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	<title>Monk &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Monk &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्राचीन जिनालयों,संस्कृति,जिनवाणी का संरक्षण हो :  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने समाजजनों को सौंपी जिम्मेदारी दिलाए संकल्प </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 10:57:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रविवार को पाटोदी लश्कर मंदिर से भट्टारक जी की नसिया के लिए संघ सहित मंगल विहार हुआ। देश के सुप्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ ने विवेक काला के प्रतिष्ठान पर चरण प्रक्षालन किए। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;  जयपुर । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रविवार को पाटोदी लश्कर मंदिर से भट्टारक जी की नसिया के लिए संघ सहित मंगल विहार हुआ। देश के सुप्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ ने विवेक काला के प्रतिष्ठान पर चरण प्रक्षालन किए। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> जयपुर</strong> । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रविवार को पाटोदी लश्कर मंदिर से भट्टारक जी की नसिया के लिए संघ सहित मंगल विहार हुआ। देश के सुप्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ ने विवेक काला के प्रतिष्ठान पर चरण प्रक्षालन किए। अशोक पाटनी नंगे पैर जैन ध्वज लेकर आचार्य श्री के साथ चले। धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में कहा कि प्राचीन मंदिरों में संस्कृति होती है। प्राचीन ग्रंथ होते हैं।जयपुर राणा जी के नसिया से संघ का प्रवेश हुआ। चूलगिरी से भट्टारक जी की नसिया आते-आते अनेक प्राचीन जिनालयों प्राचीन दुर्लभ जिनवाणी के संघ ने दर्शन , किए ।नई-नई कॉलोनी में नए मंदिर बन जाते हैं किंतु सभी को प्राचीन मंदिरों के नियमित दर्शन करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि देश में नगरों की सभी धार्मिक ,सामाजिक संस्थाओं को जैन संस्कृति जिनवाणी के संरक्षण प्रचार प्रसार के लिए समर्पित होकर धर्म का ऋण चुकाने के लिए संगठित होने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>भगवान के उपदेशों को जीवन में ग्रहण करें</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने जयपुर में भी काफी धर्म का बीजारोपण किया है। उनकी प्रतिमा महावीर विद्यालय एवं भट्टारक जी की नसिया में लगाने की प्रेरणा दी ।जिनालयों जिनवाणी का संरक्षण संगठित होकर जयपुर नगर देश में आदर्श प्रस्तुत करें। खुद की प्रभावना के बजाय श्रद्धा,भक्ति, समर्पण से भगवान के उपदेशों को जीवन में ग्रहण अपना कर धर्म के प्रचार प्रसार से धर्म प्रभावना कर मनुष्य जीवन ,जैन कुल को सार्थक करें यह मंगल धर्म देशना 76 वर्षीय वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने वर्षों बाद भट्टारक जी की नसिया प्रवेश के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। इसके पूर्व महावीर विद्यालय में आशीर्वचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया किजैन विद्यालय में संस्कार रूपी बीज से जीवन का निर्माण होता है हमने भी सनावद में महावीर पाठशाला में अध्ययन से संस्कार प्राप्त कर आज इस संयम मार्ग पर है। महावीर स्वामी अंतिम तीर्थंकर होकर उन्होंने धर्म तीर्थ का प्रवर्तन किया। उनका अनुसरण कर अनेक पंच परमेष्ठी हुए हैं। जिसमें हम भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>गौरवशाली आध्यात्मिक संस्कारों का बीजारोपण</strong></p>
<p>विश्व को भगवान महावीर के सिद्धांतों की जरूरत है त्याग से जीवन उन्नत होता है प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने तीर्थंकरों के मार्ग का अनुसरण कर संन्यास धारण किया। उन्होंने जयपुर प्रवास में गौरवशाली आध्यात्मिक संस्कारों का बीजारोपण किया। वर्तमान श्रमण परंपरा उन्हीं की बदौलत है। श्री महावीर स्वामी के संदेशों, उपदेशों को प्रत्येक कक्षा में लगाने का भी सुझाव दिया। श्री महावीर जी कमेटी के सुधांशु कासलीवाल, सुरेश सबलावत, हेमंत सोगानी, रुपिन काला, चंद्र प्रकाश जैन, उमराव मल ने बताया कि शोभायात्रा में जगह-जगह आचार्य श्री की आरती की गई। मंच संचालन कमल बाबू एवं मनीष वेद ने किया।</p>
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		<item>
		<title>रामगंजमंडी के ऐतिहासिक आदिनाथ भगवान का प्रतिष्ठा महोत्सव : राष्ट्रीय रत्न खरतरगच्छाधिपति का मंगल प्रवेश 12 अप्रैल को </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 06:29:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहर के बाजार नंबर 3 में बन रहे आदिनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा का समय अब नजदीक आ गया है। मंदिर निर्माण का कार्य भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। श्रीआदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि मंदिर पूरा बनकर तैयार हो चुका है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शहर के बाजार नंबर 3 में बन रहे आदिनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा का समय अब नजदीक आ गया है। मंदिर निर्माण का कार्य भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। श्रीआदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि मंदिर पूरा बनकर तैयार हो चुका है। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> शहर के बाजार नंबर 3 में बन रहे आदिनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा का समय अब नजदीक आ गया है। मंदिर निर्माण का कार्य भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। श्रीआदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि मंदिर पूरा बनकर तैयार हो चुका है। अंतिम दौर में मंदिर परिसर के सिंह द्वार जो 26 फुट ऊँचा बनेगा, उसका कार्य चल रहा है। यह कार्य अगले 7 दिन में पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रामगंजमंडी की प्रतिष्ठा करवाने राष्ट्रीय रत्न खरतरगच्छाधिपति ने जैसलमेर से 9 मार्च को विहार किया। इस दौरान गुरुदेव ने बाड़मेर में आराधना भवन का शिलान्यास किया और पाली के पास करमावास में एक मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई। शुक्रवार को आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वरजी भीलवाड़ा के पास मांडल पहुंचे। रामगंजमंडी श्रीसंघ की ओर से पूर्व पार्षद साक्षी पारख, श्रेयांस पारख, गौरव बापना, सुशील गोखरू, विजय चोपड़ा ने मांडल पहुंचकर गुरुदेव के दर्शन किए और रामगंजमंडी मंदिर की प्रतिष्ठा महोत्सव की पत्रिका (आमंत्रण) भेंट की एवं प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया।</p>
<p><strong> 12 अप्रैल को सुबह 8 बजे होगा मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>मांडल से आई पूर्व पार्षद साक्षी पारख एवं सुशील गोखरू ने कहा कि इतने लम्बे विहार के बाद भी आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वर के चेहरे पर थकान देखने को नहीं मिली और गुरुदेव रामगंजमंडी पहुंचने के लिये काफी उत्साहित एवं प्रसन्न दिखे। आचार्य 12 अप्रैल को सुबह रामगंजमंडी के नारायण टॉकीज चौराहे से नगर में प्रवेश करेंगे। जहां से गाजे-बाजे के साथ श्रीसंघ उनको बाजार नंबर 3 से होते हुए मंदिर लाएगा। आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वर की निश्रा में बना यह मंदिर इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। मांडल, भीलवाड़ा और ब्यावर के उपस्थित लोगों से मणिप्रभ सुरीश्वरजी ने कहा कि पुराने मंदिर को उतारकर नया शिखरबद्ध मार्बल का मंदिर मात्र 8 महीनों में घिसाई तक करवा कर रामगंजमंडी के राजकुमार पारख ने इतिहास रच दिया। जबकि राजकुमार पारख की बेटी साक्षी पारख, गौरव बापना, विजय चोपड़ा, श्रेयांस पारख ने इसे गुरुदेव की पावन निश्रा और समय समय पर मिले मार्गदर्शन से इतनी कम अवधि में मंदिर का बनना बताया।</p>
<p><strong>प्रतिष्ठा महोत्सव में होंगे कई धार्मिक आयोजन </strong></p>
<p>शहर में 12 से 15 अप्रैल को प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य मणिप्रभ सूरीश्वरजी के प्रवचन, कई तरह की पूजा, हवन, दादावाड़ी की वार्षिक ध्वजा एवं तीनों दिन राजकमल आइल मिल में मोहित बोथरा प्रसिद्ध गायक कलकत्ता, अरिहंत कांकरिया प्रसिद्ध गायक ब्यावर की भजन संध्या होगी। वहीं 14 अप्रैल को मोटीवेशन स्पीकर शांतिभाई गोलेच्छा बम्बई वालों का कार्यक्रम भी होगा। 12 अप्रैल को गाँव सांझी में बाड़मेर की सोनू वडेरा अपनी प्रस्तुति देंगी।</p>
<p><strong>सजने लगा राजकमल आइल मील </strong></p>
<p>कार्यक्रम में व्यवस्था करने वाले मेघा टेन्ट हाउस के सागर शर्मा के की ओर से 1 अप्रैल से ही कार्यक्रम स्थल पर राजकुमार पारख के निर्देशन में तैयारियां शुरू कर दी है। जिसके तहत 35 फिट ऊँचा डोम और 40 फिट चौड़ा हेरिटेज मैन गेट आदि का कार्य शुरू कर चल रहा है एवं रामगंजमंडी के बाजारों में मणिप्रभ सूरीश्वर के आगमन पर स्वागत और अभिनंदन के बड़े-बड़े होर्डिंग एवं कटआउट की भरमार दिखने लगी है। श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने कहा कि 12 अप्रैल को दोपहर में 2 बजे श्रीआदिनाथ जैन मंदिर में वार्ता होगी। जिसमें खरतरगच्छाधीपति संबोधित करेंगे।</p>
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		<title>जीवन में सुख पाने के तीन मूल मंत्र : समाजजनों ने घर-घर आरती, पाद प्रक्षालन और मुनि ससंघ की मंगल अगवानी की </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 08:41:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन में यदि सुख पाना है तो तीन मूल मंत्र याद करना बहुत जरूरी है। हर जीव सुख की चाह में है और सुख हर किसी को नहीं मिल रहा है लेकिन, जीव सुखी इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि, वो उपाय गलत कर रहा है। यह उदगार मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन में यदि सुख पाना है तो तीन मूल मंत्र याद करना बहुत जरूरी है। हर जीव सुख की चाह में है और सुख हर किसी को नहीं मिल रहा है लेकिन, जीव सुखी इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि, वो उपाय गलत कर रहा है। यह उदगार मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> जीवन में यदि सुख पाना है तो तीन मूल मंत्र याद करना बहुत जरूरी है। हर जीव सुख की चाह में है और सुख हर किसी को नहीं मिल रहा है लेकिन, जीव सुखी इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि, वो उपाय गलत कर रहा है। यह उदगार मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज धर्मसभा में कही। सन्मति जैन काका ने बताया की इंदौर से मंगल विहार कर खंडवा में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में अपना सानिध्य प्रदान करने जा रहे विहाररत मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ चार पिच्छी का भव्य मंगल प्रवेश धर्म नगरी सनावद में हुआ। आप का सभी समाजजनों ने पाद प्रक्षालन किया। आप ने नगर के जिनमंदिरों के दर्शन किए। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर पहुंचे। जहां आप के सानिध्य में श्री जी का अभिषेक हुआ। आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना निलय में भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समकक्ष इंदौर, मंडलेश्वर, बड़वाह, खंडवा,औरंगाबाद से पधारे अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। सभा का शुभारंभ संगीता पाटोदी के मंगलाचरण से हुआ।</p>
<p><strong>सनावद हमारा दीक्षा के बाद प्रथम बार आना हुआ</strong></p>
<p>मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि जीवन सुख पाना है तो ये तीन मूल मंत्र अपनाना जरूरी है। पहला मंत्र है समय सूचकता, प्रतिक्रिया विचार, भावुकता से परहेज़। समय सूचकता जिसने टाइम मैनेजमेंट समय सूचकता को समझ लिया वो अपने जीवन में दुःख कभी भी नहीं प्राप्त करेगा। दूसरा मंत्र प्रतिक्रिया विचार जब भी विचार करो की कौन सी प्रतिक्रिया आप के जीवन में मंगल दे और कौन सी प्रतिक्रिया अमंगल दे इसलिए जब भी प्रतिक्रिया दे सोच समझ कर दे। तीसरा मंत्र भावुकता से परहेज़ कर सकते। जिन्हें सुख चाहिए वो भावुकता से परहेज़ करते हैं। मुनि श्री ने कहा कि सनावद हमारा दीक्षा के बाद प्रथम बार आना हुआ। हम 2014 में गुरुदेव पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के साथ आना हुआ था। जो भक्ति आस्था समर्पण उस समय था वो आज भी नगरवासियों का वैसा ही है। आज के इस अवसर पर मुनि श्री को आहारदान देने का सौभाग्य सावित्री बाई कैलाशचंद जटाले परिवार, सौभाग्य चंद जैन बडुद परिवार एवं पाटनी ब्रदर्स परिवार को प्राप्त हुआ। दोपहर में मुनि श्री ने तत्व चर्चा की। इसके खंडवा की ओर मंगल विहार हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>समस्त द्रव्य, भाव और नौ कर्म से रहित होते हैं परमात्मा: आचार्य श्री कनक नंदीजी की वेबिनार में जुटे अनेकों श्रद्धालु </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_supreme_soul_is_devoid_of_all_substances_mental_states_and_nine_types_of_karmas/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 13:52:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि जो निरंजन है वह परमात्मा है। समस्त द्रव्य कर्म भाव कर्म, नोकर्म से रहित होते हैं परमात्मा। डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया डडूका की रिपोर्ट&#8230; डडूका। धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबीनार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि जो निरंजन है वह परमात्मा है। समस्त द्रव्य कर्म भाव कर्म, नोकर्म से रहित होते हैं परमात्मा। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया डडूका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि जो निरंजन है वह परमात्मा है। समस्त द्रव्य कर्म भाव कर्म, नोकर्म से रहित होते हैं परमात्मा।</p>
<p>परमात्मा का गुणधर्म :आकाश में अनंत गुण है वैसे ही परमात्मा में अनंत गुण है। बहिरात्मा देह को आत्मा मानता है वह भी मिथ्या है। जो परम सत्य आत्मतत्व को नहीं जानता है वह बहिरात्मा है। जो शरीर दिखाई देता है सुख-दुख होता है, जो इंद्रियों से दिखाई देता है उसे सत्य मानना बहिरात्मापना है। जीव जिस पर्याय में जन्म लेता है उसे ही स्व स्वरूप जान लेता है। मनुष्य देह में जब मिथ्यादृष्टि होता है तो वह मनुष्य देह को, तिर्यच पर्याय में तिर्यचदेह को, देव पर्याय में देव शरीर को ही शरीर मानता है नारकी पर्याय में नारकी शरीर को ही मै मानता है।</p>
<p><strong>मोह, अंधविश्वास ही मिथ्यात्व</strong></p>
<p>सत्य व तथ्य में अंतर है। अन्य सभी ज्ञान से आध्यात्मिक ज्ञान श्रेष्ठ है आत्मा अनंत शक्ति संपन्न है। अनंतानंत धी, शक्ति संपन्न हरजीव है। स्व संवेदन ज्ञान आध्यात्मिक अनुभव ज्ञान श्रेष्ठ ज्ञान है।</p>
<p>विभावो से जब तक जीव स्वतंत्र नहीं होता तब तक जीव परतंत्र ही रहता है। मोह अंधविश्वास क्रोध मान, माया, लोभ के कारण जीव अपनी आत्मा का दर्शन, ज्ञान नहीं कर सकता है। मोह, अंधविश्वास ही मिथ्यात्व है। गहन करणानुयोग में गणित से वर्णन है। परम श्रेष्ठ, ज्येष्ठ विषय मिथ्या दृष्टि का है इसको जानने के लिए 50-60 ग्रंथ बड़े-बड़े हैं जिन्हें समझना होगा।</p>
<p><strong>रूढिवादी सत्य तथ्य को भी नहीं मानते</strong></p>
<p>गोमटसार ग्रंथ की 18 नंबर गाथा में मिथ्या दृष्टि का वर्णन है कि जो मिथ्या दृष्टि होते हैं वह सर्वज्ञ की वाणी पर भी विश्वास नहीं करते हैं जैसे मरीचि कुमार। व्यवहार में भी जो स्वार्थी मोही, रूढिवादी सत्य तथ्य को भी नहीं मानते हैं। स्पर्श रस गंध, वर्ण का जो ज्ञान इंद्रियों से होता है वह परम सत्य नहीं है। जो सर्वज्ञ ने नहीं बोला निषेध किया है उसको भी मिथ्या दृष्टि मानता है। सर्वज्ञ की वाणी के एक पद को भी एक अक्षर को भी गलत मानना मिथ्यात्व है। सर्वज्ञ द्वारा प्रतिपादित आगम ही परम सत्य है प्रवचन है।</p>
<p><strong>गुरु जो बताते हैं वह मानना चाहिए</strong></p>
<p>अनंत काल तक यह जीव सम्यक दृष्टि नहीं बन पाया। सम्यक दृष्टि बने बिना धर्म प्रारंभ ही नहीं होता। धार्मिक पर्व शांति संगठन एकता के लिए है परंतु इसी में दंगा लड़ाई झगड़ा अधिक है क्योंकि धर्म को नहीं जानते हैं।</p>
<p>जो मतिज्ञान,श्रुत ज्ञान से, लौकिक ज्ञान से स्वार्थ पूर्ण जानते हैं उसको ही स्वच्छंद होकर मनमानी रूप में जानते हैं। विभ्रम, संशय से जानकर मनमानी करते हैं।  हितोपदेशी आप्त, गुरु जो बताते हैं वह मानना चाहिए।</p>
<p>मोहनिय कर्म के उदय से जीव विपरीत श्रद्धान, विपरीत भाव करता है। मिथ्यात्व कर्म के उदय होने पर जीव मिथ्यात्व का गुलाम हो जाता है। इंद्रियां,मन आदि उसके वश में नहीं रहता है। विवशता से जीव अनेक पाप करता है। परंतु विवशता को छोड़ना त्यागना ही धर्म है।</p>
<p>मुनि श्री सुयिज्ञ सागर जी नेआचार्य श्री द्वारा रचित कविता द्वारा मंगलाचरण किया। यह जानकारियां विजयलक्ष्मी गोदावत सागवाड़ा ने दी।</p>
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		<title>मुनि श्री आदित्य सागर जी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश : खंडवा में मुनि श्री के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में होगा </title>
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		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 13:48:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज 4 पिच्छी ससंघ का मंगल प्रवेश आज शुक्रवार चार अप्रैल को प्रातः 8 बजे बड़वाह से सनावद नगर में हुआ। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज 4 पिच्छी ससंघ का मंगल प्रवेश आज शनिवार 4 अप्रैल को प्रातः 8 बजे बड़वाह से सनावद नगर में हुआ। सन्मति काका ने बताया कि सभी समाजजन ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर मुनि संघ की मंगल आगवानी करने पहुंचे। मुनि श्री निरन्तर इंदौर से मंगल पद विहार कर खंडवा में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में अपना सानिध्य प्रदान करने के लिए विहाररत हैं। आप की मंगल देशना एवंआहार चर्या भी नगर सनावद में ही संपन्न हुई।</p>
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		<title>बाड़मेर में पहली बार संथारा उत्सव आयोजित : वकील मीठालाल चोपड़ा ने लिया समाधि मरण, बैकुंठी यात्रा निकाली, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा </title>
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		<pubDate>Sat, 23 Aug 2025 11:24:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाड़मेर में जैन धर्म की महान परंपरा संथारा का आयोजन पहली बार हुआ। 84 वर्षीय वकील मीठालाल चोपड़ा ने चार दिन का संथारा ग्रहण कर शुक्रवार को समाधि मरण को पूर्ण किया। हजारों श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और बैकुंठ यात्रा में भाग लिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बाड़मेर। जैन धर्म की महान परंपरा संथारा (देह त्याग) का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बाड़मेर में जैन धर्म की महान परंपरा संथारा का आयोजन पहली बार हुआ। 84 वर्षीय वकील मीठालाल चोपड़ा ने चार दिन का संथारा ग्रहण कर शुक्रवार को समाधि मरण को पूर्ण किया। हजारों श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और बैकुंठ यात्रा में भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बाड़मेर।</strong> जैन धर्म की महान परंपरा संथारा (देह त्याग) का अद्भुत दृश्य बाड़मेर में पहली बार देखने को मिला। तेरापंथ संप्रदाय से जुड़े 84 वर्षीय वकील मीठालाल चोपड़ा ने संथारा ग्रहण किया, जो शुक्रवार शाम को पूर्ण हुआ। शनिवार को हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजे और णमोकार मंत्र के जाप के बीच उनकी बैकुंठी यात्रा निकाली गई।</p>
<p><strong>चार दिन पूर्व छोड़ा था अन्न-जल</strong></p>
<p>मीठालाल चोपड़ा ने 18 अगस्त की सुबह 11 बजे अपनी इच्छा से चार प्रकार के आहारों का त्याग कर दिया था। इसे जैन धर्म में समाधि मरण या संथारा कहा जाता है। उनके भतीजे जितेंद्र चोपड़ा ने बताया कि यह निर्णय आचार्य श्री महाश्रमण की आज्ञा से लिया गया। 20 अगस्त को विधिवत संकल्प कराया गया और चार दिन का संथारा शुक्रवार को सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>उत्सव का वातावरण</strong></p>
<p>संथारा के बाद चोपड़ा के निवास पर रातभर भजन-कीर्तन और णमोकार मंत्र का जाप हुआ। सुबह बैंड-बाजों के साथ बैकुंठ यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों लोग उमड़े। लोग शोक में नहीं बल्कि भक्ति भाव से शामिल हुए। समाजजनों का मानना है कि संथारापूर्वक देह त्यागने वाला उत्तम गति को प्राप्त करता है, इसलिए इसे उत्सव की तरह मनाया जाता है।</p>
<p><strong>बाड़मेर के इतिहास में पहली बार</strong></p>
<p>मुनि यशवंत ने बताया कि बाड़मेर में यह पहला अवसर है जब किसी श्रावक ने संथारा लिया। इससे पहले यहां न तो किसी साधु-साध्वी का और न ही किसी श्रावक-श्राविका का संथारा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह बाड़मेर के धार्मिक इतिहास में नया अध्याय जुडऩे जैसा है।</p>
<p><strong>अंतिम संस्कार की विशेष परंपरा</strong></p>
<p>संथारा के बाद मृत्यु होने पर शव को नहलाया नहीं जाता, बल्कि गुलाब जल से पोंछकर सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं। अर्थी पर समाधि की अवस्था में बैठाकर बांधा जाता है। सिर पर वस्त्रिका (सफेद मास्क) पर केसर से स्वास्तिक बनाया जाता है और हाथ में चांदी की माला दी जाती है। अर्थी में सूखे गुलाब की पंखुडिय़ां, चंदन-अगरबत्ती और पांच चांदी के कलश रखे जाते हैं। अंतिम संस्कार चंदन की लकडिय़ों और घी से किया जाता है, जिसमें कपूर और केसर भी डाला जाता है। संथारा ग्रहण करने वालों के लिए दाह संस्कार की जगह सामान्य श्मशान भूमि से अलग रखी जाती है।</p>
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