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	<title>Muni Shri Pramansagar &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>इस वर्ष भगवान महावीर जयंती 31 को नहीं 30 मार्च को : मुनिश्री सुधासागर एवं मुनि श्री प्रमाणसागर ने दिया मार्गदर्शन </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 07:45:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव प्रति वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष तिथि भ्रम की स्थिति के कारण सरकारी कैलेंडर में 31 मार्च की महावीर जयंती घोषित कर 31 मार्च को ही अवकाश घोषित किया गया। इस साल 30 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव प्रति वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष तिथि भ्रम की स्थिति के कारण सरकारी कैलेंडर में 31 मार्च की महावीर जयंती घोषित कर 31 मार्च को ही अवकाश घोषित किया गया। इस साल 30 मार्च को जयंती मनाई जाएगी। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव प्रति वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष तिथि भ्रम की स्थिति के कारण सरकारी कैलेंडर में 31 मार्च की महावीर जयंती घोषित कर 31 मार्च को ही अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन जैन परंपराओं, जैन पंचांग एवं जैन कैलेंडरों के अनुसार महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव सोमवार 30 मार्च को ही मनाया जाएगा। संपूर्ण विश्व में मनाया जाने वाला भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के संदर्भ में तिथि भ्रम के कारण महावीर भगवान के अनुयायियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि जन्म कल्याणक महोत्सव 30 को मनाया जाएगा या 31 मार्च को मनाया जाएगा।</p>
<p>भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के संदर्भ में जिज्ञासा समाधान में पूछे गए सवाल पर मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने तिथि भ्रम के संदर्भ में मार्गदर्शन देते हुए बताया कि इस वर्ष महावीर जयंती सोमवार 30 मार्च को मनाई जाएगी। भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। यह तिथि इस वर्ष 30 मार्च को प्रातः 7 बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन 31 मार्च को प्रातः 7 बजे के लगभग होगा। उसके बाद चौदस तिथि लग जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उदयातिथि मानी जाती है यानि कि सूर्याेदय के समय जो तिथि होती है, पूरे दिन वही तिथि मानी जाती है। इस मान से 30 मार्च को तेरस तिथि नहीं है। 31 मार्च को सूर्याेदय के समय तेरस है, लेकिन वह केवल सुबह 7 बजे तक है और महावीर कल्याणक के कार्यक्रम सुबह 7 बजे तक हो नहीं सकते, सभी आयोजन 7 बजे के बाद ही होना संभव होगा। 30 मार्च को सूर्याेदय के बाद प्रातः 7 बजे तेरस है और पूरे दिन रहेगी। इसलिए सोमवार 30 मार्च को ही भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाना चाहिए। मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने भी बताया कि इस वर्ष तिथि भ्रम के कारण भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के संदर्भ में संशय बना हुआ है। 31 मार्च को तेरस तिथि केवल प्रातः 7 बजे तक है, उसके बाद चौदस तिथि लग जाएगी लेकिन, सोमवार 30 मार्च को प्रातः 7 बजे से पूरे दिन तेरस तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए हम सभी को एक जुटता के साथ जैन परम्पराओं, जैन ज्योतिष एवं जैन कैलेंडर के अनुसार संपूर्ण विश्व में भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 31 को न मनाकर सोमवार 30 मार्च को ही मनाया जाना चाहिए।</p>
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		<title>इस वर्ष भगवान महावीर जयंती 31 को नहीं 30 मार्च को : मुनिश्री सुधासागर एवं मुनि श्री प्रमाणसागर ने दिया मार्गदर्शन </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:43:29 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव प्रति वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष तिथि भ्रम की स्थिति के कारण सरकारी कैलेंडर में 31 मार्च की महावीर जयंती घोषित कर 31 मार्च को ही अवकाश घोषित किया गया। इस साल 30 मार्च को जयंती मनाई जाएगी। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव प्रति वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष तिथि भ्रम की स्थिति के कारण सरकारी कैलेंडर में 31 मार्च की महावीर जयंती घोषित कर 31 मार्च को ही अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन जैन परंपराओं, जैन पंचांग एवं जैन कैलेंडरों के अनुसार महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव सोमवार 30 मार्च को ही मनाया जाएगा। संपूर्ण विश्व में मनाया जाने वाला भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के संदर्भ में तिथि भ्रम के कारण महावीर भगवान के अनुयायियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि जन्म कल्याणक महोत्सव 30 को मनाया जाएगा या 31 मार्च को मनाया जाएगा।</p>
<p>भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के संदर्भ में जिज्ञासा समाधान में पूछे गए सवाल पर मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने तिथि भ्रम के संदर्भ में मार्गदर्शन देते हुए बताया कि इस वर्ष महावीर जयंती सोमवार 30 मार्च को मनाई जाएगी। भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। यह तिथि इस वर्ष 30 मार्च को प्रातः 7 बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन 31 मार्च को प्रातः 7 बजे के लगभग होगा। उसके बाद चौदस तिथि लग जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उदयातिथि मानी जाती है यानि कि सूर्याेदय के समय जो तिथि होती है, पूरे दिन वही तिथि मानी जाती है। इस मान से 30 मार्च को तेरस तिथि नहीं है। 31 मार्च को सूर्याेदय के समय तेरस है, लेकिन वह केवल सुबह 7 बजे तक है और महावीर कल्याणक के कार्यक्रम सुबह 7 बजे तक हो नहीं सकते, सभी आयोजन 7 बजे के बाद ही होना संभव होगा। 30 मार्च को सूर्याेदय के बाद प्रातः 7 बजे तेरस है और पूरे दिन रहेगी। इसलिए सोमवार 30 मार्च को ही भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाना चाहिए। मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने भी बताया कि इस वर्ष तिथि भ्रम के कारण भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के संदर्भ में संशय बना हुआ है। 31 मार्च को तेरस तिथि केवल प्रातः 7 बजे तक है, उसके बाद चौदस तिथि लग जाएगी लेकिन, सोमवार 30 मार्च को प्रातः 7 बजे से पूरे दिन तेरस तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए हम सभी को एक जुटता के साथ जैन परम्पराओं, जैन ज्योतिष एवं जैन कैलेंडर के अनुसार संपूर्ण विश्व में भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 31 को न मनाकर सोमवार 30 मार्च को ही मनाया जाना चाहिए।</p>
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		<title>जो दिख रहा है वह सत्य नहीं, जो देख रहा है वह सत्य है: मुनि श्री प्रमाणसागर ने कहा- जीवन की असली सच्चाई यह है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित  </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 13:29:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से दूर बना रहता है। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; भोपाल। मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से दूर बना रहता है। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से दूर बना रहता है। उन्होंने प्रश्न किया-किसके साथ राग कर रहे? किसके साथ द्वेष? हम भोगों के पीछे भागते हैं और भोक्ता की उपेक्षा करते हैं। मुनि श्री ने कहा कि संत सदैव दृश्य की नहीं, दृष्टा की ओर देखने की प्रेरणा देते हैं। भोग की ओर नहीं, भोक्ता की ओर देखो। शब्द की ओर नहीं, श्रोता की ओर देखो। अनुभव की ओर नहीं, अनुभोक्ता को पहचानो। उन्होंने चार सूत्र दिए-जानो, मानो, ध्याओ और पाओ। सत्य पर बल देते हुए कहा-सत्य कथ्य नहीं, अकथ्य है। सत्य बोलने की बात नहीं, यह तो अनुभव और साधना का विषय है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-89364" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045.jpg" alt="" width="1600" height="1065" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-990x659.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />कविता के माध्यम से सत्य का बोध </strong></p>
<p>मुनि श्री ने मिश्रीलाल जैन की कविता अरिहंत नाम सत्य है, सिद्ध नाम सत्य है सुनाकर समझाया कि जीवन की असली सच्चाई यह है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है। उन्होंने कहा-“न कुछ लेकर आए, न कुछ लेकर जाएंगे। जैसा करेंगे, वैसा भरेंगे। मेरा केवल ‘मैं’ हूँ, बाकी सभी संबंध संयोग हैं। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि</p>
<p>“आप अकेला अव तरे, मरे अकेला होय,</p>
<p>क्या कहूँ इस जीव को, साथी सगा न कोय।”</p>
<p><strong>जीवन की अनित्यता पर बल</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा-“बाल पक गए, कमर झुक गई, कितनी बार अस्पताल और श्मशान देख आए, फिर भी मोह-माया नहीं छूटा। जब तक जीवन की सच्चाई को अंतर्मन से स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक जीवन की दिशा और दशा नहीं बदल सकती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब मनुष्य आत्मा के स्वभाव को पहचान लेता है, तब उसकी प्रवृत्ति में सरलता, परिणामों में निर्मलता, भावों में उज्जवलता और व्यवहार में शालीनता आ जाती है। अविनाश जैन ने बताया कि मंगलवार को उत्तम संयम और बुधवार को धूप दशमी के अवसर पर उत्तम त्याग पर विशेष प्रवचन होंगे। साथ ही “गुणायतन” के संदर्भ में भी जानकारी दी जाएगी। प्रतिदिन सायंकालीन शंका समाधान में श्रावकों की सभी शंकाओं का समाधान मुनि श्री के मुखारविंद से हो रहा है।</p>
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		<title>दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा का हुआ आगाज : जिनबिम्ब स्थापना, कलशारोहण, विश्वशांति महायज्ञ होंगे  </title>
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		<pubDate>Thu, 22 May 2025 10:48:48 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन]]></category>
		<category><![CDATA[श्री सम्मेदशिखर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन श्री सम्मेदशिखर में दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिम्ब स्थापना तथा कलशारोहण महा महोत्सव 22 मई गुरुवार को आरंभ हुआ। 23 मई शुक्रवार को इसका समापन होगा। श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन श्री सम्मेदशिखर में दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिम्ब स्थापना तथा कलशारोहण महा महोत्सव 22 मई गुरुवार को आरंभ हुआ। 23 मई शुक्रवार को इसका समापन होगा। <span style="color: #ff0000">श्री सम्मेदशिखर से पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>श्री सम्मेदशिखर/कोडरमा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन श्री सम्मेदशिखर में दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिम्ब स्थापना तथा कलशारोहण महामहोत्सव 22 मई गुरुवार को हुआ। 23 मई शुक्रवार को इसका समापन होगा। यह महा महोत्सव मुनि श्री समतासागरजी महाराज, मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, आर्यिकारत्न गुरमति माताजी, आर्यिकारत्न दृढ़मति माताजी ससंघ तथा ऐलक श्री निश्चयसागर महाराज ऐलक श्री निजानंद सागर महाराज क्षु. श्री संयम सागर महाराज के संघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य वाल ब्र.अशोक भैया एवं इंदौर आश्रम के अधिष्ठाता अनिल भैया के निर्देशन में किया जा रहा है।</p>
<p><strong>विविध विधानों से सुवासित रहा माहौल </strong></p>
<p>राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं गुणायतन के मुख्य जन संपर्क अधिकारी वीरेंद्र जैन छाबड़ा ने बताया गुरुवार को प्रातः 5.45 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। गुणायतन स्थित जिनालय में होकर शोभायात्रा ‘श्री पावनधाम जिनालय’ श्री सम्मेदाचल विकास कमेटी के कार्यक्रम स्थल तक पहुंची एवं यहां पर 7 बजे ध्वजारोहण, जाप्य अनुष्ठान, मंडप शुद्धि, नवीन वेदी शुद्धि, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन हुआ। मुनिसंघ आर्यिका संघ के मांगलिक देशना भी हुई। इस शुभ मांगलिक अवसर पर गुणायतन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला, कार्याध्यक्ष एनसी जैन, महामंत्री अशोक पांडया, सीईओ सुभाष जैन, एनएल जैन, प्रद्युमन जैन, शैलेंद्र जैन, सिद्दार्थ जैन, कपूर जैन, निर्मल जैन सहित समस्त पदाधिकारियों ने समस्त श्रेष्ठी महानुभावों को आमंत्रित कर कार्यक्रम में पधारने का अनुरोध किया है। सभी अतिथियों के आवास एवं भोजन व्यवस्था गुणायतन में है।</p>
<p><strong>मूकमाटी महाकाव्य संग्रह है</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातः गुणायतन मंदिर परिसर में मुनि श्री समतासागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागरजी की अष्टद्रव्य से पूजन किया गया तथा मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा एवं मांगलिक प्रवचन हुए। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि शिशु को पोषक तत्व देना जरूरी होता है, तभी शिशु की काया बलिष्ठ और स्वस्थ होती है। ऐसे ही किसान अपने खेत में बीज को बो कर के उसमें खाद-पानी देता है तब अंकुरण के बाद जो फसल आती है वह पुष्ट होकर आती है। फसल आने के पहले अपने लहलहाते खेत को देखकर किसान को जो आनंद का सुःखद अहसास होता है, वह किसान ही समझ सकता है क्योंकि, उसका परिश्रम पनप रहा है और जब उसकी फसल खेत से घर पर आ जाती है तो उसके चेहरे की चमक बढ़ जाती है। मुनि श्री ने कहा कि इस संदर्भ में आचार्य गुरुदेव किसान कि इस सफलता को फिसलने पर फसल शब्द से संबोधित करते हैं। आचार्य श्री शब्दों के जादूगर थे। शब्दों का ऑपरेशन कर उसे जोड़-तोड़ कर एक नया अर्थ निकाल देते थे। ऐसे शब्दों के प्रयोग से ही आचार्य श्री की साहित्य श्रृंखला निकली है। उसमें प्रमुख हिंदी भाषा में मूकमाटी महाकाव्य संग्रह है। जिसमें ऐसे शब्दों का तथा हायकू का सम्मिश्रण किया गया है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। आचार्य श्री शब्दों के पारखी एवं सारगर्भित प्रयोग करते थे।</p>
<p><strong>दान धर्म करना तीर्थयात्रा कराना आसान है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने ऐसे कई काव्य संग्रह को लिखा। जब पहली किताब श्रमण संगम वर्ष 1975-76 कोलकाता के कल्याणमल झांझरी ने प्रकाशित कराई, जो आज 10 प्रतिमाओं के साथ अपनी साधना को कर रहे है। मुनि श्री ने 42 वर्ष पूर्व की स्मृतियों को संजोते हुए उस समय के समाज प्रमुखों का नाम लिया और कहा कि ये लोग राजस्थान से लेकर बुंदेलखंड तक पीछे लगे रहे। मुनि श्री ने कहा कि दान धर्म करना तीर्थयात्रा कराना आसान है लेकिन, खुद संयम का पालन कर परिवार को संयमित करना बहुत कठिन होता है। उन्होंने कोलकाता के श्रावकों की तारीफ करते हुए कहा कि इनका पूरा ग्रुप इधर-उधर की बातें न करते हुए अपने पूरे समय का सदुपयोग करते थे। मुनि श्री ने अपनी यादों को ताजा करते 42 साल पूर्व की उन यादों को साझा किया एवं ऐलक दीक्षा से लेकर मुनि दीक्षा तक के कई पलों को स्मरण कर उन सभी के परिवारों का नाम सहित उल्लेख कर आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
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