<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Jinvani Present श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/jinvani-present-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sun, 22 Jun 2025 13:09:54 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Jinvani Present श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>हित मीत प्रिय वचन बोलो, वाणी में मिठास घोलो: धरियावद में धर्मसभा में बही ज्ञानगंगा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/speak_sweet_words_to_your_friend_add_sweetness_to_your_speech/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/speak_sweet_words_to_your_friend_add_sweetness_to_your_speech/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 13:09:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chandra Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Pulak Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Anand Auditorium]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Foot Washing]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jinvani Present श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Chandraprabha Garden Complex]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य चंद्र सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज जी]]></category>
		<category><![CDATA[आनंद सभागार]]></category>
		<category><![CDATA[जिनवाणी भेंट]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पाद प्रक्षालन]]></category>
		<category><![CDATA[श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=83506</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने धरियावद मंगल प्रवेश के दूसरे दिन शनिवार को श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में धर्मसभा में प्रकट किए। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन मौजूद रहे। धरियावद से पढ़िए, यह खबर&#8230; धरियावद। नारकी, तिर्यंच, देवता और मनुष्य सभी को तन प्राप्त होता है, किन्तु तन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने धरियावद मंगल प्रवेश के दूसरे दिन शनिवार को श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में धर्मसभा में प्रकट किए। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> नारकी, तिर्यंच, देवता और मनुष्य सभी को तन प्राप्त होता है, किन्तु तन और मन सिर्फ मनुष्य को ही मिलता है। मनुष्य मन से पवित्र हो सकता है। यह विचार आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने धरियावद मंगल प्रवेश के दूसरे दिन शनिवार को श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में धर्मसभा में प्रकट किए। उन्होंने कहा कि कंकर से शंकर, पशु से परमेश्वर, नर से नारायण आदि बनने की क्षमता सिर्फ मनुष्य में ही होती है परंतु, यह सब अगर मनुष्य नहीं बन सके तो कम से कम सच्चे इंसान बनने का पुरुषार्थ तो सब मनुष्य को अवश्य करना चाहिए। प्रकृति ने एक कला अन्य जीवों के अलावा सिर्फ मनुष्यों को ही दी है। वह बोलने की कला है। यह सिर्फ मनुष्यों को प्राप्त होती है। परंतु यह विचारणीय है कि क्या बोलना है, कब बोलना है और कैसे बोलना है।</p>
<p>यह सब जिंदगी भर बड़बड़ाते रहने के बावजूद भी कई मनुष्य बोलना नहीं सीख पाते हैं। मनुष्य के शरीर में कान, आंख, नाक, हाथ और पैर सभी अंग दो-दो दिए गए हैं। मगर इन दोनों का काम एक ही होता है। शरीर में एक अंग ऐसा है जो एक ही है लेकिन काम दो करता है। वह है जिव्हा (जीभ)। यह चखना और बकना, दो काम करती है। विद्वान और मनीषी कहते हैं कि हमें भाषा समिति का पालन करते हुए सुनना ज्यादा और बोलना कम चाहिए, पर हो उलटा रहा है। मनुष्य बोलते ज्यादा और सुनते कम हैं। क्या बोलना है, कब बोलना है और कैसे बोलना है? अगर यह सब नहीं आता है तो जानवर की तरह मौन (चुप) रहना सीख लेना चाहिए।</p>
<p><strong>वाणी में मिठास घोलना नहीं भूलना चाहिए</strong></p>
<p>आचार्य श्री पुलक सागर जी ने प्रवचन सभा में कहा कि चाय में चीनी डालना भूल जाएं, तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। मगर वाणी में मिठास घोलना नहीं भूलना चाहिए। मीठा खाओ या न खाओ, कोई बात नहीं पर अपनी वाणी में मिठास जरूर घोलें। मिठाई तो हर बार मीठी बनती है, लेकिन इस बार व्यवहार और वाणी को भी मीठा बनाएं। वाणी में बाण नहीं वीणा की मधुर झंकार बरसनी चाहिए।</p>
<p><strong>वाणी मरने के बाद भी अमर रहती है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने एक उक्ति सुनाते हुए कहा कि अगर बोलेगा भाभी काणी तो मिलेगा छाछ में पाणी और अगर बोलोगे भाभी अच्छी, तो मिलेगी पीने में लस्सी। उन्होंने कहा कि जीवन में 20 प्रतिशत महत्व सुंदरता का तो 80 प्रतिशत बोलने का होता है। मीठा बोलने वालों की वाणी मरने के बाद भी अमर रहती है और लोगों के दिलों में वास करती है।</p>
<p><strong>अपनी जुबान पर नियंत्रण रखे</strong></p>
<p>पुलक सागर जी महाराज ने आगे कहा कि जुबान को संभालना चाहिए। घोड़े की जुबान पर लगाम होती है, लेकिन मनुष्य की जुबान पर नहीं होती है। गाली का जवाब गोली से, ईंट का जवाब पत्थर से, चांटे का जवाब घूंसे से नहीं देना चाहिए। अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना चाहिए। घर की उलझनों को मिटाना है तो अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर परिवार एवं समाज में व्यवहार बनाने चाहिए।</p>
<p><strong>हमेशा हल्के मूड में रहें</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि वह धरियावद में जुड़े हुए को तोड़ने नहीं बल्कि टूटे हुए को जोड़ने आए हैं। वह परिवार और समाज की एकता पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आभूषण, कपड़े, अच्छे प्रसाधन से जीवन सुंदर नहीं होता है। चाय में चीनी डालना भले ही भूल जाएं, लेकिन वाणी में मिठास घोलना नहीं भूलना चाहिए। आज के युग में डायबिटीज शक्कर से नहीं बल्कि वाणी में टक्कर से बढ़ रही है। हमेशा हल्के मूड में रहें, ज्यादा सीरियस नहीं बनना चाहिए।</p>
<p><strong>धर्म से दूर हो रहे युवा -आचार्य चंद्र सागर जी </strong></p>
<p>धर्मसभा में मौजूद आचार्य श्री चंद्र सागर जी महाराज ने कहा कि आज के युग में मंदिर नव निर्माण और जीर्णाेद्धार के काम तो नित नए देखने को मिल रहे हैं, पर मंदिरों की देखभाल, पूजा-पाठ, दर्शन-स्तुति आदि करने वालों में ज्यादातर बुजुर्ग और वृद्ध ही दिखाई देते हैं। कहीं-कहीं तो मंदिर पुजारी के भरोसे ही छोड़ दिए जाते हैं जो पूजा करके चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में युवा वर्ग धर्म से दूर होता जा रहा है। जीवन में धन संचय कमाना, खाना और जोड़कर रखने की प्रवृत्ति चल पड़ी है। यही युवाओं का लक्ष्य बन कर रह गया है। इन सबका प्रमुख कारण लौकिक शिक्षा में होड़ा-होड़ी है। इससे युवा विदेश की ओर भाग कर अपने धर्म एवं संस्कृति से दूर होता चला जा रहा है।</p>
<p><strong>वर्षायोग के बाद 4 महीने धरियावद को देने का निवेदन</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि प्राचीन समय में आश्रम और गुरुकुल में सभी तरह के संस्कारों युक्त धार्मिक और लौकिक शिक्षा प्रदान की जाती थी। इसमें पुरुष वर्ग को 72 कलाओं का और स्त्री वर्ग को 64 कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता था। धर्मसभा में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन ने आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज को आगामी वर्षायोग के बाद 4 महीने धरियावद को देने का निवेदन किया। धर्मसभा में दोनों आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य महेंद्र कुमार-अनिता देवी चंपावत (अरिहंत शिक्षण संस्थान) परिवार को मिला। भींडर से आए दिंगबर जैन समाज के सदस्यों ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर भिंडर की ओर विहार करने की विनती की। इसके बाद दोपहर में पुलक मंच एवं महिला जागृति मंच गठन की बैठक और सायंकाल में आनंद यात्रा, आरती, गुरुभक्ति का आयोजन हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/speak_sweet_words_to_your_friend_add_sweetness_to_your_speech/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
