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	<title>Jinwani Palki Yatra &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Jinwani Palki Yatra &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रुत पंचमी पर निकली माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा, जयघोषों से गूंजा छीपीटोला : आचार्य निर्भयसागर महाराज ने बताया जिनवाणी को आत्मकल्याण का पथप्रदर्शक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:09:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के छीपीटोला स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैसवाल जैन पंचायती मंदिर में श्रुत पंचमी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज के सानिध्य में माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई तथा धर्मसभा में जिनवाणी के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन हुए। पढ़िए शुभम जैन की यह रिपोर्ट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा के छीपीटोला स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैसवाल जैन पंचायती मंदिर में श्रुत पंचमी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज के सानिध्य में माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई तथा धर्मसभा में जिनवाणी के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शुभम जैन की यह रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> जैन धर्म के ज्ञान, स्वाध्याय और शास्त्र आराधना के महापर्व श्रुत पंचमी के अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैसवाल जैन पंचायती मंदिर, छीपीटोला में वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्रुत पंचमी महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।</p>
<p><strong>माँ जिनवाणी की निकली भव्य पालकी यात्रा</strong></p>
<p>महोत्सव के अंतर्गत प्रातःकाल माँ जिनवाणी को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। पालकी यात्रा जैन भवन से प्रारंभ होकर छीपीटोला बाजार, कीर्ति स्तंभ, पल्ला मार्केट, अरिहंत मार्केट तथा टंकी चौराहा स्थित जैन मंदिर होते हुए पुनः बड़े मंदिर जी पहुंची।</p>
<p>यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए और माँ जिनवाणी के जयघोषों से वातावरण को धर्ममय बना दिया। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पालकी यात्रा का स्वागत कर अपनी आस्था व्यक्त की।</p>
<p><strong>अभिषेक एवं शांतिधारा का हुआ आयोजन</strong></p>
<p>पालकी यात्रा के उपरांत मंदिर परिसर में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजन-अर्चन कर जिनवाणी माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा ज्ञान आराधना का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>धर्मसभा में मिला जिनवाणी का संदेश</strong></p>
<p>जैन भवन के प्रथम तल पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रवचन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। आचार्य श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिनवाणी आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग दिखाती है। स्वाध्याय और शास्त्र अध्ययन के माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि श्रुत पंचमी केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जिनवाणी को जीवन में उतारने का अवसर है।</p>
<p><strong>पाठशाला के बच्चों ने लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>इस अवसर पर छीपीटोला पाठशाला के बच्चों ने आचार्य श्री के चरणों का प्रक्षालन किया तथा शास्त्र भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। बच्चों की श्रद्धा और उत्साह ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा।</p>
<p><strong>धर्ममय वातावरण में सम्पन्न हुआ महोत्सव</strong></p>
<p>श्रुत पंचमी महापर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति, स्वाध्याय और जिनवाणी आराधना का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने धर्मलाभ प्राप्त करते हुए जिनवाणी के अध्ययन एवं संरक्षण का संकल्प लिया। आयोजन श्रद्धा, भक्ति और गरिमापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।</p>
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		<title>श्रुत पंचमी पर निकली माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हुआ सनावद : पोदनपुरम में रजतमय जिनवाणी का हुआ पंचामृत अभिषेक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:07:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[सनावद में दिगंबर जैन समाज ने श्रुत पंचमी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया। माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई, वहीं विभिन्न जिनालयों में विधान, पूजन एवं आराधना के कार्यक्रम आयोजित हुए। पढ़िए सन्मति जैन ‘काका’ की यह रिपोर्ट सनावद। दिगंबर जैन समाज द्वारा ज्ञान, स्वाध्याय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सनावद में दिगंबर जैन समाज ने श्रुत पंचमी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया। माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई, वहीं विभिन्न जिनालयों में विधान, पूजन एवं आराधना के कार्यक्रम आयोजित हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन ‘काका’ की यह रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> दिगंबर जैन समाज द्वारा ज्ञान, स्वाध्याय और शास्त्र आराधना के महापर्व श्रुत पंचमी को बड़े भक्तिभाव एवं उत्साह के साथ मनाया गया। नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए तथा माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा आकर्षण का केंद्र रही।</p>
<p><strong>श्रुत परंपरा का स्मरण</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी सन्मति जैन &#8216;काका&#8217; ने बताया कि जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर के उपदेशों को उनके गणधरों ने श्रवण कर सुरक्षित रखा। बाद में गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित चंद्रगुफा में आचार्य धरसेन से प्राप्त सैद्धांतिक देशना के आधार पर आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबलि ने ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन षट्खण्डागम ग्रंथ की रचना की। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाता है।</p>
<p><strong>माँ जिनवाणी की निकली भव्य पालकी यात्रा</strong></p>
<p>अचित्य जैन ने बताया कि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से माँ जिनवाणी को आकर्षक पालकी में विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए और जिनवाणी माता के जयघोषों से वातावरण धर्ममय बना दिया। नगर भ्रमण के बाद यात्रा पुनः मंदिर पहुंची, जहां सामूहिक जिनवाणी पूजन सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>विभिन्न मंदिरों में हुए धार्मिक आयोजन</strong></p>
<p>श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर में श्रुत स्कंध मंडल विधान आयोजित किया गया। वहीं पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शांतिनाथ विधान का आयोजन हुआ। इसके अलावा श्री मंदर जिनालय एवं महावीर जिनालय में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रुत पंचमी पर्व मनाया गया।</p>
<p><strong>शाम को हुई आरती</strong></p>
<p>दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों के बाद सायंकाल श्रीजी एवं माँ जिनवाणी की आरती की गई। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए नियमित स्वाध्याय एवं धर्म अध्ययन का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>पोदनपुरम में रजतमय जिनवाणी का अभिषेक</strong></p>
<p>नगर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित पोदनपुरम क्षेत्र में भी श्रुत पंचमी पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया गया। यहां परम पूज्य विदुषी आर्यिका प्रशांतमति माताजी द्वारा संकलित तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज द्वारा प्रतिष्ठित विश्व की अनूठी रजतमय माँ जिनवाणी का पंचामृत अभिषेक एवं पूजन सम्पन्न हुआ।</p>
<p>इस पुण्य कार्य का सौभाग्य वारिस जैन एवं संदीप जैन को प्राप्त हुआ। अभिषेक एवं पूजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और जिनवाणी माता की आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>समाजजनों की रही उल्लेखनीय सहभागिता</strong></p>
<p>इस अवसर पर महेंद्र मुशी, सुनील पावणा, मनोज जैन, विशाल सराफ, सरल जटाले, अभिजीत जैन, राजू जैन, हर्षित जैन, सुनील मास्टर साहब, कांतिलाल जैन, पुष्पेंद्र जैन, संजय जैन, सुधीर जैन, प्रीति जटाले, राजश्री जैन, पुष्पा जैन, गरिमा जैन, अंशिता जैन, विनीता बाकलीवाल, रेखा जैन, संगीता बाकलीवाल, नीलू जैन, मधु भूच, हीरामणी भूच, साधना जैन, सरोज जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p>श्रुत पंचमी महापर्व के माध्यम से समाज ने जिनवाणी के अध्ययन, संरक्षण और ज्ञान आराधना का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।</p>
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		<title>श्रुत पंचमी पर धामनोद में निकली भव्य जिनवाणी पालकी यात्रा, जगह-जगह हुई आरती : केसरिया साड़ियों में महिलाओं और पंचरंगी ध्वज लिए श्रावकों ने ज्ञान आराधना का दिया संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:57:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धामनोद में श्रुत पंचमी महापर्व पर जिनवाणी माता की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। नगरभर में श्रद्धालुओं ने पालकी की आरती उतारकर स्वागत किया। महिलाओं की विशेष सहभागिता, जिनवाणी पूजन और श्रुत पंचमी के महत्व पर हुए प्रवचनों ने आयोजन को धर्ममय बना दिया। पढ़िए यश जैन की यह रिपोर्ट धामनोद। श्रुत पंचमी महापर्व के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धामनोद में श्रुत पंचमी महापर्व पर जिनवाणी माता की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। नगरभर में श्रद्धालुओं ने पालकी की आरती उतारकर स्वागत किया। महिलाओं की विशेष सहभागिता, जिनवाणी पूजन और श्रुत पंचमी के महत्व पर हुए प्रवचनों ने आयोजन को धर्ममय बना दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यश जैन की यह रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> श्रुत पंचमी महापर्व के अवसर पर धामनोद में जिनवाणी माता की भव्य पालकी यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। नगर के विभिन्न मार्गों से निकले इस विशाल चल समारोह में समाजजनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जगह-जगह पालकी की आरती कर जिनवाणी माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।</p>
<p><strong>15 दिनों की साधना का मिला पुण्यफल</strong></p>
<p>समाज की महिलाओं द्वारा पिछले 15 दिनों से जिनवाणी माता की व्यावृत्ति, जीर्णोद्धार, कवर सज्जा एवं विशेष अलंकरण का कार्य किया जा रहा था। श्रुत पंचमी के दिन भव्य रूप से सुसज्जित पालकी में जिनवाणी माता को विराजमान किया गया।</p>
<p>पालकी में विराजमान कराने का प्रथम सौभाग्य एकता विजय जैन एवं ऊषा जैन बिखरोंन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं द्वितीय लाभार्थी के रूप में पूर्णिमा, नरेंद्र, प्रीति, पीयूष एवं उनकी पुत्री प्रियांशी परिवार ने यह पुण्य लाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>महिलाओं ने संभाली शोभायात्रा की अगुवाई</strong></p>
<p>भव्य शोभायात्रा में महिलाएं सरस्वती माता एवं जिनवाणी भक्ति के गीत गाते हुए पालकी को अपने कंधों पर लेकर चल रही थीं। केसरिया साड़ियों में सुसज्जित महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वहीं पुरुष सफेद वस्त्रों में पंचरंगी जैन ध्वज लेकर चल रहे थे।</p>
<p><strong>नगर में गूंजे जिनवाणी के जयकारे</strong></p>
<p>शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई महेश्वर फाटे तक पहुंची। ढोलक और वाद्य यंत्रों की मधुर थाप पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए। पूरे मार्ग में जिनवाणी माता के जयकारों से वातावरण धर्ममय बना रहा।</p>
<p><strong>अभिषेक एवं शांतिधारा का हुआ आयोजन</strong></p>
<p>शोभायात्रा के पुनः मंदिर पहुंचने पर भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। शांतिधारा का लाभ पूर्विका-अभिषेक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। पूजन विधान महेश जैन एवं पंडित नितिन जैन के मार्गदर्शन में सम्पन्न कराया गया।</p>
<p><strong>श्रुत पंचमी ज्ञान और स्वाध्याय का पर्व</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रुत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह जैन समाज का अनूठा पर्व है, जिसमें भौतिक उत्सव या खान-पान की अपेक्षा ज्ञान, स्वाध्याय और आत्मचिंतन को महत्व दिया जाता है।</p>
<p>ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली द्वारा रचित जैन धर्म के महान ग्रंथ षट्खण्डागम की रचना पूर्ण हुई थी। तीर्थंकर भगवान की दिव्यध्वनि को गणधरों ने ग्रहण कर लिपिबद्ध किया, जिसके माध्यम से आज भी जिनवाणी का अमूल्य ज्ञान समाज तक पहुंच रहा है।</p>
<p><strong>नारी शक्ति की रही विशेष भूमिका</strong></p>
<p>समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान एवं मीडिया प्रभारी यश जैन ने बताया कि इस वर्ष के आयोजन में महिला शक्ति की भूमिका विशेष रूप से प्रेरणादायी रही। बड़ी संख्या में महिलाओं ने आयोजन की तैयारियों से लेकर शोभायात्रा तक सक्रिय सहभागिता निभाई।</p>
<p>उन्होंने मुनि सेवा समिति, पुलिस प्रशासन एवं सभी समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से श्रुत पंचमी महापर्व अत्यंत सफल एवं भव्य रूप में सम्पन्न हुआ।</p>
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