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	<title>muni shree aaditya sagar ji maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>muni shree aaditya sagar ji maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>टाइम को मैनेज किया तो आपकी लाइफ का मैनेजमेंट सुधरेगा: श्री 108 आदित्यसागर जी महाराज:  कोटा में धर्म सभा में दिया मुनिश्री ने प्रबोधन </title>
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		<pubDate>Sun, 24 Nov 2024 03:09:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रुत संवेगी श्रमण श्री आदित्यसागर जी महाराज ने राजस्थान कोटा में अपने प्रवचन में कहा कि टाइम मैनेजमेंट आपकी लाइफ का मैनेजमेंट है। इस प्रवचन में बड़ी संख्या में जिन समाज जन मौजूद थे। पढ़िए इंदौर से राजेश जैन दद्दू की खबर&#8230; इंदौर। जयदु जिणिंदो महावीरों। श्रुत संवेगी श्रमण श्री आदित्यसागर जी महाराज ने कोटा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रुत संवेगी श्रमण श्री आदित्यसागर जी महाराज ने राजस्थान कोटा में अपने प्रवचन में कहा कि टाइम मैनेजमेंट आपकी लाइफ का मैनेजमेंट है। इस प्रवचन में बड़ी संख्या में जिन समाज जन मौजूद थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से राजेश जैन दद्दू की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जयदु जिणिंदो महावीरों। श्रुत संवेगी श्रमण श्री आदित्यसागर जी महाराज ने कोटा (राजस्थान)में अपने प्रवचन में कहा कि टाइम मैनेजमेंट आपकी लाइफ का मैनेजमेंट है। आप श्रावकों की जिंदगी का वक्त बिखरा हुआ पडा है। न धागे से संभल पा रहे हैं, ना ईंटों से इतना बिखरा पड़ा है। क्योंकि, टाइम मैनेजमेंट ही नहीं है। कोई काम आपके पास आया कर लेंगे, हो जाएगा। स्लीपिंग मैनेजमेंट नहीं है।</p>
<p><strong>मोबाइल ने छीन लिया समय</strong></p>
<p>मोबाइल पर लगे हुए हैं। अंगुलियां घिस गई लोगों की, अंगुलियों में सेन्स खत्म हो गया है। फिर भी घिसे जा रहे है। रात के दो बज गए हैं, फिर भी घिसे ही रहे हैं। कोई लाइफ मैनेजमेंट ही नहीं बचा है। कोई टाइम मैनेजमेंट ही नहीं बचा है। दो बजे सो रहे हैं। तीन बजे सो रहे हैं, कई तो ऐसे हैं पांच बजे सो रहे हैं। हे,भगवान थोडी बुद्धि दो इन लोगों को।</p>
<p><strong>जो समय को साध लेते हैं वहीं ऊंचाइयां छूते हैं</strong></p>
<p>समय निकलने के बाद सिर्फ पछतावा होता है ध्यान रखना। जितना समय दूसरों के लिए दिया है,उतना समय खुद के लिए देते तो ऊंचाइयां पा लेते। कोई बात नहीं दे दिया तो दे दिया। अब जो टाइम बचा है। उसे तो रखिए अपने पास। खुद को समय दीजिए और ऊंचाइयां पा लिजिए।</p>
<p><strong>उच्च शिक्षा और संपन्नता त्याग बने &#8216;आदित्य&#8217;</strong></p>
<p>आध्यात्म योगी, चर्या शिरोमणि, दिगंबराचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के शिष्य श्रमण मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज जिन्होने MBA (Gold Medalist) और BBA जैसी शैक्षणिक योग्यता, संपन्न एवं समृद्ध परिवार, स्वर्ण-आभूषणों के प्रतिष्ठित व्यापार और सुकुमारिता से भरे भविष्य की कामनाओं को एक पल में किसी तृण के समान छोड़ देने का साहस किया।</p>
<p><strong>जिनका स्पर्श मणि के समान</strong></p>
<p>&#8216;विशुद्ध-सागर&#8217; में ऐसी डुबकी लगाई कि सागर के अंदर जो गया वह थे “सन्मति”पर जो बाहर आए वह थे &#8216;आदित्य&#8217;| जिन्होंने अनेकों को सत्य पथ दिखाया है। श्रुत संवेगी श्रमण श्रीआदित्यसागर जी महाराज धरातल पर प्रत्यक्ष दर्शन देने वाली उन भव्य आत्माओं में से एक हैं। जिनका सान्निध्य, पारस मणि के स्पर्श के समान है। &#8216;नमोस्तु शासन जयवंत हो।&#8217;</p>
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		<title>विद्यार्थी वह जो, अपने कार्यों को कहकर नहीं, पूर्ण करके दिखाता है: मुनि श्री आदित्य सागर महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Sep 2022 11:16:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[indore jain samaj]]></category>
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					<description><![CDATA[महान ग्रंथ &#8216;सिरि भूवलय&#8221; एवं प्राकृत भाषा विषक संगोष्ठी शास्त्रों की पांडुलिपि एवं ताम्रपत्र लेखन का विमोचन इंदौर@राजेश जैन दद्दू । अच्छा विद्यार्थी वह होता है जो शांत रहकर अपना कार्य करता रहता है। कार्य की पूर्णता, स्वयं ही शोर मचाती है। दुनिया को जवाब जीत के बारे में बोलकर नहीं, बल्कि जीत कर देना [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4>महान ग्रंथ &#8216;सिरि भूवलय&#8221; एवं प्राकृत भाषा विषक संगोष्ठी<br />
शास्त्रों की पांडुलिपि एवं ताम्रपत्र लेखन का विमोचन</h4>
<p><strong>इंदौर@राजेश जैन दद्दू</strong> । अच्छा विद्यार्थी वह होता है जो शांत रहकर अपना कार्य करता रहता है। कार्य की पूर्णता, स्वयं ही शोर मचाती है। दुनिया को जवाब जीत के बारे में बोलकर नहीं, बल्कि जीत कर देना चाहिए। यह बात मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कुंदकुंद ज्ञानपीठ के अंतर्गत विश्व के आठवें आश्चर्य माने जाने वाले महान ग्रंथ<strong> &#8216;सिरि भूवलय&#8221;</strong> एवं प्राकृत भाषा के विकास के लिए आयोजित संगोष्ठी के दूसरे दिन, विद्वानों और शोधार्थियों के बीच, उदासीन आश्रम एमजी रोड, इंदौर में कही।<br />
उन्होंने कहा कि सीखने की उम्र नहीं, जुनून और जिद चाहिए। वृक्ष कभी नहीं सोचता कि उसके सुंदर पुष्पों को कौन देखेगा? कौन उसका उपयोग करेगा? वह सिर्फ अपना कार्य करता है और दुनिया उसकी दीवानी हो जाती है।<br />
कार्यक्रम में पधारे डॉक्टर केदारनारायण जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति से जो उत्पन्न हो, वह प्राकृत है। प्राकृत जन भाषा है। विचार का दीपक तभी तक प्रज्जवलित रहता है जब तक हम उसमें आचार का पालन करते हैं।<br />
दोपहर के सत्र के मुख्य अतिथि पंडित मिथिला प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक वह होता है जो शास्त्रों को घोलकर पी ले।<br />
जो दुख में कभी दुखी और सुख में कभी सुखी नहीं होता, वही साधु कहलाता है।<br />
समाज के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि कुंदकुंद ट्रस्ट इंदौर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में, शास्त्रों की पांडुलिपि एवं ताम्रपत्र लेखन का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के अमित कासलीवाल, पुष्पा कासलीवाल, विमला कासलीवाल, इंजीनियर अनिल जैन, कुलपति रेनू जैन, नरेंद्र धाकड़, प्रोफेसर सरोज कुमार, डॉ शोभा जैन, अजीत जैन, दिलीप मेहता, आजाद जैन व अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।<br />
कार्यक्रम में देशभर से पधारे विद्वान एवं शोधार्थी मौजूद रहे। सभी शोधार्थियों एवं विद्वानों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता मेहता एवं डॉ. अरविंद जैन ने किया।</p>
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