<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Muni &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/muni/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Tue, 16 Dec 2025 03:29:43 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Muni &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>टीएमयू में आईएसटीडी मुरादाबाद चैप्टर खुला : टीएमयू में प्रशिक्षण एवं विकास पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_istd_moradabad_chapter_has_opened_at_tmu/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_istd_moradabad_chapter_has_opened_at_tmu/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 03:29:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[College of Engineering]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Society for Training and Development]]></category>
		<category><![CDATA[ISTD]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Moradabad]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[आईएसटीडी]]></category>
		<category><![CDATA[इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुरादाबाद]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96497</guid>

					<description><![CDATA[इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट- आईएसटीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल शाह ने तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के ऑडी में संगठनात्मक प्रभावशीलता के लिए प्रशिक्षण एवं विकास पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में आईएसटीडी के मुरादाबाद चैप्टर का विधिवत उद्घाटन किया। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रोफेसर श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट- आईएसटीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल शाह ने तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के ऑडी में संगठनात्मक प्रभावशीलता के लिए प्रशिक्षण एवं विकास पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में आईएसटीडी के मुरादाबाद चैप्टर का विधिवत उद्घाटन किया। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रोफेसर श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट- आईएसटीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल शाह ने तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के ऑडी में संगठनात्मक प्रभावशीलता के लिए प्रशिक्षण एवं विकास पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में आईएसटीडी के मुरादाबाद चैप्टर का विधिवत उद्घाटन किया। नई कार्यकारिणी को आईएसटीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल शाह ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। साथ ही उन्होंने वर्तमान परिवेश में प्रशिक्षण एवं विकास की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए। उल्लेखनीय है, आईएसटीडी के मुरादाबाद चैप्टर की सदस्यता से टीएमयू स्टुडेंट्स के संग-संग फैकल्टी को प्रशिक्षण, मानव संसाधन विकास, नेतृत्व विकास और संगठनात्मक प्रभावशीलता से जुड़े नवीनतम ज्ञान, शोध पत्र, जर्नल, सेमिनार, कार्यशालाएं और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर मिलता है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-96501" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007.jpg" alt="" width="1600" height="1067" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-1536x1024.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0007-1320x880.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />उल्लेखनीय है, मानव संसाधन विकास-एचआरडी के क्षेत्र में इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट-आईएसटीडी 1970 में स्थापित एक पेशेवर, गैर-लाभकारी संस्था है। इसका मकसद शिक्षा, उद्योग, कृषि और सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए कार्य करती है। संगोष्ठी में वीसी प्रो. वीके जैन, मैनेजमेंट के डीन प्रो. विपिन जैन के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. करुणा जैन आदि की भी उल्लेखनीय मौजूदगी रही। आईएसटीडी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने नेतृत्व विकास और संगठनात्मक परिवर्तन पर अपने अनुभव साझा किए। आईएसटीडी की क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अंकिता शर्मा ने स्टुडेंट्स और पेशेवरों को आईएसटीडी से जुड़कर निरंतर विकास की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में आईएसटीडी देहरादून के अनुप कुमार, एसी जोशी एवं जोशी, करुणा जैन, उद्यमी एवं टीएमयू एल्युमिनाई सुधीर अवस्थी, आईसीआईसीआई बैंक के प्रबंधक एवम् एल्युमिनाई अर्पित वर्मा आदि ने भी प्रशिक्षण, नेतृत्व और करियर विकास पर अपने विचार साझा किए। इससे पूर्व मेहमानों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, प्रशिक्षण पेशेवरों, संकाय सदस्यों और स्टुडेंट्स ने सहभागिता की। वीसी प्रो. वीके जैन ने बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में निरंतर सीखने, कौशल विकास और उद्योग-शिक्षा समन्वय के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, प्रशिक्षण एवं विकास संगठनात्मक प्रभावशीलता और पेशेवर उत्कृष्टता के प्रमुख आधार हैं। दूसरी ओर नवगठित आईएसटीडी मुरादाबाद के पदाधिकारियों में वीसी प्रो. वीके जैन को अध्यक्ष, डीन, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट प्रो. विपिन जैन को सचिव, प्रो. अमित कंसल को उपाध्यक्ष, प्रो. मनोज अग्रवाल को कोषाध्यक्ष, प्रो. चंचल चावला को सदस्य नियुक्त किया गया। इनके अलावा आईसीआईसीआई बैंक के अर्पित वर्मा, आसापियन होटल्स के सीईओ डॉ. सुधीर अवस्थी, नितित मिश्रा, पंकज सिंह, डॉ. चारुल वर्मा आदि को भी सदस्य नामित किया गया। संगोष्ठी में डेंटल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रदीप तांगडे, नर्सिंग की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन, सीटीएलडी के डायरेक्टर प्रो. पंकज कुमार सिंह, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्या डॉ. जेसलीन एम., फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल, फैकल्टी ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार जैन, फिजियोथैरेपी की एचओडी डॉ. शिवानी एम. कौल, फाइन आर्ट्स के प्राचार्य रविन्द्र देव आदि मौजूद रहे। संचालन एमबीए के स्टूडेंट पर्व जैन ने किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_istd_moradabad_chapter_has_opened_at_tmu/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरु का शिष्य प्रति अनुराग का अनुपम उदाहरण परिलक्षित: आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज की उपस्थिति में हुआ प्रत्यक्ष सागर महाराज का आहार </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/param_pujya_acharya_vinishchay_sagar_maharaj_shaishya_devotion_and_vatsalya_exemplified/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/param_pujya_acharya_vinishchay_sagar_maharaj_shaishya_devotion_and_vatsalya_exemplified/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 05:35:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Presence]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vinishchay Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[daily rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Devotion]]></category>
		<category><![CDATA[Discipline]]></category>
		<category><![CDATA[Faith]]></category>
		<category><![CDATA[Guidance]]></category>
		<category><![CDATA[Guru Shishya]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Events]]></category>
		<category><![CDATA[jain philosophy]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Tradition]]></category>
		<category><![CDATA[Moral Values]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[Ramganj Mandi]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[religious education]]></category>
		<category><![CDATA[Respect]]></category>
		<category><![CDATA[Reverence]]></category>
		<category><![CDATA[Rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Shishya Devotion]]></category>
		<category><![CDATA[Shishya Respect श्रीफल न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Exemplification]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Guidance]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Inspiration]]></category>
		<category><![CDATA[Vatsalya]]></category>
		<category><![CDATA[अनुशासन]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विनिश्चय सागर]]></category>
		<category><![CDATA[आहारचर्या]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु-शिष्य]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक आयोजन]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रत्यक्ष सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
		<category><![CDATA[रामगंजमंडी]]></category>
		<category><![CDATA[वात्सल्य]]></category>
		<category><![CDATA[विनय]]></category>
		<category><![CDATA[साधु शिष्य]]></category>
		<category><![CDATA[साधु संघ]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91330</guid>

					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में गुरु-शिष्य के बीच अनुराग और वात्सल्य का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज की आहारचर्या आचार्य के निर्देशन में सम्पन्न हुई। पढ़िए अभिषेक जैन, लुहाड़िया की रिपोर्ट… रामगंजमंडी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में गुरु-शिष्य के बीच अनुराग और वात्सल्य का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज की आहारचर्या आचार्य के निर्देशन में सम्पन्न हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन, लुहाड़िया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सान्निध्य में नगर में अलौकिक धर्म प्रभावना हो रही है। अनेक आयोजन सम्पन्न हुए, जिनमें भक्ति और आस्था का पूर्ण परिचय दिखाई दिया।</p>
<p>नगर में आयोजित विभिन्न धार्मिक आयोजनों में विनय संपन्नता और वात्सल्य अंग का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। प्रतिदिन आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ के मुनिराज मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज की आहारचर्या करवाते हैं। इस प्रक्रिया में शिष्यत्व का गुण और विनय संपन्नता दोनों परिलक्षित होते हैं।</p>
<p>आज सोमवार की बेला में यह दृश्य विशेष रूप से देखने को मिला जब आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज स्वयं मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज का आहार करने गए। इस अवसर पर श्री महावीर दीपक शाह एवं भारत शाह प्रदीप शाह परिवार के निवास पर यह दृश्य परिलक्षित हुआ। यह गुरु-शिष्य के बीच वात्सल्य का अनुपम उदाहरण है।</p>
<p>जैसा कि देखा गया, जब गुरु कोई आदेश देते हैं, तो शिष्य उसे शिरोधार्य करते हुए पूर्ण करते हैं। यह दृश्य परिलक्षित करता है कि गुरु भी शिष्य के प्रति समर्पित भाव रखते हैं और वात्सल्य प्रदर्शित करते हैं।</p>
<p><strong>भावपूर्ण वाणी:</strong></p>
<p>• कोई शिष्य गुरु चरणों में जब शीश झुकाता है, परमात्मा खुद आकर आशीष लुटाता है।</p>
<p>• कोई शिष्य गुरु चरणों में पूजन का कोई थाल सजाता है, परमात्मा खुद आकर दीप जलाता है।</p>
<p>• कोई भाव भरे शब्दों से जब गुरु को रिझाता है, परमात्मा खुद आकर उसे गले लगाता है।</p>
<p>• कोई बालक बन चरणों में जब बिनती सुनाता है, परमात्मा खुद आकर गोदी में बिठाता है।</p>
<p>• गुरु चरणों में अश्कों के कोई मोती लुटाता है, परमात्मा खुद आकर पलकों पे बिठाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/param_pujya_acharya_vinishchay_sagar_maharaj_shaishya_devotion_and_vatsalya_exemplified/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सिद्ध हस्त कर कमलों से 2 अक्टूबर 2025 को अतिशय क्षेत्र टोंक में होगी जैनेश्वरी दीक्षा : 1 अक्टूबर को होगा मंडल विधान पूजन, आचार्य श्री का चमत्कारिक आशीर्वाद </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vardhman_sagar_maharaj_to_confer_jaineshwari_diksha_in_tonk_on_2nd_october_2025/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vardhman_sagar_maharaj_to_confer_jaineshwari_diksha_in_tonk_on_2nd_october_2025/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 05:34:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Presence]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vardhman Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Akhand Parampara]]></category>
		<category><![CDATA[Altruism]]></category>
		<category><![CDATA[Ancestral Tradition]]></category>
		<category><![CDATA[Ashokabad]]></category>
		<category><![CDATA[Bhakti]]></category>
		<category><![CDATA[Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[Charitable Acts]]></category>
		<category><![CDATA[Devotees श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Devotion]]></category>
		<category><![CDATA[Diksha Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[Diksha Preparations]]></category>
		<category><![CDATA[Diksha Rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Faith]]></category>
		<category><![CDATA[Family Participation]]></category>
		<category><![CDATA[Guru Vatsalya]]></category>
		<category><![CDATA[Guru-Disciple]]></category>
		<category><![CDATA[Inspiration]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain culture]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharma]]></category>
		<category><![CDATA[Jain monks]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain religion]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Saints]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Tradition]]></category>
		<category><![CDATA[Jaineshwari Diksha]]></category>
		<category><![CDATA[Mandal vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrit abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Religious celebration]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Leadership]]></category>
		<category><![CDATA[Rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Seva]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Event]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Exemplification]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Guidance]]></category>
		<category><![CDATA[Tonk]]></category>
		<category><![CDATA[Tonk Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Vinay]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री]]></category>
		<category><![CDATA[आदर्श नगर]]></category>
		<category><![CDATA[आस्था]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु-शिष्य]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन परंपरा]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साधु]]></category>
		<category><![CDATA[जैनेश्वरी दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[टोंक]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षार्थी]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक उत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक उदाहरण]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[पंचामृत अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[परिग्रह त्याग]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारों का आशीर्वाद]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
		<category><![CDATA[मंडल विधान पूजन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[वात्सल्य]]></category>
		<category><![CDATA[विनय]]></category>
		<category><![CDATA[वृद्धजन आशीर्वाद]]></category>
		<category><![CDATA[शास्त्र अनुसार]]></category>
		<category><![CDATA[श्री आदिनाथ जिनालय]]></category>
		<category><![CDATA[समाजजन]]></category>
		<category><![CDATA[समाजसेवा]]></category>
		<category><![CDATA[साधु संघ]]></category>
		<category><![CDATA[सेवा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91324</guid>

					<description><![CDATA[अतिशय क्षेत्र टोंक में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में 2 अक्टूबर 2025 को जैनेश्वरी दीक्षा संपन्न होगी। 1 अक्टूबर को मंडल विधान पूजन और पंचामृत अभिषेक होगा। आचार्य श्री ने बीमार एवं वृद्धजनों को भी आशीर्वाद प्रदान कर वात्सल्य और सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट… अतिशय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अतिशय क्षेत्र टोंक में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में 2 अक्टूबर 2025 को जैनेश्वरी दीक्षा संपन्न होगी। 1 अक्टूबर को मंडल विधान पूजन और पंचामृत अभिषेक होगा। आचार्य श्री ने बीमार एवं वृद्धजनों को भी आशीर्वाद प्रदान कर वात्सल्य और सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अतिशय क्षेत्र टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित विराजित होने के बाद प्रतिदिन अनेक धार्मिक महोत्सव आयोजित हो रहे हैं, जिनसे समाजजन लाभांवित हो रहे हैं। इसी क्रम में टोंक नगर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी अपने सिद्धहस्त करकमलों से दूसरी बार दीक्षा देने जा रहे हैं।</p>
<p>अहमदाबाद जिले के कलोल नगर के 69 वर्षीय श्री अवनीश भाई ने दीक्षा हेतु निवेदन किया। उनकी दीक्षा 2 अक्टूबर 2025 को श्री आदिनाथ जिनालय नसिया परिसर में होगी। 1 अक्टूबर को दीक्षार्थी पंचामृत अभिषेक करेंगे, आचार्य संघ की आहारचर्या के बाद कर पात्र में भोजन करेंगे और दोपहर में गणधर वलय विधान की पूजन संघ सान्निध्य में होगी। दीक्षार्थी के परिजन और समाजजन मेहंदी-हल्दी, श्रीफल, सूखे मेवे, फल एवं मिश्री आदि से दीक्षा भाव की अनुमोदना करेंगे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अवनीश भाई के साले सा समाधिस्थ मुनि श्री पदमकीर्ति सागर और उनकी पत्नी भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से ही दीक्षा लेकर संघस्थ हुए हैं।</p>
<p><strong>सिद्धहस्त करकमलों और वात्सल्य से अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बीमार एवं वृद्धजनों को भी अपने आशीर्वाद से लाभान्वित किया। टोंक नगर की 98 वर्षीय गुलाब देवी, जो गंभीर रूप से अस्वस्थ थीं, को आचार्य श्री ने आदर्श नगर स्थित निवास पर जाकर संबोधित किया। उनके शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी भी उपस्थित रहे। परिजनों ने आचार्य श्री के वात्सल्य और विनय से प्रेरित होकर सीमित परिग्रह त्याग किया। शास्त्रों में उल्लेखित है कि जब योग्य गुरु का संबोधन किसी भव्य जीव को प्राप्त होता है, तो उसका भाव एवं परिणाम विशुद्धि प्राप्त करता है। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अपने सिद्धहस्त करकमलों और वात्सल्य से इस बात का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vardhman_sagar_maharaj_to_confer_jaineshwari_diksha_in_tonk_on_2nd_october_2025/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुरैना जैन मंदिर में जिनेंद्र भक्ति एवं देश भक्ति का अनोखा संगम : युगल मुनिराजों ने स्वतंत्रता दिवस पर विशेष उद्वोधन दिया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/murena_jain_temple_jinendra_bhakti_and_desh_bhakti_celebration/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/murena_jain_temple_jinendra_bhakti_and_desh_bhakti_celebration/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Aug 2025 14:18:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[2025]]></category>
		<category><![CDATA[Ahimsa]]></category>
		<category><![CDATA[Balika_Mandal]]></category>
		<category><![CDATA[Bhakti]]></category>
		<category><![CDATA[Community]]></category>
		<category><![CDATA[Cultural_Program]]></category>
		<category><![CDATA[Desh_Bhakti]]></category>
		<category><![CDATA[dharma]]></category>
		<category><![CDATA[Dhwajarohan]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[Flag_Hoisting]]></category>
		<category><![CDATA[Independence_Day]]></category>
		<category><![CDATA[Jain_News जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Jain_Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[jainnews]]></category>
		<category><![CDATA[Jinendra_Prabhu]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[Murena]]></category>
		<category><![CDATA[National_Pride]]></category>
		<category><![CDATA[Parade]]></category>
		<category><![CDATA[Peace]]></category>
		<category><![CDATA[Religious_Event]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal_News]]></category>
		<category><![CDATA[Social_Service]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual]]></category>
		<category><![CDATA[TIranga]]></category>
		<category><![CDATA[VibodhSagar]]></category>
		<category><![CDATA[VilokSagar]]></category>
		<category><![CDATA[Women_Group]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य]]></category>
		<category><![CDATA[जिनेन्द्र]]></category>
		<category><![CDATA[जैन अपडेट्स]]></category>
		<category><![CDATA[जैनधर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देशभक्ति]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[ध्वजारोहण]]></category>
		<category><![CDATA[परेड]]></category>
		<category><![CDATA[बालिका_मंडल]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
		<category><![CDATA[महिला_मंडल]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संत]]></category>
		<category><![CDATA[सामाजिक_सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[स्वतंत्रता_दिवस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87678</guid>

					<description><![CDATA[मुरैना के बड़े जैन मंदिर में स्वतंत्रता दिवस पर भक्ति और देश भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूज्य युगल मुनिराजों ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए देश की महानता और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। पढ़िए मनोज जैन नायक की ख़ास रिपोर्ट… स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुरैना के बड़े जैन मंदिर में स्वतंत्रता दिवस पर भक्ति और देश भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूज्य युगल मुनिराजों ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए देश की महानता और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की ख़ास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>स्वतंत्रता</strong> दिवस के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में जिनेंद्र भक्ति और देश भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। धर्म भक्ति और देश भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रमों का आयोजन बड़े भव्यता के साथ किया गया।</p>
<p>श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर के ऑडिटर डॉ. मनोज जैन ने बताया कि पूज्य मुनिराजश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के सान्निध्य में स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर बालिका मंडल और महिला मंडलों द्वारा देश भक्ति पूर्ण विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।</p>
<p><strong>देश भक्ति से संबंधित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी</strong></p>
<p>प्रातःकालीन वेला में जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा और पूजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात ध्वजारोहण किया गया और बालिका मंडल ने तिरंगा ध्वज के साथ विशेष परेड प्रस्तुत की। महिला मंडलों ने भी देश भक्ति से संबंधित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। सभी कार्यक्रमों में अनुशासन और देशभक्ति की झलक दिखाई दी। समारोह के शुभारंभ में आचार्यश्री विद्यासागर एवं आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन विनोद जैन, प्रेमचंद जैन, डॉ. मनोज जैन, जवाहरलाल वरैया और मनोज जैन नायक ने किया। पूज्य युगल मुनिराज और ब्रह्मचारी राहुल मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री (सिहोनिया वाले) और डॉ. मनोज जैन ने किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-87681" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250815-WA0041-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />युगल मुनिराजों का उद्वोधन</strong></p>
<p>“हमारा देश भारत महान है। इस भूमि की प्रत्येक कण पवित्र है, जहां 24 तीर्थंकरों के साथ राम, कृष्ण, बुद्ध जैसे महापुरुषों ने जन्म लेकर इसे और वंदनीय बनाया। जैन समाज ने देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश में सदैव शांति, भाईचारा, अहिंसा और जीवदया की भावना बनी रहे। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश का मान और प्रतिष्ठा बनाए रखे। शिक्षा नीति में सुधार देश की उन्नति के लिए आवश्यक है। मुनिश्री विलोकसागरजी और मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “इंडिया नहीं, भारत बोलो।” उन्होंने बच्चों और युवाओं से देशभक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों का पालन करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में उपस्थित सभी समाजजनों ने देशभक्ति और भक्ति से ओतप्रोत इस आयोजन का आनंद लिया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/murena_jain_temple_jinendra_bhakti_and_desh_bhakti_celebration/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके शिष्यों का पावन वर्षायोग : समूचे भारत वर्ष में करेंगे जैन धर्म की प्रभावना </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jainism_will_spread_throughout_india_during_chaturmas/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/jainism_will_spread_throughout_india_during_chaturmas/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jun 2023 15:18:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vishuddha Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Baghpat]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digamber Jain]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain religion]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain saint]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[Pavan Varsha Yoga  श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Shishya]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[पावन वर्षायोग]]></category>
		<category><![CDATA[बागपत]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[शिष्य]]></category>
		<category><![CDATA[संघ]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=46727</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके शिष्यों का पावन वर्षायोग देश के अलग-अलग राज्यों में होगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज, उनके संघस्थ मुन और उनके प्रभावक शिष्य देश भर में अलग-अलग स्थानों पर चातुर्मास करेंगे। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज संघस्थ मुनियों श्रमण मुनि श्री सुव्रतसागर जी,. श्रमण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके शिष्यों का पावन वर्षायोग देश के अलग-अलग राज्यों में होगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज, उनके संघस्थ मुन और उनके प्रभावक शिष्य देश भर में अलग-अलग स्थानों पर चातुर्मास करेंगे। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज संघस्थ मुनियों श्रमण मुनि श्री सुव्रतसागर जी,. श्रमण मुनि श्री अनुत्तरसागर जी, श्रमण मुनि श्री प्रणेय सागर जी, श्रमण मुनि श्री प्रणव सागर जी, श्रमण मुनि श्री सर्वार्थसागर जी, श्रमण मुनि श्री साम्यसागर जी, श्रमण मुनि श्री सौम्य सागरजी, श्रमण मुनि श्री सारस्वत सागर जी, श्रमण मुनि श्री संजयंत सागर जी, श्रमण मुनि श्री यशोधर सागर जी, श्रमण मुनि श्री यतीन्द्र सागर जी, श्रमण मुनि श्री निर्ग्रन्थ सागर जी, श्रमण मुनि श्री निसंग सागर जी, श्रमण मुनि श्री निर्विकल्प सागर जी, श्रमण मुनि श्री जयन्द्र सागर जी, श्रमण मुनि श्री जितेन्द्र सागर जी, श्रमण मुनि श्री जयन्त सागर जी, श्रमण मुनि श्री सुभगसागर जी के साथ, बड़ौत, बागपत (उत्तरप्रदेश)में चातुर्मास करेंगे। वहीं उनके शिष्य श्रमण मुनि श्री मनोज्ञसागर जी, श्रमण मुनि श्री विश्वलोक सागर जी, मधुवन सम्मेद शिखर जी (झारखण्ड) में, श्रमण मुनि श्री प्रशमसागर जी, श्रमण मुनि श्री साध्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री संयत सागर जी मध्यप्रदेश के बड़नगर जिला उज्जैन में, श्रमण मुनि श्री सुप्रभ सागरजी, श्रमण मुनि श्री प्रणत सागर जी फ्रीगंज, उज्जैन (म.प्र.), श्रमणमुनि श्री सुयशसागर जी, क्षुल्लक श्री श्रुत सागर जी, क्षुल्लक श्री सोहं सागर जी झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखण्ड) में, श्रमण मुनि श्री अनुपमसागर जी, श्रमण मुनि श्री समत्व सागर जी सारंगपुर (उ.प्र.) में, श्रमण मुनि श्री अरिजित सागर जी नलवाड़ी (असम) में, श्रमण मुनि श्री आदित्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री अप्रमितसागर जी, श्रमण मुनि श्री सहज सागर जी वस्त्रों की नगरी भीलवाड़ा (राजस्थान) में, श्रमण मुनिश्री आस्तिक्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री सुकुल सागर जी कटनी (म.प्र.) में, श्रमण मुनि श्री आराध्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री सुहित सागर जी पंचशील नगर, भोपाल में, श्रमण मुनि श्री प्रणीत सागर जी,</p>
<p>श्रमण मुनि श्री निर्मोह सागर जी गोंदिया, (महाराष्ट्र) में, श्रमण मुनि श्री प्रणुत सागर जी, श्रमण मुनि श्री यत्न सागर जी बड़ौदरा (गुजरात) में, श्रमण मुनि श्री संकल्प सागर जी, श्रमण मुनि श्री सद्‌भाव सागर जी अजमेर (राजस्थान) में और श्रमण मुनि श्री साक्ष्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री योग्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री निवृत सागर जी छीपीटोला, आगरा (उ.प्र.) में गुरुआज्ञा से चातुर्मास करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/jainism_will_spread_throughout_india_during_chaturmas/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एक पल में आदेश्वर पचौरी बन गए मुनि मुमुक्षु सागर... :  कपड़े और आभूषणों को छोड़ थाम लिया पिच्छी और कमंडल </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/aacharya-vardhman-sagar-me-aadesgvar-pachauri-ko-di-diksha-nam-karn-kiya-muni-mumukshu-sagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/aacharya-vardhman-sagar-me-aadesgvar-pachauri-ko-di-diksha-nam-karn-kiya-muni-mumukshu-sagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Feb 2023 10:11:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aachary vardhaman sagar]]></category>
		<category><![CDATA[aadeshavr]]></category>
		<category><![CDATA[jain diksha]]></category>
		<category><![CDATA[kishangarh jain nes]]></category>
		<category><![CDATA[Mumukshu sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर]]></category>
		<category><![CDATA[आदेश्वर पचौरी]]></category>
		<category><![CDATA[किशनगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[जैन दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[मुमुक्षु सागर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=37875</guid>

					<description><![CDATA[एक तरफ वात्सल्य वारिधि बिराजे और दूसरी और मोक्ष मार्ग पर चलने की इच्छा लिए बैठे आदेश्वर पचौरी&#8230;आज दीक्षा का पावन दिन था, जैन संस्कार से जुड़े रीति-रिवाज हुए और आदेश्वर पंचौरी बन गए मुनि मुमुक्षु सागर । पढ़िए कैसे धरियावद के आदेश्वर, अपने भरे-पूरे सांसारिक जीवन को त्याग एक पल में बन गए तपस्वी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>एक तरफ वात्सल्य वारिधि बिराजे और दूसरी और मोक्ष मार्ग पर चलने की इच्छा लिए बैठे आदेश्वर पचौरी&#8230;आज दीक्षा का पावन दिन था, जैन संस्कार से जुड़े रीति-रिवाज हुए और आदेश्वर पंचौरी बन गए मुनि मुमुक्षु सागर । पढ़िए कैसे धरियावद के आदेश्वर, अपने भरे-पूरे सांसारिक जीवन को त्याग एक पल में बन गए तपस्वी संत</strong></p>
<hr />
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37885" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026.jpg" alt="" width="991" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026.jpg 991w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-990x556.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0026-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 991px) 100vw, 991px" /></p>
<p>वो दृश्य, जिसने देखा वो शायद ही ताउम्र उसे भूल सकेगा । किशनगढ़ का सूरज देवी पाटनी सभागृह, जहां एक ओर आदेश्वर जी पचौरी दीक्षा की अभिलाषा मन में सजाए बैठे थे और दूसरी और विराट व्यक्तित्व के धनी वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी &#8230;।</p>
<p>पिछले दिनों किशनगढ़ में हुए पंचकल्याणक महोत्सव में धरियावद निवासी आदेश्वर जी, आचार्य वर्धमान सागर जी से ऐसे प्रभावित हुए थे कि मौके पर ही खड़े होकर अपनी दीक्षा का निवेदन कर दिया। आचार्य श्री ने वहीं पर उनकी भावनाओं को देख कह दिया कि यहीं किशनगढ़ में ही दीक्षा दी जाएगी । उस दिन से ही मानों आदेश्वर जी, मन ही मन सांसारिक जीवन से खुद को अलग कर संतत्व को प्राप्त हो गए थे । वे अपने सांसारिक जीवन में रहते हुए संत समागमों से अपने मन को पवित्र करते रहे। तरह-तरह की स्व-परीक्षाओं में स्वयं को सिद्ध करते रहे। लेकिन संत होने का मार्ग तो आखिरकार गुरू ही बताते हैं । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मानों मन ही मन ,उनके जीवन में सबसे बड़े बदलाव का क्षण पहले से निर्धारित कर रखा था।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37882" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0024.jpg" alt="" width="1201" height="1359" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0024.jpg 1201w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0024-265x300.jpg 265w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0024-905x1024.jpg 905w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0024-768x869.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0024-990x1120.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1201px) 100vw, 1201px" /></p>
<p>आज किशनगढ़ में उनके जीवन में वही परम कल्याण का क्षण आया । आदेश्वर पचौरी का दीक्षा महोत्सव कार्यक्रम तीन दिन से चल रहा है । लेकिन आज का दिन हमेशा के लिए लोगों की स्मृतियों में बस गया । क्योंकि आज उन्हें दीक्षा के बाद नया नाम मिला । <strong>आदिश्वर अब बन गए हैं मुनि श्री मुमुक्षु सागर&#8230;</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37879" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021.jpg" alt="" width="991" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021.jpg 991w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-990x556.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0021-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 991px) 100vw, 991px" /></p>
<p><strong>ऐसे सम्पन्न हुई मुमुक्षु सागर जी दीक्षा</strong></p>
<p><b><br />
</b>किशनगढ़ में हुए विविध कार्यक्रमों में पहले उन्हें 28 मूलगुणों का संस्कार कर दीक्षा प्रदान की गई । इसमें दीक्षार्थी की गोद भराई, हल्दी,मेहंदी, विधि-विधान, आहार चर्या आदि कार्यक्रम हुए । लगभग साढ़े दस बजे चौक पूरण की विधि पूरी की गई और दीक्षार्थी द्वारा आचार्य श्री को दीक्षा का निवेदन किया । 12.13 मिनट पर दीक्षार्थी की मूल क्रियाओं में सिद्ध आदि भक्ति बोलते हुए, दीक्षा की क्रियाएं प्रारंभ की गई । जिसमें गंधोदक से सिर का शुद्धिकरण किया गया और पंच मुठ्ठी केश लोचन आचार्य श्री द्वारा किया गया । दोपहर 12.35 मिनट पर दीक्षा के मूल संस्कारों का कार्यक्रम शुरु हुआ । उसके पहले चावल से पांच महिलाओं द्वारा चौक पूरण किया गया । उस चौक पूरण पर, दीक्षार्थी आदेश जी को बिठाया गया और केश लोचन आदि क्रियाएं की गई । 12.53 मिनट पर अपने कपड़े व गहनों का उन्होने त्याग किया । आचार्य श्री ने 12.54 मिनट पर आदेश जी के सिर पर स्वास्तिक बनाया और मूल संस्कारों का गहरा लोंग 12.55 मिनट पर रखा । एक बजकर एक मिनट पर, दीक्षार्थी की अंजुलि बनाकर उसमें स्वास्तिक बनाकर चावल,हल्दी, सुपारी,श्रीफल आचार्य श्री ने मंत्रोत्चार के साथ रखा । उसके बाद नामकरण संस्कार दोपहर 1.45 बजे आदेश्वर का नामकरण मुनि मुमुक्षु सागर रखा गया । वहीं मुनि श्री को उदयपुर डागरिया परिवार के विजय,संदीप,हितेश डागरिया ने कमंडल भेंट किया । दीक्षार्थी के माता-पिता बनने का सौभाग्य उनके ज्येष्ठ पुत्र नीलेश-उषा जैन को मिला । मुनि श्री को पिच्छी भेंट हेमन्त पचौरी ने की । वहीं आर.के.पाटनी परिवार ने उन्हें शास्त्र भेंट किया ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37880" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022.jpg" alt="" width="991" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022.jpg 991w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-990x556.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0022-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 991px) 100vw, 991px" /></p>
<p><strong>जब पुत्र ने पिता बनकर दीक्षा संपूर्ण करवाई</strong></p>
<p>रोचक और भावुक क्षण उस वक्त आया जब जिस पुत्र को बड़ा किया, उसी पुत्र और उनकी पत्नी ने माता-पिता बनकर, मुनि श्री मुमुक्षु सागर जी की दीक्षा करवाई ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-37881" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023.jpg" alt="" width="991" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023.jpg 991w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-990x556.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230213-WA0023-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 991px) 100vw, 991px" /></p>
<p><strong>72 वर्ष के वात्सल्य वारिधि, 54 वर्ष दीक्षा काल, अब तक 101 दीक्षाएं</strong></p>
<p><b><br />
</b>किशनगढ़ में बिराजे वात्सल्य वारिधि जी की उम्र 72 वर्ष है जिसमें 54 वर्ष दीक्षा काल है। परम संतत्व को प्राप्त आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से दीक्षित संतों की संख्या अब 101 हो गई है । इस काल में आचार्य श्री ने 35 मुनि-35, 40 आर्यिकाएं, एक ऐलक, 13 क्षुल्लक और 12 क्षुल्लिकाओं को दीक्षा दी है ।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="किशनगढ़ में आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज में दी आदेश्वर पचौरी को दीक्षा बने मुनि मुमुक्षु सागर" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/QtdjGuxz-X0?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe></p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/aacharya-vardhman-sagar-me-aadesgvar-pachauri-ko-di-diksha-nam-karn-kiya-muni-mumukshu-sagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनि श्री एकत्व सागर जी का समाधि मरण</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/muni-shree-ekatv/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 15:09:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[ekatv sagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[jain]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[shikhar ji]]></category>
		<category><![CDATA[shree phal news]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=27073</guid>

					<description><![CDATA[सम्मेद शिखर जी@श्रीफल जैन न्यूज़ ब्यूरो। जैन जगत के मूर्धन्य विद्वान, जैन गजट, जैन मित्र आदि समाचार पत्रों के सम्पादक, दिगम्बर जैन महासभा और अनेक संस्थाओं के माध्यम से जैन समाज और मां सरस्वती की सेवा कर दीक्षा धारण करने वाले मुनि एकत्व सागर जी वियर 18 सितंबर को दोपहर 1:11अनन्तानन्त सिद्धो की भूमि शास्वत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सम्मेद शिखर जी@श्रीफल जैन न्यूज़ ब्यूरो</strong>। जैन जगत के मूर्धन्य विद्वान, जैन गजट, जैन मित्र आदि समाचार पत्रों के सम्पादक, दिगम्बर जैन महासभा और अनेक संस्थाओं के माध्यम से जैन समाज और मां सरस्वती की सेवा कर दीक्षा धारण करने वाले मुनि एकत्व सागर जी वियर 18 सितंबर को दोपहर 1:11अनन्तानन्त सिद्धो की भूमि शास्वत तीर्थ सम्मेदशिखर जी (मध्य लोक)में 100 से अधिक मुनि आर्यिकाओं के सानिध्य तथा <strong>मुनि श्री पूण्य सागर जी के मार्गदर्शन में समाधि साधना कर समाधि मरण को प्राप्त हुये</strong>।</p>
<p>मुनि एकत्व सागर जी गृहस्थ जीवन में पण्डित श्री भरत जी काला के नाम से जाने जाते थे। उन्होंने <strong>मोक्ष सप्तमी 4अगस्त 2022 को मुनि श्री पुण्य सागर जी से उत्कृष्ट व्रतों को ग्रहण कर क्षुल्लक दीक्षा, मुनि दीक्षा ग्रहण की थी और मुनि एकत्व सागर जी के रूप में मोक्ष पथ पर अग्रसर हुये थे।</strong></p>
<p>आप आर्ष मार्ग के प्रमुख प्रहरी थे। आपने आर्षमार्गियो के साथ साथ विद्वानों को और सम्पूर्ण जैन जगत को श्रावक और मुनि दोनो ही रूप मे गौरवान्वित किया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनि श्रीअर्पित सागर जी एवं  अपूर्व सागर जी महाराज का राष्ट्रीय रजत दीक्षा दिवस पर राष्ट्रीय वेवीनार</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/muni-shreearpit-saagar-jee-evan-apoorv-saagar-jee-mahaaraaj-ka-raashtreey-rajat-deeksha-divas-par-raashtreey-veveenaar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Feb 2022 17:49:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[apurv]]></category>
		<category><![CDATA[arpit]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि अपूर्व सागर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि अर्पित सागर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=24691</guid>

					<description><![CDATA[◆  विद्वानों, समाजसेवियों, श्रेष्ठिजनों ने किया वर्चुअल गुणानुवाद ◆ संयम से ही मनुष्य जीवन की शोभा है : मुनि श्री अपूर्वसागर @ डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर । प्रभावना जन कल्याण परिषद (रजि.) के तत्वावधान में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी, मुनि श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-24692" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/02/PicsArt_02-14-12.52.05-300x274.jpg" alt="" width="300" height="274" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/02/PicsArt_02-14-12.52.05-300x274.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/02/PicsArt_02-14-12.52.05-1024x936.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><span style="color: #ff0000">◆  विद्वानों, समाजसेवियों, श्रेष्ठिजनों ने किया वर्चुअल गुणानुवाद</span></p>
<p><span style="color: #ff0000">◆ संयम से ही मनुष्य जीवन की शोभा है : मुनि श्री अपूर्वसागर</span></p>
<p><strong><span style="color: #999999">@ डॉ. सुनील जैन संचय </span></strong></p>
<p><strong>ललितपुर । </strong>प्रभावना जन कल्याण परिषद (रजि.) के तत्वावधान में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज का रजत दीक्षा महामहोत्सव पर मुनिद्वय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित किया गया जिसमें वक्ताओं ने मुनिद्व्य का गुणानुवाद कर विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p>परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के पट्टाचार्य परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित इस वर्चुअल रजत दीक्षा महामहोत्सव में मुनि श्री प्रज्ञाश्रमण अमितसागर जी महाराज, मुनि श्री अपूर्वसागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज का मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंगलाचरण संगीतकार एवं पत्रकार दिनेश जैन धगड़ा कोलकाता ने तथा दीप प्रज्वलन ब्रह्मचारिणी बहिन मधु दीदी ने किया।</p>
<p><strong>श्रमण संस्कृति के दैदीप्यमान नक्षत्र :</strong><br />
अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्रेयांस कुमार जैन जी बड़ौत, अध्यक्ष अखिल भारतवर्षीय शास्त्री परिषद ने कहा कि युगल मुनि सरल, शांत स्वभावी श्रमण लक्षण से युक्त हैं। द्वय मुनिराजों के गुरु आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने दिगम्बरत्व को प्रतिष्ठापित किया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ मणीन्द्र जैन दिल्ली राष्ट्रीय अध्यक्ष दिगंबर जैन महासमिति ने मुनिद्व्य को श्रमण संस्कृति का दैदीप्यमान नक्षत्र बताया।</p>
<p><strong>श्रमण संस्कृति को गौरवान्वित किया :</strong><br />
परिषद के निर्देशक ब्रह्मचारी जयकुमार जी निशांत भैया ने कहा कि मुनि द्वय ने अपनी तप, साधना और प्रभावना से श्रमण संस्कृति को गौरवान्वित किया है। प्रबुद्ध चिंतक डॉ चिरंजीलाल बगड़ा कोलकाता ने कहा कि चर्या के प्रति जागरूक रहने वाले संत हैं, उनकी युगल जोड़ी बेमिसाल है। डॉ. नेमिनाथ शास्त्री कुम्बोज बाहुबली ने मुनिद्व्य से कुम्बोज बाहुबली से जुड़े संस्मरण साझा किए।</p>
<p><strong>संसार से वैराग्य तक अद्भुत दोस्ती का 25 वें वर्ष में प्रवेश :</strong> परिषद के संयोजक राजेन्द्र महावीर सनावद ने मुनिद्व्य की जन्मभूमि सनावद से लेकर संयम मार्ग तक के संस्मरणों पर प्रकाश डाला। राजू और विजू के नाम से प्रसिद्ध दो युवा सांसारिक जीवन में गहरे दोस्त बने फिर उन्होंने इस नश्वर संसार को त्याग करने का निर्णय किया , और तय किया कि इस अलौकिक वैराग्य पद को दोनों एक साथ धारण करेंगे । दोनों ने पहले यह तय किया था कि जब तक आचार्य वर्धमान सागर जी सनावद की भूमि पर नहीं आएंगे तब तक वह घी और शक्कर का प्रयोग नहीं करेगे , उनका यह दृढ़ निश्चय आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज को सनावद की भूमि पर लेकर आया ।</p>
<p>कार्यक्रम का निर्देशक ब्र. नमन भैया (संघस्थ ) ने बताया कि फरवरी 1998 को राजस्थान की तीर्थ भूमि बिजौलिया में दिगंबर मुनि दीक्षा धारण की सनावद नगर के दो युवा मुनियों ने अपनी दिगंबर दीक्षा के 25 वे वर्ष में प्रवेश किया । दोनों कि यह जोड़ी आज भी साथ ही है और कठिन दिगंबर चर्या को करते हुए अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ रही है और मुझे भी सान्निध्य और मार्गदर्शन मिल रहा है।<br />
रजत दीक्षा महोत्सव के वर्चुअल कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने तथा संयोजन पंडित प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर (महामंत्री) , मनीष विद्यार्थी शाहगढ़ (कोषाध्यक्ष) एवं आभार परिषद के अध्यक्ष सुनील शास्त्री सोजना ( टीकमगढ़) माना ।</p>
<p><strong>विनयांजलि समर्पित :</strong> इस मौके पर आर्यिका गौरवमती माता जी, प्रतिष्ठाचार्य कुमुद सोनी अजमेर, राजेश पंचोलिया इंदौर, जैन पत्रकार महासंघ के महामंत्री उदयभान जैन जयपुर, श्रीमती स्वाति जैन हैदराबाद, वरिष्ठ पत्रकार एवं परिषद के उपाध्यक्ष राजेश रागी,बक्सवाहा, समन्वयक पंकज जैन छतरपुर, परिषद की संरक्षक श्रीमती सुषमा जैन भिलाई , प्रचारमंत्री अनिल जैन शास्त्री सागर आदि ने द्वय मुनिश्री के जीवन पर संस्मरण सुनाकर मुनिश्री को अपनी विनंयाजलि समर्पित की।</p>
<p><strong>प्रभावशाली जीवन शैली :</strong> मुनि श्री अमितसागर जी<br />
मुनि श्री अमितसागर जी महाराज ने अपने वक्तव्य मैं अर्पित सागर ,अपूर्व सागर जी के लौकिक जीवन की मित्रता से लेकर संयम धारण करने तक के संस्मरण सुनाकर मुनि श्री द्वय के साथ रहकर उनकी प्रभावशाली जीवन शैली का चित्रण सुनाया।</p>
<p><strong>मुनिद्व्य का मिला आशीर्वाद :</strong><br />
अंत में नांदणी मठ में विराजमान मुनि श्री अपूर्वसागर जी, मुनि श्री अर्पित सागर जी ने अपने वर्चुअल उदबोधन में परिषद, सभी आयोजनकर्ता वक्ताओं एवं वेबीनार में जुड़े हुए श्रद्धालुओं को अपना मंगल आशीष दिया एवं अपनी जीवन के अनुभव सुनाएं।</p>
<p><strong>जीवन के किसी भी पल वैराग्य उमड़ सकता है : मुनि श्री अपूर्वसागर जी</strong><br />
मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज ने कहा कि गुरुवर वर्द्धमान सागर जी ने पत्थर को मूर्ति का रूप दिया और पूज्य बना दिया। गुरु के अनन्त उपकार हैं । संयम दीक्षा दिवस पर आप सब भी कुछ न कुछ संयम धारण करें। संयम से ही मनुष्य जीवन की शोभा है। जीवन के किसी भी पल वैराग्य उमड़ सकता है, व्यक्ति संसार में रहकर भी संसार को तज सकता है। मुझे गुरुवर ने जो दिया वह कभी नहीं भुलाया जा सकता।</p>
<p><strong>प्रभावना न कर सको तो कोई बात नहीं लेकिन अप्रभावना न करें :</strong> मुनि श्री अर्पित सागर जी<br />
मुनि श्री अर्पित सागर जी ने कहा कि आज हम जो कुछ भी हैं वह गुरुवर आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी की देन है। गुरु ने जो संदेश दिया था कि प्रभावना न कर सको तो कोई बात नहीं लेकिन अप्रभावना न करना उस का पालन कर रहा हूँ और आप सभी भी आचार्यश्री के इस संदेश को अपनाएं। आचार्यश्री का कहना है कि हम अपनी छोड़ेंगे नहीं और दूसरे की बिगाड़ेंगे नहीं। गुरु के उपकार अविस्मरणीय हैं।<br />
बेविनार में मुनिद्व्य की जन्मभूमि सनावद एवं नांदणी मठ जहाँ वर्तमान में मुनिद्व्य विराजमान हैं से भी अनेक श्रद्धालु कार्यक्रम में उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>शामिल प्रमुख गणमान्य :</strong> इस दौरान श्री प्रदीप पाटनी लखनऊ, सुरेश जी सबलावत जयपुर, राजेश बगड़ा कोलकाता, मनीष वैद्य जयपुर, सुरेश मरौरा इंदौर,इं. अशोक पालंदी जबलपुर, राकेश सनावद, सपना सनावद, मीना जैन टीकमगढ़, गजेंद्र जैन कुंडलपुर, जिनेन्द्र सिंघई<br />
बड़ामलहरा ,अर्चना जैन बरायठा आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूजा की हर पंक्ति में है जीवन का रहस्य</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/pooja-ki-har-pankti-me-hai-jivan-ka-rahasya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Dec 2021 12:15:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Muni]]></category>
		<category><![CDATA[Poojan]]></category>
		<category><![CDATA[Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[Vidya sagar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=24470</guid>

					<description><![CDATA[जीवन और पूजन &#160; हर धर्म में पूजा की अलग-अलग पद्धतियां और तरीके हैं और पूजा-अर्चना के उद्देष्य भी अलग-अलग हैं। जैन धर्म की पूजन पद्धति त्याग आधारित है, जो व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से दूर करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है। जैन पूजन की पंक्तियों का व्यक्ति के जीवन से गहरा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="padding-left: 40px;text-align: left"><span style="color: #ff0000">जीवन और पूजन</span></p>
<div style="width: 1280px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-24470-1" width="1280" height="720" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211217-WA0001.mp4?_=1" /><a href="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211217-WA0001.mp4">https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211217-WA0001.mp4</a></video></div>
<p>&nbsp;</p>
<p>हर धर्म में पूजा की अलग-अलग पद्धतियां और तरीके हैं और पूजा-अर्चना के उद्देष्य भी अलग-अलग हैं। जैन धर्म की पूजन पद्धति त्याग आधारित है, जो व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से दूर करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है। जैन पूजन की पंक्तियों का व्यक्ति के जीवन से गहरा संबंध है, अगर पूजा की पंक्तियों पर सम्यक दृष्टि डाली जाए तो वे जीवन के रहस्यों को सहज रूप से प्रकट करती हैं।<br />
आचार्य विद्यासागर महाराज ने अपने इंदौर प्रवास के दौरान पूजन की पक्तियों के महत्व को इंगित करते हुए कहा कि पूजन में जो पंक्तियां दी गई हैं और हम जिस उद्देश्य को लेकर अष्ट मंगल द्रव्य पूजन में अर्पित करते हैं, उस ओर थोड़ी दृष्टि डालनी चाहिए। हम क्षुधा रोग के निवारण के लिए नैवेद्य चढ़ातेे हैं। यह क्यों और कहां चढ़ाया जा रहा है, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। नैवेद्य एक प्रकार से विषय है, क्योंकि जो हम भोजन में लेते हैं, वही पूजन में काम में लेते हैं। वही लड्डू भोजन में भी है और पूजन में भी है। यह क्षुधारोग निवारण के लिए चढ़ाया जा रहा है, लेकिन जिन्होंने क्षुधा को निवारित कर दिया, उनके लिए यह नहीं चढ़ाया जा रहा है और ना ही स्वयं के लिए चढ़ाया जा रहा है। चढ़ाने का लक्ष्य क्षुधा रोग के लिए है। हम सब रोगी हैं, भगवान निरोगी हैं। कोई सेठ साहूकार यह समझे कि वह तो चार-पांच बार खाते हैं, क्योंकि उनके पास कोई कमी नहीं है तो मान लीजिए वह चार गुना रोगी हो रहे हैं और महारोग की ओर जा रहे हैं।<br />
आचार्यश्री कहते हैं कि जोे व्यक्ति दीपक में तेल जितना भोजन करे, उसका पूजन करना सार्थक माना जाएगा। ऐसे पूजन पढ़ने का कोई अर्थ नहीं, जिसमें रस ही नहीं निकले। गीत के रहस्य कोे स्पष्ट करने वाले वाला पूजन, विधान और पंचकल्याणकों में होने चाहिए, ताकि सुनने वाले उसमें भीग जाएं।<br />
पूजन करते समय यह विचार करें कि हे भगवान आप तो क्षुधा को जीत चुके हैं। हम भी इसका निवारण कर पाएं। हमारे भगवान 18 दोषों से रहित हैं और हम दोषों के पुंज हैं, इसलिए हे भगवन मैं आपको साक्षी मान कर जो भी भोजन लेता हूं, वह शरीर को चलाने के लिए है। जैसे दीपक को चलाने के लिए तेल जरूरी है, उसी प्रकार और उतना ही शुद्ध भोजन मैं ले रहा हूं और आपके चरणों में जो नैवेद्य चढ़ा रहा हूं वह इसीलिए कि मेरे रोग का निवारण हो। भाोजन करना ही एक रोग है। कई बार करना तो और बड़ा रोग है। फिर भी खाते रहते हैं, इसलिए पूजन को सावधानी से पढ़ो और अर्थ सहित पढ़ो तो गद्गद् हो जाओगे।<br />
आचार्यश्री का यह संदेष हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करने के साथ ही हमारी जीवन शैली को नई दिषा प्रदान करता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		<enclosure url="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2021/12/VID-20211217-WA0001.mp4" length="11259719" type="video/mp4" />

			</item>
	</channel>
</rss>
