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	<title>Jhumri Telaiya &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>जीवन को ऐसा उपवन बनाओ जो सदा महकता रहे. जैन संत’मुनि विशल्यसागर जी’</title>
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		<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 06:35:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[झुमरीतिलैया कोडरमा. कोडरमा स्थित श्री दिगम्बर जैन नया मंदिर जी में विराजित परम पूज्य राजकीय अतिथि वाक केशरी जैन मुनि 108 विशल्य सागर जी मुनिराज का कहना है कि खिलें हुए फूलों को सभी पसंद करते ह़ै मुरझाये हुए को कोई पसंद नहीं करता और उन्हें अलग कर देता है। अपने जीवन को ऐसा उपवन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>झुमरीतिलैया कोडरमा.</strong> कोडरमा स्थित श्री दिगम्बर जैन नया मंदिर जी में विराजित परम पूज्य राजकीय अतिथि वाक केशरी जैन मुनि 108 विशल्य सागर जी मुनिराज का कहना है कि खिलें हुए फूलों को सभी पसंद करते ह़ै मुरझाये हुए को कोई पसंद नहीं करता और उन्हें अलग कर देता है। अपने जीवन को ऐसा उपवन बनाओ जो सदा महकता रहे। अन्य उपवन तो मुरझा जाते है लेकिन जीवन का उपवन सदा खिला रहना चाहिए। अपनी प्रवचन श्रृखंला में मुनिश्री ने कहा कि संत पुरुषों ,महापुरुषों के जीवन का उपवन सदा महकता रहा ,सदा खिला रहा। उन्हीं के जीवन के उपवन की महक चारों ओर वातावरण को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखे हुए है। यदि इस भव की यात्रा तुम्हें करनी है तो अपने उपवन को महकाऐं ,खिलाएं।</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जो जितना भक्ति में उछलता है वही उतनी ही ऊँचाई तक जाता है। भक्ति करने का रस अलग है। जिनशासन की प्रभावना कितने भी रुपों में कर सकते हैं। भक्ति के अनेकों रुप हैं। यह वीणा बजाकर, वाद्य बजाकर, ध्यान लगाकर कैसे भी की जा सकती है। भाक्ति की भाषा अन्तरंग की निर्मलता है। भाक्ति मस्ती में नहीं ,मस्त होकर की जाती है। उथले बैठोगे तो कोई आनंद नही आएगा। मन लगा कर बैठेगो तो आनंद आएगा।</p>
<p>भाक्ति से ही पुण्य का संचय होता है। भाक्ति से निधात्ति ,निकाचित कर्म नष्ट हो जाते है। मुनिश्री ने कहा कि महान कार्य करने वाला ही महान पुरुष होता है। पैसों की, विचारों की, शब्दों की कृपणता नहीं होनी चाहिए। जहाँ ये कृपणता आ गई वह उपवन नहीं खिलता। सबसे बड़ा कंगाल वही है जिसके पास वचनों की कृपणता है।</p>
<p>किसी को कुछ दे पाओं य न दे पाओ लेकिन अच्छे विचार विचार जरूर दे देना क्योंकि अच्छे विचार वाला ही महापुरुष बनता है। शुभ विचारों के द्वारा ही शुभ कार्य में प्रगति होती है। इस अवसर पर मंगलाचरण संघस्थ अलका दीदी, भारती दीदी ने किया। इस अवसर पर विशेष रूप से समाज मे अध्यक्ष प्रदीप पांड्या, मंत्री ललित सेठी, चातुर्मास संयोजक सुरेन्द काला के साथ बहुत से भक्त उपस्थित थे। <strong>मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, नवीन जैन</strong></p>
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		<title>जोड़ो मत, छोड़ो और जोड़ो तो बेजोड़ जोड़ो- मुनि श्री विशल्यसागर महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Sep 2022 14:43:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[झुमरीतिलैया. राजकुमार अजमेरा। जैन मंदिर में विराजमान जैन संत श्रमण मुनि श्री 108 विशल्यसागर जी गुरुदेव ने धर्म सभा में अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे सुंदर विचारों से,सुंदर आचारण और उससे जीवन सुंदर बनता है और यही सुंदर जीवन ही एक दिन परमात्मा के नजदीक ले जाता है। बूंद-बूंद से घड़ा भर जाता है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>झुमरीतिलैया. राजकुमार अजमेरा।</strong> जैन मंदिर में विराजमान जैन संत श्रमण मुनि श्री 108 विशल्यसागर जी गुरुदेव ने धर्म सभा में अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे सुंदर विचारों से,सुंदर आचारण और उससे जीवन सुंदर बनता है और यही सुंदर जीवन ही एक दिन परमात्मा के नजदीक ले जाता है। बूंद-बूंद से घड़ा भर जाता है। एक-एक मोती को जब धागा में पिरोते है तो वह भी माला बन जाती है।</p>
<p>एक-एक ईंट लगाते -लगाते ईमारत खड़ी हो जाती है। आचार्य ने कहा कि जीवन के अच्छे गुणों को एक सूत्र में पिरोएं तो जीवन आगम बन जाता है। जोड़ो मत, छोड़ो और जोड़ो तो बेजोड़ जोड़ो। जीवन एक किताब है। उसमें देखो कि क्या &#8211; क्या लिखा है। जो अच्छा है तो उसे प्रिंट करा लो, जिसे हर कोई पढ़ना पसंद करे। जिंदगी की इतनी अच्छी किताब बनाओ कि कितने ही लोग उससे खिताब पा करके, जीवन की किताब तैयार कर लें।</p>
<p>हमारे अपने पूज्य पुरुषों ने अपने जीवन में सागर में गागर भरा और महान से महान कार्य किए। हमारे तीर्थंकरों ने अपने जीवन में उस व्यकत्व को प्राप्त किया, जिसे गणधरों ने पढ़ा और गणधरों की जीवन की किताब इतनी महान थी, जिससे मुनिराजों ने किताब लिख ली और आज हम भी उनकी किताब से अपनी किताब ठीक करें। सुनो, गुनो, चुनो और अपने जीवन में अच्छा &#8211; अच्छा बुनो।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि शरीर वियोग धर्म है, चेतन संयोग धर्म है, जीवन शोक धर्म है। लहराकर चलना यानि वक्र गति से चलना, अब ऋजु गति से चलना है। गन्ने की गांठ कोई रस नहीं देती लेकिन अगर उसको बो दो तो उसमें रस ही रस निकलता है। हम भी अपने जीवन को ऐसा बनाएं। कार्यक्रम में विशेष रूप से संघस्थ अलका दीदी, भारती दीदी के साथ समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे। यह जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा और नवीन जैन ने दी।</p>
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