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	<title>Muni Shri Punya Sagar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Muni Shri Punya Sagar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनिराजों ने मुनि श्री पूर्णसागर जी का केशलोच किया: संल्लेखना की ओर अग्रसर हैं मुनि श्री पूर्णसागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Mar 2025 13:48:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षित मुनि श्री पूर्णसागर जी संल्लेखना की ओर हैं। वह एक दिन छोड़कर मुनक्के का पानी ले रहे हैं। आपका केश लोचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्य सागर, श्री हितेंद्र सागर, श्री चिंतन सागर सहित अन्य मुनिराजों ने किया। धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षित मुनि श्री पूर्णसागर जी संल्लेखना की ओर हैं। वह एक दिन छोड़कर मुनक्के का पानी ले रहे हैं। आपका केश लोचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्य सागर, श्री हितेंद्र सागर, श्री चिंतन सागर सहित अन्य मुनिराजों ने किया। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी यहां विराजित है। मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षित मुनि श्री पूर्णसागर जी संल्लेखना की ओर अग्रसर हैं। वह एक दिन छोड़कर मुनक्के का पानी और जल ले रहे हैं। सुखद संयोग रहा कि आपका केश लोचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्य सागर, श्री हितेंद्र सागर, श्री चिंतन सागर सहित अन्य मुनिराजों ने किया। गुरुवार को संभवतः उनका अंतिम केशलोचन हुआ क्योंकि, केशलोचन 3 से 4 माह की अवधि के बीच किया जाता है। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी मुनि श्री पुण्य सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर सहित सभी साधु उपस्थित रहे। वीणा दीदी ने वैराग्यमय भजन गाकर तप की अनुमोदना की।</p>
<p><strong>मुनि श्री का जीवन परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि </strong></p>
<p>मुनि श्री पूर्णसागर जी के गृहस्थ अवस्था का नाम रतनलाल मेहता है। आपका जन्म 1 जनवरी 1943 को थांदला में सुखलाल मेहता के घर हुआ। आपकी माता का नाम सुडी बाई मेहता था। आपने मुनि श्री पुण्यसागर जी से सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में 9 जुलाई 2023 को क्षुल्लक दीक्षा तथा मुनि दीक्षा जन्मभूमि थांदला में मुनि श्री पुण्य सागर जी से 6 मई 2024 को ग्रहण की। आपकी गृहस्थ अवस्था की पत्नी भी मुनि श्री पुण्यसागर जी से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री पूर्णिमामति बनी थीं। माताजी की समाधि हो चुकी है। थांदला नगर से अभी तक 6 दीक्षा हो चुकी हैं। जिसमें मुनि श्री पुण्य सागर, श्री परमेष्ठि सागर जी, श्री महोत्सव सागर ,श्री उपहार सागर, श्री पूर्ण सागर, आर्यिका श्री पुण्यमति, आर्यिका श्री पूर्णिमा मति शामिल रहीं।</p>
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		<title>मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में कार्यक्रम : 48 दिवसीय भक्तामर विधान का 15वां दिवस और मुनि श्री महोत्सव सागर जी का 25वां उपवास </title>
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		<pubDate>Sat, 10 Aug 2024 08:38:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन (धरियावद) में 26 जुलाई से 48 दिवसीय श्री भक्तामर विधान पूजन की महाआराधाना चल रही है। इसका आयोजन 11 सितंबर तक होगा। विधान मंडल पूजन में 15वें दिन मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ने 15वें श्लोक की व्याख्या की। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन (धरियावद) में 26 जुलाई से 48 दिवसीय श्री भक्तामर विधान पूजन की महाआराधाना चल रही है। इसका आयोजन 11 सितंबर तक होगा। विधान मंडल पूजन में 15वें दिन मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ने 15वें श्लोक की व्याख्या की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज के शिष्य और वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के संघस्थ वात्सल्य मूर्ति मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन (धरियावद) में 26 जुलाई से 48 दिवसीय श्री भक्तामर विधान पूजन की महाआराधाना चल रही है। इसका आयोजन 11 सितंबर तक होगा। विधान मंडल पूजन में 15वें दिन मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ने 15वें श्लोक की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री मानतुंग देव के तीर्थंकर आदिनाथ प्रभु की अनन्य भक्ति की विवेचना के बारे में विस्तार से बताया।</p>
<p><strong>चरण चिह्न अंकित</strong></p>
<p>मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के शिष्य संघस्थ परम तपस्वी मुनि श्री महोत्सव सागर जी महाराज का लगातार 25वां उपवास चल रहा है। परम तपस्वी मुनिराज के चारित्र शुद्धि और ऐशना समिति के उपवास चल रहे हैं। महाराज पूर्व में तीन हजार से अधिक उपवास रख चुके हैं। महोत्सव सागर महाराज प्रज्ञा श्रमण मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के गृहस्थ अवस्था के भाई भी हैं। पुण्य सागर जी महाराज के संघ में ही धरियावद नगर गौरव मुनि श्री उदित सागर जी महाराज भी परम तपस्वी हैं। वे समय-समय पर 5, 10, 16, 32, 48 उपवास कर चुके हैं। आगामी भाद्रपद मास में दसलक्षण पर्व, सोलह कारण पर्व में उपवास करने का भाव भी रख रहे हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-64424" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0010.jpg" alt="" width="1156" height="517" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0010.jpg 1156w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0010-300x134.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0010-1024x458.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0010-768x343.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/08/IMG-20240810-WA0010-990x443.jpg 990w" sizes="(max-width: 1156px) 100vw, 1156px" />उदित सागर जी महाराज की तपस्या स्वरूप पुण्यशाली श्रावकों के चौके में चरण चिह्न अंकित हो रहे हैं। विगत माहों में कुशलगढ़, बांसवाड़ा, धरियावद और वर्तमान में नंदनवन में श्रावकों के चौके में चरण चिह्न अंकित हुए हैं। वर्षायोग काल में श्री क्षेत्र संस्थान नंदनवन में समस्त कार्यक्रम संघस्थ ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी &#8216;बिगुल&#8217; एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में संपन्न हो रहे हैं।</p>
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		<title>श्रावक-श्राविकाएं आहार और वैयावृत्ति का निरंतर ले रहे लाभ: मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में चल रहा है 48 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jul 2024 07:50:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन (धरियावद) में दिंगबर जैन मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज 19 पिच्छी ससंघ सान्निध्य में बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के कुशल संचालन और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विशाल जैन द्वारा श्री क्षेत्र पर 48 दिवसीय श्री भक्तामर स्त्रोत महामंडल विधान पूजन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन (धरियावद) में दिंगबर जैन मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज 19 पिच्छी ससंघ सान्निध्य में बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के कुशल संचालन और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विशाल जैन द्वारा श्री क्षेत्र पर 48 दिवसीय श्री भक्तामर स्त्रोत महामंडल विधान पूजन का आयोजन चल रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन (धरियावद) में दिंगबर जैन मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज 19 पिच्छी ससंघ सान्निध्य में बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के कुशल संचालन और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विशाल जैन द्वारा श्री क्षेत्र पर 48 दिवसीय श्री भक्तामर स्त्रोत महामंडल विधान पूजन का आयोजन चल रहा है। इसमें वात्सल्य मूर्ति प्रज्ञाश्रमण बालयोगी मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज द्वारा 48 श्लोकों का वाचन करते हुए मंत्रोच्चार पूर्वक अर्घ्य समर्पित करते हुए तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का गुणानुवाद किया जा रहा है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63965" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240729-WA0005.jpg" alt="" width="517" height="1156" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240729-WA0005.jpg 517w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240729-WA0005-134x300.jpg 134w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240729-WA0005-458x1024.jpg 458w" sizes="(max-width: 517px) 100vw, 517px" />पुण्यार्जन कर रहे श्रावक</strong></p>
<p>दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि दिगंबर जैन मुनि पुण्य सागर जी महाराज ससंघ का साल 2024 का वर्षोयोग समाधिस्थ आर्यिका विशुद्ध मति माताजी की साधना एवं समाधि स्थली नंदनवन (धरियावद) में चल रहा है। इस क्षेत्र पर मुनि श्री संघ का 21 वर्षों पश्चात शुभागमन हुआ और तीर्थ संस्थान को वर्षायोग कराने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। क्षेत्र पर 25 जुलाई को मुनि संघ का मंगल प्रवेश हुआ और वर्षायोग मंगल कलश की स्थापना हुई थी। 26 जुलाई से 11 सितंबर 2024 तक 48 दिवसीय भक्तामर स्त्रोत महामंडल विधान पूजन का धर्म प्रभावना पूर्वक आयोजन चल रहा है। इसमें प्रतिदिन अलग-अलग पुण्यार्जक परिवार पूजन में भाग लेकर पुण्यार्जन कर रहे हैं। प्रतिदिन क्षेत्र पर प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, महाशांतिधारा, नित्य नियम पूजन, विधान पूजन, मुनि श्री के प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है। मुनि श्री के धार्मिक और मार्मिक प्रवचनों का भक्त मंडल बड़ी संख्या में श्रवण कर धर्म लाभ ले रहे हैं। श्रावक-श्राविकाएं आहार और वैयावृत्ति का निरंतर लाभ ले रहे हैं। संघस्थ मुनि श्री महोत्सव सागर जी महाराज की निरंतर उपवास साधना चल रही है। मुनि श्री का रविवार को 14वां उपवास था। इस दिन अष्टमी पर्व के चलते संघस्थ सभी मुनि-आर्यिकाओं के उपवास रहा। कोई भी पिच्छीधारी आहारचर्या के लिए नहीं उठे।</p>
<p><strong>वृद्धों की सेवा करने वाला बुद्धिमान होता है- मुनि पुण्य सागर</strong></p>
<p>वृद्ध लोगों की सेवा करने से बुद्धि, धन, यश, कीर्ति आदि की प्राप्ति होती है। इनकी सेवा करने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। देव, शास्त्र और गुरु के क्षेत्र में की गई सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती है। उक्त विचार दिगंबर जैन मुनि पुण्य सागर जी महाराज ने रविवार को आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि बुद्धि, ज्ञान सभी हमारे मस्तिष्क में भरे पड़े हैं। हमारे मस्तिष्क में सैकड़ों कोशिकाएं हैं। बुद्धि और विचारों का भंडार हमारा मस्तिष्क है। सभी अपने-अपने कर्म के अनुसार बुद्धि लगाते हैं। बुद्धि बड़े लोगों की संगति से आती है और कर्मानुसार मिलती है। हमें थोड़ा पढ़ना और अधिक सोचना चाहिए। इसी तरह कम बोलना और अधिक सुनना चाहिए। यही बुद्धिमान लोगों की पहचान होती है।</p>
<p><strong>भक्तामर के बारे में दिया ज्ञान</strong></p>
<p>इसके पूर्व मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन आचार्य मानतुंग देव द्वारा आज से करीब 1400 वर्षों पहले आदिनाथ तीर्थंकर प्रभु की भक्ति में श्री भक्तामर स्त्रोत के 48 श्लोकों की रचना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मानतुंग देव ने प्रभु की ऐसी भक्ति की, उनके शरीर पर पड़ी समस्त बेड़ियां एक-एक कर टूटती चली गई। तब से लेकर आज तक भक्त सभी यथाशक्ति अपनी भक्ति करते हैं और वृत, उपासना, पूजन, विधान-पूजन आदि करते हैं। श्री मानतुंग देव ने एक-एक अक्षर का संचय कर भक्तामर स्त्रोत के 48 श्लोकों की रचना की है। प्रत्येक श्लोक में 56 अक्षर समाहित हैं। इस प्रकार भक्तामर स्त्रोत में कुल 2688 अक्षर समाहित हैं। मुनि श्री ने सभी उपस्थित भक्तों को &#8216;ॐ ह्रीं नमः&#8217; और &#8216;ॐ ह्रीं अर्हम्&#8217; नमः शांति मंत्र का जाप दिया। धर्मसभा में उपस्थित पत्रकार विक्रम कोठारी और फोटोग्राफर पंकज अग्रवाल का सम्मान भी किया गया।</p>
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		<title>मुनि श्री पुण्य सागर जी ने प्रदान की दीक्षाएं : संयम से चरित्र मोहनीय कर्म के विनाश से दीक्षा के भाव होते हैं </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Jul 2023 08:13:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री पुण्य सागर जी ने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में एक आर्यिका एवं एक क्षुल्लिका दीक्षा दी। 72 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी सुनीता दीदी छाबड़ा गुवाहाटी का दीक्षा उपरांत नूतन नाम 105 आर्यिका श्री स्वर्ण मति किया गया। वहीं 80 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी तारा देवी ऊकावत घाटोल को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। आपका [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री पुण्य सागर जी ने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में एक आर्यिका एवं एक क्षुल्लिका दीक्षा दी। 72 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी सुनीता दीदी छाबड़ा गुवाहाटी का दीक्षा उपरांत नूतन नाम 105 आर्यिका श्री स्वर्ण मति किया गया। वहीं 80 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी तारा देवी ऊकावत घाटोल को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। आपका नूतन नाम सुवर्ण मति माताजी किया गया।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सोनागिर।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी ने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में एक आर्यिका एवं एक क्षुल्लिका दीक्षा दी। 72 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी सुनीता दीदी छाबड़ा गुवाहाटी का दीक्षा उपरांत नूतन नाम 105 आर्यिका श्री स्वर्ण मति किया गया। वहीं 80 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी तारा देवी ऊकावत घाटोल को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की गई। आपका नूतन नाम सुवर्ण मति माताजी किया गया।</p>
<p><strong>सर्वोपरि लक्ष्य संयम साधना</strong></p>
<p>आचार्य श्री अजित सागर जी के शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी ने इस अवसर पर प्रवचन में बताया कि नंग-अनंग तथा 5:30 करोड़ मुनिराज की सिद्ध भूमि पर दो भव्य जीव दीक्षा ले रहे हैं। मानव जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य संयम साधना है। वर्तमान में श्रावकों का सीजन समाप्त हुआ। चातुर्मास में साधुओं का सीजन धर्म प्रभावना का प्रारंभ होता है। संयम से चरित्र मोहनीय कर्म के विनाश से दीक्षा के भाव होते हैं। इसके पूर्व पांडाल के बाहर ध्वजारोहण के बाद आमंत्रित अतिथियों द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया।</p>
<p><strong>किए दीक्षा संस्कार</strong></p>
<p>नृत्य मंगलाचरण किया गया। पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य किशनगढ़, राजस्थान के प्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी, आर के मार्बल एवं सुशीला पाटनी किशनगढ़ तथा सुनीता भागचंद चूड़ीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। पुण्यार्जक परिवार द्वारा मुनि श्री पुण्य सागर जी, तपस्वी मुनि श्री महोत्सव सागर जी एवं मुनि श्री उदित सागर जी को शास्त्र भेंट किए गए। इस अवसर पर धर्म सभा को संहिता सूरी पंडित हंसमुख शास्त्री धरियावद, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संबोधित किया। सुनीता दीदी गुवाहाटी के केशलोच पांडाल में प्रारंभ हुए। परिजनों के एक नेत्र में खुशी के दूसरे नेत्र में दुख के अश्रु सभी को द्रवित कर रहे थे। मुनि श्री पुण्य सागर जी ने उपदेश के बाद समाज, परिजनों,संघ के भैया ,दीदी, साधुओं से दीक्षा की अनुमोदना चाही। इसके बाद सौभाग्यशाली महिलाओ द्वारा चौक पूरण की क्रिया की गई। दीक्षागुरु द्वारा पंच मुष्ठि केश लोचन कर मस्तक और हाथो की शुद्धि के बाद मस्तक, कर हस्तों पर दीक्षा संस्कार किए गए। पुण्यार्जक परिवार द्वारा नूतन आर्यिका माताजी और क्षुल्लिका माताजी को पिच्छी, कमंडल, शास्त्र, कपड़े भेंट किया।</p>
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