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	<title>Muni Shri Yogasagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Muni Shri Yogasagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री योगसागरजी ने श्री राणपुर जिनालय के दर्शन किए : अभिभूत हो समाज बंधुओ की तारीफ  </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 11:02:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री 108योगसागर जी महाराज ससंघ का राणपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगपुरा से विहार कर मुनिश्री ससंघ (12 पिच्छी) का ग़ाजों बाजों के साथ रानपुर में विहार के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए गए। कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; कोटा। मुनि श्री 108योगसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री 108योगसागर जी महाराज ससंघ का राणपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगपुरा से विहार कर मुनिश्री ससंघ (12 पिच्छी) का ग़ाजों बाजों के साथ रानपुर में विहार के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए गए। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा</strong>। मुनि श्री 108योगसागर जी महाराज ससंघ का राणपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगपुरा से विहार कर मुनिश्री ससंघ (12 पिच्छी) का ग़ाजों बाजों के साथ रानपुर में विहार के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए गए। मंगल आगवानी की गई। गांव के मंदिर पहुंचने पर गुरुदेव ने मंदिर के दर्शन किए और वह अभिभूत हुए। शुभम जैन ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि इतने कम समाज के घर होने पर भी भव्य मंदिर बनाया है, ये बहुत अच्छी बात है। मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनिश्री 108 योग सागर जी महाराज, मुनि श्री निरोग सागर जी, मुनि श्री निर्मोह सागर जी, मुनि श्री निरामय सागर जी, मुनि श्री निर्भीक सागरजी महाराज, पंच ऐलक महाराज एवं क्षुल्लक द्वय का विहार मंगलवार दोपहर दो बजे जगपुरा विमल वर्धमान फ़ार्म हाउस से राणपुर की ओर हुआ। जहां मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। जहाँ संतों का पाद प्रक्षालन किया।</p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रकाश बज ने बताया कि विशाल मुनि संघ में मुनिश्री योग सागरजी महाराज का प्रातः 8 बजे केवलनगर स्थित महावीर भवन से 8 किमी का विहार जगपुरा स्थित विमल वर्धमान फ़ार्म हाउस की ओर हुआ।</p>
<p><strong>मुनिराज के केशलोच हुए</strong></p>
<p>कार्याध्यक्ष मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि विशाल मुनि संघ की आहार चर्या फ़ार्म हाउस पर हुई। विहार के दौरान मुनिराज के केशलोच हुए। संघस्थ मुनि श्री निरामय सागर महाराज ने जगपुरा पहुंचकर केशलोच किए। दिगम्बर साधु संत हर ढाई से तीन माह के उत्कृष्ट काल में अपने सिर, दाढ़ी एवं मूंछ के बालों को स्वयं के ही हाथों से घासफूंस की तरह उखाड़ कर फेंक देते हैं और उसी दिन निर्जल उपवास धारण कर लेते हैं।</p>
<p><strong>कोटा में मंगल आगवानी रविवार को</strong></p>
<p>मुनि श्री योग सागरजी महाराज ससंघ में शामिल 5 मुनिराज, 5 ऐलक महाराज एवं 2 क्षुल्लक महाराज मध्यप्रदेश के गुना से पद विहार कर कोटा नगर में 47 वर्षों के अंतराल के बाद आ रहे है। त्रिकाल चौबीसी जिनालय समिति आरके पुरम के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि कोटा शहर का पूरा समाज पलक पाँवड़े बिछाकर विशाल संघ की आगवानी को आतुर हैं। इस बार विशाल संघ की आगवानी का अवसर नए कोटा के आरके पुरम जैन समाज को मिला है तो सभी वर्गों में उत्साह काफ़ी अधिक है। मुनि संघ की आगवानी सकल दिगम्बर जैन समाज के निवेदन पर आरके पुरम स्थित त्रिकाल चौबीसी मंदिर में रविवार 8 फ़रवरी को प्रातः होगी।</p>
<p><strong>पद विहार में सैकड़ों श्रद्धालु रहे शामिल</strong></p>
<p>राणपुर मंदिर समिति के अध्यक्ष नवीन दौराया ने बताया कि शुक्रवार को मुनि संघ के पद विहार में सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष पारस सोगानी, मनोज जैसवाल, जगदीश जिंदल, पूर्व महामंत्री विनोद टोरड़ी, त्रिकाल चौबीसी आरके पुरम के अध्यक्ष अंकित जैन, नसिया जैन मंदिर के अध्यक्ष जम्बू सराफ, हुकम जैन काका, नरेश वैद, दीपक डीसीएम, संजय निर्माण, नवीन दौराया, अजमेरा सहित सैकड़ों महिला, पुरुष,युवा आदि शामिल रहे। संभवतः शनिवार को मुनि संघ का 12 किमी दूरी का विहार आरोग्य नगर स्थित जैन जन उपयोगी भवन के लिए दोपहर डेढ़ बजे होगा।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस: मुनि श्री योगसागरजी के सानिध्य में आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति हुई  </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 08:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। जो सुरेशकुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया दोतडा वाला परिवार द्वारा किया गया। उन्हें महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण स्वरा जैन ने किया। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पूजन विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से किया गया। इस अनुपम बेला में पूरा पंडाल भक्तों से भरा हुआ था। इन मांगलिक क्षणों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रकल्प गौशाला, इंडिया नहीं भारत बोलो, स्वालंबन के लिए हथकरघा इंडिया नहीं भारत बोलो को नाटकीय रूपांतरण के माध्यम से दर्शाया गया। इस अनुपम बेला में दूरदराज से भक्त भी पधारे। साथ ही मीडिया भी मौजूद रही। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं रूपचंद लाडवा ने भी महाराज श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री साधना के हिमालय थे </strong></p>
<p>इसके बाद गणिनी आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बताया आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी श्रद्धा विद्धमान है वे कहते हैं बीमार है आचार्य श्री का नाम लेंगे ठीक हो जाएंगे। मुनिश्री निर्भीक सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री साधना के हिमालय थे, जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। एक गीत के माध्यम से कहा- ‘गुरु मात पिता गुरु बंधु सखा तेरे चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।’ मुनिश्री निरामय सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री भेद विज्ञानी अध्यात्म के सरोवर थे। मुनिश्री निर्माेह सागरजी महाराज ने कहा कि हमारे जो भी थे वही थे, जो कुछ छोड़ा था। उन्हीं के लिए छोड़ा था। उनकी पूर्ति नहीं हो सकती। गुरु मिट्टी से सोना बनाते हैं। गुरु के प्रति सच्ची आस्था श्रद्धा है। गुरु कही भी बिठा सकता। गुरु हमारे लिए जीवंत भगवान थे।</p>
<p><strong>आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है</strong></p>
<p>मुनि श्री निरोग सागरजी महाराज ने आचार्य श्री ने कहा कि जीवन लग जाए तभी भी हम गुणमाला नहीं लिख पाएंगे। आचार्य श्री शारीरिक दृष्टि से हमारे बीच नहीं लेकिन, आत्मा से हमेशा जुड़े रहेंगे। आचार्य श्री ने अपनी चर्या में दोष नहीं लगे और किसी के दोष नहीं दिखे। मुनि श्री योगसागरजी महाराज ने कहा कि मुझे हर्ष हो रहा है कि आचार्य परंपरा में साधु बना, मैं नहीं सोच सकता था। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है। जब में गृहस्थ अवस्था में था, 5 साल का था तब उन्होंने मुझे नमोकर मंत्र सिखाया। इसीलिए आचार्य श्री 65 साल से मेरे धर्म गुरु हैं। गुरु आज्ञा बड़ी चीज है इसी से नैया पार होगी।</p>
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