मेरे पास तो कुछ है ही नही और जब सब कुछ होता है तो कहता है अब क्या करना है। मेरे पास धन नहीं है तो कहता है मैं दान कैसे दूँ, पैर नहीं है तो मंदिर कैसे जाऊँँ, तीर्थ यात्रा कैसे करूँ। लेकिन जब सब कुछ हो जाता है, किस्मत भी साथ देती है तो कहता है, सबकुछ तो मेरे पास है, अब जरूरत क्या है धर्म करने की, इस स्थिति का परिणाम यह निकलता है कि व्यक्ति अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाता है।</p>
<p><strong>नकारात्मक सोच हमारा पतन करती है </strong></p>
<p>कर वह व्यक्ति सकता है जिसके पास कुछ नहीं है और बुलंदी आ जाए कि मैं सब कुछ कर सकता हूँ। मेरा क्षेत्र, मेंरी जाति, मेरा कुल, मेरा परिवार गंदा है, अब मैं क्या कर सकता हूँ, वह व्यक्ति जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता। तुम्हारे मन में अभाव की अनुभूति हो और अभाव की अनुभूति तुम्हारी आत्मा का विषय बन जाए, समझ लेना तुम्हारा और डाउनफॉल होने वाला है और नीचे जाओगे, ये इतना खतरनाक शब्द है कि मैं कुछ नहीं कर सकता क्योंकि मैं असमर्थ हूँ, मेरे पास कुछ है नहीं। अंधा यह कहे कि मैं देख ही नहीं सकता हूँ, मैं क्या करूँ, समझना अगला भव भी अंधे का आएगा, ये नकारात्मक सोच हमारा पतन करती है।</p>
<p><strong>तुम्हारे पास क्या-क्या नहीं है उसकी लिस्ट फाड़कर फेंक दो</strong></p>
<p>हर व्यक्ति के दो रूप है एक वह चाहता है कि मैं जहाँ हूँ उससे आगे बढ़ जाऊँ, दूसरा व्यक्ति कहता है कि मेरी किस्मत आगे बढ़ने लायक तो नहीं है, मैंने बहुत प्रयास कर लिए तो ऐसे व्यक्ति चाहते है कि जो हूँ, इससे कम न हो जाये तो इसके लिए एक मंत्र दे रहा हूँ तुम्हें-कभी अपने जीवन में अभाव का ध्यान मत रखना कि मेरे पास यह नहीं है, इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकता। मेरे पास वज्र वृषभ नाराच संहनन नहीं है। इसलिए मैं अरहंत नहीं बन सकता। मूर्ति के सामने खड़े होकर हम कह रहे हैं जिनेन्द्र देव नहीं है, मूर्ति में काम चल रहा हूँ, क्या करूँ, बस अब वह मूर्ति भी छूटने वाली है, किस्मत बहुत डाउनफॉल हो जाएगी। तुम्हारे पास क्या-क्या नहीं है उसकी लिस्ट फाड़कर फेंक दो, आपके पास मकान नहीं है तो यह मत कहो कि मेरे पास मकान नहीं है, अन्यथा जो झोपड़ी है, वह भी गायब होगी फुटपाथ पर आओगे। पहले तो जो है, जहाँ है, जैसे है, उसके प्रति मन में खुशी लाकर दिखा दो। फूटी हुई किस्मत को भी रखो, वो भी और कुछ नहीं लाएगी तो दिवाली के दिन सूखे बाजरे की रोटी ला देगी, जैसे वह टूटी चप्पल भी काँच की बर्नी ला सकती है। अभाव की अनुभूति नहीं, सद्भाव की अनुभूति करो।</p>
<p><strong>फल नहीं मिलेगा तो छाया तो मिलेगी </strong></p>
<p>फल वाला बीज तुम्हें मिला नहीं और मिलेगा भी नहीं, अब एक बीज मिला है जिसमे पेड़ तो लगेगा लेकिन फल नहीं लगेगा तो अब समझदारी है कि फल नहीं मिलेगा तो छाया तो मिलेगी। फल वाले पेड़ लगाने से बरसात नहीं होती, बरसात उन जंगली पेड़ो से होती है जिन पर फल नहीं आते और वे पेड़ किसी काम में नहीं आते। बहुत काम की है तुम्हारी फुटी हुई जिंदगी, मरने का भाव नहीं करना, हताश नहीं होना। यह कहने कभी मंदिर में मत जाना कि मेरे पास मकान नहीं है, मेरे पास गाड़ी नहीं है, मैं पास नहीं हो रहा हूँ। नहीं शब्द का त्याग करो और यह कहो कि मेरे पास है। तुम्हारे पास क्या है इसका ध्यान करो- झोपड़ी का, टूटी चप्पल का ध्यान करो। जो तुम्हारे पास नहीं है उसको कभी याद नहीं रखना और जो है उसको कभी भूलना मत।</p>
<p><strong>मेरा देने का भाव नहीं है या मेरे पास इतना नहीं है कि मैं दे सकूँ</strong></p>
<p>ये जैनदर्शन की खोज है कि जीव कभी जीव से झूठ नहीं बोलना, आपका सहयोग नहीं करना है तो मत करना, मेरे पास समय नहीं है। बचा सकते हो लेकिन मैं बचाऊँगा नहीं क्योंकि मेरा बचाने का भाव है, मेरे पास समय नहीं है, बस झूठ मत बोलना। देना हो तो देना, नहीं देना हो तो उसकी किस्मत पर छोड़ देना। तुम मानव हो तो कभी मानव से झूठ मत बोलना, उससे छलकपट मत करना। आप भली मत देना, सीधा कह देना कि मेरे पास है लेकिन मुझे नहीं देना, मेरा देने का भाव नहीं है या मेरे पास इतना नहीं है कि मैं दे सकूँ लेकिन झूठ मत बोलना कि मेरे पास नहीं है। रिश्तेदारों का सहयोग नहीं करना हो तो मना कर देना लेकिन झूठ मत बोलना कि मैं तुम्हारा सहयोग करने लायक नहीं, मेरे पास कुछ है ही नहीं, अन्यथा उसी समय तुम्हारा डाउनफॉल चालू हो जाएगा। इसी तरह पड़ोसी से, भाई से छलकपट मत करना, आज की कमाई नही दूँगा तुझे, लाख रुपया कमाया है, जो तुम्हे करना हो करना, बस झूठ मत बोलना कि आज धंधा चला ही नहीं है, बस यही दरिद्रता का कारण है।</p>
<p><strong>डॉक्टर से रोग और गुरु से दोष मत छिपाना </strong></p>
<p>सारे भक्तों से कहना है-माँ बाप का कहना मानना या नही मानना। लेकिन माँ बाप से झूठ मत बोलना। वो पाप मत करना जिसको छुपाने के लिए माँ-बाप से, गुरु से झूठ बोलना पड़े और हो जाये तो गुरु को अवश्य बताना। डॉक्टर से रोग और गुरु से दोष मत छिपाना, गुरु की नजरों में गिर जाऊँ तो गिर जाऊँ, बस उन्हें कभी अपने दोष मत छिपाना। सबको मालूम है कि मैं तेरा मित्र हूँ और तू मेरे से ही झूठ बोल रहा था, ये कहानी है दरिद्रता की। इसी प्रकार दान देते समय कभी यह मत बोलना कि मैं समर्थ नहीं हूँ, कहना अभी मेरा भाव नहीं है अन्यथा यही तुम्हारी गरीबी का कारण बनेगा।</p>
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		<title>मेरे पास है उससे ज्यादा दुनिया के पास नहीं हैः उसका साथ दो, जिसका कोई साथ नही देता-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Mar 2025 05:48:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। जो मेरे में है उससे ज्यादा दुनिया में नहीं है और जो मेरे में नहीं है बाकी दुनिया में नहीं है, एक ऐसी स्व चतुष्टय की दृष्टि तात्विक दृष्टि कहलाती है और तात्विक दृष्टि जब प्रकट हो जाती है तब [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। जो मेरे में है उससे ज्यादा दुनिया में नहीं है और जो मेरे में नहीं है बाकी दुनिया में नहीं है, एक ऐसी स्व चतुष्टय की दृष्टि तात्विक दृष्टि कहलाती है और तात्विक दृष्टि जब प्रकट हो जाती है तब व्यक्ति के मन में पर पदार्थ के प्रति ममत्व भाव टूट जाता है। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बहोरीबंद से राजीव सिंघई मोनू की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बहोरीबंद (कटनी)।</strong> अपने आपको जब व्यक्ति स्व चतुष्टय के रूप में देखता है तो हमारे लिए एक ऐसी शक्ति की अनुभूति होती है कि सब कुछ मैं हूँ और सार्वभौम हूँ मैं। जो मेरे में है उससे ज्यादा दुनिया में नहीं है और जो मेरे में नहीं है बाकी दुनिया में नहीं है, एक ऐसी स्व चतुष्टय की दृष्टि तात्विक दृष्टि कहलाती है और तात्विक दृष्टि जब प्रकट हो जाती है तब व्यक्ति के मन में पर पदार्थ के प्रति ममत्व भाव टूट जाता है।</p>
<p><strong>मेरे पास है उससे ज्यादा दुनिया के पास नहीं है </strong></p>
<p>डाकू तब बनता है जब वह अपने आपको फकीर या असमर्थ समझता है। नियम से जब-जब स्वयं पर पदार्थ की तरफ जा रहे हैं, नियम से हमने अपने आपकी कुछ शक्ति खो दी है, अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा अपशगुन कि हम पर पर दृष्टि टिकाये हुए हैं। हमें यह मिल जाये तो मैं सुखी हो जाऊँगा, यही दुख का कारण है और जिस दिन ये आ जाये कि मुझे कुछ नही चाहिए, जो मेरे पास है, उससे ज्यादा दुनिया के पास नहीं है, समझ लेना चाहिए दुख के दिनों में भी आपका सुख का दिन आने वाला है, मुझे कुछ नही चाहिए क्योंकि जो मेरे पास है उससे ज्यादा दुनिया के पास नहीं है।</p>
<p><strong>चार प्रकार के लोग होते हैं</strong></p>
<p>पहले लोग वो हैं, जिनको अपने सम्बन्ध में कुछ भी मालूम नहीं है, मैं कौन हूँ, मैं क्या हूँ, बस वह तो यह जानते हैं कि जो मेरे अनुभव में आ रहा है, वही मैं हूँ, जैसे भिखारी अपने आप को भिखारी, जैन अपने आपको जैन मान लेता है। जो वह है इससे ज्यादा उसकी सोच नहीं बन पाती। वही हूँ और जब वही है उसमे कमी देखने लग जाए तो फिर व्यक्ति दुखी हो जाता है। मैं जैन हूँ, बस इतना ही काफी है, यदि इतनी अनुभूति तुम्हें हो रही है, तुम एक दिन जैनत्व खो दोगे। थोड़ा आगे पीछे सोचो तुम जैन क्यों हो, तुम दुःखी क्यों हो। मैं दुःखी हूँ, ये बात तुम्हारे अनुभव में आती है लेकिन तुम दुखी क्यों हो ये बात विचार में नही आती और ऐसा लगता है कि अब सुखी हो ही नहीं पायेंगे कि दुःख इतना भारी पड़ रहा है कि उसका छोर नहीं मिलता।</p>
<p><strong>दुख ज्यों के त्यों बने रहे और व्यक्ति को सुखी करें </strong></p>
<p>कितनी चीजों से तुम सुख मानते हो, जितने प्रकार के तुम सुख को मान रहे हो उतने प्रकार के दुःख है और जितने प्रकार के दुख है उतने प्रकार के सुख है। ऐसी स्थिति में जैनदर्शन कहता है कि तुम्हारे दुख तो मैं मैट नहीं पाऊंगा लेकिन दुःख में भी मैं तुम्हें सुखी करने की कला बताता हूँ। यह कोई धर्म का अतिशय नहीं है, जो दुख हटा दे, धर्म का अतिशय है दुख ज्यों के त्यों बने रहे और व्यक्ति को सुखी कर दे।</p>
<p><strong>कैसा भी बाप या बेटा हो, हत्या करने की अनुमति नहीं है </strong></p>
<p>जब अपने लोग ही अपनी जिंदगी में संकट बन जाए तो उन्हें हटाने या मिटाने का प्रयास मत करना। यदि तुमने बाप को मार दिया तो तुम बाप के हत्यारे कहलाओगे, निंदा के पात्र बनोगे। कैसा भी बाप या बेटा हो, हत्या करने की अनुमति नहीं है, भले ही वो मेरा नाश कर दे लेकिन मिटाना नहीं है क्योंकि जो अपना व्यक्ति बन गया तो उसे मिटाया नहीं जाता। जैनदर्शन ने भक्त को बचाया तो सही लेकिन किसी को मिटाया नही गया। संसार में किसी को नही मिटाओ, अपने आपको बचाओ तो यही चित्चमत्कार कहलाता है। तुम्हे एक नियम लेना है-मैं किसी का विनाश नहीं करूंगा, मेरे नाश करने वाले का भी मैं विनाश नहीं करूँगा। मेरा दुश्मन भी है तो मैं नाश नही करूँगा, इसलिए इसको महाव्रत बोलते है। अब ये भाव तुम्हारे मन में आ गया और सामने वाला तुम्हारा नाश करने के लिए तैयार है, बस अब चमत्कार होगा, अब बनेगा नाग का हार।</p>
<p><strong>जो असहाय हो उसके पक्ष में खड़े हो जाना </strong></p>
<p>लड़के की सबसे बड़ी कमी होती है कि माँ का पक्ष तो लेना चाहिए लेकिन जब पत्नी का विनाश होने लग जाए तो पत्नी का पक्ष लेना चाहिए क्योंकि वो पराये घर से आई है, वह तुम्हारे विश्वास पर आई है। तुम्हारे अलावा उसका इस घर मे कोई नहीं है क्योंकि माँ का तो सब कुछ है, पिता है, तू खुद बेटा है। सही व्यक्ति वो कहलाता है जिसका कोई नही होता। जो असहाय हो उसके पक्ष में खड़े हो जाना चाहे माँ भी क्यों न हो, पिता भी क्यों न हो। फिर आपका चमत्कार देखना कितना अतिशय आता है। दुश्मन भी कमजोर पड़ रहा है तो मैं उसका साथ दूंगा। पत्नी का साथ देने को नही कहा, नही तो तुम जोरू के गुलाम बन जाओ। नही कमजोर, असहाय का साथ देना।</p>
<p><strong>यदि दुश्मन भी असहाय हो तो उसका साथ दो</strong></p>
<p>यदि दुश्मन भी असहाय हो तो मैं उसका साथ दूँगा, उस समय तुम्हारे परिणाम कि कुछ नही, मात्र मुझे बचाना है, इस समय मेरी इसको जरूरत है, दुश्मनी भूल जाओ और जैसे ही तुमने यह किया नहीं, उसी समय तुम्हारे जीवन में ऐसा चमत्कार होगा कि भूकंप आ जाएगा, सारा नगर दबकर मर जाएगा और तुम्हें खरोच भी नहीं आएगी, ये चमत्कार णमोकार मंत्र, शांतिधारा, मेरे आशीर्वाद में नही है और ये यदि तुम्हारा भाव न बन पाए तो जिनसे हमारा संबंध है, जिनसे हमने कभी राग किया है, अपना माना है, ये भली मेरा कुछ भी बिगाड़ लें, मैं कभी अपनों को मारने का भाव नहीं करूंगा, चाहे भली आज वह मेरा दुश्मन बन गया हो, कल तो मेरा ही था। ये सेकेंड नम्बर की शक्ति जागेगी कि तुम्हारे अपने भी सारे विरोध में हो जाए तो भी तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा। ये नियम था पारसनाथ का, तभी वे आज जगतपूज्य बन गए।</p>
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		<title>दृष्टि बदल दो, सृष्टि बदल जायेगी-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजीः व्यक्ति को लगे कि इसका सुख मेरे अधीन, वही से शोषण चालू </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 10:30:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रकृति को एक माँ की संज्ञा दी जाती है, माँ की संज्ञा क्यों? क्योंकि माँ जन्म दे सकती है जीवन नहीं, प्रकृति भी हमें जन्म दे सकती है, जीवन नहीं। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रकृति को एक माँ की संज्ञा दी जाती है, माँ की संज्ञा क्यों? क्योंकि माँ जन्म दे सकती है जीवन नहीं, प्रकृति भी हमें जन्म दे सकती है, जीवन नहीं। ये बात निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बहोरीबंद से राजीव सिंघई मोनू की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बहोरीबंद (कटनी)।</strong> जब चल रहा था तब अकेला था, जब सांसे टूट गई तब सब साथ चलने लगे। जब नहीं चल पाता था तो उंगली पकड़कर चलाते थे, जब चलने लगा तो लोग गिरने लगे, ये दुनिया है ही ऐसी। प्रकृति को एक माँ की संज्ञा दी जाती है, माँ की संज्ञा क्यों? क्योंकि माँ जन्म दे सकती है जीवन नहीं, प्रकृति भी हमें जन्म दे सकती है, जीवन नहीं। जन्म का अर्थ है रॉ मेटीरियल, तुम्हे योग्य बना दिया। प्रकृति के भरोसे यदि तुमने पूरी जिंदगी गुजारी दी तो तुम जन्म तो ले लोगें। लेकिन जीवन का मजा नहीं ले पाओगे क्योंकि प्रकृति जीवन नहीं दे सकती। जितनी ये महान आत्मायें है, ये निमित्त है ये प्रकृति के अंदर आते है। गुरु हमें व्रत दे सकते है, गुणस्थान नहीं। निमित्त हमारे लिए सावधान करता है लेकिन चला नहीं सकता।</p>
<p><strong>सब कुछ होकर भी हमारे पास अधिकार नहीं </strong></p>
<p>किस्मत हमें सर्वस्व दे सकती है लेकिन सार्वभौम हमें प्राप्त करना है। हमारे पास सब कुछ होकर भी हमारे पास अधिकार नहीं। अधिकार मिलते नहीं है, अधिकतर पाए जाते हैं, अधिकार योग्यता से आते है और सर्वस्व तुम्हारी किस्मत से, प्रकृति से, भगवान से भी आ सकता है। सरकार तुम्हे नोट दे सकती है लेकिन उस नोट का क्या उपयोग करना है ये उसके अधिकार से बाहर है। समझदार व्यक्ति के पास कुछ भी नहीं हो तो भी कहता है कि मेरे पास सब कुछ है और मूर्ख व्यक्ति के पास सब कुछ हो तो भी कहता है मेरे पास तो कुछ है ही नहीं। जो व्यक्ति कहता है कि मेरे पास कुछ है ही नहीं, समझना तुम्हारे दरिद्रता के लक्षण आने वाले हैं।</p>
<p><strong>केवलज्ञानी को देख श्रुत केवली को भी लगा मैं तो अज्ञानी हूँ</strong></p>
<p>तुम खुश हो ये सर्वस्व है और तुमसे दुनिया खुश है ये सार्वभौम है। हमारे पास ज्ञान बहुत अच्छा है, मेरी दृष्टि, मेरे कान बहुत अच्छे है, मैं खुश हूँ, ऐसा व्यक्ति भी निंदनीय है, दुर्गति जा सकता है। नीति कहती है ये एक पहलू है, जैन धर्म को पाकर मैं खुश हूँ, शांतिनाथ को पाकर मैं खुश हूँ, जिनवाणी को पाकर मैं खुश हूँ। ये अहंकार नहीं, गर्व है लेकिन इसके बाद भी मैं तुम्हे धर्मात्मा नहीं, फैल का सर्टिफिकेट दे रहा हूँ, ये सारी खुशियां हमें खजूर के पेड़ के समान ऊंचाई देती है क्योंकि ये सब हम अनंतों बार प्राप्त कर चुके है। मैं ज्ञानी हूँ, ऐसा भाव आना भी परिषह है, इसको जीतना है कि मैं ज्ञानी नहीं हूँ। जिनवाणी कहती है कि तू अज्ञानी है मूर्खों के बीच स्वयं को ज्ञानी मान रहा है, थोड़ा ऊपर देख। केवलज्ञानी को देखते ही श्रुत केवली को भी लगता है कि मैं तो अज्ञानी हूँ।</p>
<p><strong>व्यक्ति को लगे कि इसका सुख मेरे अधीन, वही से शोषण प्रारंभ</strong></p>
<p>तुम दुनिया के पीछे भागोगे तो दुनिया तुम्हे छोड़कर भागेगी, तुम दुनिया को छोड़ दो, दुनिया तुम्हारे पीछे भागेगी। पराधीन जब भी हो जाओगे तुम बुद्धू बनते जाओगे, संसार की अपेक्षा कह रहा हूँ। ये संसार का नियम है कि जिस व्यक्ति को पता चल जाये कि इस व्यक्ति का सुख मेरे अधीन है, बस वही से तुम्हारा शोषण चालू हो जाएगा, अब तुम्हारी ब्लैकमेलिंग चालू। बंधुओ गुलाम व्यक्ति का कोई सगा नहीं होता, सगी माँ तक ने तुम्हे बुद्धू कह दिया, इसलिए जिनवाणी माँ ने कहा कि तुम इतना साहस दिखा दो कि मैं माँ के बिना भी जी सकूँगा, फिर माँ तुम्हें बुद्धू नहीं, नमोस्तु कहेगी क्योंकि माँ जान गई कि बेटा मेरा बिना भी सुखी रह सकता है। हम साधुओं को कहा कि जिन जिन चीजों के बिना गृहस्थ दुःखी रहता है, उन उन चीजों के बिना तुम खुश रहकर दिखाओ तो जैन साधुओ कहलाओ।</p>
<p><strong>दृष्टि बदल दो, सृष्टि बदल जायेगी </strong></p>
<p>जूता चमत्कारी होता है पर शर्त है वो बाप का होना चाहिए, सिर बेटे का होना चाहिए और लगने पर ये भाव आना चाहिए कि पिताजी ने जूता नहीं मारा है, आशीर्वाद दिया है, जाओ चमत्कार हो गया। पिताजी ने भले गुस्से में मारा है लेकिन तुमने उसे आशीर्वाद माना है तो वह जूता भी तुम्हे आशीर्वाद का काम करेगा। साँप रखा होगा तो रखा होगा घड़े में लेकिन मैंने मान लिया कि हार है तो हार है। दृष्टि बदल दो, सृष्टि बदल जायेगी। हमारा नजरिया बदल जाएगा तो सारी दुनिया वैसी ही होगी, जैसी हमारा नजरिया होगा। उसी वस्तु को हम अच्छी दृष्टि से देखेंगे तो वो अच्छी होवे या न होवे, हमारा जरूर अच्छा होगा।</p>
<p><strong>माँ-बाप के पास वो कला है जो खुशी में भी दुख देखती है</strong></p>
<p>गुरु कौन है? शिष्य हंस रहा है और खुशियाँ मना रहा है और गुरु को उसमें दुख दिख रहा है। तुम्हें गुटखा खाने में आनंद आ रहा है और तुम्हारा गुरु उस खुशी में आँसू देख रहा है, उस आनंद में कैंसर देख रहा है, तेरी पत्नी के विधवा होने का, बच्चों के अनाथ होने का दुख देख रहा है। जब स्वयं की अकल काम न करें तो गुरु की, माँ बाप की अकल से चलो क्योंकि माँ बाप के पास वो कला है जो तुम्हारी खुशी में भी दुख देख लेती है।</p>
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