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	<title>Lord Adinath &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Lord Adinath &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री गोलाकोट दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र बना आस्था और अध्यात्म का केंद्र : भगवान आदिनाथ की दिव्य महिमा से श्रद्धालु हो रहे भावविभोर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 06:26:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री गोलाकोट दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक गरिमा, भगवान आदिनाथ की दिव्य प्रतिमा और भव्य निर्माण के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से तीर्थ का वैभव और अधिक निखरा है। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई &#8216;मोनू&#8217; की आलेख । गोलाकोट। श्री गोलाकोट [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री गोलाकोट दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक गरिमा, भगवान आदिनाथ की दिव्य प्रतिमा और भव्य निर्माण के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से तीर्थ का वैभव और अधिक निखरा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई &#8216;मोनू&#8217; की आलेख ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गोलाकोट।</strong> श्री गोलाकोट दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक गरिमा, प्राकृतिक सौंदर्य और भव्य स्थापत्य के कारण देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहाँ विराजमान प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और धर्म लाभ अर्जित करते हैं।</p>
<p><strong>भगवान आदिनाथ की दिव्य महिमा</strong></p>
<p>तीर्थ में मूलनायक भगवान आदिनाथ की शांत, तेजस्वी एवं दिव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, संयम और वैराग्य की प्रेरणा देती है। दर्शन के लिए आने वाले भक्त प्रभु के समक्ष पूजा-अर्चना कर आत्मकल्याण की भावना से जुड़ते हैं।</p>
<p><strong>श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम</strong></p>
<p>श्री गोलाकोट अतिशय क्षेत्र केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि साधना, तप और आत्मशुद्धि का केंद्र माना जाता है। यहाँ का शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव कराती है।</p>
<p><strong>मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से बढ़ा वैभव</strong></p>
<p>जगतपूज्य मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से तीर्थ का व्यापक विकास हुआ है। भव्य जिनालय, कलात्मक स्थापत्य, सुव्यवस्थित परिसर और आकर्षक निर्माण कार्य ने इस क्षेत्र को नई पहचान प्रदान की है। धर्म, कला और भारतीय शिल्प परंपरा का सुंदर समन्वय यहाँ सहज रूप से दिखाई देता है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र</strong></p>
<p>तीर्थ प्रबंधन के अनुसार श्री गोलाकोट दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्रद्धा, संस्कृति और अध्यात्म का सशक्त केंद्र बनकर निरंतर धर्म प्रभावना का कार्य कर रहा है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का लूंणवा में 27 जून को भव्य मंगल प्रवेश : आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रतिमा पूर्ण विधि विधान से होगी विराजित  </title>
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		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 07:41:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरु शिक्षक माता, पिता ,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। लूंणवा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुरु शिक्षक माता, पिता ,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">लूंणवा से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लूंणवा।</strong> जीवन में सर्वसंपन्नता विवेक और विनय गुण से प्राप्त होती है। आपको गुरु शिक्षक माता, पिता,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने कहा कि विवेक से हम अतीत और भविष्य को समझ सकते हैं। वर्तमान ठीक करेंगे तो भविष्य भी हमारा ठीक होगा। विवेक से ज्ञान मिलता है। विवेक और ज्ञान एक दूसरे के पूरक है और ज्ञान हमें स्वाध्याय से मिलता है। स्वाध्याय स्वयं निज आत्मा का अध्ययन होता है।</p>
<p><strong>आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी का जीवन हमारे समक्ष </strong></p>
<p>स्वाध्याय से हम वर्तमान भविष्य की तैयारी कर सकते हैं। जन्म मरण से गति पर्याय जो मिलती है वह किए गए कार्यों के अनुसार पुण्य या पाप अनुसार प्राप्त होती है। भगवान आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी तक का जीवन हमारे समक्ष है कि वह कैसे महापुरुष भगवान बने हैं। आचार्य श्री ने बताया कि भगवान महावीर सिंह की पर्याय में होने के बावजूद पुण्य से महावीर स्वामी बने हैं।</p>
<p><strong>आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी का पूजन होगा</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा में प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज की प्रतिमा उनकी समाधि स्थली अतिशय क्षेत्र लूणवा जिला नागौर में 27 जून को परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ 37 पिच्छी के सानिध्य में मंत्रोचार विधिपूर्वक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सहित विराजित की जाएगी। इस अवसर पर आचार्य संघ के आगमन के पश्चात आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज का पूजन होगा।</p>
<p><strong>महिलाओं की कलशयात्रा निकाली जाएगी</strong></p>
<p>महिलाओं की कलशयात्रा के बाद ध्वजारोहण, कलश स्थापना चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन, पूजन, जिनवाणी भेंट, विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा धार्मिक क्रिया की जाएगी। आचार्य श्री के प्रवचन के बाद आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रतिमा पूर्ण विधि विधान मंत्रोच्चार से पुण्यार्जक द्वारा विराजित होगी।</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ को अस्थायी वेदी पर किया विराजमान: दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का धार्मिक आयोजन 4 जुलाई से  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:35:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन नागौरी मंदिर में आगामी 4 एवं 5 जुलाई को आयोजित होने वाले वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं मूल वेदी नवनीकरण के उपलक्ष्य में मूल वेदी पर विराजमान भगवान आदिनाथ एवं अन्य भगवानों को अस्थायी वेदी में विराजमान करने का धार्मिक आयोजन हुआ। कुचामन सिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह खबर&#8230; कुचामन सिटी। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री दिगंबर जैन नागौरी मंदिर में आगामी 4 एवं 5 जुलाई को आयोजित होने वाले वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं मूल वेदी नवनीकरण के उपलक्ष्य में मूल वेदी पर विराजमान भगवान आदिनाथ एवं अन्य भगवानों को अस्थायी वेदी में विराजमान करने का धार्मिक आयोजन हुआ। <span style="color: #ff0000">कुचामन सिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री दिगंबर जैन नागौरी मंदिर में आगामी 4 एवं 5 जुलाई को आयोजित होने वाले वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव एवं मूल वेदी नवनीकरण के उपलक्ष्य में मूल वेदी पर विराजमान भगवान आदिनाथ एवं अन्य भगवानों को अस्थायी वेदी में विराजमान करने का धार्मिक आयोजन हुआ। यह आयोजन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सुशिष्य ऐल्लक क्षीरसागर जी महाराज के सानिध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य अमित भैया इंदौर के निर्देशन में कराया गया। प्रथम दिवस पर मूल वेदी के श्रीजी का भव्य अभिषेक, सुख-समृद्धि प्रदाता शांतिधारा एवं विशेष मंत्रोच्चार के साथ जाप स्थापना का आयोजन हुआ।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे लाभार्थी</strong></p>
<p>बुधवार को प्रातः 7 बजे मंगलाष्टक के साथ श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। शांतिधारा का सौभाग्य पदमचंद संजयकुमार सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं ऋद्धि-सिद्धि प्रदाता याग मंडल विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य कैलाशचंद पांड्या परिवार, ईशान इंद्र बनने का सौभाग्य अजित पहाड़िया परिवार, यज्ञनायक बनने का सौभाग्य विमलचंद झांझरी परिवार तथा कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य विनोद झांझरी परिवार को प्राप्त हुआ। मंडल पर कलश स्थापना का सौभाग्य सुशील गंगवाल परिवार को मिला।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में श्रद्धालु समाजजन रहे मौजूद</strong></p>
<p>विधान एवं हवन के माध्यम से समस्त प्राणी मात्र के सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की गई। भगवान आदिनाथ सहित अन्य भगवानों को विधि-विधानपूर्वक, विनय एवं सम्मान के साथ अस्थायी वेदी में विराजमान किया गया। इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों, श्रावक-श्राविकाओं एवं बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
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		<title>पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी के सानिध्य में निकली शोभायात्रा : नवनिर्मित रथ पर विराजमान हुए श्रीजी </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:14:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नसिया जी कमेटी द्वारा तैयार आकर्षक रथ पर नगर भ्रमण को निकले भगवान आदिनाथ, महामस्तकाभिषेक में जनसैलाब उमड़ा। भगवान आदिनाथ के जयकारे लगे। भिंड से सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; भिंड। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक नगरी भिंड इन दिनों पूरी तरह से धर्म और अध्यात्म के रंग में सराबोर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नसिया जी कमेटी द्वारा तैयार आकर्षक रथ पर नगर भ्रमण को निकले भगवान आदिनाथ, महामस्तकाभिषेक में जनसैलाब उमड़ा। भगवान आदिनाथ के जयकारे लगे। <span style="color: #ff0000">भिंड से सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक नगरी भिंड इन दिनों पूरी तरह से धर्म और अध्यात्म के रंग में सराबोर है। स्थानीय आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर में ससंघ विराजमान पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में बुधवार को एक ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव का आयोजन किया गया। सूर्य सागर उदासीन आश्रम नसिया जी कमेटी द्वारा नवनिर्मित कराए गए भव्य और नक्काशीदार रथ पर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (श्रीजी) को विराजमान कर नगर में शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि पूरे भिंड नगर के लिए एक उत्सव बन गई। जैसे ही नवनिर्मित रथ पर श्रीजी की प्रतिमा को विराजमान किया गया, पूरा परिसर आचार्य विशुद्ध सागर महाराज की जय और भगवान आदिनाथ की जय के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p><strong>भक्ति और उल्लास के साथ हुआ नगर भ्रमण</strong></p>
<p>आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई गुजरी। शोभायात्रा में सबसे आगे जैन ध्वज लिए श्रद्धालु चल रहे थे, जिनके पीछे बैंड-बाजे की मधुर धार्मिक धुनों पर थिरकते युवा और मंगल कलश धारण किए पीत वस्त्र धारी महिलाएं चल रही थीं। मार्ग में जगह-जगह जैन समाज सहित अन्य समाज के नागरिकों ने भी पलक-पावड़े बिछाकर भगवान की अगवानी की। अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने श्रीजी की आरती उतारी और पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के ससंघ चरणों में अर्घ्य समर्पित कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p>इस दौरान नसिया जी कमेटी के पदाधिकारी और समाज के वरिष्ठ पुरुष-महिलाएं व्यवस्थाओं को संभालते हुए पूरे उत्साह के साथ चल रहे थे।</p>
<p><strong>नसिया जी प्रांगण में संपन्न हुआ महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>नगर के विभिन्न मुख्य चौराहों और मार्गों का भ्रमण करते हुए यह भव्य शोभायात्रा सूर्य सागर उदासीन आश्रम श्नसिया जीश् प्रांगण पहुंची। यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो चुका था। मुनिश्री के पावन निर्देशों और मंत्रोच्चार के बीच भगवान आदिनाथ का भव्य महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। श्रावकों ने सबसे पहले जल, दूध, दही, घृत, चंदन और सर्वाैषधि से भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद गंधोदक लेकर श्रद्धालुओं ने अपने मस्तक पर लगाया। महामस्तकाभिषेक के पुण्य अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान की रथयात्रा और अभिषेक का दर्शन आत्मा को पवित्र करने वाला होता है। रथ पर आरूढ़ भगवान इस बात का प्रतीक हैं कि हमें भी अपने जीवन रूपी रथ को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाना चाहिए।</p>
<p><strong>धार्मिक आयोजन से संपूर्ण अंचल में हर्ष’</strong></p>
<p>इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सूर्य सागर उदासीन आश्रम नसिया जी कमेटी के सभी सदस्यों, कुआं वाले जैन मंदिर प्रबंध समिति और भिंड के सकल दिगंबर जैन समाज ने अपनी सराहनीय भूमिका निभाई। इस ऐतिहासिक और आलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए भिंड शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण अंचलों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में जैन-अजैन श्रद्धालु पहुंचे थे।</p>
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		<title>तीर्थ यात्रा 53 ज्ञान, साधना और आस्था का संगम है श्री दिगंबर जैन ज्ञानतीर्थ मुरैना : 50 फीट ऊंची कृत्रिम पहाड़ी पर विराजमान भगवान आदिनाथ की 13 फुट भव्य प्रतिमा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rekha Jain]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 00:30:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक लीलाओं के अतिशय (अद्भुत) घटनाएं मान्यता प्राप्त हैं। इन स्थलों पर जैन समुदाय के श्रद्धालु भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करते हैं और ध्यान धरते हैं। भारत के कुछ अतिशय क्षेत्रों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>जैन अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं। इन क्षेत्रों में जैन धर्म के भगवान महावीर और उनके पूर्वकल्याणकारक जिनेन्द्र देव के आध्यात्मिक लीलाओं के अतिशय (अद्भुत) घटनाएं मान्यता प्राप्त हैं। इन स्थलों पर जैन समुदाय के श्रद्धालु भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करते हैं और ध्यान धरते हैं। भारत के कुछ अतिशय क्षेत्रों की जानकारी दे रही हैं <strong><span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा जैन।</span></strong> इसकी 53वीं कड़ी में आज पढ़िए धार जिले में स्थित श्री दिगंबर जैन ज्ञान तीर्थ क्षेत्र, ए. बी. रोड, घोलपुर &#8211; आगरा हाइवे, जिला मुरैना (मध्यप्रदेश) के बारे में&#8230;</p>
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<p>&nbsp;</p>
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		<title>गुणवानों का साथ ही जीवन के उत्कर्ष का आधार : आर्यिका सिद्धमति माताजी ने ‘संगति’ के महत्व पर प्रकाश डाला </title>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2026 11:59:40 +0000</pubDate>
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<p><strong>वागड़ अंचल के ऐतिहासिक नगर नौगामा में आर्यिका रत्न 105 श्री सिद्धमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में धर्म की अविरल धारा बह रही है। मंगलवार को प्रातःकाल की शुभ बेला में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान एवं नेमिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा (राजस्थान)।</strong> वागड़ अंचल के ऐतिहासिक नगर नौगामा में आर्यिका रत्न 105 श्री सिद्धमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में धर्म की अविरल धारा बह रही है। मंगलवार को प्रातःकाल की शुभ बेला में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान एवं नेमिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रावकों ने शामिल होकर पुण्य अर्जन किया। शांतिधारा के बाद मंगल प्रवचनों की श्रृंखला में सम्मति देवी ने मंगलाचरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री सिद्धमति माताजी ने ‘संगति’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा संग करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। माताजी ने सोदाहरण स्पष्ट किया कि जब अग्नि लोहे की संगति करती है तो उसे हथौड़ों की मार सहनी पड़ती है। जल स्वभाव से शीतल है, लेकिन यदि वह करेले की जड़ में जाए तो कड़वा और गन्ने में जाए तो मीठा हो जाता है। दूध यदि सर्प के मुख में जाए तो विष बन जाता है, जबकि, वही दूध औषधि के रूप में जीवनदाता होता है। माताजी ने जोर देकर कहा कि यदि जीवन में सुखी होना है, तो देव-शास्त्र-गुरु की सच्ची संगति करें। अपनी ‘स्थिति’ के चक्कर में अपनी ‘मनःस्थिति’ को न बिगड़ने दें। आत्म-स्वभाव को जानकर ही सम्यक दर्शन और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।</p>
<p><strong>धार्मिक संस्कारों से ही बनेंगे बच्चे संस्कारवान</strong></p>
<p>सायंकालीन सत्र में माताजी ने जैन पाठशाला के नन्हे छात्रों को ‘जिनवाणी संरक्षण’ का महत्व समझाया। उन्होंने अभिभावकों से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा आज की जरूरत हो सकती है, लेकिन बच्चों को धार्मिक शिक्षा देना अनिवार्य है। बिना संस्कारों के शिक्षा अधूरी है; धार्मिक ज्ञान ही बच्चों को कुल और समाज का गौरव बढ़ाना सिखाएगा। मंगलवार के कार्यक्रमों में स्थानीय जैन समाज सहित आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ लिया।</p>
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		<title>स्मरण रहे सदैव ही अच्छे कर्मों का फल अच्छा होता है : प्रत्येक घर से पुत्र-पुत्रियों को जैन पाठशाला में जरूर भेजें </title>
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		<pubDate>Fri, 01 May 2026 16:33:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध मति माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रातः माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा उनके मुखारबिंद से की गई। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट&#8230;  नौगामा। आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध मति माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रातः माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा उनके मुखारबिंद से की गई। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> नौगामा।</strong> आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध मति माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रातः माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा उनके मुखारबिंद से की गई। इस अवसर पर माताजी द्वारा ईस्टोपदेश ग्रंथ का वाचन चल रहा है। शाम को आचार्य भक्ति के बाद दीदी का मंगल प्रवचन हुआ।माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। अच्छे कर्म करने से अगले भव में अच्छी गति मिलेगी और मोक्ष मार्ग की ओर की ओर यह यह जीव बढ़ेगा परंतु, बुरे कर्म करने पर हमें नीच गति बंद होगा। प्रत्येक मनुष्य को मनुष्य भव बड़ी मुश्किल से मिला है। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद अच्छे कर्म किए हैं तो तभी तो मनुष्य गति मिली। वह भी बहुत कम उम्र के जीव को अपने परिणामों के अनुसार फल मिलता है। शुभ कर्म करे तो शुभ अशुभ कर्म करे तो अशुभ। शुद्ध कम करें तो शुद्ध भाव रूप जीवको फल मिलता है।</p>
<p>इसलिए प्रति समय अपने परिणामों को संभाल कर रखें। परिणाम की विचित्रता है इसलिए परिणाम संभाल कर ही रखना चाहिए। परिणाम से ही मोक्ष है और परिणाम से ही बंद है। सो परिणाम सुधारने का अभ्यास करना, इसलिए हमें अच्छे कर्म करने चाहिए। इस अवसर पर जैन पाठशाला के छात्रों को नियमित आने के लिए आह्वान किया एवं सभी अभिभावक को से निवेदन किया गया कि प्रत्येक घर से अपने पुत्र-पुत्रियों को जैन पाठशाला में जरूर भेजना है।</p>
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		<title>जिंदगी जीने की कला सिखाता भगवान आदिनाथ का जीवन : सिविल लाइन जैन स्थानक में 38 वर्षीतप आराधकों के पारणे हुए, </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:28:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तेज रफ्तार और तनाव से भरे आधुनिक जीवन में जहां व्यक्ति भौतिक उपलब्धियों के पीछे दौड़ते-दौड़ते मानसिक शांति खोता जा रहा है, वहीं धर्म और तप की परंपरा आज भी जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग दिखा रही है। लुधियाना से पढ़िए, यह खबर&#8230; लुधियाना। तेज रफ्तार और तनाव से भरे आधुनिक जीवन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तेज रफ्तार और तनाव से भरे आधुनिक जीवन में जहां व्यक्ति भौतिक उपलब्धियों के पीछे दौड़ते-दौड़ते मानसिक शांति खोता जा रहा है, वहीं धर्म और तप की परंपरा आज भी जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग दिखा रही है। <span style="color: #ff0000">लुधियाना से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लुधियाना।</strong> तेज रफ्तार और तनाव से भरे आधुनिक जीवन में जहां व्यक्ति भौतिक उपलब्धियों के पीछे दौड़ते-दौड़ते मानसिक शांति खोता जा रहा है, वहीं धर्म और तप की परंपरा आज भी जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग दिखा रही है। जैन धर्म में तप, त्याग और संयम को जीवन को परिष्कृत करने का सबसे प्रभावी माध्यम माना गया है। विशेषकर अक्षय तृतीया का पर्व जैन परंपरा में तप, साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि इसी दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने दीर्घकालीन तपस्या के पश्चात प्रथम पारणा किया था। इसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लुधियाना के सिविल लाइन रोड स्थित श्री एस.एस. जैन सभा, जैन स्थानक में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भव्य पारणोत्सव का आयोजन किया गया। श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि म.सा. के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में 38 वर्षीतप आराधकों के सामूहिक पारणे इक्षुरस से सम्पन्न कराए गए। 13 श्रमण- श्रमणी और 25 आराधक आराधिकाओं का पारणा संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे और तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया।कार्यक्रम के दौरान पूरा जैन स्थानक भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। जय जिनेन्द्र, वर्षीतप तपस्वियों की जय और भगवान आदिनाथ की जय के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। देश के विभिन्न क्षेत्र से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक आयोजन में भाग लेकर तपस्वियों की साधना के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।</p>
<p><strong>संतुलित जीवन की प्रेरणा  </strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिनेश मुनि म.सा. ने कहा कि जीवन सभी को मिला है, लेकिन जीवन जीने की कला हर किसी को नहीं आती। जो व्यक्ति जीवन जीने की कला सीख लेता है, वही अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ का जीवन हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन, संयम और त्याग कितना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदि व्यक्ति भगवान आदिनाथ के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने व्यवहार में बदलाव करे तो वह अपने जीवन को शांत, संतुलित और सार्थक बना सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जीवन में सब कुछ हमारे अनुसार नहीं होता। व्यक्ति को जो प्राप्त हो उसमें संतोष रखना चाहिए। असंतोष व्यक्ति को तनाव और दुख की ओर ले जाता है, जबकि संतोष जीवन में शांति देता है। उन्होंने भगवान आदिनाथ को श्रेयांस कुमार द्वारा पारणा कराने के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि दान तभी सार्थक होता है जब उससे सामने वाले की आवश्यकता पूरी हो। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा दान देना चाहिए जिससे दूसरों की समस्या का समाधान हो सके।</p>
<p><strong>वर्षीतप तपस्या की महत्ता बताई</strong></p>
<p>पूज्य मुनिश्री ने कहा कि वर्षीतप अत्यंत कठिन और अनुशासित तपस्या है। इसमें साधक पूरे वर्ष नियमित संयम और उपवास के साथ तप साधना करता है। ऐसी तपस्या आत्मशुद्धि और आत्मबल को मजबूत करने का माध्यम बनती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं तपस्या नहीं कर सकता, वह तपस्वियों की अनुमोदना कर या पारणा कराकर भी पुण्य का भागी बन सकता है।</p>
<p><strong>37 वर्षीतप तपस्वियों के पारणे सम्पन्न</strong></p>
<p>धर्मसभा के पश्चात 37 वर्षीतप तपस्वियों के पारणे विधिवत इक्षुरस से सम्पन्न कराए गए। श्रीसंघ की ओर से सभी तपस्वियों का बहुमान तिलक, माला पहनाकर व चाँदी का कलश भेंट कर भव्य स्वागत एवं बहुमान किया गया। श्रद्धालुओं में तपस्वियों को पारणा कराने का लाभ लेने की होड़ देखी गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने तपस्वियों के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>भक्तिमय माहौल में हुआ आयोजन</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीत, मंगलाचरण और स्तुति पाठ से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए और तपस्वियों की साधना की अनुमोदना करते रहे। गौतम प्रसादी व इक्षुरस लाभार्थी गुरु भक्त विजय कुमार नीरू जी जैन (जैन पैकवेल) लुधियाना थे। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर धर्मसभा का लाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>अक्षय तृतीया का विशेष महत्व</strong></p>
<p>अक्षय तृतीया जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसी दिन भगवान आदिनाथ ने दीर्घकालीन तपस्या के बाद प्रथम पारणा किया था। इस कारण इस दिन वर्षीतप तपस्वियों के पारणे का विशेष महत्व होता है।</p>
<p><strong>श्रीसंघ ने व्यक्त किया आभार</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंत में एसएस जैन सभा के पदाधिकारियों ने सभी तपस्वियों, आगंतुक श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में गौतम प्रसादी लाभार्थी परिवार विजयकुमार नीरू जैन (जैन पैकवैल) लुधियाना थे। अक्षय तृतीया के इस भव्य पारणोत्सव में तप, भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान की।</p>
<p><strong>45 साधु-साध्वियों का रहा पावन सान्निध्य</strong></p>
<p>इस भव्य आयोजन में श्री दिनेश मुनि जी महाराज, डॉ. श्री द्वीपेन्द्र मुनि जी महाराज, डॉ. श्री पुष्पेन्द्र मुनि जी महाराज (ठाणा-3) सहित महासाध्वी श्री प्रियदर्शना जी महाराज (ठाणा-7), महासाध्वी श्री रमेश कुमारी जी महाराज (ठाणा-7), महासाध्वी श्री मीना जी महाराज (ठाणा-5), महासाध्वी श्री वीर कांता जी महाराज (ठाणा-6), महासाध्वी श्री श्रेष्ठा जी महाराज (ठाणा-5), महासाध्वी श्री स्वाति जी महाराज (ठाणा-7),महासाध्वी श्री सुनिधि जी महाराज (ठाणा-4), डॉ. मनीषा जी महाराज 45 साधु-साध्वियों का पावन सान्निध्य ने इस आयोजन को विशेष बनाया।</p>
<p><strong>वर्षीतप आराधक संत-साध्वी वृन्द</strong></p>
<p>इस अवसर पर साधु-साध्वी वृन्द में डॉ. श्री दीपेन्द्र मुनि जी महाराज (उपवास 11वां), डॉ. श्री पुष्पेन्द्र मुनि जी महाराज (एकासन 11वां), साध्वी श्री सुनिधि जी महाराज (उपवास 22वां), साध्वी श्री शमा जी महाराज (उपवास 16वां), साध्वी डॉ. अर्पिता जी महाराज (उपवास 12वां), साध्वी श्री मोक्षदा जी महाराज (उपवास तीसरा), साध्वी डॉ. विचक्षणश्री जी महाराज (एकासन से वर्धमान ओली), साध्वी डॉ. मनीषा जी महाराज (एकासन 22वां), साध्वी डॉ. आर्या जी महाराज (आयंबिल प्रथम), साध्वी श्री शानवी जी महाराज (एकासन 7वां), साध्वी श्री कर्णिका जी महाराज (एकासन द्वितीय), साध्वी श्री मणि जी महाराज (एकासन प्रथम) तथा साध्वी श्री वीरांशी जी महाराज प्रथम वर्षीतप पारणा इक्षुरस से संपन्न किया ।</p>
<p><strong>वर्षीतप आराधक श्रद्धालु</strong></p>
<p>वर्षीतप करने वाले श्रद्धालुओं में आशा रानी जैन (चौविहार व्रत 33वां), इन्द जैन (उपवास 28वां), पंकज जैन (उपवास 5वां), मोहिंदर पाल जैन (उपवास चौथा), रिंकी जैन (6 वर्ष एकासन), पंकज जैन (2 वर्ष उपवास), मोहिनी जैन (एकासन 10वां), राजरानी जैन (एकासन 7वां), सिम्मी जैन (एकासन 7वां), स्वतंत्र बाला जैन (एकासन 6वां), तमन्ना जैन (एकासन चौथा), किरण जैन (एकासन चौथा), पूनम जैन (एकासन चौथा), सुनीता अरोड़ा (एकासन चौथा), पवन कुमार जैन (एकासन चौथा), वीना जैन (एकासन दूसरा), सुनीता जैन (एकासन प्रथम), नीतू जैन (एकासन प्रथम), रमा जैन (एकासन प्रथम) तथा दिशा जैन प्रथम, वैरागन प्राची जैन चौथा एकासन, श्री यशपाल जैन एकासन दूसरा, करण जैन उपवास का प्रथम, ज्योति जैन एकासन प्रथम, सीमा जैन तीसरा एकासन वर्षीतप पारणा संपन्न किया।</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ के मंदिर के प्रतिष्ठा महोत्सव की अद्वितीय छटा : श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वर जी ने शुभ मुहूर्त में करवाई प्रतिष्ठा  </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 06:21:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहर के बाजार नं. 3 में 7 महीने 7 दिन की अल्प अवधि में सफेद मार्बल से 42 फिट ऊँचे शिखरबंद मंदिर की मुख्य वेदी (मूल गंभारे) में भगवान आदिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर स्वामी और भगवान सुमतिनाथ को शुभ मुहूर्त सुबह 8:33 बजे विराजमान करवाया गया। रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शहर के बाजार नं. 3 में 7 महीने 7 दिन की अल्प अवधि में सफेद मार्बल से 42 फिट ऊँचे शिखरबंद मंदिर की मुख्य वेदी (मूल गंभारे) में भगवान आदिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर स्वामी और भगवान सुमतिनाथ को शुभ मुहूर्त सुबह 8:33 बजे विराजमान करवाया गया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> शहर के बाजार नं. 3 में 7 महीने 7 दिन की अल्प अवधि में सफेद मार्बल से 42 फिट ऊँचे शिखरबंद मंदिर की मुख्य वेदी (मूल गंभारे) में भगवान आदिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर स्वामी और भगवान सुमतिनाथ को शुभ मुहूर्त सुबह 8:33 बजे विराजमान करवाया गया। आचार्य श्रीजिन मणि प्रभ सूरीश्वर जी ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके इस पुनीत कार्य को संपन्न किया। इसी के साथ मंदिर परिसर में 70 वर्ष प्राचीन स्थापित तीनों भगवान, गौतम स्वामी, भोमियाजी, चक्रेश्वरी देवी, सच्चियाय माता, क्षेत्रपाल भैरूजी और जिनेश्वर सूरीजी की प्रतिमाओं को पूरे विधि-विधान से विराजमान करवाया।</p>
<p><strong>42 फिट ऊँचे शिखर पर ध्वजा फहराई गई</strong></p>
<p>शुभ मुहूर्त में ही 42 फिट ऊँचे शिखर पर 151 इंच ध्वजा दंड पर 131 इंच लम्बी ध्वजा आचार्य श्री मणि प्रभ सूरीश्वर जी की निश्रा में चढ़ाई गई। ध्वजा का लाभ मनीष लोढ़ा परिवार (सूरत वालों) ने लिया और शिखर पर मुख्य कलश का लाभ मोहित नाहर (सूरत वालों) ने लिया। विराजमान करवाने के मुख्य लाभार्थीयों में भगवान आदिनाथ के पारसमल कोठारी परिवार, इन्दौर, भगवान पार्श्वनाथ के चंपालाल शाह परिवार, सांचोर, भगवान महावीर स्वामी के सुभाष बाफना परिवार, रामगंजमंडी और भगवान सुमतिनाथ के लाभार्थी बसंतीलाल डागा परिवार रहे।</p>
<p><strong>रामगंजमंडी की प्रतिष्ठा का दृश्य मेरी आँखों में तैर रहा है</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव इतना हर्ष उल्लास एवं उमंग से हुआ कि प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद प्रवचन में आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर ने कहा कि रामगंजमंडी मंदिर की प्रतिष्ठा का दृश्य मेरी आँखों में तैर रहा है। आचार्य श्री ने अंजनशलाका का महत्व बताते हुए कहा कि इसमें प्रतिमा में प्राण प्रवाहित किए जाते हैं। अंजन शलाका होने के बाद प्रतिमा, प्रतिमा नहीं रहती बल्कि भगवान बन जाती है। ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख को इंगित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अगर मुझे मालूम होता कि रामगंजमंडी के लोग और सारे संघ इतने धार्मिक और अच्छे हैं तो मैं बीकानेर की जगह अंजनशलाका रामगंजमंडी में ही करवाता। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान को विराजमान करने के बाद यहां के लोगों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। सौंदर्य और सुगंध का उदाहरण देते हुए मणिप्रभ सूरीश्वरजी ने कहा कि सौंदर्य को दूर से देखा जा सकता है, लेकिन सुगंध के लिये पास जाना पड़ता है। उसी तरह सिर्फ भगवान की प्रतिमा का सौंदर्य देखना हो तो दूर से दर्शन किये जा सकते हैं, लेकिन भगवान के गुणों की सुगंध प्राप्त करनी हो तो स्पर्श और पूजा जरूरी है। पत्रकारों को इंगित करते हुए आचार्य मणिप्रभ सूरीश्वर जी ने कहा कि यहाँ के पत्रकारों ने सिर्फ अपना कर्तव्य ही नहीं निभाया वरन परमात्मा के प्रति अपनी भक्ति भी दिखाई है।</p>
<p><strong>सभी धर्मों के लोग तारीफ के काबिल </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि पूरे प्रतिष्ठा महोत्सव में श्वेताम्बर, स्थानकवासी, तेरापंथी, दिगंबर समाज ने मिलकर जो मिसाल पेश की &#8211; और रामगंजमंडी के प्रत्येक समाज ने होल्डिंग, बैनर, कट आउट लगाकर और शोभा यात्रा में शामिल होकर एकता की जो मिसाल पेश की उसकी मैं प्रशंसा करता हूँ।</p>
<p><strong> पारख को संघ भूषण की उपाधि मिली</strong></p>
<p>श्रीआदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्री संघ द्वारा अध्यक्ष राजकुमार पारख को आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने संघ भूषण की पदवी से अलंकृत किया। साथ ही उनकी बेटी पूर्व पार्षद खरतरगच्छ महिला परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य साक्षी पारख की जमकर तारीफ की और राजेंद्र रांका, गौरव बापना, रवि बापना, दिलीप तिल्लानी, सुशील गोखरू, महेन्द्र डांगी सहित पूरे जैन समाज की सराहना की। धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने भावुक शब्दों में कहा कि मैं रामगंजमंडी से जाते हुए साथ में भाता के रूप में रामगंजमंडी के लोगों का प्रेम, श्रद्धा और सम्मान लेकर जा रहा हूँ। राजकुमार पारख का श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट, और माँ फलोदी धाम की तरफ से भी सम्मान किया गया। धर्म सभा को वर्धमान स्थानकवासी संघ के मंत्री प्रखर वक्ता, अजीत पारख और अर्चना कोठारी इंदौर ने भी संबोधित किया।</p>
<p><strong>गुरुवार को होगा द्वार उद्घाटन </strong></p>
<p>नवनिर्मित मंदिर का गुरुवार को द्वार उद्घाटन होगा। जिसका लाभ पारख परिवार ने लिया है। उद्घाटन के बाद बाद यह मंदिर सभी के लिये दर्शन और पूजा के लिए खुल जाएगा।</p>
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		<title>मोक्ष कल्याणक के साथ पंच कल्याणक महोत्सव की पुर्णाहुति : तीर्थकर भगवान की प्रतिमा दिगंबर जैन मंदिर के नव निर्मित मान स्तंभ में विराजित </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 08:54:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लार श्री दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव गुरुवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। लार से पढ़िए, यह खबर&#8230; लार (टीकमगढ़)। लार श्री दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव गुरुवार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>लार श्री दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव गुरुवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। <span style="color: #ff0000">लार से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>लार (टीकमगढ़)।</strong> लार श्री दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव गुरुवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। समापन के साथ तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाओं को दिगंबर जैन मंदिर के नव निर्मित मान स्तंभ में विराजमान किया गया। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिनाथ भगवान का अभिषेक,रिद्धि सिद्धि मंत्रों से विश्व शांति के लिए महाशांतिधारा, नित्य नियम पूजन, दस भक्ति पाठ, मोक्ष गमन, निर्वाण कल्याणक की पूजा हुई। साथ ही विश्व शांति महायज्ञ में आहुति दी गईं। आचार्य के सानिध्य में भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत पर निर्वाण प्राप्ति, अग्नि कुमार देवों द्वारा अग्नि प्रज्ज्वलित कर नख और केश विसर्जन की क्रियाएं संपन्न की गईं। महोत्सव में सौधर्म इन्द्र मनीष जैन,चक्रेश जैन उज्जैन, यज्ञनायक संयम जैन आकाश जैन, ईशान इंद्र डॉ.अरविन्द्र जैन, सानत इंद्र खुशाल चन्द्र जैन, महेंद्र इंद्र नितिन जैन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>श्रद्धालु रथयात्रा सहित मंदिर पहुंचे</strong></p>
<p>संगीतकार रामकुमार दोराहा ने मोक्ष कल्याणक के अवसर पर सुंदर भजन प्रस्तुत किए। आचार्य के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हुकुम, ज्ञान चंद्र,जिनेश,आशीष चौधरी के परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद भक्ति भाव से आदिनाथ भगवान और चौबीस तीर्थांकर भगवान की प्रतिमाओं को रथ, पालकी और सिर पर विराजमान करके श्रद्धालु रथयात्रा के साथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य और पं.बा.ब्र. जयकुमार निशांत,बा.ब्र.संजय जैन गुणाधीश अहार, और पंडित मनीष जैन के निर्देशन में मंत्रोच्चार के मध्य जिनेंद्र भगवान की जिन प्रतिमाओं को चैत्य वृक्ष पर विराजमान किया गया।</p>
<p><strong>प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव हुआ</strong></p>
<p>दोपहर में आयोजन स्थल अयोध्या नगरी से गजरथ शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें प्रभु के तीन रथ, घोड़ा, बग्गी राजस्थान का दिव्य घोष एवं पारस म्यूजिकल ग्रुप का दिव्य घोष मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। मार्ग पर केसरिया धर्म ध्वजाएं विश्व शांति और बंधुत्व का संदेश दे रही थीं। विभिन्न युवा मंडल &#8216;जय अरिहंत&#8217; और &#8216;जय जिनेंद्र&#8217; के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। भव्य रथ यात्रा निकली गई, जिसमें विशाल जन सैलाब उमड़ा इंद्र-इन्द्राणी के साथ श्रद्धालु नृत्य कर रहे थे। सात परिक्रमा के साथ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव हुआ। रात्रि महा आरती के बाद नव दीक्षार्थियों की गोदभराई की गई एवं उदयपुर से आए जैन जादूगर द्वारा एक से बढ़कर एक जादू प्रस्तुत किए गए।</p>
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