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	<title>mangalacharan &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<item>
		<title>आर्यिका अर्हंम श्री माताजी ने लघु सामायिक भक्तामर का बताया महत्व: मंगल विहार में हुई धर्मसभा, श्रद्धालुओं ने चातुर्मास के लिए किया श्रीफल </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 07:55:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका अर्हम् श्री माताजी के पावन सान्निध्य में मंगल विहार जैन मंदिर में हुई धर्मसभा में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा तथा सभी ने माताजी के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण से हुआ। जयपुर से पढ़िए, पदम जैन बिलाला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका अर्हम् श्री माताजी के पावन सान्निध्य में मंगल विहार जैन मंदिर में हुई धर्मसभा में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा तथा सभी ने माताजी के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण से हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, पदम जैन बिलाला की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आर्यिका अर्हम् श्री माताजी के पावन सान्निध्य में मंगल विहार जैन मंदिर में हुई धर्मसभा में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा तथा सभी ने माताजी के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण से हुआ। अपने प्रवचन में भक्तामर साधिका माताजी ने लघु सामायिक एवं लघु भक्तामर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म साधना के विविध आयामों की जानकारी दी। उन्होंने ने श्लोक 17, 26, 45 का वाचन कर समझाया तथा श्रावकों को आध्यात्मिक उन्नति के लिए 3-5-1-4-2 के क्रम में भक्तामर स्तोत्र की गाथाओं का दिन में तीन-तीन बार जाप करने का नियम प्रदान किया।</p>
<p><strong>श्रीफल भेंट कर विनय विनती की </strong></p>
<p>धर्मसभा के दौरान चित्रकूट कॉलोनी के अध्यक्ष अनिल जैन और ओम प्रकाश जैन के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने आगामी चातुर्मास की मंगल कामना के साथ पूज्य माताजी को श्रीफल भेंट कर विनय निवेदित किया। कार्यक्रम में वरुण पथ, जनकपुरी, प्रताप नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।</p>
<p><strong>धर्मचर्चा के साथ सभा का हुआ समापन </strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंत में मंदिर समिति के पदाधिकारियों अमित जैन गोधा, नवीन जैन बिल्टीवाला, मोहित जैन सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने सभी आगंतुकों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। धर्मसभा का समापन प्रतिक्रमण, जिनवाणी स्तुति, मंगल भावना एवं धर्म चर्चा के साथ हुआ।</p>
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		<title>गुणवानों का साथ ही जीवन के उत्कर्ष का आधार : आर्यिका सिद्धमति माताजी ने ‘संगति’ के महत्व पर प्रकाश डाला </title>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2026 11:59:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वागड़ अंचल के ऐतिहासिक नगर नौगामा में आर्यिका रत्न 105 श्री सिद्धमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में धर्म की अविरल धारा बह रही है। मंगलवार को प्रातःकाल की शुभ बेला में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान एवं नेमिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वागड़ अंचल के ऐतिहासिक नगर नौगामा में आर्यिका रत्न 105 श्री सिद्धमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में धर्म की अविरल धारा बह रही है। मंगलवार को प्रातःकाल की शुभ बेला में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान एवं नेमिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा (राजस्थान)।</strong> वागड़ अंचल के ऐतिहासिक नगर नौगामा में आर्यिका रत्न 105 श्री सिद्धमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में धर्म की अविरल धारा बह रही है। मंगलवार को प्रातःकाल की शुभ बेला में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान एवं नेमिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रावकों ने शामिल होकर पुण्य अर्जन किया। शांतिधारा के बाद मंगल प्रवचनों की श्रृंखला में सम्मति देवी ने मंगलाचरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री सिद्धमति माताजी ने ‘संगति’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा संग करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। माताजी ने सोदाहरण स्पष्ट किया कि जब अग्नि लोहे की संगति करती है तो उसे हथौड़ों की मार सहनी पड़ती है। जल स्वभाव से शीतल है, लेकिन यदि वह करेले की जड़ में जाए तो कड़वा और गन्ने में जाए तो मीठा हो जाता है। दूध यदि सर्प के मुख में जाए तो विष बन जाता है, जबकि, वही दूध औषधि के रूप में जीवनदाता होता है। माताजी ने जोर देकर कहा कि यदि जीवन में सुखी होना है, तो देव-शास्त्र-गुरु की सच्ची संगति करें। अपनी ‘स्थिति’ के चक्कर में अपनी ‘मनःस्थिति’ को न बिगड़ने दें। आत्म-स्वभाव को जानकर ही सम्यक दर्शन और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।</p>
<p><strong>धार्मिक संस्कारों से ही बनेंगे बच्चे संस्कारवान</strong></p>
<p>सायंकालीन सत्र में माताजी ने जैन पाठशाला के नन्हे छात्रों को ‘जिनवाणी संरक्षण’ का महत्व समझाया। उन्होंने अभिभावकों से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा आज की जरूरत हो सकती है, लेकिन बच्चों को धार्मिक शिक्षा देना अनिवार्य है। बिना संस्कारों के शिक्षा अधूरी है; धार्मिक ज्ञान ही बच्चों को कुल और समाज का गौरव बढ़ाना सिखाएगा। मंगलवार के कार्यक्रमों में स्थानीय जैन समाज सहित आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ लिया।</p>
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		<title>महिला प्रकोष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में कार्ययोजना बनाई : आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की योजना </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:28:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद की महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण पहली मीटिंग चोटी वाला रेस्टोरेंट में विभिन्न मनोरंजक गेम के साथ समाज के मुद्दों पर चिंतन ओर कार्य योजनाओं को लेकर हुई। इंदौर से पढ़िए, मनीष जैन की यह खबर&#8230; इंदौर। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद की महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद की महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण पहली मीटिंग चोटी वाला रेस्टोरेंट में विभिन्न मनोरंजक गेम के साथ समाज के मुद्दों पर चिंतन ओर कार्य योजनाओं को लेकर हुई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, मनीष जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद की महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण पहली मीटिंग चोटी वाला रेस्टोरेंट में विभिन्न मनोरंजक गेम के साथ समाज के मुद्दों पर चिंतन ओर कार्य योजनाओं को लेकर हुई। प्रवक्ता मनीष अजमेरा ने बताया कि महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष अनामिका बाकलीवाल ने इस अवसर पर सामाजिक संसद अध्यक्ष विनय बाकलीवाल एवं पदाधिकारियों के समक्ष महिला प्रकोष्ठ की सामाजिक योजनाओं को रखा। प्रारंभ में मंगलाचरण नीता जैन, पिंकी पाटोदी, दीपिका अजमेरा ने किया। इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित सामाजिक संसद के पूर्व अध्यक्ष कैलाश वेद, पदाधिकारी सुरेंद्र बाकलीवाल, देवेंद्र सोगानी, नकुल पाटोदी, संजय जैन, जेनेश झांझरी, पिंकेश टोंग्या, मनीष अजमेरा, महावीर जैन, मनोज बाकलीवाल का स्वागत विनीता बाकलीवाल, माधुरी जैन, मनाली तलाटी, प्रीति जैन, प्रतिभा जैन, ऋतु काला ने किया।</p>
<p><strong>शिक्षा और स्वास्थ पर कार्ययोजना प्रस्तुत</strong></p>
<p>इस अवसर पर अध्यक्ष अनामिका बाकलीवाल ने शिक्षा और स्वास्थ को लेकर कार्य योजना प्रस्तुत की। जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने, समाज के परिवारों को लाभ पहुंचाने की योजनाओं को संसद पदाधिकारियों के समक्ष रखा। इस अवसर पर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने योजनाओं की प्रशंशा करते हुए 7 जून को इंदौर स्तरीय स्वास्थ शिविर लगाने की घोषणा करते हुए इन योजनाओं पर अमल करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही समाज का कार्यालय भी शीघ्र शुरू करने की घोषणा करते हुए बाकलीवाल ने कहा कि समाज कार्यालय समाजजनों की पहुंच में होगा। जहां वे अपनी कोई भी बात निःसंकोच रख सकेंगे। मीटिंग का संचालन अनामिका बाकलीवाल ने किया।</p>
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		<title>पक्षियों के लिए जल पात्र का किया वितरण : प्राणी मात्र की रक्षा करना जैन धर्म का मूल उद्देश्य </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 08:59:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने के उद्देश्य से वात्सल्य सेवा समिति द्वारा सदस्य रिंकी जैन के आवास, पुष्पांजलि फेस 3 अवधपुरी में मिट्टी के जल पात्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने के उद्देश्य से वात्सल्य सेवा समिति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने के उद्देश्य से वात्सल्य सेवा समिति द्वारा सदस्य रिंकी जैन के आवास, पुष्पांजलि फेस 3 अवधपुरी में मिट्टी के जल पात्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> भीषण गर्मी में पक्षियों की प्यास बुझाने के उद्देश्य से वात्सल्य सेवा समिति द्वारा सदस्य रिंकी जैन के आवास, पुष्पांजलि फेस 3 अवधपुरी में मिट्टी के जल पात्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। समिति की अध्यक्ष रश्मि जैन ने बताया कि गर्मी के दिनों में जल अभाव के कारण अनेक पक्षी दम तोड़ देते हैं। भगवान महावीर के जियो और जीने दो सिद्धांत को आत्मसात करते हुए प्राणी मात्र की रक्षा करना जैन धर्म का मूल उद्देश्य है।इसी भावना के तहत समिति ने सभी सदस्यों को मिट्टी के पात्र वितरित किए।</p>
<p>समिति ने सभी से आग्रह किया कि वे इन पात्रों में नियमित रूप से स्वच्छ एवं शुद्ध जल भरकर उचित स्थानों पर रखें, जिससे पक्षियों को राहत मिल सके। इस अवसर पर मंत्री उपासना जैन, कोषाध्यक्ष रागिनी जैन, सुनीता जैन, रेखा जैन, रिंकी जैन, सुनंदा जैन,पुष्पा जैन, बबीता जैन, गजल जैन, नंदिनी जैन, मालती जैन, अलका जैन, मानवी जैन उपस्थित रहीं।</p>
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		<title>भावना भाव नाशिनी होती है भाव से भव सुधरता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भाव, भावना और भव के बीच संबंध समझाए  </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:58:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा</strong>। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। मंगलवार को धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि संसारी प्राणी संसार का नाश अर्थात जन्म मरण से छुटकारा चाहता है। भावना भव नाशिनी होती है भाव से भव सुधरता है, भव संसार का नाश होता है। उसके लिए 12 भावना, 16 कारण भावना का वर्णन शास्त्रों में बताया गया है। भावना वैराग्य की करना चाहिए। उसके बिना धर्म कार्य का फल नहीं मिलता है। संसार ,शरीर, विषय भोगों से विरक्ति लेना चाहिए। बुराई छोड़ने से और छोटे-छोटे निर्मित पाकर वैराग्य प्रकट होता है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99758" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260210-WA0013-300x231.jpg" alt="" width="300" height="231" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260210-WA0013-300x231.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260210-WA0013.jpg 463w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>साधुओं के उपदेश मनोरंजन में भी रहस्य और संदेश समाहित होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धर्मदेशना में बताया कि चक्रवर्ती जो कि 6 खंड का अधिपति हैं। वह भी हर समय वैराग्य का चिंतन करते हैं। उन्होंने धर्म का, भक्ति का सार को, आत्मा को समझा। 24 तीर्थंकरों ने जो कुछ जीवन में प्राप्त किया, वह दिव्य ध्वनि से हमें दिया है। साधुओं के उपदेश मनोरंजन में भी रहस्य और संदेश समाहित होता है, उससे जीवों का कल्याण होता है भावना संसार में पतन या उन्नति दोनों करती है यह संसार असार है, अशरण है, अनित्य है। केवल धर्म ही मंगलकारी शरणभूत है। धर्म को धारण करने से परमात्मा पद मिलता है, साधुओं के प्रवचन उपदेश को श्रवण कर उसके मर्म को समझ कर जीवन में उन्नति करना चाहिए़। इसके पूर्व मंगलाचरण चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन के बाद आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने तीनों आचार्यों, मुनिराजों, साधुओं का गुणानुवाद किया। आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी ने पुण्य, समय और मृत्यु का की विवेचना श्लोक से की।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से सलूंबर के दंपति ने दीक्षा का किया निवेदन </strong></p>
<p>आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने भाइयों के प्रेम, विनम्रता, बड़प्पन के आदर्श श्री प्रसन्न सागर जी को निरूपित किया। पाप छोड़कर पुण्य ग्रहण करो। संतों के सानिध्य में आकर छोटे-छोटे नियम लेने बुराई छोड़ने पर भी उनका दर्शन करना सार्थक होगा। दोनों आचार्यों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर आचार्य भक्ति परिक्रमा पूर्वक की। मंगलवार को पदमपुरा से आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का संघ सहित चाकसू के लिए मंगल विहार हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को सलूंबर के दंपति 8 प्रतिमाधारी हुकमीचंद एवं उनकी धर्मपत्नी कांतादेवी 7 प्रतिमाधारी ने दीक्षा के लिए निवेदन कर श्रीफल समर्पित किया। वही अन्य श्रावक ने भी व्रत नियम ग्रहण किए।</p>
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		<title>पुण्य संस्कार देने वाले माता-पिता को कभी नाराज़ न करें: मुनि श्री प्रणुत सागर जी ने माता-पिता के जीवन में महत्व की व्याख्या की  </title>
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		<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 07:28:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुख देने वाले पुण्य को और संस्कार देने वाले माता पिता को कभी नाराज़ नहीं करना जिस माता-पिता ने आपको जन्म दिया वो ही आपके दुःख में आपके पास खड़े रहते हैं और आज बच्चे माता-पिता को भूलते जा रहे हैं। यह उदगार दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री प्रणुत सागर जी ने विभिन्न विषयों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुख देने वाले पुण्य को और संस्कार देने वाले माता पिता को कभी नाराज़ नहीं करना जिस माता-पिता ने आपको जन्म दिया वो ही आपके दुःख में आपके पास खड़े रहते हैं और आज बच्चे माता-पिता को भूलते जा रहे हैं। यह उदगार दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री प्रणुत सागर जी ने विभिन्न विषयों के प्रवचनों की श्रृंखला में धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। सुख देने वाले पुण्य को और संस्कार देने वाले माता पिता को कभी नाराज़ नहीं करना जिस माता-पिता ने आपको जन्म दिया वो ही आपके दुःख में आपके पास खड़े रहते हैं और आज बच्चे माता-पिता को भूलते जा रहे हैं। यह उदगार दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री प्रणुत सागर जी ने विभिन्न विषयों के प्रवचनों की श्रृंखला में धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनिराज ने कहा कि माता-पिता का महत्व क्या है? उनसे पूछो जिन्होंने अपने माता-पिता को खोया है। मुनिश्री ने कहा कि जिन बच्चों ने बचपन में छोटे-छोटे हाथों से गाय को रोटी दी है वो ही बेटा आज अपने जन्मदिन पर गौशाला में जाकर गाय को रोटी और चारा खिला रहा है। आप जब छोटे थे तब आपको हाथ पकड़ कर चलना उन्हीं ने सिखाया नहीं तो आपकी चाल टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती। आप आज भाग्यशाली हैं कि जिनेंद्र भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजन कर भगवान को छू पा रहे हैं क्योंकि, आपको आपके माता-पिता बचपन में हाथ पकड़कर जिनेंद्र भगवान के दर्शन के लिए लाए हैं और आज आप जिनवाणी का श्रवण कर रहे हो।</p>
<p><strong>माता-पिता ने कभी नफरत नहीं की </strong></p>
<p>आप जब छोटे थे और जब आपकी नाक बहती थी तब आपके पिता ने अपने रुमाल से साफ कर अपनी जेब में रख लिया क्योंकि, आप सुंदर दिखें। आप जब छोटे थे तब आपने मां के पास सोते सयम गद्दा गिला कर दिया पर आपकी मां ही थी जिसने खुद गीले में सोना पसंद किया और तुम्हें सूखे में सुलाया। यदि ऐसा समय आ जाए अपने माता-पिता का वृद्ध अवस्था में बिस्तर पकड़ लें तो उनसे घृणा या नफरत नहीं करना क्योंकि, तुम जब छोटे थे तब तुमने भी उनके भोजन करते समय छींक, उल्टी या और गंदगी की पर उन्होंने कभी नफरत ना करते हुए भोजन और कार्य छोड़कर तुम्हंे साफ किया क्योंकि, उनका बेटा या बेटी साफ सुंदर रहे।</p>
<p><strong>मां-बाप ने तुम्हें बचपन में राजकुमार की तरह रखा</strong></p>
<p>माता-पिता ने तुम्हें बचपन में राजकुमार की तरह रखा। उनके बूढ़े होने पर तुम उनको महाराजा जैसा रखना तो ही तुम्हारी पूजा, पाठ, स्वाध्याय जप सार्थक है। यदि आप माता-पिता को कोसते हो नाराज़ करते हो और मंदिर में भगवान को पूजते हो तो तुम्हारी सारी पूजा व्यर्थ है क्योंकि, तीर्थंकर भगवान और मुनिराज भी बचपन में वैराग्य के समय अपने माता-पिता से आज्ञा लेकर ही उनकी चरण वंदना करके ही दीक्षा लेते हैं। उनके सामने चारण ऋद्धि धारी मुनिराज आ जाए तब भी वे माता-पिता को सबसे पहले प्रणाम करते हैं। आज के समय में जिन माता-पिता ने आपको ये सुंदर शरीर, जीवन, संस्कार दिए वे ही आपके प्यार को तरस रहे हैं।</p>
<p><strong>माता-पिता का ऋण तो कोई भी नहीं चुका सकता </strong></p>
<p>आज की पीढ़ी माता-पिता से झल्लाकर चिढ़कर बात करती है।यदि आप प्रेम से पांच मिनट बैठ कर अपने माता-पिता से बात कर ले तो वे खुश हो जाते हैं, उन्हें पूरे जीवन की खुशी मिल जाती है। आप आज जो भी कर रहे हो सब मां बाप की ही देन है। आपको बचपन में मां बाप ने जो सुविधाएं उपलब्ध कराई, जिसको की वो वहन नहीं कर सकते थे फिर भी आपको दी तो उन्हें आप को अब ब्याज सहित लौटाना चाहिए। आप को कभी पैसों की आवश्यकता पड़ी तो मां ने अपने पास जोड़-जोड़ कर रखे पैसे तुम्हें दिए ताकि तुम खुश रहो। माता-पिता का ऋण तो आप कोई भी इस जीवन में नहीं चुका सकता।</p>
<p><strong>सजल नयनों से सुने प्रवचन </strong></p>
<p>सभी का ये कर्तव्य है कि माता-पिता को कभी नाराज़ नहीं करना, उनसे प्रेम से बात करना और वो क्या चाहते हैं, उनकी बात को पूरा सुनना। मुनिराज के मार्मिक प्रवचन से कई लोगों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। उसके पूर्व मंदिर में भगवान के अभिषेक शांतिधारा संपन्न हुई। मंगलाचरण सुनीता प्रमोद जैन ने किया।</p>
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		<title>20 पिच्छियों का शीतकालीन वाचना महोत्सव रविवार को : आचार्य श्री विभवसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा दिवस मनाया जाएगा </title>
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		<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 04:40:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विभवसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा दिवस एवं वाचना कलश स्थापना समारोह रविवार को पोरवाड़ जैन धर्मशाला,सराफा बाजार में मनाया जाएगा। खंडवा से पढ़िए, यह खबर&#8230; खंडवा। आचार्य श्री विभवसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा दिवस एवं वाचना कलश स्थापना समारोह रविवार को पोरवाड़ जैन धर्मशाला,सराफा बाजार में मनाया जाएगा। सुबह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विभवसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा दिवस एवं वाचना कलश स्थापना समारोह रविवार को पोरवाड़ जैन धर्मशाला,सराफा बाजार में मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">खंडवा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खंडवा।</strong> आचार्य श्री विभवसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा दिवस एवं वाचना कलश स्थापना समारोह रविवार को पोरवाड़ जैन धर्मशाला,सराफा बाजार में मनाया जाएगा। सुबह 8:15 बजे से संगीतमय गुरु पूजन, विभिन्न मंडलों द्वारा अर्घ्य समर्पित किया जाएगा। सुबह 8:45 बजे दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, वाचना कलश स्थापना होगी। प्रातः 9:15 बजे मंगल प्रवचन होंगे। प्रातः 10:15 बजे आहारचर्या संपन्न होगी। कार्यक्रम सकल दिगंबर जैन मुनि सेवा ट्रस्ट एवं सकल दिगंबर जैन समाज खंडवा की ओर से किया जाएगा। समाजजनों ने अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर पुण्यार्जन करने का आग्रह किया गया है।</p>
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		<title>श्री आदिनाथ जैन मंदिर में भक्तामर स्तोत्र पाठ: भगवान मल्लिनाथ के कल्याणकों का हुआ श्रद्धापूर्वक आयोजन </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 14:10:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ जैन मंदिर परिसर में आदिनाथ महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित हो रहे श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ का आयोजन मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230; अंबाह। श्री आदिनाथ जैन मंदिर परिसर में आदिनाथ महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित हो रहे श्री भक्तामर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री आदिनाथ जैन मंदिर परिसर में आदिनाथ महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित हो रहे श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ का आयोजन मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> श्री आदिनाथ जैन मंदिर परिसर में आदिनाथ महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित हो रहे श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ का आयोजन मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी, जहां शांत वातावरण में भक्तिमय ध्वनि गूंज रही थी। नियमित आयोजित हो रहे इस स्तोत्र पाठ का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, मानसिक शांति और सकारात्मकता को बढ़ावा देना है। भक्तामर स्तोत्र पाठ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महिला मंडल की सदस्यों ने बताया कि पाठ से न केवल धार्मिक आस्था बढ़ती है, बल्कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए मनोबल और ऊर्जा भी प्राप्त होती है। मंदिर परिसर में दीप, और मंत्रोच्चार के साथ अत्यंत दिव्य और शांति पूर्ण वातावरण का निर्माण हुआ।</p>
<p><strong>मल्लिनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक मनाया </strong></p>
<p>यह दिन विशेष इसलिए भी रहा क्योंकि मंदिर में जैन धर्म के उन्नीसवें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ के जन्म और तप कल्याणक का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, विशेष पूजन एवं देव शास्त्र पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मंगलाचरण, स्तवन और भक्ति-गीतों के साथ आराधना में भाग लेकर कल्याणकों की शुभता का लाभ लिया। इस अवसर पर मंदिर समिति की सदस्य ऊषा भंडारी ने भगवान मल्लिनाथ के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान का जन्म मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी को मिथिला पुरी में राजा कुम्भ और रानी रक्षिता देवी के यहां हुआ था। उन्होंने बताया कि भगवान मल्लिनाथ ने 55 हजार वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी और मात्र 6 दिनों के कठोर तप के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। इसलिए जन्म और तप दोनों कल्याणक इसी तिथि पर मनाए जाते हैं।</p>
<p><strong>धार्मिक उन्नति के लिए अत्यंत सार्थक </strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर अनिल कुमार जैन, बबीता जैन, ज्योति जैन, शौर्य जैन एवं काव्या जैन के परिवार ने भक्तामर स्तोत्र पाठ करवाने की सेवा निभाई। परिवार के सदस्यों ने भगवान के समक्ष क्षेत्र और समाज में सुख-शांति, समृद्धि और सद्भावना की कामना की। मंदिर समिति के अनुसार निरंतर पाठ से पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा, मनोबल और दिव्यता का विशेष अनुभव हो रहा है। महिलाओं द्वारा किए जा रहे इस आयोजन की समाज के सभी वर्गों ने प्रशंसा की और इसे धार्मिक उन्नति के लिए अत्यंत सार्थक बताया।</p>
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		<title>जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन: वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों की प्रस्तुति ने बांधकर रखा  </title>
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		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 10:37:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदार सागर जन कल्याण तीर्थ क्षेत्र पर पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत रात में वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों ने जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल एवं बालिका मंडल के मंगलाचरण से हुआ। बड़ागांव धसान से पढ़िए, यह खबर&#8230; बड़ागांव धसान। उदार सागर जन कल्याण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उदार सागर जन कल्याण तीर्थ क्षेत्र पर पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत रात में वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों ने जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल एवं बालिका मंडल के मंगलाचरण से हुआ। <span style="color: #ff0000">बड़ागांव धसान से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ागांव धसान।</strong> उदार सागर जन कल्याण तीर्थ क्षेत्र पर पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत रात में वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों ने जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल एवं बालिका मंडल के मंगलाचरण से हुआ। जैसी करनी वैसी भरनी एक बहुत पुरानी कहावत है जिसका अर्थ है कि जो भी कार्य हम करते हैं, उसका फल हमें वैसा ही मिलता है। अगर हम अच्छे कार्य करेंगे तो हमें अच्छा फल मिलेगा और अगर हम गलत कार्य करेंगे तो उसका बुरा परिणाम हमें ही भुगतना पड़ेगा। हमारे जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम दूसरों का बुरा करते हैं या गलत रास्ता अपनाते हैं, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि समय के साथ उन्हीं कार्यों का परिणाम हमें मिल जाता है। महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा आप अपने लिए चाहते हो। यदि हम ईमानदारी, परिश्रम और सदाचार के मार्ग पर चलते हैं तो सफलता और सम्मान हमारा साथ देंगे।</p>
<p>देश-दुनिया के सच्चे उदाहरण भी यही सिखाते हैं कि कर्मों का फल अवश्य मिलता है। रावण का अंत भी उसके बुरे कर्मों के कारण हुआ। वहीं रामचंद्र जी को उनके अच्छे कार्यों का सुखद फल मिला। इसलिए हमें हमेशा अच्छे कार्य ही करने चाहिए, क्योंकि कर्मों का फल सबको मिलता है। जैसी करनी, वैसी भरनी यह प्राकृतिक नियम है। कुशल निर्देशन नरेंद्रसिंह परमार, केपी सिंह बुंदेला, अशोक जैन डूडा, वंदना जैन का रहा।</p>
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		<title>महिलाओं ने प्रतियोगिताओं में दिखाया अपना टेलेंट : दिगंबर जैन महिला महासमिति (पश्चिम संभाग) की बैठक संपन्न </title>
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		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 15:02:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन महिला महासमिति (पश्चिम संभाग) की बैठक खुशनुमा माहौल में हुई। जिसमें विभिन्न कॉलोनियों की सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। दिगंबर जैन महिला महासमिति (पश्चिम संभाग) की बैठक खुशनुमा माहौल में हुई। जिसमें विभिन्न कॉलोनियों की सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं। उपस्थित महिलाओं ने न केवल धर्म-अनुरक्ति और राष्ट्रभक्ति से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन महिला महासमिति (पश्चिम संभाग) की बैठक खुशनुमा माहौल में हुई। जिसमें विभिन्न कॉलोनियों की सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन महिला महासमिति (पश्चिम संभाग) की बैठक खुशनुमा माहौल में हुई। जिसमें विभिन्न कॉलोनियों की सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं। उपस्थित महिलाओं ने न केवल धर्म-अनुरक्ति और राष्ट्रभक्ति से जुड़े विविध कार्यक्रमों में भाग लिया बल्कि, अनेक मनोरंजक और सांस्कृतिक खेलों के माध्यम से आपसी सौहार्द और ऊर्जा का भी प्रदर्शन किया। गेम्स में प्रथम रूबी जैन, द्वितीय स्नेहलता नायक रहीं। गेम्स की प्रायोजक निधि जैन और पूनम जैन थीं। तंबोला रेखा पंडित ने खिलाया और पुरस्कार वितरण पुरस्कृत किया। महिला महासमिति की अध्यक्ष डॉली मनमोहन झांझरी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में संगठन शक्ति, धार्मिक संस्कारों की दृढ़ता और राष्ट्र सेवा के प्रति संकल्प को और अधिक मजबूत बनाना था।</p>
<p>इसी क्रम में सभी उपस्थित महिलाओं ने देश की सेवा के लिए समर्पण तथा समाजहित में निरंतर सक्रिय रहने की शपथ भी सामूहिक रूप से ग्रहण की। संचालन महासमिति की सचिव प्रतिभा जैन ने किया कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का स्वागत अनुराधा बिलाला एवं बबीता लुहाड़िया ने किया। प्रारंभ में मंगलाचरण अर्चना झांझरी, डिंपल जैन, संगीता छाबड़ा, रूबी जैन और कविता जैन ने किया। संपूर्ण आयोजन उत्साह, अनुशासन और प्रेरणा से भरपूर रहा।</p>
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