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	<title>lamp lighting &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा की : आचार्य श्री संपूर्ण राष्ट्र को नैतिकता, संस्कार और आत्मसंयम की दिशा दिखाई </title>
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		<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 07:57:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के तत्वावधान में परेड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और संयम भाव से परिपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230; अंबाह। दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के तत्वावधान में परेड स्थित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के तत्वावधान में परेड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और संयम भाव से परिपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के तत्वावधान में परेड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और संयम भाव से परिपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाजजनों ने आचार्य श्री के चरणों में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके महान त्याग, तप, ज्ञान और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण को नमन किया। पूरा वातावरण भक्ति, साधना और आत्मचिंतन की भावना से ओतप्रोत दिखाई दिया। सभा की शुरुआत आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण से हुई। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया। जिससे मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। समाजसेवी महेश जैन विकल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि युगदृष्टा आचार्य थे। उन्होंने अपने कठोर तप, साधना और ओजस्वी विचारों से न केवल जैन समाज, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र को नैतिकता, संस्कार और आत्मसंयम की दिशा दिखाई।</p>
<p><strong>राष्ट्रभाषा हिंदी और संस्कृत के संरक्षण पर जोर दिया</strong></p>
<p>विनयांजलि सभा में आचार्य श्री के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए संध्या अनिल जैन खरगोला ने कहा कि आचार्य श्री ने अपने संपूर्ण जीवन में अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और आत्म संयम को व्यवहार में उतारकर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया। उनका सादगीपूर्ण जीवन, अल्पाहार, कठोर तपस्या और अनुशासन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी और संस्कृत के संरक्षण व प्रचार पर विशेष बल दिया तथा शिक्षा, संस्कार और संस्कृति को समाज की रीढ़ बताया।</p>
<p><strong>अपरिग्रह के मार्ग पर चलने से मानव जीवन सार्थक</strong></p>
<p>वीरेंद्र जैन शिक्षक ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज का संदेश था कि &#8216;परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है।&#8217; उन्होंने सिखाया कि यदि व्यक्ति अपने विचार, आचरण और व्यवहार को शुद्ध कर ले तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त हो जाते हैं। उनका मानना था कि उपभोग नहीं, संयम ही सच्चा सुख देता है और अपरिग्रह के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन सार्थक बनता है। गौ-संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी के विचारों को उन्होंने केवल उपदेश तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वयं के जीवन में उतारकर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>प्रेरक वचनों और उपदेशों का वाचन किया</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री की स्मृति में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद उनके प्रेरक वचनों और उपदेशों का वाचन किया गया, जिन्हें सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विमल जैन राजू ने कहा कि आचार्य श्री का समाधि दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची विजय बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि इंद्रियों पर विजय पाने में है।</p>
<p><strong>त्याग, तप और सेवा का जीवंत उदाहरण</strong></p>
<p>दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के अध्यक्ष संतोष जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन त्याग, तप और सेवा का जीवंत उदाहरण है। उनके आदर्शों पर चलकर ही हम उन्हें सच्ची विनयांजलि अर्पित कर सकते हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आचार्य श्री के संदेशों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाएं।</p>
<p>सभा के अंत में समाजजनों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे आचार्य विद्यासागर महाराज के बताए मार्ग—अहिंसा, संयम, सादगी और सेवा पर चलेंगे तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। इस अवसर पर दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप के पदाधिकारी, जैन समाज के वरिष्ठजन, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रही। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ। विनयांजलि सभा श्रद्धा, साधना और समर्पण का सशक्त संदेश देकर सभी के मन में आचार्य श्री की स्मृतियों को और अधिक सजीव कर गई।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस: मुनि श्री योगसागरजी के सानिध्य में आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति हुई  </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 08:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। जो सुरेशकुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया दोतडा वाला परिवार द्वारा किया गया। उन्हें महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण स्वरा जैन ने किया। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पूजन विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से किया गया। इस अनुपम बेला में पूरा पंडाल भक्तों से भरा हुआ था। इन मांगलिक क्षणों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रकल्प गौशाला, इंडिया नहीं भारत बोलो, स्वालंबन के लिए हथकरघा इंडिया नहीं भारत बोलो को नाटकीय रूपांतरण के माध्यम से दर्शाया गया। इस अनुपम बेला में दूरदराज से भक्त भी पधारे। साथ ही मीडिया भी मौजूद रही। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं रूपचंद लाडवा ने भी महाराज श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री साधना के हिमालय थे </strong></p>
<p>इसके बाद गणिनी आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बताया आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी श्रद्धा विद्धमान है वे कहते हैं बीमार है आचार्य श्री का नाम लेंगे ठीक हो जाएंगे। मुनिश्री निर्भीक सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री साधना के हिमालय थे, जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। एक गीत के माध्यम से कहा- ‘गुरु मात पिता गुरु बंधु सखा तेरे चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।’ मुनिश्री निरामय सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री भेद विज्ञानी अध्यात्म के सरोवर थे। मुनिश्री निर्माेह सागरजी महाराज ने कहा कि हमारे जो भी थे वही थे, जो कुछ छोड़ा था। उन्हीं के लिए छोड़ा था। उनकी पूर्ति नहीं हो सकती। गुरु मिट्टी से सोना बनाते हैं। गुरु के प्रति सच्ची आस्था श्रद्धा है। गुरु कही भी बिठा सकता। गुरु हमारे लिए जीवंत भगवान थे।</p>
<p><strong>आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है</strong></p>
<p>मुनि श्री निरोग सागरजी महाराज ने आचार्य श्री ने कहा कि जीवन लग जाए तभी भी हम गुणमाला नहीं लिख पाएंगे। आचार्य श्री शारीरिक दृष्टि से हमारे बीच नहीं लेकिन, आत्मा से हमेशा जुड़े रहेंगे। आचार्य श्री ने अपनी चर्या में दोष नहीं लगे और किसी के दोष नहीं दिखे। मुनि श्री योगसागरजी महाराज ने कहा कि मुझे हर्ष हो रहा है कि आचार्य परंपरा में साधु बना, मैं नहीं सोच सकता था। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है। जब में गृहस्थ अवस्था में था, 5 साल का था तब उन्होंने मुझे नमोकर मंत्र सिखाया। इसीलिए आचार्य श्री 65 साल से मेरे धर्म गुरु हैं। गुरु आज्ञा बड़ी चीज है इसी से नैया पार होगी।</p>
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		<title>नववर्ष की पूर्व संध्या पर पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा रखे तैयार : आचार्यश्री ने प्रवचन में नए साल में संकल्प लेने की बात कही  </title>
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		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 14:28:20 +0000</pubDate>
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<p><strong> आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने नववर्ष के पूर्व दिवस अपना मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है। इस वर्ष में कितना दान किया, कितना धर्म किया, कितना पाप किया, कितना पुण्य किया। इन सभी कार्यों की एक सूची बनानी है। जो अच्छे कार्य इस वर्ष में करने बाकी रह गए हैं। <span style="color: #ff0000">केकड़ी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी</strong>। आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने नववर्ष के पूर्व दिवस अपना मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है। इस वर्ष में कितना दान किया, कितना धर्म किया, कितना पाप किया, कितना पुण्य किया। इन सभी कार्यों की एक सूची बनानी है। जो अच्छे कार्य इस वर्ष में करने बाकी रह गए हैं। अगले वर्ष में इसे निश्चित रूप से पूर्ण करना है। उन्होंने कहा जो गलत कार्य पाप का बंध इस वर्ष में हो गया है, उसके लिए पश्चाताप करके नियम लेना है कि नववर्ष में ऐसा कभी नहीं हो। नववर्ष के एक दिन पूर्व आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि डॉक्टर को अपने मरीज के लिए, माताऋपिता को अपने बच्चों के लिए और गुरु को अपने शिष्यों के भविष्य के लिए निर्दयी होना पड़ता है। गुस्सा अपनों को सुधारने के लिए किया जाता है। मरीज पर गुस्सा करके निर्दयी बनकर उसका इलाज करने के बाद वही मरीज उस डॉक्टर को भगवान मानने लग जाता है। दूध और पानी का उदाहरण देते हुए मुनिराज ने बताया कि पानी और दूध दोनांे को गरम करो, दूध उबलकर बाहर निकलता रहता है और समाप्त हो जाता है जबकि, पानी गर्म होकर भी बाहर नहीं निकलता है। गुस्सा मानव प्रवृति है परंतु पानी की तरह हो ज्यादा उफनकर अपना अस्तित्व समाप्त नहीं करना चाहिए।</p>
<p><strong>सांयकालीन कार्यक्रम में महाआरती की </strong></p>
<p>समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन (मावा) वालो ने बताया कि आनंदयात्रा के पश्चात आचार्यश्री द्वारा प्रश्नमंच का आयोजन किया गया तथा महाआरती की गई। प्रातःकालीन जिनाभिषेक,नित्यनियम पूजा, शांतिधारा का आयोजन आचार्यश्री के सानिध्य में किया गया। भगवान नेमिनाथ की शांतिधारा का पुण्यार्जन ज्ञानचंद सुनीलकुमार जैन ज्वैलर्स ने प्राप्त किया।</p>
<p><strong> चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट</strong></p>
<p>आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन भागचंद ज्ञानचंद जैन, कुमार विनय कुमार सोनू, मोनू सावर परिवार ने किया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हगामीलाल हेमराज जैन बड़गांव वालों ने प्राप्त किया। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट राजेश कुमार कमलेश कुमार मनोहरपुरा वालों ने किया।</p>
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		<title>प्रेम वाटिका में पल्लीवाल जैन मेला का भव्य आयोजन : क्षमावाणी पर्व, त्यागीवृत्ति सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा मेला </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Sep 2025 10:36:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा (प०द०म०), बोडला, आगरा द्वारा 21 सितम्बर 2025 को प्रेम वाटिका में पल्लीवाल जैन मेला का आयोजन किया गया। मेले में क्षमावाणी पर्व, त्यागीवृत्ति सम्मान, प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार, खेलकूद प्रतियोगिता, मेडिकल जांच शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा (प०द०म०), बोडला, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा (प०द०म०), बोडला, आगरा द्वारा 21 सितम्बर 2025 को प्रेम वाटिका में पल्लीवाल जैन मेला का आयोजन किया गया। मेले में क्षमावाणी पर्व, त्यागीवृत्ति सम्मान, प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार, खेलकूद प्रतियोगिता, मेडिकल जांच शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा (प०द०म०), बोडला, आगरा द्वारा प्रेम वाटिका में 21 सितंबर 2025, रविवार को पल्लीवाल जैन मेला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. एस. पी. सिंह बघेल (पशु पालन, मत्स्य एवं डेरी विकास मंत्री, भारत सरकार) और राष्ट्रीय अध्यक्ष त्रिलोक चन्द्र जैन उपस्थित रहे।</p>
<p>ध्वजारोहण श्री कालीचरन जैन और श्री निर्मल कुमार जैन (जैन एण्ड संस) द्वारा किया गया। खेलकूद उद्घाटन श्री रूप किशोर जैन और सुशील जैन ने किया। मेला उद्घाटन श्री राजेश जैन (पूर्व शाखा मंत्री) द्वारा हुआ।</p>
<p>श्रीजी चित्र अनावरण श्री त्रिलोक चन्द्र जैन और अमित जैन (अध्यक्ष राष्ट्रीय महासभा) द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन श्री पारस चन्द जैन (राष्ट्रीय महामंत्री, अ.भा.प. जैन महासभा) ने किया। त्यागीवृत्ति सम्मान श्री धर्मेन्द्र जैन और श्रीमती बबिता जैन को प्रदान किया गया। प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार श्री राजेश जैन (कैनरा बैंक) द्वारा वितरित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद पुरस्कार श्री कुलदीप जैन और पूनम जैन द्वारा प्रस्तुत किए गए। मेडिकल जांच शिविर का आयोजन सोनू जैन (किरावली वाले) द्वारा किया गया।</p>
<p>मंच संचालन मुकेश चन्द जैन भगत (मेला संयोजक), एकता जैन (मंत्री महिला शाखा) और विवेक जैन (शाखा मंत्री) ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमोद कुमार जैन द्वारा की गई।</p>
<p>विशिष्ट अतिथि के रूप में पारसचन्द्र जैन (राष्ट्रीय महामंत्री), भागचन्द जैन (राष्ट्रीय अर्थमंत्री), पलाश जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा मण्डल श्री रविन्द्र कुमार जैन, हेमा, श्री निर्मल कुमार जैन (अलमारी) सहित अन्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p>सैकड़ों समाजजनों और महिला मण्डल की भागीदारी से मेले का रंग और भी समृद्ध हुआ। अध्यक्ष जी ने सामूहिक वात्सल्य भोज के साथ सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।</p>
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		<title>प्रेम वाटिका में पल्लीवाल जैन मेला का भव्य आयोजन : क्षमावाणी पर्व, त्यागीवृत्ति सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा मेला </title>
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		<pubDate>Sun, 21 Sep 2025 13:56:21 +0000</pubDate>
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<p><strong>अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा (प०द०म०), बोडला, आगरा द्वारा 21 सितम्बर 2025 को प्रेम वाटिका में पल्लीवाल जैन मेला का आयोजन किया गया। मेले में क्षमावाणी पर्व, त्यागीवृत्ति सम्मान, प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार, खेलकूद प्रतियोगिता, मेडिकल जांच शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा (प०द०म०), बोडला, आगरा द्वारा प्रेम वाटिका में 21 सितंबर 2025, रविवार को पल्लीवाल जैन मेला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. एस. पी. सिंह बघेल (पशु पालन, मत्स्य एवं डेरी विकास मंत्री, भारत सरकार) और राष्ट्रीय अध्यक्ष त्रिलोक चन्द्र जैन उपस्थित रहे।</p>
<p>ध्वजारोहण श्री कालीचरन जैन और श्री निर्मल कुमार जैन (जैन एण्ड संस) द्वारा किया गया। खेलकूद उद्घाटन श्री रूप किशोर जैन और सुशील जैन ने किया। मेला उद्घाटन श्री राजेश जैन (पूर्व शाखा मंत्री) द्वारा हुआ।</p>
<p>श्रीजी चित्र अनावरण श्री त्रिलोक चन्द्र जैन और अमित जैन (अध्यक्ष राष्ट्रीय महासभा) द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन श्री पारस चन्द जैन (राष्ट्रीय महामंत्री, अ.भा.प. जैन महासभा) ने किया। त्यागीवृत्ति सम्मान श्री धर्मेन्द्र जैन और श्रीमती बबिता जैन को प्रदान किया गया। प्रतिभा प्रोत्साहन पुरस्कार श्री राजेश जैन (कैनरा बैंक) द्वारा वितरित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद पुरस्कार श्री कुलदीप जैन और पूनम जैन द्वारा प्रस्तुत किए गए। मेडिकल जांच शिविर का आयोजन सोनू जैन (किरावली वाले) द्वारा किया गया।</p>
<p>मंच संचालन मुकेश चन्द जैन भगत (मेला संयोजक), एकता जैन (मंत्री महिला शाखा) और विवेक जैन (शाखा मंत्री) ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमोद कुमार जैन द्वारा की गई</p>
<p>विशिष्ट अतिथि के रूप में पारसचन्द्र जैन (राष्ट्रीय महामंत्री), भागचन्द जैन (राष्ट्रीय अर्थमंत्री), पलाश जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा मण्डल श्री रविन्द्र कुमार जैन, हेमा, श्री निर्मल कुमार जैन (अलमारी) सहित अन्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p>सैकड़ों समाजजनों और महिला मण्डल की भागीदारी से मेले का रंग और भी समृद्ध हुआ। अध्यक्ष जी ने सामूहिक वात्सल्य भोज के साथ सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।</p>
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		<title>अपने दैनिक जीवन में धर्म ध्यान का आचरण करें:  मुनिश्री ससंघ ने कुचामन किले का किया अवलोकन </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Mar 2025 08:23:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रणम्य सागरजी महाराज ने कुचामनसिटी में श्रावकों के आग्रह पर संघ सहित ऐतिहासिक किले का अवलोकन किया। उन्होंने यहां पर सभी जैन समाज के श्रावकों को अर्हंध्यान योग का अभ्यास भी कराया। नागौरी मंदिर परिसर में संत निवास में प्रवचन हुए। यहां आचार्यश्री विद्यासागरजी के चित्र का अनावरण किया गया। पढ़िए कुचामन सिटी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री प्रणम्य सागरजी महाराज ने कुचामनसिटी में श्रावकों के आग्रह पर संघ सहित ऐतिहासिक किले का अवलोकन किया। उन्होंने यहां पर सभी जैन समाज के श्रावकों को अर्हंध्यान योग का अभ्यास भी कराया। नागौरी मंदिर परिसर में संत निवास में प्रवचन हुए। यहां आचार्यश्री विद्यासागरजी के चित्र का अनावरण किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुचामन सिटी से सुभाष पहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामनसिटी।</strong> आचार्यश्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रणम्य सागरजी महाराज, मुनि श्री विश्वाक्ष सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री अनुनय सागर के ससंघ के सानिध्य में नागौरी मंदिर में कलशाभिषेक शांतिधारा के बाद श्रावकों के आग्रह पर संघ सहित कुचामन किले का अवलोकन किया। मुनि श्री ने बताया कि वैसे तो किले सब जगह देखे, लेकिन कुचामन किले में कुछ विशिष्ट विशेषताएं देखने कोे मिली। महाराज श्री ने किले पर उपस्थित सर्वजन को अर्हंध्यान योग का अभ्यास कराया।</p>
<p><strong>इन्होंने अर्जित किया सौभाग्य</strong><br />
अध्यक्ष विनोद झांझरी ने बताया कि नागौरी मंदिर परिसर में स्थित चिन्मय संत निवास में महाराज श्री के प्रवचन से पूर्व आचार्यश्री का चित्र अनावरण करने, दीप प्रज्वलन करने एवं महाराज श्री को जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य श्राविका सुशीला पाटनी परिवार (आरके मार्बल) को मिला और मुनि श्री के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य संतोषकुमार, प्रवीणकुमार, विपिनकुमार पहाड़िया परिवार को मिला।</p>
<p><strong>भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम</strong><br />
मुनि श्री ने अपने प्रवचन में बताया कि भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत पड़ा, जिस पर सभी भरतवासियो को गर्व होना चाहिए। राजा-रजवाड़े जिस प्रकार अपने राज्य की सुरक्षा के लिए परकोटेे बनातेे थे। उसी तरह सर्वजन को अपने दैनिक जीवन में धर्म ध्यान का आचरण करना चाहिए। सकल दिगंबर जैन समाज सीकर, मकराना, पांचवां, कुकनवाली के श्रावकों ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट किया। साथ ही कुचामन जैन समाज की सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने महाराजश्री को कुछ दिन के प्रवास के लिए श्रीफल भेंट किया। पूर्व संध्या पर मुनिश्री एवं प्रतिष्ठाचार्य शुभम भैया और पंडित अजय शास्त्री ने वर्धमान स्तोत्र पाठ की आरती 64 दीपों से करवाई। इसमें सभी श्रावक-श्राविकाओं ने भक्तिभाव से सहभागिता की। मंच संचालन प्रतिष्ठाचार्य शुभम भैयाजी और अशोक झांझरी ने किया।</p>
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