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	<title>Muni Shri Adityasagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Muni Shri Adityasagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महाश्रमण का ससंघ का आगमन छत्रपति नगर में 27 को : जीवन की दिशा और दशा बदलने वाले प्रेरणास्पद प्रवचन होंगे </title>
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		<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:13:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिसंघ में इंदौर मुनिश्री अप्रमित सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रेयस सागर जी*महराज संसघ सम्मिलित रहेंगे। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने कहा कि हम सबके पुण्योदय से मुनिसंघ ने तीर्थ स्वरूप जिनालय में तीन दिवसीय प्रवास की स्वीकृति प्रदान की है। ट्रस्ट महामंत्री विपुल बांझल ने बताया कि तीन दिवसीय विशेष आयोजन में प्रातः 7 बजे मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज के संसघ में नित्य नियम पूजन, श्रीजी की शांतिधारा होगी। प्रातः 8.30 बजे गुरुदेव के मुखारविंद से जीवन की दिशा और दशा बदलने वाले प्रेरणास्पद प्रवचन होगा। मध्याह्न 2 बजे धर्म-अध्यात्म की तत्त्व चर्चा की जाएगी।</p>
<p>सायं 7 बजे श्रद्धालुओं के प्रश्नों पर आधारित श्रुत समाधान कार्यक्रम होगा, जिसमें मुनिश्री द्वारा श्रावकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। ट्रस्ट एवं सकल दिगम्बर जैन समाज छत्रपति नगर, गौरव नगर, महावीर बाग एवं अग्रसेन नगर ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से मुनिसंघ की आहार चर्या, वैयावृत्ति एवं सेवा कार्यों में सहभागिता कर पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ का 27 से 29 मई तक श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। मुनिसंघ में मुनिश्री अप्रमित सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रेयस सागर जी सम्मिलित रहेंगे। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट ने बताया कि हम सबके पुण्योदय से मुनिसंघ ने तीर्थ स्वरूप जिनालय में प्रवास की स्वीकृति प्रदान की है।</p>
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		<title>ताम्रपत्र पर अंकित &#039;षट्खण्डागम&#039; : 1 मई शुक्रवार को होगा अवलोकन, स्वप्न हुआ साकार </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:19:51 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ शास्त्र षट्खण्डागम&#8217; को चिरकाल तक सुरक्षित रखने का स्वप्न साकार हो गया है। आचार्य श्री पुष्पदंत जी एवं आचार्य भूतबली जी द्वारा रचित इस महान ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित कर संरक्षित किया गया है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। दिगंबर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ शास्त्र षट्खण्डागम&#8217; को चिरकाल तक सुरक्षित रखने का स्वप्न साकार हो गया है। आचार्य श्री पुष्पदंत जी एवं आचार्य भूतबली जी द्वारा रचित इस महान ग्रंथ को ताम्रपत्र पर अंकित कर संरक्षित किया गया है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से यह ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।</p>
<p>शुक्रवार, 1 मई को पूर्णिमा शांतिनाथ भगवान के कलशाभिषेक के पावन अवसर पर यह ताम्रपत्र संस्करण समाजजनों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। अशोक खासगीवाल, आजाद जैन ने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि पधारकर ताम्रपत्रों पर लिखे ग्रंथ का अवलोकन कर अपने जीवन को धन्य करें।</p>
<p><strong>कार्यक्रम:</strong></p>
<p>दिनांक: शुक्रवार, 1 मई</p>
<p>समय: प्रातः 7:30 बजे से अवलोकन</p>
<p>स्थान: समवशरण मंदिर, कंचनबाग, इंदौर</p>
<p><strong>षट्खण्डागम&#8217; का महत्व </strong></p>
<p>यह इस युग का जिनागम का प्रथम लिपिबद्ध शास्त्र है। इसे ताम्रपत्र पर अंकित करना श्रुत संरक्षण एवं शासन प्रभावना की दिशा में मील का पत्थर है। इससे आने वाली पीढ़ियों तक जिनवाणी सुरक्षित रहेगी।</p>
<p>आयोजक श्री दिगंबर जैन समवशरण ट्रस्ट, इंदौर ने समस्त धर्मानुरागी बंधुओं से इस पावन अवसर पर पधारकर जिनवाणी दर्शन का लाभ लेने का अनुरोध किया है।</p>
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		<title>मुनि श्री आदित्य सागर जी सोमवार छत्रपति नगर आएंगे : मुनिश्री के सानिध्य में विविध धार्मिक कार्यक्रम होंगे </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 12:13:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री आदित्य सागर जी ससंघ सतगुरु पैराडाइज कॉलोनी से विहार कर सोमवार को छत्रपति नगर पधारेंगे। यहां वे श्रुत समाधान कार्यक्रम के माध्यम से लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे।मुनि श्री के सानिध्य में अभिषेक शांति धारा, प्रवचन आदि कार्यक्रम होंगे। इंदौर से पढ़िए यह खबर&#8230; इंदौर। मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री आदित्य सागर जी ससंघ सतगुरु पैराडाइज कॉलोनी से विहार कर सोमवार को छत्रपति नगर पधारेंगे। यहां वे श्रुत समाधान कार्यक्रम के माध्यम से लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे।<span style="color: #ff0000">मुनि श्री के सानिध्य में अभिषेक शांति धारा, प्रवचन आदि कार्यक्रम होंगे। इंदौर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी , मुनि श्री आराध्य सागर जी, मुनि श्री सहज सागर जी एवं क्षुल्लक श्रेयस सागर जी को रविवार को दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय ट्रस्ट के ट्रस्टी पदाधिकारियों एवं छत्रपतिनगर के लगभग 30 जैन समाज जनों ने एरोड्रम रोड थाने के पीछे बबा‌श्री गार्डन के पास स्थित सतगुरु पैराडाइज कॉलोनी में जाकर श्रीफल समर्पित कर छत्रपति नगर में पधारने का निवेदन किया। जिसे मुनि श्री ने स्वीकार कर 2 दिन के लिए स्वीकृति प्रदान की। जिससे कॉलोनी के जैन धर्मावलंबियों में खुशी की लहर दौड़ गई।</p>
<p><strong>इन्होंने किया श्रीफल अर्पित</strong></p>
<p>इस अवसर पर छत्रपति नगर के ब्रह्मचारी उत्तमचंद जैन, पूर्व आरटीओ पीसी जैन, डॉ.जैनेंद्र जैन, अतिशय जैन, पवन जैन चैलेंजर, राजेश जैन दद्दू, आलोक जैन वीरेंद्र जैन, जिनेश जैन, निलेश जैन, सुरेश पड़ोसी, विक्की जैन, सुनील जैन, रमेशचंद जैन एमपीईवी एवं मुक्ता जैन, सुरेखा जैन, सोनाली बागड़िया, बलवंता बेनऔर सुनीता जैन आदि ने मुनि संघ को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>श्रुत समाधान कार्यक्रम में जिज्ञासा होंगी शांत</strong></p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री 17 मार्च सोमवार को शाम 4:30 बजे अंबिकापुरी जैन मंदिर से विहार कर 5:15 पर आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में प्रवेश करेंगे। वहां शाम 6:30 पर श्रुत समाधान कार्यक्रम के माध्यम से लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे। शाम 7:30 पर गुरु भक्ति होगी एवं 18 और 19 मार्च को सुबह 7 बजे मुनि श्री के सानिध्य में अभिषेक, शांति धारा, प्रवचन, आहार चर्या एवं संध्या श्रुत समाधान कार्यक्रम होगा। 20 तारीख को सुबह मुनि श्री समोसरण मंदिर कंचनबाग के लिए विहार करेंगे।</p>
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		<title>आपके शब्द अमृत का काम करें : मुनि श्री आदित्यसागर जी का सानिध्य पारस मणि के समान </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 12:05:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री आदित्यसागर जी ससंघ इंदौर विराजित हैं। उनके सानिध्य में भक्तजन धर्मसभा का लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के मार्गदर्शन में सुमतिधाम में पट्टाचार्य महा महोत्सव होगा। इसकी तैयारियां जारी हैं। इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर&#8230; इंदौर। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनि श्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनि श्री सहजसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री आदित्यसागर जी ससंघ इंदौर विराजित हैं। उनके सानिध्य में भक्तजन धर्मसभा का लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के मार्गदर्शन में सुमतिधाम में पट्टाचार्य महा महोत्सव होगा। इसकी तैयारियां जारी हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनि श्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनि श्री सहजसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्रेयससागर जी महाराज यहां विराजमान है। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी ने कहा कि आपके शब्द हमेशा अमृत का काम करें। जहर का नहीं, क्योंकि कुछ लोगों के शब्द कांटों से भी ज्यादा नुकीले होते हैं। सही बात है-कांटों का तो नाम ही बदनाम है। वरना चुभती तो निगाहें भी हैं। काटती तो जुभानें भी हैं। मुनि श्री आदित्यसागर जी का सानिध्य पारस मणि के स्पर्श के समान हैं।</p>
<p><strong>गुरु के प्रति समर्पण बने आदित्य</strong></p>
<p>उन्होंने MBA (Gold Medalist) जैसी शैक्षिक योग्यता, संपन्न एवं समृद्ध परिवार, स्वर्ण-आभूषणों के प्रतिष्ठित व्यापार और सुकुमारिता से भरे भविष्य की कामनाओं को एक पल में किसी तृण के समान छोड़ देने का साहस किया। जिसके पास विलासितापूर्ण जीवन जीने के अनेकों विकल्प मौजूद थे, जिसकी प्रखर दैहिक आभा, अप्रतिम सुंदरता, अद्वितीय बुद्धिलब्धि और पुण्य-शक्ति के आगे सभी सांसारिक सुख किसी चरण चंचरिक की तरह उसके सामने नतमस्तक होने को तैयार बैठे थे। परंतु इन सब मोह और सुखों के आगे तो भोगी झुका करते हैं। योगी नहीं, सन्मति भैया ने जो पथ चुना था। वह इन सब से ऊपर था। निर्ग्रंथ पथ और फिर सन्मति भैया ने 8 नवम्बर 2011 को गुरु के प्रति समर्पण विशुद्ध-सागर में ऐसी डुबकी लगाई कि सागर के अंदर जो गए वह थे “सन्मति”, पर जो बाहर आए वह थे &#8216;आदित्य&#8217;।</p>
<p><strong>पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से</strong></p>
<p>मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 मई तक सुमतिधाम में होगा।</p>
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		<title>पूर्वोत्तर क्षेत्र में आदिनाथ जयंती श्रद्धा भक्ति से मनाएंगे : मुनि श्री आदित्यसागर जी के सानिध्य में शोभायात्रा निकाली जाएगी </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 09:33:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से इंदौर के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 23 मार्च रविवार को भगवान आदिनाथ जन्म जयंती का आयोजन होगा। भव्य शोभायात्रा धूमधाम से निकलेगी। इसमें संपूर्ण इंदौर के समाजजन शामिल होंगे।  इंदौर। भगवान आदिनाथ की जयंती धूमधाम से सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र में मनाई जाएगी। महावीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से इंदौर के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 23 मार्च रविवार को भगवान आदिनाथ जन्म जयंती का आयोजन होगा। भव्य शोभायात्रा धूमधाम से निकलेगी। <span style="color: #ff0000">इसमें संपूर्ण इंदौर के समाजजन शामिल होंगे। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान आदिनाथ की जयंती धूमधाम से सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र में मनाई जाएगी। महावीर जयंती की तरह यह आयोजन पूर्वोत्तर जैन समाज द्वारा किया जा रहा है। महोत्सव प्रचार प्रमुख महावीर जैन ने बताया कि आयोजन के प्रमुख सूत्रधार रवि जैन, डीके जैन ने भगवान आदिनाथ के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मुनि श्री आदित्य सागर जी के पावन सानिध्य में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो पूर्वोत्तर क्षेत्र का भ्रमण करते हुए आयोजन स्थल गोल स्कूल नंदा नगर तक पहुंचेगी। यहां मुनि श्री के आशीर्वचन के साथ भगवान का अभिषेक साथ ही वात्सल्य भोज होगा।</p>
<p><strong>सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को नगद पुरस्कार देंगे</strong></p>
<p>आयोजन की सफलता के लिए संपूर्ण इंदौर के मंदिरों के अध्यक्ष मंत्री और वरिष्ठ समाजजनों को आहूत कर नंदा नगर स्थित सेतवाल समाज आदिनाथ मंदिर पर रखी गई। मीटिंग के दौरान जुलूस को भव्य बनाने के लिए सभी मंदिरों से महिला मंडलों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएगी। साथ ही जुलूस में हाथी, बाजे ढोल, ताशे, घोड़े झांकियां सम्मिलित होंगी। महिला मंडल की ओर से जुलूस के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को नगद पुरस्कार आयोजन स्थल पर दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>मीटिंग में पात्रों का सम्मान किया</strong></p>
<p>अनिल जैन जैनको को महोत्सव अध्यक्ष, हर्ष जैन को महामंत्री एवं नवीन गोधा को कार्यक्रम का मुख्य संयोजक बनाया गया। रथ के सारथी बनने का सौभाग्य सुनील जैन एवं सिद्धांत जैन को मिला। सभी पात्रों का सम्मान मीटिंग के दौरान किया गया।</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस अवसर पर समाज के सभी मंदिरों के अध्यक्ष मंत्री उपस्थित थे। विशेष रूप सुरेश भैया, नरेंद्र वेद, एमके जैन, अशोक बडजात्या, कैलाश वेद, जेनेश झांझरी, नीरज जैन, आनंद गोधा, शीतल जैन, पूनमचंद सतभैया, राजेश जैन, राकेश जैन, विशाल काला, विनोद जैन, बाहुबली जैन, नरेंद्र जैन ,महेंद्र जैन, चंद्रेश जैन, अनिल जैन एटको एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी मंदिरों के प्रतिनिधि मंडल उपस्थित थे। संचालन डीके जैन ने किया। आभार रवि जैन ने माना।</p>
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		<title>दान का सार्थक स्वरूप और पनपती विकृतियां विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किया शोधालेख : दान से दुर्गति का नाश होता है &#8211; डॉ. सुनील संचय </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Jun 2024 15:58:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दान देकर के ही साधु और श्रावक दोनों ही कृतार्थ होते हैं। दान कोई सामाजिक व्यवस्था का वित्त प्रबंधन नहीं है अपितु यह वित्त प्रबंधन का एक उत्कृष्ट माध्यम है। केकड़ी, राजस्थान में श्रुतसंवेगी मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में आयोजित श्रावकाचार अनुशीलन राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी में उक्त विचार नगर के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दान देकर के ही साधु और श्रावक दोनों ही कृतार्थ होते हैं। दान कोई सामाजिक व्यवस्था का वित्त प्रबंधन नहीं है अपितु यह वित्त प्रबंधन का एक उत्कृष्ट माध्यम है। केकड़ी, राजस्थान में श्रुतसंवेगी मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में आयोजित श्रावकाचार अनुशीलन राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी में उक्त विचार नगर के मनीषी विद्वान डॉ. सुनील जैन संचय ने &#8216;दान का सार्थक स्वरूप और पनपती विकृतियां&#8217; विषय पर अपना शोधालेख प्रस्तुत करते हुए कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> &#8216;दान&#8217; को जैनधर्म में श्रावक का प्रतिदिन करणीय आवश्यक कर्तव्य माना जाता है। हमें आज के युग में उसकी आवश्यकता पर भी विचार करना है। प्रायः दान को लेकर लोगों में सामान्य ज्ञान ही रहता है और कई प्रकरणों में अज्ञानता के कारण उनका दान पुण्य के स्थान पर पाप बंध का कारण भी बन जाता है। दान के महत्व को संक्षेप में कथन करना है तो उल्लेख है कि दान धर्म ऐसा तीर्थ है जिससे भव सागर को आसानी से पार किया जा सकता है। हमारे शास्त्रों में उल्लेख है कि &#8216;दानं दुर्गति नाशनम्&#8217; दान से दुर्गति का नाश होता है। दान देकर के ही साधु और श्रावक दोनों ही कृतार्थ होते हैं। दान कोई सामाजिक व्यवस्था का वित्त प्रबंधन नहीं है अपितु यह वित्त प्रबंधन का एक उत्कृष्ट माध्यम है। केकड़ी, राजस्थान में श्रुतसंवेगी मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में आयोजित श्रावकाचार अनुशीलन राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी में उक्त विचार नगर के मनीषी विद्वान डॉ. सुनील जैन संचय ने &#8216;दान का सार्थक स्वरूप और पनपती विकृतियां&#8217; विषय पर अपना शोधालेख प्रस्तुत करते हुए कहीं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62315" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0010.jpg" alt="" width="1172" height="588" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0010.jpg 1172w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0010-300x151.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0010-1024x514.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0010-768x385.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0010-990x497.jpg 990w" sizes="(max-width: 1172px) 100vw, 1172px" />दान देने वाला कहलाता है दाता</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि दान के संदर्भ में दाता, दान और पात्र की स्थिति समझना बहुत जरूरी है। दान देने वाला दाता कहलाता है, वह दाता विनम्रता पूर्वक, धर्म भावों से सत्पात्रों की खोजकर अपने द्रव्य का सदुपयोग करता है। दान का लक्षण लिखते हुए आचार्य उमास्वामी महाराज कहते हैं &#8216;अनुग्रहार्थं स्वस्यातिसर्गों दानम्। उपकार की भावना से अपनी वस्तु का त्याग करना दान है। पहली बात उपकार बुद्धि हो और दूसरी बात अपनी वस्तु हो। बुद्धि में मान बढ़ाई का भाव नहीं, स्वार्थपूर्ति या सौदेबाजी जैसी बात न हो। आहारदान, औषधदान, ज्ञानदान, अभयदान इन चार प्रकार के दानों का वर्णन किया गया है। जैन शास्त्र किसी भी रूप में यह आज्ञा नहीं देते कि अन्याय एवं पाप से धन अर्जित करो और उसका दान करते रहो एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करो। आचार्य पूज्यपाद स्वामी इष्टोपदेश में लिखते हैं- &#8220;जो मनुष्य दान करने की आशा से धन संचय करते हैं, वे उस मनुष्य की तरह है जो &#8220;स्नान कर लूंगा&#8221; इस आशा से पहले कीचड़ लपेटता है। संचय से त्याग श्रेष्ठ है। अतः गृहस्थ धर्म को निर्वहन करते हुए न्यायपूर्वक उपार्जित धन में से कुछ त्यागपूर्वक स्व-पर उपकार के भाव से दान देना चाहिए। इससे गृहस्थ धर्म पवित्र होता है। संसार के उत्तमोत्तम सुख, माता-पिता, पुत्र, स्त्री, धन-धान्य, मकान, वाहन तथा संसार के समस्त वैभव-सम्पत्ति, आभूषण आदि ये सब सुपात्र में दिये गए दान के फल हैं। उन्होंने कहा कि दान हमेशा हर्षित भाव से देना चाहिए, मान बड़ाई, अहंकार, प्रतिष्ठा, दिखावे के लिए दान नहीं दिया जाना चाहिए। दान को हमें व्यापक अर्थों में समझने की आवश्यकता है, उसे मात्र क्रियाकांड न समझकर उसकी आध्यात्मिकता को सुरक्षित रखा जाय, तभी उसकी सार्थकता है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने दान की महत्वत्ता को प्रतिपादित किया। संचालन राजेन्द्र &#8216;महावीर&#8217; सनावद ने किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62317" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008.jpg" alt="" width="1100" height="618" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008.jpg 1100w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-1024x575.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-768x431.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-990x556.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240621-WA0008-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1100px) 100vw, 1100px" /> डॉ. सुनील संचय हुए सम्मानित</strong></p>
<p>इस मौके पर मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने डॉ सुनील संचय के आलेख की प्रसंशा करते हुए कहा कि शोधालेख कैसे प्रस्तुत किए जाते हैं, यह सीखना हो तो डॉ सुनील संचय के शोधालेख से सीख सकते हैं, इसके लिए उन्हें अवार्ड मिलना चाहिए। आयोजन समिति ने डॉ. सुनील संचय को शाल, पगड़ी, स्मृति चिन्ह, श्रीफल, साहित्य भेंटकर सम्मानित किया।</p>
<p><strong>ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर डॉ. शीतलचंद्र जयपुर, डॉ श्रेयांस कुमार बड़ौत, प्रोफेसर श्रीयांस सिंघई जयपुर, डॉ . अनिल भैया प्राचार्य जयपुर, पंडित विनोद कुमार रजवांस, प्रो. अनेकान्त जैन दिल्ली , डॉ धर्मेंद्र भैया जयपुर,डॉ. पंकज कुमार इंदौर, डॉ आशीष आचार्य सागर, डॉ. सोनल कुमार दिल्ली आदि विद्वान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आयोजन समिति के अध्यक्ष भवरलाल केकड़ी ने आभार व्यक्त किया।</p>
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