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	<title>Muni Shri Saraswat Sagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Muni Shri Saraswat Sagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि जयंत सागरजी का नांद्र में मनाया जाएगा अवतरण दिवस : सभी जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना कर रहे हैं मुनिश्री  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:56:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे(महा.)।</strong> मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील ने बताया कि देश की पावन वसुंधरा को अनेकों ऋषि मुनियों ने अपनी चरण धूलि से पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। 30 वर्ष पूर्व भिंड निवासी सौभाग्यशाली दंपती सुरेंद्रकुमार जैन एवं अनिता जैन के आंगन में खुशियां छाई थीं। 14 जून 1996 को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी और उस सुंदर बालक का माता-पिता ने नाम रखा विशाल। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के करकमलों से 6 नवंबर 2022 को रायपुर ( छत्तीसगढ ) में मुनि दीक्षा धारण कर आपका नाम जयंत सागर जी रखा गया। मुनिश्री जयंत सागर जी ने पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के आशीष से सभी जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना करते हुए हमेशा गुरु आज्ञा को सबकुछ माना है। आपके प्रत्येक प्रवचन जिसमें गुरु भक्ति मानो स्वर्णिम शिखर को छूती है। सरलता, सहजता, सौम्यता की आप प्रतिमूर्ति हो।</p>
<p>आप अधिकतम समय ध्यान में लीन रहते हैं, आपकी वाणी ओजस्वी है। आपके प्रवचनों की चर्चा चारों ओर है। ऐसे भविष्य के महावीर को प्रणाम करता हूं। अवतरण दिवस के इस शुभ अवसर पर हम सभी यही भावना भाते हैं कि मुनि श्री जयंत सागर जी आप ऐसे ही अपनी साधना से अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त करते रहें और हमें सदैव वात्सल्य, उपदेश एवं आशीष देते रहें। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री जयंत सागर जी के 30 वें अवतरण दिवस पर उनके पावन चरणों में समस्त परिवारजनों की ओर से,बारंबार नमोस्तु।</p>
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		<title>संपत्ति का प्रयोग दूसरे के लिए करने का भाव ही दान : मुनि श्री सारस्वत सागर जी के नांद्रे में नित प्रवचन जारी </title>
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		<pubDate>Sun, 20 Jul 2025 05:50:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वत सागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में कई प्रकार कि क्रिया आपको करनी पडती हैं, तब आप कहीं जाकर अपने आप जीवन को जी पाते हो। कहीं पर देना पड़ता है तो कहीं पर लेना पड़ता है लेने-देने के जो व्यवहार की क्रिया है।नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230; नांद्रे। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वत सागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में कई प्रकार कि क्रिया आपको करनी पडती हैं, तब आप कहीं जाकर अपने आप जीवन को जी पाते हो। कहीं पर देना पड़ता है तो कहीं पर लेना पड़ता है लेने-देने के जो व्यवहार की क्रिया है।<span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागरजी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनि श्री सारस्वत सागर महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में कई प्रकार कि क्रिया आपको करनी पडती हैं, तब आप कहीं जाकर अपने आप जीवन को जी पाते हो। कहीं पर देना पडता है तो कहीं पर लेना पडता है लेने-देने के जो व्यवहार की क्रिया है। यह संबंधो को मजबूत भी करती है तो कई बार संबंधो के विनाश का कारण बन जाती है।</p>
<p>जहाँ देना है लेना कुछ नहीं है वहाँ पुरुष अपने में वीरता का अनुभव करता है। कहीं-कहीं देखा जाता है कि लोगों के पास बहुत संपत्ती होती है परंतु उनको उस संपत्ति का प्रयोग दूसरे के लिए करने का भाव हो जाता है। जोड़ते-जोड़ते मर जाए परंतु किसी कि सहायता नहीं कर पाते, वे पुरुष कभी भी समाज में सम्मान को प्राप्त नहीं होते।</p>
<p>सम्मान, यश को प्राप्त करना है तो आपको अपने जीवन से जुडी हुई वस्तुओं का दान देना पड़ेगा। कहीं पर अपने समय का दान देना पड़ता है तो कभी कहीं पर धन का दान देना पडता है। दान देने से अहंकार में न्यूनता आती है, पुण्य का अर्जन होता है, पाप का विनाश होता है, जन &#8211; जन में पहिचान बनती है और मूल कारण है कि हमारी लोभ कषाय में मंदता हो या कषायों कि शून्यता हो तो पुरुष वीर पुरुष कि श्रेणी में आता है। इसलिए दानवीर भी वीर है।</p>
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		<title>मुनि श्री सारस्वत सागर जी ससंघ का कलश स्थापना समारोह : जिनसेन महास्वामी जी का मिला सानिध्य </title>
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		<pubDate>Mon, 14 Jul 2025 04:31:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी के उपस्थिती में नांद्रे में मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज ससंघ का पावन मंगल कलश स्थापना समारोह संपन्न हुआ। नांद्रे से अभिषेक पाटील की पढ़िए, यह खबर&#8230; नांद्रे (महाराष्ट्र )। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी के उपस्थिती में नांद्रे में मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज ससंघ का पावन मंगल कलश स्थापना समारोह संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से अभिषेक पाटील की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे (महाराष्ट्र )।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी के उपस्थिती में नांद्रे में मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज ससंघ का पावन मंगल कलश स्थापना समारोह संपन्न हुआ। मुनि श्री सिद्ध सागर महाराज ने कहा कि वर्षाऋतु में पृथ्वी पर सूक्ष्म जीव हरियाली आदि उत्पन्न हो जाते है, उनकी रक्षा के लिए योगी चार्तुमास करते हैं।</p>
<p>बोली के माध्यम से कलश श्री जिन देशना वर्षायोग 2025 प्रथम मंगल कलश का सौभाग्य मनोज पाटील परिवार को प्राप्त हुआ। द्वितीय मंगल कलश का सौभाग्य जिनेश्वर पाटील परिवार को प्राप्त हुआ। तृतीय मंगल कलश का सौभाग्य नरसगोंडा पाचोरे परिवार को प्राप्त हुआ। चतुर्थ मंगल कलश का सौभाग्य सुधीर भोरे परिवार को प्राप्त हुआ। पांचवां मंगल कलश का सौभाग्य अमोल रावसाहेब पाटील परिवार को प्राप्त हुआ। छटा मंगल कलश का सौभाग्य सुरगोंडा पाटील इंगळे परिवार को प्राप्त हुआ। सातवां सारस्वत जयंत सिद्ध श्रुत मंगल चातुर्मास स्थापना कलश का सौभाग्य पंकज जैन ,भरत जैन, टीया जैन परिवार बडौत ( उत्तरप्रदेश) को प्राप्त हुआ।</p>
<p>दादा साहेब धन्यकुमार पाटील ने पाद प्रक्षालन की बोली ली, दीपक पाटील मोनू ने शास्त्र भेंट की बोली ली और जाप्यमाला भेंट करने की बोली इब्राहिम जमादार और सुहास पाटील वसगडे इन ने ली। संगीतकार सुयोग पाटील, प्रतिष्ठाचार्य अनिल कलाजे और दादासाहेब पाटील द्वारा बोली के लिए विशेष प्रयत्न किया। कार्यक्रम के लिए नांद्रे, सांगली, कोल्हापुर, नांदणी के श्रावक- श्राविका उपस्थित थे।</p>
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		<title>सरलता को स्वीकारो, सबको अपना बनाओ और सबके बन जाओ: मुनिश्री सारस्वतसागर जी ने बताए जीवन में सरलता के लाभ  </title>
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		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 08:40:10 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजित हैं। यहीं पर मुनिराजों के प्रवचन चल रहे हैं। इसका धर्मलाभ धर्मानुरागी समाजजन ले रहे हैं। यहां पर बड़ी संख्या में समाजजन मुनिराजों के दर्शन और प्रवचन का सार सुनने के लिए आ रहे हैं। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे(महाराष्ट्र)</strong>। आचार्य श्री विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजित हैं। यहीं पर मुनिराजों के प्रवचन चल रहे हैं। इसका धर्मलाभ धर्मानुरागी समाजजन ले रहे हैं। यहां पर बड़ी संख्या में समाजजन मुनिराजों के दर्शन और प्रवचन का सार सुनने के लिए आ रहे हैं।</p>
<p>यहां पर मुनि श्री सारस्वत सागर जी ने शनिवार को प्रवचन में कहा कि जीवन में वही व्यक्ति एक धारा में जी सकता है, जो सरलता का व्यवहार करेगा। सरलता में शत्रुता नहीं बनती, सरलता में किसी को आपसे हीनता नहीं आती, सरलता में आपको अपमान और सम्मान की भावना नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि सरलता में अहंकार और हीनता की दुर्गंध नहीं आती है। सरलता में सभी अपने को स्वीकार करते हैं और आप भी सभी को स्वीकार करते हो। मुनिश्री ने कहा कि सरलता वह अस्त्र है, वह शस्त्र है, जिसके बल पर लोगों के ह्रदय में बैठे कषायादिक शत्रुओं का उपशमन हो सकता है और उनके अंतरंग में प्रेम-वात्सल्य का राज्य स्थापित हो सकता है। सरल व्यक्ति जल की तरलता के समान है।</p>
<p>वह जब भी आगे बढ़ता है तो समीकरण करते हुए आगे बढे़गा। सरलता में ही संबंध सुरक्षित रहते हैं। सरलता में हम एक-दूसरे की भावना को समझ सकते हैं और जब एक-दूसरे की भावना समझ में आती हैं। तब हमारे अंदर एकता की दृष्टि जाग्रत होती है। सरल व्यक्ति को सब अपना मानकर उसका सहयोग करते हैं। वर्तमान काल में हम देखें तो चलता-फिरते भगवान के रूप में पूजता है सरल स्वभावी। सरलता को स्वीकारो, सबको अपना बनाओ और सबके बन जाओ।</p>
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		<title>मुनि श्री जयंत सागर जी ने कहा बिना गुरु के इंसान की कीमत नहीं होती: जगत और आत्म कल्याण के लिए गुरु आवश्यक  </title>
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		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 08:04:57 +0000</pubDate>
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<p><strong>पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी का चातुर्मास इन दिनों नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर चल रहा है। मुनिराजों की मौजूदगी से भक्तजन भी गद्गद् हैं। यहां मुनिराजों के रोजाना प्रवचन हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे (महाराष्ट्र)।</strong> पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी का चातुर्मास इन दिनों नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर चल रहा है। मुनिराजों की मौजूदगी से भक्तजन भी गद्गद् हैं। यहां मुनिराजों के रोजाना प्रवचन हो रहे हैं। शिष्य मुनि श्री जयंत सागरजी ने यहां अपने प्रवचन में कहा कि अहो मित्र, जैसे बिना नेटवर्क के मोबाइल की कोई कीमत नहीं होती, वैसे ही बिना गुरु के इंसान की कीमत नही होती। इसलिए जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरु नहीं। ऐसा प्रसंग मेरे जीवन में था। बिना गुरु के दर-दर भटक रहा था, लेकिन जब से 2019 से आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी के दर्शन किए और उस दिन का दिन है और आज का दिन है, जीवन में सम्यक राह क्या होती है, सत क्या है, असत क्या है, इसका सत्यार्थ बोध गुरुवर ने करा दिया।</p>
<p>मुझे गर्व है अपने गुरु पर उन्होने कभी ये नहीं कहा कि बेटा सिर्फ विशुद्ध सागर ही तुम्हारे गुरु हैं, उन्होंने तो यह कहा कि इस जगत में जितने दिगंबर मुनिराज हैं वे सब तुम्हारे गुरु हैं। इसलिए अब बहुत जिया जीवन व्यर्थ का, बस अब खोज करो सच्चे गुरु की और सोच बदल दो जीवन की जिससे जीवन आपका सार्थक हो सके।</p>
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		<title>महिला जैन मिलन के शपथ ग्रहण समारोह में पौधे लगाने का संकल्प: भारतीय जैन मिलन के उद्देश्य जन-जन तक पहुंचाएं </title>
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		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 14:29:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महिला जैन मिलन एवं जैन मिलन सु़भाषनगर शाखा का शपथ ग्रहण समारोह होटल जैनसन में हुआ। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 की सुभाष नगर शाखा सागर का महिला जैन मिलन एवं जैन मिलन के सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह में सभी ने एक पौधा लगाने का संकल्प लिया। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महिला जैन मिलन एवं जैन मिलन सु़भाषनगर शाखा का शपथ ग्रहण समारोह होटल जैनसन में हुआ। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 की सुभाष नगर शाखा सागर का महिला जैन मिलन एवं जैन मिलन के सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह में सभी ने एक पौधा लगाने का संकल्प लिया। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">सागर से मनीष विधार्थी की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर</strong>। महिला जैन मिलन एवं जैन मिलन सु़भाषनगर शाखा का शपथ ग्रहण समारोह होटल जैनसन में हुआ। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 की सुभाष नगर शाखा सागर का महिला जैन मिलन एवं जैन मिलन के सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह में सभी ने एक पौधा लगाने का संकल्प लिया। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र जैन, विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय अध्यक्ष अरूण चंदेरिया, कार्यकारी अध्यक्ष वीर संजय शक्कर,संयुक्त मंत्री अतिवीर संजीव दिवाकर, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मनीष विद्यार्थी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अति वीरांगना मंजु सतभैया, मंचासीन रहे। चित्रावरण, दीपप्रज्वलन मंचासीन अतिथि द्वारा किया गया। मंगलाचरण पाठशाला की बच्चियों द्वारा किया गया। महावीर वंदना के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। सभी मंचासीन अतिथियों का शॉल, श्रीफल, माला, अंग वस्त्र सम्मान शाखा के पदाधिकारी द्वारा किया गया। सर्वप्रथम दोनों शाखा के पूर्व मंत्री द्वारा वर्ष भर में किए गए कार्यक्रमों की समीक्षा प्रस्तुत की गई।</p>
<p><strong>आगामी योजनाओं की जानकारी दी</strong></p>
<p>नए अध्यक्ष द्वारा अनेक आयोजन करने के विषय में उनकी रूपरेखा दी। क्षेत्रीय अध्यक्ष अरुण चंदेरिया द्वारा जैन मिलन के कार्यों को एवं उपदेशों को कर्तव्य निष्ठा के साथ पूर्ण करने की संकल्प शपथ दिलाई। कार्यक्रम के दौरान दसवीं बारहवीं के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया। अंत में मुख्य अतिथि कमलेन्द्र जैन ने कहा आप लोगों ने भारतीय जैन मिलन के उपदेश एवं उनके द्वारा गतिविधियों को आयोजित कर जैन धर्म की प्रभावना में अपना पूर्ण सहयोग देंगे। जैन मिलन प्रतिवर्ष होने वाले कार्यक्रमों के लिए वार्षिक कैलेंडर आपको देता है, उसे कैलेंडर में दिए हुए कार्यक्रमों को आप अपनी शाखा द्वारा आयोजित कर भारतीय जैन मिलन के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करना है। कार्यक्रम का संचालन वीरांगना संगीता पडेले ने किया। एवं आभार वीरांगना नीता बरा ने माना। कार्यक्रम में राष्ट्रीय संयोजिका अनीता जैन, संगीता चंदेरिया ममता जैन, संगीता पडेले,शशि सतभैया , क्षेत्रीय संयोजिका मंजु सतभैया, संयोजक विमल जैन, मकरोनिया शाखा अध्यक्ष सुरेश जैन बीज निगम एवं नगर की सभी शाखों के अध्यक्ष मंत्री उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मनाया:  मुनियों और समाजजनों ने विनयांजलि अर्पित की </title>
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		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 11:53:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां आचार्य विराग सागरजी प्रथम समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा हुई। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230; नांद्रे। आचार्य विशुद्धसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्रुतसागरजी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां आचार्य विराग सागरजी प्रथम समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा हुई।<span style="color: #ff0000"> नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> आचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में विराजमान हैं। यहां आचार्य विराग सागरजी प्रथम समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा हुई। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री सिद्ध सागरजी ने नांद्रे में आचार्य श्री विराग सागर महाराज जी के प्रथम स्मृति दिन पर अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री आदिसागर जी ‘अंकलीकर’, उनके शिष्य आचार्य श्री महावीरकीर्ति जी महाराज, उनके शिष्य आचार्य श्री विमलसागर जी, उनके शिष्य आचार्य श्री सन्मतिसागर जी, तथा आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज की परंपरा में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज अत्यंत प्रेरणास्पद हैं।</p>
<p>आचार्य श्री विरागसागर जी का जन्म 2 मई 1963 को दमोह जिले के पथरिया में हुआ था। इनके पिता का नाम कपूरचंद और माता का नाम श्यामादेवी था। बचपन में उनका नाम अरविंद था। 2 जून 1980 को मध्यप्रदेश कि धार्मिक नगरी बुढार में आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज (फफोतू ) के करकमलों से क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण कर क्षुल्लक श्री पूर्णसागर जी बन गए। औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में 1 दिसंबर 1983 को आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज की अनुमति से 8 नवंबर 1992 को सिद्धक्षेत्र द्रोणागिरी (मप्र) में चतुर्विध संघ द्वारा आपको आचार्य पद प्रदान किया गया। आचार्य विरागसागर महाराज जी ने 227 शिष्यों को दीक्षा दी हैं। जो संपूर्ण भारतवर्ष में धर्म की भारी प्रभावना कर रहे हैं।</p>
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		<title>मुनि श्री सारस्वत सागर जी का अवतरण दिवस 1 जुलाई को : डिग्रज के आदिनाथ जैन सांस्कृतिक भवन में होगा आयोजन  </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Jun 2025 15:48:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वत सागर जीका 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को आदिनाथ जैन सांस्कृतिक भवन, कस्बे डिग्रज में भक्ति पूर्वक मनाया जाएगा ।रथ, हाथी, घोडे, बैंडबाजे के साथ 2 जुलाई को नांद्रे में मुनिराजों की भव्य अगवानी होगी। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230; नांद्रे। पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वत सागर जीका 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को आदिनाथ जैन सांस्कृतिक भवन, कस्बे डिग्रज में भक्ति पूर्वक मनाया जाएगा ।रथ, हाथी, घोडे, बैंडबाजे के साथ 2 जुलाई को नांद्रे में मुनिराजों की भव्य अगवानी होगी। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी,मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्धसागर जी एवं क्षुल्लक श्री श्रुत सागर जी उपसंघ का विहार 2 जुलाई को पूरा हो रहा है। मुनि श्री सारस्वत सागर जी उपसंघ डिग्रज में विराजमान हैं। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक ने कहा कि मुनि श्री सारस्वत सागर जीका 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को आदिनाथ जैन सांस्कृतिक भवन, कस्बे डिग्रज में भक्ति पूर्वक मनाया जाएगा। मुनिश्री सारस्वत सागर जी का जन्म मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले के छोटे से ग्राम मजना में 1 जुलाई 1998 को हुआ। श्रावक विनयकुमार जैन व सुनीता जैन की संतान भरत भैया की साधु सेवा और स्वाध्याय की मेहनत कुछ ऐसा रंग लाई कि वैराग्य कि निर्झरणी बहने लगी। 6 अक्टूबर 2017 को इंदौर (मप्र) में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से सीधे ही मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनिश्री सारस्वत सागर जी रखा गया। मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज का मंगल वर्षायोग (चातुर्मास ) वर्ष 2018 में औरंगाबाद (महाराष्ट्र ),2019 में भिंड (मध्य प्रदेश), 2020 में वैशाली बसकुंड (बिहार), 2021 में सम्मेद शिखरजी झारखंड, 2022 में रायपुर छत्तीसगढ, 2023 में बडोत (उत्तर प्रदेश), 2024 में सोलापुर (महाराष्ट्र)में हुआ। 2025 का चातुर्मास नांद्रे (महाराष्ट्र) में होगा।</p>
<p>महावीर दिगंबर जैन मंदिर,नांद्रे का यह प्राचीन मंदिर 100 साल पुराना है। और यहां पत्थर का मानस्तंभ है। नांद्रे में जैन समाज के 1300 घर है। नांद्रे गांव के अभी तक 3 भट्टारक स्वामीजी हुए हैं। श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा भट्टारक महाराज ने बनवाई है। नांद्रे के इतिहास में चातुर्मास के लिए पहली बार पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से नांद्रे तक 900 किमी विहार हुआ है। मुनियों की चरणरज से पवित्र होगी नांद्रे की भूमि। रथ, हाथी, घोडे, बैंडबाजे के साथ 2 जुलाई को नांद्रे में मुनिराजों की भव्य अगवानी होगी।</p>
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		<title>मुनि श्री सारस्वत सागर जी का 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को: भिलवडी में भक्ति भाव से मनाया जाएगा  </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 13:12:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वत सागर जी का 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को भिलवडी में भक्तिपूर्वक मनाया जाएगा। आपने मात्र 16 वर्ष की अल्पायु में भोपाल में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से 21 जून 2014 को ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230; नांद्रे। आचार्य विशुद्धसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वत सागर जी का 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को भिलवडी में भक्तिपूर्वक मनाया जाएगा। आपने मात्र 16 वर्ष की अल्पायु में भोपाल में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से 21 जून 2014 को ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नांद्रे।</strong> आचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्धसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रुत सागर जी उपसंघ इंदौर से नांद्रे की ओर विहार कर रहें है। शनिवार को मुनिश्री सारस्वत सागर जी ससंघ दहिवडी में विराजमान हैं। नांद्रे निवासी अनिल पाचोरे ने बताया कि मुनि श्री सारस्वत सागर जी का 27 वां अवतरण दिवस 1 जुलाई को भिलवडी में भक्तिपूर्वक मनाया जाएगा। मुनिश्री सारस्वत सागर जी का बचपन का नाम भरत था। खाते-पीते घर के नन्हें से बालक भरत भैया को क्या सूझी कि छोटेपन में साधुओं की जमात में शामिल होने को छटपटा उठे। ‘मजना’ जैसी छोटी सी बस्ती में मुनिराजों का आना-जाना बहुत ही मुश्किल से हो पाता था, सो भरत भैया साधु सेवा की अपनी इच्छाएं टीकमगढ शहर में विराजमान मुनिराजों की सेवा करके ही पूरी कर पाते थे। मुनिश्री सारस्वत सागर जी का जन्म मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले के छोटे से ग्राम मजना में 1 जुलाई 1998 को हुआ। श्रावक विनयकुमार जैन और सुनीता जैन की इस प्यारी संतान भरत भैया की साधु सेवा और स्वाध्याय की मेहनत कुछ ऐसा रंग लाई कि वैराग्य कि निर्झरणी बहने लगी। आपकी लौकिक शिक्षा हाईस्कूल तक ही हो पाई कि आपने मात्र 16 वर्ष की अल्पायु में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से 21 जून 2014 को ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया। लगातार तीन वर्ष तक आपने संघस्थ ब्रम्हचारी रहकर गुरुमुख से शास्त्रों का अध्ययन किया एवं शास्त्रों की गाथाओं को कंठस्थ किया। आपने 6 अक्टूबर 2017 को इंदौर (मप्र) में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से अपार जनसमूह के समक्ष सीधे ही मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनिश्री सारस्वत सागर जी रखा गया।</p>
<p><strong>मुनिश्री के चातुर्मास </strong></p>
<p>मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज का मंगल वर्षायोग (चातुर्मास ) वर्ष 2018 में औरंगाबाद (महाराष्ट्र ), 2019 में भिंड (मध्य प्रदेश), 2020 में वैशाली बसकुंड (बिहार), 2021 में सम्मेद शिखरजी झारखंड, 2022 में रायपुर छत्तीसगढ, 2023 में बडोत (उत्तर प्रदेश), 2024 में सोलापुर (महाराष्ट्र) हुआ और 2025 का चातुर्मास नांद्रे (महाराष्ट्र) में होगा। आपके गृहस्थावस्था की बड़ी बहन आंचल जैन, बडे भाई शुभम जैन (लालू) और छोटे भाई साहिल जैन भैया भी निरंतर धर्मसाधना करते हुए शास्त्र स्वाध्याय में मग्न रहते हैं। मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज निरंतर स्वाध्याय, ध्यान, वैयावृत्ती में अपने समय का सदुपयोग करते रहते हैं। उन्हें हिंदी, संस्कृत और प्राकृत भाषा का अच्छा ज्ञान है। इस पंचमकाल में जबकि लोग व्रत, संयम तथा चारित्र पालन को कठिन समझते हैं, आपका जीवन एक महान आदर्श उपस्थित करके हम सबकी आंखे खोलने तथा चारित्र की ओर दृढतापूर्वक बढकर आत्मकल्याण करने एवं मानव जीवन को सफल बनाने की प्रेरणा देता है।</p>
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