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	<title>Muni Sudhasagar श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>अभिनंदनोदय तीर्थ में गुरु महिमा का वर्णन : भक्त का जीवन भगवान के काम आए, इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं- मुनि सुधासागर </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:56:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि जीवन को सफल बनाना है तो बड़ों से काम नहीं करवाना चाहिए, लेकिन आज सबसे बड़ी भूल यह हो रही है कि हर व्यक्ति अपना काम भगवान से कराना चाहता है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। अभिनंदनोदय तीर्थ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि जीवन को सफल बनाना है तो बड़ों से काम नहीं करवाना चाहिए, लेकिन आज सबसे बड़ी भूल यह हो रही है कि हर व्यक्ति अपना काम भगवान से कराना चाहता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि जीवन को सफल बनाना है तो बड़ों से काम नहीं करवाना चाहिए, लेकिन आज सबसे बड़ी भूल यह हो रही है कि हर व्यक्ति अपना काम भगवान से कराना चाहता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब भी कोई संकट या दुख आता है, तब लोग प्रभु के पास पहुंचते हैं और रक्षा के लिए विनय करते हैं। संसार की महाशक्ति भक्त हनुमान का उदाहरण देते हुए मुनि श्री ने बताया कि उन्होंने सदैव अपने भगवान के कार्य किए, कभी अपना कार्य उनसे नहीं कराया। जिस दिन भक्त यह भावना कर लेगा, उसी दिन भगवान प्रकट हो जाएंगे।</p>
<p><strong>गुरु और भगवान के प्रति समर्पण का संदेश</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक भक्त का संकल्प होना चाहिए कि उसका जीवन भगवान और गुरु के चरणों में समर्पित रहे तथा अंत समय भी उनके समक्ष ही व्यतीत हो।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि जीवन में सबसे मांगलिक वह है जिसने दुनिया को छोड़ दिया और जिसके पीछे दुनिया चलती है। सच्चे गुरु की महिमा बताते हुए उन्होंने प्रेरित किया कि ऐसा कोई आचरण न करें जिससे गुरु के सामने नीचा देखना पड़े। संकल्प लें कि हम गुरु के विरुद्ध नहीं चलेंगे। ऐसी भावना रखने वाले भक्त को जन्म-जन्मांतर तक गुरु प्राप्त होते हैं और जीवन सफल होता है।</p>
<p><strong>ललितपुरवासियों के उत्साह की सराहना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने ललितपुरवासियों में गुरु और धर्म के प्रति अद्वितीय उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो वे पहली बार यहां आए हों और लोग पहली बार दान कर रहे हों। सभी के चेहरों पर उत्साह झलक रहा है, जो सदैव बना रहना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसा कार्य करें, जिसके बाद पछतावा न हो और जो आत्मसंतोष दे—यही धर्म का चमत्कार है, जो जीवन को कल्याणकारी बनाता है।</p>
<p><strong>धर्मसभा का शुभारंभ एवं पूजन कार्यक्रम</strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ न्यायमूर्ति अभय गोयल, जिला जज ललितपुर एम.के. सिंह एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक जायसवाल द्वारा आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।</p>
<p>दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने न्यायिक अधिकारियों का सम्मान किया। ब्रह्मचारी अन्नू भैया के संयोजन में मुनि श्री की संगीतमय पूजन हुई, जिसमें महिला मंडलों द्वारा अर्घ समर्पित किए गए।</p>
<p><strong>शांतिधारा एवं आहारचर्या का पुण्यार्जन</strong></p>
<p>प्रातःकाल दिगंबर जैन इलाइट मंदिर में मुनि श्री के सानिध्य में शांतिधारा का पुण्यार्जन श्रावकों द्वारा किया गया। मंदिर में मुनि श्री के पदार्पण पर पादप्रक्षालन एवं आरती की गई</p>
<p>निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज की आहारचर्या का पुण्यार्जन शान्तोदय तीर्थ के महामंत्री धन्यकुमार जैन (सैदपुर) को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>विभिन्न गणमान्य रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन (खजुरिया), मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक जैन (दैलवारा), डॉ. डी.के. जैन, पवन जैन, धार्मिक संयोजक प्रतीक जैन (इमलिया), मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, अनिल जैन (अंचल), सीए संजीव जैन, राजेंद्र जैन (थनवारा), नरेंद्र जैन (छोटे पहलवान), जिनेंद्र जैन (डिस्को), सौरन जैन (पीलू) सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
<p>सायंकाल “जिज्ञासा समाधान” कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में आयोजित हुआ, जिसमें श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान मुनि श्री से प्राप्त किया। इसके उपरांत गुरुभक्ति और आरती में श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।</p>
<p><strong>अभिनंदननाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन के अनुसार, 24 मार्च 2026 को प्रातः 6:60 बजे अभिनंदनोदय तीर्थ के मूलनायक भगवान अभिनंदननाथ का महामस्तकाभिषेक निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में 1008 कलशों द्वारा सम्पन्न होगा।</p>
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		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : संसार के मायाजाल से निकले बिना कल्याण नहीं &#8211; मुनि सुधासागर </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:13:42 +0000</pubDate>
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<p><strong>अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार एक मायाजाल है, इससे बाहर निकले बिना आत्मकल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्म मनुष्य को मोक्ष की ओर बढ़ने से रोकते हैं, जबकि आत्मा निरंतर शुद्धि और मुक्ति की ओर अग्रसर होना चाहती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। अभिनंदनोदय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार एक मायाजाल है, इससे बाहर निकले बिना आत्मकल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्म मनुष्य को मोक्ष की ओर बढ़ने से रोकते हैं, जबकि आत्मा निरंतर शुद्धि और मुक्ति की ओर अग्रसर होना चाहती है। यदि व्यक्ति कर्मों का त्याग कर आत्मा की ओर उन्मुख होता है, तो उसका कल्याण निश्चित है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिसने अतीत में पाप किए हैं, यह आवश्यक नहीं कि वह भविष्य में भी वही करेगा। वर्तमान में किया गया सत्कर्म ही भविष्य का मार्ग तय करता है। उन्होंने कहा कि पाप चाहे कितना भी पुराना हो, उसका नाश शीघ्र होता है, जबकि पुरानी से पुरानी अच्छाई निरंतर बढ़ती है और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करती है।</p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं द्वारा आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया तथा दिगंबर जैन पंचायत समिति द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम में ब्रह्मचारी अन्नू भैया के संचालन में मुनि श्री की संगीतमय पूजन संपन्न हुई। प्रतिभास्थली मंडल, नंदा-सुनंदा महिला मंडल, सुधा कलश भक्तामर मंडल एवं आदर्श महिला मंडल ने संरक्षक अनीता मोदी के संयोजन में भक्ति भाव से अर्घ समर्पित किए।</p>
<p>श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) के निर्देशक अरुण शास्त्री, आलोक शास्त्री एवं संजीव शास्त्री ने भी मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। इससे पूर्व मुनि श्री के मुखारविंद से शांति धारा का पुण्यार्जन श्रावकों द्वारा किया गया।</p>
<p>मुनि श्री सुधासागर महाराज की आहारचर्या का पुण्यार्जन सुनील समैया एवं नीलेश समैया परिवार को प्राप्त हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने आहारदान का सौभाग्य अर्जित किया। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री आकाश जैन (एवी गैस) द्वारा किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, कोषाध्यक्ष सीए सौरभ जैन, मंदिर प्रबंधक पंकज जैन मोदी, अशोक दैलवारा, धार्मिक आयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन (रिंकू), श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, अनिल जैन अंचल, नरेन्द्र जैन (छोटे पहलवान), सीए संजीव जैन, अखिलेश गदयाना, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया (मीडिया प्रभारी), संजय रसिया, संजीव जैन (ममता स्पोर्ट), जिनेन्द्र जैन (डिस्को), संजीव सौरया, सौरभ जैन (पीलू), राजीव जैन (लकी) सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
<p>सायंकालीन जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में आयोजित हुआ, जिसमें अनेक श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज से प्राप्त किया। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति में सम्मिलित होकर मुनि श्री की आरती की और भक्ति में लीन हो गए।</p>
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		<title>अभिनंदनोदय तीर्थ में नवीन वेदिका पर रजतमयी चौबीसी हुई विराजित : अपनी कमाई में प्रभु का शेयर भी बनाओ &#8211; मुनि सुधासागर </title>
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		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 08:35:34 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थ चक्रवर्ती श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि जीवन में सफलता के मुकाम पर पहुँचने में जिनका योगदान रहा है, उनका आभार अवश्य मानना चाहिए। दुख के समय जब प्रभु के सामने विनती करते हैं और जब सुख आता है तो उन्हें भूल जाते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थ चक्रवर्ती श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि जीवन में सफलता के मुकाम पर पहुँचने में जिनका योगदान रहा है, उनका आभार अवश्य मानना चाहिए। दुख के समय जब प्रभु के सामने विनती करते हैं और जब सुख आता है तो उन्हें भूल जाते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए। प्रभु और गुरु, जिन्हें हम अपना आराध्य मानते हैं, उनका सदैव आभार व्यक्त करना चाहिए।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिस प्रकार अपनी कमाई में विभिन्न खर्चों के लिए धन निर्धारित किया जाता है, उसी प्रकार प्रभु का “शेयर” भी अवश्य रखना चाहिए। प्रभु का यह हिस्सा पुण्य एवं धर्म कार्यों में लगाने से व्यक्ति का वर्तमान और भविष्य दोनों सुधरते हैं।</p>
<p>मुनि श्री ने ललितपुर में अभिनंदनोदय तीर्थ में चल रहे आसीमकालीन भक्तामर की महिमा बताते हुए कहा कि यहाँ से जिन-जिन लोगों को लाभ मिला है, उन्हें आभार मानना चाहिए और अच्छे कार्यों को दूसरों तक पहुँचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को जीवन में छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि उनका प्रसार करना और आभार मानना ही जीवन की सार्थकता है।</p>
<p>धर्मसभा के शुभारंभ में मुनि श्री सुधासागर महाराज का पादप्रक्षालन समाज के श्रेष्ठीजनों द्वारा किया गया। संगीतमय पूजन का आयोजन पुण्यजन विद्यापूजा मंडल एवं साधु वैयावृत्ति मंडल द्वारा किया गया, जिसमें सभी ने भक्तिपूर्वक अर्घ समर्पित किए। धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन (एवी गैस) द्वारा किया गया।</p>
<p>इसके पूर्व प्रातःकाल अभिनंदनोदय तीर्थ में तीर्थचक्रवर्ती मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के मार्गदर्शन में भगवान अभिनंदनाथ की विशाल रजतमयी प्रतिमा एवं रजतमयी चौबीसी को जयघोषों के बीच नवीन वेदिका पर विराजित किया गया। प्रतिमा विराजमान कराने का पुण्याजक विनोद कुमार, देवेन्द्र कुमार, मुकेश कुमार एवं सुनील कामरा परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर व्यायामशाला के संरक्षक नरेन्द्र जैन “छोटे पहलवान” के नेतृत्व में स्वयंसेवक सक्रिय रहे। विराजमान कार्यक्रम से पूर्व मुनि श्री के सानिध्य में प्रातःकाल अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन, जिनवाणी पूजन, गुरुपूजन एवं विश्वशांति महायज्ञ सम्पन्न हुआ।</p>
<p>सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में सम्पन्न हुआ, जिसमें अनेक श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज से प्राप्त किया।</p>
<p>धर्मसभा में प्रमुख रूप से जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा, धार्मिक आयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया (मीडिया प्रभारी), संजय रसिया, नरेन्द्र कलंकी, मनोज जैन (बबीना), सौरभ जैन (पीलू) सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन साधु, राजा और पूजा को निकला श्रावक होता है मांगलिक: मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Aug 2023 12:07:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुष तीन अवस्थाओं में मांगलिक होता है, एक साधु, दूसरा राजा और तीसरा जब कोई धोती-दुपट्टा पहनकर अष्टद्रव्य लेकर घर से मन्दिर के लिए निकलता है। वह कलश से भी अधिक मांगलिक है। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। श्री 1008 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुष तीन अवस्थाओं में मांगलिक होता है, एक साधु, दूसरा राजा और तीसरा जब कोई धोती-दुपट्टा पहनकर अष्टद्रव्य लेकर घर से मन्दिर के लिए निकलता है। वह कलश से भी अधिक मांगलिक है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य शांतिसागर सभागार, हरीपर्वत में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुष तीन अवस्थाओं में मांगलिक होता है, एक साधु, दूसरा राजा और तीसरा जब कोई धोती-दुपट्टा पहनकर अष्टद्रव्य लेकर घर से मन्दिर के लिए निकलता है। वह कलश से भी अधिक मांगलिक है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे का एक क्षण भी हमारे हाथ में नहीं है।</p>
<p>दुनिया हमें नहीं देख रही है, हम दुनिया को चाह रहे हैं। हमारी गलती है क्योंकि हम पुद्गल को चाह रहे हैं। हम दूसरे का नाम ले लेकर के अपनी जिंदगी खत्म कर देंगे। धन हमारे हाथ में है, हमें डर है कि कोई हमें लूट न ले। जिसे नींद आ जाये, उससे बड़ा अमीर नहीं और जिसकी नींद हर जाए, उससे बड़ा गरीब नहीं। किसी व्यक्ति को प्रसन्न करना है तो देखो कि वो किस चीज से परेशान है, उसकी चाहत क्या है, वो किस चीज के लिए परेशान है। जिसको जितने जल्दी नींद आती है, समझना उससे बड़ा कोई बादशाह नहीं है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-50435" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230807-WA0028-1.jpg" alt="" width="1280" height="655" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230807-WA0028-1.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230807-WA0028-1-300x154.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230807-WA0028-1-1024x524.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230807-WA0028-1-768x393.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230807-WA0028-1-990x507.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>णमोकार मंत्र है सर्वशक्तिमान</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिसको हम ठुकरा रहे हैं, शायद वही सत्य है, हम सौधर्मेन्द्र बनना चाहते हैं और सौधर्मेन्द्र मनुष्य बनने को तरसता है। जिस समय आप प्रवचन सुन रहे हैं, जिस समय आप मुनिराज की अंजुली में ग्रास रखते हैं। जिस समय आप भगवान के दर्शन करते हैं, देव कहते हैं कि धन्य हैं ये श्रावक भगवान के पास मूल शरीर से आ गया क्योंकि वे देव स्वयं नहीं आ पाते। कभी कोई देव तुम्हें परेशान करने लगे तो जाओ वो तुम्हारा बालबांका भी नहीं कर पायेगा क्योंकि तुम्हारे पास णमोकार मंत्र है।</p>
<p>तुम कहना है कि मैं सुधासागर जी महाराज के शिविर का शिविरार्थी हूं। तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। णमोकार मंत्र जब तक तुम पढ़ रहे हो, देव तुम्हें छू नहीं सकता। अपना ही व्यक्ति दुश्मन बनता है, दुश्मन कोई दुश्मन नहीं बनता। अपना ही कोई सगा दगा देता है। इसलिए दाग अपनों से ही लगवाया जाता है। मत डरो तुम्हारे पास सर्वशक्तिमान मंत्र है, णमोकार मंत्र पढ़ने वाले को ऊपरी बाधाएं नहीं आती। देवता सबसे अधिक तंत्रविद्या दे करते हैं। कभी डर लगे तो तुम णमोकार मंत्र का घेरा बनाकर बैठ जाना, कोई भी देव तुम्हारे घेरे को भेद नहीं पायेगा।</p>
<p>तंत्र विद्या से डरना नहीं, तुम्हारे घर में कोई नीबू फेंक जाए, आप मेरा नाम लेकर लात मार देना या,उस पर थूक देना और फिर उसके हाल-चाल ले लेना, जिसने नी,बू फिंकवाया है। यदि किसी दुश्मन से परेशान हो कि इसने मेरी दुकान को बांध दिया है, कुछ भी नहीं करना। एक धोती, दुपट्टा खरीदना मंदिर के नाम का और उससे भगवान का अभिषेक करो। वो भगवान का अभिषेक किया हुआ धोती-दुप्पटा सूख रहा है। उस घर में नींबू टोना- टोटका करने वालों का प्रभाव नहीं पड़ता, देव उसे छू नहीं सकते।</p>
<p><strong>जिस घर में धोती-दुप्पटा, उस घर में सकारात्मक ऊर्जा</strong></p>
<p>भूलकर बड़ों की वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना। यदि किया है तो उतना वापिस लौटकर देना। मंदिर का वस्तुओं का प्रयोग तुमने किया है तो ईमानदारी से मंदिर से निकलने से पहले गुल्लक में राशि डाले वापिस आना नहीं। कितनी द्रव्य चढ़ाई कितना जल प्रयोग किया, कितनी लाइट प्रयोग की। अन्यथा निर्माल्य के दोष से बच नहीं पाओगे। पूरा हिसाब लगाओ तो पाओगे कि आज तक मैंने मंदिर से पाप ही पाप कमाया है।</p>
<p>एक मन्दिर के नाम से बच्चो के लिए धोती-दुप्पटा अवश्य रखना, हफ्ते में एक दिन जाएगा। उसकी इतनी सकारात्मक ऊर्जा होती है कि वो उसके जीवन को मांगलिक बनाये रखता है। पुरुष तीन अवस्थाओं में मांगलिक होता है,जब साधु बनता है, राजा हो और तीसरा जब कोई धोती-दुपट्टा पहनकर अष्टद्रव्य लेकर घर से मन्दिर के लिए निकलता है। वह कलश से अधिक मांगलिक है। धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इस दौरान श्री दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के पदाधिकारियों ने मुनिश्री के समक्ष श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
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		<title>चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन :  देव, शास्त्र और गुरु के सामने कभी गरीब मत बनना-मुनि सुधासागर महाराज </title>
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		<pubDate>Sat, 05 Aug 2023 11:54:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230; आगरा। हरिपर्वत स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास के दौरान विराजमान निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती श्री सुधासागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> हरिपर्वत स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास के दौरान विराजमान निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जैनी के भगवान स्वयं खाते नहीं, खाने देते नहीं या चढ़ाना बंद करें, वो करते नहीं। उन्होंने धर्मसभा में कहा कि</p>
<p>1.बडों को देना लेना नहीं- हमारी जिंदगी में कितने राज हम छिपाये बैठे हैं। माता-पिता से बेटा छिपाए बैठा है। पति- पत्नी एक-दूसरे से छिपाए बैठे हैं, गुरु भगवान से छिपाकर बैठे हैं। देव,शास्त्र और गुरु के सामने कभी गरीब मत बनना। कुछ न कुछ लेकर जाना। जैन सम्प्रदाय में कहा है भगवान, गुरु के सामने कभी लेने नहीं जाना। उनको देना है। खेत में बोएंगे, तभी फसल आएगी। बड़ों का धन भोगा नहीं जाता, उनको दिया जाता है। आशीर्वाद भी नहीं लेना। उनसे कुछ नहीं लेना। बडों से लेकर पेट नहीं भरना। ललित नगर के राजा और मथुरा नगरी के राजा वरांग के बीच युद्ध हुआ। ललित नरेश हारने वाले थे। उन्होंने आधा राज्य देने को वादा किया। राजा वंराग ने ललित नरेश को जिता दिया और आधा राज्य लेने से मना कर दिया।</p>
<p>2. जीवन की गुत्थी कोई नहीं सुलझा सकता। शास्त्र में समाधान बता सकते हैं। विपरीत परिस्थितियों में कैसे निपटें, हम णमोकार मंत्र चाहते हैं।</p>
<p>3. अकाल मृत्यु-किसी अपरिचित, धर्मात्मा जिसका मरना निश्चित है, डॉक्टर के कहने पर हम 10 लाख रु देकर एक मिनट जिंदा रख दें तो क्या मिलेगा। यदि आपने ये किया तो आपकी अकाल मृत्यु &#8216;कभी नहीं होगी, ये निश्चित हो गया, नहीं न।</p>
<p>4. मौत का डर-मोक्ष का दरवाजा उनके लिए खुलता है, जिन्हें मौत का डर नहीं है। बाहुबली भगवान के शरीर पर सांप के बिल बन गये लेकिन डर नहीं था। सुकौशल मुनि महाराज को श्यालनि खा रही है, फिर भी डर नहीं। ऐसे मुनि महाराज जी का मोक्ष होना है।<br />
प्रवचन से शिक्षा -पुण्यात्मा का सम्मान करें<br />
<strong>(सकंलन ब्र. महावीर)</strong></p>
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