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	<title>Mumbai श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>देशभर से सम्मिलित होंगे जैन बंधु : सागर में पद्माकर सभागार में मनाया जायेगा स्वर्ण जयंती महोत्सव </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Jun 2024 07:00:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ कुंदकुंद कहान दिगंबर जैन तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट मुंबई के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती महोत्सव वर्ष का आगाज पूरे देश से पधार रहे जिनशासन सेवकों की विशेष उपस्थिति में अनेक कार्यक्रमों के साथ किया जाएगा। जिनशासन सेवक प्रद्युम्न फौजदार,दीपक राज जैन एवं सुनील सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमंत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> कुंदकुंद कहान दिगंबर जैन तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट मुंबई के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती महोत्सव वर्ष का आगाज पूरे देश से पधार रहे जिनशासन सेवकों की विशेष उपस्थिति में अनेक कार्यक्रमों के साथ किया जाएगा। जिनशासन सेवक प्रद्युम्न फौजदार,दीपक राज जैन एवं सुनील सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमंत सेठ धर्मेन्द्र सेठ खुरई करेंगे एवं मुख्य अतिथि के रूप में सेठ गुलाब चंद्र जैन सुभाष ट्रांसपोर्ट कं. सागर, विशिष्ट अतिथि शैलेन्द्र जैन (विधायक,सागर), श्रीमंत सेठ अशोक जैन काका, स्वदेश जैन (गुड्डू भैया) उपस्थित रहेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> श्री कुंदकुंद कहान दिगंबर जैन तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट मुंबई के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती महोत्सव वर्ष का आगाज पूरे देश से पधार रहे जिनशासन सेवकों की विशेष उपस्थिति में अनेक कार्यक्रमों के साथ किया जाएगा। जिनशासन सेवक प्रद्युम्न फौजदार,दीपक राज जैन एवं सुनील सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमंत सेठ धर्मेन्द्र सेठ खुरई करेंगे एवं मुख्य अतिथि के रूप में सेठ गुलाब चंद्र जैन सुभाष ट्रांसपोर्ट कं. सागर, विशिष्ट अतिथि शैलेन्द्र जैन (विधायक,सागर), श्रीमंत सेठ अशोक जैन काका, स्वदेश जैन (गुड्डू भैया) उपस्थित रहेंगे। स्वर्ण जयंती महोत्सव में मुंबई से बसंत भाई दोशी, बीनू भाईजी, बांसवाड़ा से महीपाल जैन ज्ञायक, बैंगलोर से चंपालाल भंडारी, कोलकाता से सुशील बजाज मुन्नाभाई, भरत भाई टिंबड़िया, औरंगाबाद से हर्षबर्धनजी, इंदौर से विजय बड़जात्या, पदमचंद पहाड़िया, भोपाल से अशोक जैन सुभाष ट्रांसपोर्ट कं., ब्र. हेमचंद जैन हेम, हिम्मतनगर से रजनीभाई दोशी, जबलपुर से अशोक कुमार जैन, कटनी से सुधीर जैन इत्यादि अनेक गणमान्य महानुभाव इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति प्रदान कर कार्यक्रम को गौरवान्वित करेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकोट से अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान पंडित सुनील शास्त्री जैनापुरे का मंगल सानिध्य प्राप्त होगा। साथ ही रात्रि कालीन कार्यक्रम में भजन सम्राट संजीव जैन उस्मानपुर दिल्ली द्वारा आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति सभागार में होगी। सम्पूर्ण कार्यक्रम का निर्देशन पंडित विराग शास्त्री जबलपुर एवं संयोजन पंडित अखिलेश शास्त्री सागर, पंडित प्रयंक शास्त्री खुरई एवं पंडित अमित जैन अरिहंत तीर्थधाम ज्ञानोदय भोपाल करेंगे।</p>
<p>आदित्य जैन लाल दुकान ने बताया कि कार्यक्रम में क्षेत्रीय समाज एवं आसपास के नगरों से भी साधर्मी बंधु पधारेंगे जिनका कुंदकुंद कहान दिगंबर जैन स्वाध्याय मंडल ट्रस्ट, मुमुक्षु मंडल मकरोनिया एवं तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय सागर के समस्त जिनशासन सेवकों द्वारा आत्मीय अभिनंदन किया जाएगा।</p>
<p><strong>ये होंगे कार्यक्रम</strong></p>
<p>महोत्सव का शुभारंभ प्रातः 7 बजे श्री महावीर जिनालय परकोटा सागर में श्री जिनेन्द्र पूजन एवं विधान से होगा, 8.30 से अल्पाहार, 9 बजे से गुरुदेवश्री के सीडी प्रवचन, 9.45 से पंडित सुनील शास्त्री जैनापुरे राजकोट के प्रवचन, दोपहर 1.30 बजे से पद्माकर सभा गृह में पाठशाला के बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, 2.30 बजे से आध्यात्मिक गोष्ठी, 3.30 से ट्रस्ट का अधिवेशन, संध्या 5.30 से साधर्मी वात्सल्य भोज, रात्रि 7 बजे से आध्यात्मिक पाठ, 7.15 से प्रवचन एवं 8 बजे से पंडित संजीव जैन उस्मानपुर दिल्ली की आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें सकल जैन समाज को आमंत्रित किया गया है। सम्पूर्ण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिनदेशना यूट्यूब चैनल पर किया जावेगा।</p>
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		<title>फिल्म पुण्य का उदय की हुई स्पेशल स्क्रीनिंग : मुंबई में हुआ भव्य विमोचन </title>
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		<pubDate>Tue, 27 Feb 2024 15:27:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[एमआर प्रोडक्शन द्वारा निर्मित पुण्य का उदय फिल्म का मुंबई में भव्य विमोचन और स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। ललित शक्ति की फिल्म “पुण्य का उदय” देख सभी की आंखें नम हो गईं। फिल्म की शुरुआत रेखा देवी एवं कांतिलालजी शाह ने बटन दबाकर की। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही, समाज के लोगों ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>एमआर प्रोडक्शन द्वारा निर्मित पुण्य का उदय फिल्म का मुंबई में भव्य विमोचन और स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। ललित शक्ति की फिल्म “पुण्य का उदय” देख सभी की आंखें नम हो गईं। फिल्म की शुरुआत रेखा देवी एवं कांतिलालजी शाह ने बटन दबाकर की। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही, समाज के लोगों ने इसकी खूब सराहना भी की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जीवन लाल जैन नागदा की रिपोर्ट। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंबई।</strong> रविवार को ललित शक्ति की फिल्म “पुण्य का उदय” की स्पेशल स्क्रीनिंग गुलालवाड़ी स्थित सूर्यनारायण वाड़ी में हुई, जहां फिल्म से जुड़े लोगों, कलाकारों सहित जैन समाज के तमाम विशिष्ट लोगों के अलावा विमोचनकर्ता रेखा देवी कांतिलालजी शाह, पूर्व मंत्री राज के पुरोहितजी, नगरसेवक आकाशजी पुरोहित, ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट, मुंबई के अध्यक्ष एसपी आहुजाजी, फिल्म प्रोड्यूसर गणपतजी कोठारी, वरिष्ठ समाजसेवी फतेहचंदजी राणावत, भवन निर्माता दिनेशजी जैन, माणिभद्र वीर (दिव्यांग सेवा) भक्ति मंडल, मुंबई के अध्यक्ष प्रकाशजी ढालावत, वरकाणा तीर्थ के ट्रस्टी अशोकजी पारेख, कपूरजी बलदोटा, प्रवीणजी मेहता, भरतजी कोठारी एवं सुरेंद्रजी मुणोत, कविराज प्रदीप जी ढालावत, सुरेशजी कोठारी, प्रकाशजी कोठारी, करणजी बाफना, वक्तावरमलजी सोनीगरा, इंदरभाई जैन, जयंतीलालजी सोलंकी, मेहबूब भाई, जावेद भाई, राकेशजी नाहर, मोहनजी मंडलेचा, महेंद्रजी चोपड़ा, किरणजी बोराणा, भरतजी जैन, गजराजजी लोढ़ा, दिनेशजी मेहता, किशोरजी बोराणा सहित सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। इस मौके पर आये मेहमानों का बहुमान किया गया तत्पश्चात फिल्म “पुण्य का उदय” की स्क्रीनिंग हुई, जिसका रिमोट के जरिए शुरुआत रेखाबेन एवं कांतिलालजी शाह के हाथों किया गया। फिल्म देखने के बाद उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गयीं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-56323" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014.jpg" alt="" width="1600" height="856" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014-300x161.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014-1024x548.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014-768x411.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014-1536x822.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014-990x530.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240227-WA0014-1320x706.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />कलाकारों का हुआ सम्मान </strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि एम आर प्रोडक्शन के बैनर तले बनी यह एक सामाजिक संदेश देती हुई फिल्म है जिसके निर्माता ललित शक्ति एवं निर्देशक सुनील वार्ष्णेय हैं। फिल्म के सहनिर्माता महावीर एल राठौड़ हैं एवं फिल्म के कलाकारों में सुरेंद्र पाल, गौरव प्रतीक, ललित शक्ति, कल्याणी झा, बाल कलाकार मयंक आदि ने मुख्य भूमिका निभाई है जबकि टाइटल सांग प्रसिद्ध गायिका माधुरी वैष्णव ने गाया है। मंच पर सभी निर्देशक सुनील वार्ष्णेय, कैमरामैन बलवीर राल सहित सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई, तत्पश्चात आए हुए मेहमानों का स्वागत किया गया।</p>
<p>इस मौके पर फिल्म निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वालों का शॉल एवं मोमेंटों के साथ बहुमान किया गया, जिनमें मंजूबेन विनोदजी कोठारी, अशोकजी तवरेचावोरा, कैलाशजी मेहता, जितेंद्रजी भंडारी, समीरजी मेहता, अशोकजी पारेख का नाम प्रमुख है। कार्यक्रम में श्री माणिभद्र वीर (दिव्यांग सेवा) भक्ति मंडल, मुंबई के अध्यक्ष प्रकाशजी ढालावत सहित मंडल के कार्यकर्ताओं के स्मृति चिन्ह देकर बहुमान किया गया।</p>
<p>इसी अवसर पर श्री नाकोडा भैरव दर्शन धाम महातीर्थ, ढेकाले विलेज के सचिव सुप्रसिद्ध भवन निर्माता दिनेश ज्योतिचंद जैन को “शासन गौरव रत्न” से विभूषित किया गया।</p>
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		<title>शास्त्र उन्नयन एवं श्रुत संरक्षण का महापर्व है यह दिन : सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय ने मनाया श्रुत पंचमी प्राकृत भाषा दिवस </title>
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		<pubDate>Wed, 24 May 2023 13:03:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रुत पंचमी प्राकृत भाषा दिवस के पावन अवसर पर जैन अध्ययन केंद्र, क.जे. धर्मा स्टडीस, सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय, मुम्बई द्वारा &#8216;प्राकृत अध्ययन की महत्ता एवं आवश्यकता&#8217; विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन श्रुत पंचमी की पूर्व संध्या को किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; मुंबई। श्रुत पंचमी प्राकृत भाषा दिवस के पावन अवसर पर जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रुत पंचमी प्राकृत भाषा दिवस के पावन अवसर पर जैन अध्ययन केंद्र, क.जे. धर्मा स्टडीस, सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय, मुम्बई द्वारा &#8216;प्राकृत अध्ययन की महत्ता एवं आवश्यकता&#8217; विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन श्रुत पंचमी की पूर्व संध्या को किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंबई।</strong> श्रुत पंचमी प्राकृत भाषा दिवस के पावन अवसर पर जैन अध्ययन केंद्र, क.जे. धर्मा स्टडीस, सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय, मुम्बई द्वारा &#8216;प्राकृत अध्ययन की महत्ता एवं आवश्यकता&#8217; विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन श्रुत पंचमी की पूर्व संध्या को किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ जैन अध्ययन केंद्र के एम.ए. जैनोलॉजी एंड प्राकृत की छात्रा अल्पा वासा के प्राकृत मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम के संयोजक एवं जैन सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरिहन्त ने प्राकृत भाषा में ही श्रुत पंचमी की महत्ता को प्रस्तुत करने के साथ ही विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि आचार्य पुष्पदन्त और आचार्य भूतबलि ने, आचार्य धरसेन की सैद्धान्तिक देशना को श्रुतज्ञान द्वारा स्मरण कर, उसे ‘षट्खण्डागम’ नामक महान् परमागम के रूप में प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध कर, ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन पूर्ण किया। अत: यह दिवस शास्त्र उन्नयन एवं श्रुत संरक्षण के महापर्व श्रुतपंचमी के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।</p>
<p><strong> प्राच्य परंपराओं की हर भाषा को सीखें</strong></p>
<p>संस्था की निदेशिका डॉ. सुप्रिया राय ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि धर्म अध्ययन केंद्र का मुख्य उद्देश्य प्राकृत, पाली, संस्कृत जैसी प्राच्य भाषाओं के अध्ययन के प्रति लोगों का जागरूक करना एवं इनका शोधपरक कार्यों के माध्यम से संवर्धन करना है। हमें प्राच्य परंपराओं की हर भाषा को सीखना चाहिए क्योंकि मूल भारतीय ज्ञान परंपरा इन भाषाओं में ही संरक्षित है। अतः अकादमिक स्तर पर हमारी, इन भाषाओं के संरक्षण की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, जिसका एक मात्र समाधान इसका पठन-पाठन ही है।</p>
<p><strong>प्राकृत साहित्य धर्म, दर्शन, ज्ञान, विज्ञान से परिपूर्ण</strong></p>
<p>जैन अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. शुद्धात्म प्रकाश जैन ने कवि वाक्पतिराज कृत गौडवहो ग्रंथ की प्राकृत गाथा को उद्धृत करते हुए कहा कि जिस प्रकार सभी नदियां समुद्र में मिल जाती हैं, उसी प्रकार सभी भाषाएँ प्राकृत भाषा से उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृत साहित्य धर्म, दर्शन, ज्ञान, विज्ञान से परिपूर्ण है । उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि श्रुत पंचमी को प्राकृत भाषा दिवस के रूप में मनाने का संकल्प, कुंदकुंड भारती परिसर, नई दिल्ली में 28-30 अक्टूबर 1994 को, पूज्य राष्ट्रसंत श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित राष्ट्रीय शौरसेनी प्राकृत संगोष्ठी में प्रो. फूलचंद जैन प्रेमी (वाराणसी) द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जिसका समर्थन प्रो. रमेशचंद जैन (बिजनौर) ने किया और जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था। पूज्य आचार्यश्री ने आशीर्वाद देकर इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए, &#8216;प्राकृत भाषा दिवस&#8217; घोषित किया और ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी यानि श्रुतपंचमी महापर्व को, 1995 से &#8216;प्राकृत भाषा दिवस&#8217; के रूप में भी मनाया जाने लगा । साथ ही उन्होंने सोमैया जैन सेंटर में चल रहे जैनदर्शन एवं प्राकृत अध्ययन के विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। विभाग में रिसर्च असिस्टेंट रेशमा ने विशेष वक्ता विद्वान् का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>उपदेश जीव मात्र का कल्याण करने वाले</strong></p>
<p>आमंत्रित विशेष वक्ता डॉ. सुमत कुमार जैन जो कि जैनदर्शन एवं प्राकृत विभाग, मोहनलाल सुखड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, उन्होंने अकादमिक रूप से प्राकृत के पठन-पाठन पर प्रकाश डालते हुए प्राकृत भाषा एवं साहित्य के विविध आयामों को प्रस्तुत किया और इसकी महत्ता एवं आवश्यकता से लोगों को परिचित कराया। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर और गौतम बुद्ध ने अपने उपदेशों का माध्यम इसलिए जनभाषा प्राकृत भाषा को बनाया क्योंकि उनके उपदेश जीवमात्र के कल्याण करने वाले थे। डॉ जैन ने विविध साहित्यिक विधाओं में रचित प्राकृत भाषा के साहित्य का उल्लेख, भाषा वैज्ञानिक अध्ययन एवं उसके माधुर्य को बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा इनके अध्ययन के बिना अधूरी है। खारवेल, अशोक आदि के प्राकृत शिलालेखों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनके अध्ययन से हमें भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं सांस्कृतिक जीवन का ज्ञान होता है। इसके साथ ही उन्होंने प्राच्य भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु, नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इनके पठन-पाठन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए निर्णय की भी प्रशंसा की।</p>
<p><strong>सीमित न करें अध्ययन</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से विद्वानों ने हिस्सा लिया । जैन दर्शन एवं प्राकृत के वरिष्ठ विद्वान् प्रो. फूलचन्द जैन प्रेमी ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्राच्य भाषाओं को किसी संप्रदाय से जोड़कर, इसके अध्ययन को सीमित नहीं करना चाहिए । अर्धमागधी, मागधी, शौरसेनी, महाराष्ट्री की तरह पालि भी प्राकृत की ही शाखा है। अनेक संस्कृत विद्वानों ने प्राकृत साहित्य रचा, नाटकों में प्राकृत भाषा का प्रयोग किया है। अतः भारतीय संस्कृति को सम्यक् समझने के लिए प्राकृत का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से अनेक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, भाषाविदों आदि ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया एवं उपस्थित विद्वानों के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं, प्रश्न आदि रखकर समाधान प्राप्त किया।<strong> </strong></p>
<p><strong>उत्साह से सीखें प्राकृत भाषा</strong></p>
<p>अंत में कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अरिहन्त कुमार जैन ने उपस्थित सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह हम अवकाश आदि का सदुपयोग करते हुए जर्मन, फ्रेंच, चाइनीज आदि कठिन विदेशी भाषाओं को भरपूर उत्साह से सीखते हैं, कोर्स करते हैं, वही उत्साह हमें प्राकृत आदि प्राच्य भाषाओं को भी सीखने के प्रति भी होना चाहिए, जिसके पाठ्यक्रम आज अनेक विश्वविद्यालयों, संस्थानों आदि में सहज उपलब्ध हैं। अतः हमें जागरूक होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का समापन करते हुए आमंत्रित मुख्य वक्ता एवं उपस्थित विद्वानों का धन्यवाद ज्ञापन वर्षा शाह ने किया।</p>
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