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	<title>Muni Shri Sambhav Sagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शीतलधाम में भव्य पंचकल्याणक महा महोत्सव 11 मार्च से : वसंतोत्सव के माध्यम से मुनि श्री संभवसागर जी महाराज का आत्मजागरण संदेश </title>
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		<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 13:33:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी 11 मार्च से 16 मार्च तक शीतलधाम में नवनिर्मित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ को नवीन वेदी पर विराजमान करने तथा 16 नवीन जिन प्रतिमाओं के पंचकल्याणक महामहोत्सव किया जा रहा है। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; विदिशा। आगामी 11 मार्च से 16 मार्च तक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगामी 11 मार्च से 16 मार्च तक शीतलधाम में नवनिर्मित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ को नवीन वेदी पर विराजमान करने तथा 16 नवीन जिन प्रतिमाओं के पंचकल्याणक महामहोत्सव किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आगामी 11 मार्च से 16 मार्च तक शीतलधाम में नवनिर्मित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ को नवीन वेदी पर विराजमान करने तथा 16 नवीन जिन प्रतिमाओं के पंचकल्याणक महामहोत्सव किया जा रहा है। यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी के परोक्ष आशीर्वाद एवं आचार्य श्री समयसागर जी के मंगल आशीर्वाद से होगा। कार्यक्रम मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में तथा प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा के निर्देशन में होगा। प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव पाषाण से भगवान बनाने की आध्यात्मिक प्रक्रिया है। इसमें भगवान के गर्भ कल्याणक से लेकर जन्म, बाल्यावस्था, युवावस्था, वैराग्य, दीक्षा, केवलज्ञान और मोक्ष तक की संपूर्ण यात्रा का सजीव मंचन विभिन्न पात्रों के माध्यम से किया जाएगा। इस महोत्सव में सौधर्म इंद्र की भूमिका कमलकुमार जैन (कमल किराना) निभाएंगे, जबकि भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अंजना जैन एवं अनिल जैन ‘हजारीलाल’ को प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>वसंतोत्सव के माध्यम से आत्मजागरण का संदेश</strong></p>
<p>प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने वसंत ऋतु के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जब वसंत में टेसू (पलाश) के लाल-पीले पुष्प खिलते हैं तो प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं रंगोत्सव मना रही हो किंतु, यह वसंत पतझड़ का परिणाम है, जहाँ झरते पत्ते हमें अनित्यता का बोध कराते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य कितना भी वैभवशाली, यशस्वी और शक्तिशाली क्यों न हो सब कुछ क्षणभंगुर है। जैसे पतझड़ के बाद वसंत आता है, वैसे ही जीवन में गिरावट के पश्चात नवसृजन संभव है। गिरना अंत नहीं, बल्कि परिवर्तन की शुरुआत है। त्याग, विनम्रता और संयम से ही मानव जीवन का वास्तविक विकास होता है।</p>
<p>मुनिश्री ने वर्ष 2002 की स्मृतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि जब आचार्य श्री विद्यासागर जी प्रथम बार विदिशा पधारे थे, तब फाल्गुन मास एवं होली का पावन अवसर था। उस समय नगरवासियों ने होली के स्थान पर दीपावली जैसा उत्सव मनाकर संघ की मंगल अगवानी की थी। उन्होंने एक अन्य प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब आचार्यश्री का विहार आगरा से राजस्थान की ओर हो रहा था और वे मथुरा चौरासी के गंगा घाट पहुँचे, तब चारों ओर होली का उल्लास था। रंगों में सराबोर लोगों ने जब मुनिसंघ को निर्विकार भाव से विहार करते देखा तो आश्चर्य व्यक्त किया। तब आचार्यश्री ने कहा था कि आप लोगों का रंग तो फीका पड़ सकता है, किंतु साधु का रंग तप, त्याग और वैराग्य का रंग है, जो अमिट होता है। बाहरी रंग धुल जाते हैं, पर आत्मा का रंग कभी फीका नहीं पड़ता। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज ने प्रश्नमंच के माध्यम से उपस्थित जनसमुदाय के ज्ञान की परीक्षा ली तथा सही उत्तर देने वालों को पुरस्कार प्रदान किए गए। शीतलधाम में यह पंचकल्याणक महामहोत्सव आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और आत्मजागरण का अनुपम संगम सिद्ध होगा।</p>
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		<title>मुक्तागिरि तीर्थ क्षेत्र में गुरुवार को होगी जैनेश्वरी दीक्षाएं : इंदौर नगर से 11बसों से समाज जन तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरि जाएंगे </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:55:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रदेश तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरी में हजारों गुरु भक्तों का सैलाब नजर आएगा। नव दीक्षाएं देखकर वे अपने नयन धन्य करेंगे और नमोस्तु शासन जयवंत हो गुंजायमान ‌होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्यश्री समय सागर जी संसघ के चरणों मे प्रदेश भर से परम गुरु भक्त जन पहुंच रहे हैं। इंदौर से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रदेश तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरी में हजारों गुरु भक्तों का सैलाब नजर आएगा। नव दीक्षाएं देखकर वे अपने नयन धन्य करेंगे और नमोस्तु शासन जयवंत हो गुंजायमान ‌होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्यश्री समय सागर जी संसघ के चरणों मे प्रदेश भर से परम गुरु भक्त जन पहुंच रहे हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> प्रदेश तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरी में हजारों गुरु भक्तों का सैलाब नजर आएगा। नव दीक्षाएं देखकर वे अपने नयन धन्य करेंगे और नमोस्तु शासन जयवंत हो गुंजायमान ‌होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्यश्री समय सागर जी संसघ के चरणों मे प्रदेश भर से परम गुरु भक्त जन पहुंच रहे हैं। इंदौर नगर से 11बसों से समाज जन तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरि पहुंच रहे हैं। हर भक्त शिष्यों की भावना रहती है कि उन्हें गुरुदेव के हस्त कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त हो। इसी स्वप्न को चरितार्थ करने के लिए मुनिश्री नियम सागर जी महाराज, मुनि श्री अभय सागर जी महाराज, मुनि श्री संभव सागर जी महाराज, मुनि श्री वीर सागर जी, मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज एवं अन्य पूज्य मुनिश्री के उपसंघों से एलक एवं छुल्लक को मुनि दीक्षा ग्रहण के लिए आचार्यश्री समयसागर जी महाराज के चरणों में मुनि दीक्षा के लिए भेजा गया है। संभावित है कि 23 एलक, क्षुल्लक की मुनिदीक्षा होगी। दीक्षा पूर्व बुधवार को क्षुल्लक महाराजों द्वारा अपने गुरुदेव आचार्यश्री समय सागर जी को आहार दान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p>दद्दू ने कहा कि मुक्तागिरि क्षेत्र पर त्रिदिवसीय आयोजन होने से भारी संख्या समाज जन गुरु भक्तों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। दीक्षा महोत्सव में पूरे भारत से हजारों की संख्या में श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र मुक्तागिरी पहुंच रहे हैं। ज्ञातव्य है कि इंदौर नगर के धर्म निष्ठ परिवार के मुकेश बाकलीवाल परिवार के ऐलक श्री सुद्रर्ण सागर महाराज मुनि दीक्षा ग्रहण करेंगे। इसके पूर्व मुक्तागिरि तीर्थ क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने 11 फरवरी 1998 को मुनि दीक्षा प्रदान की थी।</p>
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		<title>जब वैराग्य का मार्ग चुने तो वापस न लौटे: विदिशा में मुनिश्री के प्रवचनों से समाजजनों को मिल रही मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 10:08:48 +0000</pubDate>
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<p><strong>बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजगृही नगरी में राजा श्रैणिक और महारानी चेलना के पुत्र राजा वारिसेन को वैराग्य होता है और वह राजमहल के साथ अपनी बत्तीस सुंदर रानियों को छोड़कर वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। समय बीतता है एक दिन मुनिराज वारिसेन का पुनः राजगृही नगरी में आगमन होता है और वह आहारचर्या के लिए निकलते हैं। वह बढ़े चले जा रहे है और उनका पड़गाहन अपने बाल सखा मित्र पुष्पडाल, जिसके विवाह को अभी एक ही दिन हुआ था, वहां होता है। उसकी पत्नी एकांक्षी थी। आहारचर्या के उपरांत पुष्पडाल मुनिराज का कमंडल अपने हाथ में लिए वन की ओर छोड़ने जाते हैं।</p>
<p><strong>पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं</strong></p>
<p>रास्ते में वारिसेन अपने मित्र को संसार की असारता का वर्णन से ओतप्रोत कथानक सुनाते हैं। जिससे प्रभावित होकर पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं। धीरे-धीरे 12 वर्ष बीत जाते हैं लेकिन, उनके मन में पत्नी के प्रति राग की कणिका विद्यमान रहती है। जिसे गुरु वारिसेन मुनिराज ताड़ लेते हैं और उनके स्थितिकरण के लिये वह राजागृही में राजा श्रैणिक और माता चेलना को संदेश भेजते हैं कि मैं राजमहल की ओर आ रहा हूं। आप सभी रानिओं को अच्छे से तैयार करके महल में हम दोनों मुनिराजों का पड़गाहन करें। यह संदेश सुनकर राजा श्रैणिक और माता चेलना के मन में संशय होता है कि कंही उनका बेटा मोक्षमार्ग से पथ भ्रष्ट तो नहीं हो गया? मन में उठते प्रश्नों के साथ दो चौकी लगाते हैं।</p>
<p><strong>नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है</strong></p>
<p>पूरा राजमहल दोनों मुनिराज का पड़गाहन करता है और नवधाभक्ति के साथ उनसे बैठने का अनुरोध करते हैं। मुनिराज वारिसेन जैसे ही काष्ट की चौकी पर बैठते हैं तो माता चेलना के मन में जो प्रश्न उठ रहे थे, उसका समाधान मिल जाता है। दूसरी स्वर्ण की चौकी पर साथी मुनिराज पुष्पडाल को इशारा किया और वह उस चौकी पर बैठते हैं नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है। सभी 32 रानियां एवं राजा श्रैणिक एवं रानी चेलना भी आहार देती है और आहार के उपरांत दोनों मुनिराज वापस लौटते हैं। इस पूरी घटना से पुष्पडाल मन ही मन सोचते है कि वारिसेन ने उन 32 रानियों की ओर एक नजर उठाकर भी नहीं देखा, वह समझ जाते हैं कि गुरु ने यह नाटक क्यों रचा? मेरे मन में जो अपनी पत्नी के प्रति राग की कणिका थी। उसका स्थितिकरण करने के लिये ही मेरे गुर यहां पर मुझे लेकर आए हैं और उनके मन में जो राग की कणिका आई थी वह समाप्त हो जाती है।</p>
<p><strong>तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसे बेटी को विदा करते समय प्रत्येक माता-पिता की यह भावना रहती है कि वह अपने घर-संसार में सुखी रहे। इसीलिए जब वह बेटी को विदा करता है तो वह कहता है कि अब तुम इस घर की ओर मत देखना, अब तुम्हारा घर तुम्हारी ससुराल है और सास-ससुर ही तुम्हारे माता-पिता हैं। उसी प्रकार जब बेटा वैराग्य की ओर जाता है तो माता-पिता उसे खूब समझाते हैं, फिर भी बेटा यदि नहीं मानता तो वह एक ही संदेश देते है कि अब तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना।</p>
<p><strong>ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज कहते है कि ‘सम्यक् दर्शन’ को सुरक्षित रखने के लिए कोई बहुत बड़ा पहाड़ नहीं तोडना पड़ता। यदि आपने दूसरों के दोषों पर मौन रखना शुरु कर दिया तो आप 101 प्रतिशत पास हो जाओगे। गुरुदेव हमेशा कहा करते थे कि आप लोगों को मोक्षमार्ग में मोक्षमार्गी की नकल करने की पूरी छूट है। ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है और स्वयं ही उसमें उत्तर लिखना है तथा खुद ही उसे चेक करके नंबर देना है। इस कार्य में पूरी ईमानदारी होना चाहिए। याद रखना कि कोई भी विद्यार्थी फेल नहीं होना चाहिए। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनिसंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। प्रातः 8.45 से प्रवचन के बाद प्रश्नमंच कार्यक्रम होता है। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कार दिया जाता है।</p>
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