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	<title>Maharashtra &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Maharashtra &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महाराष्ट्र के मंत्री लोढ़ा के बयान से सकल जैन समुदाय आहत : समग्र जैन समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं सामने  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 12:56:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा बनाए रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए, इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मुंबई में कहा कि जैन धर्म हिंदू संस्कृति का हिस्सा है और उसे अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ने पर विचार करना चाहिए। इस बयान के बाद पूरे भारत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा बनाए रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए, इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मुंबई में कहा कि जैन धर्म हिंदू संस्कृति का हिस्सा है और उसे अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ने पर विचार करना चाहिए। इस बयान के बाद पूरे भारत में समग्र जैन समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा बनाए रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए, इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में विवाद खड़ा हो गया है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मुंबई में कहा कि जैन धर्म हिंदू संस्कृति का हिस्सा है और उसे अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ने पर विचार करना चाहिए। इस बयान के बाद पूरे भारत में समग्र जैन समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मंत्री ने जैन समुदाय के लोगों को विश्वास में लिए बिना दिए इस बयान से विश्व की जैन समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। जैन अल्पसंख्यक विकास आर्थिक महामंडल के अध्यक्ष ललित गांधी, विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, मयंक जैन, डॉ.जैनेंद्र जैन, प्रदीप बड़जात्या ने मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। ललित गांधी ने कहा कि यह बयान अज्ञानता से दिया गया है या किसी पूर्व नियोजित रुख का हिस्सा है। डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि जैन धर्म भारत का एक स्वतंत्र और प्राचीन दर्शन है।</p>
<p>यह हिंदू धर्म की शाखा या उपशाखा नहीं है। संजय जैन ने कहा कि जैन समुदाय को मिला अल्पसंख्यक दर्जा हमारा संवैधानिक अधिकार है। यह हमारे प्राचीन विरासत के संरक्षण का एक प्रभावी माध्यम है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने मंत्री लोढ़ा विश्व जैन समाज से माफी मांगने और मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है।</p>
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		<title>टीएमयू डेंटल कॉलेज की इंटरनेशनल कांफ्रेंस : कांफ्रेंस में आएंगे देश और दुनिया के जाने-माने एक्सपर्ट्स </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:08:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेम्परेरी डेंटिस्ट्री पर आयोजित कांफ्रेंस में मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय में ओरल मेडिसिन एवं ओरल पैथोलॉजी की एक्सपर्ट डॉ. नोरातिका बिंती अवांग हाशिम की ख़ास मौजूदगी रहेगी। कॉन्फ्रेंस में यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु के एक्सपर्ट्स [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेम्परेरी डेंटिस्ट्री पर आयोजित कांफ्रेंस में मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय में ओरल मेडिसिन एवं ओरल पैथोलॉजी की एक्सपर्ट डॉ. नोरातिका बिंती अवांग हाशिम की ख़ास मौजूदगी रहेगी। कॉन्फ्रेंस में यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु के एक्सपर्ट्स शिरकत करेंगे। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेम्परेरी डेंटिस्ट्री पर देश और दुनिया के जाने-माने एक्सपटर््स जुटेंगे। ब्लेंडेड मोड में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का 10 अप्रैल को ऑडी में शुभारंभ होगा। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय में ओरल मेडिसिन एवं ओरल पैथोलॉजी की एक्सपर्ट डॉ. नोरातिका बिंती अवांग हाशिम बतौर मुख्य वक्ता मौजूद रहेंगी। साथ ही विष्णु डेंटल कॉलेज, आंध्र प्रदेश के प्रिंसिपल डॉ. ए.वी. रामा राजू, बाबा कीनाराम स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, चंदौली के डॉ. पीयूष शिवहरे, मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, नई दिल्ली में जन स्वास्थ्य दंत चिकित्सा के एचओडी डॉ. विक्रांत मोहंती, सिंहगढ़ डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पुणे के डॉ. विनीत विनय, कॉर्पाेरेट एआई ट्रेनर श्री प्रक्षित खन्ना, डॉ. ज़ेडए डेंटल कॉलेज, एएमयू अलीगढ़ में ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. प्रद्युम्न वर्मा भी अपना व्याख्यान देंगे। टीएमयू के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, वीसी प्रो. वीके जैन, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, डेंटल एवं एलाइड हेल्थ साइंसेज की डायरेक्टर गवर्नेंस नीलिमा जैन, डेंटल कॉलेज के प्राचार्य एवम् कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष प्रो. प्रदीप तांगड़े, वाइस प्रिंसिपल एवम् कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. अंकिता जैन आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रहेगी। कॉन्फ्रेंस में 200 रिसर्च पेपर्स और 150 पोस्टर्स भी प्रस्तुत किए जाएंगे। यह जानकारी साझा करते हुए तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की वाइस प्रिंसिपल एवं कॉन्फ्रेंस सचिव डॉ. अंकिता जैन ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में अनुसंधान, नवाचार, ग्रामीण सेवा, सामुदायिक आउटरीच और शैक्षणिक प्रदर्शन में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार और सम्मान भी दिए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्टूडेंट्स, इंटर्न, रिसर्चर्स और फैकल्टीज़ को वैज्ञानिक और नैदानिक उन्नति में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।</p>
<p>सम्मेलन का उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और साक्ष्य-आधारित दंत चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के टीएमयू के दृष्टिकोण को मजबूत करने के संग-संग स्टूडेंट्स को मौखिक स्वास्थ्य देखभाल में वैश्विक दृष्टिकोण से रूबरू कराना है। डॉ. जैन ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में उच्च स्तरीय पैनल चर्चा भी होगी। पैनलिस्टों में मुरादाबाद के डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल, तमिलनाडु के डॉ. जॉनसन राजा जेम्स, मेरठ से डॉ. विनीता निखिल, फरीदाबाद से डॉ. पुनीत बत्रा, वाराणसी से डॉ. पीजी नवीन कुमार, दिल्ली से डॉ. अरुण कुमार केवी, बरेली से डॉ. सत्यजीत नाइक सरीखेे एक्सपर्ट्स शामिल होंगे। उल्लेखनीय है, इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेम्परेरी डेंटिस्ट्री पर ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता भी होगी। अतिथियों की ओर से कॉन्फ्रेंस प्रोसिडिंग का विमोचन भी किया जाएगा।</p>
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		<title>सेक्सटॉर्शन डिजिटली मर्डर : राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहाँ सेक्सटॉर्शन के सर्वाधिक मामले  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:43:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। आज पढ़िए, मुरादाबाद से रवि कुमार का आलेख&#8230;. साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। <span style="color: #ff0000">आज पढ़िए, मुरादाबाद से रवि कुमार का आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो-एनसीआरबी के अनुसार भारत में साइबर अपराधों के आंकड़ें भयावह हैं। विशेषज्ञों का मानना है, वास्तविक मामले दर्ज केसों से कई गुना अधिक हैं, क्योंकि पीड़ित सामाजिक लाज और परिवार के डर से शिकायत नहीं करते। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहाँ सेक्सटॉर्शन के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। हरियाणा के मेवात, राजस्थान के अलवर और भरतपुर क्षेत्र तो सेक्सटॉर्शन गैंग के गढ़ के रूप में बदनाम हो चुके हैं। उदाहरण के लिए रात के दस बजे थे, जब 22 वर्षीय अर्जुन के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। दूसरी तरफ से एक महिला की आवाज़ थी मीठी, आकर्षक। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला वीडियो कॉल तक पहुंचा और फिर शुरू हुआ दुःस्वप्न। इस नाइटमेयर ने अर्जुन की महीनों की रातों की नींद छीन ली। यह कहानी केवल अर्जुन की नहीं है, यह लाखों भारतीयों की कहानी है, जो हर साल सेक्सटॉर्शन के जाल में फंसते हैं। सेक्सटॉर्शन-सेक्स और एक्सटॉर्शन का मिश्रण एक ऐसा साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी पीड़ित की अंतरंग या आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो या स्क्रीनशॉट प्राप्त करके उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने या परिवार-मित्रों को भेजने की धमकी देते हैं और बदले में पैसे या और अधिक आपत्तिजनक सामग्री की मांग करते हैं। यह एक योजनाबद्ध, भावनात्मक और आर्थिक शोषण का तरीका है, जो पीड़ित को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक सेक्सटॉर्शन के पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव अत्यंत गंभीर होते हैं। पीड़ित गंभीर अवसाद-डिप्रेशन और चिंता का शिकार हो जाते हैं। सामाजिक अलगाव और शर्म की भावना उन्हें किसी से बात करने से रोकती है। पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर- पीटीएसडी के लक्षण सामने आते हैं। पढ़ाई, काम और व्यक्तिगत संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। दुखद रूप से, कुछ मामलों में पीड़ित आत्महत्या तक का कदम उठा लेते हैं। वर्ष 2023 में केरल और महाराष्ट्र में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां युवाओं ने सेक्सटॉर्शन के कारण जीवन समाप्त कर लिया। यही कारण है कि इस अपराध को डिजिटल हत्या भी कहा जाने लगा है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104232" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054-195x300.jpg" alt="" width="195" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054-195x300.jpg 195w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054-666x1024.jpg 666w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0054.jpg 689w" sizes="(max-width: 195px) 100vw, 195px" /></p>
<p>यह खौफनाक या कहें तो डिजिटल युग के सेक्सटॉर्शन की कहानी है। दिल्ली के एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाले 22 वर्षीय अर्जुन ने इंस्टाग्राम पर प्रिया नाम की एक युवती से बात शुरू की। महीने भर की दोस्ती के बाद प्रिया ने वीडियो कॉल करने का आग्रह किया। कॉल के दौरान स्क्रीन पर आपत्तिजनक दृश्य आए और अर्जुन की स्क्रीन रिकॉर्ड कर ली गई। अगले ही दिन 50,000 रुपये की मांग आई। डरे हुए अर्जुन ने पहले 20,000 भेजे, पर मांग और बढ़ती गई। तीन महीने की मानसिक यातना के बाद अर्जुन के माता-पिता को पता चला और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत की। पुलिस ने राजस्थान के एक गांव से गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कियज्ञं भारतीय कानून में सेक्सटॉर्शन के विरुद्ध कड़े प्रावधान मौजूद हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप जो प्लेटफॉर्म दोस्ती और संपर्क के लिए बने हैं- आज सेक्सटॉर्शन के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। अपराधी फर्जी प्रोफाइल बनाकर लड़कियों या आकर्षक युवतियों की फोटो लगाते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप पर दोस्ती का नाटक करते हैं। व्हाट्सअप पर नंबर लेकर वीडियो कॉल के जाल में फंसाते हैं। स्नैपचौट और टेलीग्राम पर प्राइवेट चौट का भरोसा दिलाकर सामग्री प्राप्त करते हैं। एक बार अंतरंग तस्वीर या वीडियो मिल जाने के बाद ये अपराधी पूरी तरह बेनकाब हो जाते हैं और ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। इन अपराधियों की कार्यप्रणाली बेहद चालाक और सुनियोजित होती है। पहला चरण फर्जी प्रोफाइल बनाना होता है। किसी आकर्षक युवती या युवक की फोटो चुराकर एक विश्वसनीय प्रोफाइल तैयार की जाती है। दूसरे चरण में दोस्ती का नाटक शुरू होता है। हफ्तों तक सामान्य बातचीत कर विश्वास बनाया जाता है। तीसरे चरण में वीडियो कॉल ट्रैप बिछाया जाता है। वीडियो कॉल के दौरान महिला सदस्य या डीपफेक तकनीक का उपयोग करके पीड़ित को आपत्तिजनक स्थिति में फंसाया जाता है और स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली जाती है। चौथे और अंतिम चरण में ब्लैकमेल पैटर्न शुरू होता है। तुरंत पैसे की माँग की जाती है और धमकी दी जाती है कि यह वीडियो परिवार और मित्रों को भेज दिया जाएगा। एक बार पैसे देने के बाद डिमांड बढ़ती ही जाती है।</p>
<p>यदि आप या आपका कोई परिचित सेक्सटॉर्शन का शिकार हो तो घबराएं नहीं- मदद उपलब्ध है। सबसे पहले किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं और एकदम अकेले न रहें। राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। यह 24×7 उपलब्ध है। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। सभी धमकी भरे संदेशों, कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीनशॉट का साक्ष्य सुरक्षित रखें। अपराधी को पैसे न दें- एक बार देने के बाद मांग बंद नहीं होती। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को रिपोर्ट और रिमूव करने का अनुरोध करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएं- पुलिस को कानूनी रूप से आपकी मदद करनी होगी। सेक्सटॉर्शन से बचाव के लिए डिजिटल जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है सेक्सटॉर्शन में पीड़ित की कोई गलती नहीं होती। सारा कुसूर अपराधी का होता है। पीड़ितों को शर्म छोड़कर तुरंत शिकायत करनी चाहिए। जो जितनी देर करता है, अपराधी उतना ही निर्भीक होता जाता है। साइबर टीम हर शिकायत को गंभीरता से लेती है और पीड़ित की पहचान गोपनीय रखती है। मनोचिकित्सकों के अनुसार इस अपराध के शिकार लोग यह न समझें कि उनकी ज़िंदगी खत्म हो गई। परामर्श और कानूनी मदद से हजारों पीड़ित इस भंवर से बाहर निकले हैं। परिवार और समाज को पीड़ित को दोष देने की बजाए उनका साथ देना चाहिए। डिजिटल क्रांति ने हमें असीमित सुविधाएं दी हैं, पर इसके साथ जिम्मेदारी भी आई है। सेक्सटॉर्शन केवल कानून और पुलिस से नहीं रुकेगा। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक संवाद और डिजिटल साक्षरता। हर शिकायत एक और जाल तोड़ती है। याद रखें आप अकेले नहीं हैं। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p>महत्वपूर्ण संपर्क नंबरः साइबर क्राइम हेल्पलाइन- 1930। पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन</p>
<p>(लेखक तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में फॉरेंसिक साइंस विभाग के एचओडी हैं। आर्टिकल में दिए गए सभी नाम काल्पनिक हैं )</p>
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		<title>वैभव गोवाडिया को युवा प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया: राजस्थान प्रोविंस के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रीतेश वगैरिया को बनाया  </title>
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		<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 08:32:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन गांधी ने संस्था के युवा प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभव गोवाडिया सागवाड़ा को मनोनीत कर निष्ठा और समर्पित भाव से समाज सेवा और युवा शक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर समाज के समग्र विकास के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई। बांसवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230; बांसवाड़ा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन गांधी ने संस्था के युवा प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभव गोवाडिया सागवाड़ा को मनोनीत कर निष्ठा और समर्पित भाव से समाज सेवा और युवा शक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर समाज के समग्र विकास के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई। <span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन गांधी ने संस्था के युवा प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष वैभव गोवाडिया सागवाड़ा को मनोनीत कर निष्ठा और समर्पित भाव से समाज सेवा और युवा शक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर समाज के समग्र विकास के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई। फेडरेशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अजीत कोठिया ने बताया कि विपिन गांधी ने वैभव गोवाडिया को देश के पांचों प्रोविंसेज राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश तथा शेष भारत के लिए कार्यकारिणी गठन का निर्देश दिया। इसी क्रम में राजस्थान प्रोविंस के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष पद पर उदयपुर निवासी सीए प्रीतेश वगैरिया को मनोनीत किया गया है। दोनों ही पदाधिकारियों के मनोनयन से हूमड़ समाज के युवाओं में हर्ष व्याप्त हो गया है।</p>
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		<title>हूमड़ जैन समाज के इतिहास में फेडरेशन के अध्यक्ष विपिन गांधी ने रचा कीर्तिमान : तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर यात्रा का नया प्रकल्प सामने आया </title>
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		<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 14:52:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एस एस कम्यून अकादमी एवं क्रिकेट क्लब के मैदान पर 16-17-18 जनवरी को हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एसएस कम्यून अकादमी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एस एस कम्यून अकादमी एवं क्रिकेट क्लब के मैदान पर 16-17-18 जनवरी को हुआ। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> हूमड़ फेडरेशन प्रीमियर लीग एचएलपीएल डे एंड नाइट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 का आयोजन इंदौर के एसएस कम्यून अकादमी एवं क्रिकेट क्लब के मैदान पर 16-17-18 जनवरी को हुआ। फेडरेशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अजीत कोठिया ने बताया की देश के विभिन्न प्रांतों राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश गुजरात एवं तेलंगाना से आई 16 टीमों ने तीन दिन तीन सितारा आवास व्यवस्था, सुस्वादु पौष्टिक आहार और भाईचारे की मिसाल के साथ इंदौर में रहकर अपने बल्ले का रोमांच दिखलाते हुए सभी के दिल में जगह बनाते गए।</p>
<p><strong>गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से अवार्ड प्राप्त किया</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम का सपना एक वर्ष पूर्व देखा अध्यक्ष विपिन गांधी एवं महामंत्री महेंद्र बंडी ने। विचारों का त्वरित संप्रेषण कार्यकारिणी के सदस्य अनुभवी क्रिकेटज्ञ शरद गोडलिया से किया। कार्यकारिणी बैठक गोडलिया को इस क्रिकेट मैच के लिए संयोजक घोषित करके मजबूत कंधों पर भार सौंप दिया। इस बीच 1008 यात्रियों के साथ तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर यात्रा का नया प्रकल्प सामने आया। जिसे अध्यक्ष एवं‌ मंत्री की सूझबूझपूर्ण योजना से कार्यकारिणी सदस्यों के परिश्रम एवं प्रत्येक प्रोविंस के सहयोगियों के सहयोग से ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण हुई। साथ ही गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा अवार्ड प्राप्त किया गया।</p>
<p><strong>इंदौर से इसके आयोजक बन सहयोग का निवेदन</strong></p>
<p>यह आयोजन इंदौर में करना निश्चित किए जाने से अनूप गांधी को समन्वयक नियुक्त कर श्री हूमड़ युवा मंच से इसके आयोजक बन सहयोग का निवेदन किया गया। जिसे सहर्ष स्वीकृति मिलने से मानो फेडरेशन के‌ पंख लग गए। तेज गति से उड़ान भरते हुए अध्यक्ष विपिन गांधी एवं मंत्री महेंद्र बंडी इसके लिए कार्ययोजना बनाने में जुट गए एवं देश के विभिन्न प्रांतों से 16 टीमों की स्वीकृति प्राप्त की गई। 16 से 18 जनवरी के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ।18 जनवरी को आयोजित संक्षिप्त समारोह में विशेष अतिथि के रूप में पद्मश्री सुशील दोषी, मोटीवेटर स्पीकर चकोर की गांधी पुणे एवं हमें मैच के लिए ग्राउंड प्रदान करने वाले मालिक सुधांशु का सान्निध्य मिला।</p>
<p><strong>सभी खिलाड़ियों का एक ही स्वर था सुपर,सुपर,सुपर &#8230;</strong></p>
<p>कहीं किसी प्रकार की सुविधा या अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। कार्यक्रम का अंतिम पड़ाव चमचमाती ट्रॉफी को ले जाने की प्रति स्पर्धा थी। जो अंत में इंदौरी धुरंधर एवं मुंबई दहिसर की टीम के बीच फाइनल का मुकाबला हुआ। अंतिम क्षण तक बने हुए रोमांचकारी मैच में इंदौरी धुरंधर टीम को विजेता घोषित किया गया। आगे फिर आने की भावना के साथ में समापन किया गया।</p>
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		<title>मुनि श्री सुप्रभसागर जी का 17वां दीक्षा दिवस श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया : आचार्य विशुद्धसागर राष्ट्रीय पुरस्कार” — ‘प्रभावना पुरुषोत्तम किए गए वितरित </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 09:21:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ संतरों की नगरी नागपुर, महाराष्ट्र में श्रमण संत श्री प्रशमसागर जी महाराज एवं श्रमण श्री प्रणतसागर जी के निर्देशन में श्रमण मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज का 17वां दीक्षा दिवस दो दिवसीय आयोजनों के साथ 13 एवं 14 अक्टूबर को अगाध श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। पढ़िए डॉ. सुनील जैन संचय की विशेष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> संतरों की नगरी नागपुर, महाराष्ट्र में श्रमण संत श्री प्रशमसागर जी महाराज एवं श्रमण श्री प्रणतसागर जी के निर्देशन में श्रमण मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज का 17वां दीक्षा दिवस दो दिवसीय आयोजनों के साथ 13 एवं 14 अक्टूबर को अगाध श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए डॉ. सुनील जैन संचय की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नागपुर, महाराष्ट्र।</strong> संतरों की नगरी नागपुर, महाराष्ट्र में श्रमण संत श्री प्रशमसागर जी महाराज एवं श्रमण श्री प्रणतसागर जी के निर्देशन में श्रमण मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज का 17वां दीक्षा दिवस दो दिवसीय आयोजनों के साथ 13 एवं 14 अक्टूबर को अगाध श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया।</p>
<p>इस अवसर पर सर्व इष्ट ऋद्धि-सिद्धि प्रदायक भगवान पद्मप्रभु की आराधना 51 जोड़ों द्वारा दीक्षा दिवस की पूर्व बेला पर की गई। प्रसिद्ध मंच कलाकार राजेन्द्र जैन ‘उमरगा’ ने भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। दीक्षा दिवस का सौभाग्य अनन्य गुरु भक्त लखमीचंद, राजेशकुमार, मुकेशकुमार जैन (केबलवाला परिवार) को प्राप्त हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री सुप्रभसागर जी ने कहा कि “अनंत उपकार हैं उन गुरु विशुद्धसागर जी के, जिनके प्रथम दर्शन से मुझे सम्यक दर्शन हो गया। गुरु के उपकार हैं, जिन्होंने मुझे मुक्ति के पथ के साथ रत्नत्रय रूप मोक्षमार्ग का पाथेय प्रदान किया।”</p>
<p>शास्त्र भेंट का सौभाग्य आयोजक परिवार — राजेश जैन, मुकेश जैन (केबल परिवार, नागपुर) के साथ 17 विशेष गुरु भक्तों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अनन्य गुरु भक्त मनोज पहाड़िया (अध्यक्ष, खण्डेलवाल प्रांतीय महासभा, भिलाई, छ.ग.), पवन जैन (अम्बुर, परभणी), शांति कुमार कासलीवाल (उज्जैन) के साथ वाशिम, अमरावती, बसमत, सोलापुर, हिंगोली (महाराष्ट्र), सागर, उज्जैन, छिंदवाड़ा, परासिया, मोहखेड, सावरी, पचमढ़ी, टीकमगढ़, घुवारा (म.प्र.), बानपुर, ललितपुर, पं. मुकेश शास्त्री ‘विनम्र’ (गुरुग्राम, हरियाणा), पं. अखिलेश शास्त्री (रमगढ़ा) आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।</p>
<p>आचार्य विशुद्धसागर राष्ट्रीय पुरस्कार &#8220;प्रभावना पुरुषोत्तम&#8221; उपाधि 2025 राजेन्द्र उमरगा को प्रदान की गई। परम पूज्य मुनि श्री सुप्रभसागर जी की प्रेरणा से “आचार्य विशुद्धसागर राष्ट्रीय पुरस्कार” — ‘प्रभावना पुरुषोत्तम’ उपाधि के साथ सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले किसी विशिष्ट व्यक्तित्व को उत्कर्ष समूह, भारत द्वारा प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाता है।</p>
<p>पुरस्कार संयोजक डॉ. सुनील संचय (ललितपुर) ने बताया कि 2025 का यह “आचार्य विशुद्धसागर राष्ट्रीय पुरस्कार — प्रभावना पुरुषोत्तम” उपाधि के साथ संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनन्य गुरु भक्त, बोली सम्राट एवं कुशल दीप नृत्य कलाकार श्री राजेन्द्र जैन (उमरगा) को प्रदान किया गया।</p>
<p>इस पुरस्कार में ₹21,000/- (इक्कीस हजार रुपये) की नगद राशि के साथ उत्कर्ष समूह, भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र गहाणकर (अमरावती), कोषाध्यक्ष ओमत बज, रोहित पाटोदी (छिंदवाड़ा), संयोजक अरविन्द बुखारिया (उज्जैन), मंत्री इन्द्रकुमार सिंघई (बानपुर), सिंथिल जैन (सागर) एवं उपस्थित पदाधिकारीगणों द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को परम पूज्य मुनि श्री सुप्रभसागर जी के 17वें दीक्षा दिवस पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रशमसागर जी, मुनि श्री सुप्रभसागर जी, मुनि श्री प्रणतसागर जी ससंघ के सान्निध्य में प्रदान किया गया।</p>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में पर्वराज पर्युषण पर भक्ति भाव से हुए धार्मिक अनुष्ठान : आर्यिका आगममति जी का मिल रहा सानिध्य   </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 13:12:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म की पूजन, विधान किया गया। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान धामनोद की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म की पूजन, विधान किया गया। साथ ही क्षेत्र पर विराजित आर्यिका आगममति जी माताजी के मुखारबिंद से शांतिधारा और पूजन विधान हुआ। माताजी ने आर्जव धर्म के बारे में बताया और दोपहर में तत्व चर्चा, शाम को ध्यान, प्रतिक्रमण, आरती, प्रवचन और धार्मिक गतिविधियां हुई। माताजी ने बताया कि उत्तम मार्दव धर्म जैन धर्म के दस धर्मों में से एक प्रमुख धर्म है, जो आत्मा की शुद्धि और अहिंसक जीवनशैली का आधार है। मार्दव का अर्थ है कोमलता, विनम्रता और अहंकार का पूर्ण त्याग। यह धर्म व्यक्ति को मन, वचन और कर्म में नम्रता अपनाने की प्रेरणा देता है। जिससे वह स्वयं और दूसरों को श्रेष्ठ या हीन मानने की भावना से मुक्त हो जाता है। यह आत्मिक उन्नति और सामाजिक समरसता का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>
<p><strong>जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता वह मार्दव धर्म का सच्चा अनुयायी</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि मार्दव धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति अभिमान, क्रोध, ईर्ष्या और घमंड जैसे मानसिक दोषों को नियंत्रित करता है। वह सभी प्राणियों के प्रति करुणा, समानता और दया का भाव रखता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति दूसरों की भूलों को क्षमा करता है और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता, तो वह मार्दव धर्म का सच्चा अनुयायी है। उन्होंने कहा कि यह धर्म सिखाता है कि अहंकार आत्मा को बंधन में डालता है, जबकि विनम्रता उसे मुक्ति की ओर ले जाती है। मार्दव धर्म का अभ्यास आत्म-निरीक्षण, ध्यान और दूसरों के प्रति सहानुभूति के माध्यम से किया जा सकता है। यह व्यक्ति को न केवल आंतरिक शांति प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक संबंधों में भी प्रेम और विश्वास को बढ़ावा देता है। जैन ग्रंथों में इसे आत्मा की शुद्धि का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। इस प्रकार, उत्तम मार्दव धर्म व्यक्ति को नम्र, दयालु और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जो आत्मिक और सामाजिक उन्नति का आधार है। यह जानकारी मनीष जैन ने प्रदान की।</p>
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		<title>णमोकार तीर्थ पंचकल्याणक, बड़जात्या को मिली जवाबदारी : तीर्थ कमेटी ने आमंत्रित कर जिम्मेदारी के लिए किया निवेदन  </title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 09:41:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जैन बडजात्या को णमोकार तीर्थ चांदबाड, महाराष्ट्र में होने वाले पंच कल्याणक एवं वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव फरवरी 2026 में 400 से अधिक साधु परमेष्ठियों का सानिध्य प्राप्त होगा। वहां लगभग 3 हजार प्रतिमाओं का पंच कल्याणक होने जा रहा है। महासमिति परिवार को पंचकल्याणक में बडी जिम्मेदारी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जैन बडजात्या को णमोकार तीर्थ चांदबाड, महाराष्ट्र में होने वाले पंच कल्याणक एवं वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव फरवरी 2026 में 400 से अधिक साधु परमेष्ठियों का सानिध्य प्राप्त होगा। वहां लगभग 3 हजार प्रतिमाओं का पंच कल्याणक होने जा रहा है। महासमिति परिवार को पंचकल्याणक में बडी जिम्मेदारी के लिए निवेदन किया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से सुरेन्द्र बाक़लीवाल की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक जैन बडजात्या को णमोकार तीर्थ चांदबाड, महाराष्ट्र में होने वाले पंच कल्याणक एवं वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव फरवरी 2026 में 400 से अधिक साधु परमेष्ठियों का सानिध्य प्राप्त होगा। वहां लगभग 3 हजार प्रतिमाओं का पंच कल्याणक होने जा रहा है। इस संबंध में आचार्य देवनंदीजी महामुनिराज का संदेश लेकर कमेटी ने बडजात्या और उनकी टीम को आमंत्रित किया है।</p>
<p>इसमें महासमिति परिवार को पंचकल्याणक में बडी जिम्मेदारी के लिए निवेदन किया गया। तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष डीके जैन, कोषाध्यक्ष प्रमोद पापड़ीवाल, महावीर बैनाड़ा, णमोकार तीर्थ की त्यागी सेवा समिति के चेयरमैन फूलचंद जैन, महावीर गंगवाल,राजेंद्र जैन, अनिल जमगे छाबड़ा आदि ने आचार्यश्री को पत्रिका और श्रीफल अर्पण किए।</p>
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		<title>कठिनतम उपवासधारी आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का विहार: मई में आएंगे बद्रीनाथ अष्टापद धाम </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 07:22:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का विहार हो रहा है। वे मई में बद्रीनाथ अष्टपद धाम में आएंगे। कठिनतम उपवास करने वाले आचार्य हैदराबाद में चातुर्मास कर महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश नैनीताल होते हुए अष्टापद की ओर विहार कर रहे हैं। बद्रीनाथ से पढ़िए राजकुमार अजमेरा जैन की यह खबर&#8230; बद्रीनाथ/कोडरमा। तपस्वी मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का विहार हो रहा है। वे मई में बद्रीनाथ अष्टपद धाम में आएंगे। कठिनतम उपवास करने वाले आचार्य हैदराबाद में चातुर्मास कर महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश नैनीताल होते हुए अष्टापद की ओर विहार कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">बद्रीनाथ से पढ़िए राजकुमार अजमेरा जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बद्रीनाथ/कोडरमा</strong>। तपस्वी मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित व्रत करने वाले विश्व के प्रथम जैन संत अंतर्मना प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी 21 जुलाई 2021 से 28 जनवरी 2023 तक 496 दिनों का उपवास और 61 दिन आहार ग्रहण करने वाले प्रसन्न सागर जी ने सम्मेदशिखर जी के पर्वत पर तपस्या की। इसके बाद तीर्थराज सम्मेदशिखर जी से मंगल विहार कर 2 वर्षांे में 6000 किमी की पैदल यात्रा करते हुए कुंजवन महाराष्ट्र, श्रवणबेलगोला होते हुए हैदराबाद में चातुर्मास कर महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश नैनीताल होते हुए अष्टापद की ओर विहार हो रहा है।</p>
<p>गुरुदेव सत्संग चमोली होते हुए अभी आगे बढ़ रहे हैं और संभावित मई के प्रथम सप्ताह में बद्रीनाथ के दरवाजा जो 6 माह से बंद था। वह आचार्य श्री द्वारा खोला जाएगा। इस अवसर पर शिष्य उपाध्याय श्री पीयूष सागर जी ने कहा कि गुरुदेव श्री प्रसन्न सागर जी ससंघ का विहार बद्रीनाथ अष्टापद धाम की ओर हो रहा है। माना जाता है कि भारत में बद्रीनाथ यात्रा चंद सर्वश्रेष्ठ पहाड़ियों में से एक है। जहां कार, ट्रक आदि भी चढ़ने में दम भरने लगता है। जब की वो सब तेल (ईंधन) से चलते है, लेकिन गुरुदेव अपने दम पर चलते हैं। ऐसी विशाल ऊंची पहाड़ियों पर वे ससंघ रोज 20 से 25 किमी हंसते हुए पैदल यात्रा कर रहे है।</p>
<p><strong>संघ और अपने भक्तों के साथ यात्रा को पूरा कर रहे हैं</strong></p>
<p>यात्रा होती भी है तो सीधे रास्तों से पर अंतर्मना गुरुदेव कठिन रास्तों से, पगडंडियों से, पथरीली जमीन पर संकरे रास्तों से अपने संघ और अपने भक्तांे के साथ यात्रा को पूरा कर रहे हैं। पूरे संघ के साधु दिन में एक बार ही आहार ग्रहण करते है लेकिन गुरुदेव सिर्फ एक आहार एक उपवास कर रहे हैं (दो दिन में एक बार आहार) फिर भी इस ऊर्जा के साथ सारी पहाड़ियां, सारे पर्वत, सारी नदियों को पार करते हुए, हंसते हंसते पैदल चल रहे हैं। इन सब के बीच अगर अष्टमी या चतुर्दशी आ गई तो गुरुदेव के 2 उपवास भी हो रहे हैं। आचार्य गुरुदेव श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज जो आज इस धरती पर जैन धर्म के किसी साधु के बस का नहीं..इतने आश्चर्यों से भरे हुए सागर को नित-नित नमन वंदन करते है। ये हमारा सौभाग्य है कि हम इस जन्म में पैदा हुए और इनके दर्शन कर रहे है।</p>
<p><strong>इन्होंने किया नमोस्तु </strong></p>
<p>इसलिए शुरू से कह रहे है। तपस्या के शिरोमणि अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज&#8230; यानी आज के इस युग के साधना के गोमटेश्वर हैं। इस अवसर पर मनोज जैन हैदराबाद, विवेक जैन गंगवाल, कोलकाता, मनीष जैन सेठी, सीमा जैन सेठी, राजकुमार जैन अजमेरा ने गुरुवर के चरणों में कोटि-कोटि नमोस्तु प्रेषित किया।</p>
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		<title>जैनेतर बंधुओं ने भी की भावपूर्ण अगवानी : भीषण गर्मी में संतों का हुआ मंगल प्रवेश  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_saints_entered_in_city_in_the_harsh_summer/</link>
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		<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 15:26:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साधु परमेष्ठि का नगर में प्रवेश जैन धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी अवसर माना जाता है। इसी पुण्य अवसर पर नगर में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का महाराष्ट्र चातुर्मास के पश्चात 26 साधुओं के विशाल संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; बैडिया। साधु परमेष्ठि का नगर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>साधु परमेष्ठि का नगर में प्रवेश जैन धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी अवसर माना जाता है। इसी पुण्य अवसर पर नगर में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का महाराष्ट्र चातुर्मास के पश्चात 26 साधुओं के विशाल संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बैडिया।</strong> साधु परमेष्ठि का नगर में प्रवेश जैन धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी अवसर माना जाता है। इसी पुण्य अवसर पर नगर में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का महाराष्ट्र चातुर्मास के पश्चात 26 साधुओं के विशाल संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ।</p>
<p>नगरवासियों के लिए और भी हर्ष का विषय रहा कि मुनिश्री विवर्धन सागर जी महाराज के संघ के 27 साधु परमेष्ठि भी प्रातः बेला में नगर में मंगल प्रवेश हेतु पधारे। समाज अध्यक्ष पंकज जटाले एवं सचिव अजय शाह ने बताया कि इतने बड़े संत संघ के आगमन पर नगर का माहौल आध्यात्मिक उल्लास से भर गया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79351" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0018.jpg" alt="" width="1280" height="560" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0018.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0018-300x131.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0018-1024x448.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0018-768x336.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0018-990x433.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />पलक पांवड़े बिछाकर संतों की अगवानी</strong></p>
<p>गुरुवर के नगर आगमन पर समाजजन और जैनेतर बंधु पलक पांवड़े बिछाकर भव्य स्वागत के लिए एकत्रित हुए। नगर में जगह-जगह तोरण द्वार सजाए गए थे, तथा धर्म ध्वजाओं से नगर को सजाकर एक तीर्थमयी रूप प्रदान किया गया था। बैंड-बाजों की मधुर ध्वनि, पुष्पवर्षा और श्रद्धाभाव के संग गुरुवर का स्वागत किया गया।</p>
<p><strong>समोशरण का दृश्य</strong></p>
<p>इतनी अधिक संख्या में साधु-संतों के एक साथ नगर में पदार्पण से नगर का वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वर्ग से साक्षात समवसरण उतर आया हो। भक्तगण भावविभोर होकर गुरुवर के पाद प्रक्षालन और मंगल आरती में भाग लेकर आशीर्वाद प्राप्त करते दिखे।</p>
<p><strong>भीषण गर्मी भी नहीं रोक सकी तपस्वियों के चरण</strong></p>
<p>जहाँ एक ओर आमजन भीषण गर्मी में घरों से निकलने में संकोच करते हैं, वहीं दूसरी ओर ये तपस्वी साधु-संत, सूर्य देव के रोद्र रूप के बीच, धर्म प्रसार हेतु पद विहार कर नगर पहुंचे — यह अपने आप में एक अनुपम उदाहरण है।</p>
<p>इस मंगल अवसर पर समाजजनों की भारी उपस्थिति एवं जैनेतर समुदाय की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि धर्म, त्याग और तपस्या की शक्ति सीमाओं से परे होती है।</p>
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