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	<title>kota श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ की भव्य अगवानी : भव्य शोभायात्रा में मुनिराज का जयघोष, कोटा का आसमान हुआ गर्वित  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 14:37:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री 108 विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री 108 समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री 108योगसागरजी महाराज ससंघ का कोटा नगर में मंगल प्रवेश रविवार हुआ। कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; कोटा। आचार्य श्री 108 विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री 108 समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री 108 विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री 108 समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री 108योगसागरजी महाराज ससंघ का कोटा नगर में मंगल प्रवेश रविवार हुआ। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> आचार्य श्री 108 विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री 108 समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री 108योगसागरजी महाराज ससंघ का कोटा नगर में मंगल प्रवेश रविवार हुआ। सकल दिगम्बर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रकाश बज़ ने बताया कि प्रातः साढ़े 7 बजे आरोग्य नगर स्थित जैन जन उपयोगी भवन से भव्य शोभायात्रा एलआईसी बिल्डिंग, अहिंसा सर्किल होते हुए आरके पुरम स्थित श्री दिगंबर जैन त्रिकाल चौबीसी मंदिर पहुंची। कार्याध्यक्ष मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि शोभायात्रा में घोड़े, बग्घी, ढोल, बैंड, हाड़ौती का परंपरागत कच्ची घोड़ी नृत्य, ध्वज पताका लिए हुए बालक-बालिका, महिला मंडल, युवा मंडल, दिव्य घोष आदि मुनि संघ के चले। पुरुष वर्ग श्वेत एवं महिला मंडल केसरिया परिधान में नजर आए।</p>
<p><strong>राणपुर से कोटा पहुंचा मुनि संघ</strong></p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज समिति के महामंत्री पदम बड़ला ने बताया कि मुनि संघ की आहार चर्या राणपुर में हुई तथा 2 बजे कोटा के लिए संघ का विहार प्रारंभ हुआ।</p>
<p>बंधा-धर्मपुरा सड़क मार्ग से 12 किमी विहार कर संघ आरोग्य नगर स्थित जैन जन उपयोगी भवन पहुंचा। जहाँ संतों की आगवानी सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष की अगुवाई में समिति के पदाधिकारियों ने की। विहार के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे। विहार में प्रकाश बज़, जेके जैन,मनोज आदिनाथ,पदम बडला, मनोज जैसवाल, संजय निर्माण, जम्बू सर्राफ़, नरेश वेद, नवीन दौराया आदि साथ रहे।</p>
<p><strong>गौवंश संरक्षण के लिए ठोस कानून की आवश्यकता: मुनिश्री </strong></p>
<p>विहार मार्ग में सभी संतों ने संचालक संदीप अग्रवाल सराफ और गौवंश विशेषज्ञ डॉ.महेंद्र गर्ग के आग्रह पर एक गौशाला में निर्मित गौ परिक्रमा का अवलोकन किया। इस दौरान मुनिश्री योगसागरजी महाराज ने कहा कि सरकार को गौ हत्या के खिलाफ सख्त कानून बनाकर गौ संरक्षण कराना चाहिए। इस विषय पर बातें अधिक और काम कम हो रहा हैं। गौ प्रेमी निरंतर गौशालाओं के माध्यम से गौवंशों का संरक्षण कर रहे हैं किंतु, सरकार द्वारा ठोस कदम उठाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है। साथ ही गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात कही।</p>
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		<title>मृत्यु की सच्चाई को जानना ही वैराग्य का प्रथम सोपान: आचार्यश्री प्रज्ञासागर जी का प्रज्ञा अनुपम चातुर्मास का हुआ मंगल कलश स्थापना  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 06:10:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रयणसार की 53वीं गाथा के आधार पर रविवार को आयोजित प्रवचन में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने कहा कि सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि दोनों को समान 24 घंटे मिलते हैं, किंतु अंतर इस बात में है कि कौन अपने समय का उपयोग कैसे करता है। कोटा से पढ़िए, यह खबर&#8230; कोटा। रयणसार की 53वीं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रयणसार की 53वीं गाथा के आधार पर रविवार को आयोजित प्रवचन में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने कहा कि सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि दोनों को समान 24 घंटे मिलते हैं, किंतु अंतर इस बात में है कि कौन अपने समय का उपयोग कैसे करता है। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> रयणसार की 53वीं गाथा के आधार पर रविवार को आयोजित प्रवचन में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने कहा कि सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि दोनों को समान 24 घंटे मिलते हैं, किंतु अंतर इस बात में है कि कौन अपने समय का उपयोग कैसे करता है। सूर्य का उदय और अस्त सबके लिए समान हैं, किंतु सम्यक दृष्टि वाला व्यक्ति संसार में रहते हुए भी आत्मज्ञान और मोक्ष की ओर अग्रसर होता है, जबकि मिथ्या दृष्टि आकांक्षा, कलह और दुर्भावना में समय नष्ट कर देता है। आचार्य श्री ने कहा कि मृत्यु हर क्षण समीप आ रही है। इसे जो देख लेता है वही वैरागी है और जो नहीं देख पाता, वही अनुरागी है। उन्होंने कहा, ‘मनुष्य अनेक बार दूसरों की मृत्यु देखता है, परंतु उससे जीवन की सच्चाई नहीं सीखता। यह निश्चित है कि एक दिन हमारा नंबर भी आएगा। मृत्यु शाश्वत है, और उसका स्मरण ही आत्म जागृति का कारण बनता है।’ इस अवसर पर मंदिर समिति अध्यक्ष पवन ठौला एवं महामंत्री पारस लुंग्या ने बताया कि प्रवचन के पश्चात प्रज्ञा अनुपम चातुर्मास-2025 के आशीर्वाद मंगल कलश की स्थापना महावीर नगर विस्तार योजना स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में की गई। कलश स्थापना का सौभाग्य रमेशचंद, नवीनकुमार, अनिलकुमार जैन मस्त दौराया परिवार को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट नरेंद्र, मुकेश, प्रदीप खटोड परिवार ने किया।</p>
<p><strong>स्थापना विधि मंत्रोच्चारण, श्रद्धा और पवित्रता के साथ हुई</strong></p>
<p>गुरु आस्था चेयरमेन यतिश जैन खेडावाला ने बताया कि यह स्थापना विधि मंत्रोच्चारण, श्रद्धा और पवित्रता के साथ हुई। जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आचार्य श्री ने कहा कि आशीर्वाद मंगल कलश केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि कल्पवृक्ष की भांति फल देने वाला, आत्मशुद्धि और जीवन उत्थान का प्रतीक है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का मंगल प्रवेश हुआ </strong></p>
<p>11 नवंबर को महावीर विस्तार योजना दिगंबर जैन मंदिर से प्रातः 7.30 बजे मंगल विहार करके आचार्यश्री का आरके पुरम स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर (त्रिकाल चौबीसी) में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। आरके पुरम मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि सिंहद्वार का शिलान्यास 12 नवंबर को मंदिर परिसर में प्रातः 8 बजे आचार्यश्री के कर-कमलों एवं ससंघ सान्निध्य में होगा।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहे उपस्थित </strong></p>
<p>इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पवन ठौला, महामंत्री पारस लुंग्या, सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज, जेके जैन, विमल वर्धमान, महामंत्री पदम बडला, मनोज जैसवाल, अनिल ठोरा, उपाध्यक्ष मुकेश कोटिया, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश जैन, अनुराग टोंग्या, निर्मल सेठी, मुकेश खटोंड, राहुल ऐरन पारस जैन ष्पार्श्वमणिष् पत्रकार सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा के बाद मां जिनवाणी को सिर पर रखकर महावीर नगर विस्तार योजना जैन मंदिर तक लाने का सौभाग्य पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार आरके पुरम को मिला।</p>
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		<title>जिंदगी एक किराए का घर है यह बात सार्वभौमिक सत्य है :  दुर्लभ मानव पर्याय में मिली है ये चिंतामणि रत्न से कम नहीं है </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/special_article_of_paras_jain_parshwmani_from_kota/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Nov 2024 10:22:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हजारों साल की ये कायनात खूबसूरत प्राकृतिक विरासतों के बीच हमें जो ये चौरासी लाख योनियों में घूमने के बाद दुर्लभ मानव पर्याय में मिली है। ये चिंतामणि रत्न से कम नहीं है। मात्र 70 से 80 वर्ष के लिए मिली है। इसका एक-एक पल क्षण-क्षण कीमती है। दोबारा मिलना बहुत कठिन है। पढ़िए कोटा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हजारों साल की ये कायनात खूबसूरत प्राकृतिक विरासतों के बीच हमें जो ये चौरासी लाख योनियों में घूमने के बाद दुर्लभ मानव पर्याय में मिली है। ये चिंतामणि रत्न से कम नहीं है। मात्र 70 से 80 वर्ष के लिए मिली है। इसका एक-एक पल क्षण-क्षण कीमती है। दोबारा मिलना बहुत कठिन है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कोटा से पारस जैन पार्श्वमणि का विशेष लेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>हजारों साल की ये कायनात खूबसूरत प्राकृतिक विरासतों के बीच हमें जो ये चौरासी लाख योनियों में घूमने के बाद दुर्लभ मानव पर्याय में मिली है। ये चिंतामणि रत्न से कम नहीं है। मात्र 70 से 80 वर्ष के लिए मिली है। इसका एक-एक पल क्षण-क्षण कीमती है। दोबारा मिलना बहुत कठिन है। जीवन में जब भी मन में अहंकार आए तो ये विचार कर लेना चाहिए कि कितने कम समय के लिए जीवन मिला है। 500 सालों तक तो रहना नहीं है। हमसे बड़े-बड़े महारथी इस धरती पर आए और चले भी गए हमको उनके नाम तक मालूम नहीं है।</p>
<p>जीवन पानी की बूंद से ज्यादा नहीं हैं सात धातुओं से मिलकर ये शरीर बना है। किसी ने कितना खूबसूरत लिखा है मत कर तू अभिमान रे बंदे मत तू अभिमान। एक गीत के बोल हैं &#8220;एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल&#8221;। एक भजन की खूबसूरत लाइन है &#8220;सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आयेगी न सोना काम आएगा ना चांदी आयेगी। छोटा-सा तू कितने बड़े अरमान हैं मिट्टी का तू सोने के सब सामान हैं तेरे मिट्टी की काया मिट्टी में जिस दिन समाएगी न सोना काम आएगा न चांदी आयेगी।&#8221;</p>
<p><strong>संसार की क्षण भंगुरता का साक्षात्कार बारीकी से हुआ</strong></p>
<p>मेरे पिताजी 16 अगस्त 2022 को ब्रेन पेरालिसिस बीमारी से ग्रसित हो गए। लगभग ढाई साल वे बीमारी से पीड़ित रहे। उस समय ने मुझे संसार की क्षण भंगुरता का साक्षात्कार बहुत ही बारीकी से करवाया। जब मानव इस दुनिया में आता है तो वो 3 से 5 किलो के बीच का वजन लेकर आता है। जब इस संसार से विदा होता है तब भी उसके फूल चुनते हैं गंगा नदी में अस्थियां प्रवाहित करते हैं तो उसका वजन भी लगभग बराबर होता है। जन्म और मृत्यु के बीच जो जीवन मिला होता है उसका हर पल हर दिन उत्सव, त्यौहार की तरह निकलना चाहिए। इंसान भरी मुट्ठी लेकर आता है और जब संसार से जाता है तब खाली हाथ जाता है। मात्र उसके साथ उसके कर्म ही जाते हैं एक तिनका भी साथ नहीं जाता। यही प्रकृति का नियम है।</p>
<p><strong>जीवन को अज्ञान रूपी अंधकार से सत्य के प्रकाश की ओर ले जाए वो ही सच्चे गुरु होते है</strong></p>
<p>जीवन में गुरु अवश्य बनाना चाहिए। जिनके जीवन में गुरु नहीं होता उनका जीवन शुरू नहीं होता। &#8220;गु&#8221; अर्थात अंधकार &#8220;रु&#8221; अर्थात् प्रकाश जो जीवन को अज्ञान रूपी अंधकार से सत्य के प्रकाश की ओर ले जाए वो ही सच्चे गुरु होते है। संसार में मानव पर्याय सांसारिक बंधनों से छुटकारा पाने के लिए मिलती है लेकिन मानव इस पर्याय में न जाने कैसे-कैसे कर्म का बंध बांध लेता है कि कर्मों के बंध युगों-युगों तक नहीं छूटते।</p>
<p><strong>संसार में किसी से मत डरो परंतु अपने कर्मों से अवश्य डरना चाहिए</strong></p>
<p>मानव पर्याय संसार शरीर और भोगों से वैराग्य धारण कर संयम तप त्याग और साधना करके मानव को महामानव, कंकर से शंकर, पाषाण से परमात्मा, नर से नारायण की यात्रा के लिए मिली है। संसार में हर कोई माफ कर सकता है परंतु कर्म कभी माफ नहीं करेगा वो तो मात्र इंसाफ करता है। संसार में किसी से मत डरो परंतु अपने कर्मों से अवश्य डरना चाहिए। यदि इस संसार में सुख चैन होता तो तीर्थंकर इतना सांसारिक वैभव होते हुए संसार शरीर और भोगों को छोड़कर वैराग्य धारण करके राजभवन से वन की ओर गमन क्यों करते। वो समझ गए संसार असार है प्रतिक्रिया मात्र है जो दोगे सो मिलेगा। जैसा बीज वैसा फल वाली कहावत चरितार्थ है। अंत में एक गीत की खूबसूरत लाइन याद आ रही है। जो बोएगा वही पाएगा तेरा किया आगे आयेगा जैसी करनी वैसी भरनी जैसी करनी वैसी भरनी।</p>
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		<title>धर्मनगर कोटा में आयोजन : मुनि श्री अप्रमित सागर जी का 13वां दीक्षा दिवस 8 को </title>
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		<pubDate>Sat, 02 Nov 2024 10:36:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ शताब्दी देशना चार्य आध्यात्म योगी पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के प्रज्ञावंत शिष्य, युवा हृदय सम्राट, आध्यात्मिक प्रबंधन के प्रवचनकार, श्रुतसंवेगी श्रमणरत्न मुनि श्री आदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ के मंगलमय सानिध्य में 8 नवंबर 2024, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। शताब्दी देशना चार्य आध्यात्म योगी पट्टाचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> शताब्दी देशना चार्य आध्यात्म योगी पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के प्रज्ञावंत शिष्य, युवा हृदय सम्राट, आध्यात्मिक प्रबंधन के प्रवचनकार, श्रुतसंवेगी श्रमणरत्न मुनि श्री आदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ के मंगलमय सानिध्य में 8 नवंबर 2024, शुक्रवार को मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> शताब्दी देशना चार्य आध्यात्म योगी पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के प्रज्ञावंत शिष्य, युवा हृदय सम्राट, आध्यात्मिक प्रबंधन के प्रवचनकार, श्रुतसंवेगी श्रमणरत्न मुनि श्रीआदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ के मंगलमय सानिध्य में 8 नवंबर 2024, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धर्म नगरी कोटा के उपनगर ऋद्धि सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में अध्यात्मिक विशुद्ध ज्ञान वर्षा योग समिति एवं सकल जैन समाज कोटा के तत्वावधान में परम पूज्य मुनि श्री अप्रमित सागर जी का दीक्षा दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69128" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0017.jpg" alt="" width="720" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0017.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0017-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0017-461x1024.jpg 461w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0017-691x1536.jpg 691w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" />निवेदक:</strong></p>
<p>श्री चंद्र प्रभ दिगंबर जैन मंदिर समिति, श्री पार्श्वनाथ दि जैन मंदिर (पार्श्वनाथ निलय) एवं सकल जैन समाज ऋद्धि सिद्धि नगर, कोटा</p>
<p><strong>विनीत:</strong></p>
<p>सकल दिगंबर जैन समाज समिति, कोटा</p>
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		<title>बैंकिंग क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अंजली को किया गया सम्मानित कड़ी मेहनत और कार्य के प्रति समर्पण के लिए परिवारजनों का मिला सहयोग </title>
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		<pubDate>Mon, 20 May 2024 02:30:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देव शास्त्र गुरु के परम भक्त व्यवहार कुशल प्रभाव शाली व्यक्तित्व के धनी प्रकाश चंद जैन &#8211; स्वर्गीय मीरा जैन दरा जिला कोटा की सुयोग्य प्रतिभावान पुत्री अंजली जैन श्रीमाल को बैंकिंग सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने, अभिनंदन कर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। पढि़ए पारस जैन पाश्र्वमणि की पूरी रिपोर्ट&#8230;. कोटा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देव शास्त्र गुरु के परम भक्त व्यवहार कुशल प्रभाव शाली व्यक्तित्व के धनी प्रकाश चंद जैन &#8211; स्वर्गीय मीरा जैन दरा जिला कोटा की सुयोग्य प्रतिभावान पुत्री अंजली जैन श्रीमाल को बैंकिंग सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने, अभिनंदन कर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढि़ए पारस जैन पाश्र्वमणि की पूरी रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> देव शास्त्र गुरु के परम भक्त व्यवहार कुशल प्रभाव शाली व्यक्तित्व के धनी प्रकाश चंद जैन &#8211; स्वर्गीय मीरा जैन दरा जिला कोटा की सुयोग्य प्रतिभावान पुत्री अंजली जैन श्रीमाल को बैंकिंग सेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने, अभिनंदन कर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कोटा के सभी शाखा प्रबंधक एवं अभिषेक सक्सेना जी उपस्थित हुए। विदित हो कि अंजली जैन का विवाह महावीर प्रसाद जैन सुलोचना जैन प्रताप नगर जयपुर के पुत्र मनोज कुमार जैन (अभियंता जेडीए जयपुर) से हर्षोल्लास के वातावरण में संपूर्ण हुई थी।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60850" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0005.jpg" alt="" width="269" height="308" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0005.jpg 269w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240520-WA0005-262x300.jpg 262w" sizes="(max-width: 269px) 100vw, 269px" />वर्तमान समय में आप आरकेपुरम एस बी आई बैंक की शाखा प्रबंधक के पद पर अपनी सेवाएं समर्पित कर रही हंै। आपने एक स्नेह भेंट में राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पाश्र्वमणि पत्रकार को बताया कि इस सम्मान के लिए लिए कड़ी मेहनत लगन और कार्य के प्रति समर्पण और माता पिता, सास-ससुर के आशीर्वाद तथा पति एवं बेटी का सहयोग का फल ही है। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू मयंक जैन आदि ने बधाई दी। अंजली जैन को सभी परिवारजनों के खूब बधाई दी। हम इनके उज्वल भविष्य की मंगलमय कामना वीर प्रभु से करते है।</p>
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		<title>व्यक्ति चला जाता है पर व्यक्तित्व रहता है सदैव: स्व. निर्मल कुमार सेठी के तृतीय पुण्य स्मृति दिवस पर भावपूर्ण श्रृद्धांजलि </title>
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		<pubDate>Sun, 28 Apr 2024 08:12:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देवशास्त्र गुरु के परम भक्त,व्यवहार कुशल, प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी सुप्रसिद्ध समाजसेवी कर्मयोगी प्राचीन तीर्थ जीर्णोधारक जैन समाज की आन &#8211; बान और शान महासभा के महास्तंभ परम श्रद्धेय स्व. श्री निर्मल कुमारसेठी साहब के तृतीय पुण्यस्मृति दिवस पर भाव पूर्ण श्रद्धा सुमन समर्पित करता हूं। आप संपूर्ण जैन समाज की अनमोल निधि थे ।नाम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देवशास्त्र गुरु के परम भक्त,व्यवहार कुशल, प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी सुप्रसिद्ध समाजसेवी कर्मयोगी प्राचीन तीर्थ जीर्णोधारक जैन समाज की आन &#8211; बान और शान महासभा के महास्तंभ परम श्रद्धेय स्व. श्री निर्मल कुमारसेठी साहब के तृतीय पुण्यस्मृति दिवस पर भाव पूर्ण श्रद्धा सुमन समर्पित करता हूं। आप संपूर्ण जैन समाज की अनमोल निधि थे ।नाम निर्मल, चरित्र निर्मल और निर्मलता के धारी निर्मल कुमार सेठी को शत-शत नमन।<span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट ………. </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong>देवशास्त्र गुरु के परम भक्त,व्यवहार कुशल, प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी सुप्रसिद्ध समाजसेवी कर्मयोगी प्राचीन तीर्थ जीर्णोधारक जैन समाज की आन &#8211; बान और शान महासभा के महास्तंभ परम श्रद्धेय स्व. श्री निर्मल कुमारसेठी साहब के तृतीय पुण्यस्मृति दिवस पर भाव पूर्ण श्रद्धा सुमन समर्पित करता हूं। आप संपूर्ण जैन समाज की अनमोल निधि थे।आपने जीवन काल में जैन धर्म के प्राचीन तीर्थक्षेत्र, अतिशयक्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र इत्यादि की रक्षा सुरक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।आपके सुपुत्र पारस जैन की जब अकाल मृत्यु हुई थी ,उसके कुछ दिनों बाद जब मैनें आपको फोन किया था,तो आपने भरे हृदय से मुझसे कहा था ,कि एक पारस मेरा चला गया दूसरा पारस पार्श्वमणि मेरा कोटा में रहता है ,जो सम्पूर्ण भारत के जैन समाज के लिये किसी मणि से कम नहीं है।</p>
<p>उन्होंने जीवन भर मुझे पुत्र की तरह स्नेह, प्यार, प्रेम दिया था। हर महीने में दो बार आपका फोन आता था। आपकी वाणी सुनकर मेरा हृदय आपके प्रति श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता था।आपकी मंगल प्रेरणा से मैंने अपने जीवन के 31 वर्ष जैन पत्रकारिता के क्षेत्र में समर्पित किए है।विभिन्न साधु संतो की वाणी का खूब प्रचार प्रसार कर अलग-अलग समाचार पत्रों में कवरेज की। 31 वर्षो की कवरेज फाइल भी मेरे पास अवलोकनार्थ उपलब्ध है। आप एक बार घर आए और मेरी माता के हाथ का भोजन बड़े प्यार से स्वीकार किया था।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59627" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG_20240428_134152.jpg" alt="" width="576" height="575" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG_20240428_134152.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG_20240428_134152-300x300.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG_20240428_134152-150x150.jpg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG_20240428_134152-65x65.jpg 65w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" /> जैन समाज की युवा पीढ़ी आए आगे </strong></p>
<p>आपकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि आप जिस नगर गांव शहर में होते थे और यदि आपको किसी भी साधु के बारे में पता लगता कि अमुक मंदिर में संत विराजमान है तो आप तुरंत उनकी आहार चर्या हेतु निकल पड़ते थे। आपने कभी छोटे-बड़े साधु में भेदभाव नहीं किया। आपके शरीर का रोम- रोम देव शास्त्र गुरु प्राचीन तीर्थ क्षेत्र के जीर्णोद्धार को समर्पित रहा है ।एक बार दिल्ली रोहिणी निजी निवास पर आप मुझे ले गए थे ।पांच दिन आपके साथ रहने का अनुपम स्वर्णिम सुअवसर मुझे मिला।आप प्रातः काल जल्दी उठ जाते थे। मुझे साथ में घूमने ले जाते थे। उस समय आपका जो चिंतन आपकी सोच आपकी विचारधारा यही होती थी कि कैसे जैन धर्म दर्शन को बढ़ाया जाए, तीर्थ की रक्षा कैसे की जाए जैन समाज की युवा पीढ़ी कैसे आगे आए।जैन समाज के प्रतिभावान बच्चे खूब तरक्की करे।यही सब चलता रहता था। प्रमुख जैन संतो के ब्रह्मचारियों से फोन करके साधु संतो के रत्नत्रय के बारे में जानकारी भी लेते रहते थे। व्यक्ति चला जाता है व्यक्तित्व सदैव रहता है आज स्व. निर्मल कुमार सेठी हमारे बीच नहीं है परंतु उनका विराट व्यक्तित्व उनकी सोच विचारधारा हमारे बीच अवश्य है,हम उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर उनके सपनों को साकार करने का सार्थक प्रयास करेंगे । दिनांक 27 अप्रैल 2024 को उनकी पावन तृतीय पुण्यतिथि पर मैं उनके पावन चरणों में नमन वंदन करता हूं।</p>
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