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	<title>Mangal Kalash Sthapana &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Mangal Kalash Sthapana &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनिराजों की चातुर्मास कलश स्थापना रविवार को: निजानंद ज्ञानामृत पावन वर्षायोग समारोह मनेगा  </title>
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		<pubDate>Fri, 18 Jul 2025 14:13:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज व मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज का निजानंद ज्ञानामृत पावन वर्षायोग मंगल-कलश स्थापना समारोह रविवार 20 जुलाई को नवकार पैलेस में किया जाएगा। मंगल कलश स्थापना के अवसर पर मांगलिक कार्यक्रम किए जाएंगे। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज व मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज का निजानंद ज्ञानामृत पावन वर्षायोग मंगल-कलश स्थापना समारोह रविवार 20 जुलाई को नवकार पैलेस में किया जाएगा। मंगल कलश स्थापना के अवसर पर मांगलिक कार्यक्रम किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागियों की जन्म नगरी में गणाचार्य श्री विराग सागर जी और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज व मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज का निजानंद ज्ञानामृत पावन वर्षायोग मंगल-कलश स्थापना समारोह रविवार 20 जुलाई को नवकार पैलेस में किया जाएगा। मंगल कलश स्थापना के अवसर पर मांगलिक कार्यक्रम किए जाएंगे। इसमें प्रातः 6.45 बजे श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा (बड़े मंदिर जी में), प्रातः 8 बजे से भव्य मंगल कलश शोभायात्रा बड़े मंदिर से नवकार पैलेस तक निकाली जाएगी। युगल मुनिराज की आहार चर्या होगी। अगली कड़ी में दोपहर में 1.30 बजे से मुख्य कार्यक्रम कलश स्थापना समारोह किया जाएगा।</p>
<p>इसके अंतर्गत दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण, आचार्यों के अर्घ्य समर्पण, बोलियां, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, मंगल प्रवचन, कलश स्थापना क्रिया विधि सहित सभी कार्यक्रम नवकार पैलेस में होंगे। युगल मुनिराज इंदौर से विहारकर सनावद में पिछले 25 दिनों से अपनी ओजस्वी वाणी से संत भवन सभी को रस पान करवा रहे हैं। समाज अध्यक्ष मनोज जैन मुनि त्यागी समिति अध्यक्ष मुकेश जैन ने उपस्थिति दर्ज करवाने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>सलूंबर में होगा जैन ज्योतिष का समस्या समाधान: 21 जुलाई को किया जाएगा आयोजन  </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 08:50:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विहर्ष सागर जी का 2025 का चातुर्मास धर्म नगरी सलूंबर में होने जा रहा है। इसके तहत 20 जुलाई रविवार को मंगल कलश स्थापना की जाएगी। 21 जुलाई को ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद रवि जैन गुरु दिल्ली द्वारा जैन ज्योतिष समस्या समाधान कार्यक्रम किया जाएगा। सलूंबर से पढ़िए, यह खबर&#8230; सलंूबर। आचार्य श्री विहर्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विहर्ष सागर जी का 2025 का चातुर्मास धर्म नगरी सलूंबर में होने जा रहा है। इसके तहत 20 जुलाई रविवार को मंगल कलश स्थापना की जाएगी। 21 जुलाई को ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद रवि जैन गुरु दिल्ली द्वारा जैन ज्योतिष समस्या समाधान कार्यक्रम किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">सलूंबर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सलंूबर।</strong> आचार्य श्री विहर्ष सागर जी का 2025 का चातुर्मास धर्म नगरी सलूंबर में होने जा रहा है। इसके तहत 20 जुलाई रविवार को मंगल कलश स्थापना की जाएगी। 21 जुलाई को आदिनाथ चैनल फेम, दुबई, अबू धाबी नेपाल में सम्मानित ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद रवि जैन गुरु दिल्ली द्वारा जैन ज्योतिष समस्या समाधान कार्यक्रम किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से आरंभ होगा। अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि जैन गुरुजी दिल्ली को आचार्य श्री विहर्ष सागर जी द्वारा 2017 में भव्यतीभव्य कार्यक्रम में 5000 से अधिक जनसमूह के बीच ‘विहर्ष ज्योतिष रत्न’ की उपाधि से अलंकृत किया गया था। कार्यक्रम में आप स्वयं जान सकते हैं कि क्या आप मांगलिक है, अपनी कुंडली से जाने कब होगा आपका भाग्य उदय, स्वयं देखें कुंडली में कालसर्प दोष और उसका निवारण साथ ही अन्य ज्योतिषी जिज्ञासाओं का समाधान भी जैन आगम द्वारा किया जाएगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84858" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0008.jpg" alt="" width="1067" height="749" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0008.jpg 1067w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0008-300x211.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0008-1024x719.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0008-768x539.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250711-WA0008-990x695.jpg 990w" sizes="(max-width: 1067px) 100vw, 1067px" />इस अवसर पर लकी ड्रॉ के माध्यम से रवि जैन गुरुजी से निःशुल्क कुंडली विश्लेषण का भी सौभाग्य प्राप्त होगा। इस अवसर पर सुरेंद्रकुमार जैन ज्योतिषाचार्य सलूंबर, डॉ.सुमेर चंद जैन प्राकृताचार्य दिल्ली, पं. राजेंद्र प्रसाद जैन ज्योतिषाचार्य उदयपुर, मीनाक्षी जैन ज्योतिषाचार्य उदयपुर, सुशील कुमार जैन ज्योतिषी दिल्ली, जगदीश प्रसाद जैन शिक्षाविद दिल्ली, शिवानी जैन शिक्षाविद दिल्ली, गजेंद्र जैन पटवा धरियावद भी उपस्थित रहेंगे। मंच संचालन डीके जैन दिल्ली करेंगे। कार्यक्रम का निर्देशन बाल ब्रह्मचारी रीना दीदी करेंगी। इस कार्यक्रम के आयोजक मुनि संघ सेवा समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज सलूंबर हैं।</p>
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		<title>ध्वजारोहण कर कलश स्थापना की : मंगल कलश स्थापना में प्रदेश भर से पधारे श्रद्धालु  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 08:35:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। धर्म उपदेश के पूर्व आदिनाथ भगवान एवं आचार्य शांति सागर जी सहित सभी आचार्यों के चित्रों के सम्मुख दीप प्रवज्जलन स्व बाबूलाल जी सेठिया परिवार नैनवा द्वारा किया गया। इसके पश्चात पूर्वाचार्यों को अर्घ्य समर्पण किया गया। एवं आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं पूजन किया गया। ध्वजारोहण के पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी टीकमचंद, श्याम लाल, धर्मचंद, भागचंद, उत्तमचंद फूलेता वाले परिवार ने किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84806" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1703" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-2048x1362.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />उदार भावना से किया धार्मिक कार्य सफल होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में सुख, शांति धर्म में वृद्धि के लिए ध्वजारोहण किया जाता है। भावना भव जन्म मरण के आवागमन को नष्ट करती है। सरल ,सहज और उदार भावना के साथ किया गया धार्मिक कार्य सफल होता है। धर्म और अर्थ के प्रति उदारता अच्छी है ,धर्म की उदारता से अर्थ का उपार्जन होता है। धर्म धारण करने से प्रतिकूलता अनुकूलता में बदल जाती है, क्योंकि धार्मिक कार्य से पुण्य का अर्जन होता है। और प्रतिकूलता पाप कर्मों के कारण होती है आगम जिनवाणी में इसका उपाय बताया है कि धर्म धारण करने से प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदला जाता है। चातुर्मास में अनेक पर्व आते हैं गुरु पूर्णिमा, वीर शासन जयंती दशलक्षण पर्व आत्मा की विशुद्धता के लिए होते हैं गुरु पूर्णिमा के पूर्व आचार्य श्री ने दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज को स्मरण कर उनके गुणानुवाद किया। जिनालय में दर्शन अभिषेक पूजन से जीवन का निर्माण होता है। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने 57 वें वर्षायोग स्थापना के पूर्व आयोजित ध्वजारोहण के पश्चात धर्म सभा में प्रकट की। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने कहा कि वर्षायोग में श्रावकों को साधुओं की धार्मिक क्रियाओं की अनुकूलता के लिए कार्य करना चाहिए। समय का उपयोग कर वर्षायोग में साधुओ द्वारा धर्म की वर्षा की जाती है इससे जीवन में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84808" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1703" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-2048x1362.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />कलश स्थापना के सौभाग्यशाली ये रहे</strong></p>
<p>चातुर्मास समिति मीडिया प्रभारी रमेश काला प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि प्रथम कलश आचार्य श्री वर्धमान सागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी पारस चंद,सुरेन्द्र कुमार,नरेंद्र कुमार,अंशुल कुमार, आरव,अंश, आशी, रीति छामुनिया परिवार को मिला। द्वितीय कलश आचार्य शांतिसागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी प्रहलाद चंद , विमल चंद, कमल कुमार , चेतन कुमार, अंकित कुमार अंश आंडरा परिवार को मिला। तृतीय मंगल कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी मदन लाल, मिट्ठू लाल , महावीर प्रसाद , ज्ञानचंद,सन्मति कुमार जी दाखिया परिवार को प्राप्त हुआ। चतुर्थ कलश आचार्य शिव सागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी राधा देवी, सौरभ कुमार , जंबू कुमार, टोनी कुमार आंडरा परिवार को मिला। पंचम कलश आचार्य धर्मसागर जी कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी मोहन लाल, पदम चंद , ज्ञानचंद, मनोज कुमार, कमल कुमार छामुनिया परिवार को मिला। षष्ठम कलश आचार्य अजीत सागर कलश का सौभाग्य महावीर प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, अविकांश कुमार पासरोटियां परिवार को मिला। चातुर्मास सर्वोषधि प्रहलाद चंद, विमल कुमार, कमल कुमार, अनिल कुमार, चेतन कुमार, सुनील, दिव्यांश आंडरा परिवार को मिला। वस्त्र भेंट राजेंद्र कुमार, शैलेश कुमार गोयल परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य बाबूलाल, नरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, ओमप्रकाश, कुशाल ककोड़ वाले परिवार को मिला। शास्त्र भेंट का सौभाग्य महावीर प्रसाद, धर्मचंद, सुमित कुमार, रवि कुमार दाखिया परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर चतुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सराफ, धर्मेंद्र पासरोटियां, कमल सराफ, राजेश बोरदा, रमेश सायवाड, पप्पू नमक,टोनी आंडरा, चेतन आंडरा, डॉ चेतन, हिमांशु पासरोटियां, हेमराज नमक निवाई, सुरेन्द्र छामुनिया, ज्ञानचंद छामुनिया, किन्नी शिवाड़िया, अर्पित पासरोटियां, मनीष अतार, राहुल पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, दिनेश छामुनिया, बेनी प्रसाद कल्ली, अमित छामुनिया आदि मौजूद थे ।</p>
<p><strong>यहां</strong> से भी आए श्रद्धालुजन</p>
<p>इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालु जयपुर, किशनगढ़, कोटा, निवाई, लावा, डिग्गी, टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, पारसोला, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, सूरत, नैनवा, सांगानेर, अजमेर, कर्नाटक, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत, गोहाटी, सलूंबर, सहित अनेक स्थानों से उपस्थित रहे</p>
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		<title>आचार्य श्री विमर्शसागर जी का सहारनपुर में 30 वां चातुर्मास:  गुरु पूर्णिमा के दिन होगा मंगल कलश स्थापित </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 12:04:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विमर्शसागर जी 10 जुलाई को संपूर्ण आचार्य संघ निर्जल उपवास के साथ वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना करेंगे। सुबह 10 बजे से ही कार्यक्रम प्रारंभ होगा। गुरु पूर्णिमा के महापर्व पर आचार्य संघ एवं देशभर से आगंतुक हजारों की संख्या में भक्त समूह परिपूर्ण हर्ष-उत्साह के साथ महापूजा करेंगे। सराहनपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री विमर्शसागर जी 10 जुलाई को संपूर्ण आचार्य संघ निर्जल उपवास के साथ वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना करेंगे। सुबह 10 बजे से ही कार्यक्रम प्रारंभ होगा। गुरु पूर्णिमा के महापर्व पर आचार्य संघ एवं देशभर से आगंतुक हजारों की संख्या में भक्त समूह परिपूर्ण हर्ष-उत्साह के साथ महापूजा करेंगे।<span style="color: #ff0000"> सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> संत समागम सहज सामान्य पुण्य से प्राप्त नहीं होता। संतों का समागम जन्मों-जन्मों के असीम पुण्यों से प्राप्त होता है। एक ही नहीं सैकड़ों-हजारों-लाखों प्राणियों का एक साथ असीम पुण्यों का उदय होता है। समस्त नगरवासियों का पुण्य एकत्रित होकर उदय में आता है तब कहीं संत समागम प्राप्त हो पाता है। सहारनपुर नगर का महान पुण्य जाग्रत हुआ है, जो एक, दो नहीं पूरे 30 पिच्छी धारी दिगंबर मुनिराज, आर्यिका, श्रावक, श्राविका रूप चतुर्विध संघ के साथ पधार रहे हैं। ‘जीवन है पानी की बूंदे महाकाव्य‘ के मूल रचयिता आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी का वर्षाकाल प्रवास यहां होने जा रहा है। आचार्यश्री का चार माह की दिगम्बर चर्या को पालन करने तथा सभी नगरवासियों को सुखी जीवन के दिव्य सूत्रों को प्रदान करने के लिए मंगलमय चातुर्मास प्राप्त हुआ है। आचार्य श्री विमर्श सागर जी मात्र जैन समाज ही नहीं अपितु समस्त संप्रदायों के साथ संपूर्ण देशवासियों के लिए एक प्रेरक और आदर्श संत के रूप में कठिन तप-साधना में संलग्न रहा करते हैं।</p>
<p><strong>30 जून को हुआ था मंगल प्रवेश </strong><br />
सहारनपुर जैन समाज आन्चार्य श्री के चरणों इस वर्ष के मंगलमय चातुर्मास हेतु निवेदन लगातार कर रही थी। 31 मई को सहारनपुर का परम सौभाग्य जागा, जो अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में विभिन्न नगरों से आए भक्तों के मध्य सहारनपुर जैन समाज को पूज्यश्री का 2025 का चातुर्मास कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 2 जून को बड़ागांव से चातुर्मास सहारनपुर के लिए गुरुदेव की पदयात्रा प्रारंभ हुई। रास्ते में विभिन्न नगर-शहरों में जिनागम पंथ की पताका फहराते हुए 28 जून को आचार्यश्री ने नगर की सीमा सहारनपुर के आवास-विकास में प्रवेश किया एवं 29 जून को चंद्रनगर की धरा को पवित्र करते हुए 30 जून को जैन बाग में समस्त जैन सहारनपुर ने आचार्य संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश कराया।</p>
<p><strong>3 जुलाई से 10 जुलाई तक हो रही सिद्ध भगवंतों की आराधना</strong><br />
जैन धर्म में जिनेंद्र भगवान की भक्ति का भी अद्भुत माहात्म्य बतलाया है। सिद्धों की आराधना से हमारे जीवन से सभी प्रकार के दुःख कष्ट-बाधाएं दूर भागती नजर आती है। आचार्य श्री विमर्श सागर जी मुनिराज (ससंघ) के सानिध्य एवं आशीर्वाद से एवं विधानाचार्य शुभम जी शास्त्री एवं केशव एंड पार्टी की मधुर लहरियों के साथ जिन आराधना का सातिशय पुण्य अर्जन समस्त जैन समाज ने प्राप्त किया। 5 जुलाई को आचार्य श्री ने अपने गुरुवर श्री विराग सागर जी को मांगलिक भाव विनयांजलि समर्पित की। यह गुरुदेव का प्रथम समाधि महोत्सव दिवस का प्रसंग था। 10 जुलाई, गुरु पूर्णिमा के अविस्मरणीय पल सहारनपुर के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखे जाएंगे।</p>
<p>सहारनपुर धर्मनगरी में पूज्य आचार्य ने प्रथम बार पदार्पण किया है। आचार्य संघ के आगमन से संपूर्ण नगर में अभूतपूर्व खुशहाली का वातावरण बना हुआ है। 10 जुलाई को संपूर्ण आचार्य संघ निर्जल उपवास के साथ वर्ष 2025 के मंगलमय चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना करेंगे। प्रातः काल 10 बजे से ही कार्यक्रम प्रारंभ होगा। गुरु पूर्णिमा के महापर्व पर आचार्य भगवन् की संपूर्ण संघ एवं देशभर से आगंतुक हजारों की संख्या में भक्त समूह परिपूर्ण हर्ष-उत्साह के साथ महापूजा करेंगे। मंगल कलश स्थापना करने वाले महापात्रों का चयन किया जाएगा। आगामी चातुर्माम काल में भी जैन समाज के साथ समस्त नगर वासी आन्चार्य श्री एवं समस्त संघ की चर्चा एवं मंगलमय वाणी से लाभान्वित होते रहेंगे।</p>
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		<title>पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का पथरिया में चातुर्मास : पट्टाचार्य पद ग्रहण के बाद पहला चातुर्मास </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Jun 2025 08:40:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का चातुर्मास अपने समाधिस्थ दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी की जन्मभूमि पथरिया में करेंगे। पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला चतुर्मास होगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर... इंदौर। हाल ही में पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का चातुर्मास अपने समाधिस्थ दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी की जन्मभूमि पथरिया में करेंगे। पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला चतुर्मास होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर.</span>..</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> हाल ही में पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का चातुर्मास अपने समाधिस्थ दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी की जन्मभूमि पथरिया में उनकी ही प्रेरणा एवं आशीर्वाद से नव निर्मित विरागोदय तीर्थ में चातुर्मास स्थापित करेंगे। आचार्य श्री का यह 34 वां चातुर्मास है लेकिन, पट्टाचार्य पद से सुशोभित होने के बाद पथरिया में यह उनका पहला चातुर्मास है। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज सागर से ससंघ(25 पिच्छिका) पद विहार करते हुए 2 जुलाई बुधवार को पथरिया एवं 5 जुलाई को विरागोदय तीर्थ पथरिया में मंगल प्रवेश करेंगे।</p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यहां चातुर्मास मंगल कलश स्थापना के पूर्व 10 जुलाई को आचार्य श्री के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं 11 जुलाई को वीर शासन जयंती मनाई जाएगी एवं शनिवार 12 जुलाई को दोपहर में विराग विशुद्ध चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना विधि विधान के साथ होगी। समारोह में देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पथरिया पहुंचेंगे। इंदौर से भी बड़ी संख्या में गुरु भक्त चातुर्मास मंगल कलश स्थापना में पहुंचेंगे।</p>
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		<title>सिहोनिया में ध्वज स्थापना के साथ पंचकल्याणक महोत्सव शुरूः प्रथम दिन भगवान के गर्भ में आने की क्रियाओं का चित्रण किया </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 10:14:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी में फरवरी के द्वितीय सप्ताह तक चलने वाले पंचकल्याणक एवं प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत हुई। पहले दिन तीर्थंकर बालक के माता के गर्भ में आने के पूर्व की क्रियाएं हुईं। श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का सुबह मंगल घट यात्रा से शुभारंभ हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी में फरवरी के द्वितीय सप्ताह तक चलने वाले पंचकल्याणक एवं प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत हुई। पहले दिन तीर्थंकर बालक के माता के गर्भ में आने के पूर्व की क्रियाएं हुईं। श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का सुबह मंगल घट यात्रा से शुभारंभ हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र की प्रतिष्ठा की। बुधवार सुबह से पहले मंगलाष्टक, रक्षा मंत्र, शांति मंत्र, भगवान का अभिषेक शांतिधारा, पूजन की गई इस दौरान विधान में महोत्सव के सभी पात्र शामिल हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया जी में 10 फरवरी तक चलने वाले पंचकल्याणक एवं प्रतिष्ठा महोत्सव की बुधवार से शुरुआत हुई। पहले दिन तीर्थंकर बालक के माता के गर्भ में आने के पूर्व की क्रियाएं हुईं। श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का बुधवार की सुबह मंगल घटयात्रा से शुभारंभ हुआ। प्रतिष्ठा महोत्सव में सुसज्जित अयोध्या नगरी में पहले दिन गर्भ कल्याणक पूर्व रूप के विधान हुए तो भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। ऐसा दृश्य बना जैसे कि धरती पर इंद्रासन जीवंत हो गया हो।</p>
<p><strong>दैविक शक्तियों का आव्हान कर आमंत्रित किया </strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिष्ठाचार्य ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र प्रतिष्ठा की। दोपहर में यागमंडल विधान हुआ, जिसमें पंच परमेष्टि, 24 तीर्थंकर, भूतकाल-भविष्य-वर्तमान के भगवानों का पूजन-अर्चन हुआ। सुबह सबसे पहले 248 दैविक शक्तियों का आव्हान कर उन्हें आमंत्रित किया गया। इससे पहले बुधवार सुबह 07 बजे से धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए थे। पहले मंगलाष्टक, रक्षा मंत्र, शांति मंत्र, भगवान का अभिषेक शांतिधारा, पूजन की गई इस दौरान विधान में महोत्सव के सभी पात्र शामिल हुए।</p>
<p><strong>एक साथ धर्म की आराधना का बना केंद्र</strong></p>
<p>प्रवचन के दौरान आचार्य वसुनंदी जी महाराज ने कहा कि आपका बड़ा सौभाग्य है कि ऐसे आयोजन में आप लोग धर्म की आराधना के लिए जुट रहे हैं। व्यक्तिगत धार्मिक क्रियाएं करना अलग बात है और सामूहिक रूप से जब पुण्य का उदय होता है। तब एक साथ एक मंच पर एक स्थान पर बैठ करके ऐसे प्रभु की आराधना करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। वही बुधवार की शाम को संगीतमयी महाआरती, विद्वानों के प्रवचन हुए।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73847" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021.jpg" alt="" width="864" height="1152" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021.jpg 864w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0021-768x1024.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 864px) 100vw, 864px" />इंद्र-कुबेर ने की अयोध्या नगरी की रचना</strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पहले दिन बुधवार को गर्भ कल्याणक पूर्व रूप के विधान हुए। सौधर्म इंद्रों की सभा लगाई गई। आसन कम्पायमान, नगरी की रचना, माता-पिता की स्थापना, अष्ट देवियों द्वारा माता की परिचर्या, सोलह स्वप्न दर्शन का प्रदर्शन किया गया। सौधर्म सभा में इंद्रों के धर्म चर्चा में इंद्रासन कम्पायमान हुआ। इंद्र ने बताया, महाराजा नाभिराय के घर-आंगन में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभनाथ भगवान माता मरुदेवी के गर्भ में आने वाले हैं। तब कुबेर-इन्द्र ने अयोध्या की रचना की।</p>
<p><strong>प्राचीन मंदिर से निकली घटयात्रा</strong></p>
<p>पंचकल्याणक का शुभारंभ घटयात्रा से हुआ। यह घटयात्रा सिहोनिया स्थित प्राचीन जैन मंदिर से शुरू हुई, जो आयोजन स्थल पहुंची। जहां पर ध्वजारोहण किया गया। देशभर से पधारी विद्वानों की टीम ने आचार्य वसुनंदीजी महाराज के निर्देशन में पूजा-अर्चना की।</p>
<p><strong>मंडप शुद्धि एवं मंगल कलश स्थापना</strong></p>
<p>महोत्सव में मंडप शुद्धि के बाद आचार्य वसुनंदी सागर के सानिध्य में मंडप का उद्घाटन हुआ।</p>
<p><strong>रात में हुईं गर्भ कल्याणक की क्रियाएं</strong></p>
<p>पंचकल्याणक के पहले दिन रात गर्भ कल्याणक के पूर्व रूप की क्रियाएं हुईं, इनमें सौधर्म इंद्र की सभा हुई। धनपति कुबेर ने रत्नों की वर्षा की। माता को 16 स्वप्न दिखाई दिए। अष्टकुमारियों ने माता की सेवा की।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के संघ का हुआ मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>आचार्य वसुनंदीजी महाराज अपने संघ के दो दर्जन मुनियों के साथ पहुंचे। उनकी अगवानी इंद्र-इंद्राणियों और जैन समाज के श्रावकों ने की। इस दौरान गजराज, घोड़े भी चल रहे थे। पंचकल्याणक में आने वाले श्रद्धालुओं को सिहोनिया पहुंचने के लिए अंबाह व मुरैना निरूशुल्क बसें चलाई जा रही हैं।</p>
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		<title>कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आएंगे भक्त : 28 जुलाई को सूरसदन प्रेक्षाग्रह पर होगा वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह </title>
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		<pubDate>Sat, 27 Jul 2024 06:59:02 +0000</pubDate>
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<p><strong>समाधिस्थ भारत गौरव राष्ट्रसंत आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज चर्या शिरोमणि नवपट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के परम शिष्य मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वसौम्यसागर जी महाराज ससंघ का अर्पितमय पावन वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन 28 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे से आगरा के एमजी रोड स्थित सूरसदन प्रेक्षाग्रह पर होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जगदीश प्रसाद जैन और शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> समाधिस्थ भारत गौरव राष्ट्रसंत आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज चर्या शिरोमणि नवपट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के परम शिष्य मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वसौम्यसागर जी महाराज ससंघ का अर्पितमय पावन वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन 28 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे से आगरा के एमजी रोड स्थित सूरसदन प्रेक्षाग्रह पर होने जा रहा है। जिसकी ग्रेटर कमला नगर जैन समाज एवं अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। जिसको लेकर 26 जुलाई को कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य विद्यासागर संत निलय में मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंत सागर ससंघ के मंगल सानिध्य में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजित की गई।</p>
<p>जिसमें अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति के पदाधिकारुओं द्वारा वर्षायोग मंगल कलश स्थापना की पत्रिका का विमोचन किया। अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन ने बताया कि 28 जुलाई को मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात:6.00 बजे भगवान महावीर जिनबिम्ब का कमलानगर व दिल्ली से आये गुरुभक्तों द्वारा महा मस्तकाभिषेक एवं पूजन और प्रात:7:00 बजे श्री महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर कमलानगर के सामने व मन्दिर जी के शिखर पर जिन ध्वजारोहण किया जाएगा। वहीं वर्षायोग समिति के महामंत्री रोहित जैन अहिंसा ने बताया कि प्रात:7.30 बजे उपाध्यायसंघ श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर डी ब्लॉक कमला नगर से बैंड बाजों के साथ मंगल विहार कर एमडी जैन इंटर कॉलेज हरीपर्वत पर पहुंचेंगे।</p>
<p>जहां प्रात:8.30 बजे आगरा के छीपीटोला में वर्षायोग कर रहे मुनि शिवदत्त सागर जी ससंघ और अतिशय क्षेत्र पीरकल्याणी नसिया जी में मंगल चातुर्मास कर रहे मुनिश्री विद्म्बर सागर जी महाराज,आर्यिकाश्री निसर्गमति माता जी एवं आर्यिकाश्री श्रेयश्री माताजी ससंघ से एमडी जैन इन्टर कालेज हरीपर्वत परिसर पर मंगल मिलन होगा और प्रात:9.30 बजे सभी मुनिसंघों की आहारचर्या यहीं पर संपन्न होगी। मुख्य संयोजक मनोज जैन बाकलीबाल ने बताया कि सभी मुनिसंघ प्रात:11.30 बजे भव्य शोभा यात्रा के साथ श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर हरीपर्वत से एमजी रोड़ स्थित सूर सदन प्रेक्षाग्रह की ओर प्रस्थान करेंगे, जहां मुनिसंघों द्वारा सामायिक, तदोपरान्त 12.30 बजे से कार्यक्रम प्रारम्भ किया जाएगा। जिसमें मंगलाचरण,दीप प्रज्वलन, मंगल नृत्य श्रीफल अर्पण, पादप्रक्षालन, जिनवाणी भेंट,अर्घ्य समर्पण एवं अतिथियों का स्वागत सम्मान, मंगल समूह नृत्य मुख्य अतिथियों का सम्बोधन मंगल कलशों की स्थापना, गुरु पूजन, सभी मुनिसंघों के मंगल आशीर्वचन, मंगल आरती जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p><strong> मंत्री, सांसद रहेंगे मौजूद</strong></p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद आगरा एसपी सिंह बघेल, विधायक योगेंद्र उपाध्याय, विधायक जीएस धर्मेंद्र, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल एवं आगरा के पूर्व मेयर और सांसद राज्य सभा नवीन जैन रहेंगे। वर्षायोग समिति के गौरवाध्यक्ष प्रदीप जैन पीएनसी ने बताया कि जैन समाज के चार मास के मंगल चातुर्मास में वर्षा के समय सूक्ष्म जीव उत्पन्न होते हैं। अतः भावना रहती है कि जीव हिंसा नहीं हो इसी भावनावस मुनिगण मंगल चातुर्मास में एक स्थान पर रहकर धर्म ध्यान कर विराजमान रहते हैं।</p>
<p>इस चातुर्मास के चार माह में नित्यप्रति मंगल प्रवचन,स्वाध्याय जिज्ञासा, गुरुभक्ति एवं अन्य धार्मिक आयोजनों का लाभ समस्त आगरा सकल जैन समाज को मिलने वाला है। मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि इस मंगल कलश स्थापना समारोह में मैनपुरी, घिरोर, करहल, फिरोजाबाद, ग्वालियर, डबरा, कुरावली, टूंडला, दिल्ली, छत्तीसगढ़, भोपाल, इंदौर के आलावा विभिन्न नगरों के गुरुभक्त बड़ी संख्या में पधारेंगे,और उपाध्यायसंघ के नित्य प्रति कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रातः 8.30 बजे से मंगल प्रवचन दोपहर 3:00 बजे से स्वाध्याय एवं सायं 6.30 बजे से जिज्ञासा,तत्वचर्चा एवं गुरुभक्ति के लिए कमला नगर के आचार्य विद्या सागर संत निलय में विराजमान रहेंगे।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63911" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240727-WA0005.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240727-WA0005.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240727-WA0005-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240727-WA0005-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240727-WA0005-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240727-WA0005-990x446.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति के गौरवाध्यक्ष प्रदीप जैन पीएनसी,अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री रोहित जैन, मुख्य संयोजक मनोज जैन बाकलीवाल, यशपाल जैन, अर्थमंत्री संयोजक मुकेश जैन रपरिया,अरूण जैन छोटू,अंकुश जैन, सन्मति नरेन्द्र जैन फर्नीचर, निर्मल जैन मोठ्या, दिलीप जैन उत्तम उद्योग, उपाध्यक्ष सुशील जैन, पवन जैन, सुरेश जैन पांडया, राजकुमार गुड्डू सुनील जैन, रजत जैन, मनोज जैन सिंघई, संयोजक अनिल जैन रईस, सह अर्थमंत्री शैलेन्द्र जैन, राकेश बजाज, पंकज जैन, महेश जैन,अनिल जैन कागजी, मनोज कुमार जैन, राजेश जैन सीए, सचिन जैन,अनिल जैन, नरेश जैन, अनिल जैन, अनुज जैन, अंकेश जैन, समकित जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, अभिषेक जैन सहित समस्त अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>चातुर्मासिक प्रवचन में बह रही ज्ञान की गंगा : पर्याय की अपेक्षा से जीव बार-बार मरता है &#8211; विज्ञानमति माताजी </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Jul 2023 11:10:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हुत सारे मत-मतांतर हैं उनको सुनकर जिनेंद्र भगवान के बारे में संशय नहीं करना। क्या पता ऐसा होता होगा, क्या पता वैसा होता होगा। बहुत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हुत सारे मत-मतांतर हैं उनको सुनकर जिनेंद्र भगवान के बारे में संशय नहीं करना। क्या पता ऐसा होता होगा, क्या पता वैसा होता होगा। बहुत लोग आएंगे तुम्हें समझाने। क्यूं शरीर को कृष कर रहे हो, इससे मोक्ष होता है क्या। जब भी मोक्ष होगा महाराज बनकर ही होगा। लोक में अपने तर्क से भ्रम फैलाने वाले बहुत हैं लेकिन भ्रमित नहीं होना। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि&#8230;</p>
<p>-विपरीत मिथ्यात्व मतलब &#8211; धर्म को विपरीत मान लेना, तत्व को उल्टा समझ लेना है।</p>
<p>-एकांत मिथ्यात्व मतलब &#8211; द्रव्य के दोनों धर्मों को एक साथ नहीं मानना, एक पक्ष से ही मानना&#8230;एक ही द्रव्य में दो विपरीत धर्म होते हैं, प्रत्येक द्रव्य नित्य भी है, अनित्य भी है, नास्ती भी है, अस्ति भी है, क्षणभंगुर भी है शाश्वत भी है। जीव अजर अमर भी है और नश्वर (पर्याय की दृष्टि से) भी है। अब हमने रट लगा ली जीव अजर-अमर है, ये एकांत मिथ्यात्व है। अरे भाई जीव का मरण नहीं होगा तो उसका मोक्ष कैसे होगा। पर्याय की अपेक्षा से जीव बार-बार मरता है। भी अनेकांत (सम्यग्दर्शन) का चिह्न है और ही मिथ्यात्व का चिह्न है। 24 घंटे जहां भी चले जाओ, द्रव्य में उत्पाद व्यय चलता रहता है और उसमें ध्रोव्य सदा बना रहता है।</p>
<p>-विनय मिथ्यात्व &#8211; अपन तो सबसे छोटे हैं। सबको नमस्कार करो, सबकी सेवा करो, अपना कल्याण हो जाएगा&#8230;ये विनय मिथ्यात्व है। जो जिस योग्य हो, वैसी विनय करना चाहिए।</p>
<p>-संशय मिथ्यात्व &#8211; जिनवचनों में शंका करना&#8230;कभी भी शंका नहीं करना चाहिए&#8230;जब भी मोक्ष होगा, निर्ग्रंथ अवस्था में ही होगा&#8230;बहुत सारे मत-मतांतर हैं उनको सुनकर जिनेंद्र भगवान के बारे में संशय नहीं करना। क्या पता ऐसा होता होगा, क्या पता वैसा होता होगा। बहुत लोग आएंगे तुम्हें समझाने। क्यूं शरीर को कृष कर रहे हो, इससे मोक्ष होता है क्या। महाराज बनने से मोक्ष होता है क्या, भैया जब भी मोक्ष होगा महाराज बनकर ही होगा। गद्दी पर बैठे-बैठे नहीं होगा। लोक में अपने तर्क से भ्रम फैलाने वाले बहुत हैं लेकिन भ्रमित नहीं होना। भ्रम में आ जाना ही संशय मिथ्यात्व है।</p>
<p>-अज्ञान मिथ्यात्व &#8211; अगला भव किसने देखा ऋण लेकर के घी पीओ। मौज करो, आनंद से रहो। इस प्रकार अपने हित के बारे में नहीं सोचना अज्ञान मिथ्यात्व है।</p>
<p><strong>हमने इन पांच मिथ्यात्व के वश होकर के कितने कितने पाप किए हैं&#8230;</strong></p>
<p>&#8211; जिन्होंने जमींकंद का त्याग है उनको सूखी अदरक (सौंठ) नहीं खानी चाहिए। अदरक जब तक वृक्ष के ऊपर ही सूख नहीं जाती वो सौंठ नहीं बनती।</p>
<p>&#8211; अंधे से भी अंधा कौन है रागी, जिसको किसी के प्रति अत्यधिक राग है उसे उसके अलावा कुछ नहीं दिखता, वो आंख होते हुए भी अंधा ही है।</p>
<p>-शूरवीर कौन है &#8211; जो स्त्री के कटाक्षों से प्रभावित नहीं होता, वासना उसके मन में नहीं आती वो शूरवीर है।</p>
<p>-ये पुरुष बार-बार स्त्री की बुराई करते हैं लेकिन उसके बिना रह नहीं पाते।</p>
<p>-स्वदार संतोष व्रत &#8211; बहुत बड़ा व्रत है। ये सीता जी की अग्नि को पानी करने वाला व्रत है, सुदर्शन सेठ की सूली को सिंहासन करने वाला व्रत है। आपने जिंदगी में कभी पर स्त्री पर दृष्टि नहीं डाली होगी, कभी मन में विचार नहीं किया होगा कि पर स्त्री का सेवन करेंगे लेकिन कभी संकल्प नहीं लिया कि हम अपनी विवाहित स्त्री पर संतुष्ट रहेंगे। यदि ये संकल्प नहीं लिया है तो आपका स्वदार संतोष व्रत नहीं है। सब लोग संकल्प कर लेना भगवान चंद्रप्रभ के सामने कि अपनी वैवाहित स्त्री को छोड़कर के अन्य किसी को भी वासना की दृष्टि से नहीं देखूंगा। बहन की दृष्टि से, मां की दृष्टि से देखूंगा।</p>
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		<title>बुंदेलखंड के अति प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में होगा कार्यक्रम : पंच मुनिराजों की चातुर्मास मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम रविवार को </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Jul 2023 14:19:46 +0000</pubDate>
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<p><strong>अति प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीष से पंच ऋषिराजों एवं क्षुल्लक जी महाराज का मंगलमय चातुर्मास कलश स्थापना कार्यक्रम रविवार को होगा। आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बंधा जी (बुंदेलखंड)।</strong> अति प्राचीन जैन तीर्थ क्षेत्र बंधा जी में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीष से पंच ऋषिराजों एवं क्षुल्लक जी महाराज का मंगलमय चातुर्मास कलश स्थापना कार्यक्रम रविवार को होगा। चातुर्मास कमेटी के अनोज जैन, कमलेश जैन, बल्ले जैन ने बताया कि आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुनि श्री विनम्र सागर जी ससंघ पिछले 4 माह से बंधा जी में विराजमान हैं। मुनि श्री विनम्र सागर जी के साथ मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी, मुनि श्री निर्मद सागर जी, मुनि श्री निसर्ग सागर जी, मुनि श्री श्रवण सागर जी एवं क्षुल्लक श्री 105 हीरक सागर जी महाराज का चातुर्मास पहली बार अतिशय क्षेत्र बंधा जी की पावन धरा पर हो रहा है। मुनि विनम्र सागर ने शनिवार को भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जो ज्ञान और दर्शन के नायक होते हैं, वे चारित्र रूपी समुद्र के समान गंभीर होते हैं। मुनि श्री ने कहा कि हमारा परम सौभाग्य है कि हम ऐसे कलिकाल में पैदा हुए हैं। जहां आचार्य भगवन विद्यासागर जी महामुनि राज का परम आशीष हम लोगों को प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना करता है, वह कलश र्रिद्धि सिद्धि मंत्रों के द्वारा मंत्रित होता है। चातुर्मास पूरा होने पर कलश को उस भक्त को दिया जाता है, जिसने कलश की स्थापना की है। चातुर्मास कलश जिस व्यक्ति के घर में जाता है, उनके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-48703" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230715-WA0093.jpg" alt="" width="1040" height="588" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230715-WA0093.jpg 1040w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230715-WA0093-300x170.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230715-WA0093-1024x579.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230715-WA0093-768x434.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230715-WA0093-990x560.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1040px) 100vw, 1040px" /></p>
<p><strong>ये होंगे कार्यक्रम</strong></p>
<p>रविवार को प्रातः 8:00 बजे मंदिर में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन कार्यक्रम होगा। प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि दोपहर 1:30 बजे मुनि संघ  वेदी प्रांगण स्थित आचार्य विद्यासागर रजत सभागार पहुंचेंगे, जहां चातुर्मास कलश स्थापना का कार्यक्रम होगा। बुंदेलखंड सहित अनेक राज्यों से हजारों भक्त इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।</p>
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		<title> जैन समाज में शोक की लहर : चातुर्मास कर रहे वीररत्न सुरेश्वर जी महाराज का समाधिमरण </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Jul 2023 14:16:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। इंदौर जैन समाज के प्रमुख संत पूज्य गुरुदेव और तिलकनगर में चातुर्मास कर रहे वीररत्न सुरेश्वर जी महाराज के निधन से जैन समाज को ही नहीं, राष्ट्र को अपूरणीय क्षति हुई है। वात्सल्यमयी पूज्य गुरुदेव ने समाज पर कई उपकार किये हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता। मालवा क्षेत्र में मातमोर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर (राजेश जैन दद्दू)।</strong> इंदौर जैन समाज के प्रमुख संत पूज्य गुरुदेव और तिलकनगर में चातुर्मास कर रहे वीररत्न सुरेश्वर जी महाराज के निधन से जैन समाज को ही नहीं, राष्ट्र को अपूरणीय क्षति हुई है। वात्सल्यमयी पूज्य गुरुदेव ने समाज पर कई उपकार किये हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता। मालवा क्षेत्र में मातमोर तीर्थ पूज्य गुरुदेव की ही देन है।</p>
<p>दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, मंत्री डॉ जैनेन्द्र जैन, सुशील पांड्या, राजेन्द्र सोनी फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, हंसमुख गांधी, टीके वेद, संजीव जैन संजीवनी, मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू, राजीव जैन बंटी, राजेश लारेल आदि ने भावभीनी विनयांजलि अर्पित की है।</p>
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