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	<title>Lord Adinath श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Lord Adinath श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य जिनमणी प्रभ सुरीश्वर का रामगंजमंडी में किया स्वागत: गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की होड सी लग गई </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 12:57:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। करीब 15 मिनट तक तो यह स्थिति हो गई कि गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की होड सी लग गई। इस दौरान हर धर्म और समाज के व्यक्ति पहुंचे। श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि आचार्य श्री का नगर प्रवेश ऐतिहासिक रहा। जिसमें सकल जैन श्वेताम्बर श्री संघ के साथ दिगंबर जैन समाज, मेड़तवाल समाज, पोरवाल समाज, गिरिराज धरण संस्था, गुजराती समाज सहित हर समाज के व्यक्ति पहुंचे। वही छत्तीसगढ़ शिरोमणी मनोहर श्रीजी की शिष्याएं साध्वी लयसमिताजी, मृगावली श्रीजी आदि ठाणा 8 भी आचार्य की अगवानी करने आई। सबसे पहले एक छोटी बालिका विशुद्धि बापना ने सिर पर कलश लेकर आचार्य की अगवानी की। फिर श्वेताम्बर समाज की महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर अगवानी की और गंवली बनाकर श्रद्धा अर्पित की। बाजार नं. 3 से मंदिर तक लगातार दिगंबर जैन समाज के छोटे-बच्चे बैंड बजाते हुए आचार्य श्री के काफिले के आगे आगे चले।</p>
<p>आचार्य के जयकारे पूरे बाजार नं. 3 को गुंजायमान करते रहे। खरतरगच्छाधिपति को पूरे नगर और अन्य संघों से आए लोग आदिनाथ भगवान के मंदिर तक लेकर आए। जहां आचार्य मणी प्रभ सुरीश्वरजी, गणिवर्य मयंक प्रभ सागर, मुनि विरक्तप्रभ सागर आठांे साध्वी मंडल ने चैत्र वंदन किया और दादावाड़ी में दादा गुरुदेव के दर्शन वंदन किया।</p>
<p><strong>बच्चों ने दी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां</strong></p>
<p>रामगंजमंडी के बाजार नं. 6 में राजकमल आइल मील के विशाल परिसर में हुआ प्रवेश महोत्सव मंदिर से सीधे आचार्य राजकमल आइल मिल पहुंचे। जहां पूरा डोम जनता से भरा हुआ था। सर्वप्रथम सामूहिक वंदन हुआ। इसके बाद खरतरगच्छ महिला परिषद की जूनियर टीम ने स्वागत गाना गाया। फिर छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। उसके बाद खरतरगच्छ महिला परिषद की सीनियर टीम ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रामगंजमंडी ट्रस्ट के विजयकुमार छाजेड़, सुभाष बाफना, राजेंद्र रांका, स्थानक संघ से रूपचंद लाडवा, संजय बीजावत, भानपुरा संघ अध्यक्ष अशोक गोखरू ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन साक्षी पारख ने किया।</p>
<p><strong>भाग्य और सौभाग्य में बड़ा अंतरः साध्वी मृगावती</strong></p>
<p>प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारी साध्वी मृगावती ने कहा कि भाग्य और सौभाग्य में बड़ा अंतर है। संपत्ति का मिलना भाग्य है लेकिन, मंदिर का निर्माण करना सौभाग्य है। सीए, इंजीनियर, डॉक्टर बनना भाग्य है लेकिन, जिन शासन की शान बढ़ाना सौभाग्य है। भाग्य तो सभी को मिलता है पर रामगंजमंडी में सौभाग्य राजकुमार पारख को मिला।</p>
<p><strong>मंदिर पर काला टीका लगाने की जरूरत</strong></p>
<p>खरतरगच्छाधिपति ने कहा कि हम 2 से 3 वर्षों में बने मंदिर को अच्छी टाइमिंग मानते हैं। कई-कई मंदिर तो 10 वर्षों तक पूरे नहीं होते लेकिन, रामगंजमंडी का मंदिर सिर्फ 7 महीने 7 दिन में पूर्ण होना वास्तव में किसी चमत्कार से कम नहीं। मेरी जिंदगी में यह पहला मंदिर है। जिसकी प्रतिष्ठा करवाते वक्त कोई कार्य बाकी नहीं रहा। उन्होंने इस ऐतिहासिक मंदिर निर्माण के कार्य का पूरा-पूरा श्रेय राजकुमार पारख (अध्यक्ष) और उनकी टीम को दिया। वहीं, आचार्य ने पूर्व पार्षद साक्षी पारख के कार्यों को बेहतर बताया। आचार्य ने कहा कि मंदिर इतना खूबसूरत बना है कि किसी की नजर नहीं लगे, इसलिए राजकुमार पारख को काला टीका लगाने को कहा। प्रतिष्ठा महोत्सव में 15 तारीख को भगवान आदिनाथ विराजमान होंगे। आदिनाथ भगवान के गुणों को जीवन में जीने की नसीहत देते हुए आचार्य ने कहा कि हर ग्रंथ, हर वेद पुराण में आदिनाथ भगवान का वर्णन है। आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर ही देश का नाम भारत रखा गया। आचार्य श्री ने कहा कि घर में जमाई आवे तो चांदी की थालियां निकल जाती हैं। नेता आवे तो गलियां और सड़कें साफ हो जाती हैं। प्रधानमंत्री आए तो पांव जमीन पर नहीं टिकते। फिर रामगंजमंडी की धरती पर तो स्वयं भगवान पधार रहे हैं, सोचो कितना आनंद होगा।</p>
<p><strong>प्रतिष्ठा महोत्सव में सहयोग देने वालों का किया सम्मान</strong></p>
<p>श्रीआदिनाथ ट्रस्ट ने छप्पन भोग रिसोर्ट फ्री देने पर मोहन चौधरी और बालमुकुंद गुप्ता, गोवर्धन नाथ मंदिर देने के लिए नितिन माहेश्वरी, होटल देने पर चेरी भाई सलूजा, नसियाजी देने पर दिलीप विनायका, मेघवाल धर्मशाला देने पर राजेंद्र गुप्ता, भगवान सुमतिनाथ का मुकुट, कुंडल देने पर टीकम मित्तल और भूमि पूजन एवं खनन का लाभ लेने वाले ज्ञानचंद डागी, मंदिर के मुख्य कारीगर आरिफ मकराना एवं घिसाई का कार्य करने वाले रेशमाराम पिंडवाड़ा को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान गरोठ संघ ने राजकुमार पारख को सम्मानित किया।</p>
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		<title>एकान्तर उपवास के सामूहिक होते है पारणे : भीषण गर्मी में सामूहिक वर्षीतप आराधना जारी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 May 2024 13:09:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म धरा थांदला में धर्म का अनूठा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सूर्य की तपिश शरीर में उष्णता पैदा कर मन को अशांत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जैन धर्मावलंबी तन को तपा देने वाली भीषण गर्मी में भी दुष्कर वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। संघ अध्यक्ष भरत भंसाली, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्म धरा थांदला में धर्म का अनूठा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सूर्य की तपिश शरीर में उष्णता पैदा कर मन को अशांत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जैन धर्मावलंबी तन को तपा देने वाली भीषण गर्मी में भी दुष्कर वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। संघ अध्यक्ष भरत भंसाली, सचिव प्रदीप गादिया व प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि तप प्रधान जिन शासन में धर्म तीर्थ प्रणेता प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म व दीक्षा कल्याणक दिवस कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी से जैन धर्मावलंबी में वर्षीतप की आराधना प्रारम्भ करने का विधान है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जीवन लाल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थांदला।</strong> धर्म धरा थांदला में धर्म का अनूठा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सूर्य की तपिश शरीर में उष्णता पैदा कर मन को अशांत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जैन धर्मावलंबी तन को तपा देने वाली भीषण गर्मी में भी दुष्कर वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। संघ अध्यक्ष भरत भंसाली, सचिव प्रदीप गादिया व प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि तप प्रधान जिन शासन में धर्म तीर्थ प्रणेता प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म व दीक्षा कल्याणक दिवस कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी से जैन धर्मावलंबी में वर्षीतप की आराधना प्रारम्भ करने का विधान है।</p>
<p>करीब 13 माह 13 दिन तक चलने वाले इस तप को करने वाले आराधक एक दिन के अंतर से केवल गर्म अथवा धोवन पानी के आधार पर निराहार रहकर उपवास तप करते हैं, जो दूसरे वर्ष वैशाख के शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया/ आखा तीज) के दिन पूर्ण होती है। ऐसे में जिन शासन गौरव जैनाचार्य पूज्य श्रीउमेशमुनिजी के शताब्दी वर्ष में करीब 72 आराधकों द्वारा समूहिक वर्षीतप की आराधना की जा रही है। ललित जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष रवि लोढ़ा, सचिव सन्दीप शाहजी व मीडिया प्रभारी समकित तलेरा ने बताया कि श्रीसंघ में वर्षीतप की पहली बार आराधना हो रही है, जिसको लेकर सभी आराधकों में जबरदस्त उत्साह है।</p>
<p>थांदला संघ के उदारमना दानदाताओं के सहयोग से व नित्य एक लाभार्थी परिवार के सहयोग से सबके सामूहिक पारणे महावीर भवन पर हो रहे हैं। आज 28वें पारणे का लाभ स्व. मनोहरलाल शाहजी की स्मृति में मालतिदेवी शाहजी परिवार द्वारा लिया गया। मालती देवी, प्रेमलता सेठिया, अंजू खारीवाल, सारिका मेहता, मौनिका चौधरी, सुशीला बहन चौरड़िया, पुष्पा नवलखा आदि शाहजी परिवार व इनकी बहन बेटियों ने सभी आराधकों को पारणा करवाते हुए तिलक निकालकर प्रभावना प्रदान की।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61215" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012.jpg" alt="" width="899" height="1121" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012.jpg 899w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012-241x300.jpg 241w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012-821x1024.jpg 821w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012-768x958.jpg 768w" sizes="(max-width: 899px) 100vw, 899px" /><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61216" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011.jpg" alt="" width="899" height="1245" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011.jpg 899w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011-217x300.jpg 217w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011-739x1024.jpg 739w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011-768x1064.jpg 768w" sizes="(max-width: 899px) 100vw, 899px" /> ये हैं वर्षीतप तपस्या में शामिल तप आरधक</strong></p>
<p>संघ अध्यक्ष भरत भंसाली इस बार लगातार 19 वां व आशा झमकलाल श्रीमाल 13 वां वर्षीतप पवन नाहर के निरंतर 1008 एकासन सहित 4 एकासन वर्षीतप के बाद उपवास से वर्षीतप किया जा रहा है। वहीं वीर माता-पिता स्नेहलता अशोक मोदी, वीर माता द्वय अशुका लोढ़ा, आशा नाहटा, वीर पिता बाबूलाल छाजेड़, स्वाध्यायी सहित 4 जोड़े क्रमशः अनुपमा एवं मंगलेश संग पिता नानालाल श्रीश्रीमाल, रेखा एवं रवि लोढ़ा, कला व अभय खींमेसरा, मंजुला सूरजमल श्रीमाल, रानी विवेक लुणावत, गादिया परिवार की तीन बहुएं सुनीता लोकेश गादिया, रंजना श्रेणीक गादीया व अमिता प्रदीप गादीया, 6 देराणी जेठानी अनिता व मंगला लोढ़ा, मनोरमा व स्नेहलता चौधरी, राजल व इंदु कुवाड़, हेमा व रजनी मेहता, सरोज व सुधा शाहजी, रीटा, अलका व सपना व्होरा, मां-बेटे हंसा व अंशुल रुनवाल, कामिनी रुनवाल, श्वेता चौधरी, अर्चना गादीया, नीता छाजेड़, सुनीता घोड़ावत, राजल तलेरा, प्रीति चौरड़िया, शकुंतला शाहजी, स्नेहलता व्होरा, मंजूबाला नाहर, चंदा भंसाली, सुनीता श्रीश्रीमाल, प्रियंका डांगी, विनोद श्रीमाल, दीपक चौधरी, प्रवीणा सेठिया, किरण पावेचा, विभा श्रीमाल, शोभा नाग सेठिया, नम्रता कटारिया, अंगूरबाला लुणावत, संगीता लोढ़ा, कल्पना पालरेचा, स्मिता घोड़ावत, रीटा बोथरा, ममता तलेरा, विनोद श्रीमाल, भावना शाहजी, पिंकी पावेचा, ममता चौरड़िया, किरण शाहजी, सरिता लोढ़ा, मंजू चौरड़िया, अनिता पोरवाल नेहा लोढ़ा मंजू डुंगरवाल आदि तप आराधक दृढ़ भावों के साथ वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। सभी आराधकों के पारणें करवाने में पुष्पा घोड़ावत, प्रवीण पालरेचा, संजय व्होरा, मुकेश चौधरी, हेमंत श्रीमाल, महावीर घोड़ावत, राजेश सेठिया, विजय लोढ़ा, कमलेश कुवाड़, नीलेश पावेचा, हितेश शाहजी, राकेश श्रीमाल आदि नवयुवक मंडल की सेवा सराहनीय हैं।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया का जैन धर्म में विशेष महत्व : अपनी सामर्थ्य अनुसार करवाएं एक मुनि को आहार </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 May 2024 10:01:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अक्षय तृतीया के दिन राजा श्रेयांस ने मुनि आदिनाथ को प्रथम आहार ईक्षु रस (गन्ने का रस) का दिया। आप भी आज किसी न किसी मुनि को जरूर करवाएं आहार। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन का आलेख&#8230;  आदिनाथ भगवान ने लोगों को षट् कर्म का महत्व बताया और ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अक्षय तृतीया के दिन राजा श्रेयांस ने मुनि आदिनाथ को प्रथम आहार ईक्षु रस (गन्ने का रस) का दिया। आप भी आज किसी न किसी मुनि को जरूर करवाएं आहार। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन का आलेख&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p>आदिनाथ भगवान ने लोगों को षट् कर्म का महत्व बताया और ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य के रूप में वर्ण व्यवस्था समाज को प्रदान की। इसलिए उन्हें आदि पुरुष व युग प्रवर्तक भी कहा जाता है। राजा आदिनाथ को राज्य भोगते हुए जब जीवन से वैराग्य हो गया तो उन्होंने जैन धर्म की दीक्षा ली तथा 6 महीने का उपवास लेकर तपस्या की। 6 माह बाद जब उनकी तपस्या पूरी हुई तो वह आहार के लिए निकले। जैन दर्शन में श्रावकों द्वारा मुनियों को आहार का दान किया जाता है लेकिन उस समय किसी को भी आहारचर्या का ज्ञान नहीं था। जिसके कारण मुनि आदिनाथ को और 6 महीने तक निराहार रहना पड़ा। बैसाख शुल्क तीज (अक्षय तृतीया) के दिन मुनि आदिनाथ विहार (भ्रमण) करते हुए हस्तिनापुर पहुंचे। वहां के राजा श्रेयांस व राजा सोम को रात्रि को एक स्वप्र दिखा, जिसमें उन्हें अपने पिछले भव में मुनि को आहार देने की चर्या का स्मरण हो गया।</p>
<p>तत्पश्चात हस्तिनापुर पहुंचे मुनि आदिनाथ को उन्होंने प्रथम आहार ईक्षु रस (गन्ने का रस) का दिया। इसी कारण यह दिन इक्षु तृतीया या अक्षय तृतीया के नाम से विख्यात हो गया है। आज के दिन श्रावक इक्षु रस का दान करते हैं। आप आज के दिन कुछ न कर सकें तो एक काम अवश्य करना, अपने कस्बे में शहर में या अपनी सामर्थ्य अनुसार जहां पर भी मुनि हो, उन्हें आहार अवश्य करवा देना।</p>
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		<title>जैन धर्म के पांच तीर्थकार की शास्वत जन्मभूमि है अयोध्या :  जैन प्रभावना रथ का स्वागत कर निकाली भव्य शोभायात्रा </title>
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		<pubDate>Sat, 16 Mar 2024 09:30:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रवर्तक प्रथम तीर्थंकर 1008 आदिनाथ भगवान के साथ 5 जैन तीर्थंकर की जन्मस्थली अयोध्या से निकली रथ पूरे भारत में भ्रमण करते हुए धर्मनगरी झुमरीतिलैया पहुंची, जहां रथ में विराजमान आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक ओर शन्तिधारा का सौभाग्य जैन समाज के सभी पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रवर्तक प्रथम तीर्थंकर 1008 आदिनाथ भगवान के साथ 5 जैन तीर्थंकर की जन्मस्थली अयोध्या से निकली रथ पूरे भारत में भ्रमण करते हुए धर्मनगरी झुमरीतिलैया पहुंची, जहां रथ में विराजमान आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक ओर शन्तिधारा का सौभाग्य जैन समाज के सभी पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> जैन धर्म के प्रवर्तक प्रथम तीर्थंकर 1008 आदिनाथ भगवान के साथ 5 जैन तीर्थंकर की जन्मस्थली अयोध्या से निकली रथ पूरे भारत में भ्रमण करते हुए धर्मनगरी झुमरीतिलैया पहुंची, जहां रथ में विराजमान आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक ओर शन्तिधारा का सौभाग्य जैन समाज के सभी पदाधिकारियों को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात भव्य शोभा यात्रा जैन बड़ा मंदिर से निकाली गई जो नगर भ्रमण कर नया मंदिर में समाप्त हुई।</p>
<p>रास्ते मे सभी जैन व अजैनों ने रथ में बैठे भगवान की आरती की। अयोध्या नगरी में जैन धर्म के पांच तीर्थकार की शास्वत जन्मभूमि है। जैन समाज की सर्वसाध्वी भारत गौरव गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के पावन आशीर्वाद से अयोध्या में नए मंदिर और नया जीणोद्धार तीर्थ की शुरुआत की गई। इस लिए पूरे भारत भ्रमण में तीर्थ प्रभावना रथ के द्वारा धर्म की प्रभावना किया जा रहा है। रथ के साथ चल रहे पंडित सत्येंद्र जैन के नेतृव में धर्म प्रभावना रथ का संचालन किया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जन्म सुधारता है अयोध्या दर्शन</p>
<p>शोभा यात्रा के दौरान समाज के उप मंत्री नरेंद जैन झांझरी ने कहा कि अयोध्या तीर्थ जैन समाज के लिए अनादिकाल से पूजनीय है। जैन संत अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज अपने प्रवचन में हमेशा कहते हैं कि मनुष्य को अपने जिंदगी में जन्म को सुधारना हो तो अयोध्या का दर्शन और मरण सुधारना हो तो सम्मेदशिखर जी का दर्शन जरूर करना चाहिए। स्थानीय पंडित अभिषेक जैन जैन ने कहा कि इस तरह की रथ यात्रा से जीवन में सुख- शांति मिलती है ओर जैन धर्म का अयोध्या के प्रति समर्पित दिखता है । इस दौरान रथ में बैठने का सौभाग्य सौधर्म इंद्र के रूप में सुरेंद्र-सरिता जैन काला, कुबेर के रूप में जियान जैन झांझरी, सुरेश झांझरी को प्राप्त हुआ। आरती करने का सौभाग्य सुनील-ममता जैन सेठी को, पालना झुलाने का सौभाग्य ललित-सिद्धांत जैन सेठी को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, सह मंत्री राज छाबड़ा, सुरेश जैन झांझरी, सुबोध गंगवाल,अजय जैन सेठी, जैन विद्यालय के संयोजक सुनील जैन छाबडा, मुकेश जैन अजमेरा, महिला समाज की अध्यक्ष नीलम जैन सेठी, मंत्राणी आशा जैन गंगवाल, मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन सहित सेकड़ों लोग इस शोभा यात्रा में शामिल हुए।</p>
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		<title>भगवान के जन्म कल्याणक पर नैनागिरि में छाई खुशियां : जब संसार में अधर्म बढ़ता है तो धर्म की प्रभावना करने तीर्थंकर प्रभु का जन्म होता है- विरागसागर  </title>
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		<pubDate>Fri, 08 Dec 2023 16:42:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश के विख्यात जैन तीर्थक्षेत्र, वरदत्तादि महर्षियों की निर्वाण भूमि व भगवान पारसनाथ की समोशरण स्थली में 04 दिसंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाले महोत्सव में जन्म कल्याणक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । गाजे बाजे के साथ निकली भव्य शोभा यात्रा में गज पर सवार होकर इन्द्र पाण्डुक शिला तक पहुंचे मुख्य इन्द्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देश के विख्यात जैन तीर्थक्षेत्र, वरदत्तादि महर्षियों की निर्वाण भूमि व भगवान पारसनाथ की समोशरण स्थली में 04 दिसंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाले महोत्सव में जन्म कल्याणक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । गाजे बाजे के साथ निकली भव्य शोभा यात्रा में गज पर सवार होकर इन्द्र पाण्डुक शिला तक पहुंचे मुख्य इन्द्र पात्रों के साथ सभी सामान्य इन्द्र और जैन श्रद्धालु इस दौरान शोभा यात्रा में सम्मिलित हुए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> बकस्वाहा।</strong> तहसील अंतर्गत देश के विख्यात जैन तीर्थक्षेत्र, वरदत्तादि महर्षियों की निर्वाण भूमि व भगवान पारसनाथ की समवशरण स्थली में 4 दिसंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाले महोत्सव में जन्म कल्याणक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गाजे -बाजे के साथ निकली भव्य शोभा यात्रा में गज पर सवार होकर इन्द्र पाण्डुक शिला तक पहुंचे। मुख्य इन्द्र पात्रों के साथ सभी सामान्य इन्द्र और जैन श्रद्धालु इस दौरान शोभा यात्रा में सम्मिलित हुए, माता मरु देवी की कोख से जन्मे तीर्थंकर प्रभु आदिनाथ का अभिषेक सौधर्मेंद्र के द्वारा सुमेरु पर्वत की पांडुक शिला में 1008 कलशों से किया गया। इस पावन अवसर पर क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने प्रभु का अभिषेक पूजन किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52715" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0016-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong> प्रभु के जन्म से ही होती है तीनों लोकों में शांति </strong></p>
<p>शास्त्रों में उल्लेख है कि जब तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है तो उनकी पुण्य बरगणाओं के प्रभाव से स्वर्ग क्या नरकों में भी कुछ पल के लिए सुख शांति प्राप्त होती है। ज्ञातव्य है कि जैन धर्म अनुसार भरत &#8211; ऐरावत क्षेत्र में 24 तीर्थंकर का जन्म होता है, इसी प्रकार वैष्णव धर्म में भी विष्णु के 24 अवतार माने गए हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52716" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0017-990x660.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong> गणाचार्य जी ने बताई जन्म कल्याणक की महिमा </strong></p>
<p>इस महोत्सव में मंगल सानिध्य प्रदान कर रहे देश के श्रेष्ठ जैन आचार्य भारतगौरव राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ने इस पावन दिवस के बारे में बतलाते हुए कहा कि जब जब इस संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब तीर्थंकर प्रभु जन्म लेकर धर्म का नाश कर, धर्म की प्रभावना करते हैं। यद्यपि जन्म तो प्रत्येक प्राणी लेता है किंतु तीर्थंकर जैसे महापुरुषों का जन्म इसलिए आदर्श में होता है क्योंकि तीर्थंकर प्रभु जन्म लेकर अपनी आदर्श शैली व धर्मकार्यों के द्वारा स्व &#8211; पर का कल्याण करते हैं। यही कारण है कि आज हम भले ही पंचकल्याणक के संस्काररोहण कर प्रतिमा को भगवत्ता प्रदान करते हैं किंतु इस क्रिया में शामिल होने वाले प्रत्येक जीव असीम पुण्य का आश्रव करते हैं।</p>
<p><strong> महिला सम्मेलन हुआ संपन्न </strong></p>
<p>महोत्सव के निर्देशक उपाध्याय विरंजन सागर जी महाराज के सान्निध्य में बृहद महिला सम्मेलन संपन्न हुआ जिसमें न्यायमूर्ति विमला जैन भोपाल की अध्यक्षता में तथा सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति में डॉक्टर बीनू जैन लंदन , डॉ. आशा जैन सागर, रानू जैन पथरिया आदि अनेक महिलाओं ने महिलाओं के विकास के बारे में विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong> महाआरती और बाल कीड़ा का हुआ मंचन </strong></p>
<p>जन्म कल्याणक की संध्या की बेला में प्रभु की महाआरती आयोजित हुई ,जहां प्रभु की बालक्रीड़ा का भी मंचन हुआ। आगामी 10 तारीख तक अनेक कार्यक्रम संपन्न होंगे ।</p>
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		<title>पंचकल्याणक पर धर्म प्रभावना : अपनी आंखों को इतनी पावन बनाओ कि जिसे तुम देखो वह धन्य हो जाये &#8211; मुनि श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Apr 2023 13:11:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंचकल्याणक के द्वितीय दिवस पर तीर्थंकर बालक आदिनाथ ने मां मरुदेवी के गर्भ में प्रवेश किया। कल तीर्थंकर इस धरा पर जन्म लेंगे। पढ़िये ये विशेष रिपोर्ट&#8230;  पृथ्वीपुर (मध्य प्रदेश)। पंचकल्याणक के द्वितीय दिवस पर तीर्थंकर बालक आदिनाथ ने मां मरुदेवी के गर्भ में प्रवेश किया। कल तीर्थंकर इस धरा पर जन्म लेंगे। आज प्रातः [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पंचकल्याणक के द्वितीय दिवस पर तीर्थंकर बालक आदिनाथ ने मां मरुदेवी के गर्भ में प्रवेश किया। कल तीर्थंकर इस धरा पर जन्म लेंगे। <span style="color: #ff0000;">पढ़िये ये विशेष रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
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<p><strong>पृथ्वीपुर (मध्य प्रदेश)।</strong> पंचकल्याणक के द्वितीय दिवस पर तीर्थंकर बालक आदिनाथ ने मां मरुदेवी के गर्भ में प्रवेश किया। कल तीर्थंकर इस धरा पर जन्म लेंगे। आज प्रातः काल श्रीजी के अभिषेक के साथ महोत्सव प्रारंभ हुआ। पूज्य गुरुदेव मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि अपनी आंखों को इतनी पावन बनाओ कि जिसे तुम देखो, वह धन्य हो जाये। साधु की आंखें इसलिए इतनी पवित्र होती है कि ये आंखें जब भी उठेंगी, कोई न कोई धन्य होगा या किसी न किसी की जिंदगी धन्य होगी। जन्म हुआ प्रभु का मरुदेवी और नाभिराय के लेकिन इनके गर्भ में आने से सारी अयोध्या ही नहीं, तीनों लोकों में खुशियां छा गईं। आज भगवान का गर्भ नहीं हुआ, आज मां मरुदेवी धन्य हुई हैं।</p>
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<p><strong>दान करने में आता है आनंद</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि दुनिया के बेटे मां को पाकर धन्य होते हैं लेकिन मां मरुदेवी तीर्थंकर से बेटे को पाकर धन्य हुई हैं। एक स्थान, जीव, सम्बन्ध ऐसा है, जहां खाली करने पर आनंद आता है, क्योंकि दुनिया को तिजोरी भरने में आनंद आता है लेकिन श्रावक ऐसा होता है जिसे महाराज को आहार कराने में आनंद आता है। जिसे दान करके आनंद आता है। गुरुदेव का पड़गाहन एवं आहारदान देने का सौभाग्य रवींद्र कुमार जैन बल्ली को प्राप्त हुआ।</p>
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