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	<title>morena &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर धर्मसभा : पद और प्रतिष्ठा का अभिमान स्वयं को नीचे गिराता है &#8211; आचार्य निर्भयसागर </title>
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		<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:18:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ भगवान महावीर स्वामी ने कहा, “पाप से घृणा करो, पापी से नहीं; अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं।” महावीर स्वामी द्वारा दिए गए उपदेशों को जीवन में उतारने से आत्मबल और संयम की प्राप्ति होती है। यह बात जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़ा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> भगवान महावीर स्वामी ने कहा, “पाप से घृणा करो, पापी से नहीं; अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं।” महावीर स्वामी द्वारा दिए गए उपदेशों को जीवन में उतारने से आत्मबल और संयम की प्राप्ति होती है। यह बात जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़ा जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> भगवान महावीर स्वामी ने कहा, “पाप से घृणा करो, पापी से नहीं; अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं।” महावीर स्वामी द्वारा दिए गए उपदेशों को जीवन में उतारने से आत्मबल और संयम की प्राप्ति होती है। जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज ने भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़ा जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पतित को पावन बनाना, अज्ञानी को ज्ञानी बनाना, शैतान को इंसान बनाना और इंसान को परमात्मा बनाना ही हमारा मूल ध्येय होना चाहिए। उन्होंने उपदेश दिया कि हमें दूसरों की मदद करने और उन्हें ऊपर उठाने का कार्य करना चाहिए।</p>
<p><strong>महावीर हमारे अंतरंग में बसते हैं</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने बताया कि हमने महावीर को मंदिरों में कैद कर दिया है, जबकि वे हमारी आत्मा में बसते हैं। यदि हम अपने अंतरंग में झांकें, तो उन्हें पाएंगे।</p>
<p><strong>पद और प्रतिष्ठा पर नसीहत</strong></p>
<p>उन्होंने मंदिर के पदाधिकारियों को बताया कि पद और प्रतिष्ठा का अभिमान समाज में अहंकार, भेदभाव और दूरी पैदा करता है। यह सच्चे सम्मान की भावना को कमजोर करता है और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ता है। पद केवल जिम्मेदारी लाता है, अभिमान नहीं। एक स्वस्थ समाज के लिए मानवीय गरिमा और व्यवहार का सम्मान प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण है।</p>
<p>आचार्यश्री ने कहा, “सब जीवों से मैत्री का व्यवहार करो, और घर आये शत्रु से भी प्रेम का व्यवहार करो।”</p>
<p><strong>पुस्तकों का विमोचन</strong></p>
<p>जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज द्वारा लिखित चार पुस्तकें—मानवीय कर्तव्य और जैन धर्म, गुरु प्रसाद, जीवन परिचय, अतीत के पन्ने—का विमोचन अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, उद्योगपति पवन जैन, अभिषेक जैन टीटू और बाबूलाल जैन ने किया। मानवीय कर्तव्य और जैन धर्म पुस्तक को एकलव्य यूनिवर्सिटी ने अपने सिलेबस में शामिल किया है।</p>
<p><strong>आचार्य संघ का सिहोनिया के लिए मंगल विहार</strong></p>
<p>जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव में सान्निध्य प्रदान करने के पश्चात सिहोनिया के लिए मंगल विहार करेंगे। वे अतिशय क्षेत्र सिहोनिया, अम्बाह, पिनाहट, शौरीपुर, बटेश्वर, शिकोहाबाद और फिरोजाबाद होते हुए टूंडला में श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के लिए 10 अप्रैल को भव्य मंगल प्रवेश करेंगे।</p>
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		<title>नगर में श्री जी की हुई आरती : श्री महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव पर निकाली भव्य पालकी यात्रा </title>
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		<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:15:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में आज प्रातः भव्य चल समारोह आयोजित किया गया। श्री महावीर जी को पालकी में विराजित कर नगर के मुख्य मार्गों से चल समारोह निकाला गया। महेश्वर फाटे तक पहुंचते हुए जगह-जगह श्री जी की आरती की गई और श्रीफल अर्पित किए गए। इस अवसर पर नगर का प्रसिद्ध बैंड [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में आज प्रातः भव्य चल समारोह आयोजित किया गया। श्री महावीर जी को पालकी में विराजित कर नगर के मुख्य मार्गों से चल समारोह निकाला गया। महेश्वर फाटे तक पहुंचते हुए जगह-जगह श्री जी की आरती की गई और श्रीफल अर्पित किए गए। इस अवसर पर नगर का प्रसिद्ध बैंड भक्ति भजन की मधुर धुन पर बज रहा था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में आज प्रातः भव्य चल समारोह आयोजित किया गया। श्री महावीर जी को पालकी में विराजित कर नगर के मुख्य मार्गों से चल समारोह निकाला गया। महेश्वर फाटे तक पहुंचते हुए जगह-जगह श्री जी की आरती की गई और श्रीफल अर्पित किए गए। इस अवसर पर नगर का प्रसिद्ध बैंड भक्ति भजन की मधुर धुन पर बज रहा था।</p>
<p>इस दौरान पुरुषों ने सफेद कुर्ता-पायजामा धारण किया, जबकि महिलाएं केसरिया साड़ी में सजी हुई थीं। युवा झंडे और बैनर लेकर नारे लगा रहे थे। “जियो और जीने दो”, “अहिंसा परमो धर्म की जय” जैसे नारे गगन चुभ रहे थे। धामनोद के नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक आरती और भक्ति में सहभागिता की। नगर में पेयजल की भी व्यवस्था की गई थी और चल समारोह अनुशासनपूर्वक संपन्न हुआ।</p>
<p>चल समारोह पुनः मंदिर में पहुंचा, जहाँ धार्मिक क्रियाओं के अनुसार भगवान को पालकी रथ यात्रा में उठाकर पाण्डुक शीला पर विराजमान किया गया। जल के स्वर्ण कलश का अभिषेक जैन व रजत कलश—सोनल अभिषेक जैन, रियांश अमीषि सेठी, सावन संजय जैन, प्रकाश जैन द्वारा किया गया। शांतिधारा—धैर्य धीरेन्द जैन ने और श्री जी की आरती महिला मंडल के साथ संपन्न कराई।</p>
<p>विशेष अवसर पर वीरप्रभुजी को पालने में झूला झुलाने का सौभाग्य भी मिला, जिसे प्रथम बार अर्हम अमित त्रिशला जैन (अमेरिका) ने किया।</p>
<p>समाज अध्यक्ष महेश जैन और सचिव दीपक प्रधान ने जानकारी दी कि महावीर जन्मकल्याणक के वात्सल्य भोज के प्रायोजक थे डॉ. प्रकाश जैन, नरेंद्र जैन (अनाज वाले) और चंदा बाई स्व नेमीचंद जैन, संजय जितेंद्र जैन। समाज और मुनिसेवा समिति के सदस्यों ने उन्हें सम्मानित किया।</p>
<p>इस अवसर पर स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। अक्षत ब्लड बैंक और कमला बेन हॉस्पिटल की ओर से भव्य रक्तदान शिविर लगाया गया, जिसमें पीयूष जैन, राजेश जैन, नीलेश जैन, चेतन जैन, लवीश जैन, अंतिम जैन, प्रभु स्वामी सहित अन्य ने रक्तदान किया। निःशुल्क रक्त-प्रेशर, खून और रक्त समूह की जांच की गई। नगर के चिकित्सकों, पैथोलॉजी, केमिस्ट और सोनोग्राफी सेंटर द्वारा जरूरतमंदों को निःशुल्क जांच और छूट भी प्रदान की गई। समाजजन और मुनिसेवा समिति की टीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में शानदार सहयोग दिया। मंदिर में भव्य रोशनी की गई, जो नगर का आकर्षण केंद्र बनी। शाम को श्री जी की आरती संपन्न हुई और वीरप्रभुजी को बालक सुंदर सजावट कर झूले में बैठाया गया। महिलाओं, समाजजन और मुनिसेवा समिति के सदस्यों ने भक्ति भजन और झालुरिया प्रस्तुत कर पुण्य अर्जित किया। इस कार्यक्रम की जानकारी मुनिसेवा समिति के अध्यक्ष सचिन जैन, संजय जैन और मीडिया प्रभारी यश जैन ने साझा की।</p>
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		<title>अंतरराष्ट्रीय संस्था स्याद्वाद युवा क्लब की नई पहल : बच्चों के सपनों को नई उड़ान देता स्याद्वाद स्पोर्ट्स लीग सीजन-2 </title>
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		<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:12:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज की सेवाभावी अंतरराष्ट्रीय संस्था स्याद्वाद युवा क्लब, जो पिछले 16 वर्षों से समाजहित में सक्रिय है, ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने के लिए एक प्रेरणादायक पहल की। सामाजिक उत्थान, युवा सशक्तिकरण और खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 29 मार्च 2026 को खेकरा स्टेडियम, खेकरा (बागपत) में स्याद्वाद स्पोर्ट्स लीग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज की सेवाभावी अंतरराष्ट्रीय संस्था स्याद्वाद युवा क्लब, जो पिछले 16 वर्षों से समाजहित में सक्रिय है, ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने के लिए एक प्रेरणादायक पहल की। सामाजिक उत्थान, युवा सशक्तिकरण और खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 29 मार्च 2026 को खेकरा स्टेडियम, खेकरा (बागपत) में स्याद्वाद स्पोर्ट्स लीग सीजन-2 का भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/खैकड़ा।</strong> जैन समाज की सेवाभावी अंतरराष्ट्रीय संस्था स्याद्वाद युवा क्लब, जो पिछले 16 वर्षों से समाजहित में सक्रिय है, ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने के लिए एक प्रेरणादायक पहल की। सामाजिक उत्थान, युवा सशक्तिकरण और खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 29 मार्च 2026 को खेकरा स्टेडियम, खेकरा (बागपत) में स्याद्वाद स्पोर्ट्स लीग सीजन-2 का भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास, प्रतिभा और अनुशासन को विकसित करने का एक सशक्त मंच बनकर उभरा। प्रतियोगिताओं में 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर दौड़, 4×100 मीटर रिले, हाई जंप, लॉन्ग जंप और शॉट पुट जैसी प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गईं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसमें 9 प्रमुख विद्यालयों—स्याद्वाद जैन अकादमी, देव कृष्णा स्कूल, ऋषिकुलम, आर.के. इंटरनेशनल, जेपी अकादमी, एंबियंस ग्लोबल पब्लिक स्कूल, आदर्श गर्ल्स इंटर कॉलेज और कोणार्क विद्यापीठ—के 400 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। एंबियंस ग्लोबल पब्लिक स्कूल ने विजेता का खिताब जीता, जबकि पिछले सीजन के विजेता स्याद्वाद जैन अकादमी ने दूसरा स्थान हासिल किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम की गरिमा तब और बढ़ी जब क्षेत्रीय विधायक श्री विकास धामा और जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती अश्मिता लाल उपस्थित हुए। दोनों ने बच्चों के प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि खेल बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह उन्हें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आयोजन की सफलता में समाजसेवियों और उद्यमियों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। श्री राजेंद्र प्रसाद जैन, श्री महेंद्र कुमार जैन, श्री प्रदीप जैन, श्री अनुज जैन, श्री सुदीप जैन, श्री संजीव जैन और श्री मनोज जैन सहित अन्य सहयोगियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अभिभावकों और शिक्षकों ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उनके प्रोत्साहन ने प्रतियोगिता को और रोमांचक बनाया। आयोजन ने समाज के लिए यह संदेश भी दिया कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आज के समय में, जब बच्चे तकनीकी उपकरणों और डिजिटल दुनिया में अधिक व्यस्त हैं, ऐसे खेल आयोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। स्याद्वाद युवा क्लब का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। इस आयोजन ने बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और सपनों को साकार करने का अवसर प्रदान किया। स्याद्वाद स्पोर्ट्स लीग सीजन-2 वास्तव में बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने वाला एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन रहा।</p>
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		<title>श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न : भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर दिया जैन एकता और सादगीपूर्ण धर्म पालन का संदेश </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 09:23:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए नितिन जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल (हरियाणा)।</strong> भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो गया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। भक्तगणों ने स्नात्र पूजा एवं अभिषेक में बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंत्रोच्चार, धूप-दीप और भक्ति संगीत के मध्य जल, केसर, चंदन एवं पुष्पों से प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को धर्ममय एवं पवित्र बनाने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>सिद्धांतों पर डाला प्रकाश</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत शांतिधारा का आयोजन किया गया, जिसमें समस्त विश्व में शांति, सद्भाव, समृद्धि एवं अहिंसा के प्रसार की कामना की गई। “जियो और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” के उद्घोष से पूरा तीर्थ क्षेत्र गुंजायमान रहा। इस अवसर पर भगवान महावीर के जीवन एवं उनके सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला गया। उनके त्याग, तप, संयम और सत्य के मार्ग को अपनाने का संदेश देते हुए कहा गया कि सच्चा धर्म बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता, करुणा और सरलता में निहित है।</p>
<p><strong>बताई एकजुटता की आवश्यकता</strong></p>
<p>जैन समाज की एकता पर विशेष बल देते हुए कहा गया कि वर्तमान समय में सभी मतभेदों और विभाजनों से ऊपर उठकर एकजुट होना आवश्यक है। भगवान महावीर के अनेकांत और सहिष्णुता के सिद्धांतों को अपनाकर ही समाज सशक्त और संगठित बन सकता है। साथ ही साधु-साध्वियों एवं श्रावक-श्राविकाओं से विनम्र आग्रह किया गया कि वे भगवान महावीर के मूल सिद्धांतों का पालन करें और धर्म को आडंबर एवं दिखावे से दूर रखते हुए सादगी, संयम और सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलें। धर्म की प्रभावशीलता आचरण से आती है, न कि बाहरी भव्यता से। यह आयोजन समस्त समाज के लिए प्रेरणादायक एवं कल्याणकारी सिद्ध हुआ, जिसने सभी को आत्मचिंतन और सच्चे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।</p>
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		<title>जन्म कल्याणक पर भगवान महावीर ने किया नगर भ्रमण धार्मिक आयोजन: समाज को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं &#8211; आचार्य निर्भयसागर </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 09:20:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। जिसने उनके सिद्धांतों को स्वीकार किया, वही सच्चे अर्थों में जैन कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने आगे कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी के जन्म कल्याणक से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक तक लगातार 20 दिनों तक धार्मिक आयोजन किए जाने चाहिए, क्योंकि यह अवधि आत्मचिंतन, साधना और धर्म के गहन अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान यदि श्रद्धालु नियमित रूप से धर्मकार्य, स्वाध्याय और साधना में संलग्न रहें, तो उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। धार्मिक आयोजन समाज में धार्मिक जागरूकता को बढ़ाते हैं और लोगों को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जैन मित्र मंडल ने की रथयात्रा की भव्य अगवानी</strong></p>
<p>मानव सेवा हेतु समर्पित समाजसेवी संस्था जैन मित्र मंडल के एक सैकड़ा से अधिक कार्यकर्ताओं ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव पर आयोजित भव्य एवं विशाल श्रीजी शोभायात्रा की भव्य अगवानी की। जैन मित्र मंडल, मुरैना के सभी सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में—सिर पर गुलाबी एवं केसरिया पगड़ी तथा श्वेत वस्त्र धारण कर जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के साथ गगनभेदी जयघोष करते हुए चल रहे थे। एक समान परिधान में सुसज्जित सदस्य सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। गोपीनाथ की पुलिया पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से आचार्यश्री का पाद-प्रक्षालन किया तथा भगवान महावीर स्वामी की आरती कर भव्य स्वागत किया।</p>
<p><strong>रथयात्रा के समापन पर हुए कलशाभिषेक</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर भव्य एवं विशाल रथयात्रा निकाली गई। पीत वस्त्रों में सुसज्जित इंद्रों ने भगवान महावीर स्वामी को रथ में विराजमान कर बड़े जैन मंदिर से यात्रा प्रारंभ की। यह यात्रा गोपीनाथ की पुलिया, जीवाजी गंज, सूबात रोड, पुल तिराहा, हनुमान चौराहा, स्टेशन रोड, शंकर बाजार, सदर बाजार, सराफा बाजार और लोहिया बाजार से होती हुई पुनः बड़े जैन मंदिर पहुंची, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। जैन मंदिर में भगवान की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान कर विधिवत कलशाभिषेक किया गया। प्रासुक शुद्ध जल से भरे कलशों की जलधारा जैसे ही भगवान के मस्तक पर प्रवाहित हुई, पूरा मंडप तालियों, घंटा-घड़ियाल और महावीर स्वामी के जयकारों से गूंज उठा। सभी उपस्थित साधर्मी बंधुओं ने इस पावन अवसर पर सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>नंगे पैर चलकर, हाथों से खींचा भगवान का रथ</strong></p>
<p>भव्य रथयात्रा में जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज, मुनिश्री सुदत्तसागर महाराज, मुनिश्री भूदत्तसागर महाराज, क्षुल्लकश्री चंद्रदत्तसागर महाराज तथा क्षुल्लकश्री यशोदत्तसागर महाराज के सान्निध्य में सैकड़ों साधर्मी बंधु, माताएं, बहनें और युवा साथी शामिल हुए। सभी श्रद्धालु भगवान महावीर स्वामी का गुणगान करते हुए नंगे पैर चल रहे थे। युवा साथियों ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचकर अपनी जिनेंद्र भक्ति का परिचय दिया। भव्य शोभायात्रा में घोड़ों पर सवार युवाओं के हाथों में पचरंगा ध्वज, घोड़ा-बग्गी में विराजमान इंद्र-इंद्राणी एवं आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। सभी साधर्मी बंधु सिर पर सफेद टोपी और गले में सुनहरी चुनरी धारण किए हुए थे। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर भगवान महावीर स्वामी एवं पूज्य आचार्य संघ की आरती कर भव्य अगवानी की गई।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण दिवस पर मुरैना में दी प्रेरणादायी देशना : हम गुरुओं को मानते हैं, लेकिन गुरुओं की नहीं मानते &#8211; जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:10:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना (मनोज जैन नायक)।</strong> हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>गुरु की आज्ञा का पालन ही आत्मकल्याण का आधार</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि जैन दर्शन में गुरु-आचार्यों को मोक्ष मार्ग का मार्गदर्शक मानकर सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु की आज्ञा की अवहेलना सम्यक ज्ञान और चारित्र की हानि का कारण बनती है, जिससे आत्मा का विकास रुक जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु की अवज्ञा से शिष्य की साधना निष्फल हो सकती है, आध्यात्मिक पतन हो सकता है और कर्मों के बंधन के कारण मोक्ष मार्ग में बाधा उत्पन्न होती है। गुरु का अपमान करना गंभीर पाप कर्म है, जो जीव को निम्न गति की ओर ले जा सकता है।</p>
<p><strong>गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास आवश्यक</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास की कमी से ज्ञान मार्ग में अंधकार छा जाता है और सही-गलत की पहचान समाप्त हो जाती है। यदि शिष्य गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करता, तो कठोर तपस्या भी निरर्थक हो जाती है। उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति अविश्वास या अवज्ञा से सम्यक दर्शन प्रभावित होता है, जो मोक्ष की पहली सीढ़ी है। गुरु के अनुशासन में न रहने से शिष्य के चरित्र में भी दोष उत्पन्न होते हैं।</p>
<p><strong>गुरु कृपा से ही जीवन सफल &#8211; आचार्य श्री</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज जो कुछ भी हैं, वह अपने गुरु आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी एवं आचार्य श्री विपुलसागर जी महाराज के आशीर्वाद से ही हैं।</p>
<p><strong>20वां आचार्य पदारोहण दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया</strong></p>
<p>सकल दिगंबर जैन समाज, मुरैना द्वारा आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज का 20वां आचार्य पदारोहण दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में मांगलिक क्रियाओं के साथ जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और सुख-समृद्धि की कामना के साथ भक्तिमय अनुष्ठान संपन्न किए।</p>
<p><strong>विधान, पूजन और भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत श्री महावीर स्वामी विधान में अर्घ्य समर्पित किए गए। तत्पश्चात आचार्य श्री का अष्टद्रव्यों से पूजन कर उनकी महिमा का गुणगान किया गया तथा दीर्घायु की कामना की गई। बालिका मंडल एवं महिला मंडल द्वारा अष्टद्रव्यों से भक्ति भावपूर्वक पूजन कर समस्त मुनिराजों को अर्घ्य समर्पित किए गए। गुरु भक्तों ने संगीत की मधुर धुन एवं जैन भजनों पर नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक, पाद प्रक्षालन और सम्मान</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। श्रावक श्रेष्ठियों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट किए। धर्मसभा का संचालन पूर्व प्राचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, संजय शास्त्री, अजय भैयाजी एवं नवनीत शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार के साथ किया गया।</p>
<p><strong>निकलेगी भगवान महावीर की भव्य रथयात्रा</strong></p>
<p>भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।</p>
<p>इस रथयात्रा में आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज, मुनि श्री भूदत्तसागर जी महाराज, मुनि श्री सुदत्तसागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री चंद्रदत्तसागर एवं क्षुल्लक श्री यशोदत्तसागर महाराज सान्निध्य प्रदान करेंगे।</p>
<p><strong>भव्य शोभायात्रा और धार्मिक आयोजन रहेंगे आकर्षण</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को रथ पर विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो पुनः बड़े जैन मंदिर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित होगी। मंदिर में भगवान को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर कलशाभिषेक किया जाएगा। इसके पश्चात सामूहिक वात्सल्य भोज का आयोजन होगा। रात्रि में भगवान महावीर के बालरूप का पालना झुलाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।</p>
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		<title>निरंतर 23 घंटे दौड़कर चतुर्थ स्थान प्राप्त किया : कनक जैन ने हेलरेश में 160 किमी दौड़कर रचा इतिहास </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:59:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के होनहार एवं उत्साही धावक कनक जैन ने हेलरेश प्रतियोगिता में लगातार 23 घंटे दौड़कर 160 किलोमीटर की दूरी पूरी करते हुए चतुर्थ स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना/दिल्ली। जैन समाज के होनहार एवं उत्साही धावक कनक जैन ने हेलरेश प्रतियोगिता में लगातार 23 घंटे दौड़कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के होनहार एवं उत्साही धावक कनक जैन ने हेलरेश प्रतियोगिता में लगातार 23 घंटे दौड़कर 160 किलोमीटर की दूरी पूरी करते हुए चतुर्थ स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/दिल्ली।</strong> जैन समाज के होनहार एवं उत्साही धावक कनक जैन ने हेलरेश प्रतियोगिता में लगातार 23 घंटे दौड़कर 160 किलोमीटर की दूरी पूरी करते हुए चतुर्थ स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। गुजरात के ढोलावीरा में आयोजित वर्ल्ड रेस में दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के श्रावक श्रेष्ठी एवं वरिष्ठ समाजसेवी राजीव जैन एवं शालिनी जैन (जनकपुरी, दिल्ली) के सुपुत्र कनक जैन ने यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। उन्होंने लगातार 23 घंटे तक दौड़ते हुए चौथे रनरअप धावक के रूप में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह एक अत्यंत कठिन प्रतियोगिता होती है, जिसमें प्रतिभागियों को बिना रुके निर्धारित दूरी तक निरंतर दौड़ना होता है। इस चुनौतीपूर्ण रेस में कनक जैन ने 160 किलोमीटर की दूरी तय कर न केवल चौथा स्थान प्राप्त किया, बल्कि जैन समाज के पहले ऐसे धावक बने, जिन्होंने इस प्रकार की अल्ट्रा रेस को इतनी कम अवधि में सफलतापूर्वक पूरा किया। कनक जैन के पिता श्री राजीव जैन वर्तमान में सनमति फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं और समाज सेवा के कार्यों में सदैव सक्रिय रहते हैं। कनक जैन की इस उपलब्धि पर उनके परिवारजनों एवं शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। इस उपलब्धि पर उनकी धर्मपत्नी पलक जैन, पिताश्री राजीव जैन, माताश्री शालिनी जैन, दादी सुशीला जैन सहित अनेक इष्टमित्रों एवं समाजजनों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर महेंद्र जैन (मधुबन), अनिल जैन (नोएडा), अजीत जैन (ग्रीन पार्क), सीए कपिल जैन (विकासपुरी), संजीव जैन (यूएसए), अश्विनी जैन (नोएडा), श्रीमती श्वेता जैन (नोएडा), नवीन जैन (नोएडा), संजीव जैन (कड़कड़डूमा), श्रीमती लिली जैन (मधुबन), राहुल जैन, डॉ. मोनिका जैन, गोकुलचंद जैन (शकरपुर), राजू जैन (गणेश नगर), नवीन जैन, चौधरी मोहित जैन &#8220;चीकू&#8221;, अजय जैन &#8220;बॉबी&#8221;, श्रीमती नीरु जैन (नोएडा), सीए अजय जैन, गिरीश जैन (गुड़गांव), हरिश्चंद्र जैन (शांतिनाथ सेवा संघ, दिल्ली), श्री दिनेश जैन (T2), अजय जैन &#8220;अजिया&#8221;, प्रदीप जैन (शकरपुर), अंकित जैन (अहिंसा प्रभावना) सहित अनेक लोगों ने शुभकामनाएं प्रेषित कीं।</p>
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		<title>बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक संस्कारों का विकास करना उद्देश्य : विद्वत नवनीत शास्त्री पुनः धार्मिक संस्कार शिविर के प्रभारी मनोनीत </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:29:19 +0000</pubDate>
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<p><strong>नगर के विद्वान नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविरों के आयोजन के लिए चम्बल संभाग का शिविर प्रभारी पुनः मनोनीत किया गया है। ज्ञातव्य हो कि श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) द्वारा प्रतिवर्ष पूरे भारतवर्ष में ग्रीष्मकालीन धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> नगर के विद्वान नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविरों के आयोजन के लिए चम्बल संभाग का शिविर प्रभारी पुनः मनोनीत किया गया है। ज्ञातव्य हो कि श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) द्वारा प्रतिवर्ष पूरे भारतवर्ष में ग्रीष्मकालीन धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इन शिविरों का उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में धार्मिक संस्कारों का विकास करना होता है।</p>
<p><strong>मुनि सुधासागर महाराज के सान्निध्य में हुई नियुक्ति</strong></p>
<p>शिविरों की रूपरेखा तय करने हेतु ललितपुर में आयोजित बैठक में जगतपूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में देशभर के शिविर प्रभारियों की नियुक्ति की गई। इस अवसर पर भारतवर्षीय शिविर प्रभारी उत्तमचंद पाटनी अपनी टीम एवं अन्य प्रभारियों के साथ उपस्थित रहे। मुनि श्री ने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि बच्चों के भीतर संस्कारों का बीजारोपण करने के लिए सभी जैन मंदिरों में ऐसे शिविरों का आयोजन अनिवार्य रूप से होना चाहिए। उन्होंने “मां जिनवाणी” के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया।</p>
<p><strong>चम्बल संभाग में सक्रिय भूमिका</strong></p>
<p>सांगानेर संस्थान द्वारा पुनः चम्बल संभाग का प्रभारी विद्वत नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि वे पिछले कई वर्षों से चम्बल संभाग में वृहद स्तर पर धार्मिक शिविरों का सफल संचालन कर धर्म प्रभावना कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मई-जून में होंगे शिविर आयोजित</strong></p>
<p>नवनीत जैन ‘शास्त्री’ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष भी पूज्य गुरुदेव मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से चम्बल संभाग के विभिन्न जिनालयों में मई से जून माह के दौरान धार्मिक संस्कार शिविर आयोजित किए जाएंगे। समाज के गणमान्य श्रेष्ठजनों ने शिविरों के सफल आयोजन एवं धर्म प्रभावना के लिए शिविर प्रभारी नवनीत जैन ‘शास्त्री’ को मंगल शुभकामनाएं प्रदान कीं। ये शिविर सकल दिगंबर जैन समाज, विभिन्न संस्थाओं एवं दानवीरों के सहयोग से आयोजित किए जाते हैं।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : अनुष्ठानों की सफलता के लिए मन की विशुद्धि आवश्यक &#8211; आचार्य निर्भयसागर </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 09:17:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सही समय पर किया गया सही कार्य ही प्रशंसनीय और सराहनीय होता है। किसी भी अनुष्ठान को करते समय मन की विशुद्धि अत्यंत आवश्यक है। यदि मन शुद्ध होगा, तो कार्य की शुद्धि और उसकी सफलता स्वतः सुनिश्चित हो जाती है। उक्त उद्गार जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सही समय पर किया गया सही कार्य ही प्रशंसनीय और सराहनीय होता है। किसी भी अनुष्ठान को करते समय मन की विशुद्धि अत्यंत आवश्यक है। यदि मन शुद्ध होगा, तो कार्य की शुद्धि और उसकी सफलता स्वतः सुनिश्चित हो जाती है। उक्त उद्गार जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> धार्मिक आयोजन और अनुष्ठान आत्मकल्याण की भावना से ओतप्रोत होते हैं। हम सभी को समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन करते रहना चाहिए। जब भी हम कोई धार्मिक अनुष्ठान या आयोजन करते हैं, तब हमारे अंतरंग में एक विशेष प्रकार की सुखद अनुभूति होती है और आत्मकल्याण की भावना उत्पन्न होती है। ऐसे अनुष्ठान पतित से पावन बनने, अंतरंग की शुद्धता, विकारों के नाश, भक्ति एवं आराधना, पुण्य संचय तथा पापों के क्षय के लिए किए जाते हैं। सभी धर्मों में अनुष्ठानों का मूल उद्देश्य यही रहता है। सही समय पर किया गया सही कार्य ही प्रशंसनीय और सराहनीय होता है। किसी भी अनुष्ठान को करते समय मन की विशुद्धि अत्यंत आवश्यक है। यदि मन शुद्ध होगा, तो कार्य की शुद्धि और उसकी सफलता स्वतः सुनिश्चित हो जाती है। उक्त उद्गार जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p><strong>धर्मसभा का शुभारंभ</strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। प्रारंभ में श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा पूज्य गुरुदेव का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र आदि भेंट किए गए। सभा का संचालन प्रतिष्ठाचार्य पंडित संजय शास्त्री सिहोनिया एवं प्रतिष्ठाचार्य अजय भैयाजी ज्ञापन तमूरा वाले, दमोह ने किया।</p>
<p><strong>आयोजनों में कार्यकर्ताओं की भूमिका</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कार्यकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्यकर्ता को सुझाव के साथ सहयोग भी देना चाहिए तथा एकता बनाए रखना आवश्यक है। समर्पण, उत्साह, संयम और प्रेम से युक्त कार्यकर्ता ही सबके लिए आदर्श बनता है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में आपसी मेल-मिलाप, सहयोग की भावना तथा एक-दूसरे के कार्य की सराहना करने का भाव होना चाहिए। सच्चा कार्यकर्ता वह है जो पानी में रेत या तेल की तरह न होकर शक्कर की तरह हो। जैसे रेत पानी में डालने पर नीचे बैठ जाती है और तेल ऊपर तैरता है, वैसे कार्यकर्ता नहीं होना चाहिए। बल्कि शक्कर की तरह अपने अस्तित्व की परवाह किए बिना कार्यक्रम में घुलकर मिठास बढ़ाने वाला होना चाहिए।</p>
<p><strong>त्रिदिवसीय भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव</strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री सिहोनिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नगर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के अवसर पर त्रिदिवसीय महोत्सव 28 मार्च से 30 मार्च तक हर्षोल्लासपूर्वक मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>कार्यक्रमों की रूपरेखा</strong></p>
<p>शनिवार, 28 मार्च</p>
<p>प्रातः श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात आचार्यश्री के मंगल प्रवचन होंगे। तत्पश्चात आचार्य श्री विपुलसागरजी महाराज का अवतरण दिवस मनाया जाएगा। शाम 7 बजे श्री जिनवाणी धर्म जागरण यात्रा बड़े जैन मंदिर से कीर्ति स्तंभ तक पहुंचेगी, जहां 48 दीपकों द्वारा भक्तांबर महामंत्र अर्चना की जाएगी।</p>
<p>रविवार, 29 मार्च</p>
<p>प्रातः 5 बजे प्रभात फेरी नगर भ्रमण, 8 बजे महामंत्र णमोकार पाठ, प्रवचन, आचार्य श्री निर्भयसागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस एवं भगवान महावीर स्वामी विधान होगा। सायंकाल इंद्र सभा का आयोजन होगा तथा माता के सोलह स्वप्नों का प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
<p>सोमवार, 30 मार्च</p>
<p>प्रातः 7 बजे भव्य श्रीजी की रथयात्रा निकाली जाएगी। इसके पश्चात 11 बजे कलशाभिषेक, 12 बजे सामूहिक वात्सल्य भोज तथा सायंकाल भगवान महावीर स्वामी के पालन झुलाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।</p>
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		<title>अच्छे विचार और अच्छी दृष्टि ही करती है आचरण का निर्माण: आचार्य निर्भयसागर’ के बड़े जैन मंदिर में हुए मीठे प्रवचन </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:30:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भावना भाव नासनी होती है। विचार विचार को पैदा करते हैं, मधुर वाणी मधुर वाणी को पैदा करती है,आचरण आचरण को पैदा करता है,पैसा पैसे को पैदा करता है। इसलिए हमेशा मधुर वाणी बोलना चाहिए। यह उद्गार आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भावना भाव नासनी होती है। विचार विचार को पैदा करते हैं, मधुर वाणी मधुर वाणी को पैदा करती है,आचरण आचरण को पैदा करता है,पैसा पैसे को पैदा करता है। इसलिए हमेशा मधुर वाणी बोलना चाहिए। यह उद्गार आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> भावना भाव नासनी होती है। विचार विचार को पैदा करते हैं, मधुर वाणी मधुर वाणी को पैदा करती है,आचरण आचरण को पैदा करता है,पैसा पैसे को पैदा करता है। इसलिए हमेशा मधुर वाणी बोलना चाहिए। यह उद्गार आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमें सदैव अच्छा आचरण करना चाहिए और धन अर्जन न्याय नीति से करना चाहिए। गांधी जी ने तीन बंदर बतलाए थे-बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो लेकिन, भगवान महावीर स्वामी ने दो बातें और कहीं बुरा मत सोचो और बुरा मत करो। यदि इन सिद्धांतों को जीवन में उतार दिया जाए तो नियम से सारे विश्व में शांति हो जाएगी। यदि हमारा देखने का नजरिया खराब हो तो दुनिया का नजारा बदल जाता है। इसलिए हमारी अपनी दृष्टि अच्छी होना चाहिए। विचारों का प्रदूषण उत्पन्न होने पर ही परिवार में समाज में और देश में प्रदूषण फैलता है क्योंकि, विचारों के अनुसार ही हमारा आचरण होता है। अध्यात्म के क्षेत्र में विचारों का विनिमय करना चाहिए। साधु उपदेश के माध्यम से सद विचारों का व्यापार अर्थात विनिमय करते हैं। यह विनिमय आत्मा में शांति प्रदान करता है।</p>
<p><strong>आत्म-ज्ञान के लिए चिंतन रूपी औषधि </strong></p>
<p>आचार्यश्री ने जैन दर्शन में भावना भव नाशिनी के सार को समझाते हुए कहा कि-मन में निरंतर शुभ व वैराग्यपूर्ण विचारों का चिंतन करना, जो जन्म-मरण के चक्र को नष्ट कर मोक्ष प्रदान करता है। यह देहात्म-बुद्धि को कम कर आत्मा को आत्मा में रमाने का मार्ग है। मुख्य रूप से बारह भावनाएं संसार के दुःखों से विरक्ति और आत्म-ज्ञान के लिए चिंतन रूपी औषधि हैं। जिस प्रकार शरीर के लिए औषधि की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा के लिए भावनाएं संसार के दुःखों को दूर करने वाली होती हैं। ये भावनाएं मन में छिपे विकारों को नष्ट कर, आत्मा को शुद्ध और निर्मल बनाती हैं। शुभ चिंतन से नए कर्मों का आना रुकता है और पुराने कर्मों का क्षय (निर्जरा) होता है। बाहरी वस्तुओं में सुख खोजने के बजाय, ये भावनाएं आत्मा के निज सुख को पहचानने में सहायक होती हैं।</p>
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