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	<title>Mangal Chaturmas &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Mangal Chaturmas &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आर्यिका सुप्रज्ञ मति जी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश : भक्ति भाव से महिला, पुरुष और युवा माताजी के साथ पद विहार में शामिल हुए </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:29:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी में आचार्य श्री आदि सागर जी की मूल परंपरा के आचार्य महावीर कीर्ति जी,आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिकाश्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी संघस्थ आर्यिका अनघ मति जी माताजी और क्षुल्लिका संभाव मति जी माताजी का मंगलवार प्रातः राजघाट रोड से बड़वानी में मंगल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी में आचार्य श्री आदि सागर जी की मूल परंपरा के आचार्य महावीर कीर्ति जी,आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिकाश्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी संघस्थ आर्यिका अनघ मति जी माताजी और क्षुल्लिका संभाव मति जी माताजी का मंगलवार प्रातः राजघाट रोड से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> बड़वानी में आचार्य श्री आदि सागर जी की मूल परंपरा के आचार्य महावीर कीर्ति जी,आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिकाश्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी संघस्थ आर्यिका अनघ मति जी माताजी और क्षुल्लिका संभाव मति जी माताजी का मंगलवार प्रातः राजघाट रोड से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका माताजी का मंगल चातुर्मास खेरवाड़ा राजस्थान में हुआ था। जहां से पद विहार करते हुए गुजरात के बड़ौदा, पावागढ़ से बड़वानी पधारी हैं। सोमवार को रात्रि विश्राम धार जिले के कड़माल ग्राम में हुआ था। प्रातः बड़े धूमधाम और भक्ति भाव से महिला, पुरुष और युवा माताजी के साथ पद विहार में शामिल हुए और माताजी के पाद प्रक्षालन किया। श्रीफल भेंट कर नगर में मंगल प्रवेश कराया।</p>
<p><strong>जिनके घर खुले थे। उनको रत्न मिल गए </strong></p>
<p>दिगंबर जैन मंदिर पहुंच कर माताजी ने सभी वेदियों में विराजित भगवान के दर्शन किए और माताजी के मुखारविन्द से शांतिधारा हुई। माताजी ने धर्मसभा में कहा कि एक बार एक गांव में मुनादी करवाई कि सभी जन अपने अपने घरों को रात में खुला रखें। रात को राजा आएंगे और रत्न लुटाएंगे। सभी ने एक-दो दिन घर के दरवाजे खुले रखे पर कोई नहीं आया और ना ही रत्न लुटाए तो कुछ लोगों ने दरवाजे बंद कर दिए और सो गए किन्तु कुछ लोगों ने दरवाजे खुले रखे और जागते रहे और एक दिन राजा आए रत्न लुटाकर चले गए, जो जाग रहे थे और जिनके घर खुले थे। उनको रत्न मिल गए और जिन्होंने दरवाजे बंद कर लिए थे और सो गए थे। वे रत्न पाने से वंचित रह गए। उन्हें पछतावा हुआ। उसी प्रकार जिसे गुरु का सानिध्य चाहिए, वो सब जल्दी आ जाते हैं और आ गए और जिनको सानिध्य और दर्शन नहीं मिला वो घर पर ही रह गए।</p>
<p><strong>19 जून को आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाएगा</strong></p>
<p>आर्यिका माता जी ने कहा कि संपूर्ण निमाड़ वालों का सौभाग्य है कि इस सिद्ध भूमि बावनगजा के पास निवास करते हो और इस सिद्ध भूमि, जहां से करोड़ो मुनियों ने मोक्ष को प्राप्त किया है। जिसका कण-कण पावन है और इस सिद्ध भूमि पर कई साधु-संतों के पावन चरण पड़ते हैं और आवागमन होता रहता है। निमाड़ वासियों को सप्ताह में एक बार और बड़वानी वासियों को दिन में एक बार सिद्ध भूमि पर दर्शन करने जाना ही चाहिए। आगामी 19 जून को आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाएगा।</p>
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		<title>मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज के संभावित इंदौर वर्षायोग की तैयारियां तेज, सामाजिक संसद जुटी: 7 जून को 100 बसों के लक्ष्य के साथ श्रद्धालु करेंगे श्रीफल अर्पण; 136 मंदिरों से समाजजन होंगे शामिल, बैठक में बनी व्यापक रणनीति </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:06:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ शहर में अध्यात्म और वात्सल्य की अमृत वर्षा होने की प्रबल संभावना बनती नजर आ रही है। दिगंबर जैन सामाजिक संसद ने मुनिश्री पुंगव सुधा सागरजी महाराज का पावन वर्षायोग इस वर्ष इंदौर में संपन्न कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।इंदौर से पढ़िए रेखा जैन की, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;. इंदौर। शहर में अध्यात्म और वात्सल्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> शहर में अध्यात्म और वात्सल्य की अमृत वर्षा होने की प्रबल संभावना बनती नजर आ रही है। दिगंबर जैन सामाजिक संसद ने मुनिश्री पुंगव सुधा सागरजी महाराज का पावन वर्षायोग इस वर्ष इंदौर में संपन्न कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।<span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए रेखा जैन की, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> शहर में अध्यात्म और वात्सल्य की अमृत वर्षा होने की प्रबल संभावना बनती नजर आ रही है। दिगंबर जैन सामाजिक संसद ने मुनिश्री पुंगव सुधा सागरजी महाराज का पावन वर्षायोग इस वर्ष इंदौर में संपन्न कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। महाराज श्री को इंदौर चातुर्मास के लिए आमंत्रित करने और उन्हें श्रीफल भेंट करने के लिए सामाजिक संसद ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। आगामी 7 जून को इंदौर से बड़ी संख्या में समाजजन महाराज श्री के दर्शन और श्रीफल अर्पण के लिए रवाना होंगे। इससे पूर्व भी इंदौर समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, महामंत्री हर्ष जैन, कोषाध्यक्ष विजय पाटोदी, अर्पित पाटोदी, कार्यकारी अध्यक्ष नवीन गोधा मुनि श्री को चातुर्मास के लिए निवेदन करने के लिए श्रीफल अशोकनगर जाकर भेंट कर चुके हैं।</p>
<p><strong>136 मंदिरों से जुटेंगे श्रद्धालु, 100 बसों का लक्ष्य</strong></p>
<p>दिगंबर जैन सामाजिक संसद की रविवार को महत्वपूर्ण बैठक वरिष्ठ समाजश्रेष्ठी एमके जैन की अध्यक्षता में कीर्ति स्तंभ परिसर में की गई। बैठक में तैयारियों की रूपरेखा साझा करते हुए महामंत्री हर्ष जैन ने बताया कि इंदौर शहर के सभी 136 जैन मंदिरों से श्रद्धालुओं को ले जाने के लिए लगभग 100 बसों का विशाल काफिला तैयार किया जा रहा है। धर्मप्रेमियों में इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। योजना के शुरुआती चरण में ही अब तक 25 बसों की बुकिंग की जा चुकी है। सामाजिक संसद के अनुसार, व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने और बस में जाने वाले भक्तों की सीट सुनिश्चित करने के लिए प्रति श्रद्धालु मात्र 100 रुपए का टोकन पंजीयन शुल्क रखा गया है।</p>
<p><strong>तन-मन-धन से चातुर्मास को सफल बनाएगी सामाजिक संसद</strong></p>
<p>बैठक को संबोधित करते हुए सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा ने कहा कि पूरा जैन समाज तन, मन और धन से सहयोग कर मुनिश्री सुधा सागर महाराज के इस संभावित वर्षायोग को अभूतपूर्व और ऐतिहासिक रूप से सफलतापूर्वक पूर्ण कराएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस वर्ष इंदौर में जितने भी अन्य चातुर्मास होंगे, उन सभी में सामाजिक संसद अग्रिम भूमिका निभाते हुए अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। इस दौरान नवीन गोधा ने पुराने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि सामाजिक संसद पूर्व में भी मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज का भव्य चातुर्मास इंदौर की धरा पर सकुशल संपन्न करा चुकी है। इस बार समाजजन और भी अधिक ऊर्जा, उत्साह तथा भक्ति भाव के साथ परम पूज्य मुनिश्री सुधा सागर महाराज के वर्षायोग की अगवानी की तैयारी में जुटे हैं।</p>
<p><strong>बैठक में ये वरिष्ठ पदाधिकारी रहे उपस्थित</strong></p>
<p>प्रवीण जैन ने बताया कि इस विशेष बैठक में समाज के कई प्रमुख चेहरे और विभिन्न मंदिरों के अध्यक्ष व सचिव उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से विजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय जैन, मुकेश जैन, संजय मेग्नस, सचिन जैन, बाहुबली जैन, अशोक शास्त्री, मनीष जैन, प्रियांशु जैन, डी. के. जैन, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष साधना दगड़े और प्रवक्ता रेखा संजय जैन सहित अनेक गणमान्य समाजजन शामिल हुए और अपने सुझाव साझा किए।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रयोग सागर जी का पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव 15 को: सनावद से भक्तजन करेंगे कार्यकम में शिरकत  </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 12:09:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सनावद नगर गौरव मुनिश्रेष्ठ प्रयोगसागर जी मुनिराज के सद्गुरु सान्निध्य में तेंदूखेड़ा नगरी में संपन्न मंगल चातुर्मास के उपसंहार स्वरूप पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव किया जा रहा है। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी की मंगल प्रेरणा और आशीर्वाद से आज्ञानुवर्ती शिष्य सनावद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सनावद नगर गौरव मुनिश्रेष्ठ प्रयोगसागर जी मुनिराज के सद्गुरु सान्निध्य में तेंदूखेड़ा नगरी में संपन्न मंगल चातुर्मास के उपसंहार स्वरूप पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी की मंगल प्रेरणा और आशीर्वाद से आज्ञानुवर्ती शिष्य सनावद नगर गौरव मुनिश्रेष्ठ प्रयोगसागर जी मुनिराज के सद्गुरु सान्निध्य में तेंदूखेड़ा नगरी में संपन्न मंगल चातुर्मास के उपसंहार स्वरूप पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव किया जा रहा है। सन्मति जैन काका ने बताया कि शुभ समारोह शनिवार 15 नवंबर को दोपहर 12.30 बजे से बाजार परिसऱ जैन धर्मशाला के पास, तेंदूखेड़ा में किया जाएगा।</p>
<p>जिसमें विशेष कार्यक्रम पिच्छिका परिवर्तन समारोह एवं विशेष आकर्षण सांस्कृतिक प्रस्तुति समाज के बाल एवं युवा वर्ग द्वारा दी जाएगी। जिसमें नगर से सुधीरकुमार चौधरी, ललित चौधरी, डिसेंटबाला जैन, हेमलता जैन, वंदना जैन सहित अनेक समाजजन कार्यक्रम में अपने सहभागिता दर्ज करवाएंगे। तेंदूखेड़ा समाज कार्यकारणी समिति ने सभी समाजजनों से कार्यक्रम को सफल बनने की अपील की है।</p>
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		<title>संयम पर्व के रूप में मनाया जाएगा पिच्छिका परिवर्तन : आर्यिका विदुषी श्री माताजी ने कहा कि साधन से नहीं साधना से ही मुक्ति मिलती है </title>
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		<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 14:04:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विराग सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका विदुषी श्री माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास मनावर में चल रहा है। आर्यिका विदुषी श्री माताजी ने कहा कि साधन से नहीं साधना से ही मुक्ति मिल सकती है। मनावर से पढ़िए, यह खबर&#8230; मनावर। आचार्य विराग सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका विदुषी श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विराग सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका विदुषी श्री माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास मनावर में चल रहा है। आर्यिका विदुषी श्री माताजी ने कहा कि साधन से नहीं साधना से ही मुक्ति मिल सकती है। <span style="color: #ff0000">मनावर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मनावर</strong>। आचार्य विराग सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका विदुषी श्री माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास मनावर में चल रहा है। आर्यिका</p>
<p>विदुषी श्री माताजी ने कहा कि साधन से नहीं साधना से ही मुक्ति मिल सकती है। संयम का प्रतीक है पिच्छिका और पिच्छिका साधु के संयम का उपकरण है। इसके पांच गुण होते हैं। साधु हमेशा अपने पास पिच्छिका रखते हैं, जो संयम में सहायक होती है। पिच्छिका संयम में परिवर्तन का बोध कराती है। जिस प्रकार पिच्छिका का परिवर्तन हो रहा है। इस प्रकार संसार भी परिवर्तनशील है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए जीवन में परिवर्तन लाना चाहिए। दिगंबर साधु की पहचान मोर पंख की पिच्छिका है। यह इतनी मुलायम होती है कि इससे किसी भी जीव की हानि नहीं होती है। संत की पिच्छिका प्राप्त होना सौभाग्य की बात है। दीक्षा के समय आचार्य, आर्यिका इस संयम के उपकरण रूप पिच्छिका को जीव दया पालन हेतु शिष्यों को देते हैं जो संयम का प्रतीक है। आर्यिका संघ को नई पिच्छिका देने और पुरानी पिच्छिका लेने के लिए संयम को धारण करना पड़ता है। इसीलिए समाज जनों में संयम एवं त्याग की भावना को धारण करने के लिए आर्यिका माताजी संघ द्वारा फार्म के माध्यम से अपने जीवन में सभी श्रावकों एवं श्राविकाओं को कुछ न कुछ त्याग करवाया जा रहा है। आर्यिका श्री ने कहा कि अभी तक करीबन 60 से 70 लोगों ने त्याग एवं संयम के फॉर्म को भर दिया है। करीबन 250 से 300 फॉर्म भरना है। फार्म के माध्यम से जो भी सबसे ज्यादा संयम एवं त्याग के कालम को पूर्ण करेगा एवं अपने जीवन में संयम एवं त्याग का पालन करेगा उसे ही पिच्छिका भेंट करने एवं पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का लाभ प्राप्त होगा। इस अवसर पर चातुर्मास समिति एवं दि.जैन समाज के अध्यक्ष अभय सोगानी ने कहा कि आर्यिका माताजी ससंघ की पिच्छिका परिवर्तन आगामी दिनों में होगा। जो भक्ति और उत्साह से मनाया जाएगा। जो ज्ञान और भक्ति के रसों से परिपूर्ण होगा।</p>
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		<title>ज्ञान ही आनंद है, ज्ञान से ही शांति मिलती है: आचार्य विशुद्ध सागर जी ने पथरिया में ज्ञान की महिमा व्याख्यायित की  </title>
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		<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 14:49:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने यहां धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ विद्वान वही है, जो नैतिक जीवन जिये, जो अशांति के कारणों से अपनी रक्षा करे। अपयश के कार्यों से अपनी रक्षा करे। विवेकी वही है, जो आय अधिक करे और व्यय कम करे। पथरिया से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने यहां धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ विद्वान वही है, जो नैतिक जीवन जिये, जो अशांति के कारणों से अपनी रक्षा करे। अपयश के कार्यों से अपनी रक्षा करे। विवेकी वही है, जो आय अधिक करे और व्यय कम करे। <span style="color: #ff0000">पथरिया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पथरिया।</strong> आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने यहां धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ विद्वान वही है, जो नैतिक जीवन जिये, जो अशांति के कारणों से अपनी रक्षा करे। अपयश के कार्यों से अपनी रक्षा करे। विवेकी वही है, जो आय अधिक करे और व्यय कम करे। जो अमृत-सम मधुर वचन बोले, विवेकी हो, सामंजस्य पूर्ण जीवन जीता हो। वही श्रेष्ठ पंडित है। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने कहा कि आचार्य विशुद्ध सागरजी ससंघ पथरिया में मंगल चातुर्मास कर रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के वैभव बडामलहारा बताते हैं कि विरागोदय तीर्थ पथरिया में आचार्यश्री और मुनिराजों के प्रवचनों का लाभ यहां के समाजजन उठा रहे हैं। आचार्यश्री ने धर्मसभा में कहा कि मात्र शाब्दिक ज्ञान से कोई पंडित नहीं माना जा सकता है। शाब्दिक ज्ञान के साथ आत्मिक ज्ञान अनुभव पूर्ण ज्ञान भी होना चाहिए। कथनी और करनी में एकत्व ही श्रेष्ठ-संन्यासी का परिचायक होता है। जो कथन के विरुद्ध कार्य करे वह विद्वान नहीं कहा जा सकता है। जो कथन अनुसार आचरण करें, वहीं सच्चा वक्ता है। व्यक्ति को कथनी के अनुसार कार्य करना चाहिए। जो कथनी अनुसार आचरण करता है, यह लोक में सत्कार, पुरस्कार को प्राप्त करता है।</p>
<p><strong>ज्ञानी का सर्वत्र सम्मान होता है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जिसकी विवेक की आंख खुली है, वही पंडित होता है। पंडित ज्ञानी, गुणी, उपकारी होता है। जो सब पर उपकार करे वही ज्ञानी पंडित है। जो स्व पर हितैषी हो वही पंडित है। ज्ञान ही प्रकाश है। ज्ञान ही दीप है। ज्ञान ही दिवाकर है। ज्ञान ही आनंद है। ज्ञान में ही शांति है। ज्ञानी का सर्वत्र सम्मान होता है। ज्ञानी स्वयं के साथ दूसरों का भी कल्याण करता है। जो वस्त्र-धारी विवेकी विद्वान हैं। वे अदीक्षित पंडित हैं और जो दिगंबर मुनि हैं वह दीक्षित पंडित हैं। जैसे काष्ठ में अग्नि होती है, तिल में तेल होता है, ऐसे ही देह में देही (आत्मा) का जिसे बोध होता है, वही पंडित है।</p>
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		<title>जो सब कुछ त्याग देते हैं, वहीं परम शांति पाते हैं : आचार्य विशुद्ध सागर जी ने उत्तम त्याग धर्म पर दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Sep 2025 14:33:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ में चल रहा है। वैभव बडामलहारा जी ने बताया कि विरागोदय तीर्थ में आचार्य विशुद्ध सागर जी ने धर्मसभा में संबोधन करते हुए कहा कि त्याग उत्थान का सोपान है, त्याग सुख और मुक्ति का स्थान है। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ में चल रहा है। वैभव बडामलहारा जी ने बताया कि विरागोदय तीर्थ में आचार्य विशुद्ध सागर जी ने धर्मसभा में संबोधन करते हुए कहा कि त्याग उत्थान का सोपान है, त्याग सुख और मुक्ति का स्थान है। <span style="color: #ff0000">पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पथरिया।</strong> आचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ में चल रहा है। वैभव बडामलहारा जी ने बताया कि विरागोदय तीर्थ में आचार्य विशुद्ध सागर जी ने धर्मसभा में संबोधन करते हुए कहा कि त्याग उत्थान का सोपान है, त्याग सुख और मुक्ति का स्थान है। त्याग प्रकृति का नियम है। त्याग श्रेष्ठ धर्म है। त्याग शांति का उपाय है। त्याग साधना है। त्याग में आनंद है। त्याग स्वर्ग का सोपान है। त्याग सिद्धि का साधन है। त्याग कर्म क्षय का हेतु है। त्याग सज्जनों की कुल विद्या है। त्याग मुक्ति का उपाय है। निर्वाण के लिए त्याग आवश्यक है।</p>
<p><strong>त्याग दुःख से छूटने का उपाय है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि संपूर्ण मोह का त्याग करके मन-वचन-काय से निर्वेग-भावना को भाते हैं। उनको त्याग धर्म होता है। मिष्ट भोजन, राग-द्वेष को उत्पन्न करने वाले उपकरण तथा ममत्म-भाव को उत्पन्न होने में निमित्त वसतिका को छोड़ देता है। उसी त्यागी को त्याग धर्म होता है। त्याग दुःख से छूटने का उपाय है। जो सबकुछ त्याग देते हैं। वहीं परम शांति को प्राप्त कर सकता है। जितना-जितना त्याग होगा, उतनी उतनी पूज्यता प्राप्त होती है। दुःख के कारणों को शीघ्र छोड़ना भी त्याग है।</p>
<p><strong>छोड़़ने से त्यागने से संकल्प-विकल्प कम होते है</strong></p>
<p>त्याग श्रमणों की परंपरा है। त्याग से ही मोक्ष मार्ग प्रारंभ होता है। त्याग के बिना समाधि संभव नहीं है। आंतरिक भावों से छोड़ना ही त्याग है। जोड़़ने में कष्ट है। छोड़ने में आनंद है। छोड़़ने से त्यागने से संकल्प-विकल्प कम होते हैं। निराकुलता बढ़ती है। घोड़कर चाहना, महापाप है। मुनियों, तपस्वियों की साधना में सहायक आहार, औषध, ज्ञानाराधना हेतु शास्त्र लेखनी एवं ठहरने हेतु भवन में स्थान देना, इसे त्याग जानना।</p>
<p><strong>त्याग पूर्वक दान देना चाहिए</strong></p>
<p>ममत्व छोड़‌ना ही त्याग है। शक्ति अनुसार व्यक्ति को त्याग करना चाहिए। जिससे साधक की साधना बढ़े, तप में वृद्धि हो, परिणाम विशुद्ध हो, मोक्षमार्ग प्रशस्त हो, ऐसे आगमानुकूल साधन (उपकरण) श्रावक द्वारा साधुओं को उपलब्ध कराना चाहिए। स्व पर उपकार हेतु, स्वयं के द्रव्य को, यथायोग्य पात्र को स्व हस्त से देना दान है। विधि, द्रव्य, दाता, पात्र और दान में विशेषता से आती है। त्याग पूर्वक दान देना चाहिए। त्याग पूर्वक दिया गया दान ही भूषण बनता है। दान देते समय किसी प्रकार की आकांक्षा नहीं होना चाहिए। निःकांक्ष भक्ति, निःकांक्ष दान का फल ही सर्वश्रेष्ठ उत्तम होता है। दान देते समय भव्य जीनों को हर्ष होता है।</p>
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		<title>तप में निराकुलता है इससे ही आनंद है : पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा वही तप जिन शासन में श्लाघनीय है, जो आत्मा कल्याण करे  </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Sep 2025 09:58:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। यहां पर पर्युषण पर्व के दौरान दसलक्षण महोत्सव के तहत मुनिराजों के प्रवचनों और नित पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, भक्ति, आराधना का दौर जारी है। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230; विरागोदय तीर्थ पथरिया। पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। यहां पर पर्युषण पर्व के दौरान दसलक्षण महोत्सव के तहत मुनिराजों के प्रवचनों और नित पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, भक्ति, आराधना का दौर जारी है। <span style="color: #ff0000">पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p>विरागोदय तीर्थ पथरिया। पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। यहां पर पर्युषण पर्व के दौरान दसलक्षण महोत्सव के तहत मुनिराजों के प्रवचनों और नित पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, भक्ति, आराधना का दौर जारी है। वैभव बडामलहारा ने बताया की विरागोदय तीर्थ में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी ने धर्मसभा में कहा कि -वही तप जिनशासन में श्लाघनीय है, जो आत्म-कल्याण के लिए हो।</p>
<p>तप वहीं श्रेष्ठ है, जो कर्म-क्षय के लिए तपा जाए। आत्म भावना पूर्वक विविध प्रकार के काम-क्लेश समता पूर्वक सहन करना तप है। विषय-कषायों का निग्रह करते (हुए, ध्यान- अध्ययन के साथ, आत्म-भावनापूर्वक साधना करना ही तप है। तप से कर्म-निर्जरा होती है। इच्छाओं का शमन, आकांक्षाओं का अभाव ही तप है।</p>
<p>ज्ञान आत्म-बोधक है, तप आत्म शोधक है। अनशन, अवमोदर्य, वृत्ति परिसंख्यान, रस परित्याग, विविक्त शैयाशन, काय-क्लेश ये बाह्य तप हैं और प्रायश्चित्त, विनय, वैयावृत्य स्वाध्याय, व्युत्सर्ग, ध्यान ये अंतरंग तप हैं। सम्यग्दृष्टि वीतरागी-साधुओं के समीचीन-तप से कर्मक्षय होता है तथा शाश्वत-शांति का पथ प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि उमंग, उत्साह पूर्वक तप करना चाहिए।</p>
<p><strong>आत्मा तप के प्रभाव से कर्म-कलंक से भिन्न होती है</strong></p>
<p>स्वस्थ अवस्था में किया गया तप शीघ्र ही श्सिद्धिश् प्रदान करता है। शरीर स्वस्थ है, इन्द्रियाँ स्वस्थ हैं, तब तक साधना कर लो, नहीं तो अस्वस्थ अवस्था में स्वयं ही नहीं संभलोगे तो साधना कैसे करोगे? कलिकाल में सर्व श्रेष्ठ कोई तप है, तो वह श्स्वाध्यायश् है। स्वर्ण अग्नि में तपाने पर उसकी किट्टिमा भिन्न हो जाती है, स्वर्ण चमकने लगता है, इसी प्रकार आत्मा तप के प्रभाव से कर्म-कलंक से भिन्न होकर शुद्ध हो जाती है।</p>
<p><strong>आत्म रुचि करो, समीचीन तप करो</strong></p>
<p>डरो मत, उराओ मत । तप स्वीकार करो, कर्म कलंक हरो। तप सिद्धि का साधन है। तप से प्रशंसा और प्रसिद्धि मिलती है। तप में निराकुलता है और निराकुलता ही आनंद है। शुद्धि चाहिए, तो विशुद्धि बढ़ाओ। विशुद्धि से ही आत्म-शुद्धि संभव है। शोध चाहिए तो बोध करो, बोध के बिना शोध नहीं। बोध, बोधी से ही शोध और समाधि संभव है। तपोगे, तभी दमकोगे। चमकना है तो तपना सीखो। तप करो, कर्म हरो, सिद्धालय के कंत बनो। जितना तपोगे, उतना चमकोगे। आत्म रुचि करो, समीचीन तप करो।</p>
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		<title>बड़वानी के निकट होगा पहली बार मंगल चातुर्मास : 3 जुलाई को होगा आर्यिका माताजी क्षमा श्री का मंगल प्रवेश      </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Jul 2025 17:02:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली बार किसी साधु-संत का मंगल वर्षायोग चातुर्मास होगा। आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का इस वर्ष का वर्षा योग मंगल चातुर्मास बड़वानी के निकट अतिशय क्षेत्र पार्श्व गिरीआमलियापानी ग्वाल बेड़ा पर होगा। बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; बड़वानी। पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली बार किसी साधु-संत का मंगल वर्षायोग चातुर्मास होगा। आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का इस वर्ष का वर्षा योग मंगल चातुर्मास बड़वानी के निकट अतिशय क्षेत्र पार्श्व गिरीआमलियापानी ग्वाल बेड़ा पर होगा। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>बड़वानी।</strong> पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली बार किसी साधु-संत का मंगल वर्षायोग चातुर्मास होगा। आचार्य कुंथु सागर जी की शिष्या गणिनी आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का इस वर्ष का वर्षा योग मंगल चातुर्मास बड़वानी के निकट अतिशय क्षेत्र पार्श्व गिरीआमलियापानी ग्वाल बेड़ा पर होगा। पार्श्वगिरी कमेटी के अध्यक्ष कमल गोधा और क्षेत्र कमेटी ने बताया कि इस क्षेत्र के पुनीत पुण्य योग से पहली बार किसी श्रमण का वर्षा योग चातुर्मास होगा। उसके लिए कमेटी ने सारी तैयारियां कर ली है और संपूर्ण कार्यकर्ताओं और निमाड़ के श्रावकों में अपूर्व उत्साह का वातावरण है। इस चातुर्मास के लिए माताजी का भव्य मंगल प्रवेश 3 जुलाई गुरुवार को क्षेत्र पर होगा। इस के लिए क्षेत्र कमेटी ने भव्य अगवानी की तैयारी कर रखी है।</p>
<p>ट्रस्ट के मंत्री गौरव पहाड़िया ने बताया कि 7 जुलाई को भव्य कार्यक्रम में क्षेत्र पर प्रथम वर्षायोग मंगल कलश चातुर्मास स्थापना की जाएगी। जिसमें संपूर्ण निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र, गुजरात से गुरु भक्तों की आने की संभावना है। कमेटी सदस्यों ने निमाड़ मालवा और आसपास के क्षेत्र के समाज जन से इस कार्यक्रम में शामिल हो कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है। साथ ही पूरे चातुर्मास में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, अभिषेक, विधान, प्रवचन और धर्म चर्चा आदि होगी। श्रावकों के भोजन की व्यवस्था क्षेत्र पर रखी गई है।</p>
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		<title>आदर्श नगर में आचार्य श्री अतिवीर जी का होगा आगमन : 40 साल बाद यहां चातुर्मास का सौभाग्य </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 07:50:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजधानी की धर्मनगरी मजलिस पार्क (आदर्श नगर) का सकल जैन समाज इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी दिगंबर जैन मुनि का मंगल चातुर्मास यहां होने जा रहा है। दिल्ली से पढ़िए, समीर जैन की यह खबर&#8230; दिल्ली। राजधानी की धर्मनगरी मजलिस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजधानी की धर्मनगरी मजलिस पार्क (आदर्श नगर) का सकल जैन समाज इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी दिगंबर जैन मुनि का मंगल चातुर्मास यहां होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">दिल्ली से पढ़िए, समीर जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>दिल्ली।</strong> राजधानी की धर्मनगरी मजलिस पार्क (आदर्श नगर) का सकल जैन समाज इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी दिगंबर जैन मुनि का मंगल चातुर्मास यहां होने जा रहा है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एकता, श्रद्धा और समरसता का अनूठा उदाहरण है क्योंकि, इस ऐतिहासिक चातुर्मास को दिगंबर और श्वेताम्बर जैन समाज संयुक्त रूप से करने जा रहे हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी (छाणी) परंपरा के प्रमुख आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज का आगमन पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य का विषय है। समाज के वरिष्ठजनों के अनुसार आदर्श नगर में यह पहली बार है। जब किसी दिगम्बर जैन मुनि का चातुर्मास हो रहा है और वह भी श्वेताम्बर समाज के पूर्ण समर्थन व सहयोग के साथ।</p>
<p>यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा, बल्कि समाज में सामूहिकता और धार्मिक सौहार्द की मिसाल भी पेश करेगा। समस्त आदर्श नगर क्षेत्र में इस चातुर्मास को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। समाज के हर वर्ग अपनी-अपनी भूमिकाओं में बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं। आचार्य श्री के सान्निध्य में चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा जो समस्त समाज में नवचेतना का संचार करने में सहायक होंगे।</p>
<p><strong>एकता की नई मिसाल बनेगा यह आयोजन</strong></p>
<p>आदर्श नगर जैन समाज पिछले 6-7 वर्षों से निरंतर प्रयासरत रहा है कि क्षेत्र में पूज्य आचार्य श्री का चातुर्मास स्थापित हो जाए। यह समाज की संकल्प शक्ति, समर्पण और श्रद्धा का ही परिणाम है कि इस वर्ष यह स्वप्न साकार हो सका है। आचार्य श्री के आगमन के साथ ही समाज को वह आध्यात्मिक सौभाग्य प्राप्त हो रहा है जिसकी प्रतीक्षा वर्षों से की जा रही थी। जहाँ अक्सर अलग-अलग पंथों के कार्यक्रम अलग-अलग होते हैं, वहीं इस बार दोनों जैन संप्रदायों ने मिलकर एक ऐतिहासिक पहल की है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगा कि मत भले अलग हों, परंतु धर्म और सेवा की भावना हमें एक सूत्र में बाँध सकती है।</p>
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		<title>वर्षायोग के लिए मुनियों का हुआ मुरैना आगमन: 20 जुलाई को होगी वर्षायोग की स्थापना  </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 08:45:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चातुर्मास के लिए युगल मुनिराजों का भव्य नगरागमन हुआ। मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज का 2025 का भव्य मंगल चातुर्मास श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में होना सुनिश्चित है। मुनिराज अतिशय क्षेत्र टिकटोली की वंदना के बाद जौरा में धर्म प्रभावना कर पद विहार करते हुए ज्ञानतीर्थ पधारे। जैन समाज मुरैना, मंदिर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चातुर्मास के लिए युगल मुनिराजों का भव्य नगरागमन हुआ। मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज का 2025 का भव्य मंगल चातुर्मास श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में होना सुनिश्चित है। मुनिराज अतिशय क्षेत्र टिकटोली की वंदना के बाद जौरा में धर्म प्रभावना कर पद विहार करते हुए ज्ञानतीर्थ पधारे। जैन समाज मुरैना, मंदिर कमेटी एवं वर्षायोग समिति ने बैरियर चौराहे पर पहुंचकर मुनिसंघ की अगवानी की। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> चातुर्मास के लिए युगल मुनिराजों का भव्य नगरागमन हुआ। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित आचार्यश्री आर्जवसागर महाराज के शिष्य मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज का 2025 का भव्य मंगल चातुर्मास श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में होना सुनिश्चित है। मुनिराज अतिशय क्षेत्र टिकटोली की वंदना के बाद जौरा में धर्म प्रभावना कर पद विहार करते हुए ज्ञानतीर्थ पधारे। सोमवार को सुबह में ज्ञानतीर्थ से मुरैना नगर के लिए पद विहार किया। जैन समाज मुरैना, मंदिर कमेटी एवं वर्षायोग समिति ने बैरियर चौराहे पर पहुंचकर मुनिसंघ की अगवानी की। बैरियर चौराहे से मुनिसंघ को गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में मंगल प्रवेश कराया गया। शोभायात्रा में पुरुष वर्ग श्वेत वस्त्र एवं महिलाएं केसरिया परिधान में सुसज्जित थी। युवा बंधु अपने हाथों में पचरंगी ध्वजाओं को लहराते हुए चल रहे थे। महिलाएं मंगलगान कर रही थीं।</p>
<p>विभिन्न स्थानों पर युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगवानी की गई। भव्य शोभायात्रा एमएस रोड, पुल तिराहा, सदर बाजार, हनुमान चौराहा, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पर पहुंची। बड़े जैन मंदिर पर रंगोली आदि सजाकर, सिर पर मंगल कलश रखकर महिलाओं से मुनिराजों की अगवानी की। उपस्थित सभी पुरुषवर्ग ने युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन किया।</p>
<p><strong>मेरा सौभाग्य है इस पावन भूमि पर वर्षायोग होगा</strong></p>
<p>बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि मुरैना की भूमि पावन व पवित्र है। इस भूमि पर आचार्यश्री सुमति सागर एवं आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज का जन्म हुआ। मुरैना नगर में गुरुनाम गुरु गोपालदास वरैया द्वारा स्थापित जैन संस्कृत विद्यालय है। इस विद्यालय ने सैकड़ों विद्वान तैयार किए, जो संपूर्ण भारत में जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। यदि मुरैना में वर्षायोग होता है तो यह मेरे लिए अति सौभाग्य की बात होगी।</p>
<p><strong>वर्षायोग मन की मलिनता को साफ करता है</strong></p>
<p>वर्षायोग केवल श्रीफल भेंट करने का नाम नहीं है। वर्षायोग केवल कमेटी या समाज या कोई व्यक्ति विशेष नहीं कराता। वर्षायोग तो वो पावन पर्व है जिसे सभी बंधु, समाज, कमेटियां एकजुटता के साथ मिलकर कराती हैं। वर्षायोग मन की मलिनता को साफ करने का समय होता है। अगर आपके मन की मलिनता दूर नहीं हुई, आपके मन का मैल साफ नहीं हुआ तो चातुर्मास कराना सार्थक नहीं होगा। चातुर्मास की सार्थक बनाने के लिए संपूर्ण समाज को एक छत के नीचे आना होगा, तभी चातुर्मास सफल होगा। हम केवल प्रवचन देते हैं, वचन नहीं देते। यदि हमें लगेगा कि समाज भक्तिभाव पूर्वक, एकजुटता के साथ चातुर्मास कराने के भाव रखती है तो मुरैना में चातुर्मास होगा, अन्यथा&#8230;।</p>
<p><strong>20 जुलाई को होगा मंगल कलश स्थापना समारोह</strong></p>
<p>यदि सबकुछ मंगल मंगल रहा तो 20 जुलाई को भव्य समारोह किया जाएगा। मुनिराजों द्वारा वैसे तो 9 जुलाई को ही वर्षायोग की स्थापना हो जाएगी। मुनिराज विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज विधिविधान एवं मंत्रोचारण के साथ 9 जुलाई को चातुर्मास की स्थापना कर लेंगे। इनके साथ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (बम्होरी) एवं ब्रह्मचारी अजय भैयाजी (झापन) भी चातुर्मास करेंगे। जैन समाज मुरैना द्वारा 20 जुलाई को भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुनिराजों के भक्तों द्वारा चातुर्मास मंगल कलशों की स्थापना की जाएगी।</p>
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