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	<title>Khandu Colony &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>5 से 7 जुलाई तक 35वां आचार्य पदारोहण बांसवाड़ा में : देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति से पुण्य अर्जित कर मनुष्य जीवन को सार्थक करें &#8211; आचार्य श्री वर्धमान सागर  </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 13:52:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस धर्म के अवसर को देखने के लिए बांसवाड़ा राजस्थान के अनेक नगर, मध्य प्रदेश, असम, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न नगरों से हजारों भक्त उपस्थित थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस धर्म के अवसर को देखने के लिए बांसवाड़ा राजस्थान के अनेक नगर, मध्य प्रदेश, असम, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न नगरों से हजारों भक्त उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के अशोक पाटनी, सुरेश पाटनी, कटारिया ग्रुप अहमदाबाद के सौभाग्य मल कटारिया, राकेश सेठी कोलकाता, दिनेश खोड़निया सागवाड़ा सहित हजारों भक्त इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
<p><strong>निकाली गई शोभायात्रा</strong></p>
<p>दिन की शुरुआत 1008 श्री श्रेयांश नाथ भगवान के अभिषेक बाद श्री जी की शांतिधारा का सौभाग्य आर के मार्बल ग्रुप के अशोक, सुरेश पाटनी परिवार, किशनगढ़ को प्राप्त हुआ। अन्य पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भी शांतिधारा की गई। इसके बाद सिंटेक्स गेट पर संघ के सभी 28 साधु आचार्य श्री अजीत सागर जी के शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की अगवानी हेतु उपस्थित हुए। इस अवसर पर सुबह से ही भक्तों का तांता स्वागत और अगवानी करने के लिए लगा था।मुनि हितेंद्र सागर जी सहित सभी साधुओं ने मुनि पुण्यसागर जी की अगवानी की। शोभायात्रा का समापन श्री श्रेयांसनाथ जिनालय में हुआ, जहां पर विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की चरणवंदना चरणाभिषेक पंचामृत द्रव्यों से की। इस के पश्चात संघ के सभी साधुओं ने आचार्य श्री की वन्दना की। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण आर के मार्बल ग्रुप के अशोक, सुरेश, सुशीला, तारिका पाटनी एवं परिवार के सदस्यों द्वारा किया गया। उनके साथ में बाहर से पधारे अतिथि सौभाग्यमल कटारिया अहमदाबाद, राकेश सेठी कोलकाता सहित सुरेश खोड़निया सागवाड़ा ,सुरेश सबलावत, वीणा दीदी, गज्जू भैया तथा आचार्य श्री के गृहस्थ अवस्था के भतीजे पारस पंचोलिया, अखिलेश जैन इंदौर ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन आरके मार्बल परिवार द्वारा किया गया। जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य सौभाग्य मलजी कटारिया अहमदाबाद को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>पुण्य का अर्जन करें</strong></p>
<p>श्रीमद् जैन धर्म की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि हमारा धर्म लक्ष्य लक्ष्मी वान है। हमारा आशय भौतिक लक्ष्मी से नहीं होकर केवल ज्ञान मोक्ष रूपी लक्ष्मी से है जो विनाश को प्राप्त नहीं होती। प्रथमाचार्य आचार्य शांति सागर जी की कृपा हुई कि उन्होंने लुप्त होते मुनि धर्म को संबल अपनी क्रियायो से दिया उन्होंने अपने जीवन को प्रयोगशाला बनाया। चारित्र के सभी अंगों का पालन किया। आज जो स्वतंत्र मुनियों का विहार हो रहा है। यह आचार्य शांति सागर जी की देन है। समाज सेठ अमृतलाल अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि आप लौकिक लोगों को परिवार के रिश्तेदारों से मिलने पर खुशी होती है। हम साधुओं को भी साधुओं से मिलने में प्रसन्नता होती है। आचार्य अजीत सागर जी के शिष्य मुनि पुण्य सागर जी अपने संघ सहित 17 वर्षों के बाद हमारे दर्शन चरण वंदना हेतु पधारे हैं आप संघ परंपरा के शिष्य मुनि है जब संघ के साधु मिलते हैं तब हृदय में प्रसन्नता होती है और मुनि श्री पुण्य सागर जी संघ की वृद्धि करके आए हैं स्वयं के साथ शिष्यों को भी दर्शन कराए हैं। आचार्य अजीत सागर जी ने हमें आचार्य पद का भार सौंपा। हर परिवार का मुखिया चाहता है कि परिवार से दूर सदस्य वापस परिवार में रहे ऐसे ही संघ नायक भी चाहते हैं कि उनकी परंपरा की उनके साधु साथ में रहे। अभी आचार्य शांति सागर जी महाराज का आचार्य शताब्दी महोत्सव की शुरुआत अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक चलेगी इस विशाल संघ सानिध्य में प्रभावना पूर्वक मनाने की हमारी भावना है। आज के शुभ अवसर पर यही आशीर्वाद हम देना चाहते हैं कि आप सभी देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति और श्रद्धा रखकर पुण्य का अर्जन करें पुण्य अर्जन करने से मनुष्य जीवन सार्थकता को प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>आचार्य श्री में अनुपम वात्सल्य</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया इंदौर, अक्षय डांगरा अनुसार आपके पूर्व मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुरु वर्धमान सागर जी के प्रति अपनी भावांजलि में बताया कि हमारे दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी का सानिध्य हमें केवल 3 वर्ष मिला किंतु हमारे दीर्घकालीन संयम दीक्षा अवधि में हमें आचार्य वर्धमान सागर जी का सहारा मिला आज उनके आशीर्वाद से हम चारित्र मार्ग है।आचार्य श्री के हम प्रतिदिन परोक्ष गुरु वंदना करते थे अब हमें साक्षात में गुरु वंदना करने का अवसर मिला। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी में अनुपम वात्सल्य है ,करुणा है ,प्रेम है ,ज्ञान है हमें उनका मार्गदर्शन हमेशा मिलता है गुरु की कृपा से अंधेरे में भी टकराने का डर नहीं लगता है, गुरु की कृपा से हमारी गाड़ी निरंतर चल रही है। पंडित हसमुख जी शास्त्री ने कहा कि गुरु का गुणानुवाद सुमेरु पर्वत के समान पत्ते रुपी कागज पर हो सारे विश्व के समुद्र की स्याही बना ली जाए और विश्व के वृक्षों की टहनी रूपी कलम से गुरु का गुणानुवाद नहीं कर सकते हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी एवम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन थांदला ,धरियावद, पारसोला,बांसवाड़ा सहित अन्य नगर की समाज ने की।पूजन आर्यिका श्री महायश मति माताजी और वीणा दीदी ने कराई। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 35 वा आचार्य पदारोहण बांसवाड़ा की बाहुबली कालोनी में 3 दिवसीय कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कमल सारगिया ने बताया कि आगामी जुलाई माह की 5 से 7 जुलाई आषाढ़ शुक्ल 2 दूज को 35 वा आचार्य पदारोहण विभिन्न कार्यक्रमो के साथ मनाया जाएगा। वैसे अंग्रेजी दिनांक अनुसार 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी 2 को आचार्य पद मिला। खांदू कालोनी समाज द्वारा 24 जून को विशेष गुणानुवाद सभा रखी गई हैं जिसमे श्रावकों के साथ साधुगण भी भावांजलि अर्पित करेंगे</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : देव, शास्त्र, गुरु, धर्म कल्पवृक्ष हैं, जिनवाणी कामधेनु है- आचार्य श्री वर्धमान सागर जी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jun 2024 12:43:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी खांदूकालोनी, बांसवाड़ा में संघ सहित विराजित हैं। आज की धर्मसभा में मंगल देशना में बताया कि वर्तमान में कर्मभूमि का काल चल रहा है, इसके पूर्व भोगभूमि थी भोगभूमि में कल्पवृक्ष होते थे। जिनसे इच्छा करने पर वांछित सामग्री मिल जाती थी। अब कर्मभूमि में पुरुषार्थ पूर्वक कार्य कर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी खांदूकालोनी, बांसवाड़ा में संघ सहित विराजित हैं। आज की धर्मसभा में मंगल देशना में बताया कि वर्तमान में कर्मभूमि का काल चल रहा है, इसके पूर्व भोगभूमि थी भोगभूमि में कल्पवृक्ष होते थे। जिनसे इच्छा करने पर वांछित सामग्री मिल जाती थी। अब कर्मभूमि में पुरुषार्थ पूर्वक कार्य कर्म करने से जरूरतें, आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी खांदूकालोनी, बांसवाड़ा में संघ सहित विराजित हैं। आज की धर्मसभा में मंगल देशना में बताया कि वर्तमान में कर्मभूमि का काल चल रहा है, इसके पूर्व भोगभूमि थी भोगभूमि में कल्पवृक्ष होते थे। जिनसे इच्छा करने पर वांछित सामग्री मिल जाती थी। अब कर्मभूमि में पुरुषार्थ पूर्वक कार्य कर्म करने से जरूरतें, आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। वर्तमान में देव, शास्त्र, गुरु, धर्म कल्पवृक्ष हैं। यह हमें शाश्वत सुख का मार्ग बताते हैं और शाश्वत सुख प्राप्त करने के बाद कोई भी इच्छा से नहीं रहती है। वर्तमान में भोग सामग्री की जरूरत शरीर को होती है, आत्मा को भोग सामग्री की जरूरत नहीं होती है। कल्पवृक्ष और कामधेनु गाय जिनेंद्र भगवान ने हमें जिनवाणी के रूप में दिया है।</p>
<p>जिनवाणी में स्तोत्र मंत्र णमोकार मंत्र भक्तामर महामंत्र है, जिससे हम श्रद्धा, विश्वास, विनय, आस्था से प्रार्थना करने पर हमारे रोग दूर और इच्छाओं की पूर्ति होती है। इसलिए धर्म रूपी जड़ को मजबूत रखना जरूरी है, तभी हम रत्नत्रय धर्म श्रद्धा से 7 राजू ऊपर सिद्धालय को प्राप्त कर सकते हैं। धर्म रूपी जड़ सम्यक दर्शन, श्रद्धा है। श्रद्धा विश्वास से हमें ऊंचाई प्राप्त होती है, वर्तमान में भगवान नहीं है किंतु भगवान के गुणों की स्थापना प्रतिमाओं में पंचकल्याणक के माध्यम से सूरी मंत्र देकर की गई है।भगवान का अभिषेक विनय और सावधानी से करना चाहिए भगवान से कलश टकराने से भगवान के गुणों में कमी आती है इसलिए सम्यक दर्शन कहां और किन से मिलता है, इसकी जानकारी जरूरी है। भगवान के दर्शन मात्र से सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है। हर कार्य को विधि पूर्वक श्रद्धा से करने से इच्छित वस्तु मिलती है। जैन धर्म का मूल णमोकार मंत्र हैं।</p>
<p><strong>बिना चारित्र संयम के हम मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या, समाज सेठ अमृत लाल अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि वर्तमान में अरिहंत भगवान और सिद्ध भगवान साक्षात नहीं है किंतु णमोकार मंत्र में जिनका हम गुणगान करते हैं, वह आचार्य, उपाध्याय और साधु परमेष्ठी वर्तमान में मौजूद है। हमें सभी साधुओं के प्रति श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए। णमोकार मंत्र में आप मंगल पाठ करते हैं साधु परमेष्ठी भी सबका मंगल चाहते हैं, उपदेश देकर मंगल करते हैं। साधु सर्वश्रेष्ठ हैं क्योंकि आचार्य उपाध्याय साधु परमेष्ठि से हमें चारित्र संयम प्राप्त होता है। बिना चारित्र संयम के हम मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते हैं। ढाई दीप में जितने भी क्षेत्र रहे, सभी जगह सिद्ध भगवान पाए जाते हैं। उनके कारण हर स्थान पावन- पवित्र हैं।</p>
<p>राजेश पंचोलिया और समाज प्रतिनिधि अक्षय डांगरा अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि आदिनाथ भगवान की स्तुति से भक्तामर पाठ की रचना हुई है। कोई सा भी स्रोत की रचना अखंड गले-गले तक भक्ति समाहित होने पर भक्ति और उत्साह से स्रोत की रचना होती है भक्तामर। राजा भोज और मानतुंग आचार्य की कहानी सभी जानते हैं। आचार्य श्री ने स्वयं की रक्षा के लिए भक्तामर की रचना नहीं की थी। उन्होंने मुनियों के सम्मान के लिए, जैन धर्म की संस्कृति के लिए भक्तामर की रचना की। इसलिए जैन स्तोत्र जिनवाणी पर हमारी अकाट्य श्रद्धा होना चाहिए। मंत्र स्तोत्र से हमारी आपदा, विपदा और रोगों से मुक्ति मिलती है। आप लोग डॉक्टर से रोगों का निदान कराते हैं उन्हें फीस देते हैं जिनेंद्र भगवान भी डॉक्टर के डॉक्टर हैं । भगवान को श्रद्धा, विश्वास भक्ति रूपी फीस से हमें मनोरथ की प्राप्ति होती है और जन्म मरण के रोग से निवारण होता है। पुण्यार्जक परिवार द्वारा भगवान की शांति धारा और आचार्य श्री को जिनवाणी भेंट कर चरण प्रक्षालन किए गए।</p>
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