<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>King Shrenik &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/king-shrenik/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Tue, 20 Jan 2026 10:08:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>King Shrenik &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>जब वैराग्य का मार्ग चुने तो वापस न लौटे: विदिशा में मुनिश्री के प्रवचनों से समाजजनों को मिल रही मंगल देशना  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/once_you_choose_the_path_of_renunciation_do_not_turn_back/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/once_you_choose_the_path_of_renunciation_do_not_turn_back/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 10:08:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[King Shrenik]]></category>
		<category><![CDATA[King Varisena]]></category>
		<category><![CDATA[Monastic Community]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Nissim Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhav Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Pushpadal]]></category>
		<category><![CDATA[Queen Chelna]]></category>
		<category><![CDATA[Question and Answer Program]]></category>
		<category><![CDATA[Samyak Darshan]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Station Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पुष्पडाल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रश्नमंच कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[महारानी चेलना]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री संभवसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिसंघ]]></category>
		<category><![CDATA[राजा वारिसेन]]></category>
		<category><![CDATA[राजा श्रैणिक]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सम्यक् दर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[स्टेशन जैन मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98549</guid>

					<description><![CDATA[बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। बेटा जब वैराग्य की ओर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजगृही नगरी में राजा श्रैणिक और महारानी चेलना के पुत्र राजा वारिसेन को वैराग्य होता है और वह राजमहल के साथ अपनी बत्तीस सुंदर रानियों को छोड़कर वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। समय बीतता है एक दिन मुनिराज वारिसेन का पुनः राजगृही नगरी में आगमन होता है और वह आहारचर्या के लिए निकलते हैं। वह बढ़े चले जा रहे है और उनका पड़गाहन अपने बाल सखा मित्र पुष्पडाल, जिसके विवाह को अभी एक ही दिन हुआ था, वहां होता है। उसकी पत्नी एकांक्षी थी। आहारचर्या के उपरांत पुष्पडाल मुनिराज का कमंडल अपने हाथ में लिए वन की ओर छोड़ने जाते हैं।</p>
<p><strong>पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं</strong></p>
<p>रास्ते में वारिसेन अपने मित्र को संसार की असारता का वर्णन से ओतप्रोत कथानक सुनाते हैं। जिससे प्रभावित होकर पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं। धीरे-धीरे 12 वर्ष बीत जाते हैं लेकिन, उनके मन में पत्नी के प्रति राग की कणिका विद्यमान रहती है। जिसे गुरु वारिसेन मुनिराज ताड़ लेते हैं और उनके स्थितिकरण के लिये वह राजागृही में राजा श्रैणिक और माता चेलना को संदेश भेजते हैं कि मैं राजमहल की ओर आ रहा हूं। आप सभी रानिओं को अच्छे से तैयार करके महल में हम दोनों मुनिराजों का पड़गाहन करें। यह संदेश सुनकर राजा श्रैणिक और माता चेलना के मन में संशय होता है कि कंही उनका बेटा मोक्षमार्ग से पथ भ्रष्ट तो नहीं हो गया? मन में उठते प्रश्नों के साथ दो चौकी लगाते हैं।</p>
<p><strong>नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है</strong></p>
<p>पूरा राजमहल दोनों मुनिराज का पड़गाहन करता है और नवधाभक्ति के साथ उनसे बैठने का अनुरोध करते हैं। मुनिराज वारिसेन जैसे ही काष्ट की चौकी पर बैठते हैं तो माता चेलना के मन में जो प्रश्न उठ रहे थे, उसका समाधान मिल जाता है। दूसरी स्वर्ण की चौकी पर साथी मुनिराज पुष्पडाल को इशारा किया और वह उस चौकी पर बैठते हैं नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है। सभी 32 रानियां एवं राजा श्रैणिक एवं रानी चेलना भी आहार देती है और आहार के उपरांत दोनों मुनिराज वापस लौटते हैं। इस पूरी घटना से पुष्पडाल मन ही मन सोचते है कि वारिसेन ने उन 32 रानियों की ओर एक नजर उठाकर भी नहीं देखा, वह समझ जाते हैं कि गुरु ने यह नाटक क्यों रचा? मेरे मन में जो अपनी पत्नी के प्रति राग की कणिका थी। उसका स्थितिकरण करने के लिये ही मेरे गुर यहां पर मुझे लेकर आए हैं और उनके मन में जो राग की कणिका आई थी वह समाप्त हो जाती है।</p>
<p><strong>तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसे बेटी को विदा करते समय प्रत्येक माता-पिता की यह भावना रहती है कि वह अपने घर-संसार में सुखी रहे। इसीलिए जब वह बेटी को विदा करता है तो वह कहता है कि अब तुम इस घर की ओर मत देखना, अब तुम्हारा घर तुम्हारी ससुराल है और सास-ससुर ही तुम्हारे माता-पिता हैं। उसी प्रकार जब बेटा वैराग्य की ओर जाता है तो माता-पिता उसे खूब समझाते हैं, फिर भी बेटा यदि नहीं मानता तो वह एक ही संदेश देते है कि अब तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना।</p>
<p><strong>ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज कहते है कि ‘सम्यक् दर्शन’ को सुरक्षित रखने के लिए कोई बहुत बड़ा पहाड़ नहीं तोडना पड़ता। यदि आपने दूसरों के दोषों पर मौन रखना शुरु कर दिया तो आप 101 प्रतिशत पास हो जाओगे। गुरुदेव हमेशा कहा करते थे कि आप लोगों को मोक्षमार्ग में मोक्षमार्गी की नकल करने की पूरी छूट है। ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है और स्वयं ही उसमें उत्तर लिखना है तथा खुद ही उसे चेक करके नंबर देना है। इस कार्य में पूरी ईमानदारी होना चाहिए। याद रखना कि कोई भी विद्यार्थी फेल नहीं होना चाहिए। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनिसंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। प्रातः 8.45 से प्रवचन के बाद प्रश्नमंच कार्यक्रम होता है। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कार दिया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/once_you_choose_the_path_of_renunciation_do_not_turn_back/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
