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	<title>Lighting of Lamp &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धर्म साधना जीवन को पवित्र और संतुलित बनाती है : महावीर नगर विस्तार योजना जैन मंदिर में आर्यिका विभाश्री माता जी के प्रवचन हुए  </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Dec 2025 07:12:16 +0000</pubDate>
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<p><strong>महावीर नगर विस्तार योजना स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को गणिनी आर्यिका श्री विभाश्री माताजी के सान्निध्य में आध्यात्मिक कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट और पाद-प्रक्षालन से हुआ। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> महावीर नगर विस्तार योजना स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को गणिनी आर्यिका श्री विभाश्री माताजी के सान्निध्य में आध्यात्मिक कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट और पाद प्रक्षालन से हुआ। जिसका सौभाग्य अशोककुमार को प्राप्त हुआ तथा समिति एवं समाज ने उनके इस पुण्य उपक्रम की अनुमोदना की। प्रवचन में माताजी ने कर्म सिद्धांत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्म सिद्धांत मनुष्य के जीवन की दिशा निर्धारित करने वाला गहन आध्यात्मिक विज्ञान है। कर्म आत्मा की गति को नियंत्रित करते हैं और जब तक मनुष्य कर्मों के स्वरूप एवं परिणाम को नहीं समझता, तब तक वह भ्रम, मोह और चिंता में उलझा रहता है। माताजी ने कहा कि ज्ञान, संयम, तप और सत्संग से जीवन का प्रकाश बढ़ता है, इसलिए धर्म-साधना जीवन को पवित्र और संतुलित बनाती है।</p>
<p>मंदिर समिति के अध्यक्ष पवन टोला ने बताया कि माताजी के प्रवचन महावीर नगर विस्तार योजना स्थित दिगंबर जैन मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ किए जा रहे हैं। जिनमें समाजजन बड़ी संख्या में आध्यात्मिक लाभ ले रहे हैं। कार्यक्रम में विनोद टोरड़ी, मनोज जयसवाल, नरेंद्र बोरखंडिया, मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश जैन सहित समाजबंधु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>मुनिश्री जयकीर्ति जी का पिच्छिका परिवर्तन हुआ: समारोह में अवतरण दिवस मनाकर की भक्ति  </title>
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		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 09:04:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तलवंडी स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री जयकीर्ति जी का बड़े भक्ति भाव के साथ अवतरण दिवस और भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह मनाया गया। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; कोटा। तलवंडी स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री जयकीर्ति जी का बड़े भक्ति भाव के साथ अवतरण दिवस और भव्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तलवंडी स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री जयकीर्ति जी का बड़े भक्ति भाव के साथ अवतरण दिवस और भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह मनाया गया। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> तलवंडी स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री जयकीर्ति जी का बड़े भक्ति भाव के साथ अवतरण दिवस और भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह मनाया गया। मुनिश्री जयकीर्ति जी का पूरा जीवन त्याग तपस्या और साधना में समर्पित है। प्रभु महावीर के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते चले जा रहे हैं और अपनी साधना से भगवान महावीर की तरह आठों कर्मांे का नाश कर सिद्धालय का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। आपने अपने साधना मार्ग में कई जीवों का कल्याण किया। दया, करुणा और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति हैं। आपका हमेशा मुस्कुराता हुआ चेहरा और जिनधर्म के प्रति अगाध आस्था रही हैं। प्रत्येक दुखी व्यक्ति के लिए आप संकट मोचक हैं। कार्यक्रम प्रातःकालीन बेला में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और जिनवाणी भेंट के साथ प्रारंभ हुआ। पुण्यार्जक श्रेष्ठी प्रकाश सामरिया, डॉ. अखिलेश ठोरा, महावीर, विमल, ललित लुहाड़िया परिवार रहे।</p>
<p><strong>संगीतमय पूजा कर पिच्छी प्रदान की </strong></p>
<p>मुनिश्री की संगीतमय पूजा हुई, जिसमें महिला पुरुष सभी ने नृत्य के साथ में भाग लिया एवं फिर ‘अवतरण दिवस’ पर विनयांजलि प्रस्तुत की गई। इसमें समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज कार्याध्यक्ष जेके जैन, श्रेष्ठी भागचंद लुहाड़िया एवं मंदिर समिति के अध्यक्ष अशोक पहाड़िया ने अपने विचार रखें। इसके बाद नवीन पिच्छिका समाजजनों ने मुनिश्री को भेंट की। पुरानी पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य नवीन नेमी लुहाड़िया को मिला।</p>
<p><strong>यह रहे कार्यक्रम में मौजूद </strong></p>
<p>आर्यिका सुविक्षमति माताजी की पिच्छी मुंबई निवासी अनिल ललिता को प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। माताजी और ब्रह्मचारिणी को वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य ओपी गुप्ता एवं महावीरकुमार ललित कुमार कमल नमी विजय लुहाडिया परिवार खजूरी वालों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अशोक पहाड़िया, मंजू जैन पहाड़िया महामंत्री प्रकाश सामरिया, महावीर जैन लुहाड़िया, विमल जैन लुहाड़िया, राजेंद्र जैन श्रीमाल उपस्थित थे। संचालन राज लुहाड़िया ने किया।</p>
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		<title>युगल मुनिराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह रविवार को: समाजजनों द्वारा तैयारियां की जा रही है </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 13:10:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में विराजमान युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का चतुर्मास कलश निष्ठापन क्रिया के बाद रविवार 26 अक्टूबर को मांगलिक भवन में भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह किया जाएगा। सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230; सनावद। नगर में विराजमान युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में विराजमान युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का चतुर्मास कलश निष्ठापन क्रिया के बाद रविवार 26 अक्टूबर को मांगलिक भवन में भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर में विराजमान युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का चतुर्मास कलश निष्ठापन क्रिया के बाद रविवार 26 अक्टूबर को मांगलिक भवन में भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह किया जाएगा।</p>
<p>सन्मति जैन काका ने बताया कि पिछले 4 माह से निरंतर धर्म प्रभावना के रहे युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का वर्षायोग निष्ठापन क्रिया संपन्न करने के बाद रविवार को पिच्छिका परिवर्तन समारोह मांगलिक भवन में आयोजित किया जाएगा। जिसके तहत अनेक कार्यकम भी किए जाएंगे। मुनि सेवा समिति अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रशांत जैन बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत बड़ा जैन मंदिर से पिच्छिका का जुलूस निकाला जाएगा। जो मांगलिक भवन में समाप्त होगा। जिसके अंतर्गत दीप प्रज्वलन ,मंगलाचरण, स्वागत नृत्य, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, नवीन पिच्छिका एवं पुरानी पिच्छिका आदान प्रदान की जाएगी एवं जिन श्रावक श्रेष्ठियों ने चातुर्मास कलश लिए थे। उन्हें कलश भी वितरित किए जाएंगे। समाज अध्यक्ष मनोज जैन, आशीष झांझरी ने सभी समाजजनों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।</p>
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		<title>कलाकुंज में मनाया गया भगवान महावीर का निर्वाण कल्याणक : श्रद्धालुओं ने भजन, आरती और दीप प्रज्वलन से भगवान के उपदेशों को किया स्मरण  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 05:01:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कलाकुंज स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव से मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। कलाकुंज स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कलाकुंज स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव से मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> कलाकुंज स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़े ही श्रद्धा उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक अवसर पर विशेष पूजा, अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भजन, आरती और दीप प्रज्वलन के माध्यम से भगवान के उपदेशों को स्मरण किया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों ने भक्ति नृत्य और धार्मिक प्रस्तुतियां दीं।</p>
<p>जिससे पूरा वातावरण मंगलमय बन गया। मंदिर प्रबंधन समिति ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया। समिति द्वारा आए हुए सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी एवं जलपान की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम के अंत में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक पर सामूहिक मंगल पाठ एवं मोक्ष गीतों का आयोजन हुआ। इस अवसर पर कलाकुंज एवं अवधपुरी जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया : आचार्यश्री ने आपदा से मुक्ति से बचाव के उपाय बताए  </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Jul 2025 10:04:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आत्मा की रक्षा, इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें। साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करें। यह प्रेरणादायी वाणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी। टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने जीवन में आपदा और कष्ट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आत्मा की रक्षा, इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें। साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करें। यह प्रेरणादायी वाणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी। <span style="color: #ff0000">टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने जीवन में आपदा और कष्ट क्यों आते है, इससे बचने के क्या उपाय हैं, कर्माे का क्या प्रभाव शरीर आत्मा पर होता है, अहिंसा , सत्य धर्म का जीवन में क्या महत्व है? इसकी प्रवचन में विवेचना की। संसारी प्राणी को आपदा या कष्ट से निराशा होती है और निराशा दूर करने की वह खोज करता है रोग बीमारी की आपदा डॉक्टर से, चोरी होने पर पुलिस की मदद लेता है। वर्तमान में गरीबी दरिद्रता भी आपदा कष्ट है। यह देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की।</p>
<p>राजेश पंचोलिया ने कहा कि आचार्य श्री ने प्रवचन में प्रबोधन में बताया श्री आदिनाथ भगवान से लेकर श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों ने कष्ट आपदा से दूर होने के लिए धर्म का उपाय बताया है। धर्म उपदेश को सुनकर, धारण कर ग्रहण करना चाहिए। जिस प्रकार धन उपार्जन करने के लिए आप मेहनत करते हैं पसीना बहाते है ,गर्मी और कष्ट भी महसूस नहीं होता है, उसी प्रकार धर्म धारण करते समय संयम और तप से कष्ट नहीं होता है।</p>
<p><strong>धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है </strong></p>
<p>संत आत्मा के कल्याण के लिए संयम धारण करते हैं। आचार्य श्री ने 148 कर्मों की चर्चा कर बताया कि जिस प्रकार इंजीनियर मकान बनाता हैं उसी प्रकार निर्माण ,नाम ओर आयु कर्म शरीर को निर्धारित करते हैं संसार में जन्म मरण से छुटकारे का उपाय धर्म से प्राप्त होता हैं जीवन में अहिंसा का महत्व है राग द्वेष विषय भोगों से आत्म धर्म को हिंसा से बचाने का पुरुषार्थ करना चाहिए। इसका उपाय बताया कि कछुआ जिस प्रकार संकट आने पर शरीर के अंगों को संकुचित नियंत्रित कर शरीर को कठोर बनाता हैं। उसी प्रकार आपको भी 5 इंद्रियों को संकुचित और नियंत्रित कर तप संयम से आत्मा की रक्षा करना चाहिए। धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है जीवन में प्राप्त तीर्थंकर कुल से जीवन को उच्च बनाकर मानव जीवन सफल करे</p>
<p><strong>पुण्यवान व्यक्ति को आपदा, विपदा नहीं आती</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी के प्रवचन हुए। आपने अमीर गंज को धन धान्य और पुण्य से अमीर बताया। इसी पुण्य के कारण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का चातुर्मास टोंक समाज को मिला है। उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म का पुरुषार्थ करो सर्वाेच्च गुणों की संपदा युक्त मानव जीवन बनाना चाहिए। गुणों की संपदा में उदारता ,दानशीलता, करुणा, संवेदना ,सहानुभूति की भावना होना चाहिए। पुण्यवान व्यक्ति को आपदा, विपदा नहीं आती है। भाग्य रूठने से ओर पुण्य कमजोर होने से संचित धन भी नष्ट हो जाता है।दान तन,मन और धन से किया जाता हैं। नदी देती हैं तो पानी मीठा होता हैं सागर समुद्र लेता है। इस कारण उसका पानी खारा होता हैं और नाला पानी का संग्रह करता हैं उसका पानी सड़ांध देता हैं इसी प्रकार आपको भी धर्म कार्य में दान देना चाहिए। दान और त्याग में त्याग बड़ा होता हैं।</p>
<p>धर्म प्रचारक प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन अहिंसा सर्किल जिनालय के श्रावक व श्राविकाओं ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। इस मौके पर झाड़ोल से पधारे कलाकार भाई गोरधन के भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं अष्टद्रव्य समर्पित किया एवं सुनील सर्राफ ने पूजन व्यवस्था में सहयोग किया। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को कूलर व ऐसी का त्याग देकर नियम दिलाया। आचार्य श्री संघ के आहार के चौके लगाने के लिए बाहर के नगरों से काफी भक्त पधार रहे हैं। टोंक सहित इंदौर, पारसोला, निवाई के चौके लगे हैं। कोलकाता वालांे को आचार्य श्री का आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का मार्गदर्शन किया प्राप्त </strong></p>
<p>गुरुवर दोपहर को टोंक विधायक पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैन नसिया आमीररगंज पधारे। वहां आदिनाथ जिनालय में श्रीफल भेंटकर दर्शन किए। आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर अनेक विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर आशीर्वाद लिया एवं आचार्य श्री ससंघ की दिनचर्या से बहुत प्रभावित हुए। समाज के लोगों ने उनको 24 घंटे में एक बार आहार व जल ग्रहण करने पर वो भी विधि पूर्वक ओर अनेक चर्या के बारे में बताया। इससे पायलट बहुत प्रभावित हुए। आचार्य श्री ने उनको पुस्तक आचार्य शांतिसागर जी महाराज के जीवनी की प्रदान की।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह भी रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, कमल आंडरा, राजेश सर्राफ, राजेश बोरदा, धर्मचंद पासरोटियां, सुरेश मलारना, सुरेश संघी, कमल सर्राफ, रोनित श्यामपुरा, नीटू छामुनिया, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, एंजे दाखिया, अंशुल आरटी, अम्मू छामुनिया, विनायक कल्ली, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है: आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने माता-पिता को मोटीवेशन गुरु बताया </title>
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		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 09:43:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है। हमें यह सोचना कि एक सफल व्यक्ति जो है, वह हम में से ही है। सफल होने के लिए हमेशा अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की , [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री निर्भय सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है। हमें यह सोचना कि एक सफल व्यक्ति जो है, वह हम में से ही है। सफल होने के लिए हमेशा अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की , यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री निर्भय सागरजी महाराज ने धर्मसमा को संबोधित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है। हमें यह सोचना कि एक सफल व्यक्ति जो है, वह हम में से ही है। सफल होने के लिए हमेशा अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने परिवार में माता-पिता को मोटीवेशन गुरु बताते हुए कहा कि वह सबसे अधिक मोटीवेट करते हैं। उन्होंने ही शिक्षा दी है। उन्होंने ही ज्ञान दिया है। दोस्त एक गलत प्रेरणा दे सकता है लेकिन, भाई-भाई को, बहन-बहन को हमेशा सही प्रेरणा देंगे। पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में आचार्य श्री ने कहा कि बुरी आदतें समाज में कुरीति है। जिसने समाज परिवार और देश को बर्बाद कर दिया है। जिनकी जिंदगी बोतल से शुरू होती है और बोतल पर ही अंत होती है। शराब के दुस्परिणामों का जिक्र करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि सबसे ज्यादा गरीबी का कारण नशा है। एक व्यक्ति इसकी लत में बर्बाद हो जाता है और परिवार को तबाह कर देता है। उन्होंने समाज को इसके दुष्परिणाम से बचने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p><strong>मुनियों ने समाज को प्रेरक मार्गदर्शन प्रदान किया</strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। रविवार को मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं क्षुल्लक श्रीदत्त सागर महाराज व ब्रह्मचारिणी लवली दीदी के गृहस्थ जीवन के परिजनों ने आचार्य श्री से आशीर्वाद ग्रहण किया। धर्मसमा में मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज, मुनि पदमदत्त सागर महाराज, मुनि वृषभदत्त सागर महाराज, क्षुल्लक चन्ददत्त सागर महाराज एवं श्रीदत्तसागर महाराज विराजमान हैं। जिनके माध्यम से अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही है। रविवारीय प्रवचन सभा के दौरान मध्याह्न सत्र में आचार्य श्री ने समाज को प्रेरक मार्गदर्शन प्रदान किया। इस मौके पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टड़या, महामंत्री आकाश जैन, मंदिर प्रबंधक अजय जैन गंगचारी, मनोज जैन बबीना, मंत्री कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजूरिया, सतीश नजा, कपूरचंद लागौन, शीलचंद अनौरा, अखिलेश जैन गदयाना, अनिल जैन अंचल, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, शादीलाल जैन एडवोकेट, अमित प्रिय जैन, धन्यकुमार जैन, अनंत सराफ, ब्रहमचारिणी सीमा जैन, मीना जैन के अतिरिक्त अनिता मोदी, ममता जैन, मोहनी, वर्षा सतभैया आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>सिर्फ धन का बंटवारा ही नहीं प्रेम का बंटवारा भी करें : आचार्यश्री निर्भयसागर के प्रवचनों में प्रेम और सद्भाव पर जोर  </title>
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		<pubDate>Tue, 01 Jul 2025 13:16:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री निर्भयसागर जी ने अटामंदिर में धर्मसभा में प्रेम और सद्भाव के अलावा वात्सल्य की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त की। इस अवसर पर नगर के समाजजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। प्रेम वासना के कारण बदनाम हुआ है, वात्सल्य के कारण नहीं। प्रेम वात्सल्य आत्मा का स्वभाव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री निर्भयसागर जी ने अटामंदिर में धर्मसभा में प्रेम और सद्भाव के अलावा वात्सल्य की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त की। इस अवसर पर नगर के समाजजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> प्रेम वासना के कारण बदनाम हुआ है, वात्सल्य के कारण नहीं। प्रेम वात्सल्य आत्मा का स्वभाव है, गुण है, संपत्ति है। जहां प्रेम होता है वहां श्रद्धा अनुकंपा, करुणा, दया, शांति, संवेग और प्रसम भाव होता है। ढाई अक्षर प्रेम के हैं, ढाई अक्षर आत्मा के हैं और ढाई अक्षर मोक्ष के हैं, प्रेम के ढाई अक्षर से रिश्ता चलता है। आत्मा के ढाई अक्षर से जीवन चलता है और मोक्ष मार्ग मिलता है। मोक्ष के ढाई अक्षर से सच्चा सुख मिलता है। यह उद्गार आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने अटा जैनमंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा कि प्रेम के बिना मुक्ति नहीं मिलती। जब बच्चा जन्म लेता है, तब उसे मां से प्रेम होता है। थोड़ा बडे़ होने पर उसे अपनी मित्र मंडली से प्रेम होता है फिर उसे अपनी पुस्तकों से प्रेम होता है। उसके बाद धन से प्रेम, उसके बाद पत्नी से, उसके बाद परिवार, उसके बाद समाज से, उसके बाद गुरुओं से और उसके बाद अपनी आत्मा से। आत्मा से प्रेम जागने पर व्यक्ति राग-द्वेष मोह से विरक्त होकर मुक्ति के मार्ग पर बढ़ता है और एक दिन मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि धन का वंटवारा तो सभी करते है पर प्रेम का बंटवारा भी करना चाहिए।</p>
<p>जिससे घर, परिवार, समाज और देश के झगड़े मिट जाएं। प्रेम का बंधन अदृश्य होता है लेकिन, बड़ा मजबूत होता है। जिसके हृदय में प्रेम होता है। वह परोपकार, दया, करुणा, प्रसंशा की भावना से ओतप्रोत होता है। प्रवचन से पूर्व पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण एवं द्वीप प्रज्वलन हुआ। प्रवचन के बाद महरौनी समाज के निवेदन पर आचार्यश्री ने अपने दो शिष्यों के महरौनी में चातुर्मास करने की घोषणा की। जिसे सुनकर सभी महरौनी वासी खुशी से झूम उठे। नगर में आचार्य श्री के सत्संग पदार्पण से जैन समाज में धार्मिक माहौल बना हुआ है। जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन ने बताया कि 6 जुलाई रविवार को अपराह्न 1 बजे आचार्य संघ की मंगल चातुर्मास कलश स्थापना कार्यक्रम अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्रपाल मंदिर से होगा।</p>
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		<title>जैन मिलन भगवानगंज शाखा का शपथ ग्रहण समारोह संपन्नः यह वर्ष तीर्थ रक्षा के रूप में मनाएंगे-कमलेंद्र जैन  </title>
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		<pubDate>Thu, 03 Apr 2025 11:44:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय जैन मिलन के अंतर्गत महिला जैन मिलन भगवानगंज शाखा की नई नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ। पुराने पदाधिकारियों को धन्यवाद और नए पदाधिकारियों को बधाई एवं मार्गदर्शन दिया। पढ़िए सागर से मनीष विद्यार्थी की विशेष रिपोर्ट सागर। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 के अंतर्गत महिला जैन मिलन भगवानगंज शाखा का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारतीय जैन मिलन के अंतर्गत महिला जैन मिलन भगवानगंज शाखा की नई नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ। पुराने पदाधिकारियों को धन्यवाद और नए पदाधिकारियों को बधाई एवं मार्गदर्शन दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सागर से मनीष विद्यार्थी की विशेष रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 के अंतर्गत महिला जैन मिलन भगवानगंज शाखा का 2025-26 सत्र का नई नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह आदर्श गार्डन, मोती नगर से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेन्द्र जैन, विशिष्ट अतिथि वीर अरुण चंदेरिया क्षेत्र अध्यक्ष, वीरांगना कविता जैन दमोह क्षेत्रीय मंत्री, वीर संजय जैन शक्कर क्षेत्र कार्यकारी अध्यक्ष, वीर प्रमोद जैन भाईजी कोषाध्यक्ष, वीर मनीष विद्यार्थी क्षेत्र प्रचार मंत्री, राष्ट्रीय संयोजक ऋषभ जैन स्टेशन मास्टर दमोह, राष्ट्रीय संयोजक वीरांगना अनीता जैन, संगीता जैन चंदेरिया, क्षेत्रीय चेयरपर्सन मंजू सतभैया मंचासीन रहे एवं शाखा संरक्षिका वीरांगना अनुश्री शैलेंद्र जैन के मार्गदर्शन एवं शाखा संस्थापिका वीरांगना ममता जैन के कुशल नेतृत्व एवं अध्यक्ष वीरांगना सुनीता पडवार के सहयोग द्वारा संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>कार्यक्रम महावीर प्रार्थना एवं दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुआ</strong></p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत महावीर प्रार्थना एवं दीप प्रज्वलन से हुई। मंगलाचरण कुमारी काव्या जैन ने किया। महिला जैन मिलन के पदाधिकारी द्वारा मंचासीन अतिथियों का सम्मान अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह से किया गया। कार्यक्रम में नारी शक्ति पर एक बहुत ही सुंदर प्रस्तुति वीरांगना सुनीता, सपना, शिखा और अमृता द्वारा प्रस्तुत की।</p>
<p><strong>नए सदस्यों का सम्मान किया</strong></p>
<p>नए सदस्यों का सम्मान शाखा में जुड़ने वाले नए सदस्यों का सम्मान भी तिलक और माला द्वारा किया गया। वीरांगना प्रीति द्वारा विधान आदि में अष्ट द्रव्य ले जाने हेतु थालियां दान स्वरूप शाखा को प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन वीरांगना ममता जैन एवं सुनीता पडवार और आभार पूर्व अध्यक्ष वीरांगना अलका दिवाकर ने माना।</p>
<p><strong>पदाधिकारियों को धन्यवाद, बधाई व मार्गदर्शन दिया</strong></p>
<p>सभी मंचासीन अतिथियों ने अपने उद्बोधन में पुराने पदाधिकारियों को धन्यवाद और नए पदाधिकारियों को बधाई एवं मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमलेंन्द्र जैन ने कहा भारतीय जैन मिलन ने पिछले वर्ष भगवान महावीर को समर्पित किया था, इस वर्ष तीर्थ रक्षा वर्ष के रूप में तीर्थ क्षेत्रों के लिए भारतीय जैन मिलन पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित करेगा। सभी नवनिर्वाचित अध्यक्ष वीरांगना सपना जैन,मंत्री वीरांगना दीपशिखा, कोषाध्यक्ष वीरांगना साक्षी जैन को पदाधिकारी को बधाई दी। कार्यक्रम में नगर की सुभाष नगर शाखा, मुख्य शाखा, नगर शाखा, कटरा शाखा, गोपालगंज शाखा, बड़ा बाजार शाखा सभी महिला एवं पुरुष शाखाओं से अध्यक्ष मंत्री एवं कोषाध्यक्ष उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई </strong></p>
<p>अंत में शपथ विधि अधिकारी वीर अरुण चंदेरिया द्वारा नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई गई। राष्ट्रीय संयोजिका वीरांगना ममता जैन का जन्मदिन भी सभी की उपस्थिति में बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में वीर विमल सतभैया, प्रदीप प्रभावना, सुरेंद्र बहरोल, वीरांगना चेतना मिल्की सपना श्रुति वंदना श्वेता सुधा जागृति नीलम ज्योति मनी मनीषा निशी संगीता मीनू आदि सभी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>64 रिद्धि महामंडल विधान में दिगंबर महिला महासमिति की महिलाओं ने लिया धर्म लाभ: उज्जैन के नमक मंडी जिनालय में हुआ कार्यक्रम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 06:19:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उज्जैन दिगंबर महिला महासमिति ने 64 रिद्धि महामंडल विधान किया। इसमें बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं की भागीदारी रही। कार्यक्रम में झंडावंदन, कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन, जिनवाणी विराजमान किए गए। पूरी भक्ति भाव से दिगंबर महिला महासमिति ने विधान पूरे किए। उज्जैन से पढ़िए यह खबर&#8230; उज्जैन। स्थानीय दिगंबर जैन समाज की प्रमुख दानवीर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>उज्जैन दिगंबर महिला महासमिति ने 64 रिद्धि महामंडल विधान किया। इसमें बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं की भागीदारी रही। कार्यक्रम में झंडावंदन, कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन, जिनवाणी विराजमान किए गए। पूरी भक्ति भाव से दिगंबर महिला महासमिति ने विधान पूरे किए। <span style="color: #ff0000">उज्जैन से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उज्जैन।</strong> स्थानीय दिगंबर जैन समाज की प्रमुख दानवीर अध्यक्ष दिगंबर महिला महासमिति साधना बोहरा सचिन अल्पना बाकलीवाल और कोषाध्यक्ष अर्चना छाबड़ा के सानिध्य में नमक मंडी जिनालय में 64 रिद्धि महामंडल विधान का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज की महिलाओं ने भक्तिभाव से प्रभु की आराधना की। सौधर्म इंद्राणी स्नेह लता सोगानी ने झंडा वंदन किया। रंजना चाय वाले ने चार कलश स्थापना की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76784" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0002.jpg" alt="" width="740" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0002.jpg 740w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0002-139x300.jpg 139w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0002-474x1024.jpg 474w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0002-710x1536.jpg 710w" sizes="(max-width: 740px) 100vw, 740px" />मुख्य कलश का लाभ पूजा सोगानी, सरिता छाबड़ा प्रतिभा, निशा गंगवाल, पूनम आकृति बोहरा, नीलम पांडे ने लिया। जिनवाणी विराजमान कर्ता परिवार नीतू ज्योति चना परमल वाले, मोनिका बोहरा, संगीता सोगानी, मेघा सोगानी रहीं। अष्टप्रतिहार विराजमान कर्ता स्नेह लता विनायक रेनू रावत, प्रभा बोहरा, सुमन बोहरा, दीप्ति गंगवाल, रिचा वैद्य, ममता कासलीवाल, अनीता झांझरी थीं। दीप प्रज्वलन कर्ता सारिका गंगवाल ने किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76785" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001.jpg" alt="" width="1600" height="738" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001-300x138.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001-1024x472.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001-768x354.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001-1536x708.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001-990x457.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250317-WA0001-1320x609.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />विधान की स्वर लहरिया नीता धवल दीदी ने बिखेरी। साथी श्वेता जैन और ऋचा जैन द्वारा प्रश्नोत्तरी भी बीच-बीच में पूछी गई। इसमें स्वल्पाहार के साथ भोजन का लाभ दिगंबर महिला महासमिति की महिलाओं ने लिया। समाज की वरिष्ठ 115 महिलाओं ने यह विधान किया। पूरे विधान के द्रव्य प्रदाता सारिका सुपर फार्मा परिवार था।</p>
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		<title>मित्रता में समता भाव आता हैः चिंतामणि रत्न समान मानव पर्याय का प्रतिक्षण अनमोल है-मुनि संयत सागरजी  </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 06:55:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मानव जीवन दुर्लभ चिंता मणि रत्न के समान है। बड़े भाग्य से नर तन पाया मनुष्य कुल पर्याय मिली। श्री जिनवर के दर्शन करने जिनवाणी की राह मिली। मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अनमोल है। सदैव सकारात्मक रहते हुए निर्मल परिणामों को बनाए रखे। संसार के प्राणी मात्र से मैत्री भाव बनाए रखे। उक्त उदगार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मानव जीवन दुर्लभ चिंता मणि रत्न के समान है। बड़े भाग्य से नर तन पाया मनुष्य कुल पर्याय मिली। श्री जिनवर के दर्शन करने जिनवाणी की राह मिली। मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अनमोल है। सदैव सकारात्मक रहते हुए निर्मल परिणामों को बनाए रखे। संसार के प्राणी मात्र से मैत्री भाव बनाए रखे। उक्त उदगार मुनिश्री संयत सागरजी ने आर के पुरम, त्रिकाल चौबीसी, जैन मंदिर में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुवे व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कोटा़ से पारस जैन, पार्श्वमणि की पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा (राज)</strong> मुनिश्री संयत सागरजी ने आर के पुरम, त्रिकाल चौबीसी, जैन मंदिर में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुवे कहा-‘मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अनमोल है। सदैव सकारात्मक रहते हुए निर्मल परिणामों को बनाए रखे। संसार के प्राणी मात्र से मैत्री भाव बनाए रखे।‘ मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन महामंत्री अनुज गोधा कोषाध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने बताया कि धर्मसभा में मंगल दीप प्रज्वलन जे के जैन, मनोज जयसवाल, लोकेश जैन, प्रकाश जैन, पदम जैन, सागरचंद जैन ने किया।</p>
<p><strong>भजन सुनाकर भाव-विभोर किया</strong></p>
<p>धर्म सभा में मंगलाचरण पाठ पारस जैन ने मुनि आए नगरी हमारे पावन हो गई ये धरा रे स्वरचित भजन अपनी सुमधुर आवाज में सुनाकर कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर हो झूमने को मजबूर कर दिया। कार्याध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया कि धर्म सभा का संचालन पंडित रविन्द्र शास्त्री ने कर चार चांद लगा दिए।</p>
<p><strong>संसार में सदैव समीचिन मित्रता रखें </strong></p>
<p>मुनिश्री ने आगे कहा कि जीवन में बंधु बहुत बनाएं परंतु ऐसा बंधु बनाओ जिससे संसार बंधन से मुक्ति मिल जाए। संसार परिभ्रमण का मुख्य कारण राग, द्वेष, क्रोध, लोभ, मोह, माया के बंधन ही है। संसार में सदैव समीचिन मित्रता रखें। मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों से नित्य रहे दिन दुखी जीवों पर मेरे उर से करुणा स्तोत्र बहे। ये भावना सदैव अंतर्मन में रखनी चाहिए। आगे मुनिश्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुवे कहा कि वर्तमान समय में जितने भी आपके मित्र बंधु है एक दिन सभी शत्रु हो जाएंगे क्योंकि मानव जीवन में इच्छाएं व आकांक्षाएं अनंत है वो कभी पूरी नहीं हो सकती।</p>
<p><strong>मित्रता में समता भाव आता है</strong></p>
<p>जीवन में समीचिन मित्रता में समता भाव आ जाता है। जीवन में संत के सानिध्य से मानव भले हो संत न बने परन्तु संतोषी तो बन ही जाता है। कहा भी गया है जब आए संतोष धन सब धन धुरी समान। संसार का जितना भी वैभव, संपति, धन, दौलत, सोना, चांदी सब धूल के समान दिखाई देने लग जाते है। जब संतोष रूपी धन अंतर्मन में समाता है।</p>
<p><strong>मुनिश्री आर के पुरम आए</strong></p>
<p>मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि आचार्य 108 विशुद्ध सागरजी महाराज के शिष्य मुनिवर 108 संयत सागरजी ससंघ का दोपहर 2.30 बजे रिद्धि-सिद्धि नगर के लिए मंगल विहार हो गया। मुनिश्री ससंघ रावतभाटा से मंगल पद विहार करते हुवे आर के पुरम जैन मंदिर आए।</p>
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