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	<title>Muni Shri Praman Sagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Muni Shri Praman Sagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>बुढा़र के पंचकल्याणक महामहोत्सव में मुनिराजों का मंगल प्रवेश : जयकारों और मंगल ध्वनि के साथ हुई संघ की अगवानी  </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 13:41:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>पंचकल्याणक की शुरुआत हो, उसके पूर्व यदि मंगल घड़ियां घट जाए तो वह सोने में सुहागा के रूप में घटित हो जाया करता है। बुधवार से श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के पंचकल्याणक मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज, मुनि श्री प्रसाद सागरजी महाराज, मुनि श्री शीतलसागरजी महाराज, मुनि श्री संधानसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रातः 7.30 बजे घटयात्रा के साथ प्रारंभ होगा। <span style="color: #ff0000">शहडोल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>शहडोल।</strong> पंचकल्याणक की शुरुआत हो, उसके पूर्व यदि मंगल घड़ियां घट जाए तो वह सोने में सुहागा के रूप में घटित हो जाया करता है। बुधवार से श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के पंचकल्याणक मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज, मुनि श्री प्रसाद सागरजी महाराज, मुनि श्री शीतलसागरजी महाराज, मुनि श्री संधानसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रातः 7.30 बजे घट यात्रा के साथ प्रारंभ होगा। उसके पूर्व बेला में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्यों का मंगल मिलन मंगलवार के दिन हुआ। मुनि श्री प्रसादसागरजी महाराज एवं मुनिश्री शीतलसागर महाराज, जो शहडोल में विराजमान थे। वे बुढा़र समाज के आमंत्रण एवं मुनि श्री के वात्सल्य को स्वीकार करते हुए श्री शांतिनाथ भगवान के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में पधारे तो उपस्थित जनसमुदाय का उत्साह चरम पर था। उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज की जय जयकार करते हुए गगनभेदी नारों से वातावरण को धर्ममय कर दिया। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया एवं अशोक भैया ने मंच संचालन किया।</p>
<p><strong>योग और संयोग बने कि दो की जगह चार मुनिराज जुड़ गए </strong></p>
<p>धर्म सभा में मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने कहा कि आप सभी लोग आज बहुत उत्साहित और आनंदित हैं। उत्साह और आनंद को बढ़ाने के लिए ऐसे आलंबन को अपनाइए। जिससे आपका आनंद और उत्साह दुगना हो सके तथा ऐसे निमित्तों से बचना है जो आपके आनंद और उत्साह को भंग करे। उन्होंने कहा कि हमने अहोभाव, अहंभाव, भक्ति भाव और मुक्तिभाव इन चारों बातों को अपनाना है। मुनि श्री ने बुढा़र वालों के प्रबल पुण्य की चर्चा करते हुए कहा कि इतने बड़े और विशाल जिनालय के पंचकल्याणक भव्यातिभव्य तरीके से कराने का योग और संयोग बने कि दो की जगह चार मुनिराज जुड़ गए हैं तो चार चांद तो लगना ही है।</p>
<p><strong>आत्मोत्थान और जीवन का कल्याण होना चाहिए</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मुझे बहूत प्रसन्नता है कि मुनिद्वय ने बुढा़र समाज और हमारी बात को स्वीकार करते हुए इस आयोजन में आए और प्रयोजन रच गया। उन्होंने आयोजन के प्रयोजन को सामने रखते हुए कहा कि हमारा प्रयोजन कार्यक्रम की संपन्नता नहीं, हमारा प्रयोजन आत्मबोध के साथ आत्मोत्थान और जीवन का कल्याण होना चाहिए। पंचकल्याणक में आप लोग देखेंगे कि जो मूर्ति है वह भगवान बन जाएगी। यह पाषाण से भगवान की यात्रा है, जो मूर्ति पाषाण से भगवान बन सकती है तो हम अपनी चेतना का उत्थान कर आत्मा से परमात्मा बन सकते हैं।</p>
<p><strong>ईश्वरीय तत्व को पाने के लिये पुरुषार्थ करना होगा</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि शास्त्रों में विधान है कि इस मूर्ति के कान में हम मंत्र फंूकेंगे तो मूर्ति भगवान बन जाएगी लेकिन, एक भी ऐसा विधान नहीं है कि हम आपके कानों में मंत्र फूंकें और तुम इंसान बन जाओ। अगर ऐसा होता तो हम प्रवचन के स्थान पर सभी को पकडकर कानों में मंत्र फूंकते, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। फिर भी प्रत्येक आत्मा परमात्मा बन सकता है। मुनि श्री ने कहा उस ईश्वरीय तत्व को पाने के लिये पुरुषार्थ करना होगा। इस अवसर पर निर्यापक मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज ने कहा कि तत्वार्थ सूत्र में पांच प्रकार के ज्ञान बताए है। मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, परोक्ष है</p>
<p>और अवधि, मनःपर्यय और केवलज्ञान ये प्रत्यक्ष है। इसके अलावा कोई भी ज्ञान प्रमाण नहीं है।</p>
<p><strong>हम दो संघ नहीं सभी एक ही गुरु के शिष्य </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि हम दो संघ नहीं सभी एक ही गुरु के शिष्य हैं। राग से वैराग्य की इस यात्रा को हम सभी मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सानिध्य में इस पंचकल्याणक महामहोत्सव को संपन्न कराएंगे। इस अवसर पर मुनिश्री शीतलसागरजी महाराज ने कहा कि मुनि श्री से हमारा विदिशा प्रवास में 1992 से कनेक्शन है। हमें उनकी 10 माह तक सेवा करने का अवसर मिला था और जब मुनि श्री का आदेश बुढा़र में आने का मिला तो मना करने का प्रश्न ही नहीं उठता था।</p>
<p><strong>धर्म का वास्तविक अर्थ अपने भीतर के विकारों को पहचानना </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर उसे व्यवहारिक जीवन से जोड़ा। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि धर्म का वास्तविक अर्थ अपने भीतर के विकारों को पहचानना और उन्हें जीतना है। उनकी वाणी में गहराई भी है और सरलता भी है तभी तो इतने जटिल दार्शनिक विषयों को इतने सहज ढंग से समझाते हैं। सामान्य व्यक्ति भी आत्मा, कर्म और मोक्ष जैसे गूढ़ विषयों को समझ सके। मुनि श्री ने सदैव युवाओं को नैतिकता,अनुशासन और चरित्र निर्माण की प्रेरणा दी है।</p>
<p><strong>2 मार्च तक चलेगा महोत्सव</strong></p>
<p>मुनि संघ के प्रवक्ता अविनाश जैन एवं न्यास के प्रचार मंत्री गौरव नारद ने बताया मुनिश्री का कहना है कि आधुनिकता को अपनाइए, परंतु अपनी संस्कृति और संस्कारों को मत छोड़िए। उन्होंने हमेशा इस बात पर बल दिया कि क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह ही मनुष्य के वास्तविक शत्रु हैं। यदि व्यक्ति इन दोषों का ेजीत लंे तो संसार में कोई भी उसे पराजित नहीं कर सकता। 25 फरवरी से 2 मार्च तक श्री शांतिनाथ जिनालय के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव प्रारंभ होने जा रहा है। प्रातःकाल घटयात्रा मुनिसंघ के सानिध्य में प्रारंभ होगी, जो कि नगर परिक्रमा के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेगी। ध्वजारोहण एवं मंडल उदघाटन के साथ मंडप शुद्धि एवं पात्र शुद्धि के साथ पंचकल्याणक की मांगलिक क्रिया प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया एवं अभय भैया, सह प्रतिष्ठा चार्य अमितशास्त्री के निर्देशन में होगी।</p>
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		<title>मुनिसंघ के सान्निध्य में एक नवंबर को झिरनो में गणधर वलय विधान होगा: मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बताया छोटे दान का बड़ा महत्व  </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 13:27:10 +0000</pubDate>
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<p><strong>गरीबी की दशा में यदि व्यक्ति दान करता है तो उसका प्रभाव असाधारण पड़ता है। यह जरुरी नहीं कि संपन्न व्यक्ति ही दान करे। दान देने के लिए गरीबी और आर्थिक संपन्नता के स्थान पर उदारता का होना आवश्यक है। यह यह उदगार गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> गरीबी की दशा में यदि व्यक्ति दान करता है तो उसका प्रभाव असाधारण पड़ता है। यह जरुरी नहीं कि संपन्न व्यक्ति ही दान करे। दान देने के लिए गरीबी और आर्थिक संपन्नता के स्थान पर उदारता का होना आवश्यक है। यह यह उदगार गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिश्री 31 अक्टूबर को एमए सिटी (मेनिट) महाविधालय में छात्र-छात्राओं को संबोधित करेंगे एवं 1 नवंबर को मुनिसंघ का दिगंबर जैन मंदिर झिरनों में पदार्पण होगा तथा यहां गणधर वलय विधान किया जा रहा है। मुनि श्री ने प्रातःकालीन धर्म सभा में कहा कि जीवन में चार चीजें अत्यंत दुर्लभ है दरिद्र का दान, समर्थ की क्षमा, यौवन अवस्था में इंद्रिय निग्रह, सत्वशील का तप।</p>
<p>मुनिश्री प्रमाणसागरजी ने सबसे पहले दान की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जरुरी नहीं कि संपन्न व्यक्ति ही दान करे उन्होंने कहा कि दान के लिए गरीबी और आर्थिक संपन्नता के स्थान पर उदारता जरूरी है। देखा गया है कि आर्थिक रूप से दरिद्र व्यक्ति कदाचित रूप से दान कर देता है लेकिन, जो आर्थिक रूप से मजबूत है लेकिन, वैचारिक रूप से दरिद्र है वह तो सपने में भी दान नहीं कर सकता। ऐसा व्यक्ति धन से समृद्ध होते हुए भी उस गरीब व्यक्ति की तुलना में काफी कृपण है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे अनेक लोगों को देखा जिनके जीवन की शुरुआत गरीबी की दशा से हुई लेकिन, उनके छोटे से दान से आज समृद्धि के शिखर पर पहुंच गए। उन्होंने वर्ष 2009 में श्री सम्मेदशिखर जी प्रवास की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दशलक्षण पर्व के शिविर में सोला का भोजन बनाने आई एक बहन की इच्छा गुणायतन मंदिर शिलान्यास में एक शिला रखने की हुई। फलस्वरूप उसने अपनी पायल देने का भाव रखा। कमेटी की ओर से जब प्रस्ताव हमारे पास आया तो हमने कहा कि ऐसी बहन का तो मंच पर सम्मान करना चाहिए। सवाल उनकी राशि का नहीं। सवाल उसकी भावना का है। अल्प समर्थ होते हुए भी किया गया दान बड़े-बड़े दानियों को भी आश्चर्य में डाल देता है।</p>
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		<title>कर्म अच्छे हो या बुरे उसका फल भोगना जरूर होता है: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कर्म फल की व्याख्या की  </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 10:19:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। भोपाल अवधपुरी से पढ़िए, यह खबर&#8230; भोपाल अवधपुरी। बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल अवधपुरी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल अवधपुरी।</strong> बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले के डकैत डकैती डालने जाते थे और मन्नत मानते थे कि यदि अच्छी डकैती हाथ लगी तो मंदिर में घंटा चढ़ाएंगे। मुनि श्री ने कहा कि बताइए अपने बुरे काम में भगवान को भी शामिल कर लिया? ऐसे ही आजकल कोई व्यक्ति गलत कार्य करके धन को कमाता है और खूब दान देता है तो क्या आप लोग इसे अच्छा कर्म कहेंगे? मुनि श्री ने कहा कि भले ही आप लोग दान मत दो चलेगा लेकिन, किसी के घर डाका डालकर किसी का दिल मत दुखाओ। जैसी करनी बैसी भरनी यह कहावत तो आप लोगों ने सुनी होगी।</p>
<p><strong>जैसा तुम करोगे वैसा तुम भरोगे</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि एक आदमी मरा तो उसका लेखा जोखा देखा गया तो उसके सब काले कारनामे थे तो उससे पूछा गया कि तुमने अपनी जिंदगी में कोई अच्छा कार्य किया हो तो बताइये? उस आधार पर स्वर्ग भेजा जा सकता है। उसने बहूत याद किया लेकिन, उसने कोई अच्छा कार्य किया ही नहीं था तो बताए क्या? उसे याद आया बचपन में एक बार चवन्नी का दान किया था। वह भी एक की अठन्नी चुराकर तो चित्रगुप्त ने कहा कि चोरी का माल दान करके स्वर्ग में कोई जगह नहीं है। हर व्यक्ति चाहता है, उसके जीवन में कोई बुरा प्रसंग न घटे, सब कुछ अच्छा अच्छा हो लेकिन, कर्म सिद्धांत कहता है कि जैसा तुम करोगे वैसा तुम भरोगे। घर आंगन में यदि बबूल का पेड़ लगाया है तो उसमें बबूल की कांटेदार फलियां ही आएंगी। उसमें मीठे-मीठे फल नहीं लग सकते।</p>
<p><strong>सभी अनुकूलताएं मिली उसे आत्महित में लगाएं</strong></p>
<p>उसी प्रकार जीवन में कुछ अच्छा पाना चाहते हो तो अपने द्वारा किए जा रहे कार्यों की खुद समीक्षा करो। अपनी आत्मा का विश्लेषण करके देखो और निर्णय करो कि मैंने अभी तक जो भी कार्य किए हैं। उनमें से कितने कार्य अच्छे किए हैं? मुनि श्री ने कहा कि अनुकूलताएं पाने के बाद भी जो अपनी आत्मा का अहित कर रहा है। क्या आप उसे अच्छा कहोगे? लोग दूसरों के प्रति बुरा कम करते है। खुद के प्रति बुरा ज्यादा करते हैं और विडंबना यह है कि उसे बुरा मानते ही नहीं। ऐसे लोग कभी भी अपनी आत्मा का हित नहीं कर सकते, जो अपनी आत्मा का हित नहीं कर सकता। वह दूसरे की आत्मा का हित भी नहीं कर सकता। मुनि श्री ने कहा कि कर्म के संयोग से अच्छा शरीर पाया और सभी अनुकूलताएं मिली उसे आत्महित में लगाएं। आत्महित का ध्यान रखने वाला ही परहित का कार्य कर सकता है। अपने आपको त्याग संयम और भगवान की आराधना से जोड़ें। यह जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी।</p>
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		<title>भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव पर साधुओं का वार्षिक प्रतिक्रमण : विधिपूर्वक चार माह तक रुकने का जो संकल्प लिया था उस चातुर्मास का होगा निष्ठापन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/annual_pratikraman_of_sadhus_on_the_occasion_of_nirvana_mahotsav_of_lord_mahavira/</link>
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		<pubDate>Mon, 20 Oct 2025 12:49:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित अन्य साधुओं का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;  भोपाल (अवधपुरी)। नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित अन्य साधुओं का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> भोपाल (अवधपुरी)</strong>। नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित क्षुल्लक श्री आदरसागरजी,क्षुल्लक श्री समादरसागर जी,क्षुल्लक श्री चिद्रूपसागर जी,क्षुल्लक श्री स्वभावसागर जी, क्षुल्लक श्री सुभगसागरजी महाराज का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। ज्ञातव्य रहे कार्तिक बदी त्रयोदशी को भगवान महावीर योग निरोध कर चुके थे एवं पावापुरी के सरोवर में कमल आसन पर कार्तिक अमावस्या को प्रातःकालीन बेला में निर्वाण पद की प्राप्ति हुई थी एवं संध्याकाल में उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवल्य ज्ञान प्राप्त हो गया था। मुनि श्री ने कहा कि जैसे आप लोगों ने धूमधाम के साथ चार माह पूर्व चातुर्मास की स्थापना की थी। उसी उत्साह के साथ पूरी जैन समाज चातुर्मास निष्ठापन में भी भाग लें। आप सभी अपने-अपने जिनालयों में ऐसी व्यवस्था बना लें कि सभी 9 बजे तक अवधपुरी आ सके और भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव सामूहिक रूप से मना सकें।</p>
<p><strong>अवधपुरी में निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया वार्षिक प्रतिक्रमण के साथ आज चतुर्दशी को संघ का उपवास रहा। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एवं विद्यासागर इंस्टीट्यूट के समस्त पदाधिकारियों तथा चातुर्मास मंगल कलश के चक्रवर्ती एवं सभी नवरत्न परिवार ने भोपाल के सभी दिगंबर जैन मंदिर एवं पंचायत कमेटी के सभी सदस्यों से मंगलवार को प्रातःकाल भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव शुरू हो जाएगा एवं ठीक नौ बजे अवधपुरी में निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा। आप सभी ने जैसा सहयोग चातुर्मास स्थापना पर दिया था। उसी अनुरूप सभी समाज बंधुओं के समक्ष विधिपूर्वक चार माह तक रुकने का जो संकल्प लिया था। उस संकल्प का विधिपूर्वक निष्ठापन कार्तिक अमावस्या को होगा।</p>
<p><strong>निर्वाण लाड़ू बनाते समय शुद्धता का ध्यान रखे</strong></p>
<p>मुनि श्री ने निर्वाण लाड़ू बनाते समय शुद्धता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आजकल श्रम बचाने के लिए बाजार का रेडीमेड लाड़ू आर्डर कर देते हैं। उन्होंने सभी मंदिर कमेटियों को निर्देशित किया कि अशुद्धि पूर्वक बना लाडू चढ़ाने योग्य नहीं होता और जो देर द्रव्य से बना लाडू है वह सिर्फ चढ़ाने के लिए ही काम में लें। आजकल मंदिर कमेटियां बूंदी के जो लाड़ू बनवा रही है, उनको भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p><strong>मनुष्य श्रमशील रहेगा तो जीवंतता और ताजगी बनी रहेगी</strong></p>
<p>मुनि श्री ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रवचन या धर्मोपदेश भगवान की वाणी के अनुरुप होना चाहिए। धर्मोपदेश में आकर्षण लाना बुरी बात नहीं लेकिन, उस आकर्षण में उसकी मौलिकता खंडित नहीं होना चाहिए।</p>
<p>मुनि श्री ने वर्तमान समय में मशीनरी करण पर भावना व्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य जब तक श्रमशील रहेगा उसमें जीवंतता और ताजगी बनी रहेगी। आजकल घंटों का काम मिनटों में होने लगा है। लाखों का काम एक ही व्यक्ति कर रहा है। वह भी कुछ पलों में हालांकि यह जो चीजें है। वह समय गत बदलाव है। इस विषय पर कहने से कुछ नहीं होगा लेकिन, इस बात पर सभी का ध्यान आकर्षित होना चाहिए कि इससे मनुष्य श्रम शून्य होकर जड़ता को प्राप्त होगा।</p>
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		<title>णमोकार महामंत्र गुणवाचक है इसका कोई देवता नहीं: मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने णमोकार महामंत्र की शक्तियों से कराया परिचय  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 09:21:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कबच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। भोपाल से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कबच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। दुनिया में जितने भी मंत्र है। उसमें उनका कोई न कोई आराध्य देव है, लेकिन णमोकार महामंत्र ही एक ऐसा मंत्र है जिसका कोई देवता नहीं। इसके पांचों पद अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधू हैं, जो व्यक्ति वाचक नहीं, गुणवाचक हैं। इसमें कोई बीजाक्षर नहीं है। यह अनादि सिद्धमंत्र है, इसे सिद्ध करने की भी आवश्यकता नहीं। मात्र आपको जपने की देरी है। यह शांति प्रदाता, पौष्टिक मंत्र है। इस मंत्र के जपने से किसी का अहित नहीं हो सकता। यह मंत्र कभी भी मारन उच्चाटन, विद्वेष में काम नहीं करता। हां यदि कोई आपके ऊपर मूठ या मारण विद्या का उपयोग करता है तो उससे आपका बचाव करता है।</p>
<p><strong>मारक विद्या को भी बेअसर करने की क्षमता है णमोकार मंत्र में</strong></p>
<p>उन्होंने एक सत्य घटना सुनाते हुए कहा कि एक बार कोई जैन पंडित रेल्वे में सफर कर रहे थे। उसी ट्रेन में मारक विद्या में सिद्ध बाबा भी सफर कर रहे थे। उन्होंने सभी यात्रियों को डराया तथा धमकाया। सभी उनके वश में आ गए लेकिन, जो जैन पंडित ने उनकी बात नहीं मानी। जिससे उन्होंने क्रोधित होकर उनपर मारक विद्या का उपयोग किया पंडित जी मन ही मन णमोकार महामंत्र का स्मरण कर रहे थे। उन पर उस मारक विद्या का कोई असर नहीं हुआ। हां, वह बाबा जरूर पसीना-पसीना हो गया। थोड़ी देर बाद वह उठा और वाशरुम गया, जब वह नहीं लौटा तो देखा वह बाथरूम में ही ढेर पड़ा था। कहते है कि मारक विद्या एक बार जब निकल जाती है तो वह यदि सामने वाले के प्राण न पाए तो जिसने उस विद्या का उपयोग किया है उसी के प्राण ले लेती है।</p>
<p><strong>4 से 12 अक्टूबर तक श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान </strong></p>
<p>मुनि श्री ने णमोकार महामंत्र की सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए कहा कि यह मंत्र को किसी भी समय किसी भी अवस्था में तथा किसी भी क्रम में जाप दे सकते है। कहीं भी पढ़ सकते हैं। यह आनपूर्वी नहीं है। इसको शब्द रूप में अर्थात अकेले अ.सि.आ.उ.सा. का उच्चारण करने से भी णमोकार महामंत्र का उच्चारण हो जाता है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि आगामी 4 से 12 अक्टूबर तक संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना मुनि श्री के मुखारबिंद से प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध बीजाक्षरों से युक्त मंत्रों के साथ प्रारंभ होगी। जिसकी संपूर्ण तैयारियां हो चुकी है। जिसमें संपूर्ण भारत के श्रावक श्रेष्ठी भाग लेंगे एवं इस चातुर्मास की यह वृहद आखरी पूजा होगी। विधानाचार्य बाल ब्र.अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी रहेंगे।</p>
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		<title>सिद्ध और अतिशय क्षेत्र की वंदना कर मुनिराजों का लिया आशीष : मप्र, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक प्रांतों में की धर्म प्रभावना </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Sep 2025 15:12:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रुत तीर्थ श्रुतधाम बीना के संस्थापक संदीप सरल भैया एवं संयम जैन सिलवानी ने 19 से 23 सितंबर तक अनेक सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र की वंदना करते हुए अनेक धर्म सभाओं को संबोधित किया एवं विविध आचार्यों, मुनिसंघों के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। बांसवाड़ा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230; बांसवाड़ा। श्रुततीर्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रुत तीर्थ श्रुतधाम बीना के संस्थापक संदीप सरल भैया एवं संयम जैन सिलवानी ने 19 से 23 सितंबर तक अनेक सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र की वंदना करते हुए अनेक धर्म सभाओं को संबोधित किया एवं विविध आचार्यों, मुनिसंघों के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना के संस्थापक संदीप सरल भैया एवं संयम जैन सिलवानी ने 19 से 23 सितंबर तक अनेक सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र की वंदना करते हुए अनेक धर्म सभाओं को संबोधित किया एवं विविध आचार्यों, मुनिसंघों के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। 18 सितंबर को भोपाल में विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर जी महाराज के दर्शन कर श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना में निर्माणाधीन मुक्ताकाश समवशरण जिनालय के कार्य की प्रगति की जानकारी दी एवं साहित्य भेंट किया। इसी दिन रात्रि में 8 से 9.30 तक श्री दिगंबर जैन मंदिर इंदिरा नगर में प्रवचन किए। धर्म सभा के दौरान भोपाल निवासी निश्चल जैन, रश्मि जैन एवं कमल बाबू जैन ने श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना के विषय में उपस्थित जन समूह को जानकारी दी। 20 सितंबर को प्रातः 8 बजे सामूहिक रूप से अभिषेक शांतिधारा करवाई। यहां से हवाई मार्ग द्वारा बैंगलुरू को रवाना हुए।</p>
<p>वहां से रात्रि 9 बजे श्री श्रवणबेलगोला क्षेत्र पर पहुंचे। 21 सितंबर को प्रातः आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ 28 पिच्छी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया एवं श्रुत तीर्थ श्रुतधाम की गतिविधियों एवं निर्माण कार्य की जानकारी दी। क्षपकराज मुनि श्री सुप्रभ सागर जी के दर्शन कर वार्ता की एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। यहीं पर गोमटेश भगवान बाहुबली का अभिषेक और शांतिधारा भी की। दिन में मुनिसंघ के साथ श्रुतवार्ता हुई। 22 सितंबर को संपूर्ण संघ के साथ क्षेत्र की वंदना की। प्राकृत भवन में विराजमान आचार्य श्री सुविधि सागर जी महाराज के दर्शन कर साहित्य भेंट किया।</p>
<p>मुनि श्री सुधेय सागर जी महाराज के दर्शन कर कम्मदहल्ली (कर्नाटक) क्षेत्र की वंदना की। मंदार गिरी क्षेत्र पर गुरु मंदिर एवं समवशरण मंदिर के दर्शन किए। 23 सितंबर को प्रातः 8 बजे श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर साकीनाका मुंबई में उदबोधन दिया। सांय काल 6 बजे चंदन नगर भोपाल में मुनि श्री निर्वेग सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन वार्ता करके रात्रि 10.30 पर श्रुतधाम बीना वापस पहुंचे।</p>
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		<title>‘संतान को जन्म देना एक क्रिया नहीं, एक साधना है’ : श्रावक संस्कार शिविर में प्रतिदिन प्रातः भावनायोग होगा  </title>
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		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 09:48:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन उपवास के साथ दिन व्यतीत किया। विगत सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने अनेक प्रश्नों का समाधान किया। अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अवधपुरी। अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन उपवास के साथ दिन व्यतीत किया। विगत सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने अनेक प्रश्नों का समाधान किया। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी।</strong> अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन उपवास के साथ दिन व्यतीत किया। विगत सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने अनेक प्रश्नों का समाधान किया। इसी क्रम में एक महिला ने प्रश्न किया कि स्त्री के जीवन में मां बनना एक गर्व की अनुभूति है, इस अनुभूति को कैसे सार्थक करें ? मुनि श्री ने उत्तर देते हुए कहा- आपके माध्यम से सभी गर्भवती महिलाओं को कहना चाहता हूं कि प्रतिदिन नौ मिनट का भावनायोग अवश्य करें और यदि संभव हो तो दिन में तीन बार। यह प्रयोग आपकी कोख से जन्म लेने वाली संतान को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गर्भवती स्त्री को अपना जीवन संयम और ब्रह्मचर्य के साथ बिताना चाहिए। इस समय ललित कलाओं, महापुरुषों के चरित्र चिंतन और प्रेरणादायी साहित्य से जुड़ना चाहिए। नकारात्मक बातें, क्लेश, झगड़े और टीवी के अशांतिदायक कार्यक्रमों से दूर रहना जरूरी है। मुनि श्री ने समझाया- मां बनने के समय आपके मन का हर्ष, प्रसन्नता और सकारात्मकता सीधा बच्चे पर प्रभाव डालती है। यदि आपने यह साधना पूरी निष्ठा से की तो आप मात्र एक संतान को जन्म नहीं देंगी, बल्कि एक श्रेष्ठ मां बनकर इस धरती के भूषण को जन्म देने का सौभाग्य पाएंगी। आगामी दशलक्षण पर्व की चर्चा करते हुए मुनिश्री ने कहा कि इन दस दिनों में सुबह से शाम तक केवल औपचारिक धार्मिक क्रियाएं करने के बजाय कुछ विशेष प्रयोग अपनाएं तो जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।</p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि अवधपुरी में आयोजित श्रावक संस्कार शिविर में प्रतिदिन प्रातः 5.45 बजे भावनायोग कराया जाएगा। जिसका लाइव प्रसारण ‘प्रमाणिक एप’ पर होगा। उन्होंने बताया कि इन 10 दिनों में व्यापारियों, उद्यमियों और बच्चों के लिए अलग-अलग विशेष सत्र होंगे। मुनि श्री ने श्रावकों से आग्रह किया कि जो लोग शिविर में प्रत्यक्ष आकर लाभ नहीं ले सकते, वे घर पर भी नियमित साधना करें और इस पावन अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं।</p>
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		<title>आचार्य समय सागर जी की अवहेलना पर आनंद जैन कासलवील ने दर्ज की आपत्ति : अपना नाम बड़ा करो लेकिन अपने संघ के नव आचार्यश्री का अपमान मत करो </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Sep 2024 16:53:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज और मुनि सुधासागर जी महाराज की धर्म प्रभावना समिति के द्वारा अखबार में इंदौर में सामूहिक क्षमा वाणी कार्यक्रम के विज्ञापन और इंदौर में जगह-जगह लगे पोस्टर में कहीं भी आचार्य समय सागर जी का चित्र नहीं है। इस बात को लेकर वीर निकलंक के पत्रकार आनंद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज और मुनि सुधासागर जी महाराज की धर्म प्रभावना समिति के द्वारा अखबार में इंदौर में सामूहिक क्षमा वाणी कार्यक्रम के विज्ञापन और इंदौर में जगह-जगह लगे पोस्टर में कहीं भी आचार्य समय सागर जी का चित्र नहीं है। इस बात को लेकर वीर निकलंक के पत्रकार आनंद जैन कासलीवाल ने आपत्ति दर्ज की है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज और मुनि सुधासागर जी महाराज की धर्म प्रभावना समिति के द्वारा अखबार में इंदौर में सामूहिक क्षमा वाणी कार्यक्रम के विज्ञापन और इंदौर में जगह-जगह लगे पोस्टर में कहीं भी आचार्य समय सागर जी का चित्र नहीं है। इस बात को लेकर वीर निकलंक के पत्रकार आनंद जैन कासलीवाल ने आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि दोनों मुनि श्री के साधु तो आचार्य समय सागर जी हैं। उनका इस तरह से अपमान उचित नहीं है। आनंद कासलीवाल ने कहा कि आचार्य श्री समय सागर जी महाराज तो एक वीतरागी संत हैं लेकिन जो कुछ हुआ, वह किसकी गलती से हुआ इसके बारे में पता नही लेकिन इससे समाज में एक अच्छा संदेश नहीं जाता है और ऐसा सुनने में आया है कि आप अपने प्रवचनों के दौरान भी आचार्य समय सागर जी का जयकारा नहीं लगाते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह एक नव आचार्यश्री का अपमान है और ऐसा मैं एक श्रावक की दृष्टि से बोल रहा हूं। ऐसी भी मुझे जानकारी मिली है कि इंदौर चातुर्मास में आपको आचार्यश्री समय सागर जी की स्वीकृति नहीं मिली। उसके बावजूद आपका इंदौर में चातुर्मास के लिएआगमन हुआ, क्या यह आचार्य परंपरा का अवहेलना नहीं है। अभी आपने वर्तमान में गोमटगिरी पर होने वाली क्षमा वाणी का कार्यक्रम निरस्त किया और मोहता बाग में आपका कार्यक्रम कर रहे हैं।</p>
<p>क्या इससे समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा कि आपने वह कार्यक्रम समिति द्वारा निरस्त करवा दिया और अपना कार्यक्रम आपने मोहता भवन में रख लिया। कासलीवाल ने यह भी कहा कि गुरुदेव में आपसे हाथ जोड़कर माफी भी मांगता हूं, पर एक श्रावक की दृष्टि से, एक पत्रकार की दृष्टि से ऐसा लगता है कि यह जो कुछ भी चल रहा है, वह जैन धर्म के आचरण के विरुद्ध है और समाज के लिए एक विघटनकारी कृत्य होगा, क्योंकि आप जैसे महान संत द्वारा भी अगर धर्म का राजनीतिकरण किया जाएगा तो आम श्रावक कहां जाएगा।</p>
<p>अगर इसमें कुछ गलत लगा हो तो मैं हाथ जोड़कर चरणों में वंदन करता हूं पर इन सब बातों से पूरा समाज एक मूक दर्शक बनकर दुखी हो रहा है। मैं एक जागरूक पत्रकार समाज को जगाने की कोशिश कर रहा हूं&#8230;!!! मेरा उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं, पर जो भी यह परंपरा है वह सही होना चाहिए !!</p>
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		<title>आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महोत्सव के बाद मुनियों का कुंडलपुर से मंगल विहार सभी संघों की आहार चर्या हुई पटेरा ग्राम में </title>
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		<pubDate>Sat, 27 Apr 2024 08:16:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर की पावन धरा पर आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महोत्सव के पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्यों का बड़ी संख्या में कुंडलपुर में भव्य आगमन हुआ। ज्येष्ठ श्रेष्ठ मुनि श्री समय सागर जी महाराज ने 16 अप्रैल को आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर की पावन धरा पर आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महोत्सव के पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्यों का बड़ी संख्या में कुंडलपुर में भव्य आगमन हुआ। ज्येष्ठ श्रेष्ठ मुनि श्री समय सागर जी महाराज ने 16 अप्रैल को आचार्य पद ग्रहण किया। महावीर जयंती के पश्चात मुनि संघों का मंगल विहार कुंडलपुर से निरंतर हो रहा है।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ………. </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर।</strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर की पावन धरा पर आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महोत्सव के पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्यों का बड़ी संख्या में कुंडलपुर में भव्य आगमन हुआ। ज्येष्ठ श्रेष्ठ मुनि श्री समय सागर जी महाराज ने 16 अप्रैल को आचार्य पद ग्रहण किया। महावीर जयंती के पश्चात मुनि संघों का मंगल विहार कुंडलपुर से निरंतर हो रहा है ।26 अप्रैल 24 की प्रातः बेला में तीन मुनि संघों का कुंडलपुर की पावन धरा से मंगल विहार हो गया।पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज से मंगल आशीर्वाद लेकर तीन उपसंघो के मंगल विहार परम प्रभावक पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के साथ क्षुल्लक श्री गंभीर सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज का विहार हुआ।</p>
<p>मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज के साथ मुनि श्री निर्वेग सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री आदर्श सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री समादर सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री चिद्रूप सागर जी महाराज ,क्षुल्लक श्री स्वरूप सागर जी महाराज , क्षुल्लक श्री शुभग सागर जी महाराज का बिहार हुआ ।मुनि श्री अजित सागर जी महाराज,मुनि श्री नीराग सागर जी महाराज,ऐलक श्री विवेकानंद सागर जी महाराज का मंगल विहार सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर से हुआ। आहार चर्या सभी संघों की पटेरा ग्राम में हुई।मुनि श्री निर्लोभ सागर जी महाराज,मुनि श्री निर्दोष सागर जी महाराज, मुनि श्री निरुपम सागर जी महाराज का मंगल विहार कुंडलपुर से हुआ।26 अप्रैल की सांयकाल मुनिश्री निर्लोभ सागर जी महाराज, मुनि श्री निर्दोष सागर जी महाराज, मुनि श्री निरूपम सागर जी महाराज का मंगल विहार कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ।</p>
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